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बुधवार, 19 दिसंबर 2018

झारखंड में सभी बेघरों को मिलेगा घरः रघुवर दास


रांची। झारखंड में वर्ष 2020 तक नगरीय क्षेत्रों के सभी बेघरों को घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 तक हर बेघर को घर देने का लक्ष्य तय किया है। उन्हीं के दिशा निर्देशों पर चलते हुए झारखंड सरकार इस लक्ष्य को वर्ष 2020 तक पूरा करने का प्रयास कर रही है। इसको पूरा करने के लिए समयबद्ध रोड मैप बनाने की जरूरत है। कितने बेघर हैं, उनसे किस प्रकार घर का आवेदन लिये जाएंगे, किस प्रकार आवंटन किया जाएगा इन सबका रोड मैप तैयार करें। उक्त बातें मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी द्वारा आयोजित कार्यशाला में कहीं। उन्होंने कहा कि दिसंबर तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ले और जनवरी से काम में हाथ लगा दे, तभी समय पर लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा।

योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने नियमों को आसान किया है ताकि काम में किसी प्रकार की अड़चन में आए और योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे। यह काम हमें मिशन मोड में करना है। किसी गरीब को घर मिलेगा तो इससे बड़े बढ़कर कोई पुण्य का काम नहीं हो सकता।

कोई बिचौलिया ना हो, काम पारदर्शी तरीके से हो
उन्होंने कहा इसका भी ख्याल रखे कि कोई बिचौलिया इसमें दिक्कत ना करें। काम पारदर्शी तरीके से हो इसमें वार्ड पार्षद से लेकर महापौर तक और इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में भी सभी लोग टीम वर्क के रूप में काम करें ताकि हर गरीब को घर का प्रधानमंत्री जी का सपना पूरा हो सके।

कार्यक्रम में नगर विकास मंत्री सीपी सिंह, नगर के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री सुखदेव सिंह, नगर विकास सचिव श्री अजय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री सुनील कुमार वर्णवाल, श्री आशीष सिंहमार, विभिन्न नगर निकायों के महापौर, उपमहापौर, अध्यक्ष उपाध्यक्ष, क्रेडाई के प्रतिनिधि, बैंकर्स, डेवलपर्स समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

प्रधानमंत्री आवास योजना में झारखंड को मिलेंगे 2,504.83 करोड़



 सांसद परिमल नथवानी के प्रश्न के जवाब में बोले शहरी कार्य राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी

रांची। केन्द्र सरकार ने झारखण्ड राज्य के लिए प्रधान मंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रू.2,504.83 करोड़ की राशि मंजूर की है। इस योजना के तहत, राज्य में कुल 32,730 पात्र शहरी परिवारों को आवास कब्जा दे दिया गया है। प्रधान मंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत केन्द्र सरकार देश के विभिन्न राज्यों को कुल रू.78,008 करोड़ की सहायता करेगी। केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  हरदीप सिंह पुरी ने यह जानकारी राज्य सभा में जुलाई 19,2018 को सांसद परिमल नथवाणी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उपलब्ध करवाई।

मंत्रीजी के जवाब के अनुसार, इस योजना के तहत देश में 10,371 परियोजनाओं पर विचार किया जा रहा है, जिसमें झारखण्ड से 330 और गुजरात से 332 परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार ने अभी तक विभिन्न राज्यों को रू.27,653 करोड़ की सहायता प्रदान की है इसमें झारखण्ड को रू.975.06 करोड़ और गुजरात को रू.2672.66 करोड़ की सहायता दी गई देश में कुल 5,94,010 आवास निर्माणाधीन हैं, जिसमें झारखण्ड के 34,417 और गुजरात के 97,513 आवास शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में कुल 5,26,496 पात्र शहरी परिवारों को आवासों का कब्जा दे दिया गया है, जिसमें झारखण्ड के 32,370 और गुजरात के 84,931 आवास शामिल हैं।

श्री नथवाणी सरकार द्वारा शहरी गरीबों के लिए आवासन परियोजनाओं हेतु राज्यों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को बढ़ाने के प्रस्ताव और शहरी गरीबों के लिए आवास योजनाओं की प्रगति के बारे में जानना चाहते थे। मंत्रीजी ने बताया कि शहरी गरीबों के लिए आवास परियोजनाओं हेतु राज्यों को वित्तीय सहायता बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है


रविवार, 8 जुलाई 2018

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ​​​​​​​8 लाख घर बन कर तैयार


नौ वर्षों में हुआ था मात्र 12.4 लाख घरों का अनुमोदन
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के कार्यान्वयन के तीन वर्षों के भीतर 51 लाख रिहाइशी इकाइयों को स्वीकृति दी गई है। यह पहले की आवास योजना के मुकाबले एक बड़ी छलांग है जिनमें कार्यान्वयन के नौ वर्षों के भीतर केवल 12.4 लाख घरों को अनुमोदित किया गया।
51 लाख अनुमोदित घरों में से 28 लाख घरों का नींव से संबंधित कार्य संपन्न हो चुका है और वे पूर्णता के विभिन्न चरणों में हैं। इसके अतिरिक्त, 8 लाख से अधिक घर बन कर पहले से तैयार हो चुके हैं और लगभग 8 लाख घरों में लाभार्थियों ने रहना आरंभ भी कर दिया है।
एक समाचार पत्र में इस प्रकार की धारणा प्रदर्शित की गई है कि आवास निर्माण अंतरालों को पाटने के लिए प्रस्तावित वैश्विक आवास निर्माण प्रौद्योगिकी चुनौती आरंभ की जा रही है। केंद्र सरकार ने इसे गलत करार दिया है। सरकार के दावे के मुताबिक नई और फास्ट ट्रैक निर्माण प्रौद्योगिकी का पहले से ही व्यापक तरीके से योजना में उपयोग किया जा रहा है।
कवरेज के मामले में यह मिशन पूर्व में क्रियान्वित की जा रही आवास योजनाओं के इतिहास में एक क्रांतिकारी बदलाव है। भारत सरकार मिशन की अवधि 2022 के आखिर तक ‘सभी के लिए आवास‘ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...