यह ब्लॉग खोजें

सोमवार, 9 जुलाई 2018

एक संवेदनशील फौजी के जज़्बे की कहानी



आतंक पीड़ित परिवार की मासूम बच्ची की उठाई जिम्मेदारी
शहादत से पहले की पढ़ाई का खर्च उठाने की व्यवस्था

अभिमन्यु कोहाड़


भारतीय सेना के शहीद कैप्टन विजयंत थापर एवं 6 वर्ष की कश्मीरी लड़की रुकसाना

नई दिल्ली। यह घटना है 1999 कि जब कैप्टन विजयंत थापर 22 वर्ष के थे एवं 2 राजपूताना राइफल्स में तैनात थे। उनकी यूनिट के नजदीक 6 वर्षीया रुकसाना रहती थी जिनके पिता की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। एक दिन कैम्प से बाहर कैप्टन थापर ड्यूटी के दैरान खाना खा रहे थे तो रुकसाना वहां आ के बैठ गयी, उसके बाद कैप्टन थापर ने उसे भी खाना खिलाया और उस से पूछा कि तुम स्कूल क्यों नहीं जाती हो? वहां आस-पास जांच करने पर पता चला कि रुकसाना के परिवार के पास पैसे नहीं हैं और उस के पिता को आतंकियों ने मार दिया है। कैप्टन थापर ने कहा कि रुकसाना की पढ़ाई का सारा खर्च वह खुद उठाएंगे।
इसके बाद कारगिल युद्ध शुरू हो गया। कैप्टन थापर ने अपने पिता रिटायर्ड कर्नल वी एन थापर को चिट्ठी लिखी और कहा कि अगर युद्ध में उसे कुछ हो जाता है तो आप स्वयं रुकसाना की पढ़ाई व उसकी देखरेख का खर्च उठाएंगे। कारगिल युद्ध में कैप्टन थापर की यूनिट को तोलोलिंग हिल पर कब्ज़ा करने की ज़िम्मेदारी दी गयी। अभियान के दौरान पहले लक्ष्य "बर्बाद बंकर" पर कैप्टन थापर व उनकी टीम ने कब्ज़ा कर लिया, जब उनकी यूनिट आगे बढ़ने लगी तो दुश्मन की एक गोली कैप्टन थापर के सिर में लगी और कैप्टन थापर शहीद हो गए।
कैप्टन थापर को शहीद हुए 19 वर्ष हो चुके हैं, पिछले 19 वर्ष से लगातार कैप्टन थापर के पिता रिटायर्ड कर्नल वी एन थापर रुकसाना की पढ़ाई व देखरेख का खर्च उठा रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले रुकसाना और उसके चाचा नोएडा में रिटायर्ड कर्नल थापर के घर भी आये थे। हर वर्ष रिटायर्ड कर्नल थापर कश्मीर जाते हैं और रुकसाना की पढ़ाई व देखरेख पर आने वाले सभी खर्च की पेमेंट करते हैं। रुकसाना ने पिछले वर्ष 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की है व अब कॉलेज में जा के आर्ट्स की पढ़ाई करना चाहती है।
ये हैं भारतीय सेना के महान संस्कार, "जान जाए लेकिन वचन न जाए"।
शहीद कैप्टन विजयंत थापर को श्रद्धांजलि व उनके पिता कर्नल थापर को सलाम

सीएम रघुवर दास ने दिया दिसंबर तक घर-घर बिजली पहुंचाने का टास्क



समीक्षा बैठक में कोताही बरतने वाली तीन कम्पनियों को कड़ी चेतावनी


रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि तय समय सीमा में घर-घर बिजली पहुंचाने का काम पूरा करना होगा। नहीं कर सकते हैं, तो सरेंडर करें। हर मीटिंग में  नयी तारीख नहीं मिलेगी। अब सरकार कार्रवाई करेगी। जो कंपनी काम नहीं करेगी, उसकी बैंक गारंटी जब्त करने के साथ ही उसके अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जायेगी। दिसंबर 2018 तक हमें घर-घर बिजली पहुंचाना है। इस काम में शिथिलता किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं  जायेगी। काम की प्रगति के अनुसार सरकार द्वारा कंपनियों को पेमेंट किया जा रहा है। किसी का पैसा नहीं रूकेगा। उक्त निर्देश उन्होंने झारखंड मंत्रालय में ग्रामीण विद्युतीकरण कार्य करनेवाली एजेंसियों के साथ कार्य प्रगति की समीक्षा के दौरान दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रणनीति तैयार कर कार्य करें। आजादी के इतने सालों के बाद भी सभी लोगों तक बिजली नहीं पहुंची है। हमारी सरकार केंद्र सरकार के नेतृत्व में हर घर को रोशन करने का काम कर रही है। गरीब के घर बिजली पहुंचाना पुण्य का काम है। इससे गांव-गरीब के जीवन में व्यापक बदलाव आयेंगे। जिन घरों में बिजली पहुंचा गयी है, वहां स्थितियां सुधरने लगीं हैं। बच्चे देर रात तक पढ़ते हैं। गांव में रात तक चहल पहल रहती है, जहां पहले दिन ढलते ही लोग घरों में कैद होने के लिए मजबूर होते थे।

