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सोमवार, 17 दिसंबर 2018

जनता के बीच बढ़ रही है सुधांशु सुमन की लोकप्रियता :- सुरेश उरांव




सिमरिया।  रे ग्राम सेवा फाउंडेशन तिरंगा सम्मान यात्रा के सूत्रधार व प्रसिद्ध समाजसेवी सुधांशु सुमन सिमरिया प्रखंड के जबड़ा पंचायत के रँगनिया और संदली गांवो का दौरा किया । समाजसेवी सुधांशु सुमन ने सभी ग्रामीणों से मुलाकात की । उन्होंने अपने सम्बोधन में जबड़ा पंचायत के ग्रामीणों के आगे अपने तिरंगा सम्मान यात्रा के तहत ग्रीन इंडिया,हेल्दी इंडिया,एडुकेट इंडिया,विलेज एक्शन प्लान और पलायन जैसे मुद्दे को वहां के जनमानस को प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्टगान से प्रारंभ हुई।
रँगनिया एवं संदली के ग्रामीणों ने बताया कि रँगनिया बिरहोर टोला से बालिका विद्यालय तक पीसीसी रोड का निर्माण हो चुका है उस रोड को रँगनिया एवं संदली तक पूरा किया जाए।
श्री सुमन ने जबड़ा के पारा शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका से कहा कि आपलोगो की मांग को लेकर मैं 10 साल से लड़ रहा हूं और इस बार मैं 4 बार प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को ज्ञापन सौपा हूँ ज्ञापन के क्रमांक 2 में पारा शिक्षक एवं आंगनवाड़ी सेविका-सहायिका का मानदेय अन्य राज्यो की भांति बढ़ाई जाय और स्थाईकरण किया जाने की मांग किया है।
सभी ग्रामीणों ने समाजसेवी सुधांशु सुमन की बातों को सुनने के बाद जय जवान,जय किसान ,एक हाथ मे पौधा - दूजे हाथ मे तिरंगा लेकर जैसे आवाजो से गूंजने लगे।
चतरा के प्रत्येक गांव को रे ग्राम सेवा फाउंडेशन के माध्यम से स्वच्छ चतरा,स्वास्थ्य चतरा,शिक्षित चतरा,हरित चतरा और विलेज एक्शन प्लान का निर्माण हो जैसे कार्यो से आगे लाया जाएगा। श्री सुमन से नियमित और स्थायी बिजली,सड़क और पानी जैसे मूलभूत आवश्यकताओं की जल्द से जल्द पूर्ति करवाने की बात कही। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से लोकसभा महिला प्रभारी प्रतिमा देवी,सागर कुमार,अमन अग्रवाल, आनंद हेम्ब्रम,जगरनाथ उरांव, सुरेश उरांव, विकाश कुमार, संजीत उरांव, तुला यादव, फुला यादव, राजू यादव, दुलारी मिंज, फूलकुमारी देवी, सीता यादव, सूबा देवी, रंजू देवी, मीना देवी, अनिता देवी, सुमित्रा देवी, अंगिता देवी, मंती देवी, सरिता देवी, मुनिया देवी, सरोइया देवी, पार्वती देवी, दीपा देवी, रूपा देवी, अनिता देवी, मंजू देवी, अनिता देवी समेत सभी ग्रामीण शामिल थे।

