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शनिवार, 7 जुलाई 2018

शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य, सही जानकारी संचारित करनाः नितिल गुप्ता


करियर लिफ्ट एड-टेक के संस्थापक एवं प्रसिद्ध करियर काउंसलर नितिल गुप्ता से बातचीत के कुछ अंश....

आपके पास उच्च शिक्षा में व्यापक नेतृत्व अनुभव है। शिक्षा और प्रौद्योगिकी के बीच आप किन क्षेत्रों में अधिव्यापन देखते हैं?

 शिक्षा का उद्देश्य सही जानकारी को संचारित करना और छात्रों को ज्ञान प्रदान करना है, और प्रौद्योगिकी शैक्षिक संस्थानों को इस उद्देश्य को प्राप्त करने में मदद कर सकती है। आज की अत्यधिक प्रतिस्पर्धी दुनिया में, प्रौद्योगिकी संचार को मजबूत करने में मदद करती है। समय के साथ शैक्षणिक तरीकों का विकास धीमा रहा है, और नतीजतन, ये विधियां आज अपर्याप्त साबित हुई हैं। इन्हीं कारणों से शैक्षिक संस्थान ज्यादा से ज्यादा आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश को बढ़ावा दे रहे हैं।

एक करियर काउन्सर्ल के रूप में, आज की युवा पीढ़ी को आप क्या सलाह देंगे?

हर दिन अपने जीवन को मूल्यवान बनाएं। हर किसी से अलग होने के लिए, हमें कुछ अलग करना चाहिए। संस्था में जो पढ़ाया जाता है उसका अध्ययन करना ही केवल पर्याप्त नहीं है। आपको रुचि के अन्य पाठ्यक्रम, प्रतियोगिताओं में भाग लेना, सेमिनार/अतिथि व्याख्यान आदि में भाग लेकर अपने ज्ञान को समृद्ध रखना चाहिए।

शैक्षिक प्रौद्योगिकी में आप किस बात से आकर्षित हुए और इस क्षेत्र में आप कैसे पहुंचे?

भारत ने आईटी सेवाओं को आउटसोर्स करने वाले अधिकांश विकसित देशों के साथ सॉफ्टवेयर विकास और सूचना प्रौद्योगिकी के केंद्र के रूप में शुरुआत की। पर्यटन उद्योग में सूचना प्रौद्योगिकी की यात्रा,  ई-कॉमर्स की अवधारणा पर फ्लिपकार्ट के प्रवेश करने से हमारा ध्यान आकर्षित किया, और जल्द ही ओला, ज़ोमैटो जैसे ऐप आए।
सेवाओं के इस व्यापक डिजिटलीकरण के बावजूद, भारत में दो क्षेत्र ऐसे हैं, जहां प्रौद्योगिकी का उपयोग अपनी क्षमता के अनुरूप नहीं किया गया था। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में काम करने के बाद, मैं यहां कि समस्याओं को बेहतर समझता हूं। इसलिए, मैं और मेरी टीम शैक्षिक संस्थानों को प्रौद्योगिकी-सक्षम बनने के लिए काम कर रही हैं, जो भारत में शिक्षा क्षेत्र को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

आपकी कंपनी का मौलिक प्रस्ताव क्या है?

हमारा यह दृढ़ विश्वास हैं कि प्रौद्योगिकी भारत के अविकसित शिक्षा क्षेत्र को पूरी तरह से बदल देगी और उसमें अनेक बदलाव ला सकती है। हम एक शिक्षक और छात्रों के बीच सीखने के अंतर को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हैं। हमारा मानना है कि पारंपरिक शिक्षण और ऑनलाइन शिक्षा का एक अच्छा संयोजन छात्रों के सीखने के स्तर में सुधार करेगा।

आप किस समस्या को हल कर रहे हैं और किसके लिए?

