यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 12 जुलाई 2018

नक्सलमुक्त झारखंड एक गंभीर चुनौती



व्यावहारिकता की कसौटी पर डीजीपी के संकल्प की पड़ताल

रांची । झारखंड के पुलिस कप्तान डीके पांडेय ने एलान किया है कि झारखंड से नक्सलियों का खात्मा करके रहेंगे। उनके मुताबिक राज्य पुलिस नक्सलमुक्त झारखंड अभियान के लिए कमर कस चुकी है। गत दिनों श्री पांडेय ने लातेहार के सीआरपीएफ कैंप में आयोजित पलामू प्रमंडलीय बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि नक्सली सरेंडर करें, नहीं तो पुलिस की गोली से मरने को तैयार रहें। उन्होंने फिर दोहराया कि झारखंड से नक्सलवाद का सफाया जल्द होगा। इस दिशा में पुलिस प्रयत्नशील है। नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। नक्सल आंदोलन की कमर तोड़ने के लिए उन्होंने नक्सलियों के घर व ससुराल की संपत्ति जब्त करने की दिशा में भी कदम उठाया है।
किसी भी समस्या का समाधान समस्या के आसपास ही होता है। झारखंड में यह समस्या क्यों उत्पन्न हुई, कैसे विकराल हुई, इसपर विचार करने की जरूरत है। यह सही है कि राज्य के अधिकांश नक्सली गुट सिर्फ लेवी वसूलने वाले गिरोहों की शक्ल ले चुके हैं। उन्हें मार्क्स, लेनिन या माओं की विचारधारा से कुछ भी लेना-देना नहीं है। जनता के मुद्दों से उन्हें कोई सरोकार नहीं रह गया है। वे जनसमर्थन भी बंदूक के जोर पर ले रहे हैं। फिर भी उनका भंडाफोड़ नहीं हो पा रहा है या उनकी नकेल पूरी तरह नहीं कसी जा पा रही है तो इसका कारण है जनता का विश्यास और जंगल पहाड़ के रास्तों के बारे में सुरक्षा बलों को जानकारी का अभाव। अभियान की सफलता के लिए सूचना तंत्र की मजबूती जरूरी है। साथ ही यह जन समर्थन से ही संभव है। लंबे समय तक पुलिस का आचरण जनता पर वर्दी का रूआब गांठने और उससे कटकर रहने का था। सका जन संपर्क होता भी था तो इलाके के दबंग लोगों से। अब राज्य पुलिस के मुखिया डीके पांडेय इस बात को समझते हुए सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में पब्लिक से बेहतर संबंध बनाने और विशेष तौर ग्रामीण क्षेत्रों में थाना व पुलिस पिकेट में तैनात जवानों का उत्साहवर्धन करने की दिशा में पहल कर रहे हैं। यदि पुलिस जनता का विश्वास जीत सके तो नक्सलवाद ही नहीं संगठित अपराध का पनप पाना असंभव हो जाएगा। श्री पांडेय पुलिस जवानों की समस्याओं के समाधान के प्रति भी गंभीरता से लगे हैं। नि:संदेह श्री पांडेय का यह प्रयास सराहनीय कहा जा सकता है। सूबे में लाल आतंक के खिलाफ शुरू किए गए सुनियोजित महाभियान को सफल बनाने में जुटे हैं। इस दिशा में उनके जज्बे और जुनून की प्रशंसा की जानी चाहिए। वहीं नक्सलियों को समूल नेस्तनाबूद करने की कार्रवाई कितने कारगर तरीके से की जा रही है, इसकी मानिटरिंग भी नियमित रूप से हर स्तर पर किये जाने की जरुरत है। नक्सलियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की सरकारी योजनाओं का कार्यान्वयन ठोस तरीके से हो, इस दिशा में मजबूत इरादों के साथ लगने की आवश्यकता है। साथ ही ग्रामीण विकास योजनाओं का समुचित कार्यान्वयन भी सुनिश्चित हो, ताकि गांवों के भटके युवा समाज की मुख्य धारा से जुड़े रहें। सरकार का मानना है कि झारखंड में नक्सली गतिविधियों के बढ़ने में विकास विरोधी ताकतों का भी समर्थन है। ऐसे में विकास बाधित होता है। सरकार ने 2018 के अंत तक झारखंड से नक्सलवाद खत्म करने का डेडलाइन भी तय किया है। राज्य में अशांति और अराजकता को नियंत्रित करने के लिए अब जरूरी हो गया है कि नक्सलियों की नकेल कसने को सरकार कठोर कार्रवाई करे। इस महाभियान में सीमावर्ती राज्यों, (बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ व बिहार) की सरकारों के साथ वार्ता कर संयुक्त अभियान में सहयोग लेने की आवश्यकता है। क्योंकि हर बड़ी वारदात के बाद नक्सली राज्य की सीमा पार कर पड़ोसी राज्य में शरण ले लेते हैं। स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल होना भी जरूरी है। इसके अभाव में अभियान की सफलता प्रभावित होती है। यह सर्वविदित है कि विकास की गति तेज होने और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से नक्सलियों की धार कुंद होगी। सरकार को नक्सलियों के आर्थिक मददगारों पर भी पैनी नजर रखते हुए ठोस कार्रवाई करना समय की मांग व राज्य की जरुरत है।
 बहरहाल  राज्य को 2018 के अंत तक नक्सलमुक्त बनाने की सरकार व  पुलिस कप्तान की पहल क्या रंग लाती है, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इस दिशा में डीजीपी के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद तो की ही जा सकती है।

