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शनिवार, 17 नवंबर 2018

महिलाओं की इज्जत करना हर पुरूष का दायित्वः बीएन तिवारी



हरिओम शर्मा

नई दिल्ली। महिलाओं की इज्जत करना हर पुरूष का दायित्व है फिर चाहे वह उसका भाई हो दोस्त हो पति हो या फिर सहकर्मी और इस चलन की शुरूआत हर इंसान को अपने घर से करनी चाहिए। एक महिला ही है जो अपने बेटे को महिलाओं की इज्जत करना सिखा सकती है यह कहना था फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉय के निदेशक बी. एन. तिवारी का जो मारवाह स्टूडियो में चल रहे 11वें ग्लोबल फिल्म फेस्टिवल में शिरकत करने आये, उन्होंने आगे कहा की हिंदी फिल्मो में महिला पर आधारित फिल्मे अब ज्यादा बनने लगी है मदर इंडिया से लेकर पिंक तक हिंदी सिनेमा में बहुत बदलाव आया है और वो बदलाव समाज में भी देखने को मिलता है। इस अवसर पर रोमानिया के हाई कमिश्नर राडु ऑक्टेवियन डोबरे, स्लोवेनिया के हाई कमिश्नर जोज़ेफ़ डरोफैनिक, लिसोथो के हाई कमिश्नर बोथाटा सिकोन, निर्माता श्रीधर चारी, निर्देशक राजेंद्र पारसेकर, फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉय के गंगकेशवर लाल श्रीवास्तव, अशोक दुबे और अर्पणा अग्रवाल उपस्थित हुए।
राडु ऑक्टेवियन डोबरे ने कहा की मुझे इंडियन फिल्मे बहुत पसंद है खासकर वह फिल्मे जिसमे महिला का एक क्रन्तिकारी रूप नज़र  आता है।  जोज़ेफ़ डरोफैनिक ने कहा की मुझे यहाँ आकर हमेशा ही  एक अजीब सी ख़ुशी मिलती है क्योकि संदीप मारवाह और उनके छात्रों का जोश देखकर एनर्जी आ जाती है। बोथाटा सिकोन ने कहा हमारे देश में भारतीय फिल्मे बहुत पसंद की जाती है, यहाँ की महिला का  मज़बूत किरदार भारतीय फिल्मो में नज़र आता है। संदीप मारवाह ने कहा की आज बहुत अच्छा लग रहा है महिला सशक्तिकरण और इंडियन सिनेमा के विषय पर सभी के विचार सुनकर। फिल्मो का लोगो पर इतना असर है की मधुबाला से लेकर आलिया तक,  अगर माँ की बात करे तो निरुपा रॉय से लेकर रीमा लागू तक, और कामकाजी महिला को देखे तो विद्या सिन्हा से लेकर विद्या बालन तक सभी चेहरे हमारी आँखों के सामने नज़र आ जाते है, सच कहा जाए तो महिलाओ के बिना फिल्म अधूरी है। अर्पणा अग्रवाल ने कहा मेरा मानना है की महिलाए पुरुषों रीढ़ होती है जिसके बिना समाज खड़ा नहीं हो सकता। इस अवसर पर  निर्माता श्रीधर चारी  ने कहा कि महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पिछड़ी नहीं रह गयी है बल्कि उनसे आगे निकल गयी है हर क्षेत्र में, और मेरे लिए गौरव की बात है मुझे इतनी विशिष्ठ महिलाओं को सम्मानित करने का अवसर मिला। समारोह के दूसरे दिन कई फिल्मो की स्क्रीनिंग हुई जैसे काग पंत, स्किन ऑफ़ मार्बल, बनारसी जासूस और नो माइंड।  

शुक्रवार, 16 नवंबर 2018

अंतर्कलह में डूबे तोते से परेशानी क्या !