सैकड़ों छोटी-छोटी ट्यूशन और कोचिंग क्लासेस के आने से, छात्र बहुत सारी सामग्री, विभिन्न नोट्स और अध्ययन सामग्री से अभिभूत हैं। हम शैखिक संस्थानों को सुव्यवस्थित सामग्री प्रदान करते है, जो छात्र के अध्ययन में सहायक होती है।
स्कूलों के लिए, हम करियर परामर्श प्रदान करते हैं। सैकड़ों छात्रों के बैच, स्कूलों में अक्सर ना के बराबर या शायद ही एक करियर सलाहकार होता है। उच्च शिक्षा, करियर, नौकरियां, भविष्य इत्यादि के मामले में छात्रों को सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। हम इस महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा करने के लिए स्कूलों की सहायता करते हैं। हम प्रतिस्पर्धी उद्योगों में स्नातक की नौकरियों की भर्ती और नियुक्तियों के मामले में कॉलेजों की मदद भी करते हैं।

कैरियर लिफ्ट की अनूठी अपील क्या है? आप खुद को कैसे अलग मानते हैं?

हम पूरी तरह से बी 2 बी हैंः हम केवल संस्थानों के साथ ही काम करते हैं, न कि छात्रों के साथ हमारा उद्देश्य सभी शैक्षिक संस्थानों को प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाना है। हम चाहते हैं कि शैक्षणिक क्षेत्र धीरे-धीरे एक तकनीकी प्रणाली की तरफ बढ़े, इसलिए हमने बी2 बी को अधिक व्यापक बदलाव लाने के लिए चुना है। कई शिक्षक टेक-सेवी नहीं हैं। यदि शिक्षक प्रौद्योगिकी को समझ नहीं पाएंगे, तो छात्रों को अच्छी सामग्री और गुणवत्ता की शिक्षा नहीं मिलेगी। इसके अलावा, अन्य ऑनलाइन शिक्षा कंपनियों के पास अनकन्वेन्शनल पोर्टल हैं जो ऑनलाइन शिक्षा तथा शिक्षकों द्वारा कक्षा में जो पढ़ाया जाता है उसके अंतर को कम करने में विफल रहते हैं। यह छात्रों को भ्रमित करता है तथा उनमें विरोध पैदा करता है। हमने इन समस्याओं को हल करने और शिक्षकों और छात्रों दोनों को सेवा देने के लिए हमारे उत्पादों को डिजाइन किया है। हम इन उत्पादों को स्कूल के निर्णय लेने वाले अधिकारी के माध्यम से प्रदान करते हैं।

आपको क्या/कौन प्रेरित करता है? आपका सफलता का मंत्र क्या है?

एक काउन्सलर के रूप में, मेरा मानना है कि ऊपरी प्रेरणा जल्द ही खत्म हो जाती है। किसी व्यक्ति को एक संतुष्ट जीवन जीने के लिए खुद को अंदर से प्रेरित होना चाहिए। हाँ! मैं प्रतिदिन पठन करता हूं, अनुसंधान करता हूं और हाल के रूझानों से खुद को अप-टू-डेट रखता हूं ताकि मैं उद्योग को बेहतर ढंग से समझ सकूं और बेहतर होने के लिए क्या किया जा सकता है यह जान सकूं।
सफलता का मेरा मंत्र टीम है - जिनके साथ मिलकर हम अधिक परिणामों को प्राप्त कर सकते है।

अन्य स्टार्ट-अप / संस्थापकों को आप क्या सुझाव देंगे?

 अपने ग्राहकों की वर्तमान समस्याओं को हल करने के साथ-साथ उनकी भविष्य की समस्याओं/जरूरतों का भी आकलन करें और उसके लिए भी काम करें। लेकिन व्यवसाय शुरु करने के लिए यह आवश्यक नहीं कि आप नई समस्याओं को ही हल करें। अपने चारों ओर देखें, कई सेगमेंट होगें जहाँ ग्राहक समान परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इन सेगमेंट की समान समस्या का समाधान करें।

शिक्षा अथवा प्रोद्योगिकी से संबंधित किसी विषय पर आप ज़ोर देना चाहते हैं?