बुधवार, 11 जुलाई 2018

निराशा का कारण कुछ और है अमित शाह जी

रांची। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भाजपा के सोशल मीडिया के योद्धाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया का एक ग्रूप मोदी सरकार के खिलाफ अभियान चला रहा है जिसके कारण कार्यकर्ताओं में निराशा है। योद्धा होने का अर्थ ही है कि किसी न किसी के साथ उसका युद्ध  चल रहा है।
शाह कहते हैं सारे चोर इकट्ठे हो गए हैं। अपने राजनीतिक विरोधियों को चोर कहना और स्वयं को खुदाई फौजदार समझना लोकतांत्रिक विचार तो नहीं हो सकता। आरोप तो भाजपा नेताओं पर भी लग रहे हैं। बहुत से सवाल हैं जिनका कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। कटघरे में स्वयं शाह के पुत्र भी खड़े हैं। सत्ता में होने का यह मतलब कत्तई नहीं कि उनके सात खून माफ हैं और उनके खिलाफ कोई जांच नहीं होनी चाहिए।
सोशल मीडिया का जितना बेहतर इस्तेमाल मोदी सरकार कर रही है उतना अबतक किसी ने नहीं किया था। शाह ने सोशल मीडिया के योद्धाओं की एक बड़ी फौज पूरे देश में खड़ी कर रखी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर शाह को चाणक्य और मोदी को अवतार के रूप में पेश कर रहे थे। लेकिन अतिशयोक्ति अलंकार में किए जा रहे दावे आम लोगों के गले के नीचे उतर जाएं यह जरूरी तो नहीं है। वे जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे वह विश्वसनीय नहीं बल्कि आक्रोश बढ़ाने वाला था।  शाह के योद्धाओ के अंदर निराशा है तो इसके दो ही कारण हो सकते हैं-एक तो प्रचार युद्ध में पराजय और दूसरा पार्टी की तरफ से उपेक्षात्मक रवैया।
दूसरा कारण ही निराशा का कारण हो सकता है। शाह और मोदी कार्यकर्ताओं से मिलने और उनकी बात सुनने से परहेज़ करते रहे हैं। वर्ना योद्धाओं ने तो इतनी तलवार भांजी कि उसके कई टुकड़े कर दिए।
विपक्षी दलों के पास सोशल मीडिया की न कोई समझ है न  महत्व का अहसास । सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के खिलाफ कोई संगठित ग्रूप नहीं काम कर रहा है। यह आम जनमानस की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। विरोध के स्वर को सिरे से खारिज करना लोकतांत्रिक रवैया नहीं है। इसे तानाशाही कहते हैं।  भारत जैसे विशाल देश में जब इंदिरा की तानाशाही नहीं चली तो बाकी लोग किस खेत की मूली हैं।
 मोदी सरकार और पार्टी अध्यक्ष को अपने हर कृत्य को सही करार देने की जगह कभी-कभी आत्मनिरीक्षण और आत्मसमीक्षा भी करनी चाहिए। उनसे इस देश की जनता ने जो उम्मीदें लगा रखी थीं उसमें कितना खरे उतरे हैं, इसपर विचार करना चाहिए। अगर चूक हुई है तो उसे स्वीकार करना चाहिए। यह स्वस्थ परंपरा है। भारत की जनता सबकुछ बर्दास्त करती है लेकिन आत्मप्रवंचना नहीं। बड़बोलेपन को वह सुनती रहती है और समय आने पर बता देती है कि उसे यह पसंद नहीं है। यह सही है कि विपक्ष में जातिवादी और क्षेत्रवादी दलों की जमात है लेकिन भाजपा भी तो धार्मिक ध्रुवीकरण में विश्वास करती है। भारत के लोगों को आजादी के बाद अभी तक कोई आदर्श दल नहीं मिला। अपनी दुकान के पकवान को सबसे स्वादिस्ट और सबसे सस्ता तो कोई भी बता सकता है। उपभोक्ता उसे मान ही लें जरूरी नहीं है।

