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रविवार, 21 जुलाई 2019

देश के सौ स्मार्ट शहरों में रांची अग्रणीःसीपी सिंह

समय पर गुणवता के साथ पूरा करें कार्य तो नंबर वन बनेगी रांची


रांची।नगर विकास एवं आवास मंत्री चन्देश्वर प्रसाद सिंह ने आज रांची के धुर्वा क्षेत्र में 656.3 एकड़ भूमि पर विकसित हो रहे रांची स्मार्ट सिटी परिसर अंतर्गत निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण किया और अधिकारियों को कई सुझाव तथा आवश्यक दिशा-निदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि देशभर के स्मार्ट शहरों में हमारी रांची अग्रणी पंक्ति में खड़ा है पर रांची देश का नंबर वन स्मार्ट सिटी बने, इसके लिए जरुरी है कि समय पर गुणवता के साथ कार्य पूरा हो। उन्होंने स्मार्ट सिटी के हरियाली पर भी विशेष जोर दिया और कहा कि सड़कों के किनारे एक पेड़ लगाएं जिससे हरियाली भी रहेगी और शहर सुंदर भी लगेगा।

नवंबर 2019 से पहले जुपमी के निर्माण कार्य को पूरा करें


मंत्री श्री सिंह ने परिसर में निर्माणाधीन झारखंड अर्बन प्लानिंग मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (जुपमी) एवं कंवेन्शन सेंटर तथा निर्माणाधीन अर्बन सिविक टावर का निरीक्षण किया। उन्होंने निदेश दिया कि नवंबर 2019 से पहले जुपमी के निर्माण कार्य को पूरा करें साथ ही कहा कि किसी भी निर्माण कार्य में गुणवता में कोई समझौता बर्दाश्त नही होगा. भवनों में सुरक्षा मानकों का पूरा ख्याल रखा जाय. सड़कों के निर्माण में भी अव्वल दर्जे के मैटेरियल का इस्तेमाल करें। परिसर हरा भरा रहे इसका पूरा ख्याल रखें और अधिक से अधिक पौधारोपण करें। यदि 24 माह में कार्य पूरा करना है तो 20 माह का लक्ष्य रखें। उन्होंने कमांड कंट्रोल एंड कम्यूनिकेशन सेंटर के कार्य में प्रगति लाने का भी निदेश दिया।

मंत्री श्री सिंह ने पूरे परिसर के लिए बिजली आपूर्ति,पेयजलापूर्ति,गैस पाइप लाईन सप्लाई,सिवरेज ड्रेनेज निर्माण,ऑप्टिकल फाइवर लाइन,रिसाइकल वार्ट, सड़क, साइकिल लेन, स्मार्ट स्ट्रीट लाइट और अन्य जरुरी संसाधनों की तैयारी का भी जायजा लिया।

मौके पर एल एंड टी की ओर से पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए ये बताया गया कि किस प्रकार से इंटिग्रेटेड इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास होना है। इसके लिए 469.6 करोड़ रुपया खर्च होगा. गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी में मुख्य मार्ग लगभग 21 किमी होगा जिसमें 16 किमी मार्ग फोर लेन का होगा.रोड के किनारे यूटिलिटी सर्विसेज की भी लाईन साथ-साथ होगी।

इस अवसर पर मंत्री श्री सिंह ने परिसर में पौधारोपण भी किया इसके साथ ही कई अधिकारियों ने स्मार्ट सिटी परिसर में पौधारोपण किया.

इस मौके पर जुडको के परियोजना निदेशक(तक्नीकि) राजीव कुमार बासुदेवा,जुडको के जीएम बीके रॉय,स्मार्ट सिटी के जीएम राकेश कुमार नंदक्योलियार के साथ साथ बड़ी संख्या में अधिकारी मौजूद थे।

आइये जानते हैं धुर्वा स्थित स्मार्ट सिटी परिसर की कुछ महत्वपूर्ण बातें-

★ साढ़े सात एकड़ जमीन में बन रहे जुपमी में अर्बन प्लानिंग मैनेजमेंट की पढ़ाई होगी.अर्बन प्लानिंग के क्षेत्र में कैरियर के इच्छुक युवओं को मिलेगा मौका. नगर विकास विभाग व यूएलबी में कार्यरत कर्मी व जन प्रतिनिधियों को भी योजना व क्रियान्वयन की जानकारी दी जाएगी. इस कैंपस में हॉस्टल,स्टाफ क्वार्टर्स इत्यादि मौजूद रहेगा।

