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शुक्रवार, 6 जुलाई 2018

टॉम क्रूज़ ने फिल्म के सुपरमैन को सराहा





मिशन इम्पॉसिबल सीरीज की नई फिल्म मिशन इम्पॉसिबल: फॉलआउट में इस बार हेनरी कैविल को भी मौका दिया गया है, जिन्होंने सीआईए एजेंट अगस्त वॉकर का किरदार निभाया। 

  1996 में मिशन इम्पॉसिबल सीरीज के लॉन्च होने के बाद, एथन हंट के खिलाफ एना नाटोनिस्ट ने हमेशा ही एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब, इस बेहद सफल सीरीज की नई फिल्म में हेनरी कैविल भी दिखाई देंगे। कहानी के मुताबिक कैविल के किरदार को सीआईए डायरेक्टर स्लोन ने एथन पर थोपा था। डायरेक्टर क्रिस्टोफर मैकक्वैरी कहते हैं, 'हमारी कहानी में यह एक वाइल्ड कार्ड जैसा कैरेक्टर है, जिससे फिल्म में उसके और एथन के बीच तनाव बढ़ता है और विवाद के हालात पैदा होते हैं।

  क्रूस ने फिल्म में कैविल के जानदार अभिनय की प्रशंसा की और कहा. 'वे बहुत ताकतवर, एथलीट और करिश्माई हैं जो स्क्रीन पर अपना दबदबा बनाकर रखते हैं। फिल्म में दर्शक देखेंगे कि वे कभी किसी तरह के पेंच में नहीं फंसते। मैकक्वैरी ने उनके लिए एक अनूठी भूमिका लिखी है और फिल्म में वे मेरे एक प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हैं।

   27 जुलाई, 2018 को  मिशन इम्पॉसिबल : फॉलआउट रिलीज हो रही है। इसे पैरामाउंट पिक्चर मूवी ने बनाया है और इसे वायाकॉम-18 मोशन पिक्चर्स ने भारत में डिस्ट्रीब्यूट किया है। ये फिल्म भारत में अंग्रेजी, हिंदी, तमिल और तेलुगू में रिलीज होगी। 

गुरुवार, 5 जुलाई 2018

कोकर में सड़क पर उतरे आदित्य विक्रम व अजय राय

रांची। झारखंड  प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश डेलिगेट आदित्य विक्रम जायसवाल एवं प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अजय राय ने संयुक्त रूप से अपने समर्थकों के साथ आज लालपुर एवं कोकर एरिया में झारखण्ड बन्द को लेकर सड़क पर उतरे। इस दौरान कांग्रेस नेताद्वेय ने पार्टी झंडा एवं बैनर के साथ लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर पैदल मार्च किया और शांति ढंग से आमलोगों को माला पहनाते हुए एवं हाथ मिलाते हुए झारखंड बन्द को सफल बनाने तथा तमाम विपक्ष पार्टियों को सहयोग करने का अनुरोध किया। बन्द कराने के उपरांत कांग्रेस नेताद्वेय आदित्य विक्रम जायसवाल एवं अजय राय को पूर्वाह्न 11ः30 बजे लालपुर डीएसपी राजकुमार मेहता एवं थाना प्रभारी रमोद सिंह ने दोनों कांग्रेस नेताओं तथा उनके समथकों को बस में बैठाकर (गिरफ्तार कर) जेल कैम्प मोरहाबाद ले गये।
इस अवसर पर आदित्य विक्रय जायवाल ने कहा कि राज्य के रघुवर सरकार पूरी तरह से तानाशाह हो चुकी है, कोरपोरेट एवं पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए भूमि अधिग्रहण बिल का संशोधन कराया है ताकि राज्य के गरीब आदिवासियों की जमीन को कम कीमतों में छीना जा सके। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून संशोधन का असर सीधा झारखंड के आदिवासियों-मूलवासियों पर पडेगा। सरकार के इस नीति से आज पूरा झारखंड की जनता आक्रोश है, इसका जवाब झारखंड की जनता आने वाले चुनाव में रघुवर सरकार को मुंह तोड़ देगी।
पूर्व प्रवक्ता अजय राय ने कहा कि भाजपा सरकार भूमि अधिग्रहण बिल संशोधन कर कृषि योग भूमि को गैर कृषि योग भूमि घोषित करने के लिए नियम बनाये हैं ताकि यहां के गरीब किसानों की जमीन को कोरपोरेटर घरानें के लोगों को दिया जा सके। ऐसे होने पर भविष्य में कृषि योग्य भूमि की काफी कमी होने की संभावनाएं है।
झारखंड बन्द कराने के दौरान लालपुर एवं कोकर एरिया से गिरफ्तार होने वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं में मुख्य रूप से अजय राय  आसिफ जिआउल  अमरजीत सिंह,  ओम प्रकाश , राजीव चौरसिआ , गौरव आनंद , आशुतोष ,कुन्ज ,वैभाव ,दारा बड़ाइक ,नीतीश मामा ,दीपक ओझा ,प्रेम कुमार ,कुलदीप कुमार ,आदि शामिल थे