अपराध पर धर्म का मुलम्मा न चढ़ाए मिशनरीज आफ चैरिटी



बच्चों की दुकानदारी कत्तई मानव सेवा नहीं

देवेंद्र गौतम

मिशनरीज और चैरिटी के कोलकाता स्थित मुख्यालय की प्रवक्ता सिस्टर सुनीता कुमार ने हिन्दी दैनिक प्रभात खबर के माध्यम से प्रश्न उठाया है कि विशेष धर्म के लोगों को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है। यह आपराधिक कृत्यों पर धार्मिक आवरण चढ़ाने जैसा प्रयास है। वह शायद भूल गई हैं कि मदर टेरेसा को भारत के लोगों ने मानवता की प्रतिमूर्ति माना और आदर दिया है। उनके प्रति लोगों के मन में कितनी श्रद्धा है सुनीता जी को इसका अंदाजा भी नहीं होगा। मदर टेरेसा की स्थापित की हुई संस्था कटघरे में है तो इससे पूरा देश स्तब्ध है और अफसोस कर रहा है। लेकिन सुनीता जी के वक्तव्य से प्रतीत होता है कि मिशनरीज आफ चैरिटी के मुख्यालय को कलंक के इस टीके से कोई फर्क नहीं पड़ता। संस्था की बदनामी की कोई चिंता नहीं है। रांची में नवजात शिशुओं की दुकानदारी उनके लिए कोई खास बात नहीं है। सिर्फ इतना कह देना कि संस्था इसकी जांच करा रही है, उनकी चिंताओं की अभिव्यक्ति नहीं है। उनकी संस्था की रांची इकाई का नियंत्रण पूरी तरह कोलकाता मुख्यालय से होता है। तो क्या मुख्यालय को यह जानकारी नहीं थी कि रांची में उनकी संस्था के लोग लंबे समय से बच्चे बेचने की दुकान चला रहे हैं। नाबालिग युवतियों को प्रसव के बाद बच्चे को छोड़ जाने के संबंध में बांड भरवाया जा रहा है। अगर कोलकाता मुख्यालय को इतनी भी जानकारी नहीं थी तो यह उसकी प्रशासनिक अक्षमता ही कही जाएगी। ऐसे में तो कोई उनकी संस्था को ही बेच देगा और उन्हें हवा भी नहीं लगेगी। अगर रांची इकाई के कारनामे की अचानक जानकारी मिली तो अपनी संस्था पर लगे बदनुमा दाग को धोने के लिए कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने अपनी रांची इकाई के किसी पदाधिकारी से न पूछताछ की न गलत कार्यों के लिए दंडित किया। अब उनका कहना है कि विशेष धर्म को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। तो क्या विशेष धर्म का होने के नाते उन्हें बच्चों की दुकानदारी की पूरी छूट दे दी जाए। इसे मानव सेवा का हिस्सा मान लिया जाए।
सुनीता कुमार का सवाल है कि क्या दान लेना या गरीबों की सेवा करना अपराध है। बिल्कुल नहीं। यह अपराध नहीं है। समाज की सेवा समाज के सहयोग से ही की जाती है। लेकिन विदेशी फंड लेने का एक नियम है। इसका पालन सभी के लिए अनिवार्य है। चाहे वह किसी मज़हब से जुड़ा हो। सरकार ने उनके खाते इसलिए नहीं सील किए कि वे विशेष धर्म के हैं बल्कि इसलिए कि एफसीआरआई एक्ट की अवहेलना किए जाने की बात जांच के क्रम में सामने आई है। मानव सेवा के नाम पर कुछ भी करने की छूट तो नहीं दी जा सकती। कल को किसी आतंकवादी पर कार्रवाई हो और मुसलमान कहने लगें कि मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है तो इसका क्या मतलब होगा। अपराध की कोई जाति नहीं होती। कोई धर्म नहीं होता। हाल में इसी झारखंड में आदिवासी परंपरा के नाम पर एक विशेष धर्म के लोग नक्सलियों के सहयोग से समानांतर सरकार चलाने का प्रयास कर रहे थे। तो क्या उन्हें ऐसा करने दिया जाना चाहिए था क्योंकि वे आदिवासी न सही विशेष धर्म के थे। मिशनरीज आफ चैरिटी अगर सचमुच पाक साफ है और मानव सेवा को समर्पित है तो रांची के मामले में उसे शिकायत करने की जगह जांच एजेंसियों का सहयोग करना चाङिए।