 बैठक में काफी धीमा कार्य करने के लिए आइएल एंड एफएस, अशोका बिल्डकोन और पेस पावर को विशेष तौर पर काम में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। स्थितियां नहीं सुधरीं, तो इन कंपनियों को डिबार कर इनकी बैंक गारंटी जब्त कर इन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले माह की बैठक के बाद स्थितियां पहले की तुलना में सुधरी हैं। 9 अगस्त 2018 को फिर से इन कंपनियों के साथ बैठक की जायेगी।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डाॅ सुनील कुमार वर्णवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री नितिन मदन कुलकर्णी, प्रबंध निदेशक श्री राहुल पुरवार समेत अन्य अधिकारी व एजेंसियों के अधिकारी उपस्थित थे।

विलुप्त बाघों ने पन्ना टाइगर रिजर्व को बनाया शोध एवं अध्ययन केन्द्र



भोपाल। पन्ना टाईगर उद्यान की स्थापना यूं तो वर्ष 1981 में हुई थी, जिसे वर्ष 1994 में टाईगर रिजर्व के रूप में मान्यता मिली, लेकिन इसे आकर्षण का केन्द्र पन्ना टाईगर रिजर्व द्वारा चुनी गयी बाघों की विलुप्ति से पुनःस्थापना की कहानी ने बनाया है। आज यह न केवल देश-विदेश के पर्यटकों को लुभा रहा है, बल्कि देश-विदेश के अधिकारियो/कर्मचारियों के लिए शोध एवं अध्ययन का केन्द्र बन गया है।पन्ना टाईगर रिजर्व का कोर क्षेत्र 576 वर्ग किलो मीटर तथा बफर क्षेत्र 1021 वर्ग किलो मीटर में फैला हुआ है। विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक पर्यटन स्थल खजुराहो से इसका पर्यटन प्रवेश द्वार ''मडला'' महज 25 किलो मीटर दूर है। बाघों से आबाद रहने वाला पन्ना टाईगर रिजर्व विभिन्न कारणों से फरवरी 2009 में बाघ विहीन हो गया था, जिसके बाद विपरित परिस्थितियों में पार्क प्रबंधन द्वारा भारतीय वन जीव संस्थान देहरादून के विशेषज्ञों की मदद से सितंबर 2009 में पन्ना बाघ पुनः स्थापना योजना की व्यापक रूप रेखा तैयार की गयी। योजना के अन्तर्गत 4 बाघिन और 2 वयस्क नर बाघों को बांधवगढ़, कान्हा एवं पेंच टाईगर रिजर्व से पन्ना टाईगर रिजर्व में लाया गया ताकि यहां पर बाघों की वंश वृद्धि हो सके। यह इतना आसान भी न था।
योजना के मुताबिक पेंच टाईगर रिजर्व से लाया गया नर बाघ टी-3 10 दिन रहने के बाद यहां से दक्षिण दिशा में कही निकल कर नजदीकी जिलों के वन क्षेत्रों में लगभग एक माह तक स्वछंद विचरण करता रहा। पार्क प्रबंधन ने हार नही मानी। पार्क की टीम लगातार बाघ का पीछा करती रही। पार्क के 70 कर्मचारियों की टीम मय 4 हाथियों द्वारा दिसंबर 2009 को दमोह जिले के तेजगढ़ जंगल से इस बाघ को फिर से पन्ना टाईगर रिजर्व में लाया गया। पुनर्स्थापित किए गए बाघ में होमिंग (अपने घर लौटने की प्रवृत्ति) कितनी प्रबल होती है इसे पहली बार देखा गया। इस बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य को अपने दृढ़ निश्चय से सफल बनाकर पन्ना पार्क टीम ने अपनी दक्षता साबित की है। बाघ टी-3 की उम्र अब 15 हो गयी है और अब वह अपने ही वयस्क शावकों से अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
बाघ टी-3 से पन्ना बाघ पुनर्स्थापना की सफलता की श्रृंखला प्रारंभ हो गयी। पार्क की सुरक्षा प्रबंधन एवं सृजन की अभिनव पहल को पहली ऐतिहासिक सफलता तब मिली, जब बाघिन टी-1 ने वर्ष 2010 को 4 शावकों को जन्म दिया। जिसके बाद बाघिन टी-2 ने भी 4 शावकों को जन्म दिया। इसके बाद से यह सिलसिला निरंतर जारी है। बाघिन टी-1, टी-2 एवं कान्हा से लायी गयी अर्द्ध जंगली बाघिनों टी-4, टी-5 एवं इनकी संतानों द्वारा अब तक लगभग 70 शावकों को जन्म दिया जा चुका है। जिनमें से जीवित रहे 49 बाघों में से कुछ ने विचरण करते हुए सतना, बांधवगढ़ तथा पन्ना एवं छतरपुर के जंगलों में आशियाना बना लिया है।

