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सोमवार, 17 जून 2019

कोयला खदानों में पानी, बूंद-बूंद को तरसता झारखंड

झारखंड में जल की नहीं जल के प्रबंधन की समस्या


नारायण विश्वकर्मा
राजधानी रांची सहित झारखंड के अधिकांश इलाकों में भूजल का स्तर गिरता जा रहा है। अधिकांश बोरवेल विफल हो चुके हैं। जलाशयों की हालत भी बदहाल है। कंक्रीट के जंगल खड़े किए गए। भारी संख्या में डीप बोरिंग होती रही। रेन वाटर हार्वेस्टिंग 20 फीसदी आवासीय प्लाटों पर भी नहीं हुआ। भूमिगत जल का स्तर पाताल छूने लगा। पानी के लिए चाकूबाजी तक की घटना हुई। लेकिन यह जानते हुए भी कि कोयला खदानों में पानी का इतना विशाल भंडार है कि इससे न सिर्फ लोगों की प्यास बुझाई जा सकती है, बल्कि खेतों की सिंचाई भी की जा सकती है, उसके दोहन की व्यवस्था नहीं की जा सकी। इस जल भंडार की तरफ सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने 2006 में ही विधानसभा में पेयजल पर चर्चा के दौरान ध्यान आकृष्ट कराया था। करीब ढाई वर्ष पहले सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह ने भी इस जल भंडार की ओर इशारा किया था। इसमें झारखंड सरकार को सिर्फ जल शोधन संयंत्र लगाना था और पाइपलाइन बिछाकर विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी थी।
यह मामला मुख्यमंत्री जन संवाद के पोर्टल पर शिकायत संख्या 2018-26763 के तहत दर्ज है। कोल इंडिया की बीसीसीएल और सीसीएल कंपनी की सारी और ईसीएल की कई परियोजनाएं झारखंड की सीमा में आती हैं। हर  परियोजना में दर्जनों खदानें हैं। उनमें अरबों-खरबों गैलन पानी उपलब्ध है। हर क्षेत्र में वाटर फिल्टर प्लांट भी लगे हैं।
ऐसा नहीं कि झारखंड सरकार ने कुछ किया नहीं। कोयला खदानों के जल भंडार के दोहन के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया। डीपीआर कार्यादेश भी निर्गत हुआ। जिसकी चार माह की अवधि फरवरी 2019 में समाप्त हो गई, लेकिन लालफीताशाही के कारण इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। यदि इसपर 2018 के अंत तक भी काम शुरू किया गया होता तो गर्मी का मौसम आने से पहले सरकार के पास जलापूर्ति की पूरी व्यवस्था होती। लेकिन सरकारी तंत्र उदासीन बना रहा। अब मानसून आने पर भूमिगत जल के स्तर में कुछ सुधार हो जाएगा।
झारखंड में डबल इंजन की सरकार है, लेकिन इच्छाशक्ति नहीं होना, इसका सबसे बड़ा कारण है.फिर अगली गर्मियों तक के लिए मामला ठंढे बस्ते में चला जाएगा।

इज ऑफ डूइंग विजनेस में चौथे पायदान पर झारखंड

सीएम रघुवर दास ने कहा पहले स्थान पर आना हमारा लक्ष्य


मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड को इज ऑफ डुइंग बिजनेस में देशभर में चौथा स्थान प्राप्त हुआ है। हमारा लक्ष्य है पहला स्थान पाना। लेकिन यह केवल कागजों पर ही न रहे। वास्तविकता में भी लोगों को इसका अनुभव होना चाहिए। ऐसी व्यवस्था बनायी गयी है कि लोगों को विभागों के चक्कर न काटने पड़े। इस मामले में किसी प्रकार की कोताही नहीं होनी चाहिए। जिन विभागों में अभी काम ऑफ लाइन हो रहा है, वह इसे जल्द से जल्द ऑनलाइन करायें। अधिकारी अफसरशाही छोड़े। हम जनता के सेवक हैं, इस भावना के साथ काम करें। उक्त बातें मुख्यमंत्री ने आज झारखंड मंत्रालय के सभागार में आयोजित "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग, फीडबैक बेस्ड बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान" से संबंधित समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कहीं. 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी काम को उलझाये नहीं। समस्या नहीं समाधान पर जोर दें। पूराने ढर्रे पर न चलते हुए नये भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। ‍व्यापारी-उद्यमी हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। वे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा करते हैं। राज्य में रोजगार पैदा होने से पलायन जैसा कलंक झारखंड से मिटेगा। यही हमारी सरकार का पहला लक्ष्य है।

प्रत्येक स्तर पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में निवेश करने वाले इच्छुक निवेशको एवं उद्योगपतियों को शुरुआत से ही प्रत्येक स्तर पर सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता रही है. उन्होंने कहा कि पिछले 4 साल से भी कम समय में हमारी नीतियों से प्रेरित होकर राज्य में टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग इत्यादि कई उद्योग स्थापित हुए हैं. उन्होंने कहा कि पिछले 2 से 3 वर्ष के बीच राज्य में करोड़ों का निवेश हुआ है जिससे रोजगार के अवसर तेजी से बढ़े हैं. वर्ष 2016 से अब तक जियाडा ने 430 उद्योगों को भूमि उपलब्ध कराया है, जिससे प्रत्यक्ष रूप से 60,778 लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं.

