यह ब्लॉग खोजें

सोमवार, 11 जून 2018

झारखंड प्रदेश राजद ने लालू का जन्मदिन मनाया



रांची। हरमू बाई पास रोड एचईसी स्थित बी-2369/2 राजद प्रदेश कार्यालय में प्रदेश राजद की ओर से राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव जी का 71वां जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया।
उपरोक्त जानकारी देते हुए प्रदेश राजद महासचिव कैलाश यादव ने बताया कि लालुजी के जन्मदिन के सुअवसर पर 71पाउंड का केक काटकर एवं बैलून फोड़कर उपस्थित नेताओ व कार्यकर्ताओंं ने खुशियां मनायें।
मुख्य रूप से उपस्थित इस अवसर पर चतरा के पूर्व विधायक  सह राँची प्रभारी जनार्दन पासवान,प्र०उपाध्यक्ष राजेश यादव,प्र०महासचिव कैलाश यादव,प्र०महासचिव मनोज पाण्डेय,डॉ मनोज,आबिद अली,अभय कु सिंह,रामकुमार यादव,प्रणय बबलू,पूर्णेन्दु यादव,मीनाक्षी देवी,कमल पांडेय,चन्द्र शेखर भगत,सतरूपा पांडेय,विजय राम,मनोज अग्रवाल, सन्तोष प्रसाद,मन्तोष यादव,शाहिद साहिल,इम्तियाज वारसी,सबर फातमी,सीएल राय, कमलेश यादव सहित सभी लोगो ने लालुजी को दीर्घायु होने की कामना की गई,एवं उन्हें कोटि कोटि बधाई दी गई।

