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रविवार, 7 अगस्त 2011

नक्सलवाद..आतंकवाद और ड्रग माफिया

 दंतेवाडा कांड के बाद लम्बे समय तक चुप्पी साधे केन्द्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम की भृकुटी फिर तनी दिखने लगी है. उन्होंने माओवादियों के विरुद्ध एक बड़ा अभियान चलने की तैयारी के संकेत दिए हैं. ऑपरेशन ग्रीन हंट की कमियों की उन्होंने किस हद तक समीक्षा की है और उन्हें दूर करने के क्या उपाय किये हैं. सूचना तंत्र कितनी मजबूत हुई है  यह तो पता नहीं लेकिन माओवादियों की ताक़त पहले से और बढ़ गयी है. इसका संकेत हाल के दिनों में उनकी गतिविधियों से जरूर मिला है. खनन क्षेत्रों में उनके आर्थिक स्रोत और मजबूत हुए हैं. स्थितियां पहले से कहीं ज्यादा जटिल हो गयी हैं. गृह मंत्रालय के पास ख़ुफ़िया संस्थानों की रिपोर्ट क्या कहती है यह तो पता नहीं लेकिन देश में अभी काले धन पर आधारित जो तंत्र  चल रहा है अपने प्रभाव क्षेत्रों में माओवादी उसका एक अहम हिस्सा बन चुके हैं.

शनिवार, 30 जुलाई 2011

निजी स्कूलों का मायाजाल


 सरकारी सुविधाएं उठाने में निजी स्कूल हमेशा आगे रहते हैं लेकिन बच्चों और उनके अभिभावकों को किसी तरह की राहत नहीं देना चाहते. झारखंड सरकार ने सभी निजी स्कूलों को 20 फीसदी गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने का निर्देश दिया था. लेकिन इसपर अभी कोई भी स्कूल अमल नहीं कर रहा है. करीब 8 वर्ष पूर्व राज्य सरकार ने निजी स्कूलों के बसों के अतिरिक्त कर में 40 फीसदी से अधिक की छूट दी थी. इस छूट के बाद बस भाड़े में बच्चों को कोई राहत नहीं दी गयी लेकिन पिछले 8 वर्षों में करोड़ों के राजस्व की बचत जरूर कर ली गयी.

गुरुवार, 28 जुलाई 2011

हीरा भी है सोना भी लेकिन किस काम का

जहांगीर के शासन काल में झारखंड में  एक राजा दुर्जन सिंह थे. वे हीरे के जबरदस्त पारखी हुआ करते थे. वे नदी की गहराई में पत्थर चुनने के लिए गोताखोरों को भेजते थे और उनमें से हीरा पहचान कर अलग कर लेते थे. एक बार मुग़ल सेना ने उनका राजपाट छीनकर उन्हें कैद कर लिया. जहांगीर हीरे का बहुत शौक़ीन था. एक दिन की बात है.  उसके दरबार में एक जौहरी दो हीरे लेकर आया. उसने कहा कि इनमें एक असली है एक नकली. क्या उसके दरबार में कोई है जो असली नकली की पहचान कर ले. कई दरबारियों ने कोशिश की लेकिन विफल रहे. तभी एक दरबारी ने बताया कि कैदखाने में झारखंड का राजा दुर्जन सिंह हैं. उन्हें हीरे की पहचान है. वे बता देंगे. जहांगीर के आदेश पर तुरंत उन्हें दरबार में बुलाया गया. उनहोंने हीरे को देखते ही बता दिया कि कौन असली है कौन नकली. जहांगीर ने साबित करने को कहा. उनहोंने दो भेड़ मंगाए एक के सिंघ पर नकली हीरा बांधा और दूसरे के सिंघ पर असली दोनों को अलग-अलग रंग के कपडे से बांध दिया. फिर दोनों को लड़ाया गया. नकली हीरा टूट गया. असली यथावत रहा. दरबार की इज्ज़त बच गयी. जहांगीर इतना खुश हुआ कि दुर्जन सिंह तो तुरंत रिहा कर उसका राजपाट वापस लौटा दिया.