हमें भारतीय शिक्षा प्रणाली में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हमारे ज्यादातर कॉलेज दुनिया के शीर्ष कॉलेजों में शामिल नहीं हैं। इसका कारण बहुत साफ है - भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रों की जिंदगी में सीखने और मूल्यवान बनाने की कोई धारणा ही नहीं है। शैक्षिक संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा ने शिक्षा के ध्यान को प्रभावित किया है। वे छात्रों के विकास के लिए एक अनुकूल माहौल नहीं बना रहे हैं जिससे वे महसूस कर सकें कि शिक्षा जानने, व सीखने से संबंधित है, कमाई से नहीं। मुझे अभी भी विश्वास है कि हमें एक लंबा सफर तय करना है जिससे भविष्य में स्थिति बेहतर हो सके।

आपकी राय में, एड-टेक के क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

सबसे महत्वपूर्ण चुनौती जो मेरे ध्यान में आ रही है वह है स्मार्टफोन के लिए शैक्षिक एप्लिकेशन्स को लाना। स्मार्टफोन एड-टेक के लिए एक अच्छी संपत्ति हो सकता है, लेकिन यह पूंजीकरण अपनी चुनौतियों के साथ आता है। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया एप्लिकेशन छात्रों के लिए प्रमुख परिवर्तन हैं, और यह सुनिश्चति करना मुश्किल हो जाता है कि क्या कि छात्र अपने फोन पर शैक्षणिक ऐप्स पर ध्यान देते हैं या नहीं।
एक और चुनौती शिक्षकों को यह आश्वस्त करना है कि प्रौद्योगिकी उनके लिए खतरा नहीं है, बल्कि एक सहायक उपकरण है। प्राध्यापकों, विशेष रूप से स्कूल शिक्षकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्रौद्योगिकी उनका स्थान नहीं लगी बल्कि उनके लिए सहायक साबित होगी।



ज़नरूफ के सह-संस्थापक प्राणेश चौधरी की केंद्रीय मंत्री से मुलाकात



नॉर्थ इंडिया में ऊर्जा संरक्षण करने और लोगों को सौर उर्जा प्रदान करके भारी बिजली के बिल से मुक्ति दिलाने वाली कंपनी ज़नरूफ नॉर्थ इंडिया के साथ ही साथ भारत के अन्य प्रदेशों में भी लोकप्रिय हो रही है। 2016 में स्थापित यह कंपनी लोगों के घरों की छतों पर सौर उर्जा प्राप्त करने के लिए रूफटॉप इंस्टॉलेशन करती है, जिससे घर के अंदर बिजली की जगह हर उपकरण सौर उर्जा से चलता है। इस तरह कंपनी ने मंहगी होती जा रही बिजली को सौर उर्जा से प्रतिस्थापित कर दिया है। 2016 से 2018 के बीच दो वर्षों के अंदर ही ज़नरूफ ने नॉर्थ इंडिया के सबसे बड़े 10 शहरों में सबसे अधिक रेसिडेंशियल रूफटॉप इंस्टॉलेशन किए हैं।  
सोलार रूफटॉप के बारे में जानने के लिये आप कॉल करें नं 9205695693 पर। ज़नरूफ ने कई्र शहर जैसे आगरा, गुरूग्राम, दिल्ली, चंडीगढ इत्यादि में सोलार रूफटॉप इंस्टॉल किये हैं।
हाल ही में भुवनेश्वर में हुए कॉन्फ्रेंस समारोह में कंपनी के सह-संस्थापक प्राणेश चौधरी ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, कौशल विकास और उद्यम, केंद्रीय मंत्री माननीय  धर्मेंद्र प्रधान को ज़नरूफ ऐप के बारे में जानकारी दी। साथ ही बताया गया कि ज़नरूफ ऐप कैसे काम करता है और किस तरह यह सौर उर्जा का उपयोग करके ऊर्जा संरक्षण करने में योगदान दे रहा है।
क्या आपको पता हैं?
कि हमारी पृथ्वी में प्रति वर्ग मीटर में लगभग 1366 वॉट का सीधा सौर प्रकाश आता है। सौर उर्जा के उपयोगकर्ताओं द्वारा लगभग 75 मिलियन बैरल तेल और 35 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड की वार्षिक बचत होती है।
यदि दुनिया के केवल 1 प्रमिशत भूमि के हिस्से पर भी सोलर पैनल लगाए जाते हैं तो वह पूर्ण वैश्विक बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इन उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखकर ज़नरूफ ने स्मॉल होम, मिडियम होम, लार्ज होम के रूप में घर की बिजली की आवश्यकता के आधार पर इंस्टॉलेशन की क्षमता के लिए उनका वर्गीकरण किया है।
स्मॉल होम- जिसमें 1-2 लोग रहते हैं, 3 किलो वॉट का सिस्टम पर्याप्त होता है तथा इसमें फ्रिज, लाइट्स (10 से कम) वॉशिंग मशीन(1 लोडध्सप्ताह), एलसीडी टीवी, डिशवॉशर(2 लोडध्सप्ताह) आदि कवर होते हैं।
मिडियम होम- जिसमें 2-3 लोग रहते हैं, 5 किलो वॉट का सिस्टम पर्याप्त होता है तथा इससे फ्रिज, लाइट्स (10-20), एलसीडी टीवी, वॉशिंग मशीन(3-5 लोडध्सप्ताह), डिशवॉशर (अधिकतम 5 लोडध्सप्ताह), कंप्यूटर, छोटा एसी इत्यादि कवर होते हैं।
लार्ज- होम दृ जिसमें 4़ लोग रहते हैं, 10 किलो वॉट का सिस्टम पर्याप्त होता है तथा इसमें फ्रिज, हेलोजन लाइट्स (20़), प्लाज्मा मल्टीपल टीवी, वॉशिंग मशीन(5़ लोडध्सप्ताह), डिशवॉशर(5़ लोडध्सप्ताह), क्लॉथ ड्रायर(5़ लोडध्सप्ताह), कंप्यूटर, बड़े या मल्टीपल एसी, पूल पंप इत्यादि कवर होते हैं।
पर्यावरण की रक्षा करते हुए बढ़ती जनसंख्या व बढ़ते ऊर्जा उपयोग का किफायती व पर्यावरण हितैषी समाधान ज़नरूफ ने निकाला है, जो आज के समय की आवश्यकता है।    