बकोरिया कांड को लेकर परेशान पुलिस झारखंड सरकार से कर सकती है ऐसी अधिसूचना की मांग

देवेंद्र गौतम

प. बंगाल और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों ने अपने राज्यों में सीबीआई की सीधी दखलअंदाजी पर रोक लगा दी है। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। दिल्ली पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम-1946 में यह प्रावधान है कि केंद्र शासित राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों में कोई कार्रवाई करने के लिए सीबीआई को संबंधित सरकारों से अनुमति लेनी होगी। अभी तक अधिकांश राज्यों में काम करने के लिए सीबीआई को राज्य सरकारों की अनुमति मिली हुई है। पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश की सरकारों ने ऐसा निर्णय चाहे जिन तात्कालिक कारणों से लिया हो लेकिन इसके दूरगामी प्रभाव विपरीत पड़ेंगे। खासतौर पर भ्रष्ट सरकारें हमेशा सीबीआई जांच से भागने का प्रयास करती हैं। उनकी कोशिश होती है कि राज्य के अंदर उनके नियंत्रण वाली एजेंसियां जांच करें और उनके मनोनुकूल रिपोर्ट सौंपें। ताकि मामले की लीपापोती संभव हो सके। लेकिन राज्य सरकारें सीबीआई को जांच करने से तब नहीं रोक सकतीं जब यह आदेश किसी न्यायालय ने दिया हो या केंद्र सरकार ने आदेश दिया हो। उस समय राज्य सरकार ज्यादा से ज्यादा सीबीआई के साथ सहयोग नहीं कर अपना विरोध जता सकती है।

अभी झारखंड में बकोरिया एनकाउंटर को लेकर ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। राज्य के डीजीपी डीके पांडे पर सीधे फर्जी मुठभेड़ दिखाकर 12 निर्दोष लोगों को मार गिराए जाने के मामले में संलिप्तता के आरोप लगे हैं। हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। इसे लेकर पुलिस महकमें में छटपटाहट है। पुलिस चाहती है कि हाई कोर्ट के फैसले  को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाए लेकिन मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव इसके पक्ष में नहीं है। सीबीआई जांच का विरोध करने की चाहत पुलिस की भूमिका को और संदिग्ध बनाएगी। ऐसा सरकार का मानना है। डीजीपी चाहते हैं कि सीआइडी जांच को ही पर्याप्त मान लिया जाए। मामले को यहीं रोक दिया जाए। आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकारों की तर्ज पर डीजीपी झारखंड सरकार से भी इसी तरह की अधिसूचना जारी करने की सलाह दे सकते हैं। लेकिन नियमतः हाई कोर्ट को ऐसा आदेश देने का अधिकार है। राज्य सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

यह अलग बात है कि अभी सीबीआई मुख्यालय में ही तूफान मचा हुआ है। निदेशक और विशेष निदेशक के बीच न्यायिक लड़ाई में सीबीआई की विश्वसनीयता दांव पर लगी हुई है। एक-दूसरे पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाकर वे विभाग की भद पिटवा रहे हैं। अभी जो कार्यवाहक निदेशक हैं उनपर कोई नीतिगत फैसला लेने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखा है। सवाल है कि जब देश की इस सबसे बड़ी जांच एजेंसी की स्थिति परकटे परिंदे के समान हो गई है और कोर्ट की अनुमति के बिना वह कोई उड़ान  नहीं भर सकती तो आंध्र प्रदेश और प. बंगाल की सरकारों को ऐसी अधिसूचना जारी करने की जरूरत ही क्यों पड़ी। सीबीआई के पास वैसे भी काम का इतना बोझ है कि अकारण राज्य सरकारों के मामलों में टांग अड़ने की उसे फुर्सत नहीं है। रहा केंद्र सरकार द्वारा ुसके दुरुपयोग की आशंका का सवाल तो फिलहाल केंद्र सरकार स्वयं राफेल मामले को लेकर परेशान है। अभी सीबीआई को अनुकूलित करने का उसका प्रयास ही विफल होता दिख रहा है। 

CaratLane launches its first store in Ranchi

Ranchi. CaratLane, India's leading omni-channel jeweller is going strong in the East with its 1st store inaugurated in Ranchi, Jharkhand and now it has 46 stores nationwide. With discerning customers looking for trustworthy jewellery brands, CaratLane’s association with Tanishq has only come across as a boon for those looking to buy precious and contemporary jewellery.