★ कंवेन्शन सेंटर में पांच हजार लोग एक बार किसी कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं,उनके लिए गेस्ट रुम और अतिरिक्त हॉल व गाड़ियों के पार्किंग की व्यवस्था रहेगी।

★11 मंजिल अर्बन सिविक टावर में सरकारी और कॉर्पोरेट दफ्तर रहेंगे।

★ बाकी की जमीन शैक्षणिक,व्यावसायिक,हॉस्पिटलिटी,आवासीय इत्यादि क्षेत्र में विभाजित होगी. आवासीय क्षेत्र में स्थायी और रोजगार के लिए पहुंचनेवाले अस्थायी लोगों की संख्या को जोड़ दें तो डेढ़ लाख लोगों के रहने की व्यवस्था होगी. यहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी होगा। आवासीय परिसर के ऑक्सन के बाद हजारों की संख्या में फ्लैट बनेंगे जहां लोग अपने लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस घर खरीद सकेंगे।

★यह स्मार्ट सिटी आनेवाले समय में हजारों युवाओं के लिए रोजगार सृजन का केंद्र बनेगा।

★ परिसर में पार्क ,ओपन स्पेस और क्लब के साथ साथ अस्पताल व प्ले ग्राउंड का प्रावधान किया गया है।

★ शहर की यातायात,क्राइम सर्विलांस,डिस्प्ले सिस्टम व मौसम पर नजर रखनेवाले कमांड कंट्रोल कम्यूनिकेशन सिस्टम का अधिष्ठापन  जिसका ऑफिस भी इसी परिसर में होगा जिससे पूरे शहर की मॉनिटरिंग की जाएगी।

★ इस क्षेत्र में 24घंटे निर्बाध बिजली, पानी के साथ-साथ हर अत्याधुनिक सुविधा मौजूद रहेगा. इस इलाके में लोगों को निर्बाध बिजली मिले इसके लिए जीआईएस सब स्टेशन का निर्माण चल रहा है जो झारखंड में पहली बार बन रहा है.इसके साथ ही चार अन्य पावर स्टेशन का निर्माण होगा। यहां का अपना पाइप लाइन वाटर सप्लाई सिस्टम होगा जो इसी साल नवंबर तक कार्य पूर्ण हो जाएगा। सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में पेड़ लगेंगे।