2019 की राह आसान नहीं



देवेंद्र गौतम

कल तक जो सड़क साफ सुथरी और सीधी नजर आ रही थी। अब खुरदुरी और टेढ़ी-मेढ़ी दिखने लगी है।मोदी और शाह की जोड़ी के खिलाफ सहयोगी दलों के तेवर कड़े होते जा रहे हैं। उन्हें अपने अहंकार और बड़बोलेपन का खमियाजा भुगतना पड़ रहा है। बाजपेयी सरकार में जो दल एनडीए में शामिल थे वे गठबंधन में वापस आने का संकेत दे रहे हैं बशर्ते शाह और मोदी नेतृत्वकारी भूमिका से बाहर रहें। वे इस जोड़ी की जगह राजनाथ सिंह को नेता मानने को तैयार हैं। टीडीपी से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक ने खुलकर यह बात कही है। शिवसेना के तेवर पहले से ही कड़े हैं। वह महाराष्ट्र में अपनी शर्तों पर गठबंधन चाहती है अन्यथा अकेले लड़ने का एलान कर चुकी है। अन्य सहयोगी दलों ने भी असहयोग का रवैया अपना रखा है।
मोदी सरकार के चार साल से लेकर मोदी अगेन पीएम जैसे कई अभियान चले जा रहे हैं। जिन उपलब्धियों का ढिंढोरा पीटा जा रहा है उनसे आम जनता को कोई सीधा लाभ नहीं हुआ है। खासतौर पर मध्यम वर्ग के लिए यह चार साल एक दुःस्वप्न की तरह व्यतीत हुए हैं। उसके अंदर गहरा क्षोभ और आक्रोश व्याप्त है। मोदी शासन से वे ऊब चुके हैं और उससे छुटकारा चाहते हैं लेकिन कोई विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है। जिस विपक्षी एकता के नाम पर मोदीराज खत्म करने की ताल ठोकी जा रही है, पूर्व के चुनावों में जनता उसका हस्र देख चुकी है। जबतक मोदी की कद काठी का कोई कद्दावर नेता विपक्षी गठबंधन की नेतृत्वकारी भूमिका में नहीं आता मोदी सरकार की वापसी की संभावना खत्म नहीं होती। फिर भी जो माहौल बना हुआ है उसमें इतना तय है कि 2014 जैसा प्रचंड बहुमत हासिल नहीं होगा। अगर एनडीए की सरकार बनती भी है तो उसे गठबंधन के सहयोगी दलों की मदद लेनी होगी। विपक्ष सत्ता पर काबिज नहीं भी हो पाया तो लोकसभा में मजबूत उपस्थिति दर्ज करेगा। शाह और मोदी की स्वेच्छाचारिता के लिए कोई गुंजाइश शायद ही बचे।
दरअसल नरेंद्र मोदी को लोगों ने जिस उम्मीद के साथ सत्ता सौंपी थी वे उसपर खरे नहीं उतरे। उन्हें ऐसी नीतियां बनानी चाहिए थीं जिनका लाभ उनके कार्यकाल में मिले। लेकिन वे बार-बार अपने कार्यों की तुलना कांग्रेस के 60 साल के कार्यकाल से करते रहे और दीर्घकालीन लाभ का दिलासा देते रहे। लोगों को यह समझ में नहीं आया कि अपने निर्णयों से चौंकाने की प्रवृत्ति वाले नेता ने कभी अचानक लाभ पहुंचाकर जनता को चौंकाने की जगह दीर्घकालीन योजनाओं पर क्यों काम करते रहे। लोगों को उनकी विफलताएं नज़र आईं लेकिन उन्होंने अपनी विफलताओं को कभी स्वीकार नहीं किया। तरह-तरह के कुतर्क गढ़कर गलत को सही बताने के प्रयास में लगे रहे।
दरअसल 2014 में प्रचंड बहुमत में आने के बाद मोदी सरकार को सहयोगी दलों के समर्थन की कोई दरकार नहीं थी। फिर भी उन्हें अपने साथ जोड़े रखा। लेकिन उपयोगिता न होने के कारण उन्हें गठबंधन में दोयम दर्जे का स्थान दिया। उनके साथ शालीन व्यवहार करने और सम्मान देने की जरूरत नहीं समझी। उनके शासन वाले राज्यों के प्रति भी सौतेला व्यवहार किया। बल्कि विपक्षी दलों की सरकारों से भी बुरा व्यवहार किया। सत्ता के अहंकार में वे व्यवहारकुशलता को पूरी तरह भूल बैटे और सहयोगी की जगह मालिकों की तरह पेश आने लगे। अमित शाह तो सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेताओं को मिलने का समय भी मुश्किल से देते थे। उनका अहंकार मोदी का भी यही रवैया था। लगातार चुनावी जीत ने उनके अंदर अपराजेय होने का बोध भर दिया था। उनके पांव ज़मीन पर नहीं पड़ रहे थे। सहयोगी दलों को वे अपने रहमो-करम पर जीने वाले कृतदास समझते थे। संघीय अवधारणा को ताक पर रखकर सहयोग की जगह परेशानियां पैदा करते रहे।
अब जबकि तीन राज्यों के विधानसभा और लोकसभा चुनाव सर पर हैं और विपक्षी गठबंधन ने उनके विजय रथ के पहिये रोक दिए हैं तो उनकी तंद्रा टूटी है। अब वे चार साल की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पूरी टीम को लगा चुके हैं। अमित शाह सहयोगियों को मनाने और जन संपर्क साधने के अभियान में निकल पड़े हैं। लेकिन प्रतीत होता है कि अब काफी विलंब हो चुका है। उन्हें अपने अभियान में कितनी सफलता मिल सकेगी कहना कठिन है। चिड़िया खेत चुग चुकी है। अब पछताने से कुछ होने वाला नहीं है। राजनीति में अक्खड़पन और दादागिरी नहीं चलती। समय हमेशा एक सा नहीं रहता। उतार-चढ़ाव आना प्रकृति का नियम रहा है। इस बात को यह जोड़ी भूल चुकी थी। अभी तक उन्हें यह गुमान नहीं था कि विपक्ष में मोदी के मुकाबले खड़ा होने वाला कोई चेहरा सामने आ सकेगा। वे राहुल को पप्पू और विपक्ष के अन्य नेताओं को मूर्ख समझते आ रहे थे। अब संघ के मुख्यालय में भाषण देने के बाद जबसे शिवसेना ने प्रणब मुखर्जी को विपक्ष का पीएम पद का साझा उम्मीदवार बनाने की पेशकश की है, शाह के कान खड़े हो गए हैं। हालांकि शिवसेना की बातों को राजनीतिक दल गंभीरता से नहीं लेते। उसके इस प्रस्ताव पर भी विपक्षी दलों की कोई प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। फिर भी प्रणब मुखर्जी एक से नेता हैं जिनपर सभी विपक्षी दलों की सहमति बन सकती है और उनका व्यक्तित्व मोदी से किसी मायने में कम नहीं है। अगर उन्हें मैदान में उतारा गया तो चुनाव का पूरा समीकरण और परिदृश्य बदल जाएगा। अमित साह इस बात को समझ रहे हैं। नरेंद्र मोदी फिलहाल अगले चुनावों पर कुछ भी बोलने से परहेज़ कर रहे हैं लेकिन उनकी चिंताएं उनके चेहरे से परिलक्षित हो रही हैं। जो भी हो लेकिन 2019 का चुनाव भाजपा के लिए तना आसान नहीं होगा जितना वह समझ रही थी।

