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बुधवार, 7 अगस्त 2019

झारखंड के "अतुल"ने जीता कांस्य पदक


रांची। नासिक में चल रही राष्ट्रीय बालक एवं बालिका प्रतियोगिता 10/12 वर्ष में झारखंड के अतुल ने कांस्य पदक जीत कर झारखंड का नाम पहली बार इस प्रतियोगिता के पदक तालिका में शामिल कराया।ज्ञात हो कि झारखंड की तलवारबाजी की टीम पहली बार इस प्रतियोगिता में शामिल हुई है।अतुल श्री विवेकानंद स्कूल, HEC का छात्र है और प्रशिक्षक श्री रामाशीष हैं जो खुद एक उम्दा खिलाड़ी राह चुके हैं।संघ के चेयरमैन श्री राजीव रंजन(बिट्टू)अध्य्क्ष श्री हौदा, कार्यकारी अध्यक्ष श्री अर्चित आनंद,महासचिव श्री जयकुमार सिन्हा एवम विवेकानंद स्कूल के श्री अभय मिश्रा जी ने बधाई दी।अर्चित आनंद ने विशेष कर श्री अभय मिश्रा जी का आभार व्यक्त किया कि इन्होंने टीम तैयार करने में हरसंभव सहयोग किया।

पोस्टल विभाग के पेशनरों ने दिया राज्यव्यापी धरना


रांची। डोरंडा स्थित मुख्य डाक महाध्यक्ष कार्यालय के सामने पेंशनर्स की मांगों के समर्थन में पोस्टल पेंशनर्स एवं केंद्रीय पेंशनर्स एसोसिएशन और पी-4कर्मचारी यूनियन के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय धरना का आयोजन किया गया. धरना की शुरुआत पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। धरना में रांची के अलावा गुमला,सिमडेगा,दुमका,धनबाद,गोमो,
जमशेदपुर,हज़ारीबाग,पलामू ,गिरिडीह के पोस्टल एवं आरएमएस पेंशनर्स एवं कर्मचारी शामिल हुए.केंद्रीय पेंशनर्स एसोसिएशन की ओर से एजी,कॉमर्शियल ऑडिट,सीजीएचएस,
आईबीएम एवं श्रम विभाग के पेंशनर्स ने भाग लिया.
धरना सभा को संबोधित करते हुए स्टेट सचिव ने कहा कि आज देशभर के पेंशनर्स संगठित होकर पेंशन के निजीकरण  के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं.एनपीएस की वापसी की लड़ाई लड़ी जा रही है. वृद्धावस्था में संविधान द्वारा प्रदत्त सामाजिक सुरक्षा की गारंटी को किसी भी स्थिति में समाप्त नहीं करने दिया जायगा.
 झारखंड के डाक विभाग सहित अन्य विभागों के पेंशनर्स  समय पर पेंशन भुगतान न होने ,जीवन प्रमाणपत्र निर्गत न किये जाने सहित  सीजीएचएस के वेलनेस केंद्रों पर जीवन रक्षक दवाओं आदि की अनुलब्धता से जूझ रहे है.
पेंशन लाभार्थियों के हित मे पेंशन मंत्रालय द्वारा जारी आदेशों का अनुपालन नहीं हो पा रहा है.
        ( A) डाक विभाग से संबंधित मांगें;
1.23मई 2018 को डाक निदेशालय द्वारा जारी आदेश का अनुपालन नहीं होने के कारण पोस्टमेन/मेलगार्ड को 1जनवरी 1996 से बढ़े हुए वेतन/पेंशन का बकाया भुगतान अब तक नहीं किया गया.
2.जनवरी 1986 से पहले जिन डायरेक्ट कर्मचारियों ने प्रशिक्षण लिया है,इस अवधि की गणना कर उन्हें प्रोन्नति विशेषकर TBOP/BCR में  लाभ देना.मई 2016 में निदेशालय द्वारा प्राप्त आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है जिसके कारण पोस्टल पेंशनर्स इस लाभ से अब तक वंचित हैं .

