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सोमवार, 9 जुलाई 2018

अमित शाह के साथ सोशल मीडिया वॉलिंटियर्स मीट की तैयारी

रांची। भाजपा राँची महानगर सोशल मीडिया एंड आईटी की बैठक भाजपा महानगर कार्यालय रातू रोड में हुई। जिसमे राँची महानगर में आने वाले विभिन्न मंडलो के आईटी एंड सोशल संयोजकों ने भाग लिया। बैठक में
आगामी 11 जुलाई को आ रहे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सोशल मीडिया वॉलिंटियर्स मीट के बारे में चर्चा की गयी।

बैठक में मुख्यरूप से उपस्थित भाजपा राँची महानगर के अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कहा कि, भाजपा राँची महानगर सोशल मीडिया एंड आईटी के द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी का भव्य स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा, राँची की धरती पर आधुनिक युग के चाणक्य का आगमन हो रहा है। अमित शाह के आने की सूचना से पूरे राज्य के सोशल मीडिया एंड आईटी के युवा उत्साहित है। झारखंड के सूदूर क्षेत्रो से युवा सोशल मीडिया  वॉलिंटियर्स मीट के लिए फॉर्म भर  रहे है।

बैठक में राँची महानगर के सोशल मीडिया संयोजक तुषार विजयवर्गीय और आईटी सेल के संयोजक रोहित शारदा के द्वारा विभिन्न मंडलो कार्यकताओं को जिम्मेदारी दी गयी। जिसमे फॉर्म रजिस्ट्रेशन काउंटर  ऋषभ गक्खड़, रौनक अग्रवाल, संतोष सिंह, अनूप कुमार, साहित्य पवन, अखिलेश पण्डेय, शुभम माहेश्वरी, पंकज श्रीवास्तव, शत्रुघ्न जी, अनूप जी, राजेश विजयवर्गीय, फिरोज़ खान भोजन व्यवस्था संजीत झा, मनोहर झा, जितेंद्र बर्णवाल सभागार व्यवस्था संतोष अग्रवाल, सोनू मिश्रा को जिम्मेदारी दी गयी।

बैठक में भाजपा राँची महानगर के महामंत्री राजू सिंह, अरविंद सिंह, तुषार विजयवर्गीय, रोहित शारदा, किशोर मालवीय, सुजीत झा,  संतोष अग्रवाल, सोनू मिश्रा संजीत झा, मनोहर झा, जितेंद्र वर्णवाल, अनूप कुमार, साहित्य पवन, ऋषभ गक्खड़, रौनक अग्रवाल समेत अन्य थे।

