चक्रधरपुर। नगर विकास समिति चक्रधरपुर के अध्यक्ष पवन शंकर पांडे ने मुख्यमंत्र को पत्र लिखकर पश्चिमी सिंहभूम जिले के विभिन्न विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार में लिप्त पदाधिकारियों पर अंकुश लगाने की मांग किया है ।उन्होंने कहा कि जिले को एक भ्रष्टाचारी पदाधिकारी से मुक्त मिल गई भूमि संरक्षण पदाधिकारी जयप्रकाश तिवारी जो भूमि संरक्षण विभाग में भ्रष्टाचार का खुला खेल खेल रहे थे ।40 प्रतिशत कमीशन लेने के पश्चात ही तालाब खुदाई करने वाले लाभुक समिति को पैसा दे रहे थे ।इस के आतंक से तालाब खुदाई करने वाले लाभुक समिति के लोग काफी परेशान थे अब उन्हें कुछ राहत मिली होगी। उन्होंने कहा कि डीप बोरिंग में भी वह बड़े पैमाने पर कमीशन लेते थे इस जिले में ऐसे और भी कई पदाधिकारी है जो लूट मचाए हुए हैं उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि इस जिले में भ्रष्टाचार का खेल खत्म हो सके उन्होंने कहा कि भूमि संरक्षण विभाग में ही पद स्थापित पर्यवेक्षक राज देवदास जो वर्षो से इसी जिले में पदस्थापित है कई जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी बदले लेकिन पर्यवेक्षक राज देवदास का स्थान्तरण नहीं हुआ चुनाव के समय भी चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश था कि 3 वर्षों से अधिक रहे हुए पदाधिकारी का तबादला किया जाए।
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गुरुवार, 11 जुलाई 2019
भ्रष्ट अधिकारियों पर अंकुश लगाने की मांग
चक्रधरपुर। नगर विकास समिति चक्रधरपुर के अध्यक्ष पवन शंकर पांडे ने मुख्यमंत्र को पत्र लिखकर पश्चिमी सिंहभूम जिले के विभिन्न विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार में लिप्त पदाधिकारियों पर अंकुश लगाने की मांग किया है ।उन्होंने कहा कि जिले को एक भ्रष्टाचारी पदाधिकारी से मुक्त मिल गई भूमि संरक्षण पदाधिकारी जयप्रकाश तिवारी जो भूमि संरक्षण विभाग में भ्रष्टाचार का खुला खेल खेल रहे थे ।40 प्रतिशत कमीशन लेने के पश्चात ही तालाब खुदाई करने वाले लाभुक समिति को पैसा दे रहे थे ।इस के आतंक से तालाब खुदाई करने वाले लाभुक समिति के लोग काफी परेशान थे अब उन्हें कुछ राहत मिली होगी। उन्होंने कहा कि डीप बोरिंग में भी वह बड़े पैमाने पर कमीशन लेते थे इस जिले में ऐसे और भी कई पदाधिकारी है जो लूट मचाए हुए हैं उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि इस जिले में भ्रष्टाचार का खेल खत्म हो सके उन्होंने कहा कि भूमि संरक्षण विभाग में ही पद स्थापित पर्यवेक्षक राज देवदास जो वर्षो से इसी जिले में पदस्थापित है कई जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी बदले लेकिन पर्यवेक्षक राज देवदास का स्थान्तरण नहीं हुआ चुनाव के समय भी चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश था कि 3 वर्षों से अधिक रहे हुए पदाधिकारी का तबादला किया जाए।
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