होपवेल हॉस्पिटल में पेट के ट्यूमर का सफल ऑपरेशन



रांची। राजधानी के कर्बला चौक के नूर टावर स्थित होपवेल हॉस्पिटल में एक 20 वर्षीय युवती के पेट में हुए ट्यूमर (गांठ) का सफल ऑपरेशन किया गया। इस संबंध में होपवेल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. शाहबाज आलम ने बताया कि बिहार निवासी सरवर आलम की 20 वर्षीय पुत्री को पेट में दर्द की शिकायत रहा करती थी। युवती अविवाहित है। उसके पेट में हुए ट्यूमर का आकार दिन-ब-दिन बढ़ता गया और उसके पेट में असहनीय पीड़ा अक्सर हो जाया करती थी। इससे परेशान होकर उसके पिता ने कई चिकित्सकों से सलाह ली। चिकित्सकों ने अल्ट्रासाउंड कराने के बाद पाया कि युवती के पेट में ट्यूमर (एक गांठ) बन गई है और उसका आकार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। चिकित्सकों ने अविलंब उस युवती के पिता को ऑपरेशन कराने की सलाह दी। इसी क्रम में युवती के पिता कर्बला चौक स्थित होपवेल हॉस्पिटल में पहुंचे और चिकित्सक से परामर्श लिया। परामर्श के बाद स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ सर्जन डॉ. नेहा अली ने युवती के पिता को अविलंब ऑपरेशन करने की सलाह दी। उसके पिता ऑपरेशन के लिए सहमत हो गए। इसके बाद लगभग 4 घंटे की मशक्कत के बाद उक्त युवती के पेट से बिना चीरा लगाए दूरबीन के माध्यम से ट्यूमर को बाहर निकाला गया। डॉ. नेहा अली ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक मायोमेटोमी पद्धति से मार्थलेटर मशीन द्वारा उक्त युवती के पेट में बने गांठ (ट्यूमर) को निकाला गया। युवती के पेट में लगभग डेढ़ किलोग्राम का ट्यूमर था। डॉ नेहा अली ने बताया कि आधुनिकतम तकनीक से किफायती दर पर बिहार और झारखंड के मरीजों को जटिल रोगों की शल्य चिकित्सा अब रांची में भी संभव है। डॉ. अली ने बताया कि पेट में बनी गांठ को दूरबीन से देख कर मशीन द्वारा निकालना काफी चुनौतीपूर्ण था। ऐसे ऑपरेशन में हाई लेवल एक्सपर्टीज की आवश्यकता होती है। वहीं पीड़ित मरीज ने बताया कि ऑपरेशन के बाद वह काफी राहत महसूस कर रही है। उसे सुकून मिल गया है। मरीज ने होपवेल हॉस्पिटल के चिकित्सकों और उनकी टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शुक्रगुजार हूं ऐसे चिकित्सक का जिन्होंने मुझे नया जीवन दिया। इस ऑपरेशन के बाद मरीज बिल्कुल स्वस्थ हैं, उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

खदानों में जमा जल के सदुपयोग के संबंध में समीक्षात्मक बैठक




चाईबासा। आज प्रमंडलीय सभागार में कोल्हान आयुक्त विजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में परित्यक्त खदानों में जमा जल के सदुपयोग के संबंध में समीक्षात्मक बैठक संबोधित की गई जिसमें प्रमुख रुप से उपायुक्त पश्चिम सिंहभूम  अरवा राजकमल, आयुक्त के सचिव, उप निर्देशक खान कोल्हान प्रमंडल, अधीक्षक अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता अंचल चाईबासा, कार्यपालक अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल चाईबासा, निर्देशक एसीसी प्लांट झिकपानी, एभीपी रुंगटा माइन्स, निर्देशक टाटा स्टील लिमिटेड, निर्देशक नोवामुंडी एवं सेल गुवा मुख्य रूप से शामिल हुए।

प्रमंडलीय आयुक्त  विजय कुमार सिंह के द्वारा बताया गया कि पश्चिम सिंहभूम जिले अंतर्गत अनेक परित्यक्त खान मौजूद है । जिसका वर्तमान में कोई उपयोगिता नहीं रह गई है। उक्त खानों में भारी मात्रा में पानी का जमावड़ा हो गया है। जिस पानी का वर्तमान में किसी भी प्रकार का उपयोग नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में भूगर्भ जलस्तर लगातार नीचे गिरता चला जाने से भविष्य में होने वाले जल संकट से इंकार नहीं किया जा सकता है। फलस्वरूप वर्षा जल एवं अन्य प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त जल के संचयन की आवश्यकता है। सरकार का यह निर्देश भी है कि एक - एक बूंद पानी का उपयोग किया जाए उक्त खानों में संचित जल भंडार का प्रयोग क्षेत्र के आसपास के गांव में नल अथवा अन्य माध्यमों से पेयजलापूर्ति एवं कृषि कार्य हेतु सिंचाई के रूप में किया जा सकता है।

प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष बैठक के उपरांत उक्त बिंदुओं पर की गई चर्चा