किसानों को मिलेगी मेहनत और पसीने की पूरी कीमतः सीएम


1.11 लाख किसानों के बैंक खाते में दी 882.74 करोड़ फसल बीमा राशि 


शाजापुर जिले को मिली 117 करोड़ से अधिक लागत के निर्माण कार्यों की सौगात 

भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज शाजापुर जिले के कालापीपल में फसल बीमा राशि वितरण समारोह में कहा कि मैं किसानों का दर्द समझता हूँ। किसान अलग-अलग मौसम की मार झेलते हुए खेतों में मेहनत कर पसीना बहाता है। उन्होंने कहा कि मैं किसानों को उनकी मेहनत और पसीने की पूरी कीमत दूँगा। किसानों की मेहनत को व्यर्थ नहीं जाने दूँगा।
महत्वपूर्ण घोषणाएँ
  • कालापीपल में आईटीआई खोला जायेगा।
  • अरनियाकलां में नवीन महाविद्यालय प्रारंभ किया जायेगा।
  • पोलायकलां के सालीग्राम तोमर महाविद्यालय में अगले सत्र से विज्ञान की कक्षाएँ प्रारंभ की जायेगी।
  • कृषि उपज मण्डी में कृषक विश्राम-गृह के लिये एक करोड़ रुपये दिये जायेंगे।
  • पानखेड़ी एवं कालापीपल में दीनदयाल पार्क बनाने के लिये 2 करोड़ रुपये दिये जायेंगे।
  • हिरणों से फसल को हो रहे नुकसान से बचाने के लिये कार्य-योजना बनाई जायेगी।
श्री चौहान ने समारोह में राजगढ़ और शाजापुर जिले के एक लाख 11 हजार किसानों के बैंक खातों में खरीफ वर्ष 2017 की 882 करोड़ 74 लाख रुपये फसल बीमा राशि ई-पेमेंट से ट्रांसफर की। उन्होंने किसानों को बीमा दावा राशि के प्रमाण-पत्र भी वितरित किये। श्री चौहान ने शाजापुर जिले के 117 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 22 निर्माण कार्यों का ई-शिलान्यास और ई-लोकार्पण भी किया।
किसानों का बकाया बिजली बिल हुआ माफ
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसानों के विशाल जन-समूह को बताया कि बिजली बिल माफी योजना में किसानों का पुराना सभी बकाया बिजली बिल अब शून्य कर दिया गया है। अब किसानों को हर महीने 200 रुपये तक वास्तविक बिजली का बिल भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा कि आगामी 5 वर्ष के विकास की कार्य-योजना बनाने के लिये किसानों सहित समाज के सभी वर्गों से सुझाव आमंत्रित किये जायेंगे। श्री चौहान ने इस मौके पर मुख्यमंत्री जन-कल्याण (संबल) योजना, सरल बिल योजना, बिजली बिल माफी योजना, भावांतर भुगतान योजना और कृषक समृद्धि योजना की भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान भाई खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने और अपने बच्चों को कृषि आधारित उद्योग स्थापित करने की दिशा में अग्रसर हों, राज्य सरकार हर कदम पर उनका साथ देगी।
मालवांचल की फसलों का पूरा पेटर्न बदल जायेगा
श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा के पानी को क्षिप्रा नदी में डालने का असंभव कार्य राज्य सरकार ने संभव कर दिखाया है। देवास, उज्जैन, शाजापुर और आगर जिलों में सिंचाई के लिये नर्मदा-कालीसिंध पार्ट-1 और पार्ट-2 तथा नर्मदा-मालवा-गंभीर पार्ट-1 और पार्ट-2 तथा नर्मदा-मालवा-क्षिप्रा पार्ट-2 लिंक परियोजनाओं से सिंचाई की विस्तृत कार्य-योजना तैयार की गई है। योजना से विभिन्न चरणों में मालवांचल के 14 लाख 20 हजार एकड़ में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि सिंचाई की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित होने से अगले 5 साल में मालवांचल में फसलों का पूरा पेटर्न ही बदल जायेगा।
इस मौके पर प्रभारी मंत्री श्री दीपक जोशी, सांसद श्री मनोहर ऊँटवाल और श्री रोड़मल नागर, विधायक श्री इंदर सिंह परमार, श्री जसवंत सिंह हाड़ा और श्री अरुण भीमावद, ऊर्जा विकास निगम के अध्यक्ष श्री विजेन्द्र सिसोदिया, जन-अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पाण्डे, अन्य जन-प्रतिनिधि, कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पी.सी. मीणा और बड़ी संख्या में किसान बन्धु मौजूद थे।