बाबूलाल का नहीं भाजपा का काउंटडाउनः योगेंद्र प्रताप


झारखंड में हार्स ट्रेडिंग के जरिए दल बदल का विवाद
   
रांची। झाविमो के छह विधायकों को करोड़ों रुपयों की सौगात देकर भाजपा में शामिल करने का आरोप तूल पकड़ता जा रहा है। झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने अपने आरोप को प्रमाणित करने हेतु भाजपा का एक पत्र सार्वजनिक किया है। भाजपा नेता जहां उस पत्र को फर्जी बता रहे हैं वहीं झाविमो सुप्रीमो इसकी हस्ताक्षर विशेषज्ञ से जांच कराने की चुनौती दे रहे हैं।
भाजपा नेताओं का कहना है कि बाबूलाल मरांडी का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। इसके जवाब में झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि बाबूलाल जी का राजनीतिक व कानूनी काउंटडाउन शुरू करने की ताकत लोकतंत्र की हत्या करने वाली भाजपा में नहीं है। हां, राजनीति को व्यापार समझने वाली भाजपा सत्ता व अन्य सक्षम एजेंसियों का दुरूपयोग कर अपने काउंटडाउन को चार वर्षो तक जो रोक रखा था, वह अब प्रारंभ जरूर हो चुका है। 2019 में इनका फानल काउंटडाउन जनता कर देगी। भाजपा वालों में बौखलाहट इस कदर है कि उन्हें सपने में भी केवल बाबूलाल जी ही दिख रहे हैं। चूंकि चोर अधिक शोर मचाता है इसलिए भाजपा वाले मामले की इंटरपोल से नहीं बल्कि देश की सबसे बड़ी एजेंसी सीबीआई से ही जांच करा लें। पत्र फर्जी है या सही इसका फैसला न तो हम झाविमो नेता करेंगे और न ही भाजपा नेता। यह काम कोई जांच एजेंसी ही कर सकती है। वहीं श्री सिंह ने कहा कि रवीन्द्र राय जी नौटंकी बंद करें। रवीन्द्र राय व उनकी पूरी टीम को अनलीगल काम को लीगल तरीके से अंजाम देना था। उन्हें पता था कि देर-सबेर लोकतंत्र को कलंकित करने वाला यह पत्र बाहर आयेगा ही इसलिए पूरी संभावना है कि उन्होंने बड़ी चतुराई से किसान मोर्चा वाला अपना पुराना लेटर हेड का उपयोग किया ताकि समय पर वे दांव-पेंच कर सकें। रवीन्द्र जी आज वही कर रहे हैं। यह कोई मामूली पत्र नहीं है। इस पत्र में राज्य में पिछले तीन साल से अधिक समय से चल रहे दल-बदल के आरोपी विधायकों की लगाई गई कीमत व उसमें शामिल पूरे गिरोह का नाम दर्ज है। रवीन्द्र राय कहते हैं कि यह पत्र पिछले कई माह से विचरण कर रहा है तो रवीन्द्र राय जी ने इस पत्र को सार्वजनिक क्यों नहीं किया ? उन्होंने यह क्यों नहीं बतलाया कि उनके लेटर हेड पर लिखा एक फर्जी पत्र उनकी व उनकी पार्टी की छवि को धूमिल कर रहा है ? अगर वास्तव में पत्र पहले से घूम रहा है तो स्पष्ट है कि भाजपा इस पत्र को दबाने में लगी हुई थी। पहले भाजपा द्वारा इस पत्र को छुपाना और अब सीबीआई जांच से कतराना सारी सच्चाई बयां कर रहा है।
                                              


मुआवजा भुगतान में भारी घोटाला



लॉ के छात्र संजय मेहता के पत्र पर केंद्र ने लिया संज्ञान
48 घंटे के अंदर मंत्रालय ने एनएच-02 के खिलाफ शुरू की कार्रवाई