रविवार, 10 जून 2018

लोजपा ने लिया शिक्षा व्यवस्था में सुधार का संकल्प

रांची।  रविवार  10 जून  को  लोक जन शक्ति पार्टी झारखंड प्रदेश कार्यालय में, झारखंड प्रदेश छात्र इकाई की ओर से ,रांची जिला छात्र अध्यक्ष नियुक्ति की गई l जिसमें छात्र के पदाधिकारी मौजूद थे, राजेश कुमार को रांची जिला के छात्र अध्यक्ष बनाया गया l  झारखंड प्रदेश अध्यक्ष छात्र इकाई के गौरव प्रसाद ने सभी छात्र पदाधिकारियों को छात्र हित के लिए कार्य करने के लिए प्रेरणा दीl  छात्रों की तमाम परेशानियों को देखते हुए स्कूल, कॉलेजों में छात्रों के शिक्षा में समानता जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई l  झारखंड प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने , त्रूटियों में सुधार करने के लिए शिक्षा विभाग को ज्ञापन  दिया जाएगाl शिक्षा सचिव के माध्यम से बहुत सारे प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय को बंद कर दिया गया हैl  जो कि मौलिक अधिकार का हनन है l लोक जनशक्ति पार्टी के आजीवन सदस्य अमर कुमार महतो ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था जब तक मजबूत नहीं होगी तब तक  समाज  मजबूत नहीं होगा l ग्नामीण सशक्त नहीं होंगे। जबतक अधिकारों और कर्तव्यों  का ज्ञान नहीं होगा तब तक लोग एवं भटके हुए रहेंगे l रांची जिला नवनियुक्त छात्र इकाई के राजेश कुमार ने कहा कि रोजगार के प्रति श्रद्धा के साथ अपनी क्षमता को  प्रदर्शित करना होगा l इस मौके पर लोक जनशक्ति पार्टी के रांची जिला युवा अध्यक्ष अमित सिन्हा  मौजूद थे l नामकोम प्रखंड अध्यक्ष  विशुन कुमार महतो ने छात्रों को संबोधित किया l आगे आने की प्रेरणा दिया आगे उज्जवल भविष्य की कामना की l छात्र पदाधिकारी के रूप में आसिफ खान ,पवन पांडेय, विजिट  मिश्रा ,हिमांशु शाही, अनुराग ,आनंद  कुमार ,रोहित कुमार ,राजू कुमार ,सोनू साहनी  अमृतराज ,अंकित कुमार ,अशोक मुंडा आदि मौजूद थे ll

हरमू रोड श्री श्याम मंदिर में एकादशी संर्कीतन का आयोजन



रोम रोम में रमा हुआ है तेरी ज्योत का आला खाटु वाला खाटु वाला.... से गुजायमान रहा मंदिर

राँची।
हरमू रोड स्थित श्री श्याम मित्र मण्डल द्वारा निर्मित श्री श्याम मंदिर में 10 जून रविवार को रात्रि 10 बजे से एकादशी संर्कीतन का आयोजन किया गया।सर्वप्रथम बाबा को मनमोहक बाँगा(वस्त्र) पहना कर अनुपम श्रृंगार रंग बिरंगे फूलों से श्री गोपाल मुरारका एवं श्री अशोक लडिया ने किया।
मंदिर में ही स्थित श्री शिव परिवार एवं श्री बालाजी महाराज का भी नवीन वस्त्र पहना कर फूलों से श्रृंगार किया गया।
बाबा को आम,लिच्ची,मेवा,पेडा,दूध, रबडी,रोट,चना,गुड इत्यादि नाना प्रकार की मिठाईयों का भोग लगाया गया।
रात्रि 10 बजे मण्डल के सदस्य श्री पंकज गाडोदिया ने अपनी धर्मपत्नी एवं इष्टजनों संग बाबा श्री श्याम जी का अखण्ड ज्योत प्रज्जवलित किया।बाबा को भोग लगाया।मण्डल के श्री कृष्ण कुमार अग्रवाल ने गणेश वंदना के साथ भजन संध्या प्रांरभ किया।मण्डल के अन्य सदस्यों ने श्री श्रवण ढाढनियां,श्याम सुन्दर शर्मा,राजेश ढाढनिया,राजेश चौधरी,गौरव अग्रवाल, साकेत ढाढनिया आदि ने प्यारे प्यारे भजनों से बाबा को रिझाया।
मंदिर मे उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी बाबा के समक्ष अपनी अपनी अर्जी लगाई।रात्रि 1 बजे बाबा की आरती की गई।दरबार में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण का कार्य श्री प्रवीण सिंघानियां,विष्णु चौधरी,रोहित अग्रवाल,अनिल नारनोली,विकास मोदी,अमित,निकुज,शैंकी,निखिल,अंकित आदि अन्य ने किया।

