यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 2 जनवरी 2020

रेलयात्रियों को बेहतर सुविधाओं के लिए डीआरएम से मिले लक्ष्मण गिलुआ


विनय मिश्रा
चक्रधरपुर।  भाजपा के पूर्व सांसद व झारखंड प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा, अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष अशोक सारंगी व भाजपा जिला उपाध्यक्ष पवन शंकर पांडे ने गुरुवार को चक्रधरपुर के  मंडल रेल प्रबंधक विजय कुमार साहू से मुलाकात की। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने मंडल रेल प्रबंधक को इस क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया। चक्रधरपुर रेलवे मंडल में यात्री सुविधाओं में सुधार संबंधी सुझाव सहित विभिन्न मांगों को लेकर उन्हें एक मांग पत्र भी सौंपा। श्री गिलुवा ने डीआरएम से कहा कि चक्रधरपुर रेल मंडल क्षेत्र से रेलवे को काफी राजस्व की प्राप्ति होती है। बावजूद इसके इस क्षेत्र के रेल यात्रियों को अपेक्षित सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी है। डीआरएम ने श्री गिलुवा की बातों को ध्यान से सुना और रेल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का आश्वासन दिया।

शुक्रवार, 27 दिसंबर 2019

होटल पार्क इन में 300 गरीबों के बीच कंबल बांटे


* मानवता की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं : रमाशंकर प्रसाद

रांची। राजधानी के हटिया स्टेशन रोड पर अवस्थित होटल पार्क ईन परिसर में गरीबों के बीच समाजसेवी व होटल के संचालक रमाशंकर प्रसाद ने अपने पुत्र आदित्य कुमार के जन्मदिन के अवसर पर कंबल वितरण किया। इससे बिरसा चौक व आसपास में रहने वाले लगभग 300 गरीबों को ठंड से काफी राहत मिली। इस अवसर पर श्री प्रसाद ने कहा कि गरीबों की सेवा से उन्हें काफी सुकून मिलता है। वह वर्ष 2004 से प्रति वर्ष दिसंबर माह में गरीबों के बीच कंबल वितरण करते आ रहे हैं। विगत छह वर्षों से अपनी माता स्वर्गीय अशर्फी देवी की स्मृति में हर वर्ष गरीबों के बीच कंबल वितरण कर मानवता की सेवा कर रहे हैं। इस वर्ष अपने पुत्र के जन्म दिवस के अवसर पर उन्होंने पीड़ित मानवता के सेवार्थ कंबल वितरण का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि मानवता की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। ठंड से ठिठुरते असहाय, लाचार और गरीब व्यक्तियों को राहत दिलाने के उद्देश्य से कंबल वितरण करना पुण्य का कार्य है। इस अवसर पर होटल संचालक रमाशंकर प्रसाद की पत्नी व लोकप्रिय समाजसेवी आशा देवी, उनके पुत्र आदित्य कुमार सहित अन्य गणमान्य मौजूद थे।

गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

सुबोधकांत ने आर्चबिशप को दी क्रिसमस की बधाई



रांची। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने क्रिसमस के अवसर पर रांची धर्म प्रांत के आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो से मुलाकात कर क्रिसमस की बधाइयां दी। इस मौके पर श्री सहाय ने कहा कि क्रिसमस का हमारे लिए विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि प्रेम से ही शांति और भाईचारे का साम्राज्य स्थापित होता है। क्रिसमस का त्योहार मानव जाति के प्रति ईश्वर के प्रेम का महापर्व है। श्री सहाय ने कहा कि नि:स्वार्थ प्रेम से ही शांति और भाईचारा का माहौल बनता है। प्रभु यीशु हमें यही शिक्षा भी देते हैं। प्रेम, करुणा, त्याग और उदारता का त्योहार क्रिसमस हमें शांति का संदेश देता है। उन्होंने शांति के राजकुमार प्रभु यीशु के जन्म दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर दीपक लाल , सुधीर सिंह , राजन वर्मा , मंटू श्रीवास्तव , प्रहलाद सिंह एंव अन्य गणमान्य मौजूद थे।

बहुमुखी प्रतिभा की धनी वर्षा दास

छू लो आसमान...