Situated at the Ranchi Main Road, this outpost of CaratLane is designed to usher in a uniquely smart jewellery buying experience. Speaking on the occasion Mithun Sacheti, Founder & CEO, CaratLane said, “We are delighted to launch our 1st store in Ranchi on Jharkhand Foundation Day to cater to our loyal customers who have been really looking forward to a CaratLane store in the city. This store is located at a prime location and we are confident that it will entice our loyal customers and new customers alike.”

CaratLane stores are very different from the typical Indian jewellery stores. They are designed for a truly omnichannel experience. “We've designed a whole new experience for our customers that help them discover precious jewellery, like never before. The designs in the store are modern, unique and perfect for everyday wear. Our latest collection ‘Weave’, meticulously crafted with gorgeous interlaced golden thread and strokes of the diamond will also be showcased here. The store also houses a solitaire corner and the virtual try-on 'magic mirror' for those 'just looking' moments. Our store is a testament to our commitment to making modern, affordable jewellery increasingly accessible” added Sacheti.
“CaratLane always has beautiful collections. We are excited to have CaratLane launch its first ever store in Ranchi!” said Ramatar Rajgharia, a CaratLane customer from Ranchi.
For a brand that’s on a mission to democratize access to jewellery, this store launch is another step forward in that direction.
“Launching a store in Ranchi has always been on the cards for CaratLane. And finally, with this store, we will be able to cater to our customers from Ranchi and make beautiful jewellery more accessible to them. There is also an exclusive flat 25% discount as a limited-period launch offer on diamond jewellery at the Ranchi store” added Avnish Anand, Co-founder, CaratLane who was present at the launch.
Store Address: Shree Nand Bhawan, Sushila Automobiles, Main Road, Adjacent to Max Fashion - 834001. Contact: 7557700075

पारा शिक्षकों के प्रति हमेशा संवेदनशील रही है रघुवर सरकार

समारोह में विघ्न डाल किया राज्य की जनता का अपमान
सरकार ने दिया गलती सुधारने का एक मौका

जनता को संबोधित करते मुख्यमंत्री रघुवर दास
रांची। रघुवर दास सरकार ने पारा शिक्षकों की मांगों के हमेशा गंभीरता से लिया है और उन्हें पूरा करने की भरसक कोशिश की है। सरकार ने  राज्य स्थापना दिवस को राज्य की आम जनता की आकांक्षाओं और गौरव का प्रतीक बताते हुए पारा शिक्षकों को समारोह में व्यावधान न डालने की अपील की थी। लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे। राज्य के इस गौरव पर्व के मौके पर विघ्न डालने से वे बाज नहीं आए। अपनी मांगों को लेकर दबाव डालने के लिए उन्होंने जो वक्त चुना वह झारखंड के स्वाभिमान के खिलाफ था। उन्होंने सुरक्षा बलों को बल प्रयोग के लिए विवश कर दिया। झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने पारा शिक्षकों के कल्याण के लिए किए गए कार्यों का विवरण दिया है। सरकार उन्हें काम पर सशर्त वापसी का एक मौका भी दे रही है।

पारा शिक्षकों के संबंध में राज्य सरकार द्वारा उनके उन्नयन, कल्याण एवं मानदेय वृद्धि के क्रम में उठाये गये कदम:-
1. पारा शिक्षकों के संघ एवं प्रतिनिधियों के साथ 26.08.2015 को सरकार के साथ हुए समझौते के बिन्दु का अनुपालन किया गया जो निम्न है:-
महिला पारा शिक्षिका को 2 दिन का विशेष अवकाश।
10 प्रतिशत मानदेय की वृद्धि विभागीय पत्रांक 1657 दिनांक 30.11.2017 द्वारा की गई (प्रभावी 01.04.2017)।
ग्राम शिक्षा समिति द्वारा दुर्भावना से पारा षिक्षक के विरूद्ध की गयी कार्रवाई के लिये अपील जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के समक्ष करने का प्रावधान।
उपस्थिति विवरणी को मुखिया/उपमुखिया के प्रति हस्ताक्षरित किया जाना (पत्रांक 199 दिनांक 11.02.2016)।
पारा शिक्षक कल्याण कोष 5 करोड़ के विरूद्ध 10 करोड़ अनुशंसित।
महिला पारा शिक्षक को मातृत्व अवकाष 180 दिन देय (पत्रांक 439 दिनांक 17.03.2018)।
संतोषप्रद सेवा 60 वर्ष की उम्र तक।