बंद की सफलता पर सुबोधकांत ने दी जनता को बधाई

विपक्षी गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने की अपील


रांची। कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने झारखंड बंद को ऐतिहासिक करार देते हुए झारखंड की जनता और विपक्षी गठबंधन के नेताओं को बधाई दी है। श्री सहाय ने कहा कि यह विपक्षी एकता और उसके प्रति जनता के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है। झारखंड की जनता रघुवर सरकार के नकाब के पीछे के चेहरे को पहचान चुकी है। उसके हिडेन एजेंडे को जान चुकी है। अब वे जनता को बहला या फुसला नहीं सकते। उनकी सत्ता के दिन पूरे हो चुके हैं। श्री सहाय ने झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास और केंद्र की मोदी सरकार को सलाह दी है कि कम से कम अब तो कार्पोरेट की सेवा बंद कर जनता की सेवा पर ध्यान दें। आखिर जनता के बीच किस मुंह से जनादेश मांगने जाएंगे।
श्री सहाय ने विपक्षी गठबंधन के नेताओं को और मजबूती के साथ एकजुट होकर भगवा सरकार की जन विरोधी नीतियों का पर्दाफाश करने और  जनता के मुद्दों को लेकर संघर्ष तेज़ करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून में किसी तरह के संशोधन का प्रयास बर्दास्त नहीं किया जाएगा।

कुवांरी माताओं के शिशुओं की परवरिश का सवाल




अनिमा इंदवार              फोटोः साभार
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में नवजात शिशु को बेचे जाने के मामले का खुलासा होने के बाद एक नई बहस की ज़मीन तैयार हो गई है। कुवांरी माताओं के बच्चों की परवरिश आखिर कैसे होगी। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। सरकार लेगी या सामाजिक संस्थाएं। शिशु को बेचने का आरोप मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर लगा है। संस्था की कर्मचारी अनिमा सहित दो सिस्टर को शहर की कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि चैरिटी होम की महिला संचालक के साथ मिलकर अनिमा आधा दर्जन नवजात को बेच चुकी है। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की जांच में इस तथ्य का खुलासा हुआ है कि एक बच्चा के एवज में 1.20 लाख रुपये तक लिये गए।

बाल कल्याण समिति ने नवजात बच्चे को इस समिति से बरामद कर लिया है. फिलहाल इन बच्चों को और प्रसव के लिए भर्ती माताओं को दूसरी संस्था में रखा गया है। कुछ और बच्चों के भी अवैध तरीके से बेचे जाने की बात सामने आयी है। उन बच्चों की मां के नाम पुलिस को मिले हैं। इसकी जांच की जा रही है। जांच के क्रम  में बच्चो की बिक्री में चैरिटी होम की संचालिका सिस्टर कोनसीलिया की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।

पता चला है कि अविवाहित लड़की मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम में प्रेग्नेंसी के दौरान रह रही थी। उसने एक मई को सदर अस्पताल रांची में एक लड़के को जन्म दिया। नवजात को अनिमा इंदवार ने संचालिका सिस्टर कोनसीलिया की मिलीभगत से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के ओबरा में रहनेवाले दंपती सौरभ अग्रवाल व प्रीति अग्रवाल को अस्पताल खर्च के नाम पर महज 1.20 लाख रुपये में बेच दिया. तब वह मासूम चार दिन का ही था। तीन जुलाई को दंपती को बुलाकर अनिमा ने बच्चा यह कहकर वापस ले लिया कि इसे कोर्ट में पेश करना है। पता चला है कि अविवाहित मां स्वयं शिशु से छुटकारा पाने के लिए उसे बेचना चाहती थी। बिक्री की रकम में से 80 हजार रुपये दिए गए थे।
शिशु को बेचना कानूनन गलत है। नियमतः गर्भस्थ कुवांरी युवतियों को संस्था में रखने की जानकारी बाल कल्याण विभाग को दी जानी चाहिए लेकिन मदर टेरेसा जैसी हस्ती से जुड़ी संस्था ने इस नियम का पालन नहीं किया और मानव तस्करी का धंधा शुरू कर दिया यह खेदजनक है। कानूनी पक्ष के अलावा सामाजिक प्रश्न यह है कि किसी युवती के किसी कारण गर्भवती हो जाने पर उसकी देखभाल कैसे हो। उसकी पहचान गुप्त रखते हुए बच्चे की परवरिश का क्या इंतजाम हो। झारखंड और बिहार जैसे राज्यों के लिए यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां का समाज अभी इतना आधुनिक नहीं हुआ है कि किसी कुवांरी मां को उसके बच्चे के साथ चैन से जीने दे। चैरिटी संस्था यदि मां की पहचान गुप्त रखने की शर्त पर ऐसे शिशुओं की जानकारी चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को देती और कमेटी निःसंतान दंपत्तियों को शिशु को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने का जिम्मा उठाती तो समस्या का निदान हो सकता था। सरकार को भविष्य में ऐसे मामलों के निराकरण के सटीक उपाय पर विचार कर से लागू करना चाहिए।
  