हजारीबाग। एनएच 02 भूमि अधिग्रहण में भू रैयतों को कम  मुआवजा एवं अधिकारियों द्वारा किये गए अनियमितता को लेकर बरही निवासी एवं विनोबा भावे विश्वविद्यालय में लॉ के छात्र संजय मेहता ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार को पत्र लिखा है. चार जुलाई को लिखे पत्र पर 06 जुलाई को मंत्रालय ने संज्ञान ले लिया. पत्र को मंत्रालय की संयुक्त सचिव दक्षिता दास ने एनएचएआई के विधिक एवं प्रशासनिक प्रबंधक बन्धुप्रिय सरकार को अग्रसारित कर दिया है. संजय मेहता की शिकायत पर मंत्रालय ने 48 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू कर दी है. यह पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को भी भेजा गया है. पत्र में 20 बिंदु दिए गये हैं. प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को लिखे पत्र में संजय मेहता ने कहा है की एनएच 02 का फोर लेन से सिक्स लेन चौड़ीकरण किया जाना है. किमी संख्या 249 से 320 तक 71 किलोमीटर में निर्माण शुरू किया जाना है. इस परियोजना से जनता के बीच परेशानी उत्पन्न हो गयी है.
किमी 249 से 320 झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण के चोरदाहा , झारखंड - बिहार सीमा से गोरहर तक जाती है. उक्त क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण किया गया है लेकिन मुआवजा की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही है. उन्होंने लिखा है कि जमीन एवं जमीन पर बने घर - मकान की  मुआवजा राशि संतोषजनक नहीं है. सरकारी पदाधिकारियों के भ्रष्ट रवैये के कारण जमीन मालिकों को कम भुगतान किया गया है.  भुगतान में बड़े स्तर पर घोटाला हुआ है. इस परियोजना में हजारीबाग जिले के चौपारण , सिंघरावां , पिपरा , रसोइया धमना , बरही , बरसोत , करियातपुर , बरकट्ठा एवं अन्य क्षेत्रों में एनएच 02 के मुआवजा भुगतान में व्यापक स्तर पर अनियमितता की गयी है. जिसका नुकसान जमीन मालिकों को हुआ है. जिस जमीन का भुगतान जमीन मालिकों को व्यवसायिक दर पर किया जाना चाहिये था उन जमीनों की मुआवजा राशि जमीन के बाजार दर से काफी कम तय की गयी.
---औने - पौने दाम पर अधिग्रहण
श्री मेहता ने लिखा है कि इस संदर्भ में मैंने कई बार शिकायत की लेकिन अनियमितता की जाँच न कर मुझे ही सबूत उपलब्ध कराने को कहा गया. मेरी शिकायत पर जाँच , कार्रवाई होने के बजाय गोल मटोल जवाब देकर टाल दिया गया. पत्र में बताया गया है कि एनएच 02 भूमि अधिग्रहण को लेकर गलत संदेश गया है. क्योंकि मुआवजा से लोग संतुष्ट नहीं है. झारखंड में भूमिअधिग्रहण शुरू से संवेदनशील मुद्दा है यह गम्भीर विषय है. कहा है कि पूर्व में एनएच 02 के फोर लेन चौड़ीकरण के दौरान लाखो लोग विस्थापित हो गये. जीविका पर लोगो की आफत आ गयी. उस वक़्त भी सरकार ने विस्थापितों को न तो बसाया , न ही नौकरी दिया , न ही जमीन उपलब्ध कराया. सिर्फ औने - पौने दाम पर मुआवजा देकर जमीन को अधिग्रहण कर लिया गया.
---जनता का ख्याल नहीं रखा गया
बार - बार विधि की धाराओं का हवाला देकर जनता की जमीन ले ली गयी लेकिन जनता का ख्याल नहीं रखा गया. लाखो परिवार आर्थिक रूप से टूटकर बिखर गये. सरकार आज तक सुध नहीं ली. फिर से एनएच 02 का फोर लेन से सिक्स लेन चौड़ीकरण किया जा रहा है. जमीन ली जा रही है. फिर से कानून की धाराओं का हवाला दिया जा रहा है. हज़ारों घर , मकान आदि तोड़े जा रहे हैं. फोर लेन विस्थापन के दंश से अब तक लोग उबर नहीं पाये हैं. इधर सिक्सलेन निर्माण में फिर से लोगों की जीविका पर आफत आ गयी है. यह सब विषय एक बहुत बड़े जनाक्रोश को जन्म दे रहा है. लोगों का जीवन तबाह हो रहा है. यह समस्या बहुत जल्द एक जनांदोलन को जन्म देगा. सरकार जल्दी विचार करे.
--मुआवजा भुगतान राशि में व्यापक अंतर
उन्होंने पत्र के माध्यम से मांग की है कि पीडित जमीन मालिकों की जीविका एवं आवास के लिये सरकार जमीन का प्रबंध करे. आवासीय कॉलोनी बनाकर लोगो को बसाये , जीविका के लिये जमीन या स्थान उपलब्ध कराए. उन्होंने कहा है कि जमीन , आवास प्रबंध होने के बाद ही निर्माण शुरू हो. फिलहाल लोगों का घर मकान न तोड़ा जाये , उनकी जमीन पर सड़क निर्माण का काम न किया जाये. संजय मेहता का कहना है कि जमीनों पर हज़ारों लोगों का व्यवसाय संचालित है. व्यवसाय उनके रोजगार का साधन है. जमीन - घर को तोड़कर उनके जीविका को भी तहस नहस कर दिया जा रहा है. इसलिए व्यवसायिक दर पर मुआवजा दिया जाये. मुआवजा भुगतान प्रक्रिया में कुछ किलोमीटर के अंतराल में ही मुआवजा भुगतान राशि में व्यापक अंतर है. यह अनियमितता है. इसकी जाँच हो. कार्रवाई हो.
--क्या कहते है संजय मेहता
मामले पर संजय मेहता कहते हैं शासन , सत्ता का यह दायित्व है कि वह जनता के हितों की रक्षा करें. इस मामले में सरकार जनता का विश्वास नहीं जीत पायी है क्योंकि उनकी संपत्तियों , जीविका को तहस - नहस कर उचित मुआवजा नहीं दिया गया है.  यह मामला लाखों परिवारों की भावना , सपना , भविष्य , करियर से जुड़ा है. झारखंड सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप कर त्वरित समाधान करना चाहिए नहीं तो जनता आक्रोशित हो जायेगी.