2. सरकार के द्वारा एकीकृत पारा शिक्षक संघ के मांग पर गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा की गई अनुशंसा मुख्य सचिव द्वारा पारा शिक्षक प्रतिनिधियों को 08.11.2018 को सूचित किया गया -
★ पारा शिक्षकों के कल्याण हेतु कल्याण कोष हेतु रू0 10 करोड़।
जे टेट की अवधि 5 वर्ष से बढ़ाकर 07 वर्ष।
टेट पास के मानदेय में 20 प्रतिषत वृद्धि कर -
★ स्नातक प्रशिक्षित एवं टेट पास को रू0 12000/- प्रति माह
इंटर प्रशिक्षित टेट पास को रू0 11000/- प्रति माह
★ अन्य प्रशिक्षित के मानदेय में भी बढ़ोत्तरी
प्रारंभिक विद्यालयों में सरकारी नियोजन में रिक्त पदों का 50% पद पारा शिक्षक हेतु आरक्षित।

मुख्य सचिव के अनुरोध के बाद भी लगभग 70% पारा शिक्षकों ने बिना अनुमति विद्यालय से अनुपस्थित होकर राज्य स्थापना दिवस, 2018 के सरकारी कार्य में बाधा डालने का कार्य किया। राज्य परियोजना निदेशक, झारखण्ड शिक्षा परियोजना परिषद् के पत्रांक 20 दिनांक 16.01.2017 एवं विभागीय प्रधान सचिव के पत्रांक 1637 दिनांक 12.011.2018 में स्पष्ट निदेश का उल्लघन किया गया है।

उक्त के क्रम में अपील है कि ऐसे पारा शिक्षक जो किसी भय अथवा संघ के गलत दवाब के कारण विद्यालय नहीं गये है, स्वेच्छा से अपना पक्ष स्पष्ट रूप से लिखित रूप में अंकित करते हुये एवं भविष्य में गलती की पुनरावृत्ति न करने की शर्त के साथ दिनांक 20.11.2018 तक विद्यालय में योगदान देकर कार्य प्रारंभ करे। दिनांक 22.11.2018 से रिक्त स्थानों पर सुयोग्य अभ्यथियों के चयन प्रक्रिया प्रारंभ करने का निदेश अलग से निर्गत किया जा रहा है।

कृषि में नवाचार समय की जरूरतः सुरेश प्रभु

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग और नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि दुनियाभर के देश जलवायु परिवर्तन के खतरे का सामना कर रहे है, ऐसे में कृषि क्षेत्र में नवाचार की सख्त जरूरत है। श्री प्रभु आज नई दिल्ली में कृषि स्टार्ट-अप्स द्वारा नवाचार पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे।
श्री प्रभु ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में खाद्यान्न की और अधिक मांग होगी क्योंकि विश्व की आबादी बढ़ती जा रही है जिसके लिए सीमित उपजाऊ जमीन पर कम से कम पानी का इस्तेमाल करते हुए अधिक से अधिक फसल उपजाने के लिए कृषि स्टार्ट-अप्स की जरूरत है। श्री प्रभु ने खाद्यान्न, फलों और सब्जियों की बर्बादी को कम से कम करने के लिए नवाचार लाने का आह्वान किया।
वाणिज्य मंत्री ने बताया कि कृषि क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स के लिए काफी संभावनाएं हैं जो अभी मुख्य तौर पर विचार मंचों और विनिर्माण तक सीमित है। उन्होंने कहा कि नवाचारों की मदद से अधिक उपज देने वाले बीमारी रहित फसलों का उत्पादन, भूमि पोषण नक्शे, उन्नत डेयरी, मुर्गीपालन और मत्स्य प्रौद्योगिकी को विकसित करना चाहिए।
श्री सुरेश प्रभु ने कृषि स्टार्ट-अप्स को अधिक नवाचारयुक्त बनाने का आह्वान करते हुए बताया कि सरकार स्टार्ट-अप्स के विकास हेतु सुविधाएं मुहैया कराने के लिए एक समग्र रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय स्टार्ट-अप्स समुदाय के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है।
श्री सुरेश प्रभु ने विभिन्न वर्गों में कृषि स्टार्ट-अप्स को नवाचार पुरस्कारों से सम्मानित किया और फिक्की की पीडब्ल्यूसी जानकारी रिपोर्ट भी जारी की।

