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रविवार, 17 जून 2018

राष्ट्रीय तिरंगा सम्मान यात्रा अभियान जारी


चतरा जिले के सभी गांवों मे इस साल के अंत तक पहुंचेगी बिजली  : सुधांशु सुमन

रांची । राष्ट्र प्रेम के जज्बे से ओत-प्रोत और आत्मविश्वास से लबरेज झारखंड के प्रख्यात समाज सेवी सुधांशु सुमन ने कहा है कि उनकी कर्मभूमि चतरा के सभी गांवों में वर्ष 2018 तक बिजली पहुंच जाएगी। सभी गांव रौशन रहेंगे। ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना नहीं पड़ेगा। श्री सुमन रविवार को जिले के कुटी,चौथा सहित आसपास के गांवों में तिरंगा सम्मान यात्रा के दौरान ग्रामीणों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से चतरा संसदीय क्षेत्र की जनता उपेक्षित है। सुदूरवर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। सम्मान यात्रा का नेतृत्व मो.गुलाम ने किया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने हाथों में तिरंगा लेकर राष्ट्र प्रेम का अलख जगाते हुए देश भक्ति के नारे लगाए। तिरंगा सम्मान यात्रा मे काफी संख्या मे हिन्दू-मुस्लिम समाज के लोग शामिल थे। सुधांशु सुमन ने इस कार्यक्रम मे शामिल होने के लिए ग्रामीणों के प्रति आभार जताया।

हंगामा क्यों है वरपा.....


हंगामा क्यों है वरपा.....