मंगलवार, 25 जून 2019

तेज़ी से बदल रहा है शहरी भारत का परिदृश्य




नई दिल्ली। भारत के शहरों का चेहरा तेजी से बदल रहा है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए प्रमुख मिशनों और कार्यक्रमों के कारण शहरों में बदलाव की प्रगति जोरदार रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) कायाकल्‍प और शहरी बदलाव के लिए अटल मिशनस्‍मार्ट सिटी मिशन न केवल देश के शहरी परिदृश्‍य में बदलाव ला रहे हैं, बल्कि नागरिकों के जीवनयापन को भी सरल बनाने का काम सुनिश्चित कर रहे हैं। वर्ष 2004 -2014 के दौरान किए गए कुल 1.57 लाख करोड़ रुपये के समग्र निवेश की तुलना में 2014 से 2019 के दौरान शहरी कायाकल्‍प में निवेश 10.31 लाख करोड़ रुपये हुआ है, जो 554 प्रतिशत बढ़ोतरी को दर्शाता है। पीएमएवाई (यू), अमृत और एससीएम में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा लागू किए जा रहे मिशन, अपने लक्ष्‍य और समयसीमा से आगे चल रहे है। शहरों के लिए यह बदलाव और प्रभाव आने वाले वर्षों में जारी रहेगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत कुल 4.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश से 81 लाख से भी अधिक घरों के निर्माण की स्‍वीकृति से देश की शहरी गरीब आबादी के बड़े तबकों के लिए छत उपलब्‍ध कराना के उद्देश्‍य को पूरा करने में मदद मिली है। इनमें से 48 लाख घर निर्माण के विभिन्‍न चरणों में है। 26 लाख घर पूरा होने के बाद सौंप दिए गए हैं। वर्ष 2022 तक सभी को घर उपलब्‍ध कराने के मिशन लक्ष्‍य समय और निर्धारित लक्ष्‍य से आगे हैं। 13 लाख से अधिक घरों के निर्माण में नई प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है। 1.26 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता निर्धारित की गई है जिसमें से 51 हजार करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक उपाय के रूप में घरों को महिला के नाम पर या संयुक्‍त स्‍वामित्‍व में उपलब्‍ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की क्रेडिट से जुड़ी सब्सिडी योजना के तहत 18 लाख प्रतिवर्ष तक की आय के मध्‍यम आय वर्ग के परिवारों को पहली बार घरों के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। घर के कारपेट एरिया को बढ़ाकर 200 वर्गमीटर कर दिया गया है। 2005-2019 के दौरान सीएलएसएस के तहत 6.32 लाख से अधिक लोगों ने इससे लाभ उठाया है।
कायाकल्‍प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन को वैश्विक जलापूर्ति, सीवरेज ढांचे में सुधार, बच्‍चों का विकास, दिव्‍यांगों के अनुकूल हरे पार्कों और खुली जगह, तूफान के पानी की निकासी और गैर-मोटर चालित शहरी यातायात में सुधार और जिसके तहत सुधारों को लागू करने के लिए राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों को प्रोत्‍साहन देने का सुधार एजेंडा लागू करने के लिए शुरू किया गया था। 77,640 करोड़ रुपये लागत की राज्‍य योजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इसमें से 39,011 करोड़ रुपये जल आपूर्ति परियोजनाओं, 32,456 करोड़ रुपये सीवरेज और सेप्टिक टैंकों, 2,969 करोड़ रुपये स्‍टॉर्म जल निकासी के लिए, 1,436 करोड़ रुपये गैर-मोटरीकृत शहरी परिवहन के लिए तथा 1,768 करोड़ रुपये हरे स्‍थानों और पार्कों के लिए मंजूर किए गए हैं। इन पहलों से 22 करोड़ से अधिक शहरी आबादी को लाभ पहुंचा है। ऑनलाइन भवन अनुमति प्रणालियों (ओबीपीएस) को 11 राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों की सभी यूएलबी सहित 1,705 यूएलबी में लागू किया गया है, जिससे नागरिकों के जीवन यापन को सहज बनाना सुनिश्चित हुआ है।