देश के 91 जलाशयों के जल स्तर में गिरावट

नई दिल्ली। 15 नवंबर, 2018 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 103.735  बीसीएम (अरब घन मीटर) जल संग्रह हुआ। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 64  प्रतिशत है। 08  नवंबर, 2018 को समाप्‍त सप्ताह में जल संग्रहण 67 प्रतिशत था। 15 नवंबर को समाप्‍त सप्‍ताह में यह संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 99 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 97  प्रतिशत था।
इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.993 बीसीएम हैजो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 63 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली लाभ देते हैं।
क्षेत्रवार संग्रहण स्थिति : -
उत्तरी क्षेत्र
उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेशपंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैंजो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 14.99 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 83 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 70  प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 72 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।
पूर्वी क्षेत्र
पूर्वी क्षेत्र में झारखंडओडिशापश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 12.97  बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 69 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 77 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 73 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
पश्चिमी क्षेत्र
पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 31.26 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 15.92बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 51 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 67 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 64 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
मध्य क्षेत्र
मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेशउत्तराखंडमध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 29.82 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 70 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 59 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 67 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।
दक्षिणी क्षेत्र
दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेशतेलंगाना एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं)कर्नाटककेरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 30.03 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 58 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 62 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 63 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें हिमाचल प्रदेशपंजाबराजस्‍थानउत्तर प्रदेशउत्‍तराखंडमध्य प्रदेशछत्तीसगढ़कर्नाटक,केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण कम है उनमें झारखंडओडिशा पश्चिम बंगालत्रिपुरागुजरात और महाराष्‍ट्र,एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं)आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं।

जीने के अधिकार की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताः अश्विनी चौबे


                           