कश्मीर में राष्ट्रवाद और मानवता का अभियान चला रहे हैं अभिमन्यु कोहाड़



अभिमन्यु कोहाड़
खबरगंगा के लिए विशेष अनुरोध पर एक संवेदनशील फौजी के ज़ज्बे की कहानी शीर्षक पोस्ट के लेखक अभिमन्यु कोहाड़ विदेशी मामलों के जानकार और रक्षा विशेषज्ञ हैं। उन्होंने सीरिया युद्ध पर एक जीवंत पुस्तक लिखी है जो काफी लोकप्रिय हुई है। कश्मीर भी हमारा कश्मीरी भी भी हमारे शीर्षक पुस्तिका के लेखन के जरिए उन्होंने कश्मीरियों को राष्ट्रवाद की प्रेरणा दी है। वे लंबे समय से कश्मीर के आतंक पीड़ित परिवारों के बीच काम कर रहे हैं।
 वे बताते हैं कि आज भी हजारों ऐसे कश्मीरी हैं जिनके पिता या अन्य परिवारवालों को आतंकियों ने मार दिया और अब उनके पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वो अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। ऐसे बहुत से छात्रों से मैं मिला हूँ जिनके पिता को आतंकियों ने मार दिया, ऐसे छात्रों को शेष-भारत की सिविल सोसाइटी के साथ व सहयोग की जरूरत है। हमारा एक अभियान है "कश्मीर भी हमारा, कश्मीरी भी हमारे", इसके तहत हम ऐसे छात्रों की मदद करते हैं। अगर आप सब का सहयोग मिले तो बहुत बड़े स्तर पर हम इस अभियान को चला सकते हैं। अगर आपके क्षेत्र में कोई ऐसा कॉलेज या स्कूल हो जो आतंकवाद से पीड़ित इन राष्ट्रवादी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी ले सके तो हम से जरूर सम्पर्क करें। हमारी यह छोटी सी पहल "अपनेपन" का एक बहुत बड़ा संदेश कश्मीर घाटी की सिविल सोसाइटी में देगी। हमारी पहली कोशिश ये है कि आप कोई आर्थिक सहयोग ना दें बल्कि बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी लें और उनकी पढ़ाई का खर्च उठाएं। अगर आप पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी नहीं उठा सकते हैं तो इच्छानुसार आर्थिक सहयोग दे सकते हैं।
आपका यह छोटा सा योगदान देशहित में एक बड़ा कदम होगा।
सहयोग करना चाहें तो सम्पर्क करें-
अभिमन्यु कोहाड़
8950456616
कोऑर्डिनेटर - कश्मीर भी हमारा, कश्मीरी भी हमारे कार्यक्रम, राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन।

