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मंगलवार, 12 जून 2018

अजा आयोग के गठन पर बाउरी समाज ने मंत्री को बधाई दी



रांची।  बाउरी संघर्ष मोर्चा, झारखंड प्रदेश का एक प्रतिनिधिमंडल राजस्व, निबंधन, भूमि सुधार, पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री अमर कुमार बाउरी के आवास पर मुलाकात कर उन्हें 17 वर्ष बाद राज्य में बने झारखंड प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के गठन के लिए धन्यवाद और बधाई दी। इस मौके पर केंद्रीय सदस्य करम चंद बाउरी ने कहा कि यह हमारे लिए बहुत ही सौभाग्य की बात है कि झारखंड सरकार के मंत्री अमर कुमार बाउरी हमारे ही समाज के सुपुत्र हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड प्रदेश में हमारा समाज अनुसूचित जाति का बहुसंख्यक है और अनुसूचित जाति आयोग का उपाध्यक्ष पद एवं सदस्य पद रिक्त हैं।
बाउरी संघर्ष मोर्चा, झारखण्ड प्रदेश ने एक आवेदन के माध्यम से मंत्री से आग्रह किया कि उक्त पद के लिए बाउरी समाज से ही दो लोगों को इस पद पर नियुक्त किया जाये। इससे बाउरी समाज और अधिक मजबूत बन सकेगा। बाउरी संघर्ष मोर्चा के केन्द्रीय सदस्य ने कहा कि इस पद पर बाउरी समाज के व्यक्ति के पदस्थापित होने से हमारा समाज भूख और भय मुक्त बनेगा।
इस मौके पर केंद्रीय सदस्य करमचंद बाउरी, गोपाल प्रसाद बाउरी, रंजीत बाउरी, दीपक कुमार बाउरी, अजय बाउरी, रामदेव बाउरी सहित अन्य केंद्रीय सदस्य मौजूद थे।

मोदी अगेन पीएम के तहत हस्ताक्षर अभियान



रांची। मिशन मोदी अगेन पीएम युवा मोर्चा झारखंड प्रदेश की ओर से 2019 में नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए अल्बर्ट एक्का चौक पे हस्ताक्षर अभियान चलाया गया।

इसकी शुरुआत रांची महानगर भाजपा अध्यक्ष मनोज मिश्रा और मिशन मोदी के प्रदेश अध्यक्ष अनुरंजन अशोक ने किया।
अतिथियों का स्वागत मिशन मोदी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रोहित शारदा के द्वारा किया गया।
इस दौरान महानगर अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के पथ पे अग्रसर है। आज नरेंद्र मोदी के विकासशील योजनाओं की वजह से देश का हर जनमानस अपने आप को गौरवांवित महसूस कर रहा है।
मिशन के प्रदेश अध्यक्ष अनुरंजन अशोक ने कहा कि मोदी आजादी के बाद के सबसे बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं। आज कई ऐसी योजनायें है जो जनता को 70 सालों बाद मिलीं। नरेंद्र मोदी की सरकार जनता को किए गए वादे को निभा रही है।
मौके पर प्रदेश मंत्री अरविन्दर सिंह खुराना ने कहा कि मोदी के प्रति जनता का उत्साह वही है जो लोकसभा चुनाव के वक्त था। नरेंद्र मोदी ही एकमात्र ऐसे नेता है जो सबका साथ सबका विकास चाहते है।
मिशन मोदी के प्रदेश युवा मोर्चा अध्यक्ष रोहित शारदा ने कहा कि आज मोदी के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान से और रांची के जनमानस को देखते हुए यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि 2019 में भी नरेंद्र मोदी की ही सरकार बनेगी। शारदा ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने आज समुदाय को प्रसन्न किया है।

वही मिशन मोदी के प्रदेश युवा मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष तुषार विजयवर्गीय ने कहा कि मिशन मोदी के युवा अब हर जिलों में हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे। नरेंद्र मोदी के जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुचायेंगे। विजयवर्गीय ने कहा कि यह हस्ताक्षर अभियान क्षण मात्र का नही है इससे यह मालूम चलता है कि जनता में आज भी मोदी के प्रति दीवानगी हैं।

कार्यक्रम में महिला बच्चे बुजर्ग ने नरेंद्र मोदी को 2019 नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए काफी उत्साह के साथ हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लिया।