प्रतिभावान कलाकारों की प्रतिभा  छिपाए नहीं छिपती, दबाए नहीं दबती है। प्रतिभा प्रदर्शित करने में उम्र कोई मायने नहीं रखता। इसे सच साबित कर दिखाया है चक्रधरपुर की 12 वर्षीय छात्रा वर्षा दास ने। वर्षा चक्रधरपुर स्थित एस ई रेलवे इंग्लिश मीडियम स्कूल की सातवीं कक्षा की छात्रा है।
बचपन से ही पढ़ने-लिखने में तेज-तर्रार वर्षा को हस्तकला में निपुणता हासिल है। छह वर्ष की उम्र से ही उसकी रूचि हस्तकला में रही है। मूर्ति निर्माण ,थर्मोकोल कटिंग, नम्बर प्लेट, फाईन आर्ट, हैंडीक्राफ्ट, नृत्य, पढ़ाई और संगीत में भी उसकी गहरी रूचि है। उनके पिता बादल दास और माता रेणुका दास वर्षा की प्रतिभा निखारने और तराशने में भरपूर सहयोग करते हैं।
हस्तकला के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों को देखकर उसके सहपाठी भी उनके प्रतिभा का लोहा मानते हैं। वर्षा के पिता बादल दास चक्रधरपुर शहर में दास आर्ट प्रतिष्ठान का संचालन करते हैं। काफी कम उम्र में वर्षा ने हस्तकला के क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल की है, उसे उनके माता-पिता ईश्वरीय देन मानते हैं। पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ वर्षा कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल कर ऊंचाइयों के शिखर पर पहुंचने के लक्ष्य को लेकर सतत प्रयासरत है। कला के अतिरिक्त उनकी इच्छा देश सेवा करने की भी है। वर्षा रक्षा क्षेत्र में अपना कैरियर संवारना चाहती है।
 वर्षा दास का लक्ष्य डिफेंस में जाना है। बचपन से ही वर्षा एक बार किसी चीज को देखने के बाद उसकी कॉपी करने में दक्ष है। उसकी इस विशेषज्ञता को माता-पिता सहित उनके सहपाठी भी ईश्वर की देन मानते हैं। वर्षा का कहना है कि देश सेवा सबसे बड़ा धर्म है। कला के क्षेत्र में नित नए आयाम स्थापित करते हुए नई उपलब्धियां हासिल कर रही वर्षा देश प्रेम के जज्बे से भी ओतप्रोत है। शायद यही वजह है कि उसने अपने जीवन का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में जाकर देश सेवा करने को निर्धारित किया है। वह कहती हैं कि जब हौसला हो उड़ान का,तो क्यूं कद नापें आसमान का? अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार पहल, कर्तव्यनिष्ठा और लगन हो, तो मंजिलें भी आसान हो जाती है। इसी जज्बे और जुनून के साथ वर्षा आसमान छूने की तमन्ना रखती है।
प्रस्तुति : विनय मिश्रा

मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

रानी कुमारी ने दी हेमंत सोरेन को जीत पर बधाई


रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, झामुमो व राजद महागठबंधन की शानदार जीत पर शहर की लोकप्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और नारी शक्ति सेना (गुलाबी गैंग) की अध्यक्ष रानी कुमारी ने झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को बधाई दी है। मंगलवार को मोरहाबादी स्थित श्री सोरेन के आवास पर जाकर रानी कुमारी ने उन्हें  उपहारस्वरूप फूलों का गुलदस्ता देकर उन्हें सम्मानित किया। रानी ने कहा कि महागठबंधन की जीत से झारखंडवासियों में  नई ऊर्जा संचार हुआ है। अब हेमंत सोरेन के नेतृत्ववाली सरकार गरीबों, पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सफल हो सकेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता ने झामुमो, कांग्रेस और राजद गठबंधन के प्रति जो विश्वास जताया है, उस पर महागठबंधन की सरकार शत-प्रतिशत खरा उतरेगी।