झारखंड में भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद राजनीतिक फिज़ा गर्म होती जा रही है। तमाम विपक्षी दलों ने इसके खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। यह विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने का अवसर प्रदान करने वाला मुद्दा बन गया है। 18 जून को इस मुद्दे को लेकर विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर विपक्षी दलों की बैठक बुलाई गई है। वे चाहते हैं कि सीएनटी-सीपीएनटी एक्ट के संशोधन प्रस्ताव की तरह सरकार इसे भी वापस ले-ले। यह स्थिति इसलिए त्पन्न हुई कि सरकार संशोधन के औचित्य पर सर्व सहमति नहीं बना पाई और अब इसे लेकर जिद पर अड़ी हुई है।  दूसरी तरफ विपक्ष को पता है कि जब वे इसके विरोध में सड़कों पर हंगामा करेंगे और जन-जीवन अस्त-व्यस्त होने लगेगा तो सरकार बैकफुट पर आने को विवश हो जाएगी। लेकिन विपक्ष को थोड़ी देर के लिए यह समझना चाहिए कि राष्ट्रपति किसी ऐसे प्रस्ताव को कैसे मंजूरी दे सकते हैं जो जनता के हित में न हो। उनके विवेक पर थोड़ा विश्वास करना चाहिए। सच यही है कि फिलहाल सरकार और विपक्ष के संयुक्त प्रयास से झारखंड का जन-जीवन अशांत करने की तैयारी की जा रही है।
     राज्य के भू-राजस्व मंत्री अमर बाउरी ने इसे जनोपयोगी कार्यों के लिए आवश्यक और राज्य के हित में बताया है। उनके अनुसार जमीन केवल सरकारी कार्यों और विकास योजनाओं के लिए अधिगृहित की जाएगी। विपक्ष की आशंका है कि इस संशोधन का इस्तेमाल कार्पोरेट घरानों को ज़मीन देने के लिए किया जाएगा। मंत्री अमर बाउरी भी झारखंड की मिट्टी से ही उपजे नेता हैं। लिहाजा उनपर या भाजपा के दूसरे नेताओं पर क्षेत्रीय वैमनस्य या पूर्वाग्र का आरोप नहीं लगाया जा सकता। लेकिन यह भी सच है कि इतना बड़ा निर्णय लेने और इसपर अमल की प्रक्रिया शुरू करने के पहले सरकार यदि एक सर्वदलीय बैठक बुला चुकी होती तो आज यह आशंकाएं नहीं उठतीं। या तो प्रस्वाव लिया ही नहीं जाता या फिर इसमें कोई अवरोध नहीं आता। सवाल है कि प्रस्ताव सदन की स्वीकृति के बिना राष्ट्रपति तक नहीं पहुंच सकता था तो फिर सदन में विपक्ष ने वह आशंकाएं क्यों नहीं व्यक्त कीं जो अब कर रही हैं। विपक्ष का राजनीतिक धर्म होता है सत्तापक्ष के हर निर्णय का विरोध करना। लेकिन अगर सचमुच कोई लोकहितकारी काम हो रहा हो तो उसे हो जाने देना चाहिए। उसमें अडंगा नहीं डालना चाहिए। प्रस्ताव का वास्तविक चित्र इस विधेयक के प्रावधानों के बिंदुवार विश्लेषण के बाद ही साफ हो सकेगा। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि बिंदुओं पर कोई बात नहीं हो रही है। संशोधन के पीछे की भावना अथवा दुर्भावना को समझने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। रघुवर दास की सरकार कोई आकाश से नहीं टपकी है। झारखंड की जनता ने इसे जनादेश दिया है। सरकार सिर्फ पांच साल के लिए है। इसमें डेढ़ साल बचे हैं। इसके बाद से जनता की अदालत में फिर हाजिरी लगानी होगी। ऐसे में वह कोई ऐसा काम करने का जोखिम नहीं उठा सकती जिसके कारण जनता से मुंह छुपाना पड़े। सिर्फ विरोध के लिए विरोध करने का कोई मतलब नहीं होता।
     निश्चित रूप से रघुवर सरकार कहीं न कहीं ब्रिटिश काल में आदिवासियों के हित में बनाए गए कानूनों में बदलाव चाहती है। सीएनटी-एसपीएनटी एक्ट में संशोधन के असफल प्रयास से यह स्पष्ट है। लेकिन वह ऐसा क्यों चाहती है। उसके क्या तर्क हैं। इसे समझने की जरूरत है। इस सरकार को मूलवासियों का दुश्मन तो करार नहीं दिया जा सकता। अगर वह उद्योग-धंधों का विस्तार चाहती है। बाहरी निवेश लाना चाहती है तो इसमें गलत क्या है। निवेश आएगा तो राज्य का विकास होगा। रोजगार के अवसर सृजित होंगे। हम जांगल युग में तो वापस नहीं लोट सकते। समय के साथ चलना ही होगा। लड़ाई इस बात की होनी चाहिए कि विकास का ज्यादा से ज्यादा लाभ स्थानीय लोगों को मिले। औद्योगीकरण और विकास के लिए ज़मीन की जरूरत तो पड़ेगी ही। अगर ज़मीन का अधिग्रहण नहीं होगा तो विकास का पहिया आगे कैसे बढ़ेगा। दूसरी सोचने की बात यह है कि क्या अभी भी अंग्रेजों के बनाए उन कानूनों को उसी रूप में बने रहने देना चाहिए जिस रूप में ये बने थे। क्या आज 21 सदी में भी स्थितियां वही हैं जो 18 वीं, 19 वीं शताब्दी में थीं। ब्रिटिश शासन आदिवासियों के हित में था और आजाद भारत की सरकारें उनके विरोध में रही हैं यह सोच गलत है। अगर अंग्रेज झारखंड वासियों के इतने ही हितैषी थे तो उनके खिलाफ थोड़े-थोड़े अंतराल पर विद्रोह क्यों होते रहे...। उन्हें सर पर बिठाकर क्यों नहं रखा गया। गुजरात और तेलंगाना जैसे राज्यों ने आखिर उनके बनाए कानूनों में संशोधन क्यों स्वीकार किया...। क्या उन्हें वह खतरे नहीं दिखाई दे रहे जो झारखंड के विपक्षी दलों को दिख रहे हैं। विकास और औद्योगीकरण की जरूरत से कोई इनकार नहीं कर सकता। इनका लाभ अथवा नुकसान किसी एक सरकार के कार्यकाल तक सीमित नहीं रहता। आज जो विपक्ष में है, कल सत्ता में होगा। जो सरकार में है वह विपक्ष में बैठेगा लेकिन जो कार्य होंगे वह लंबे समय तक दिखाई देंगे। इस बात को समझने की जरूरत है और सत्ता तथा विपक्ष की आपसी खींचातानी का आम जनजीवन पर असर नहीं आने देना चाहिए। राजनीति हो लेकिन सदन में हो सड़कों पर नहीं।

