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शुक्रवार, 22 मार्च 2024

भारी पड़ सकती है केजरीवाल की गिरफ्तारी

 ईडी ने जिन आरोपों के आधार पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया है उनकी पुष्टि के लिए अभी तक न्यायपालिका के समक्ष कोई प्रमाण पेश नहीं कर पाई है। व्यावसायिक लाभ देकर चंदा प्राप्त करने का उनपर 100 करोड़ का आरोप एक सरकारी गवाह के बयान के आधार पर है जबकि भाजपा पर दर्जनों कंपनियों को जांच एजेंसियों द्वारा डरा-धमकाकर हजारों करोड़ का इलेक्टोरल बांड प्राप्त करने के सारे सबूत मौजूद सामने आ चुके हैं। चुनाव आयोग उन्हें अपनी वेबसाइट पर डाल चुका है। मामला पब्लिक डोमेन में आ चुका है। तो क्या उनके आधार पर दर्ज होने वाली याचिकाओं पर भी ईडी कार्रवाई करेगी? सत्ता के शीर्ष पदों पर बैठे हुए भाजपा के नेताओं को भी गिरफ्तार करेगी?

सवाल है कि यदि आम आदमी पार्टी द्वारा शराब कंपनियों को लाभ पहुचाने के बाद चंदा लेने की बात सत्य भी है (फिलहाल सरकारी गवाह के बयान के अलावा कोई साक्ष्य नहीं है) तो किसी को डरा-धमकाकर जबरन चंदा वसूल करना तो इससे कहीं बड़ा अपराध है। सरकारी संस्थाएं जिस तरह सरकार के हाथों की कठपुतली बनी दिखाई देती हैं उसमें वह क्या करेंगी कहना कठिन है। सुप्रीम कोर्ट भी इस तरह की मनमानी पर कितना अंकुश लगा सकेगी भविष्य के गर्भ में है। लेकिन इतना निश्चित है कि दिल्ली, पंजाब और गुजरात समेत पूरे देश की जनता सरकार की तिकड़मों के च्छी तरह समझ रही है और उसका फैसला चुनाव में सामने आएगा।

ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय जनता पार्टी अभी तक जनता के मिजाज को समझ नहीं पाई है। उसे भेड़ बकरियों का दर्जा देती है जिसे जब जिधर चाहे घुमा लेगी। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान शाहीनबाग़ आंदोलन के बहाने दिल्ली की जनता के सांप्रदायीकरण की कोशिशों में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी गई। भाजपा नेताओं के बीच जहरीले बयानबाजियों की होड़ सी लग गई। लेकिन नतीजा क्या निकला? आम आदमी पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ तीसरी बार सत्ता में वापस लौट आई। दिल्ली के मतदाताओं ने भाजपा नेताओं के भगवाकरण के प्रयासों को धत्ता बता दिया।

दिल्ली की जनता इतनी जागरुक है कि विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को वोट दिया और लोकसभा चुनाव में जीत का तोहफा भाजपा की झोली में डाल दिया। उसका मानना है कि लोकसभा में कुछ सीटें लेकर भी केजरीवाल क्या कर पाएंगे। फिर भाजपा लोकसभा चुनाव के मौके पर आम आदमी पार्टी से इतना भयभीत क्यों हो गई कि उसके सभी प्रमुख नेताओं को बिना किसी पुख्ता प्रमाण के जेल में डलवा दिया और अब एक जनता के चुने हुए मुख्यमंत्री को पकड़ लिया? क्या आप और कांग्रेस का गठबंधन उसके लिए इतना भारी पड़ रहा था? या इसलिए कि उस समय के मुकाबले आम आदमी पार्टी का ज्यादा विस्तार हो चुका है? अब वह तीन-चार राज्यों में प्रभाव डालने की स्थिति में आ चुकी है? क्या इन्हीं तिकड़मों के जरिए भाजपा चार सौ पार करना चाहती है?