मोदी को देंगे दुमका-साहेबगंज सीटों पर जीत का उपहारः रोहित शारदा

रांची/दुमका। मिशन मोदी अगेन पीएम के प्रदेश युवा मोर्चा अध्यक्ष रोहित शारदा व प्रदेश मंत्री अरविन्दर सिंह खुराना ने दुमका में महत्वपूर्ण बैठक की।
बैठक के पूर्व युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष रोहित शारदा व प्रदेश महामंत्री अरविन्दर सिंह खुराना के पहली बार दुमका पहुँचने पे कार्यकर्ताओं द्वारा जोरदार स्वागत किया गया।
प्रदेश युवा मोर्चा अध्यक्ष रोहित शारदा ने दुमका प्रवास के दौरान बैठक को संबोधित करते हुए कहा की अब समय आ चुका है कि हम चुनाव को लेकर कमर कस ले। उन्होंने बताया कि झारखंड में लोकसभा की चौदह सीट है जिसमे से बारह सीट भाजपा की झोली में है। शारदा ने मिशन मोदी के युवाओ में जोश भरते हुए कहा कि मिशन मोदी के युवा इस बार दुमका और साहेबगंज की दोनों सीटे भाजपा को जितवाकर नरेंद्र मोदी को उपहार देंगे।  उन्होंने आगे कहते हुए कहा कि अब मोदी जी के नेतृत्व में भारत को विकास के पथ पे अग्रसित होने से कोई नही रोक सकता। मोदी जी के नेतृत्व में जो भी काम हो रहा है उससे पूरी दुनिया मे भारत की साख बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मोदी के विकास कार्यो को मिशन मोदी के युवा गांव के अंतिम घर तक ले जाएंगे। प्रदेश युवा मोर्चा अध्यक्ष रोहित शारदा ने दुमका से लोकसभा और विधानसभा के चुनाव का बिगुल फूका।

डीबीटी योजना की समीक्षा करे सरकारःसुबोधकांत



लाभुकों को मिले सस्ते दर पर किरासन, समय पर खाते में जाए सब्सिडी

रांची। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि राज्य सरकार लाभुकों को न्यूनतम दर पर किरासन तेल उपलब्ध कराए। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना (डीबीटी) के अंतर्गत किरासन तेल के वितरण का लाभ संबंधित लोगों को नहीं मिल पा रहा है। गरीब परिवार के लाभुकों के बैंक खाते में सब्सिडी की राशि भी नहीं जा रही है। गरीब लाभुकों और किसानों को अन्य राज्यों की अपेक्षा काफी ऊंचे दाम पर किरासन तेल खरीदने को विवश होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लाभुकों की शिकायत है कि पीडीएस दुकानदार 45 रुपये प्रति लीटर किरासन तेल की बिक्री कर रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में 25 रुपये लीटर किरासन तेल की बिक्री की जाती है। श्री सहाय ने इस संबंध मे झारखंड सरकार के खाद्य आपूर्ति, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्री सरयू राय को पत्र प्रेषित कर डीबीटी योजना की समीक्षा करने और लाभुकों को अन्य राज्यों की तर्ज पर न्यूनतम दर पर किरासन तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

