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बुधवार, 12 जून 2013

बक्सी सुधीर प्रसाद स्मृति यवनिका सम्मान



यवनिका 1993 से सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय रही है. वर्ष 1994 से 'यवनिका सम्मान ' की शुरुआत की गयी ...हालाँकि उसके बाद कई साल गुज़र गए ...अब तक जिन्हें सम्मानित किया गया है वो है ...राधा चरण सिंह (खेल), प्रो श्याम मोहन अस्थाना (रंगमंच ), पंडित देव नंदन मिश्र (शास्त्रीय संगीत ), डॉ के. बी. सहाय (कलाक्षेत्र-चिकित्सा व् समाज सेवा ), श्रीमती उर्मिला कॉल (साहित्य जगत ) .

वर्ष 2010 से इसे फिर से शुरू किया गया, जिसके तहत वैसे वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने समाज को एक सकारात्मक दिशा दी है. सम्मान में एक प्रतीक चिन्ह, शाल, प्रशस्ति -पत्र दिया जाता रहा है. वर्ष 2012 से सम्मान का नाम 'बक्सी सुधीर प्रसाद स्मृति यवनिका सम्मान' गया . साथ ही सम्मान में 5001 रुपये की धनराशि भी जोड़ी गयी, जिसे 'बक्सी परिवार' वहन करता है .... ज्ञात हो कि 'बक्सी जी' यवनिका के संस्थापक सदस्य व् मुख्य संरक्षक थे , जिनका देहांत २०१२ के अगस्त माह में हो गया .

पिछले साल यह सम्मान 'बक्सी जी' की जन्मतिथि 23 दिसंबर को 'श्री सियाराम निर्भय जी' को दिया गया..'निर्भय जी' को उनके सामाजिक- साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया...आर्य समाज से जुड़े निर्भय जी ने 1974 के जे. पी. आन्दोलन में भी योगदान दिया था ..उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों को जागरूक किया ...

"सच कहना अगर बगावत है तो समझो की हम बागी है'' इनकी प्रसिद्द कविता थी....तत्कालीन सरकार ने इन्हें और इनके लेखन को प्रतिबंधित कर जेल में डाल दिया ..

इस वर्ष भी 'यवनिका सम्मान ' दिया जायेगा...इसमें आप सबो का सहयोग चाहिए..यदि आप 'भोजपुर' में ऐसे बुजुर्गो को जानते है जिन्होंने अपने कार्यों से समाज को एक दिशा दी हो तो हमें बताये... क्यूंकि किसी ने कहा है-
                                               "मंदिर-ओ -मस्जिद में जाना कोई बात नहीं,
                                            हो बुजूर्गों की क़द्र-ओ- इबादत मगर नमाज़ से पहले" 


.................स्वयम्बरा
http://swayambara.blogspot.in/2013/06/1993.html


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