रोजगार उपलब्ध कराकर पलायन रोकना लक्ष्य
मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड की धरती को प्राकृतिक की असीम अनुकंपा प्राप्त है. देश की 40% प्राकृतिक संसाधन हमारे यहां उपलब्ध है. निवेशक अपने मेहनत से इन प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर राज्य को विकसित श्रेणी में खड़ा करने में लगे हुए हैं. इससे न सिर्फ उनका लाभ है बल्कि पूरे राज्यवासियों के हित के लिए यह एक बेहतर प्रयास है.

बच्चियों का पलायन दिल में ठेस पहुंचाती है
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उद्योग का स्थापना होगा तभी राज्य से गरीबी पूर्ण रूप से दूर होगी और पलायन भी रुकेगा. सरकार यह चाहती है कि राज्य में ही लोगों को रोजगार मिले और यहां के युवक-युवतियों को दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत न पड़े. छोटी-छोटी नौकरियों के लिए राज्य से बच्चियां पलायन कर जाती हैं. दूसरे राज्यों में बच्चियों का मानसिक और शारीरिक शोषण होता है जो मेरे दिल में काफी ठेस पहुंचाती है. राज्य की गरीब बच्चियों को हर हाल में रोजगार देकर सम्मान की जिंदगी जीने का हक देना हम सभी का मूल कर्तव्य होना चाहिए.

झारखंड को इज ऑफ डूइंग बिजनेस का बेस्ट उदाहरण बनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सबों को यह भी प्रयास करना है कि सरकारी मशीनरी और निवेशक मिलकर इस कार्य को आगे बढ़ाएं। अपने देश को विश्व में इज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए टॉप फिफ्टी में लाकर एक अच्छा उदाहरण बनकर झारखंड को आगे ले जाएं.

लाइसेंस और अनापत्ति प्रक्रिया को और पारदर्शी एवं सरल बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि इस बार राज्य की रैंकिंग के लिए भी उद्योगों के आधार पर पूछा जाएगा कि कितनी सरलता से आपने निवेशकों को लाइसेंस या अनापति दिया है. राज्य के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पोर्टल पर सही और उचित जानकारी उपलब्ध है या नहीं. जितने नंबर उद्योग आपको देगी राज्य को भी इसी आधार पर अंक प्राप्त होंगे. उन्होंने कहा कि यह तो स्वाभाविक है कि राज्य के नियमों के अनुसार ही आप अनुमति प्रदान करते होंगे. अब यह कार्य अच्छे तरीके से सुगमता और पारदर्शिता को ध्यान में रखकर करने की जरूरत है. इस बार इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि रैंकिंग सिर्फ उद्योग के फीडबैक पर ही आधारित होगी. गत वर्ष में सरकार के नीतिगत सुधार और ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से मिले अधिक अंक रैंकिंग के तरीकों में बदलाव के कारण सब कुछ इस पर निर्भर करेगी कि आप लोग उद्योग लगाने के लिए कितनी सुगमता से जरूरी लाइसेंस या अनापत्ति प्रदान करने में सक्षम हो पाते हैं.

बैठक का उद्देश्य झारखंड को इज ऑफ डूइंग बिजनेस में नंबर वन राज्य बनाना
मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा किईज ऑफ डूइंग बिजनेस का मकसद है कि निवेशकों को एक ही खिड़की पर सारी सुविधाएं उपलब्ध करें. विभागों की सूचनाएं ऑनलाइन उपलब्ध करना, ऑनलाइन फीस जमा करना, तय समय सीमा के भीतर सेवाएं देना, उद्योगों से संबंधित मामलों का निस्तारण करने के लिए अलग से वाणिज्यकीय विवाद न्यायालय का गठन, श्रम कानूनों को सरल बनाना, पर्यावरण क्लीयरेंस आदि तमाम सुविधाओं पर विश्व बैंक सर्वे करेगी और उसी आधार पर रैंकिंग दिया जाएगा. आप सभी इन सारी प्रक्रियाओं को चुस्त और दुरुस्त करें ताकि आने वाले वर्ष में हमारा राज्य इज ऑफ डूइंग बिजनेस में देश का अग्रणी राज्य बन सके.