इस अवसर पे राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अलका सिंह, प्रदेश के उपाध्यक्ष प्रीतम साहू, प्रदेश महामंत्री पीयूष विजय, प्रदेश कार्यक्रम संयोजक सुशान्त सिंह, धर्मेंद्र कुमार, सोशल मीडिया प्रभारी धनंजय कुमार, कानूनी सलाहकार प्रीति शर्मा, प्रदेश मीडिया प्रभारी सोनू मिश्रा, राँची जिला अध्यक्ष रामटहल नायक, रविन्द्र कुमार, नीरज पांडेय सतीश कुमार, अनूप पांडेय,गुनी गुप्ता, सूरज सिंह, विकास नायक, अभय कुमार, रिकेश केसरी, मनोज, कमलेश, अनिमेष कर्मकार, राहुल, राहुल सिंह, प्रशांत, कुमार विशाल, धनंजय गुप्ता, श्रवण प्रसाद, प्रवीण कर्मकार, संतोष सिन्हा, उज्ज्वल कुमार, चंचला देवी, सुमंत कुमार, कानू सिन्हा, रमेश खत्री, सोनू वर्मा, निखिल, रानी, अतिल प्रवीण, धुर्वा मंडल अध्यक्ष विश्वजीत सिंह, सचिन सिंह, रवि कुमार, अभिजीत कुमार सिंह, मनु सिंह, मनीष पाठक, रवि ठाकुर, राजू कुमार, बंटी शर्मा, मुकेश कुमार, आदि युवा मोर्चा के सैकडो कार्यकर्ता उपस्थित थे।

पुलिस मेंस कार्यालय में इफ्तार पार्टी आयोजित


 रांचीझारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के कार्यालय में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया। स इफ्तार पार्टी में डीआइजी ए वी होमकर, एसएसपी कुलदीप द्विवेदी ,एसडीएम अंजली यादव अन्य अधिकारीगण शामिल हुए।
झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के तरफ से महामंत्री रमेश उरांव। प्रदेश उपाध्यक्ष अम्बर खान ,प्रदेश प्रतिनिधि रहमान खान सहित कई लोग मौजूद थे।


सांसद परिमल नथवाणी ने बंटवाए कपड़े और सेवइयां



रांची। रास सांसद परिमल नथवाणी के सौजन्य से चेन्जिंग लाइव्स ट्रांसफोर्मिंग इण्डिया (सी.एल.टी.आई.) के माध्यम से ईद मुबारक के अवसर पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कर्बला नगरवासियों के बीच कपड़े और सेवइयों का वितरण किया गया। जरूरतमंद लगभग 100 लोगों को कपड़े और सेवइयां दिए गए, कपड़े और सेवइयों को पाकर बहुत खुश दिखे और उन्होने सांसद नथवाणी जी के लम्बी उम्र की दुआ की और कहा कि वह इसी तरह हम जरूरतमंदों की मदद करते रहे। इस अवसर पर अफरोज आलम, मौलाना तहजीबुल हसन, मो.शकिल, मो.इकबाल, मो.गुलफाम, मो.सैफ वली, माजहिद इस्लाम, मो.शहनवाज, मो. परवेज, मो.जानी, मो.इस्तेखार आदि मौजूद थे।

