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सोमवार, 9 जुलाई 2018

विकलांगता और कुपोषण से मिली राहत


कटे होठों की हुई सर्जरी, टेढ़े पैर हुए सीधे
भोपाल। प्रदेश में संचालित स्वास्थ्य सेवाएँ मासूम बच्चों को विकलांगता, कुपोषण जैसी गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलाने में कारगर साबित हो रही हैं। यह स्वास्थ्य सेवाएँ गरीब और जरूरतमंद परिवारों को नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इन सेवाओं से अधिक से अधिक मासूमों को लाभान्वित करने में स्वास्थ्य विभाग और महिला-बाल कल्याण विभाग की मैदानी टीम पूरी संजीदगी के साथ काम कर रही है।
सिवनी जिले के विकासखण्ड घंसौर की दुर्गा झारिया ने जुड़वा बेटियों को जन्म दिया, परिवार से खुशी और उत्साह का माहौल था, लेकिन जुड़वा बहनें कटे-फटे होठों की बीमारी से ग्रसित थीं। परिवार ने इन बच्चों का आँगनवाड़ी में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में दिखाया। इस शिविर में दोनों बच्चियों के होठों की मुस्कान प्रोजेक्ट के अंतर्गत नि:शुल्क सर्जरी की गई। आज दोनों मासूम बच्चियों को इस जन्मजात विक्रृति से छुटकारा मिल गया है। अब ये बच्चियाँ सामान्य बच्चियों की तरह सुंदर दिखाई देती हैं।
देवास जिले के ग्राम पटलावदा में श्रमिक लाड़ली बाई और गुलनाज के परिवार में जन्मी मीनाक्षी कुपोषण और कटे-फटे होठ की जन्मजात विक्रृति से ग्रस्त थी। परिवार के सदस्यों ने जब बच्ची को चिकित्सकों को दिखाया, तो चिकित्सकों ने पूरी जाँच करने के बाद पहले उसे कुपोषण से मुक्त करने और उसके बाद होठों की सर्जरी करने का निर्णय लिया। मासूम मीनाक्षी को जब कुपोषण से मुक्त कराने और सर्जरी के लिये अस्पताल में भर्ती कराया गया, उस समय उसकी उम्र एक माह 13 दिन थी, वजन एक किलो 740 ग्राम था और ऊँचाई 47 सेंटीमीटर थी। इस कारण यह बच्ची अति कुपोषण की श्रेणी में आ रही थी। मीनाक्षी को 21 दिन तक पोषण पुनर्वास केन्द्र में रखा गया। जब वह 6 माह 29 दिन की हो गई, तब इसका वजन भी 5 किलो 370 ग्राम हो गया था और ऊँचाई भी 60 सेंटीमीटर हो चुकी थी। अब मीनाक्षी सामान्य बच्चों की श्रेणी में आ गई थी। इसके बाद मीनाक्षी के कटे-फटे होठों की शासकीय योजना के अंतर्गत नि:शुल्क सर्जरी की गई। सफल सर्जरी के कारण यह बच्ची अब स्वस्थ है।
बैतूल जिले के विकासखण्ड प्रभातपट्टन के ग्राम गेहूँबारसा निवासी सुखचंद मेश्राम का 5 वर्षीय पुत्र रीतेश बचपन से ही पैरों के टेड़ेपन की बीमारी से ग्रसित था। चिकित्सकों की सलाह पर जिला अस्पताल में इस बच्चे का ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन के 4 दिनों बाद 17 अप्रैल, 2018 को बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब मासूम रीतेश अपने पैरों पर चलकर स्कूल जाने लगा है।
-अरुण राठौर

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