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शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

प्रधानमंत्री आवास योजना में झारखंड को मिलेंगे 2,504.83 करोड़



 सांसद परिमल नथवानी के प्रश्न के जवाब में बोले शहरी कार्य राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी

रांची। केन्द्र सरकार ने झारखण्ड राज्य के लिए प्रधान मंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रू.2,504.83 करोड़ की राशि मंजूर की है। इस योजना के तहत, राज्य में कुल 32,730 पात्र शहरी परिवारों को आवास कब्जा दे दिया गया है। प्रधान मंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत केन्द्र सरकार देश के विभिन्न राज्यों को कुल रू.78,008 करोड़ की सहायता करेगी। केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  हरदीप सिंह पुरी ने यह जानकारी राज्य सभा में जुलाई 19,2018 को सांसद परिमल नथवाणी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उपलब्ध करवाई।

मंत्रीजी के जवाब के अनुसार, इस योजना के तहत देश में 10,371 परियोजनाओं पर विचार किया जा रहा है, जिसमें झारखण्ड से 330 और गुजरात से 332 परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार ने अभी तक विभिन्न राज्यों को रू.27,653 करोड़ की सहायता प्रदान की है इसमें झारखण्ड को रू.975.06 करोड़ और गुजरात को रू.2672.66 करोड़ की सहायता दी गई देश में कुल 5,94,010 आवास निर्माणाधीन हैं, जिसमें झारखण्ड के 34,417 और गुजरात के 97,513 आवास शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में कुल 5,26,496 पात्र शहरी परिवारों को आवासों का कब्जा दे दिया गया है, जिसमें झारखण्ड के 32,370 और गुजरात के 84,931 आवास शामिल हैं।

श्री नथवाणी सरकार द्वारा शहरी गरीबों के लिए आवासन परियोजनाओं हेतु राज्यों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को बढ़ाने के प्रस्ताव और शहरी गरीबों के लिए आवास योजनाओं की प्रगति के बारे में जानना चाहते थे। मंत्रीजी ने बताया कि शहरी गरीबों के लिए आवास परियोजनाओं हेतु राज्यों को वित्तीय सहायता बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है


देश में अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास की स्थिति

सरकार देश में परिवहन के एक वैकल्पिक साधन के रूप में अंतर्देशीय जलमार्गों का विकास करने के लिए प्रयासरत हैजो सड़क एवं रेल परिवहन दोनों ही के मुकाबले कहीं ज्‍यादा स्‍वच्‍छ एवं किफायती है। वर्तमान में देशभर में 111 राष्‍ट्रीय जलमार्ग हैं। वर्ष 2016 में 106 जलमार्गों को राष्‍ट्रीय जलमार्ग घोषित करने के बाद 5 मौजूदा राष्‍ट्रीय जलमार्गों की सूची में इनको शामिल करने से ही राष्‍ट्रीय जलमार्गों की संख्‍या बढ़ गई है।
देश में कुछ राष्‍ट्रीय जलमार्ग पहले से ही परिचालनरत/जहाजों के चलने लायक हैं और इनका उपयोग परिवहन के लिए किया जा रहा है। इनका विवरण निम्‍नलिखित तालिका में दिया गया है :



क्र.सं.
राष्‍ट्रीय जलमार्ग संख्‍या
लंबाई (किलोमीटर में)
स्‍थान  
1.
राष्‍ट्रीय जलमार्ग-1: गंगा-भगीरथी-हुगली नदी प्रणाली (हल्दिया-इलाहाबाद)
1620
उत्‍तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्‍चिम बंगाल
2.
राष्‍ट्रीय जलमार्ग -2: ब्रह्मपुत्र नदी (धुबरी - सादिया)
891
असम

3.
राष्‍ट्रीय जलमार्ग-3: वेस्ट कोस्ट नहर (कोट्टापुरम - कोल्लम)चंपाकारा और उद्योगमंडल नहर
205


केरल
4.
राष्‍ट्रीय जलमार्ग -4
(चरण-I : विजयवाड़ा से मुक्तयाला
82
आंध्र प्रदेश
5.
महाराष्‍ट्र में राष्‍ट्रीय जलमार्ग
i) राष्‍ट्रीय जलमार्ग 10 (अम्‍बा नदी)
ii) राष्‍ट्रीय जलमार्ग 85 (रेवादंडा क्रीक-कुन्‍डालिका नदी प्रणाली)


45

महाराष्‍ट्र
31
6.
गोवा में राष्‍ट्रीय जलमार्ग

i) राष्‍ट्रीय जलमार्ग-27- कम्बरजुआ - जुआरी के साथ संगम से लेकर मंडोवी नदी के साथ संगम तक (17 किलोमीटर)

ii) राष्‍ट्रीय जलमार्ग 68 – मंडोवी-उसगांव पुल से अरब सागर तक (41 किलोमीटर)
iii) राष्‍ट्रीय जलमार्ग111 – जुआरी– सनवोरडम पुल से मोरमुगाओ बंदरगाह तक (50 किलोमीटर)  
17