नाबार्ड ने किया राज्य स्तरीय आम महोत्सव का आयोजन



 पूर्ण रूप से जैविक और कार्बाइड मुक्त



·        
रा     

झारखंड में नाबार्ड ने पहली बार राज्य स्तरीय आम महोत्सव का आयोजन 06 जुलाई (शुक्रवार) को  करमटोली रोड स्थित अपने कार्यालय  परिसर में किया। इसका कार्यक्रम का उदघाटन श्री शरद झा, मुख्य महा प्रबन्धक , नाबार्ड ,द्वारा किया गया।

·        आम महोत्सव में विभिन्न प्रकार के आम यथा दशहरी , आम्रपाली , लंगड़ा , मलिका , जरदालू इत्यादि  प्रदर्शित किए गए। इसके अलावा इस महोत्सव में भिन्न –भिन्न प्रकार के मसाले, शहद , लघु वन उपज और जैविक उत्पाद (उदा. केचुआ खाद) इत्यादि की बिक्री की गयी।
·        नाबार्ड के वाडी कार्यक्रम के तहत सम्पूर्ण झारखंड यथा लोहरदगा कोडरमा,हजारीबाग, दुमका, चतरा, जामताड़ा, गुमला , राँची,  खूंटी , गिरिडीह, बोकारो , पाकुड़, साहिबगंज और  देवघर से  लाभार्थी आदिवासी किसानों ने इस महोत्सव ने भाग लिया तथा अपने कृषि उत्पाद का प्रदर्शन किया ।
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  कार्यक्रम को काफी सकारात्मक  प्रतिक्रिया मिली हैं।  भारी संख्या में लोगो ने इन जैविक पदार्थों को खरीदने में रुचि दिखाई। लोकप्रिय आदिवासी उत्पाद यथा “मड़वा” और स्थानीय फल जैसे “जामुन” की काफी मांग थी और इसकी बिक्री तुरंत हो गयी ।
·        नाबार्ड के आम महोत्सव में आदिवासी किसानों के उत्पादों की बिक्री काफी तेजी से हुई हैं, उदाहरण के लिए चतरा  के किसानों ने मात्र एक घंटे में 200 किलोग्राम आमों  की बिक्री की और महोत्सव के पहले दिन ही उनका स्टॉक समाप्त हो गया।
·        श्री शरद झा ,मुख्य महा प्रबन्धक, नाबार्ड झारखंड अपने सम्बोधन में इस प्रकार के आयोजन के लक्ष्य को समझाया :