स्वयं सहायता समूहों से सीधे संवाद करेंगे पीएम मोदी



नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 12 जुलाई, 2018 को, सुबह 9 बजकर 30 मिनट पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) एवं डीडीयू-जीकेवाई तथा आरएसईटीआई के तहत स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के साथ सीधे संवाद करेंगे। इस संवाद से प्रधानमंत्री को सीधे स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों से डीएवाई-एनआरएलएम के तहत उनके द्वारा आरंभ किए गए विभिन्न कार्यकलापों तथा इसने उनके जीवन को किस प्रकार प्रभावित किया है, यह जानने का अवसर मिलने की उम्मीद है। इस संवाद का दूरदर्शन द्वारा सीधा प्रसारण दिखाया जाएगा एवं एनआईसी अपने नेटवर्क के माध्यम से इसे वेबकास्ट करेगा।
चुने हुए कुछ लाभार्थियों में बिहार का शराब विरोधी आंदोलन, मक्का मूल्य श्रृंखला एवं विपणन, छत्तीसगढ़ की ईट निर्माण इकाई, झारखण्ड का बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट सखी एवं इमली मूल्य श्रृंखला तथा विपणन, मध्य प्रदेश का सेनेटरी नैपकिन का विनिर्माण एवं विपणन तथा डीडीयू-जीकेवाई, राजस्थान का सोलर पैनल एवं लैम्प का विनिर्माण एवं विपणन, महाराष्ट्र का पशु सखी एवं डीडीयू-जीकेवाई, जैसे स्वयं सहायता समूह शामिल हैं जो प्रत्‍यक्ष संवाद में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्‍त, तमिलनाडु के दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए युक्तियां, तेलंगाना के एसएचजी के निर्माण के लिए बाहरी समुदाय संसाधन व्यक्ति, जम्मू एवं कश्मीर के डेरी फॉर्म तथा गुजरात के नीम बीजों का संग्रह एवं विपणन भी संवाद का हिस्‍सा होंगे।
दीनदयाल अंत्योदय योजना-एनआरएलएम महिला सशक्तिकरण के लिए सबसे बड़े संस्थागत मंच के रूप में उभरा है। इस मिशन ने अब 29 राज्यों एवं 5 केंद्र शासित राज्यों में 600 जिलों में फैले प्रखण्डों (ब्लॉक) में कार्यान्वयन आरंभ कर दिया है। मई, 2018 तक  45 लाख स्वयं सहायता समूहों में 5 करोड़ से अधिक महिलाओं को संगठित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 2.48 लाख ग्रामीण संगठनों तथा 20 हजार क्लस्टर स्तर संघों का भी उन्ययन किया गया है।