प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया के उद्देश्य को पूरा कर नया झारखंड नया भारत का निर्माण करना लक्ष्य
मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि पिछले 5 वर्षों में झारखंड से भ्रष्टाचार और घोटाले की इमेज को मिटाने के लिए सरकार ने प्रतिबद्धता के साथ प्रयास किया है. यह अथक प्रयास का ही परिणाम है कि पिछले साढे 4 वर्षों में सरकार पर किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार का दाग नहीं लगा है. देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का मेक इन इंडिया का उद्देश्य को पूरा कर हमें नया झारखंड और नया भारत का निर्माण करना है. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को दूर करने में सभी विभाग आईटी का अधिक से अधिक उपयोग करें. सभी कार्य को ऑनलाइन करने का प्रयास करें ताकि आम जनता के बीच पारदर्शिता बनी रहे.

अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहण इमानदारी पूर्वक करने पर जोर
मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि शासन और जनता के बीच कोई खाई नहीं होनी चाहिए. सभी विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी इमानदारी और निष्ठा के साथ करें. अधिकारी नए नए इनोवेशन क्रिएट करें जिससे योजनाओं को लागू करने में आसानी हो सके.

अधिकारी समस्या की बात कम और समाधान की बात ज्यादा करें
मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने सभी अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि वे समस्या कम बताएं कल और समाधान की बात ज्यादा करें. योजनाएं सिर्फ ऑन पेपर ना हो बल्कि ऑन ग्राउंड हो इसकी पूरी जिम्मेदारी लें और आम जनता के बीच अपनी छवि को सकारात्मक बनाएं. अधिकारी नौकरी नहीं बल्कि सेवक की भावना में कामों का निष्पादन करें. जीवन का असली सुख गरीबों की सेवा में ही मिलती है.

लाल फीताशाही नहीं बल्कि लाल कार्पेट बिछाए
मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि बिजनेस के संदर्भ में नियम और कानून को सरल बनाएं. नियम और कानून मे लचीलापन आएगा तभी निवेशकों को सरकार के प्रति विश्वास बढ़ेगा. सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन हो और स्पष्ट हो यह सुनिश्चित करें. इच्छुक निवेशकों का स्वागत करें उन्हें लगना चाहिए कि झारखंड वास्तव में बदल रहा है. राज्य में बिजनेस का अनुकूल माहौल तैयार करें. प्रयास यह होना चाहिए कि राज्य की छवि का उदाहरण उद्योगपति दूसरों के सामने भी जाकर करें. निवेशकों को यह प्रतीत हो कि राज्य सरकार ने निवेश के लिए झारखंड में रेड कार्पेट बिछाया है.

*प्रधानमंत्री का लक्ष्य है --देश को आर्थिक सुपर पावर बनाना *
मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य है कि आने वाले 5 से 10 वर्षों में देश का आर्थिक सुपर पावर बने। राज्य और देश में अधिक से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेशक निवेश करें तभी देश से गरीबी समूल नष्ट हो सकेगी और भारत सुपर पावर बनेगा.

सारी व्यवस्था ऑनलाइन हो
मुख्य सचिव ने कहां कि अधिकारी निवेशकों के साथ ऐसा व्यवहार करें जैसा वे अपने परिवार के साथ करते हैं. उन्होंने कहा कि सारी व्यवस्था ऑनलाइन हो कोई भी कार्य ऑफलाइन नहीं स्वीकार की जाएगी. मुख्य सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि सभी विभाग और कार्यालय प्रत्येक सोमवार सुबह 10:30 बजे अपनी आंतरिक समीक्षा बैठक करें. जो अधिकारी दायित्वों का निर्वहन समय सापेक्ष नहीं कर रहे उनके वार्षिक कार्य प्रतिवेदन में प्रतिकूल प्रविष्टि की जाए.

मिला सम्मान
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने इज ऑफ डूइंग बिजनेस में अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियों में ऊर्जा विभाग के मुख्य अभियंता श्री बिजय कुमार सिन्हा, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के श्री कृष्णचंद्र चौधरी, उत्पाद विभाग के श्री गजेंद्र कुमार सिंह, गृह कारा, अग्निशमन सेवा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के श्री सुधीर कुमार वर्मा, राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के श्री साहब सिद्दीकी एवं झारखंड इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के श्री सुनील कुमार सिंह को "सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस" से सम्मानित किया.

बैठक में राज्य के मुख्य सचिव डॉ डीके तिवारी, अपर मुख्य सचिव श्री अरुण कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार वर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री संजय कुमार, उद्योग सचिव श्री के रवि कुमार संबंघित विभाग के सचिव, निदेशक उद्योग, राज्य सरकार के अन्य विभागों के आला अधिकारी, सभी जिलों के सर्विस प्रोवाइडर एवं फील्ड ऑफिसर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे.

