शंकर प्रसाद साव
बाघमारा (धनबाद):- दक्षिण पूर्व रेलवे मार्ग के आद्रा - गोमो रेल लाइन में जिस भूमिगत आग की चर्चा बार- बार होती है. ब्लॉक दो प्रबंधन उस आग से कोई खतरा मानने को तैयार नहीं हैं. जबकि रेल लाइन के करीब आग दहकने की खबर वर्ष 1998 में ही लग चुकी थी. भारत सरकार द्धारा गठित वर्ल्ड बैंक फायर प्रोजेक्ट द्धारा इसका खुलासा किया था तब से मामला सुर्खियों में हैं. धीमी हो जाती है ट्रेन भूमिगत आग से खतरा होने की अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस लाइन से गुजरने वाली प्राय: सभी ट्रेनें अग्नि प्रभावित क्षेत्र पार करते वक्त गति धीमी हो जाती हैं. बेनिडीह रेलवे साईडिंंग के बगल में लगभग 45 मीटर तथा खोखीबिघा के समीप 30 मीटर तक रेल लाइन के निकट आग पंहुचने की खुलासा हुआ हैं. बरसात के समय यह इलाका धुँए से भर जाता हैं. आग की लपटें अंधेरे में स्पष्ट दिखाई पडती हैं. आग भडकने का डर अपनी गर्दन बचाने के लिए ब्लॉक दो प्रबंधन द्धारा अग्नि प्रभावित इलाकों में कोयले का उत्पादन करना बंद कर दिया हैं. साथ ही उठ रही आग को ओवर वर्डेन डालकर मुहाने को सील बंद कर दिया हैं. फिर भी आग कभी - कभी भडक उठती हैं. प्रबंधन द्धारा कोयला उत्पादन नहीं करने का भी यही बजह हैं. मंद्ररा बस्ती भी आग की चपेट में ब्लॉक दो के बंद पडी बेनीडीह भूमिगत खदान की 11,12 व 13 नंबर सीम में भंयकर आग लगने का भी खुलासा हुआ था. निजी मालिकों जमाने में सभी खदानें परस्पर 25 से 30 मीटर फासले पर थी. यह आग अब बेकाबू हो गयी है. रायटोला, मंदरा, एंव गणेशपुर बस्ती भी इसके चपेट में आ चुकी हैं. घरों में दरार पडने एंव भू-धसांन की धटना बराबर हो रही हैं. गैस रिसाव होने से लोंगों का जीना मुश्किल हो गया हैं. आग सूख रही जलाशयों को आग की तीव्रता इतनी तेज है कि आस - पास के कुंआ, तालाब एंव अन्य जलाशयों की पानी भी सूख गया है. हरा भरा रहने वाला यह क्षेत्र आग के कारण बंजर भूमी में तब्दील हो गया हैं. जान माल की खतरा: कुमार पेयजल एंव स्वच्छता विभाग चास सबडिविजन के अवर प्रमंडल पदाधिकारी अरूण कुमार का कहना है कि कोलियरी से सटे गांव या मुहल्लों में पानी की लेयर तेजी से घट रहा है इसका मुख्य कारण डिप खदान चलना एंव भूमिगत आग हैं. चापानल की गहराई 200 फिट है जबकि खदानों में 600 फिट गहराई में कोयले का उत्खनन होता हैं.जिसके चलते पानी का श्रोत धट रहा हैं. इधर बरसात के कारण प्रभावित इलाकों गैस रिसाव तेजी से हो रहा हैं. इससे जान माल की खतरा हो सकती हैं. इसका व्यापक असर पड रहा हैं.