>> रुंगटा माइन्स चाईबासा के प्रतिनिधि द्वारा बताया गया कि चाइना क्ले के माइंस में जलजमाव अत्यधिक है। तथा कई माइंस में कार्य किए जाने के पूर्व उक्त माइंस का जल दूसरे में डाल दिया जाता है। तत्पश्चात पहले माइंस में कार्य शुरू किया जाता है । माइंस से जो भी पानी निकलता है, उसे नाले के सहारे बहा दिया जाता है इस क्रम में आयुक्त द्वारा निर्देश दिया गया कि पानी का कंपनी द्वारा सदुपयोग किया जाना चाहिए तथा व्यर्थ में बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए।

>> एसीसी झिकपानी के प्रतिनिधि के द्वारा बताया गया कि एसीसी प्लांट अपना पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए माइंस का ही पानी का प्रयोग करता है। तथा उन्होंने बताया कि ए ब्लॉक वाले माइंस में जो भी जल मौजूद है। उस जल का प्रयोग गांव वाले नहाने एवं गाड़ी धोने हेतु करते हैं। साथ ही कंपनी द्वारा बताया गया कि टोंटो प्रखंड के 04 गांव में पाइप लाइन के सहारे कंपनी के द्वारा पानी मुहैया कराई रही है।

>> टाटा स्टील नोवामुंडी के प्रतिनिधि द्वारा बताया गया कि उनके पास परित्यक्त खान की संख्या शून्य है तथा उनके पास ऐसा कोई भी खान नहीं है। जिसमें जल जमा हुआ है।
प्रमंडलीय आयुक्त के द्वारा उप निर्देशक खान को निर्देश दिया गया कि कंपनी प्रबंधक से समन्वय स्थापित कर ऐसे सभी परित्यक्त खदानों का भौतिक सत्यापन कर उसमें कितने मात्रा में जल जमा हैं। उसका आकलन किया जाए। तथा उक्त जल का प्रयोग पेयजल अथवा सिचाई के रूप में किया जा सके इसका प्रतिवेदन तैयार करे।
सेन्ट्रल वाटर बोर्ड रांची से अनुरोध किया जाए कि वे ग्राउंड वाटर एवं जल संग्रह का कैसे सदुपयोग हो उस पर अपना सर्वे रिपोर्ट दें तथा सेंट्रल वाटर बोर्ड रांची अधीक्षक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता अंचल चाईबासा एवं उप निर्देशक खान कोल्हान प्रमंडल सभी संबंधित बिंदुओं पर अपना मंतव्य सहित प्रतिवेदन 15 दिनों के भीतर देंगे ताकि अनुकूल जल संग्रह का सदुपयोग किया जा सके
ताकि सभी परित्यक्त खदानों का भौतिक सत्यापन के पश्चात जमा पानी का पेयजल अथवा सिंचाई के रूप में प्रयोग किए जाने हेतु प्रतिवेदन सरकार को भेजा जा सके।