फिलहाल भाजपा सरकार की मनमानी और तिकड़मबाजी पर सुप्रीम कोर्ट अंकुश लगाएगी या भारत की 142 करोड़ जनता या फिर सबकुछ इसी तरह चलता रहेगा आने वाला समय बताएगा।

-देवेंद्र गौतम

गुरुवार, 11 जुलाई 2019

भ्रष्ट अधिकारियों पर अंकुश लगाने की मांग


चक्रधरपुर। नगर विकास समिति चक्रधरपुर के अध्यक्ष पवन शंकर पांडे ने मुख्यमंत्र को पत्र लिखकर पश्चिमी सिंहभूम जिले के विभिन्न विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार में लिप्त पदाधिकारियों पर अंकुश लगाने की मांग किया है ।उन्होंने कहा कि जिले को एक भ्रष्टाचारी पदाधिकारी से मुक्त मिल गई भूमि संरक्षण पदाधिकारी जयप्रकाश तिवारी जो भूमि संरक्षण विभाग में भ्रष्टाचार का खुला खेल खेल रहे थे ।40 प्रतिशत कमीशन लेने के पश्चात ही तालाब खुदाई करने वाले लाभुक समिति को पैसा दे रहे थे ।इस के आतंक से तालाब खुदाई करने वाले लाभुक  समिति के लोग काफी परेशान थे  अब उन्हें कुछ राहत मिली होगी। उन्होंने कहा कि डीप बोरिंग में भी वह बड़े पैमाने पर कमीशन लेते थे इस जिले में ऐसे और भी कई पदाधिकारी है जो लूट मचाए हुए हैं उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि इस जिले में भ्रष्टाचार का खेल खत्म हो सके उन्होंने कहा कि भूमि संरक्षण विभाग में ही पद स्थापित पर्यवेक्षक राज देवदास जो वर्षो से इसी जिले में पदस्थापित है कई जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी बदले लेकिन पर्यवेक्षक राज देवदास का स्थान्तरण नहीं हुआ चुनाव के समय भी चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश था कि 3 वर्षों से अधिक रहे हुए पदाधिकारी का तबादला किया जाए।

मंगलवार, 9 जुलाई 2019

भ्रष्टाचार के खिलाफ सीएम को लिखा पत्र


चक्रधरपुर। सामाजिक कार्यकर्ता पवन शंकर पांडे ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पश्चिमी सिंहभूम जिले में विभिन्न विभागों में हो रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की मांग की ।उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा पूर्ण प्रयास किया जा रहा है कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन हो उनके द्वारा विकास की गति युद्ध स्तर पर रहे माननीय मुख्यमंत्री द्वारा जनहित के लिए कई कल्याणकारी  योजनाएं भी चलाई जा रही है परंतु ऐसा नहीं हो रहा है इस पर चिंतन करने की आवश्यकता है ।इस जिले में  पदस्थापित 80% पदाधिकारी भ्रष्ट है जिस की गंभीरता से जांच होनी चाहिए यह सभी विभिन्न विभागों के पदाधिकारी इस जिले को लूट का चारागाह बना रखे हैं इन सबों की संपत्ति की भी जांच होना बहुत जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके और जल्द हो रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके।