बंद के दौरान सुबोधकांत ने दी गिरफ्तारी


कहा-विपक्ष की आवाज़ दबाना चाहती है सरकार



रांची। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय आज सम्पूर्ण विपक्ष बंदी के दौरान कांग्रेस भवन से जुलूस के शक्ल में अपर बाजार, शहीद चौक होते हुए मेन रोड पहुँचे। जहाँ जिला प्रशासन ने गिरफ्तार कर कैम्प जेल में रखा। श्री सहाय ने कहा कि रघुवर सरकार पूरी तरह से संवेदनशील हो गई है। किसानों, आदिवासियों की जमीन हडपना चाहती है और लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को लाठी डंडे और गोली के आवाज पर दबाना चाहती है। मौके पर सुरेन्द्र सिंह, राकेश सिन्हा, दीपक लाल, बैलेस तिर्की, योगेन्द्र सिंह, सोनू वर्मा, उदय प्रताप सिंह सहीत सैकडो कांग्रेसी कार्यकर्ता थे।

झारखंड बंद असरदार

रांची। भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक के खिलाफ विपक्षी दलों का झारखंड बंद अधिकांश जिलों में सफल दिख रहा है। दिन के 12.30 बजे तक बंद समर्थकों के सड़क पर उतरने, कहीं-कहीं टायर जलाकर सड़क जाम करने और गिरफ्तारियां देने की खबरें आ रही हैं। लेकिन अभी तक कहीं से भी जोर जबर्दस्ती अथवा हिंसात्मक टकराव की खबर नहीं है। दुकानें बंद हैं। अधिकांश स्कूल बंद हैं। परीक्षाएं अपने निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक चल रही हैं। राजधानी रांची में सवारी गाड़ियां कम चल रही हैं लेकिन निजी वाहनों का परिचालन जारी है। सड़कों पर रोज की तरह वाहनों का आवागमन नहीं है लेकिन कहीं सन्नाटा नहीं है। सुरक्षा बल चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं। नक्सली इलाकों में विशेष चौकसी बरती जा रही है। विपक्षी नेता अपने कार्यकर्ताओं के साथ निकले हैं लेकिन उनका प्रयास भी शांतिपूर्ण तरीके से बंद को सफल बनाने की है। हालांकि अभी पूरा दिन बाकी पड़ा है। 

बुधवार, 4 जुलाई 2018

पौधरोपण का कार्यक्रम आयोजित



रांची। देश के जाने-माने ज्योतिषाचार्य एवं रांची के एक पुराने दैनिक अखबार के आध्यात्मिक संपादक आचार्य अमरेन्द्र मिश्रा के बूटी स्थित आवास पर पौधरोपण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर संयुक्त बिहार के मंत्री व राजद की प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी, तिरंगा सम्मान यात्रा के सूत्रधार व प्रसिद्ध समाज सेवी सुधांशु सुमन , पवन कुमार सिन्हा ,एक अखबार के वाईस प्रेजिडेंट और दिल्ली पुलिस के पूर्व आईपीएस अनिल ओझा ने सामूहिक रूप से ग्रीन इंडिया के तहत बूटी मोड़ के पास आचार्य अमरेन्द्र मिश्रा के आवास पर पौधा रोपण का कार्यक्रम संपन्न किया, इस कार्यक्रम में पूर्व आईपीएस श्री ओझा ने कहा कि रांची एक्सप्रेस संयुक्त बिहार का प्राचीनतम अखबार है। सम्पूर्ण बिहार और झारखंड के साथ देश के कोने कोने की खबरों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ जनता तक पहुंचाया जाता है जाता है। पिछले तीन वर्षों से अपने मुहिम "एक हाथ मे तिरंगा दूजे हाथ मे पौधा",  जय जवान जय किसान जैसे नारों को इस अखबार ने  देश के गांव गांव ,घर घर तक पहुंचाने का काम किया है, देश की एकता के लिए गांव गांव में तिरंगा सम्मान यात्रा और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पौधा रोपण देश भर में करना एक सराहनीय कदम है।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...