ग्राहकों से वसूले 3 करोड़, सरकारी खजाने में नहीं कराया जमा, गिरफ्तार


नई दिल्ली। टैक्स चोरी के आरोप में एक कंपनी के निदेशक दबोचे गए। सीजीएसटी उत्तरी दिल्ली आयुक्तालय के अधिकारियों ने सेवा कर (सर्विस टैक्स) की चोरी करने के कारण एक कंपनी के एक निदेशक को गिरफ्तार कर लिया है। इस कंपनी ने अपने ग्राहकों से सर्विस टैक्स के रूप में 3 करोड़ रुपये से अधिक की राशि इकट्ठी कर ली थी, लेकिन उसने इस रकम को सरकारी खजाने में जमा नहीं कराया था।
वित्त अधिनियम 1994 की धारा 89 के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर वित्त अधिनियम 1994 की धारा 91 के तहत गिरफ्तार करने का अधिकार दिया गया है। इसके साथ ही सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 174 पर भी गौर करने की जरूरत है। इस निदेशक को पटियाला हाउस कोर्ट के माननीय सीएमएम की अदालत में पेश किया गया और उसे 15 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस दिशा में आगे जांच जारी है और चोरी किए गए सेवा कर की रकम में वृद्धि होना भी तय है।

जनसंख्या दिवस पर जनसंख्या स्थिरता पर कार्यशाला


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने किया उद्घाटन

नई दिल्ली। हम जनसंख्या में स्थिरता लाने के मुद्दे को जीवन चक्र संरचना के भीतर लाने पर विचार कर रहे हैं। इस कार्य नीति के एक हिस्से के रूप में, गर्भधारण के समय से बच्चे के बढ़ने के समय तक मंत्रालय के विभिन्न कार्यक्रम गर्भवती माता एवं शिशु की टीकाकरण आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं जो किशोरावस्था के चरण तक एवं और आगे तक जारी रहते हैं। इसके अतिरिक्त, यह विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के जरिए क्रियान्वित की जा रही व्यापक कार्य नीति का भी एक हिस्सा है।’ ये उद्गार केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने आज नए दिल्ली के प्रवासी भारतीय केंद्र में विश्व जनसंख्या दिवस 2018 के अवसर पर ‘जनसंख्या स्थिरीकरणः एक अधिकार एवं जिम्मेदारी’ आधारित कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किए। इस कार्यशाला का आयोजन संयुक्त रूप से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा जनसंख्या स्थिरता कोष द्वारा किया गया।
मंत्री महोदय ने कहा कि यह देश के लिए गर्व की बात है कि हम कुल प्रजनन दर (टीएफआर) में लगातार गिरावट हासिल करने में सक्षम रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2015 के 2.9 के टीएफआर से हम 2018 में 2.2 की टीएफआर दर के निकट पहुंच गए है जिसका अर्थ यह है कि भारत ने इसमें गिरावट की एक अच्छी गति अर्जित कर रखी है।
श्री नड्डा ने कहा कि जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयासों का एक आर्थिक पहलू भी है क्योंकि देश की जनसंख्या का लाभ तभी उठाया जा सकता है जब जनसंख्या स्वस्थ हो। मिशन परिवार विकास कार्यक्रम के हिस्से के रूप में फोकस इस बात पर है कि परिवार नियोजन के विस्तारित होते विकल्प के बारे में जागरूकता पैदा की जाए तथा यह सुनिश्चित की जाए कि सेवाओं तक लोगों की सुगमता से पहुंच हासिल हो।
समारोह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव सुश्री प्रीति सुडान, एएस एवं एमडी श्री मनोज झालानी, जनसंख्या स्थिरता कोष की कार्यकारी निदेशक श्रीमती प्रीतिनाथ एवं मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा विकास साझेदारों के प्रतिनिधि शामिल थे।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...