मानव सेवा ही डा अनंत सिन्हा के जीवन का एकमात्र लक्ष्य



चिकित्सक को ईश्वर का दूसरा रूप कहा जाता है। चिकित्सा सेवा में आने के पूर्व डॉक्टर मानव सेवा की शपथ लेते हैं। कुछ चिकित्सक तो मानव सेवा को अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य ही बना लेते हैं। पीड़ित मानवता की सेवा करना और उन्हें हर संभव सहयोग करना उनकी दिनचर्या में शामिल रहता है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं राजधानी रांची के बजरा स्थित देवकमल अस्पताल के संचालक व प्रख्यात शल्य चिकित्सक डॉ. अनंत सिन्हा। दया और करुणा की प्रतिमूर्ति डॉ.सिन्हा पीड़ित मानवता के प्रति समर्पित हैं। उनका नाम झारखंड के नामचीन शल्य चिकित्सकों में शुमार है। मूल रूप से बिहार के सिवान जिले के निवासी डाॅ. सिन्हा की प्रारंभिक शिक्षा झारखंड में हुई। उनके पिता एकीकृत बिहार के समय वन विभाग में अधिकारी थे। सेवानिवृत्ति के पश्चात उनका परिवार पटना आ गया। डॉ.सिन्हा ने पटना के ख्यातिप्राप्त शिक्षण संस्थान संत माइकल स्कूल में दाखिला लिया। वहां से मैट्रिक व प्लस टू की परीक्षा पास की। उन्हें चिकित्सक बनकर जन सेवा करने का शौक शुरू से ही रहा। इंटरमीडिएट विज्ञान की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने मेडिकल कॉलेज की ओर रुख किया। आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज ( एएफएमसी), पुणे में नामांकन हेतु उन्होंने तैयारियां शुरू की और इसमें सफल रहे। वहां से मेडिकल की डिग्री लेने के बाद वह पुणे में ही प्रैक्टिस करने लगे।  लगभग 6 वर्षों के प्रैक्टिस के क्रम में उन्होंने अपने वरिष्ठ चिकित्सकों का मार्गदर्शन भी प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने मास्टर ऑफ सर्जरी और एमसीएच की डिग्री भी हासिल की। झारखंड से उनका लगाव शुरू से ही रहा। राज्य गठन होने के बाद डॉ. सिन्हा रांची आ गए और यहां देवकमल अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर की स्थापना की। अपनी कुशल कार्यशैली, अनुभव और व्यवहार कुशलता के बलबूते डॉ. सिन्हा कदम दर कदम चिकित्सा के क्षेत्र में नित नई उपलब्धियां हासिल करने लगे। सर्जरी के क्षेत्र में उन्होंने कई ऐसे उत्कृष्ट कार्य किए हैं, जो चिकित्सा क्षेत्र में अद्भुत उपलब्धियां कही जा सकती है। कटे होंठ और तालू की सर्जरी में डॉ. सिन्हा को महारत हासिल है। उनकी इस विशेषज्ञता के आधार पर  चिकित्सा सेवा में लगी राष्ट्रीय स्तर की संस्था स्माइल ट्रेन  उन्हें अपना सहयोग दे रही है। उनके अस्पताल में स्थापना काल के बाद से लेकर अब तक दस हजार से ऊपर मरीजों के कटे होंठ और तालू का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया जा चुका है। उनके अस्पताल में विभिन्न रोगों से संबंधित कुशल और अनुभवी चिकित्सकों सहित समर्पित पारा मेडिकल कर्मियों की टीम है। देवकमल अस्पताल में अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने की वजह से यहां झारखंड के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार, बंगाल, ओडिशा से भी मरीज आते हैं। मरीजों की मानें तो  डॉ. अनंत सिन्हा के व्यवहार से ही उनका आधा दुख दूर हो जाता है। मरीज उन्हें अपना मसीहा मानते हैं। डॉ. सिन्हा सभी धर्म व समुदाय के लोगों का समान रूप से आदर करते हैं। सर्वधर्म- समभाव के आदर्शो को अपने जीवन में आत्मसात कर चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में नित नए आयाम स्थापित कर डॉ. सिन्हा मानव सेवा के अपने लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर हैं। उनका मानना है कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। इससे सुखद अनुभूति होती है। गरीबों, असहायों की सहायता करने से उन्हें सुकून मिलता है। ऐसे युग में जब चिकित्सा सेवा का तेजी से व्यवसायीकरण हो रहा है, वैसे में डॉ. सिन्हा द्वारा  मानव सेवा के उद्देश्य से चिकित्सा सेवा करना उनकी महानता का परिचायक है।
वह कहते हैं कि मरीज चिकित्सक में भगवान का रूप देखकर उनके पास आते हैं। ऐसे में चिकित्सकों की भी अहम जिम्मेदारी बनती है कि वे मरीजों के साथ उनकी आशा और अपेक्षा के अनुरूप हर संभव सहयोग करें, तभी चिकित्सक होने की सार्थकता है।
प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