रविवार, 16 जून 2019

रेल राज्यमंत्री पीयूष गोयल से मिले सीएम रघुवर दास


मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज दिल्ली में केंद्रीय रेल एवं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की।

सीएम रघुवर दास ने पीएम मोदी को दी बधाई



मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में बीते पांच वर्षों में जो विकास कार्य हुए, उसी का नतीजा है कि भारत की जनता ने इतना बड़ा जनादेश दिया है। उन्हें झारखण्ड की सवा तीन करोड़ जनता की ओर से बधाई दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायी नेतृत्व और नीति आयोग के सहयोग से विकास कार्यों में तेजी आई है। इससे सरकार के प्रति लोगों में विश्वास का भाव जाग्रत हुआ है। मोदी जी के नेतृत्व में हम सभी नए भारत के निर्माण में जुटे हैं।
नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि आपदा राहत कोष के नियमों में लचीलापन लाने की जरुरत है। राज्य सरकारों को अधिक स्वतंत्रता देने की आवश्यकता है। कई बार ऐसी स्थितियां आ जाती है, जिससे तकनीकी दृष्टिकोण से सुखाड़ घोषित करने की स्थिति नहीं बन पाती, परन्तु राहत कार्यों की आवश्यकता रहती है। प्रधानमंत्री ने इन सुझावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए इस पर पहल करने का आश्वासन दिया।

केंद्रीय मंत्री थावरचंद्र गहलौत से मिले सीएम रघुवर दास


मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. थावरचंद्र गलहौत से मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में झारखण्ड नए भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है। आपके सहयोग से हम लक्ष्य प्राप्ति की ओर और तेजी से बढ़ेंगे।

नितिन गडकरी से मिले सीएम रघुवर दास


मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की। मुलाकात के क्रम में मुख्यमंत्री ने श्री गडकरी को झारखण्ड में चल रही सड़क निर्माण की विभिन्न परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया।

शनिवार, 15 जून 2019

साजिशकर्ताओं का चेहरा बेनकाब करने की जरूरत



बिरसा मूर्ति प्रकरण


देवेंद्र गौतम
बिरसा मुंडा की मूर्ति तोड़े जाने के विरोध में 15 संगठनों द्वारा आहुत रांची बंद ज्यादा असरदार नहीं हो सका। यह पुलिस प्रशासन की चौकसी का नतीजा था अथवा आदिवासी संगठनों की जनता पर कमजोर होती पकड़ का सूचक, चिंतन का विषय है। इतना निश्चित हो गया कि झारखंड के लोग चुनाव की पूर्व बेला में इस तरह की हरकतों का मतलब समझने लगे हैं। यह वोटों के ध्रुवीकरण की बहुत पुरानी तकनीक है जो पूरी तरह घिस-पिट चुकी है। 90 के दशक का उन्माद 2019 में नहीं भड़क पाता। लोकसभा चुनाव के पूर्व भी सांप्रदायिक दंगे कराने की भरपूर कोशिश की गई थी लेकिन सफलता नहीं मिली। कुछ समय के लिए तनाव उत्पन्न हुए लेकिन विकराल रूप धारण नहीं कर सके। बिरसा मूर्ति प्रकरण में भी षड़यंत्रकारियों के मंसूबे पूरे नहीं हो सके। सरकार की पहल पर मूर्ति के टूटे हुए हिस्से की मरम्मत करा ली गई। राज्य सरकार ने वहां कांस्य मूर्ति स्थापित करने की घोषणा की। कहीं न कहीं यह भी जख्मों पर मरहम का काम कर गया।
इसमें कोई संदेह नहीं कि यह राजनीतिक उद्देश्यों से रची गई एक साजिश थी। कुछ माह बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और लोकसभा चुनाव से यह साफ हो गया कि अब जाति, घर्म, क्षेत्र, नस्ल आदि की दीवारें ढह चुकी हैं। वोट बैंक जैसी कोई चीज शेष नहीं बची है। फिर भी यह स्पष्ट है कि बिरसा की मूर्ति तोड़ने के पीछे आदिवासियों को भड़काने और उनका वोट साधने की मंशा थी। बिरसा को राष्ट्रनायक से जातिनायक बनाने की कोशिश, जो विफल हो गई। बिरसा मुंडा स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे महानायक हैं जिनके प्रति देश के उन हिस्सों के लोगों के मन में भी श्रद्धा और आदर का भाव है जिनका झारखंड से अथवा आदिवासी समाज से कोई सरोकार नहीं रहा है।
बहरहाल इस घटना को किन लोगों ने अंजाम दिया इसकी गहन जांच होनी चाहिए। कानूनी कार्रवाई तो होनी ही चाहे लेकिन देशवासियों के समक्ष उनका चेहरा बेनकाब किया जाना चाहिए ताकि इस तरह की हरकतें करने वालों को सबक मिले।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...