बंगलोर। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे  ने बंगलौर में भारतीय इमरजेंसी मेडिसन सोसायटी  द्वारा इमरजेंसी मेडिसन जैसे बढ़ते हुए लोक महत्व के विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया । उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि यह संस्था वर्ष 2000 से लगातार इस सम्मेलन का आयोजन करती आ रही है । संस्था देश में आपातकालीन स्वास्थ्य देखभाल के लिए वर्ष 1999 से लगातार काम कर रही है । श्री चौबे ने कहा कि भारत सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से तथा अपनी कई केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए प्रतिबद्ध है । उन्होंने कहा कि भारत में इमरजेंसी मेडिसन सर्विसेज की विधिवत शुरुआत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से 2005 में हुई । इस समय देश में 31 राज्यों और यूनियन टेरिटरीज में 108 तथा 102 नंबर डायल कर एंबुलेंस बुलाने की सुविधा है । इस समय राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 102 एवं 108 को मिलाकर 18,583 एंबुलेंस काम कर रही है । इसके अलावा निजी क्षेत्र तथा राज्य सरकारों की भी और एंबुलेंस सेवाएं काम कर रही हैं ।
श्री चौबे ने बल देकर कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार जीवन जीने का अधिकार सर्वोच्च है । हेल्थकेयर, विशेष रूप से इमरजेंसी हेल्थकेयर भारत जैसे विश्व के दूसरे विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए एक बहुत बडी चुनौती है, परन्तु सरकार अपने नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं, बेहतर जीवनशैली प्रदान करने के लिए कटिबद्ध होकर लगातार काम कर रही है । आयुष्मान भारत इसका उत्कृष्ठ उदाहरण है । उन्होंने कहा कि 1 वर्ष में भारत में करीब 1,50,785 मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण होती है । डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि भारत में यह चुनौती और भी बढ़ी है क्योंकि जो मौतें होती है वे ज्यादातर 15-49 आयु वर्ग के लोगों की होती है । इस चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक केंद्रीय योजना बनाई है जिसके तहत नेशनल हाईवे पर स्थापित सरकारी अस्पतालों में ट्रौमा सेंटर स्थापित करना शामिल है । अभी तक हमने विभिन्न स्तर के ट्रौमा सेंटर देश में स्थापित किए गए हैं और 30 ट्रौमा सेंटर वर्ष 2020 तक देशभर में और स्थापित करने का प्रस्ताव है । राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रत्येक मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल डिपार्टमेंट खोले जाएंगे । फलस्वरूप इन योजनाओं और हमारी एंबुलेंस सेवाओं के माध्यम से हम इमरजेंसी मेडिकल सर्विस के क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना प्रारंभ करेंगे ।
इमरजेंसी मेडिकल चिकित्सा दुर्घटना होने के बाद यदि ‘फर्स्ट ऑवर’ में जिसको ‘गोल्डन ऑवर’ भी कहते हैं, उसके अंदर मेडिकल सहायता मिल जाती है तो कई लोगों की जानें बच सकती हैं । इमरजेंसी चिकित्सा समय पर बिमार या दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को मिल सके इसके लिए यह आवश्यक है कि देश में इमरजेंसी चिकित्सा की पर्याप्त और उत्कृष्ठ सेवाएं उपलब्ध हो । उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर इमरजेंसी एयर एंबुलेंस सेवा को बड़े पैमाने पर चलाने के लिए काम करना चाहिए । इस समय देश में 37 एमडी सीटें है जो कि इमरजेंसी मेडिसन के क्षेत्र में उपलब्ध है । इसके अतिरिक्त, निजी क्षेत्र के 35 अस्पतालों एवं संस्थाओं में ‘डीएनवी’ की डिग्री इमरजेंसी मेडिसन के क्षेत्र में दी जाती हैं । उन्होंने यह भी कहा कि हमें मेडिकल इमरजेंसी व एमडी की सीटें बढ़ाने और टेक्नीशियन्स का प्रशिक्षित पूल देश में स्थापित करने की आवश्यकता है । इसके लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने एक केंद्रीय योजना इमरजेंसी मेडिकल सुविधाओं के क्षेत्र में शुरु की है ।  जिसके लिए 423 करोड़ रुपए वर्ष 2017-20 तक के लिए निर्धारित किया गया हैं । इस योजना के तहत देशभर में 140 सेंटर स्थापित होंगे जो नेशनल इमरजेंसी मेडिकल लाइफ सपोर्ट कोर्स के क्षेत्र में प्रशिक्षण देंगे ।
अभी तक देश के 39 मेडिकल कॉलेजों को इस स्कीम के तहत ग्रांट दिया गया है । श्री चौबे ने आशवस्त किया कि भारत सरकार इमरजेंसी मेडिकल और इमरजेंसी मेडिसन केयर के प्रति विशेष रूप से सजग है । मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और नेशनल एग्जामिशन बोर्ड इस विषय पर पहले ही गंभीरता दिखा चुके हैं । 30 मार्च, 2016 को भारत सरकार ने ‘गुड समैरिटन’ विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं । भारत सरकार ने एक वर्किंग कोर ग्रुप स्थापित किया है ताकि देश में इंटीग्रेटिड इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं के लिए रोड़मेप तैयार हो सके ।
    इस अवसर पर कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, श्री शिवानन्द एस पाटिल उपस्थित थे । सम्मेलन में देश विदेश से 1200 डेलीगेट्स ने भाग लिया ।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...