गोवा
41
50
7.
राष्‍ट्रीय जलमार्ग – 9: अलप्पुझा - कोट्टायम– अथीरमपुझा कैनाल बोट जेटीकेरल में अलप्पुझा से अथीरमपुझा तक (38 किलोमीटर)   
38
केरल
8.
राष्‍ट्रीय जलमार्ग -100: तापी नदी
173
गुजरात
9.
राष्‍ट्रीय जलमार्ग -97: सुंदरबन जलमार्ग
201
पश्चिम बंगाल
(भारत-बांग्‍लादेश प्रोटोकॉल रूट के जरिए)




    अब बंद हो जाएंगी बच्चों को बेचने की दुकानें

    नियमानुसार ही होगा शिशु दत्तक ग्रहण
    मिशनरी आफ चैरिटी की गतिविधियों की होगी गहन जांच

    नई दिल्ली। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से सभी पंजीकृत बाल देखभाल संस्थाओं (सीसीआई) को एक महीने के अंदर विशिष्ट शिशु दत्तक ग्रहण एजेंसियों से जोड़ने का आग्रह किया है। यह जानकारी एक महीने के अंदर सीएआरआईएनजीएस पोर्टल पर भी उपलब्ध होनी चाहिए। कुछ मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से यह तथ्य सामने आया है कि कुछ संगठन किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के प्रावधानों को नजरअंदाज करते हुए अवैध रूप से शिशु दत्तक-ग्रहण का प्रचार कर रहे हैं। मंत्रालय ने इसे बाल तस्करी करार दिया है। 
    राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि वे इस संबंध में स्थानीय अखबारों में विज्ञापन दें ताकि तय समय सीमा में संस्थानों द्वारा अनुपालन सुनिश्चित हो सके। अनुपालन नहीं करने वाली संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। 
    राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेशों को कहा गया है कि मिशनरी ऑफ चेरेटी द्वारा संचालित सभी गृहों के निरीक्षण के लिए निर्देश जारी करें तथा ऐसे सभी संस्थानों/संगठनों की पहचान करें जो गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। अधिनियम की धारा 54 के अनुसार संस्थानों का निरीक्षण समयानुसार संचालित किया जाना चाहिए।  
    इसके अलावा गैर-कानूनी रूप से गोद लेना रोकने के लिए राज्य सरकारों/केन्द्रशासित प्रदेशों को प्रसूति अस्पतालों और ऐसी अन्य सुविधा केन्द्रों पर गहरी निगाह रखने को कहा गया है, जो गैर-कानूनी तरीके से गोल लेने और बाल तस्करी के संभावित जगह हो सकते हैं। राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों को मामले पर एक स्थिति रिपोर्ट 31.07.2018 तक पेश करने को कहा गया है।

            किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 41 के अनुसार अनिवार्य है कि सभी संस्थान चाहे वे राज्य सरकारों द्वारा या स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे हों और जो पूरी तरह या आंशिक तौर पर जरूरतमंद बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण के लिए आवास मुहैया कराते हों, को कानून के तहत पंजीकृत होना चाहिए। अधिनियम की धारा 65 राज्य सरकारों को हर जिले में एक या अधिक संस्थानों या संगठनों को अनाथ, छोड़ दिए गए और आत्मसमर्पित बच्चों का गोद लेने और गैर-संस्थागत देखभाल के जरिए पुनर्वास के लिए एक विशेष गोद लेने वाली ऐजेंसी (एसएए) के रुप में मान्यता देना अनिवार्य है।
    किशोर न्याय अधिनियम,  2015 केन्द्रीय गोद लेन संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) को एक देश से दूसरे देश में गोद लेने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में मान्यता देता है। ये सुविधा ऑनलाइन पोर्टल (सीएआरआईएनजीएस) के माध्यम से दी जा रही है।

    टिकट खरीदते ही मशीन बताएगी कन्फर्मेशन की संभावना


    नई दिल्ली। अब पीएनआर के जरिए प्रतीक्षा सूची में शामिल टिकटों के कंफर्म होने की संभावना का पता लगाया जा सकेगा। रेल विभाग ने इसके लिए एक उपकरण विकसित किया है। इस उपकरण का विकास पिछले 2 वर्षों के प्रतीक्षासूची वाले पीएनआर डेटा का उपयोग करके किया गया है। यह मॉडल विभिन्न प्रतीक्षासूची परिदृश्यों के लिए पैटर्न बनाता है और भावी यात्रा तारीख की संभाव्यता की भविष्यवाणी करता है। वर्तमान में यह सुविधा केवल भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की वेबसाइट से जुड़ा हुआ है। आईआरसीटीसी वेबसाइट पर यह सुविधा निम्नानुसार 13 जून, 2018 से मिल रही है।
    1.  जब यूजर टिकट बुक कराता है और उसकी टिकट प्रतीक्षा सूची में शामिल होती है तब यूजर टिकट के पुष्टिकरण की संभाव्यता की जांच कर सकता है।
    2.  प्रतीक्षा सूची में शामिल टिकटों की पीएनआर जांच में यूजर टिकट की पुष्टिकरण की संभाव्यता की जांच कर सकता है।
          जहां तक टिकट के पुष्टिकरण और रद्दीकरण की संभाव्यता के रूख बात है तो यह पाया गया है कि यह पीक एंड लीन पीरियड, छोटी दूरी की ट्रेनें, लंबी दूरी की ट्रेनें और सीमित ठहराव की ट्रेनों पर निर्भर करता है।
          यह जानकारी आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में रेल राज्यमंत्री राजेन गोहेन ने दी।

    स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

      झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...