कंज्यूमर प्रोटक्शन बिल पारित होना उपभोक्ता हित में : राकेश कुमार सिंह



रांची। उपभोक्ताओं के हित के लिए बहुप्रतीक्षित बिल लोकसभा   और राज्य सभा में पारित किया जाना सराहनीय व उपभोक्ता हित में है। इसे पहली बार तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2015 में सदन में पेश किया था। यह बिल कतिपय कारणों से लंबित रह गई थी। वर्तमान में केन्द्र की मोदी सरकार ने जनवरी 2018 में कंज्यूमर प्रोटक्शन बिल 2018 लोकसभा में लाया और 20 दिसंबर 2018 को यह बिल लोकसभा में पास हो गया। लेकिन राज्य सभा में पास नही हो पाई।अब इस विधेयक के राज्य सभा में पास होने पर  देश के उपभोक्ताओं में खुशी की लहर है। उक्त बातें झारखंड राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद के सदस्य राकेश कुमार सिंह ने कही। श्री सिंह ने इस बिल के पारित होने पर खुशी का इजहार किया। उन्होंने कहा कि कंज्यूमर प्रोटक्शन एक्ट 1986 अधिनियम समय के अनुरूप काफी पुराना हो चुका था। बाजार की प्रकृति , बाजार की स्थिति और बाजार के प्रकार में काफी बदलाव आया है। इस बिल के तहत आज के परिप्रेक्ष्य में उपभोक्ता ठगा महसूस कर रहे थे। नए बिल के लिए देश भर के विभिन्न उपभोक्ता संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू किया था। झारखंड में उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली अग्रणी संस्था सिटीजन एक्शन ग्रुप ने भी इस संबंध में अनेक बार प्रयास किया। राकेश कुमार सिंह ने विगत सितंबर में पूरी (ओडिशा) में आयोजित कंज्यूमर कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया के सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाया था। आज देश भर के उपभोक्ताओं के हित में काम करने वाली संस्थाएं गर्व महसूस कर रही हैं। सरकार ने उनकी मांगों को माना और देशहित में उपभोक्ताओं के हित में कदम उठाया। जहां सभी वस्तुओं को सम्मिलित किया गया था, वहीं कंज्यूमर प्रोटक्शन बिल 2019 वस्तुओं और सेवाओं के साथ साथ टेलीकॉम, हाउसिंग निर्माण और सभी प्रकार के ट्रांजैक्शन, चाहे वह ऑनलाइन हो या टेलिशाॅपिंग, इसको भी कानून के दायरे में लाया गया है। कंज्यूमर प्रोटक्शन एक्ट 1986 में जहां प्रोडक्ट लायबिलिटी में किसी तरह का प्रोविजन नहीं था। 2019 के बिल में प्रोडक्ट लायबिलिटी को भी लाया गया है। इसके अंतर्गत मैन्यूफैक्चर सर्विस प्रोवाइडर और सेलर भी आएंगे। अनफेयर कांट्रैक्ट्स के संबंध में कंज्यूमर प्रोटक्शन बिल 1986 मौन है। लेकिन कंज्यूमर प्रोटक्शन बिल 2019 के अनुसार अनफेयर कांट्रैक्ट को परिभाषित किया है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत राज्य केंद्र और जिला स्तरीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद के गठन की बात कही गई थी, जबकि उपभोक्ता संरक्षण बिल 2019 के अंतर्गत सेंट्रल प्रोटक्शन काउंसिल सीपीसी का गठन किया जाना है। सीपीसी भारत सरकार की सलाहकार समिति रहेगी, जो कंज्यूमर राइट्स के प्रमोशन और प्रोडक्शन के लिए काम करेगी। सीपीसी का गठन डिस्ट्रिक्ट और स्टेट और नेशनल लेवल पर भी होगा।यह बिल उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और संरक्षण करेगा व उपभोक्ताओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उपभोक्ताओं के हित के लिए एक रेगुलेटर सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटक्शन अथॉरिटी सीसीपीए का गठन किया गया।

मंगलवार, 6 अगस्त 2019

सुषमा स्वराज के निधन पर सीएम रघुवर दास ने जताया शोक

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पूर्व विदेश मंत्री सुष्मा स्वराज के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि अत्यन्त भारी मन से कहा कि देश की पूर्व विदेश मंत्री, बहन सुषमा स्वराज जी के निधन की खबर से स्तब्ध और दुखी हूँ। 

उन्होंने कहा कि सुषमा जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित किया, उनकी कमी हमें सदैव महसूस होगी। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति दे।
https://twitter.com/dasraghubar/status/1158802727469629440?s=08

थमा पलायन, मिल रहा काम, कामगारों के चेहरे पर आई मुस्कानः राज पलिवार

श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री राज पलिवार ने सूचना भवन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया
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★ अकुशल क्षेत्र के कामगारों को प्रतिदिन मिल रहा 249.83 रुपए न्यूनतम मजदूरी

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रांची। कामगारों के चेहरे पर मुस्कान आए और युवाओं को रोजगार मिले, यह मुख्यमंत्री रघुवर दास की विशेष प्राथमिकताओं में शामिल है. सरकार द्वारा पिछले साढ़े चार सालों में उठाए गए कदमों का नतीजा है कि कामगारों के हालात में काफी बदलाव आए हैं. श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री राज पलिवार ने आज सूचना भवन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बातें कही.

उन्होंने कहा कि संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को काम के लिए अच्छा वातावरण मिले. कामगारों का पलायन नहीं हो. उन्हें न्यूनतम मजदूरी दर मिले. इस बाबत विभाग की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही है. इसके साथ बंधुवा मजदूरी और बाल मजदूरी पर रोक लगाने के लिए भी सरकार की ओर से ठोस कदम उठाए गए हैं.

श्रम कानूनों के सरलीकरण मामले में झारखंड का पूरे देश में पहला स्थान

श्री पलिवार ने बताया कि श्रम कानूनों के सरलीकरण में झारखंड पूरे देश में पहले स्थान पर है. इससे ईज आफ डूईंग बिजनेस को बढ़ावा मिल रहा है. इसके साथ फैक्ट्रियों को आऩलाइन लाइसेंस निर्गत किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि कामगारों के हितों के मद्देनजर अब उनके खाते में वेतन सीधे डालने को अनिवार्य कर दिया गया है. इसके साथ अकुशल श्रेणी के कामगारों के न्यूनतम मजदूरी दर को बढ़ाकर 249.83 रुपए प्रतिदिन कर दिया गया है.