साख बचाने की जद्दो-जहद में अमित शाह



देवेंद्र गौतम

विजय रथ का चक्का थमने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का बड़बोलापन थम गया है। परेशानी बढ़ गई है। उन्हें न सिर्फ गठबंधन के नाराज साथियों को मनाने की जरूरत महसूस हो रही है बल्कि भाजपा के अंदरूनी विवादों से भी निपटने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश विधान सभाओं के चुनाव इसी वर्ष होने हैं। इनका आम चुनावों पर गंभीर असर पड़ेगा। 2019 के आम चुनावों में भी ज्यादा समय नहीं रह गया है। विपक्षी गठबंधन बड़ी चुनौती के रूप में सामने है। गठबंधन के नाराज साथियों में सिवसेना के अधयक्ष उद्धव ठाकरे से उनके मुंबई स्थित आवास पर मिले लेकिन शिवसेना के तेवर नरम पड़ते नहीं दिख रहे। अब वह महाराष्ट्र में जूनियर पार्टनर की भूमिका में रहने को तैयार नहीं है। उसे 282 सदस्यीय विधान सभा में कम से कम 152 सीटें मिलेंगी तभी एनडीए गठबंधन में शामिल रहेगी अन्यथा सभी सीटों पर अकेले लड़ेगी। सेना आलाकमान ने शाह को अपनी शर्तें स्पष्ट तौर पर बता दी हैं। सेना चाहती है कि भाजपा केंद्र संभाले और महाराष्ट्र उसके लिए छोड़ दे। बिहार में नीतीश कुमार तो पहले ही सीनियर पार्टनर के रूप में मौजूद हैं। बिहार के भाजपा नेता सुशील मोदी उनका अग्रत्व पहले ही स्वीकार कर चुके हैं।
उधर राजस्थान की मुख्यमंत्री विजय राजे सिंधिया के साथ शाह का विवाद पहले से ही चल रहा है। इस विवाद के कारण अप्रैल से ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति रुकी हुई है। इसके कारण कार्यकर्ताओं में रोष व्याप्त है। उपचुनावों मे राजस्थान की दो संसदीय और एक विधान सभा सीट हारने के बाद अगले विधान सभा चुनाव के मद्दे-नज़र शाह राजस्थान के पार्टी ढांचे में फेरबदल करना चाहते थे। शाह ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक प्रणामी से इस्तीफा ले लिया लेकिन शाह के पसंदीदा उम्मीदवार जोधपुर के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर वसुंधरा राजे सिंधिया ने आपत्ति व्यक्त कर दी। कई बैठकों के बाद भी इसपर निर्णय नहीं हो सका। शाह अपनी पसंद का प्रदेश अध्यक्ष चाहते हैं जबकि सिंधिया अपने प्रति समर्पित व्यक्ति को इस पद पर बिठाना चाहती हैं। वसुंधरा के तेवर शाह की नाराजगी का सबब बन रहे हैं। वसुंधरा का राजस्थान में अपना जनाधार है। उनकी उपेक्षा भाजपा को महंगी पड़ सकती है लेकिन शाह का स्वेच्छाचारी स्वभाव समझौते की जगह टकराव को प्रेरित कर रहा है। यदि कर्नाटक और उपचुनावों में भाजपा को मुंह की नहीं खानी पड़ती तो शाह के तेवर कुछ और होते संभवतः वसुंधरा की छुट्टी कर दी गई होती। पिछले दिनों शाह ने जयपुर ग्रामीण लोकसभा के कार्यकर्ताओं की बैठक दिल्ली में बुलाई। उन्हें जमकर चुनावी तैयारी करने को कहा। सभा में कुछ लोगों ने सवाल उठाए कि यह बैठक दिल्ली में क्यों बुलाई गई। इसे राजस्थान में ही किया जाना चाहिए था। इस बैठक में वसुंधरा राजे नहीं शामिल हुईं। कार्यकर्ताओं में यह संदेश गया कि शाह और राजे के विवाद के कारण बैठक दिल्ली में की गई। शाह ने बैठक में मोदी सरकार की उपलब्धियों का बखान किया और राजस्थान में उनके विजय रथ को आगे बढ़ाने का आह्वान किया लेकिन वसुंधरा सरकार के कार्यों और उपलब्धियों की कोई चर्चा नहीं की गई। जबकि विधानसभा चुनाव राज्य सकार के कार्यों के आधार पर लड़े जाते हैं।
शाह ने साफ संकेत दिया कि राजस्थान का चुनाव वसुंधरा राजे सीएम रहेंगी लेकिन चुनाव उनके नाम पर नहीं बल्कि मोदी के नाम पर लड़ा जाएगा। दरअसल वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री पद से हटाने की पूरी तैयारी थी। पार्टी को डर था कि वसुंधरा बगावत कर सकी हैं। लेकिन अब शाह ने संकेत दिया कि बदली परिस्थितियों में यह जोखिम नहीं उठाया जाएगा वसुंधरा मुख्यमंत्री बनी रहेंगी। शाह के अहंकारी स्वभाव के कारण राजे ही नहीं भाजपा के बहुत से नेता खार खाए हुए हैं। अब अपराजेय होने का भ्रम टूटने के बाद सबको मनाने की कोशिश चल रही है। समें कितनी सफलता मिलती है और 2019 की लड़ाई में भाजपा अपनी साख बचा पाती है अथवा नहीं यही देखना है।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...