बाघों की पुनर्स्थापना की इस सफलता की कहानी को सुनने और इससे सीख लेने प्रति वर्ष भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को एक सप्ताह के लिए भेजा जाने लगा है। इतना ही नहीं, कम्बोडिया एवं उत्तर पूर्व के देशों तथा भारत के विभिन्न राज्यों से भी बाघ पुनर्स्थापना का अध्ययन करने एवं प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए अधिकारी एवं कर्मचारी यहां आ रहे हैं। पिछले वर्षो में पर्यटकों विशेषकर विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। वर्ष 2015-16 में कुल 36730 पर्यटक, वर्ष 2016-17 में कुल 38545 पर्यटक एवं वर्ष 2017-18 में मई 2018 तक की स्थिति में कुल 27234 पर्यटकों की संख्या दर्ज की गयी है। इसके अलावा पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघों की बढती संख्या के लिए रहवास प्रबंधन, मानव एवं वन्य प्राणी द्वंद का समाधान तथा पर्यटन से लगभग 500 स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्रदाय किया जा रहा है। वर्ष 2017-18 में 30 ग्रामों में संसाधन विकसित करने हेतु 60 लाख रूपये पार्क प्रबंधन द्वारा प्रदाय किए गए है। साथ ही स्थानीय 68 युवकों को आदर आतिथ्य का प्रशिक्षण खजुराहो में दिलाकर उन्हें 3 सितारा एवं 5 सितारा होटलों में रोजगार दिलाया गया है।

विकलांगता और कुपोषण से मिली राहत


कटे होठों की हुई सर्जरी, टेढ़े पैर हुए सीधे
भोपाल। प्रदेश में संचालित स्वास्थ्य सेवाएँ मासूम बच्चों को विकलांगता, कुपोषण जैसी गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलाने में कारगर साबित हो रही हैं। यह स्वास्थ्य सेवाएँ गरीब और जरूरतमंद परिवारों को नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इन सेवाओं से अधिक से अधिक मासूमों को लाभान्वित करने में स्वास्थ्य विभाग और महिला-बाल कल्याण विभाग की मैदानी टीम पूरी संजीदगी के साथ काम कर रही है।
सिवनी जिले के विकासखण्ड घंसौर की दुर्गा झारिया ने जुड़वा बेटियों को जन्म दिया, परिवार से खुशी और उत्साह का माहौल था, लेकिन जुड़वा बहनें कटे-फटे होठों की बीमारी से ग्रसित थीं। परिवार ने इन बच्चों का आँगनवाड़ी में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में दिखाया। इस शिविर में दोनों बच्चियों के होठों की मुस्कान प्रोजेक्ट के अंतर्गत नि:शुल्क सर्जरी की गई। आज दोनों मासूम बच्चियों को इस जन्मजात विक्रृति से छुटकारा मिल गया है। अब ये बच्चियाँ सामान्य बच्चियों की तरह सुंदर दिखाई देती हैं।
देवास जिले के ग्राम पटलावदा में श्रमिक लाड़ली बाई और गुलनाज के परिवार में जन्मी मीनाक्षी कुपोषण और कटे-फटे होठ की जन्मजात विक्रृति से ग्रस्त थी। परिवार के सदस्यों ने जब बच्ची को चिकित्सकों को दिखाया, तो चिकित्सकों ने पूरी जाँच करने के बाद पहले उसे कुपोषण से मुक्त करने और उसके बाद होठों की सर्जरी करने का निर्णय लिया। मासूम मीनाक्षी को जब कुपोषण से मुक्त कराने और सर्जरी के लिये अस्पताल में भर्ती कराया गया, उस समय उसकी उम्र एक माह 13 दिन थी, वजन एक किलो 740 ग्राम था और ऊँचाई 47 सेंटीमीटर थी। इस कारण यह बच्ची अति कुपोषण की श्रेणी में आ रही थी। मीनाक्षी को 21 दिन तक पोषण पुनर्वास केन्द्र में रखा गया। जब वह 6 माह 29 दिन की हो गई, तब इसका वजन भी 5 किलो 370 ग्राम हो गया था और ऊँचाई भी 60 सेंटीमीटर हो चुकी थी। अब मीनाक्षी सामान्य बच्चों की श्रेणी में आ गई थी। इसके बाद मीनाक्षी के कटे-फटे होठों की शासकीय योजना के अंतर्गत नि:शुल्क सर्जरी की गई। सफल सर्जरी के कारण यह बच्ची अब स्वस्थ है।
बैतूल जिले के विकासखण्ड प्रभातपट्टन के ग्राम गेहूँबारसा निवासी सुखचंद मेश्राम का 5 वर्षीय पुत्र रीतेश बचपन से ही पैरों के टेड़ेपन की बीमारी से ग्रसित था। चिकित्सकों की सलाह पर जिला अस्पताल में इस बच्चे का ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन के 4 दिनों बाद 17 अप्रैल, 2018 को बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब मासूम रीतेश अपने पैरों पर चलकर स्कूल जाने लगा है।
-अरुण राठौर