कामगारों की चिंता है राज्य सरकार को

श्री पलिवार ने बताया कि कामगारों के जन्म से लेकर उनके मृत्यु तक की चिंता राज्य सरकार को है. कामगारों और उनके आश्रितो के हित का पूरा ख्याल रखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि निर्माण क्षेत्र के कामगारों को दुर्घटना मृत्यु के बाद देय लाभ की राशि बढ़ाकर पांच लाख रुपए कर दी गई है, वहीं न्यूनतम पेंशन को एक हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है. श्री पलिवार ने कहा कि आज निबंधित निर्माण कामगारों की संख्या 5.66 लाख है. इन्हें विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत औजार, साइकिल, सेफ्टी किट और उनके मेधावी बच्चों को छात्रवृति दी जा रही है.

असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए चल रही पांच योजनाएं

उन्होंने कहा कि राज्य में निबंधित असंगठित क्षेत्र के कामगारों की संख्या 13.10 लाख है. इनके हित  में सरकार द्वारा पांच योजनाओं का संचालन किया जा रहा है. इसमें असंगठित कर्मकार बीमा योजना, कौशल उन्नयन योजना, कौशल उन्नयन योजना, असंगठित कर्मचारी के बच्चों के लिए मुख्यमंत्री छात्रवृति योजना, चिकित्सा सहायता योजना और अंत्येष्टि सहायता योजना शामिल है.

बंधुवा मजदूरों के पुनर्वास के लिए दी जा रही आर्थिक सहायता

श्री पलिवार ने बताया कि बंधुवा मजदूरों के पुनर्वास को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है. इस सिलसिले में चिन्हित किए गए विभिन्न श्रेणियों के बंधुवा मजदूर को एक लाख से तीन लाख रुपए की नगद सहायता राशि दी जाती है.  इसके साथ सभी जिलों के उपायुक्त को 10-10 लाख रुपए भी उपलब्ध कराया गया है. इसके अलावा बाल श्रम के उन्मूलन के लिए भी सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं.  पिछले  चार सालों में 550 बाल श्रमिक मुक्त कराए जा चुके हैं.

भर्ती कैंप अथवा रोजगार मेले के माध्यम से दो लाख से ज्यादा को मिला रोजगार

रोजगार के लिए य़ुवाओं का पलायन नहीं हो, इस बाबत दत्तोपंत तेंगड़ी रोजगार मेला  अथवा रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है. इस सिलसिले में अबतक 2,18,837 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है. श्री पलिवार ने बेताया कि नियोजनालयों में निबंधित बेरोजगारों की संख्या 2,37,842 है, जबकि नियोजननालय पोर्टल पर निबंधित निजी नियोजकों की संख्या 1376 है. इसके अलावा 22 मॉडल करियर सेंटर की भी स्थापना की गई है.

हर प्रखंड में आईटीआई खोलने की चल रही तैयारी

श्री पलिवार ने बताया कि युवाओं के कौशल उन्नयन पर विशेष जोर है. इस बाबत सभी प्रखंडों में आईटीआई खोलने की तैयारी चल रही है. उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में सरकारी आईटीआई की संख्या बढ़कर 59 हो गई है, जबकि सीएसआऱ के तहत 10 आईटीआई का संचालन किया जा रहा है.

लघु व्यापारी मानधन योजना की होगी शुरुआत

श्री पलिवार ने बताया कि प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना की तर्ज पर लघु व्यापारी मानधन योजना की शुरुआत केंद्र सरकार कर रही है. 1.50 करोड़ रुपए वार्षिक टर्नओवर करने वाले व्यापारियों को इस योजना का लाभ मिलेगा. इसके अंतर्गत 18 से 40 साल तक के उम्र वाले व्यापारियों को हर माह 55 से 200 रुपए जमा करने होंगे. उतनी ही राशि सरकार की ओर से भी दी जाएगी. 60 साल की उम्र पूरी करने के बाद उन्हें पेंशन की जाएगी और अगर उसकी मृत्यु हो जाए तो उनके आश्रित को इसका लाभ मिलेगा. इसके लिए सभी प्रज्ञा केंद्रों में निबंधन कराया जा सकता है.

 संवाददाता सम्मेलन में श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के प्रधान सचिव श्री राजीव अरुण एक्का, विशेष सचिव जगत नारायण प्रसाद और सूचना एवं जन संपर्क विभाग के निदेशक श्री रामलखन प्रसाद गुप्ता समेत कई अन्य मौजूद थे.

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...