रविवार, 16 दिसंबर 2018

पारा शिक्षकों के दुखड़े से रू-ब-रू हुए समाजसेवी सुधांशु सुमन


पारा शिक्षकों की मांगों को ठहराया जायज

इटखोरी।  इटखोरी एकीकृत पारा शिक्षक संघ ने अपने साथ हो रहे अन्याय के बारे में समाजसेवी सुधांशु सुमन को बताया। शिक्षकों ने वनभोज कार्यक्रम का आयोजन कर समाजसेवी सुधांशूु सुमन को आमंत्रित किया एवं वनभोज कार्यक्रम से पूर्व एक सभा विक्रम कुमार शर्मा, जो संघ के अध्यक्ष है ,.की अध्यक्षता में हुई। पारा शिक्षको ने अपनी मांगों की सूची सौपते हुए कहा कि राज्य के सभी विद्यालय पारा शिक्षकों की बदौलत ही चल रहे है। उसके बावजूद पंद्रह नवम्बर से पारा शिक्षक लगातार हड़ताल पर है, बच्चे विद्यालय में पढ़ाई नही कर पा रहे है। उसके बाद भी यह सरकार मांगों को नही मान रही है।बच्चे पढ़े ना पढ़े इस सरकार को कोई मतलब नही। पारा शिक्षकों ने समाजसेवी सुधांशू सुमन से यह आग्रह किया कि अपने संस्था के माध्यम से उनकी बात सरकार तक पहुंचाएं। पारा शिक्षक संघ के प्रखंड अध्यक्ष विक्रम शर्मा ने बताया कि प्रखंड के 68 विद्यालय पूरी तरह से पारा शिक्षक पर निर्भर है एवं 275 पारा शिक्षक के परिवार पूरी तरह उनपर निर्भर हैं। ऐसे में सरकार के इस रवैया से बच्चे,शिक्षक एवं उनके पूरे परिवार प्रभावित है।पंचायत समिति सदस्य संतोष सोनी ने कहा कि पारा शिक्षक संघ के इस संघर्ष में प्रखंड के जनप्रतिनिधियों का भरपूर सहयोग मिलेगा ऐसा मेरा पूर्ण विश्वास है। रे ग्राम सेवा फाउंडेशन तिरँगा सम्मान यात्रा के सूत्रधार व प्रसिद्ध समाजसेवी सुधांशु सुमन ने कहा कि पारा शिक्षकों की पीड़ा हृदयविदारक है। उन्होंने कहा शिक्षक समाज के आधार स्तंभ है, जिनके मार्गदर्शन से भावी पीढ़ी कर्तव्यों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर सकेगीl इस बात को सोचते हुए मन में शिक्षक का स्थान बहुत ऊंचा हो जाता हैl  किसी भी देश या समाज में शिक्षा की व्यवस्था को सुदृढ़ करने में प्राथमिक शिक्षकों की अहम  भूमिका होती हैl उन्होंने कहा कि  समस्त राज्य का यह कर्तव्य होना चाहिए कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेl सरकार भी इस विषय को लेकर गंभीर हैl हम सभी चाहते हैं कि हमारे बच्चों की शिक्षा निर्विघ्न और गुणवत्तापूर्ण होl इस बात पर निर्णय करना  एक अलग विषय है कि कौन से पारा शिक्षक गुणवत्तापूर्ण है और कौन नहींl लेकिन वर्तमान समय में अगर ये शिक्षा का अलख जगाने हेतु अपनी सेवा दे रहे हैं  तो देश के अन्य राज्य यथा बिहार, छत्तीसगढ़ और यूपी के तर्ज पर झारखंड में भी पारा शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय मिलनी ही चाहिए l
  इटखोरी प्रखंड में 104 प्राथमिक/मध्य विद्यालय में 275 पारा शिक्षक हैंl जो एक हज़ार रुपये मानदेय से अपनी सेवा शुरू करते हुये शिक्षा की गुणवत्ता में अपना योगदान देते हुए अब उम्र के तीसरे या चौथे पडाव तक पहुंच चुके हैंl प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में इनका योगदान अतुलनीय हैl ऐसे में इनके और इनके परिवारजनों के
भरण- पोषण हेतु  इन्हें एक सम्मानजनक मानदेय अवश्य मिलनी चाहिएl उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में पारा शिक्षकों की स्थिति को देखते हुए  जल्द इनके बेहतरी  हेतु जो भी मुझसे हो सकेगा विशेष रूप से प्रयास करूंगा l
समाजसेवी सुधांशु सुमन ने सरकार से भी आग्रह किया है कि सुबे के पारा शिक्षक और विद्यार्थियों के हित में जल्द निर्णय ले, ताकि शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ रहे l

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...