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मंगलवार, 31 जुलाई 2018

पुराना जयपुर शहर विश्व विरासत की मान्यता के लिए प्रस्तावितः डां महेश शर्मा


नई दिल्ली। भारत में राजस्‍थान का पुराना जयपुर शहर यूनेस्‍को के विश्‍व विरासत स्‍थल के रूप में मान्‍यता के लिए प्रस्‍तावित अगला स्‍थान है। संचालन दिशानिर्देश 2017 के अनुसारप्रत्येक वर्ष राज्यों  द्वारा केवल एक ही स्‍थल का नाम प्रस्‍तावित किया जा सकता है। विश्व विरासत के रूप में मान्यता मिलना बहुत गर्व का विषय है। इससे स्‍थानीय अर्थव्यवस्था लाभान्वित होती है जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देती है जिससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैंविश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण होता है और स्थानीय हस्तशिल्पहथकरघा और विरासत की प्रतीक वस्‍तुओं की बिक्री में वृद्धि होती है। इसके अलावायह प्रस्‍तावित स्‍थल के साथ ही देश की  प्रतिष्ठा में चार चांद लगाता है। वर्तमान में भारत में कुल 37 विश्व विरासत स्थल हैं। इन स्‍थलों की एक सूचीराज्यवारनीचे दी गयी है।  
 भारत में विश्व विरासत स्‍थल:
सांस्‍कृतिक स्‍थल :
भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित
क्र. सं.

स्‍थल का नाम
राज्‍य
  1.  
आगरे का किला (1983)
उत्‍तर प्रदेश
  1.  
अजंता की गुफाएं(1983)
महाराष्‍ट्र
  1.  
एलोरा की गुफाएं (1983)
महाराष्‍ट्र
  1.  
ताज महल(1983)
उत्‍तर प्रदेश
  1.  
महाबलीपुरम के स्‍मारक (1984)
तमिलनाडु
  1.  
कोणार्क का सूर्य मंदिर (1984)
ओडिशा
  1.  
गोवा के गिरिजाघर और कॉन्‍वेंट (1986)
गोवा
  1.  
फतेहपुर सीकरी (1986)
उत्‍तर प्रदेश
  1.  
हम्‍पी के स्‍मारक (1986)
कर्नाटक
  1.  
खजुराहो के मंदिर (1986)
मध्‍य प्रदेश
  1.  
एलिफेंटा की गुफाएं ( 1987)
महाराष्‍ट्र
  1.  
तंजाऊर में गंगईकोंडचोलपुरम और दरसुरम के प्रसिद्ध चोल मंदिर(1987 & 2004)
तमिलनाडु
  1.  
पट्टाडकल के स्‍मारक (1987)
कर्नाटक
  1.  
सांची के बौद्ध स्‍मारक (1989)
मध्‍य प्रदेश
  1.  
दिल्‍ली में हुमांयू का मकबरा (1993)
दिल्‍ली
  1.  
दिल्‍ली में कुतुबमीनार और उससे जुड़े स्‍मारक (1993)
दिल्‍ली
  1.  
भिंबेटका की गुफाएं (2003)
मध्‍य प्रदेश
  1.  
चंपानेर-पावगढ़ पुरातात्विक पार्क (2004)
गुजरात
  1.  
लाल किला परिसरदिल्ली (2007)
दिल्‍ली
  1.  
  • के पर्वतीय किले (चित्तौड़गढ़कुम्भलगढ़जैसलमेर और रणथंभौर) (अम्बेर और गाग्रोन के किले राजस्‍थान के राज्‍य पुरातत्‍व विभाग द्वारा संरक्षित) (2013)
राजस्‍थान
  1.  
रतन-की-वाव (रानी का स्टेपवेल) पाटन, (2014)
गुजरात
  1.  
बिहार में नालंदा महाविहार (नालंदा विश्वविद्यालय) के पुरातात्विक स्‍थल) (2016)
बिहार


रेल मंत्रालय द्वारा संरक्षित क्षेत्र
23.
भारत की पर्वतीय रेल (दार्जिलिंग, 1999), नीलगिरी (2005), कालका-शिमला (2008)
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश
24.
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (पूर्व में विक्टोरिया टर्मिनस) (2004)
महाराष्‍ट्र


बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा संरक्षित

25
बोध गया में  महाबोधि मंदिर परिसर,  (2002)
बिहार

राजस्थान राज्य पुरातत्व विभाग और संग्रहालयों द्वारा संरक्षित
26.
जंतर मंतरजयपुर (2010)
राजस्‍थान

चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा संरक्षित
27.
ली कर्बूजियर की वास्तुकलाआधुनिक स्‍मारकों में एक उत्कृष्ट योगदान (2016)
चंडीगढ़

अहमदाबाद नगर-निगम द्वारा संरक्षित
28.
अहमदाबाद का ऐतिहासिक शहर (2017)
गुजरात


महाराष्‍ट्र सरकार द्वारा संरक्षित
29.
मुंबई के विक्टोरियन और आर्ट डेको एनसेम्बल (2018)
महाराष्‍ट्र


प्राकृतिक स्‍थल:

वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संरक्षित
30.
काजीरंगा राष्‍ट्रीय उद्यान (1985)
असम
31.
केवलादेव राष्‍ट्रीय उद्यान (1985)
राजस्‍थान
32.
मानस वन्‍यजीव अभ्‍यारण्‍य (1985)
असम
33.
सुंदरबन राष्‍ट्रीय उद्यान (1987)
पश्चिम बंगाल
34.
नंदादेवी और फूलों की घाटी (1988, 2005)
उत्‍तराखंड
35.
पश्चिमी घाट (2012)
कर्नाटक, केरल, महाराष्‍ट्र, तमिलनाडु
36.
ग्रेट हिमालय राष्‍ट्रीय उद्यान (2014)
हिमाचल प्रदेश


मिश्रित स्‍थल:

वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संरक्षित
37.
कंचनजंगा राष्‍ट्रीय उद्यान (2016)
सिक्किम


उपरोक्‍त जानकारी आज राज्‍यसभा में  केन्‍द्रीय संस्‍कृति, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्‍य मंत्री डॉ. महेश शर्मा द्वारा एक लिखित उत्‍तर में दी गई।



    आरक्षण अधिनियम व पदोन्नति में विसंगतियों को दूर करने की मांग

    रांची। अखिल भारतीय अनुसूचित जाति महासभा के राष्ट्रीय महासचिव व भाजपा नेता उपेंद्र कुमार रजक व राज्य के विभिन्न सेवा संवर्ग के अनुसूचित जाति/ जनजाति कर्मचारी/पदा0 के  5 सदस्य प्रतिनिधि मंडल ने सरकार द्वारा  पदोन्नति मैं दिए जा रहे  आरक्षण में विसंगतियां से राज्य के मंत्री अमर कुमार बाउरी एवं  मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर, विधायक केदार हाजरा को अवगत कराया।  उन्होंने कहा कि पदोन्नति में वरीयता को नजर अंदाज कर दिया जा रहा  है। आरक्षण एवं आरक्षण अधिनियम व पदोन्नति नियम 1992, 2001 एवं 2009 के बिंदुओं पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि वर्तमान पदोन्नति में वरियता को नजरअंदाज करते हुए कनीय पदाधिकारियों को पदोन्नति दी जा रही है जिससे अनुसूचित जाति/ जनजाति के कई वरीय पदाधिकारियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने मंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि इन बिंदुओं को माननीय मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएं ताकि विसंगतियां दूर की जा सकें। इस पर मंत्री व विधायक ने आश्वासन देते हुए कहा कि वे इन बिंदुओं को राज्य के मुखिया एवं कार्मिक सचिव आदि के समक्ष रखेंगे ताकि राज्य में अनुसूचित जाति/ जनजाति के कर्म0/पदा0 को पदोन्नति का उचित लाभ मिल सकें। साथ ही श्री रजक ने अनुसूचित जाति छात्र/ छात्राओं को जाति/ आवासीय आदि प्रमाणपत्रों को बनाने में  हो रहा कठिनाइयों से अवगत कराते हुए कहा कि प्रक्रिया को सरल किया जाए ताकि अनुसूचित जाति के लोगों को  प्रमाण पत्र मिलने में परेशानी न हो।  उन्होंने कहा कि एक प्रतिनिधिमंडल राज्य के सभी अनुसूचित जाति/ जनजाति के विधायकों व मंत्रियों को इस मुद्दों से संबंधित ज्ञापन सौंपेगा
    प्रतिनिधि  मंडल में  राज्य प्रशासनिक सेवा के बृजेंद्र  हेंब्रम, भूषण पासवान, सचिवालय सेवा से विवेक वासकी इंजीनियरिंग सेवा से ई0 संजीव कुमार, महेश कुमार, सुरेश पासवान, एससी/एसटी कर्मचारी संघ से नवल पासवान आदि शामिल थे।

    रांची उड़ान ने किया पहाड़ी मंदिर में वृक्षारोपण




     रांची। पहाड़ी मंदिर में जेसीआई रांची उड़ान ने पर्यावरण की सुरक्षा हेतु वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया ।संस्था अध्यक्षा दीप्ति बजाज ने बताया कि संस्था ने प्रति सदस्य प्रति वृक्ष लगाया है ।
    पेड़ पौधों के महत्व को कभी भी कम नहीं आंका जा सकता है, क्योंकि ये हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है| तभी तो हमारे देश में पेड़ पौधों की भी पूजा की जाती है, संत कबीर ने इनके महत्व को इस प्रकार व्यक्त किया “वृक्ष कबहुं नहीं फल भखे, नदी न संचे नीर, परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर|
    कार्यक्रम संचालिका आशु सर्राफ एवं संगीता शर्मा ने पहाड़ी संरक्षण समिति की सलाह पर गहरी जड़ो वाले वृक्षों का चयन किया। बरगद ,नीम ,बेल ,आँवला ,जामुन,इमली ,चंपा , हरसिंगार , गुलमोहर, अड़हुल,कनेर एवं विशेष रूप से लेमन ग्रास  आदि का रोपण किया गया । संस्था से सचिव भावना काबरा, संतोष तुलस्यान ,नेहा गाड़ोदिया ,अनुराधा जैन , डॉली खेतावत , विनिता सिंघानिया ,कोमल रुंगटा ,कोमल झुझुनवाला ,अंजली अग्रवाल ,नीतु छापरिया, रेखा नारसारिया , मनीषा सोमानी ,सुमिता अग्रवाल एवं अन्य सदस्याएँ शामिल हुयी ।

    स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

      झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...