·        Quote by Shri. Sharad Jha, CGM, NABARD
·        “झारखंड तथा सम्पूर्ण भारत मे आदिवासी समुदाय अपने खेतों , वनो और प्रकृति से आंतरिक रूप से जुड़े हुए हैं।  यह इनके डीएनए (DNA) में  विद्दमान है और हमे इसकी पुरजोर सराहना करने के आवश्यकता है। उन्हे उनके  खेतो , वनों और प्रकृति से अलग किए बिना, उन्हे सतत आजीविका समाधान प्रदान की जा सकती हैं । नाबार्ड का वाडी कार्यक्रम इस तरह के अत्यधिक सफल हस्तक्षेपों मे से एक है।

·        नाबार्ड ने झारखंड में 26000 एकड़ भूमि में 28000 वाडी (फल बागान) को शामिल करते हुए 41 परियोजनाओं का समर्थन किया है। वाडी किसानों के अप्रयुक्त क्षेत्रों में  इन फल के पोधों और आंतरिक अभ्यासों के माध्यम से हमारे आदिवासी किसान रुपये 20,000 से 40,000 प्रति एकड़ /प्रति सत्र एक आश्वासित/पूरक आय अर्जित कर सकते हैं जिससे उनकी वित्तीय सुरक्षा और जीवन स्तर मे काफी सुधार आता है।

·        “वाडी” नाबार्ड द्वारा तैयार की गई एकीकृत आजीविका  प्रारूप है जिसको राज्य सरकार और Corporates द्वारा अपनाया जाना चाहिए ताकि राज्य के आदिवासी जनसंख्या के बड़े भाग को इसमे सम्मिलित किया जा सके।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में विशेष रिकवरी ऑफर लांच




रांची। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने विशेष रिकवरी ऑफर पेश किया है। इसके तहत ऋण न चुका पाने वाले उधारकर्ताओं को 25 से लेकर 60  फीसद तक की छूट दी जा रही है। इसकी जानकारी गुरूवार को रांची क्षेत्र के सहायक महाप्रबंधक ऐ के मिलू ने दी। उन्होंने कहा कि इसके तहत एक करोड़ रूपये तक के एनपीए खाताधरक आएंगे। इससे वे अपना क्रेडिट रेटिंग ठीक कर सकेंगे। पिछले वित्त वर्ष में 2500 की तुलना में इस वर्ष 5000 किसानों एवं लघु उद्यमियों को समझौते के तहत लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है।