सोमवार, 25 जुलाई 2011

काले धन को मौलिक अधिकार का दर्जा दे सरकार

यदि आप विदेशी बैंकों से काले धन की वापसी की मांग करते हैं तो आप सरकार की नज़र में एक जघन्य अपराध  करते हैं. आपके खिलाफ सरकार के हर विभाग को लगा दिया जायेगा. आपकी जन्म कुंडली खंगाल दी जाएगी. जबतक कांग्रेस की सरकार है न आप महंगाई के खिलाफ शोर मचाएंगे न काले धन का विरोध करेंगे. समझे आप! वरना सोचिये बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण की डिग्री की सीबीआई जांच की जरूरत क्यों पड़ी. क्या वे सरकारी नौकरी करते थे..?...किसी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन दिया था...?...नहीं न! अपना जड़ी-बूटी बेचते रहते. योग सिखाते रहते. कोई समस्या नहीं थी. उन्हें काले धन के चक्कर में पड़ने की क्या जरूरत थी...? वैश्वीकरण के युग में किसी ने विदेश में धन रख दिया तो क्या हुआ. सरकार से दुश्मनी..? ...अब भुगतो...श्रीमती गांधी ने आपातकाल के दौरान सत्ता का सही इस्तेमाल सिखा दिया था. क्या हुआ अगर उतनी मजबूत महिला को भी सत्ता से हाथ धोना पड़ गया. जनता सब भूल गयी. फिर उन्हें सिंहासन पर बिठा दिया.

शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

प्रिंट मीडिया : अंध प्रतिस्पर्द्धा की भेंट चढ़ते एथिक्स

  अभी मीडिया जगत की दो ख़बरें जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हैं. पहली खबर है अंतर्राष्ट्रीय मीडिया किंग रुपर्ट मर्डोक के साम्राज्य पर मंडराता संकट और दूसरी हिंदुस्तान टाइम्स  इंदौर संस्करण में लिंग परिवर्तन से संबंधित एक अपुष्ट तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट को लेकर चिकित्सा जगत में उठा बवाल. इन सबके पीछे दैनिक अख़बारों के बीच बढती प्रतिस्पर्द्धा के कारण आचार संहिता की अनदेखी की प्रवृति है. इस क्रम में एक और गंभीर बात सामने  आई की मीडिया हाउसों का नेतृत्व नैतिक दृष्टिकोण से लगातार कमजोर होता जा रहा है. विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करने की जगह वह हार मान लेने या अपनी जिम्मेवारी अपने मातहतों के सर मढने की और अग्रसर होता जा रहा है.

जल पंचायतों के गठन की तैयारी

रांची: झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट से निपटने के लिए भूजल पंचायत के गठन की पहल पर विचार किया जा रहा है. इसके जरिये सिंचाई और पेयजल के लिए जल संरक्षण के कारगर उपाय किये जायेंगे. यह जल संरक्षण अभियान के तहत एक नया मॉडल तैयार करने के प्रयास का हिस्सा होगा. इस अभियान के तहत आम ग्रामीणों को जल संरक्षण और वाटर रिचार्ज के प्रति जवाबदेह बनाया जायेगा. हर राज्य के हर पंचायत में भू-जल पंचायत का गठन करने का निर्णय केंद्र सरकर ने लिया है. इस योजना में मैग्सेसे पुरुस्कार से सम्मानित जल पुरुष के नाम से विख्यात राजेंद्र प्रसाद सिंह अहम् भूमिका निभा रहे हैं.इसमें जल संसाधन का दुरूपयोग करने वालों पर उसके उपयोग पर रोक लगाने का अधिकार पंचायतों को दिया जाना है. जल स्रोतों की सुरक्षा पर खास तौर पर ध्यान केन्द्रित किया जायेगा.नदियों, तालाबों को बचने और सिंचाई सुविधाओं को बढ़ाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य होगा. झारखंड के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को इस संदर्भ में आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं    

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...