रविवार, 22 दिसंबर 2019

किसानों की खुशहाली से ही देश होगा खुशहाल



राष्ट्रीय किसान दिवस पर विशेष


* अशोक कुमार सिंह

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के सर्वमान्य नेता चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उनकी स्मृति में प्रत्येक वर्ष 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है। उन्होंने किसानों के लिए जो हितकर कार्य किए, उसे सदियों तक याद किया जाता रहेगा। किसानों और गरीबों के उत्थान के लिए सतत प्रयासरत रहने वाले चौधरी चरण सिंह को किसानों का मसीहा भी कहा जाता है।  उनका मानना था कि किसानों को खुशहाल किए बिना देश का विकास संभव नहीं है। भारत देश की आत्मा किसानों में बसती है। किसान त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति हैं। जीवन पर्यंत मिट्टी से सोना उगाने के लिए किसान तपस्या करते हैं। मूसलाधार बारिश हो, कड़ाके की ठंड पड़ रही हो या तपती धूप हो, किसान इन सबकी परवाह किए बिना जी-तोड़ मेहनत कर फसल उगाते हैं। हमारे देश की 70 प्रतिशत आबादी आज भी गांवों में रहती है। जिनका मुख्य पेशा कृषि है। भारतीय किसान को अन्नदाता कहा जाता है। किसान हमारी सभ्यता और संस्कृति को भी सहेज कर रखे हुए हैं। हमारा मानना है कि किसानों की समृद्धि से ही  देश समृद्ध हो सकता है। किसान अन्नदाता हैं, लेकिन बदले में किसानों को उनकी फसल का उचित पारिश्रमिक तक नहीं मिल पाता है। सादा जीवन, उच्च विचार के आदर्श वाक्य को अपने जीवन में आत्मसात किए किसान मेहनत और लगन से खेती-किसानी में जुटे रहते हैं। अपनी आवश्यकताओं को सीमित रखते हुए सादगीपूर्ण जीवन जीते हैं। खेत ही किसानों की कर्मभूमि होती है। दिन भर कठोर परिश्रम कर शाम ढलते ही वह अपने कंधों पर हल लिए बैलों को हांकते हुए अपने घर लौटते हैं। समस्याओं से जूझना उनकी नियति है।  भारतीय किसान बदहाल हैं। कर्ज के बोझ तले दबे रहते हैं। कर्ज में ही किसान पलते- बढ़ते हैं और अपना जीवन समाप्त कर देते हैं। किसानों की आय में वृद्धि के लिए स्रोतों के विकास के क्षेत्र में  तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है। सरकारी स्तर पर राष्ट्रीय पशुधन मिशन, गोकुल मिशन, नीली क्रांति, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन, पशु पालन जैसी बहुत सी योजनाएं शुरू की गई। फलस्वरूप गत वर्षों में डेयरी, पोल्ट्री, मधुमक्खी, मत्स्य पालन के क्षेत्र में वृद्धि हुई है। कृषि के क्षेत्र में पिछले कुछ सालों से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अन्य संस्थाओं के माध्यम से कई रिसर्च भी