मंगलवार, 14 मई 2019

गबन और फर्जीवाड़ा के आरोपी ने ली प्रोन्नति



बेेटे को भी नियुक्ति दिलाने का तलाशा रास्ता

रांची। झारखंड राज्य के गठन के बाद बिहार के कई दाग़ी कर्मी झारखंड कैडर में अपनी नाम डलवाकर विभाग की आंखों में धूल झोकने में सफल रहे हैं। उनके खिलाफ जांच तो चलती रही लेकिन उसकी गति धीमी हो गई। झारखंड राज्य अनुसूचित जाति निगम में एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है। वहां एक क्षेत्रीय पदाधिकारी हैं सुनील कुमार। 2007-08 में वे बिहार राज्य अनुसूचित जाति निगम में सहायक परियोजना पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थे। उनपर अमानत में ख़यानत और गलत ढंग से बहाली का आरोप गठित हुआ। विभागीय राशि के गबन फर्जी शैक्षणिक और आयु प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति लेने के आरोपों को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। निगरानी विभाग की जांच शुरू हुई। इस बीच वे कैडर परिवर्तित कर झारखंड  गए। कुछ समय तक वे कैडर विभाजन की आड़ में बचे रहे। फिर प्रबंध निदेशक से सांठगांठ कर प्रोन्नति लेकर क्षेक्षीय पदाधिकारी भी बन गए। प्रबंध निदेशक ने प्रोन्नति देने और उनके बेटे को भी नियुक्ति दिलाने से पूर्व कल्याण विभाग की सचिव हिमानी पांडे की अनुमति लेने की भ जरूरत नहीं समझी। जब सचिव के संज्ञान में मामला आया तो सबसे पहले सुनील कुमार के बेटे की रद्द कर दी और सुनील कुमार के खिलाफ अप्रैल 2019 में त्रिस्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी। विभागीय सूत्रों ने बताया कि अब आटसोर्सिंग की आड़ में सुनील कुमार के बेटे सहित पांच लोगों को परियोजना पदाधिकारी के रूप में बहाल करने की पूरी तैयारी कर ल गई है। निगरानी विभाग ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा। स्पष्टीकरण दिया भी गया लेकिन मामले को अभी तक न्यायपालिका में नहीं ले जाया गया।

झारखंड भ्रष्टाचार निरोधक मंच के अध्यक्ष कृष्ण कुमार सिंह ने कल्याण विभाग की सचिव हिमानी पांडे से अनुरोध किया है कि जांच कार्रवी पूरी होने तक सुनील कुमार का वेतन रोक दिया जाए और अन्य सुविधाओं को रोक दिया जाए।  



मंगलवार, 10 जुलाई 2018

एक भवन में दो कालेज दिखाकर लिया दुगना अनुदान



अब सरकारी करेगी रिकवरी

संयुक्त सचिव ने की जनसंवाद के 15 मामलों की समीक्षा।
गिरिडीह में दुष्कर्म व हत्या के मामले में त्वरित कार्रवाई का निर्देश।