11 जुलाई को मनेगा विश्व जनसंख्या दिवस


24 जुलाई तक चलेगा जागरूकता पखवाड़ा 



भोपाल। मध्प्रय देश में 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जायेगा। इसी दिन से नागरिकों को सीमित परिवार के फायदे समझाने और परिवार नियोजन की सेवाएँ उपलब्ध करवाने के लिये प्रदेश में 24 जुलाई तक जागरूकता पखवाड़ा मनाया जायेगा। पखवाड़े के दौरान विभिन्न स्तरों पर परिवार नियोजन संबंधी सेवाएँ सुलभ करवाई जायेंगी।
परिवार नियोजन के अस्थायी साधन
परियोजना नियोजन के अस्थायी साधनों में अंतरा प्रोग्राम के तहत इंजेक्टेबल कांट्रासेप्टिव नया तरीका है, जिसे 3 माह में एक बार लगाया जाता है। छाया गोलियाँ प्रथम तीन माह में सप्ताह में दो बार एवं उसके बाद सप्ताह में एक बार खाना पड़ती है। आईयूसीडी 5 वर्ष और 10 वर्ष के लिये उपलब्ध है। इसी तरह ओरल पिल्स और निरोध का उपयोग भी किया जा सकता है।
सभी साधन स्वास्थ्य केन्द्रों में नि:शुल्क उपलब्ध हैं। परिवार नियोजन के स्थायी साधनों में महिला और पुरुष नसबंदी दोनों साधन उपलब्ध है। महिला नसबंदी की तुलना में पुरुष नसबंदी ज्यादा आसान होती है।
गर्भपात के बाद पोस्ट एबॉर्शन आईयूसीडी इनसर्शन एवं महिला नसबंदी की सेवाएँ भी उपलब्ध हैं। प्रसव के बाद छाया गोलियाँ शुरू की जा सकती हैं। छह सप्ताह बाद इंजेक्शन दिये जा सकते हैं। पीपीआईयूसीडी इनसर्शन किया जा सकता है।
मिशन परिवार विकास कार्यक्रम
भारत सरकार ने कुल प्रजनन दर 3 या 3 से अधिक वाले प्रदेश के 25 जिलों में मिशन परिवार विकास कार्यक्रम शुरू किया है। कार्यक्रम में गर्भ निरोधक साधनों की सेवाएँ अधिक से अधिक जनता तक पहुँचायी जा रही हैं। दम्पत्तियों को नयी पहल किट वितरित की जा रही है। सास-बहू सम्मेलन भी आयोजित करवाये जा रहे हैं। सभी स्वास्थ्य संस्थाओं पर कंडोम बॉक्स लगाये गये हैं।