-देवेंद्र गौतम



शनिवार, 16 जून 2018

सउदी अरबिया में आठ महीने से फंसे युवक की गुहार

गोरखपुर के रामलाल बहादुर यादव आठ महीनेे से सउदी अरबिया में फंसे पड़े हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई है। भारत सरकार तक उनकी आवाज़ पहुंचे तो स्वदेश वापसी की कोई सूरत बने। सुनिए उनकी दर्द भरी कहानी उन्हीं की ज़ुबानी...

ईद के मौके पर जगाया राष्ट्रभक्ति का अलख



समाज सेवी सुधांशु सुमन के नेतृत्व में तिरंगा सम्मान यात्रा  

चतरा। ईद के पावन मौके पर सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्र प्रेम की अद्भुत मिसाल पेश की। शनिवार को चतरा जिला के सिमरिया प्रखंड अंतर्गत चौथा, एडला और कुट्टी सहित अन्य इलाकों के ग्रामीणों ने प्रख्यात समाज सेवी और राष्ट्र प्रेमी सुधांशु सुमन की अगुवाई में तिरंगा सम्मान यात्रा में शामिल हो कर राष्ट्र भक्ति का अलख जगाया। इस सम्मान यात्रा की खासियत यह थी कि इसमें शामिल अधिकतर लोग मुस्लिम समुदाय के थे। ग्रामीण अपने हाथों में तिरंगा लहराते हुए " सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा, जय जवान-जय किसान " सहित देश भक्ति के अन्य नारे लगा रहे थे। तिरंगा सम्मान यात्रा के दौरान राष्ट्र भक्ति का अद्भुत नजारा दिख रहा था।
 गौरतलब है कि राष्ट्र प्रेम के प्रति जन-जन को प्रेरित करने और राष्ट्रीय ध्वज  के सम्मान मे तिरंगा सम्मान यात्रा के प्रणेता और झारखंड के लोकप्रिय समाजसेवी सुधांशु सुमन विगत तकरीबन दो साल से झारखंड के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्र प्रेम और सांप्रदायिक सौहार्द का अलख जगा रहे हैं।
  यही नहीं श्री सुमन विशेष रूप से चतरा क्षेत्र की जनता की समस्याओं के समाधान के प्रति भी गंभीरता से सक्रिय रहते हैं। इस संदर्भ में श्री सुमन ने चतरा के सभी गांवों में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए गत दिनों विद्युत अधीक्षण अभियंता प्रभात कुमार श्रीवास्तव और महाप्रबंधक सुधीर सिंह से मुलाकात किया।ली अर्थ का अनर्थ करने पर तुली है। आज सेक्युलरिज्म गाली बन चुका है और सांप्रदायिकता राष्ट्रवाद का प्रतीक। धर्म नफरत की पाठशाला बन चुका है।

भाजपा कारपोरेट घरानों की कठपुतली : सुबोधकांत सहाय


रांची। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि केन्द्र व राज्यों की भाजपा सरकार कारपोरेट घरानों की कठपुतली बनकर रह गई है। बड़े पूंजीपतियों और कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए भाजपा ने भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन कराया है। इससे किसानों की कृषि योग्य भूमि भी छिनने का खतरा बना रहेगा। सरकार ने पेसा एक्ट, पंचायती राज व्यवस्था के विरूद्ध काम किया है। मेहनतकश मजदूर, गरीब किसानों की जमीन औने-पौने दाम पर जबरन अधिग्रहित कर कारपोरेट घरानों को सस्ते दर पर देने के लिए मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण बिल पास कराया है। श्री सहाय ने कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास जब सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन कराने मे सफल नहीं हो सके तो एक सोची समझी साजिश के तहत कारपोरेट घरानों को कौड़ी के भाव जमीन देने के लिए भूमि अधिग्रहण कानून मे संशोधन कराने की चाल चली। सरकार ग्राम सभा को भी नजरअंदाज कर गरीबों की जमीन हथिया लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कुकृत्य का कांग्रेस पार्टी पुरजोर विरोध करती है।