एक संवेदनशील फौजी के जज़्बे की कहानी



आतंक पीड़ित परिवार की मासूम बच्ची की उठाई जिम्मेदारी
शहादत से पहले की पढ़ाई का खर्च उठाने की व्यवस्था

अभिमन्यु कोहाड़


भारतीय सेना के शहीद कैप्टन विजयंत थापर एवं 6 वर्ष की कश्मीरी लड़की रुकसाना

नई दिल्ली। यह घटना है 1999 कि जब कैप्टन विजयंत थापर 22 वर्ष के थे एवं 2 राजपूताना राइफल्स में तैनात थे। उनकी यूनिट के नजदीक 6 वर्षीया रुकसाना रहती थी जिनके पिता की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। एक दिन कैम्प से बाहर कैप्टन थापर ड्यूटी के दैरान खाना खा रहे थे तो रुकसाना वहां आ के बैठ गयी, उसके बाद कैप्टन थापर ने उसे भी खाना खिलाया और उस से पूछा कि तुम स्कूल क्यों नहीं जाती हो? वहां आस-पास जांच करने पर पता चला कि रुकसाना के परिवार के पास पैसे नहीं हैं और उस के पिता को आतंकियों ने मार दिया है। कैप्टन थापर ने कहा कि रुकसाना की पढ़ाई का सारा खर्च वह खुद उठाएंगे।
इसके बाद कारगिल युद्ध शुरू हो गया। कैप्टन थापर ने अपने पिता रिटायर्ड कर्नल वी एन थापर को चिट्ठी लिखी और कहा कि अगर युद्ध में उसे कुछ हो जाता है तो आप स्वयं रुकसाना की पढ़ाई व उसकी देखरेख का खर्च उठाएंगे। कारगिल युद्ध में कैप्टन थापर की यूनिट को तोलोलिंग हिल पर कब्ज़ा करने की ज़िम्मेदारी दी गयी। अभियान के दौरान पहले लक्ष्य "बर्बाद बंकर" पर कैप्टन थापर व उनकी टीम ने कब्ज़ा कर लिया, जब उनकी यूनिट आगे बढ़ने लगी तो दुश्मन की एक गोली कैप्टन थापर के सिर में लगी और कैप्टन थापर शहीद हो गए।
कैप्टन थापर को शहीद हुए 19 वर्ष हो चुके हैं, पिछले 19 वर्ष से लगातार कैप्टन थापर के पिता रिटायर्ड कर्नल वी एन थापर रुकसाना की पढ़ाई व देखरेख का खर्च उठा रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले रुकसाना और उसके चाचा नोएडा में रिटायर्ड कर्नल थापर के घर भी आये थे। हर वर्ष रिटायर्ड कर्नल थापर कश्मीर जाते हैं और रुकसाना की पढ़ाई व देखरेख पर आने वाले सभी खर्च की पेमेंट करते हैं। रुकसाना ने पिछले वर्ष 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की है व अब कॉलेज में जा के आर्ट्स की पढ़ाई करना चाहती है।
ये हैं भारतीय सेना के महान संस्कार, "जान जाए लेकिन वचन न जाए"।
शहीद कैप्टन विजयंत थापर को श्रद्धांजलि व उनके पिता कर्नल थापर को सलाम