जल संकट से जल सुरक्षा की ओर बढ़ने के लिए 33,900 करोड़ रुपये लागत की 1,132 परियोजनाओं को लागू किया जा रहा है। अभी तक 58 लाख पानी के नल कनेक्‍शन दिए गए हैं, इसके अलावा 81 लाख पानी के नल कनेक्‍शन और उपलब्‍ध कराए जाएंगे। मिशन के अंत तक सभी परिवारों को जल की आपूर्ति सुलभ होगी। अपशिष्‍ट जल को रिसा‍इकिल और पुनर्उपयोग के लिए 26,589 करोड़ रुपये लागत की 622 सीवरेज एवं सेप्‍टी टैंक प्रबंधन परियोजनाओं पर काम चल रहा है। 37 लाख सीवर कनेक्‍शन उपलब्‍ध कराए गए हैं जबकि 108 लाख और सीवर कनेक्‍शन उपलब्‍ध कराए जाएंगे। मिशन की समाप्ति तक सीवर की कवरेज 31 प्रतिशत से बढ़ाकर 62 प्रतिशत की जा रही है। स्‍वस्‍थ जीवन शैली के लिए हरी-भरी जगह जुटाने के लिए 593 करोड़ रुपये की लागत से 1,048 पार्क विकसित किए गए हैं। 1,004 करोड़ रुपये की लागत से 1,356 पार्कों का विकास किया जा रहा है। इन पार्कों में महिलाओं, बच्‍चों और दिव्‍यांगजनों की अनुकूल सुविधाएं जुटाई गई हैं।
353 शहरों में पंपों का ऊर्जा संबंधी परीक्षण पूरा हो चुका है। 11 हजार पंपों को बदलने की पहचान की गई है। 467 अमृत शहरों की क्रेडिट रेटिंग का कार्य पूरा हो चुका है। इनमें से 163 शहरों को निवेश योग्‍य ग्रेड रेटिंग प्राप्‍त हो चुकी हैं जिसमें से 36 को ए माइनस और इससे ऊपर की रेटिंग दी गई है। 8 शहरी स्‍थानीय निकायों पुणे, हैदराबाद, भोपाल, इंदौर, विशाखापट्टनम, अमरावती, अहमदाबाद और सूरत ने 3,400 करोड़ रुपये मूल्‍य के निगम बांड जारी किए हैं। निगम बांड को जारी करने के काम को प्रोत्‍स‍ाहित करने के लिए एलबी के अनुसार जारी किए गए प्रत्‍येक 100 करोड़ मूल्‍य के निगम बांड के लिए 13 करोड़ रुपये का प्रोत्‍साहन पुरस्‍कार दिया जा रहा है। अभी तक निगम बांड जुटाने के लिए 181 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।
25 जून, 2015 को शुरू किया गया स्‍मार्ट सिटी मिशन सबसे अधिक परिवर्तनकारी शहरी मिशनों में से एक है। इसका उद्देश्‍य स्‍मार्ट समाधानों के अनुप्रयोग द्वारा शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना और नागरिकों को बेहतर गुणवत्‍ता का जीवन उपलब्‍ध कराना है। 16 एकीकृत नियंत्रण एवं कमांड (आईसीसीसी) केंद्रों के संचालन ने नागरिकों को अनेक ऑनलाइन सेवाएं उपलब्‍ध कराने में योगदान दिया है। इसने अपराध रोकथाम, बेहतर निगरानी और महिलाओं के प्रति अपराधों को कम करने में मदद की है। अन्‍य 55 आईसीसीसी लागू होने के विभिन्‍न चरणों में है। अभी तक 100 विशेष उद्देश्‍य वाहन (एसपीवी) का निर्माण हुआ है। 100 नकद स्‍तर सलाहकार मंचों का गठन किया गया है। 100 परियोजना प्रबंधन सलाहकार (पीएमसी) नियुक्‍त किए गए हैं और 2.05 लाख करोड़ रुपये लागत की 5,151 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
·         कुल परियोजनाओं की 57 प्रतिशत अर्थात 1,33,407 करोड़ रुपये लागत की 3,589 परियोजनाओं की निविदाएं निकाली गई हैं, इसमें से कुल 38 प्रतिशत परियोजनाओं अर्थात 88,898 करोड़ रुपये लागत की 2,793 परियोजनाएं कार्यान्‍वयन/निर्माण के लिए पूरी तरह तैयार हैं या पूरी हो चुकी हैं।
·         एचसीएम में निविदा की परियोजनाओं की संख्‍या में मार्च 2018 के बाद 240 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
http://164.100.117.97/WriteReadData/userfiles/image/image001W4NJ.png     स्‍मार्ट सिटी मिशन की प्रगति निविदा की गई परियोजनाएं              
111 भारतीय शहरों को शामिल करते हुए जीवनयापन को सहज बनाने का सूचकांक 13 अगस्‍त, 2018 को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्‍य विभिन्‍न शहरी पहलों के माध्‍यम से शहरी पर्यावरण में हुई प्रगति का आकलन करने में शहरों को समर्थ बनाना है। यह ढांचा 4 स्‍तंभों संस्‍थागत, सामाजिक, आर्थिक और वस्‍तुगत में जीवनयापन को सहज बनाने का मापन करता है। इस बारे में सबसे अच्‍छा काम करने वाले शहर हैं - पुणे, नवी मुंबई, वृह्त मुंबई, तिरूपति और चंडीगढ़।