ईद भाईचारे का प्रतीकः सुबोधकांत




रांची। पाक रमजान के मौके पे आज रांची ईदगाह में जाकर पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने ईद का मुबारकबाद दिया। उन्होने कहा कि ईद भाईचारे का प्रतीक है। हिन्दुस्तान की गंगा जमुनी तहजीब की यही खूबसूरती है कि हम एक दूसरे को ईद और होली का मुबारकबाद देते हैं। इस मौके पर विनय सिन्हा ’दीपु’ सुरेन्द्र सिंह, दीपक लाल, राजन वर्मा, राकेश सिन्हा, संजय पाण्डेय, राजेश सिन्हा ’सन्नी’, हीरा लाल साहु, राजीव नारायण, सलाउद्दीन, शंभु गुप्ता, विनय पहलवान, विजय शंकर नायक, बब्लु, उपस्थित थे।

घाटशिला में जंगली हाथियों का उत्पात



 
दैनिक भास्कर से साभार
जमशेदपुर। पश्चिम बंगाल के ग्रीष्म प्रवास के बाद झारखंड के पूर्वी सिंहभूम स्थित दलमा आश्रयणी में वापसी के दौरान 15 हाथियों के झुंड ने घाटशिला के दो गांवों में जमकर उत्पात मचाया। दो लोगों को पटककर मार डाला। दर्जनों वाहन क्षतिग्रस्त कर डाले। इस झुंड में तीन बच्चे भी हैं। यह उन दो झुंडों में एक है जिसे जीपीएस युक्त रेडियो कालर से युक्त करने के लिए कोलकाता के वन विभाग और बेंगलुरु के वैज्ञानिकों की टीम रवाना हो चुकी है। यदि रेडियो कालर लग चुका होता तो इसे रोका जा सकता था।
     चाकुलिया जंगल से लगे बांधडीह में तड़के सुबह हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर सड़क पर आ गया और लोगों को दौड़ाने लगा। एक बूढ़े व्यक्ति दुखू पाल को सूड़ में लपेटकर पटक दिया और पांव से कुचलकर मार डाला। एक युवक भागने के क्रम में घायल हो गया। जंगली हाथियों ने सड़क पर खड़ी दर्जन भर साइकिलों और बाइकों को तोड़ डाला। घटना की खबर मिलने पर वन विभाग की हाथी रोधक टीम पहुंची और पटाखे फोड़कर हाथियों के झुंड को जंगल की ओर खदेड़ दिया। शाम को वह झुंड पिर छोटाजमुआ के सालजंगल से निकला और 16 वर्षीय नारायण मुर्मू को उठाकर पटक दिया। उसकी टांग टूट गई और गंभीर रूप से घायल हो गया। गंभीर रूप से जख्मी हाल में उसे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। हाथियों का दूसरा झुंड भी अभी दलमा के रास्ते में है। वन विभाग के लोग उसके लोकेशन पर नज़र रखे हुए हैं। हर वर्ष अपने ग्रीष्म प्रवास पर जाते और लौटते वक्त रास्ते में उनका उत्पात जारी रहता है। जीपीएस रेडियो कालर लग जाने के बाद ही उनके उत्पात पर कुछ नियंत्रण रखा जा सकेगा। तब वन विभाग के लोगों को झुंड के मानव बस्ती के करीब पहुंचते ही पता चल जाएगा और उन्हें वापस जंगल में खदेड़ना संभव हो सकेगा। लेकिन वन विभाग को उनके आवासीय इलाकों और आवागमन के मार्ग में पेयजल और भोजन की उचित व्यवस्था करनी होगी। वरना वे बार-बार मानव बस्तियों की ओर रुख करेंगे और बार-बार खदेड़े जाने से और उग्र हो उठेंगे।

-देवेंद्र गौतम

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...