सीएम रघुवर दास ने दिया दिसंबर तक घर-घर बिजली पहुंचाने का टास्क



समीक्षा बैठक में कोताही बरतने वाली तीन कम्पनियों को कड़ी चेतावनी


रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि तय समय सीमा में घर-घर बिजली पहुंचाने का काम पूरा करना होगा। नहीं कर सकते हैं, तो सरेंडर करें। हर मीटिंग में  नयी तारीख नहीं मिलेगी। अब सरकार कार्रवाई करेगी। जो कंपनी काम नहीं करेगी, उसकी बैंक गारंटी जब्त करने के साथ ही उसके अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जायेगी। दिसंबर 2018 तक हमें घर-घर बिजली पहुंचाना है। इस काम में शिथिलता किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं  जायेगी। काम की प्रगति के अनुसार सरकार द्वारा कंपनियों को पेमेंट किया जा रहा है। किसी का पैसा नहीं रूकेगा। उक्त निर्देश उन्होंने झारखंड मंत्रालय में ग्रामीण विद्युतीकरण कार्य करनेवाली एजेंसियों के साथ कार्य प्रगति की समीक्षा के दौरान दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रणनीति तैयार कर कार्य करें। आजादी के इतने सालों के बाद भी सभी लोगों तक बिजली नहीं पहुंची है। हमारी सरकार केंद्र सरकार के नेतृत्व में हर घर को रोशन करने का काम कर रही है। गरीब के घर बिजली पहुंचाना पुण्य का काम है। इससे गांव-गरीब के जीवन में व्यापक बदलाव आयेंगे। जिन घरों में बिजली पहुंचा गयी है, वहां स्थितियां सुधरने लगीं हैं। बच्चे देर रात तक पढ़ते हैं। गांव में रात तक चहल पहल रहती है, जहां पहले दिन ढलते ही लोग घरों में कैद होने के लिए मजबूर होते थे।

 बैठक में काफी धीमा कार्य करने के लिए आइएल एंड एफएस, अशोका बिल्डकोन और पेस पावर को विशेष तौर पर काम में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। स्थितियां नहीं सुधरीं, तो इन कंपनियों को डिबार कर इनकी बैंक गारंटी जब्त कर इन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले माह की बैठक के बाद स्थितियां पहले की तुलना में सुधरी हैं। 9 अगस्त 2018 को फिर से इन कंपनियों के साथ बैठक की जायेगी।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डाॅ सुनील कुमार वर्णवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री नितिन मदन कुलकर्णी, प्रबंध निदेशक श्री राहुल पुरवार समेत अन्य अधिकारी व एजेंसियों के अधिकारी उपस्थित थे।