रांची। गढ़वा स्थित गोपीनाथ इंटर कॉलेज की मान्यता रद्द होगी। इस संबंध में झारखंड अधिविद्य परिषद ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को पत्र लिखा है। साथ ही एक भवन में दो-दो कॉलेज दिखाकर सरकार से लिए गए अनुदान राशि की रिकवरी भी कराई जाएगी। इस बात की जानकारी आज स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के नोडल अधिकारी ने जनसंवाद केंद्र की साप्ताहिक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री सचिवालय के संयुक्त सचिव रमाकांत सिंह को दी। श्री सिंह ने आज सूचना भवन में मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में दर्ज लंबित शिकायतों की जिलावार समीक्षा की। इस दौरान 15 शिकायतों की विशेष समीक्षा भी की गई।
गढ़वा में एक ही भवन में इंटर महाविद्यालय व महिला महाविद्यालय का संचालन किया जा रहा है। एक भवन में दो-दो संस्थान दिखाकर सरकार से अनुदान भी लिया जा रहा है। इस बात की शिकायत जनसंवाद केंद्र में आई। जांच में पाया गया कि व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई शुरू की। संबन्धित विभाग के नोडल अधिकारी ने बताया कि कॉलेज की मान्यता रद्द करने से संबन्धित पत्र निर्गत कर दिया गया है। संयुक्त सचिव ने कहा कि इस मामले में गलत तरीके से अनुदान राशि लेने की बात भी सामने आ चुकी है। इसलिए अनुदान राशि के रिकवरी को लेकर भी कार्रवाई शुरू करें। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि इस माह के अंत तक मामले में सभी कार्रवाई पूर्ण करें।
गिरिडीह के बिरनी में वर्ष 2014 नवंबर में एक युवती की हत्या की गई थी। मामले में पिता ने कई लोगों को आरोपी बनाते हुये कार्रवाई की मांग की थी। घटना के 4 साल बीतने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है। जबकि इस मामले में पुलिस अधीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि उक्त युवती के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई है। अब तक पुलिस अपराधियों तक नहीं पहुँच सकी है। इस मामले में संयुक्त सचिव ने पूछताछ की। एआईजी टू डीजीपी डॉ॰ शम्स तबरेज ने गिरिडीह के डीएसपी को निर्देश दिया कि इस मामले में बागोदर सरिया के एसडीपीओ, पुलिस इंस्पेक्टर व अन्य पुलिस पदाधिकारियों के साथ बैठकर गहन समीक्षा करें। पुलिस अधीक्षक के साथ बैठकर इसका रिवियू करें व कार्रवाई सुनिश्चित करें। मामला काफी संवेदनशील है, इसलिए इसमें पूरी तरह से गंभीरता बरती जाये।
खूंटी में जाति, आय व आवासीय प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था में गांवों की हल्कावार सूची नहीं रहने के कारण समस्या का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त सचिव ने इस मामले में अविलंब कार्रवाई करते हुये समस्या का निष्पादन करने का निर्देश दिया।
धनबाद के ओलिन रवानी की 6 माह की पुत्री हृदय रोग से ग्रसित है। इसका इलाज दुर्गापुर मिशन अस्पताल से होना है, जहाँ 1 लाख 6 हजार का खर्च बताया गया है। इसके लिए मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना के तहत सहायता के लिए इन्होंने आवेदन दिया है, परंतु अब तक इन्हें सहायता राशि नहीं मिली है। इस बाबत नोडल अधिकारी ने बताया कि आवंटन नहीं होने के कारण इन्हें सहायता उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। संयुक्त सचिव ने एक सप्ताह के अंदर आवंटन उपलब्ध कराते हुये इलाज हेतु भुगतान का निर्देश दिया।