स्‍मार्ट सिटी मिशन (एससीएम) के तहत बनाई गई स्‍मार्ट रोड ने सड़कों पर होने वाले हादसों में कमी लाकर सभी उपयोगकर्ताओं (यूजर) के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक पहुंच एवं रूट या मार्ग सुनिश्चित कर दिए हैं। इसके साथ ही स्‍मार्ट सड़कें पारगमन उन्‍मुख विकास को बढ़ावा दे रही हैं और उपयोगकर्ताओं को रास्‍ते में रुकने एवं मनोरंजन के लिए उपयुक्‍त स्‍थान भी उपलब्‍ध करा रही हैं। अब तक 837 करोड़ रुपये की लागत से 25 शहरों में स्‍मार्ट सड़कों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसी तरह 59 शहरों में स्‍मार्ट सड़कें निर्माणाधीन हैं। उधर, 36 शहरों ने निविदाएं जारी की हैं। 13,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की लागत से 94 शहरों मेंस्‍मार्ट रोड परियोजनाओं पर काम पहले ही शुरू हो चुका है/ निविदाएं आमं‍त्रित की जा चुकी हैं।
एससीएम के तहत स्‍मार्ट सौर ऊर्जा ने ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम कर दी है। अब तक 113 करोड़ रुपये की लागत से 15 शहरों में संबंधित परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इसके परिणामस्‍वरूप 19 मेगावाट बिजली का उत्‍पादन हुआ। इसके साथ ही 45 शहरों में 850 करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा की लागत वाली परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है/ निविदाएं आमं‍त्रित की जा चुकी हैं। 10 शहरों में स्‍मार्ट अपशिष्‍ट जल परियोजनाएंपूरी हो चुकी हैं और इनमें परिचालन जारी है, जबकि 50 शहरों में इस तरह की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। 24 शहरों में स्‍मार्ट वाटर परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और इनमें परिचालन जारी है, जबकि 56 शहरों में इस तरह की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
इंडिया स्‍मार्ट सिटीज फेलोशिप प्रोग्राम: 39 युवा प्रोफेशनलों का चयन शहरी नियोजन एवं डिजाइन और संबंधित मुद्दों के क्षेत्र में स्‍मार्ट सिटी फेलो के रूप में किया गया है। ये प्रोफेशनल आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय में स्‍मार्ट सिटी के मिशन निदेशक के कार्यालय और/अथवा चुनिंदा स्‍मार्ट सिटी के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को विश्लेषिकी, अनुसंधान, प्रलेखन इत्‍यादि के संदर्भ में आवश्‍यक सहयोग देंगे।
जीवन यापन में सुगमता सूचकांक 2019: सूचकांक को बेहतर करके के तहत एक नया संस्‍करण जीवन यापन में सुगमता सूचकांक 2019’ शुरू किया गया है, जिसके तहत परिणामों पर ज्‍यादा फोकस किया जा रहा है और जिसका उद्देश्‍य समस्‍त तीनों स्‍तम्‍भों में लोगों के जीवन यापन में सुगमता का आकलन करना है।
भारत शहरी वेधशाला: आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय में एक अत्‍याधुनिक भारत शहरी वेधशाला में परिचालन शुरू हो गया है। यह वेधशाला शहरों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत और सरकारों के लिए विश्लेषिकी के माध्यम से अंतर्दृष्टि पैदा करने के लिए वास्तविक समय और अभिलेखीय दोनों ही स्रोतों से शहरों से प्राप्‍त होने वाले डेटा के विभिन्न स्रोतों से जुड़ी होगी। यह साक्ष्य नीति निर्माण की दिशा में उल्‍लेखनीय योगदान देगी।
स्‍मार्ट सिटी डिजिटल भुगतान पुरस्‍कार -2018 : भारत के शहरी निवासियों के जीवन यापन में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की पहल के तहत स्‍मार्ट सिटी डिजिटल भुगतान पुरस्‍कार (एससीडीपीए) 2018 ‘100 स्‍मार्ट सिटी में 100 दिनों की चुनौतियां’ का शुभारंभ 9 जुलाई, 2018 को किया गया था।
नवाचारएकीकरण और निरंतरता के लिए शहरों में निवेश (सिटीज) चैलेंज : नवाचार, एकीकरण और निरंतरता के उद्देश्‍य को ध्‍यान में रखते हुए स्‍मार्ट सिटी मिशन के तहत जुलाई, 2018 में एएफडी, ईयू और एनआईयूए की साझेदारी में एक सिटीज चैलेंजका शुभारंभ किया गया था। 36 स्‍मार्ट सिटी से प्राप्‍त 67 प्रस्‍तावों में से 13 परियोजनाओं का चयन 100 मिलियन यूरो के निवेश के लिए किया गया था। 26 फरवरी, 2019 को स्‍मार्ट सिटी के सीईओ के दूसरे शिखर सम्‍मेलन के दौरान सिटीज पुरस्‍कारप्रदान किए गए थे।  

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...