शुक्रवार, 6 जुलाई 2018

लंदन में संपन्न हुआ वातायन सम्मान समारोह





लंदन। यह वर्ष हिंदी भाषा के वैश्वीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण है क्योंकि इस वर्ष भारत एवं मॉरिशस सरकार द्वारा 11वें विश्व हिंदी सम्मलन का आयोजन होने जा रहा है। वाणी फाउंडेशन के संरक्षण में ब्रिटेन की तीन संस्थायें - यू.के हिंदी समिति, वातायन:पोएट्री ऑन साउथ बैंक एवं कृति यूके - हिंदी महोत्सव-2018 का आयोजन ब्रिटेन के चार शहरों में बड़ी धूमधाम से किया, जो एक प्रयास था भाषा और संस्कृति के विद्वानों और प्रतिष्ठित कलाकारों को हिंदी के विद्यार्थियों और युवाओं से जोड़ने का। अकादमिक सत्रों में गंभीर चर्चाओं, काव्य गोष्ठियों, पुस्तकों के विमोचन, पुस्तक-प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों, हिंदी के छोटे बड़े विद्यार्थियों के कविता पाठ के अतिरिक्त इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण अंग रहा फ्रेडरिक पिनकॉट यू.के अवॉर्ड-2014 से सम्मानित, वातायन: पोएट्री ऑन साउथ बैंक द्वारा हिंदी और संस्कृति की विभूतियों को सम्मानित करना।
नेहरु केंद्र-लंदन के सह-निदेशक, श्री ब्रिज किशोर गोहेर के औपचारिक स्वागत भाषण एवं डॉ निखिल कौशिक, फिल्मकार, कवि एवं पेशे से नेत्र-सर्जन, की वंदना के पश्चात, वातायन की अध्यक्ष एवं अकैडमी की निदेशक, मीरा कौशिक, ने वातायन के विषय में जानकारी दी। विशेष अतिथियों - श्री वीरेंद्र शर्मा, पार्षद, भारतीय उच्चायोग-लंदन के हिंदी अधिकारी, श्री तरुण  कुमार एवं श्री अरुण माहेश्वरी, वाणी प्रकाशन के अध्यक्ष - ने वातायन की संस्थापक दिव्या माथुर की सहायता से अंतर्राष्ट्रीय वातायन कविता पुरस्कार वितरित किए। कार्यक्रम का संचालन किया पद्मभूषण डॉ मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार से सम्मानित और यूके हिंदी-समिति के डॉ पदमेश गुप्त ने, जो हिंदी समारोह-2018 के दी आयोजक भी हैं। श्री यतीन्द्र मोहन मिश्र (वातायन कविता सम्मान), डॉ कुसुम अंसल (अंतर्राष्ट्रीय वातायन शिखर सम्मान), श्री कृष्ण कुमार गौड़ (अंतर्राष्ट्रीय वातायन संस्कृति-सम्मान) और श्रीमती सरोज शर्मा (अंतर्राष्ट्रीय वातायन विशेष सम्मान) से सुशोभित किया गया। स्थानीय लेखिकाओं - श्रीमती कादम्बरी मेहरा, अरुण सब्बरवाल, तिथि दानी ढोबले और इंदु बरोट ने प्रत्यय-पत्र पढ़े।
महोत्सव की निदेशक एवं वाणी प्रकाशन-दिल्ली की अदिति माहेश्वरी में प्रतिष्ठित लेखक श्री अनिल जोशी, जो फिजी में चांसरी के प्रमुख एवं द्वितीय सचिव (हिंदी); जिन्होंने अपनी नई पुस्तक, प्रवासी लेखन: नई ज़मीन नया आसमान, श्री वीरेंद्र शर्मा, डॉ निखिल कौशिक, डॉ पद्मेश गुप्त एवं दिव्या माथुर को भेंट की। श्री कृष्ण कुमार गौड़ के उदगार के पश्चात, सम्मानित कवियों - श्री यतीन्द्र मोहन मिश्र एवं डॉ कुसुम अंसल  ने अपनी कुछ लोकप्रिय रचनाएं सुनाईं, जिन्हें श्रोताओं ने करतल ध्वनि से सराहा और भारत से पधारे कवि शशांक प्रभाकर एवं डॉ शम्भू मनहर ने भी कविता पाठ किया।
वातायन की कोषाध्यक्ष एवं लेखिका शिखा वार्ष्णेय ने ज्ञापन प्रस्तुत किया और श्रोताओं को शानदार जलपान के लिए आमंत्रित किया। स्थानीय कवियों, मीडिया-कर्मियों एवं कलाकारों के अतिरिक्त इस कार्यक्रम में उपस्थित थे डॉ शाम मनोहर पांडे, डॉ अचला शर्मा, परवेज़ आलम, कृष्ण कुंजरू, उषा राजे सक्सेना, अरुणा अजितसरिया, सरोज श्रीवास्तव, एवं भारत से पधारे बहुत से लेखक, जिनमें शामिल थीं नीलिमा डालमिया आधार, लेखिका मंजु लोधा।