4 वर्ष पूर्व बोकारो से लापता दो बहनों का अबतक कोई सुराग नहीं मिला है। इस बाबत इनके पिता ने अपहरण की आशंका जताते हुये मामला भी दर्ज कराया परंतु अब तक कोई परिणाम सामने नहीं आया है। परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है। इस मामले में बोकारो के डीएसपी ने बताया कि पुलिस लगातार अनुसंधान व अन्य कार्रवाई कर रही है परंतु अब तक इनका कुछ पता नहीं चल पा रहा है। मामले में एआईजी टू डीजीपी ने एसपी के साथ मिलकर मामले की समीक्षा व गहन अनुसंधान करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि पिता ने जिनपर आरोप लगाया है, उनपर भी नजर रखते हुये कार्रवाई करें। किसी भी हाल में दोनों बहनो को ट्रैस करें। आवश्यकता पड़े तो पुनः पुलिस टीम को उड़ीसा भेजें।
धनबाद की अन्ना कुमारी ने वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत लाभ लेने हेतु निरसा प्रखण्ड कार्यालय में आवेदन दिया था परंतु अब तक इन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। इस संबंध में विभाग का कहना है कि इन्हें भुगतान किया जा चुका है। नोडल अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच अभी चल रही है। शीघ्र ही निष्पादन की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। संयुक्त सचिव ने एक सप्ताह के अंदर मामले को निष्पादित करने का निर्देश दिया।
खूंटी के ईश्वरी नरसिंह मुंडा की हत्या 2011 में नक्सलियों ने कर दी थी। मृतक की पत्नी भरोसी टूटी ने उपायुक्त कार्यालय में नौकरी व मुआवजा के लिए आवेदन भी दिया, परंतु अब तक कोई पहल नहीं की गई है। इस संबंध में गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि सामान्य शाखा खूंटी से इस मामले में प्रतिवेदन प्राप्त है। संचिका पर कार्य चल रहा है। शीघ्र ही समस्या का निष्पादन कर दिया जाएगा। संयुक्त सचिव ने कहा कि पीड़ित को अविलंब नौकरी व मुआवजा देने की दिशा में कार्य करते हुये मामले का निष्पादन करें।
पलामू के पोखरा उत्क्रमित मध्य विद्यालय में 40 विद्यार्थियों को छात्रवृति प्रधानाध्यापक ने नहीं दी। शिकायत आई थी कि छात्रवृति वितरण में प्रधानाध्यापक ने अनियमितता बरती है। मामले की जांच में शिकायत सही पायी गई। आरोपी प्रधानाध्यापक को निलंबित कर उनके खिलाफ प्रपत्र का गठन किया गया है। विद्यार्थियों को छात्रवृति भुगतान के संबंध में पूछे जाने पर नोडल अधिकारी ने बताया कि जिन विद्यार्थियों को छात्रवृति का भुगतान नहीं हो पाया है, उन्हें प्रधानाध्यापक के वेतन में कटौती कर, उसी पैसे से छात्रवृति दिया जाएगा। संयुक्त सचिव ने कहा कि उस प्रक्रिया में काफी वक़्त लग सकता है। इसलिए संबन्धित विभाग से बात कर छात्रवृति भुगतान की दिशा में कार्रवाई की जाये।
पाकुड़ के अनुपडांगा गाँव में चिमू शेख, मुस्तक शेख एवं बकार शेख द्वारा 7 साल पूर्व आम रास्ता पर अतिक्रमण कर लिया गया है। अंचल अधिकारी के नोटिस देने के बावजूद अब तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। इतना ही नहीं, उसी सड़क पर स्थित एक चापाकल को भी तोड़कर वहाँ घर बना लिया गया है। इस मामले में पूछे जाने पर नोडल अधिकारी ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। संयुक्त सचिव ने 15 दिन के अंदर उक्त सड़क को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया।