* गायत्री शक्तिपीठ परिवार ने लगाए पांच सौ फलदार पौधे



रांची। एचईसी परिसर स्थित गायत्री शक्तिपीठ , सेक्टर - दो, धुर्वा  के साधकों द्वारा दीया युवा मंडल के महिला व पुरूष सदस्य गणों के सहयोग से वृक्षारोपण कार्यक्रम किया गया । एसटीएफ ,जगुआर रातु के आन्तरिक सुरक्षित क्षेत्र में करीब 500 वृक्ष के पौधे लगाए गये । पौधरोपण के पूर्व पौधों का वैदिक मंत्रों से विधिवत अभिमंत्रित एवं पूजित करके अधिकारी तथा सैनिकों
सहित मुख्य अतिथि और आगन्तुकों को  भी पीठासीन पुजारी रामाज्ञा सिंह तथा जटा शंकर झा द्वारा मंगलाचरण मंत्रोच्चार  से चन्दन, रोरी का तिलक व मौली धागा सूत्र बाँध स्वागत करके 500 के करीब अनेक प्रकार के पौधे रोपित किए गये। एसटीएफ अधिकारी एवं सैनिक गणों को प्रमोद कुमार द्वारा गुरुदेव श्री के गायत्री युग सत् साहित्य का भी वितरण किया गया।
संबोधन में पीठ पुजारी रामाज्ञा सिंह ने बताया कि जन समूह में वृक्षारोपण कार्यक्रम को प्रोत्साहन देने के लिए मानव व प्रकृति को होने वाले लाभ से अवगत कराकर पेड़ लगाने व उसके संरक्षण हेतु प्रेरित करना होगा । प्रकृति की हरियाली और मनुष्य की खुशहाली एवं पर्यावरण संतुलन हेतु लोगों को जागरूक करना समय की माँग है । यह जानकारी दीया युवा समूह के प्रतिनिधि नीरज कुमार और अभिषेक कुमार ने दी।


समझौते के लिए बुलाया और टांगी से काट डाला

रांची। डायन बिसाही के एक विवाद पर दो परिवारों के बीच सुलह की प्रक्रिया के क्रम में वादी पक्ष ने परिवादी पक्ष के तीन लोगों को घर बुलाकर टांगी से काट डाला। इसमें एक युवक की मौत हो गई जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना पलामू जिले के भवनाथपुर थाना क्षेत्र की है। वहां अरसली दक्षिणी पंचायत का एक टोला है सिकियाटोला। सिकिआलेवा टोला के सुरेश भुइयां ने जंगाली भुइयां और उसके पुत्र सूर्यलाल एवं सर्वेश को रविवार की रात मांस खाने और दारू पीने के लिए बुलाया। इसी बीच समझौते पर बात होनी थी। दोनों पक्षों के बीच 2015 से गढ़वा कोर्ट में डायन विसाही का मुकदमा चल रहा था। जंगाली और उसके दो बेटे परिवादी थे। सोमवार को सुनवाई थी। इससे पूर्व सुलह समझौता पर बात चल रही थी। खाने-पीने के दौरान चर्चा चल ही रही थी कि परिवादी पक्ष के सुरेश भुइयां, उनके पुत्र दहदुल भुइयां ,विनय भुइयां व अन्य ने समझौते के लिए एक लाख रुपये देने की शर्त रखी। जंगाली ने मांगी गयी रकम देने मे असर्मथता जतायी। इसपर गरमा-गरमी हुई। इसी बीच सुरेश, दहदुल व उनके समर्थकों ने टांगी निकाल ली। जब तक जंगाली और उसके बेटे कुछ समझ पाते, दूसरे पक्ष ने उन पर ताबड़तोड़ वार कर दिया। इससे सूर्यलाल की मौके पर ही मौत हो गयी। जंगाली और सर्वेश बेतरह घायल हो गए।
सुरेश भुइयां ने ओझा-गुणी का आरोप लगाकर पांच वर्ष पूर्व भवनाथपुर थाना में जंगाली व उसके बेटों पर प्राथमिकी दर्ज करायी थी। वे पस में रिश्तेदार थे। वर्ष 2015 में केस शुरू हुआ, तो जंगाली और उसके बेटों समेत पांच लोगों को जेल जाना पड़ा। बाद में दोनों पक्षों ने रिश्ते का हवाला देकर कानूनी लड़ाई के बदले सुलह करने का मन बनाया। रविवार देर शाम सुलह की बात चल ही रही थी कि विवाद हो गया। बात इतनी बढ़ी कि निमंत्रण देने वाले ने रिश्तेदार के एक बेटे के मौत के घाट उतार दिया और शेष दो को मरणासन्न अवस्था में पहुंचा दिया। पुलिस ने घयलों को अस्पताल और मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल वे अस्पताल में जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
 झारखंड में डायन बिसाही के मामले में हत्या की घटनाएं आम हैं। यहां जागरुकता अभियान के तमाम सरकारी गैर सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। यहां अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उसे कोई डिगा नहीं पा रहा है। उनके बीच सरकारी संस्थाएं हैं, नक्सली हैं, एनजीओं हैं, सामाजिक संस्थाएं हैं लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ रहा।



स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...