हुए हैं। लेकिन जितनी आवश्यकता है, वह नाकाफी है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में किसानों की हालत में सुधार के लिए ठोस प्रयास किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। लाभकारी कृषि तकनीकों की किसानों को विभिन्न माध्यमों से जानकारी दिए जाने की भी आवश्यकता है। इन प्रयासों से किसानों के जीवन स्तर में सुधार संभव है। किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार की गुंजाइश है, बशर्ते ईमानदारी से पहल हो। राहें कठिन अवश्य है, पर कुछ भी असंभव नहीं। हमारा मानना है कि आज का किसान लाभकारी एवं अभिनव कृषि तकनीकों के बेहतर प्रबंधन को अपनाकर आजीविका एवं अपनी सुरक्षा के साथ-साथ खुशहाली की ओर कदम बढ़ा सकता है।
आज चौधरी चरण सिंह की जयंती है। जिनकी स्मृति में राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है। एक ऐसे दौर में जब देश में किसान और कृषि क्षेत्र तमाम समस्याओं से जूझ रहा है,तब जमीन से जुड़े ऐसे नेता का स्मरण और व्यवस्था में उनके योगदान को याद करना प्रासंगिक है। वर्तमान समय की ग्रामीण बदहाली, उपेक्षा, किसानों की आत्महत्याओं की घटनाएं, गांव से शहर की ओर बढ़ता पलायन, गांव- शहर के बीच बढ़ती आर्थिक सामाजिक विषमताएं आदि कई विषय उनके विचारों की प्रासंगिकता को जीवंत बनाए हुए हैं। उनके प्रयासों से ही कृषि क्षेत्र में आढ़तियों और बिचौलियों का दबदबा कम हो सका और किसानों के लिए नाबार्ड जैसी वित्तीय संस्थाएं गठित की जा सकी। आज हम चौधरी चरण सिंह जी की 118 में जयंती पर उनका स्मरण कर रहे हैं। उन्होंने जिन सवालों को जन्म दिया,उसके स्वर आज भी गुंजायमान हैं। देश में किसान आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी हुई है, खेती वर्तमान समय में मुनाफे का सौदा नहीं रह गया है। गांव महानगरों के उपनिवेश बन चुके हैं। कृषि पर बढ़ते बोझ को अन्य गैर कृषि कार्य में लगाने का सिलसिला भी लगभग मृतप्राय हो चुका है।  किसानों के मसीहा कहे जाने वाले प्रखर राजनेता चौधरी चरण सिंह की दूरदर्शिता और उनकी कार्यशैली से किसानों के लिए कई कल्याणकारी कार्यक्रमों को अमलीजामा पहनाया जा सका और किसानों की खुशहाली का मार्ग प्रशस्त हो सका। लेकिन कालांतर में सरकारी नीतियों का शिकार होकर किसान बदहाली का दंश झेलने को विवश हो गए। आज जरूरत है किसानों की दशा और दिशा सुधारने की। किसानों को खुशहाल किए बिना विकास की बातें बेमानी है।
(लेखक बिहार के पटना जिलांतर्गत करनौती ग्राम निवासी एक प्रगतिशील किसान हैं)

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...