सोमवार, 9 जुलाई 2018

मुआवजा भुगतान में भारी घोटाला



लॉ के छात्र संजय मेहता के पत्र पर केंद्र ने लिया संज्ञान
48 घंटे के अंदर मंत्रालय ने एनएच-02 के खिलाफ शुरू की कार्रवाई


हजारीबाग। एनएच 02 भूमि अधिग्रहण में भू रैयतों को कम  मुआवजा एवं अधिकारियों द्वारा किये गए अनियमितता को लेकर बरही निवासी एवं विनोबा भावे विश्वविद्यालय में लॉ के छात्र संजय मेहता ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार को पत्र लिखा है. चार जुलाई को लिखे पत्र पर 06 जुलाई को मंत्रालय ने संज्ञान ले लिया. पत्र को मंत्रालय की संयुक्त सचिव दक्षिता दास ने एनएचएआई के विधिक एवं प्रशासनिक प्रबंधक बन्धुप्रिय सरकार को अग्रसारित कर दिया है. संजय मेहता की शिकायत पर मंत्रालय ने 48 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू कर दी है. यह पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को भी भेजा गया है. पत्र में 20 बिंदु दिए गये हैं. प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को लिखे पत्र में संजय मेहता ने कहा है की एनएच 02 का फोर लेन से सिक्स लेन चौड़ीकरण किया जाना है. किमी संख्या 249 से 320 तक 71 किलोमीटर में निर्माण शुरू किया जाना है. इस परियोजना से जनता के बीच परेशानी उत्पन्न हो गयी है.
किमी 249 से 320 झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण के चोरदाहा , झारखंड - बिहार सीमा से गोरहर तक जाती है. उक्त क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण किया गया है लेकिन मुआवजा की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही है. उन्होंने लिखा है कि जमीन एवं जमीन पर बने घर - मकान की  मुआवजा राशि संतोषजनक नहीं है. सरकारी पदाधिकारियों के भ्रष्ट रवैये के कारण जमीन मालिकों को कम भुगतान किया गया है.  भुगतान में बड़े स्तर पर घोटाला हुआ है. इस परियोजना में हजारीबाग जिले के चौपारण , सिंघरावां , पिपरा , रसोइया धमना , बरही , बरसोत , करियातपुर , बरकट्ठा एवं अन्य क्षेत्रों में एनएच 02 के मुआवजा भुगतान में व्यापक स्तर पर अनियमितता की गयी है. जिसका नुकसान जमीन मालिकों को हुआ है. जिस जमीन का भुगतान जमीन मालिकों को व्यवसायिक दर पर किया जाना चाहिये था उन जमीनों की मुआवजा राशि जमीन के बाजार दर से काफी कम तय की गयी.
---औने - पौने दाम पर अधिग्रहण
श्री मेहता ने लिखा है कि इस संदर्भ में मैंने कई बार शिकायत की लेकिन अनियमितता की जाँच न कर मुझे ही सबूत उपलब्ध कराने को कहा गया. मेरी शिकायत पर जाँच , कार्रवाई होने के बजाय गोल मटोल जवाब देकर टाल दिया गया. पत्र में बताया गया है कि एनएच 02 भूमि अधिग्रहण को लेकर गलत संदेश गया है. क्योंकि मुआवजा से लोग संतुष्ट नहीं है. झारखंड में भूमिअधिग्रहण शुरू से संवेदनशील मुद्दा है यह गम्भीर विषय है. कहा है कि पूर्व में एनएच 02 के फोर लेन चौड़ीकरण के दौरान लाखो लोग विस्थापित हो गये. जीविका पर लोगो की आफत आ गयी. उस वक़्त भी सरकार ने विस्थापितों को न तो बसाया , न ही नौकरी दिया , न ही जमीन उपलब्ध कराया. सिर्फ औने - पौने दाम पर मुआवजा देकर जमीन को अधिग्रहण कर लिया गया.
---जनता का ख्याल नहीं रखा गया
बार - बार विधि की धाराओं का हवाला देकर जनता की जमीन ले ली गयी लेकिन जनता का ख्याल नहीं रखा गया. लाखो परिवार आर्थिक रूप से टूटकर बिखर गये. सरकार आज तक सुध नहीं ली. फिर से एनएच 02 का फोर लेन से सिक्स लेन चौड़ीकरण किया जा रहा है. जमीन ली जा रही है. फिर से कानून की धाराओं का हवाला दिया जा रहा है. हज़ारों घर , मकान आदि तोड़े जा रहे हैं. फोर लेन विस्थापन के दंश से अब तक लोग उबर नहीं पाये हैं. इधर सिक्सलेन निर्माण में फिर से लोगों की जीविका पर आफत आ गयी है. यह सब विषय एक बहुत बड़े जनाक्रोश को जन्म दे रहा है. लोगों का जीवन तबाह हो रहा है. यह समस्या बहुत जल्द एक जनांदोलन को जन्म देगा. सरकार जल्दी विचार करे.
--मुआवजा भुगतान राशि में व्यापक अंतर
उन्होंने पत्र के माध्यम से मांग की है कि पीडित जमीन मालिकों की जीविका एवं आवास के लिये सरकार जमीन का प्रबंध करे. आवासीय कॉलोनी बनाकर लोगो को बसाये , जीविका के लिये जमीन या स्थान उपलब्ध कराए. उन्होंने कहा है कि जमीन , आवास प्रबंध होने के बाद ही निर्माण शुरू हो. फिलहाल लोगों का घर मकान न तोड़ा जाये , उनकी जमीन पर सड़क निर्माण का काम न किया जाये. संजय मेहता का कहना है कि जमीनों पर हज़ारों लोगों का व्यवसाय संचालित है. व्यवसाय उनके रोजगार का साधन है. जमीन - घर को तोड़कर उनके जीविका को भी तहस नहस कर दिया जा रहा है. इसलिए व्यवसायिक दर पर मुआवजा दिया जाये. मुआवजा भुगतान प्रक्रिया में कुछ किलोमीटर के अंतराल में ही मुआवजा भुगतान राशि में व्यापक अंतर है. यह अनियमितता है. इसकी जाँच हो. कार्रवाई हो.
--क्या कहते है संजय मेहता
मामले पर संजय मेहता कहते हैं शासन , सत्ता का यह दायित्व है कि वह जनता के हितों की रक्षा करें. इस मामले में सरकार जनता का विश्वास नहीं जीत पायी है क्योंकि उनकी संपत्तियों , जीविका को तहस - नहस कर उचित मुआवजा नहीं दिया गया है.  यह मामला लाखों परिवारों की भावना , सपना , भविष्य , करियर से जुड़ा है. झारखंड सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप कर त्वरित समाधान करना चाहिए नहीं तो जनता आक्रोशित हो जायेगी.

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...