क्रशर एवं माइंस वेलफेयर एसोसिएशन का एकदिवसीय धरना



हजारीबाग। अपनी छह सूत्री मांगों को लेकर क्रशर एवं माइंस वेलफेयर एसोसिएशन ने  समाहरणालय के समक्ष एकदिवसीय धरना दिया। धरना को संबोधित करते वक्ताओं ने कहा कि जिले के इचाक, पदमा, सदर एवं बरकट्ठा प्रखंड में लगभग 400 क्रशर है। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक पत्थर खदान भी है। पिछले एक साल में जिला प्रशासन ने सैकड़ों क्रशर को तोड़ दिया गया। जिसमें अधिकांश लाइसेंसी है। प्रशासन की कार्रवाई से आधा क्रशर बंद हो चुके हैं। 50 हजार मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। मजदूरों में अधिकांश आदिवासी, दलित व पिछड़े वर्ग से हैं। वे सब भूखे मरने की स्थिति में आ गए हैं। क्रशर संचालक लाइसेंस लेना चाहते हैं। दर्जनों लाइसेंस के आवेदन वन एवं प्रदूषण विभाग के पास लंबित है। लाइसेंस के लिए पांच लाख रुपए नाजायज रूप से मांग की जाती है। वक्ताओं ने क्रशर उद्योग में आए संकट के लिए प्रशासन को जिम्मेवार ठहराया। धरना के अंत में छह सूत्री मांग की गई। धरना को पूर्व सांसद वीपी मेहता, जदयू नेता बटेश्वर मेहता, सत्यनारायण प्रसाद, शैलेंद्र कुमार मेहता, बसंत नारायण मेहता, विनोद प्रसाद मेहता, राजेश मेहता, मोहन प्रसाद मेहता, वलदेव प्रसाद मेहता, महेश मेहता, जयप्रकाश मेहता सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। प्रशासन को चेतावनी दी गई कि नौ जुलाई तक आयुक्त इसका समाधान निकालें, नहीं तो दस हजार लोग प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में धरना प्रदर्शन करेंगे।

मुखिया संघ ने दी दी सामुहिक इस्तीफे की चेतावनी




बरही। बरही पूर्वी पंचायत भवन में मुखिया संघ की बैठक हुई। अध्यक्षता मुखिया संघ अध्यक्ष सह खोड़ाहार मुखिया खिरोधर यादव व संचालन विष्णुधारी महतो ने किया। बैठक में संगठन मजबूती व एकजुट होने पर चर्चा किया गया। नरही मुखिया संघ के तमाम मुखिया ने एक स्वर में कहा कि जिला प्रशासन के द्वारा बार बार मुखिया को तंग करने का प्रयास किया जा रहा हैं। आये दिन सोलर लाइट व टैंकर सहित अन्य सामान को लेकर जांच के नाम पर परेशान किया जाता हैं। झारखण्ड प्रदेश के लगभग सभी पंचायतों में एक समान कार्य किया जा रहा हैं। सोलर लाइट की खरीददारी सक्षम एजेंसी के कोटेशन पर किया गया हैं। जिस दिन एजेंसी ने यह समान पंचायत को उपलब्ध करवाया हैं। उस राशि से ज्यादा राशि में जिला प्रशासन ने टैंकर व सोलर लाइट खरीददारी कर रखा हैं। मुखिया ने जिला प्रशासन पर सवाल खड़ा किया हैं। साथ ही कहा कि सरकार के गलत रवैये से परेशान व बाध्य होकर बरही मुखिया संघ ने विरोध जताया हैं। साथ ही मुखिया संघ ने अब तक जो खरीददारी किया हैं, उसके लिये राज्य सरकार का कोई दिशा निर्देश नही था। ऐसे में कोई मुखिया विकास का रूप रेखा कैसे तय कर सकता हैं। जबकि आधे से ज्यादा मुखिया महिला हैं। इस बावत मुखिया संघ अध्यक्ष खिरोधर यादव ने कहा कि संघ के लिये जरूरत पड़ी, तो प्रखंड का मुखिया संघ एक साथ इस्तीफा देकर जनहित की लड़ाई लड़ेगा। जनता द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर प्रशासनिक पदाधिकारी लगातार दबाव बना रहे हैं, जो बिल्कुल गलत हैं। इसे बर्दाश्त नही किया जाएगा। साथ ही बैठक में निर्णय लिया गया कि आठ जुलाई को बरही मुखिया संघ रांची में आयोजित होने वाले प्रदेश मुखिया संघ की बैठक में शामिल होगा। वहीं जांच के नाम कारवाई व वित्तीय शक्ति जब्त के आलोक में संघ झारखण्ड हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर करेगा। धनवार मुखिया चमेली देवी शक्ति वापस करवाने के लिये जिला प्रशासन सहित अन्य पदाधिकारियों से नियम पूर्वक मिलने का काम करेगा। मौके पर खिरोधर यादव, हरेंद्र गोप, विष्णुधारी महतो, प्रभु भुइयां, सकलदेव यादव, छोटन ठाकुर, दशरथ यादव, तब्बसुम आरा, रमेश ठाकुर, विजय यादव, टेकलाल यादव, बालेश्वर साव, दिनेश कुमार, बासुदेव कुमार यादव मौजूद थे।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...