विलुप्त बाघों ने पन्ना टाइगर रिजर्व को बनाया शोध एवं अध्ययन केन्द्र



भोपाल। पन्ना टाईगर उद्यान की स्थापना यूं तो वर्ष 1981 में हुई थी, जिसे वर्ष 1994 में टाईगर रिजर्व के रूप में मान्यता मिली, लेकिन इसे आकर्षण का केन्द्र पन्ना टाईगर रिजर्व द्वारा चुनी गयी बाघों की विलुप्ति से पुनःस्थापना की कहानी ने बनाया है। आज यह न केवल देश-विदेश के पर्यटकों को लुभा रहा है, बल्कि देश-विदेश के अधिकारियो/कर्मचारियों के लिए शोध एवं अध्ययन का केन्द्र बन गया है।पन्ना टाईगर रिजर्व का कोर क्षेत्र 576 वर्ग किलो मीटर तथा बफर क्षेत्र 1021 वर्ग किलो मीटर में फैला हुआ है। विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक पर्यटन स्थल खजुराहो से इसका पर्यटन प्रवेश द्वार ''मडला'' महज 25 किलो मीटर दूर है। बाघों से आबाद रहने वाला पन्ना टाईगर रिजर्व विभिन्न कारणों से फरवरी 2009 में बाघ विहीन हो गया था, जिसके बाद विपरित परिस्थितियों में पार्क प्रबंधन द्वारा भारतीय वन जीव संस्थान देहरादून के विशेषज्ञों की मदद से सितंबर 2009 में पन्ना बाघ पुनः स्थापना योजना की व्यापक रूप रेखा तैयार की गयी। योजना के अन्तर्गत 4 बाघिन और 2 वयस्क नर बाघों को बांधवगढ़, कान्हा एवं पेंच टाईगर रिजर्व से पन्ना टाईगर रिजर्व में लाया गया ताकि यहां पर बाघों की वंश वृद्धि हो सके। यह इतना आसान भी न था।
योजना के मुताबिक पेंच टाईगर रिजर्व से लाया गया नर बाघ टी-3 10 दिन रहने के बाद यहां से दक्षिण दिशा में कही निकल कर नजदीकी जिलों के वन क्षेत्रों में लगभग एक माह तक स्वछंद विचरण करता रहा। पार्क प्रबंधन ने हार नही मानी। पार्क की टीम लगातार बाघ का पीछा करती रही। पार्क के 70 कर्मचारियों की टीम मय 4 हाथियों द्वारा दिसंबर 2009 को दमोह जिले के तेजगढ़ जंगल से इस बाघ को फिर से पन्ना टाईगर रिजर्व में लाया गया। पुनर्स्थापित किए गए बाघ में होमिंग (अपने घर लौटने की प्रवृत्ति) कितनी प्रबल होती है इसे पहली बार देखा गया। इस बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य को अपने दृढ़ निश्चय से सफल बनाकर पन्ना पार्क टीम ने अपनी दक्षता साबित की है। बाघ टी-3 की उम्र अब 15 हो गयी है और अब वह अपने ही वयस्क शावकों से अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
बाघ टी-3 से पन्ना बाघ पुनर्स्थापना की सफलता की श्रृंखला प्रारंभ हो गयी। पार्क की सुरक्षा प्रबंधन एवं सृजन की अभिनव पहल को पहली ऐतिहासिक सफलता तब मिली, जब बाघिन टी-1 ने वर्ष 2010 को 4 शावकों को जन्म दिया। जिसके बाद बाघिन टी-2 ने भी 4 शावकों को जन्म दिया। इसके बाद से यह सिलसिला निरंतर जारी है। बाघिन टी-1, टी-2 एवं कान्हा से लायी गयी अर्द्ध जंगली बाघिनों टी-4, टी-5 एवं इनकी संतानों द्वारा अब तक लगभग 70 शावकों को जन्म दिया जा चुका है। जिनमें से जीवित रहे 49 बाघों में से कुछ ने विचरण करते हुए सतना, बांधवगढ़ तथा पन्ना एवं छतरपुर के जंगलों में आशियाना बना लिया है।

बाघों की पुनर्स्थापना की इस सफलता की कहानी को सुनने और इससे सीख लेने प्रति वर्ष भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को एक सप्ताह के लिए भेजा जाने लगा है। इतना ही नहीं, कम्बोडिया एवं उत्तर पूर्व के देशों तथा भारत के विभिन्न राज्यों से भी बाघ पुनर्स्थापना का अध्ययन करने एवं प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए अधिकारी एवं कर्मचारी यहां आ रहे हैं। पिछले वर्षो में पर्यटकों विशेषकर विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। वर्ष 2015-16 में कुल 36730 पर्यटक, वर्ष 2016-17 में कुल 38545 पर्यटक एवं वर्ष 2017-18 में मई 2018 तक की स्थिति में कुल 27234 पर्यटकों की संख्या दर्ज की गयी है। इसके अलावा पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघों की बढती संख्या के लिए रहवास प्रबंधन, मानव एवं वन्य प्राणी द्वंद का समाधान तथा पर्यटन से लगभग 500 स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्रदाय किया जा रहा है। वर्ष 2017-18 में 30 ग्रामों में संसाधन विकसित करने हेतु 60 लाख रूपये पार्क प्रबंधन द्वारा प्रदाय किए गए है। साथ ही स्थानीय 68 युवकों को आदर आतिथ्य का प्रशिक्षण खजुराहो में दिलाकर उन्हें 3 सितारा एवं 5 सितारा होटलों में रोजगार दिलाया गया है।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...