बात का बतंगड़



देवेंद्र गौतम

बात सीधा-सीधी भी कही जाए तो समझने वाले समझ लेते हैं। लेकिन अगर किसी उदाहरण से से पुष्ट न किया जाए तो वक्ता की विद्वता की धाक नहीं जमती। इसलिए सतर्क वक्ता कुछ न कुछ उदाहरण जरूर पेश करते हैं। स चक्कर में कभी-कभी बात का बतंगड़ बन जाता है। कांग्रेस के महान नेता राहुल गांधी भी अपनी विशिष्ट वाचन शैली में अपने ज्ञान का भंडार खोल देते हैं। बाद में हंसी का पात्र बन जाते हैं। अभी हाल में उन्होंने अन्य पिछड़े वर्ग से हमकलाम होते हुए कहा कि कोकाकोला की शुरुआत अमेरिका के एक शिकंजी विक्रेता ने की थी और मेकडेवल्ट कंपनी का प्रारंभ एक ढाबे वाले ने और फोर्ड, होंडा, मर्सडिज जैसी औटोबाइल कंपनियां साधारण मैकेनिकों ने की थी। अमेरिका के लोगों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना, सराहा और इतना नवाज़ा कि वे बड़ी कंपनियों के मालिक बन बैठे। उनकी तमाम सूचनाएं गलत निकलीं और वे मजाक का पात्र बन गए। यह सूचनाएं इंटरनेट पर या पुस्तकों से प्राप्त की जा सकती थीं। लेकिन राहुल जी ने इसके लिए कुछ ऐसे माध्यम का इस्तेमाल किया जहां गलत सूचनाएं परोसी जाती हैं। उदाहरण के चक्कर में उनके वक्तव्य का मूल भाव ही गौण हो गया। वे कहना यह चाहते थे कि भारत में प्रतिभाओं की कद्र नहीं होती। जबकि हर व्यक्ति के अंदर कुछ न कुछ विशेष प्रतिभा होती है। प्रोत्साहन न मिलने से प्रतिभाएं कुंठित हो जाती हैं। प्रतिभाओं की कद्र होनी चाहे और बारत में भी मेहनतकश वर्ग के लोगों का पताका उद्योग जगत में लहराना चाहिए। बात अच्छी थी लेकिन अपुष्ट उदाहरण के कारण बतंगड़ बन गई।
राहुल बाबा ने कोई गलत बात नहीं कही। लेकिन यह भूल गए कि प्रतिभाओं की उपेक्षा का सिलसिला कोई मोदी राज के बाद शुरू नहीं हुआ और उनके हाथ से सत्ता निकलते ही भारत में निचले तबके लोगों के पूंजीपति वर्ग से शामिल होने की रफ्तार तेज़ हो जाएगी। उपेक्षा तो कांग्रेस शासनकाल में भी होती थी। लेकिन राहुल बाबा कह सकते हैं कि यह कांग्रेस ही थी जो आजादी के बाद प्रतिभाओं की कद्र करती रही। उसके शासनकाल में कुली से करोड़पति बनने वालों के अनेकों उदाहरण मौजूद हैं। हाजी मस्तान एक मामूली कुली थे। उनकी प्रतिभा की कद्र हुई और वे तस्करी के क्षेत्र में मील का पत्थर बन गए। बालीवुड की अस्सी फीसद फिल्मों के वे फायनांसर हुआ करते थे। कई राजनीतिक दल उनके अनुदान से चलते थे। दाऊद इब्राहिम भी एक मामूली सिपाही का बेटा था। उसकी प्रतिभा पहचानी गई और वह दुनिया का सबसे बड़ा डान बन गया। पूरी दुनिया की पुलिस से ढूंढ रही है लेकिन उसके साये तक भी नहीं पहुंच पा रही है। ऐसी अनेकों महान विभूतियां कांग्रेस शासन की गुणग्राह्यता को प्रमाणित करने के लिए मौजूद हैं। उसके काल में किसी नर्गिश को हजारों साल अपनी बेनूरी पर रोना नहीं पड़ता था। दीदावर के पैदा होने में कोई मुश्किल पेश नहीं आती थी। विरोधी कह सकते हैं कि कांग्रेस शासन काल में कितने ही वैज्ञानिक विदेश चले गए। जो देश में रहे वे कुंठित हो गए। प्रतिभा पलायन और उनके कुंठित होने की अनेकों कहानियां वे सुना सकते हैं। महान गणितज्ञ वशिष्ट नारायण सिंह का उदाहरण दे सकते है। लेकिन अपवाद कहां नहीं होते। कांग्रेस की दीदावरी को प्रमाणित करने के लिए कितने ही बाहुबली और अंडरवर्ल्ड की महान विभूतियां मौजूद हैं। उनकी गवाही ली जा सकती है।
पीएम नरेंद्र की ज़ुबान भी कई बार फिसली है और गलत उदाहरण के कारण मूल बात पीछे रह गई है। उदाहरण आगे चला आया है। वे स्वरोजगार की महत्ता बतलाना चाहते थे। युवा वर्ग को नौकरी के चक्कर में पड़ने की जगह स्वरोजगार की ओर प्रेरित करना चाहते थे। जिस इंजीनियरिंग कालेज में वे यह बात कह रहे थे सके गेट पर एक आदमी पकौड़ी बेचता दिखा था तो उन्होंने सका उदाहरण देते हुए कह दिया कि गेट के बाहर यदि की पकौड़ी बेचता है और दिनभर से हजार-पांच सौ कमा लेता है तो यह रोजगार हुआ कि नहीं। इस वक्तव्य के बाद उनकी बात तो साफ नहीं हुई लेकिन पकौड़ा चर्चा का विषय बन गया। कहा जाने लगा कि वे पढ़े लिखे लोगों को पकौड़ा बेचने की सलाह दे रहे हैं। कई दिनों तक सोशल मीडिया पर लोग चटखारे ले लेकर मोदी के पकौड़े का स्वाद लेते रहे। जब मोदी का विजय रथ रफ्तार में था तो वे कांग्रेस मुक्त भारत की बात कर रहे थे। अब जब रथ का पहिया निकल चुका है और मोदी-शाह मुक्त भाजपा की मांग हो रही है तो शाह कांग्रेस मुक्त भारत का भावार्थ समझा रहे हैं। बात साफ-साफ भी कही जा सकती है। उदाहरण के चक्कर में पड़ने की जरूरत क्या है। उदाहरण देने निहायत जरूरी ही हो जाए तो उसकी तलाश के लिए मूल विषय से भी ज्यादा शोध करना चाहिए। वर्ना बात का बतंगड़ बनते देर नहीं लगती। अब तो सोशल मीडिया है जो इसे बुलेट ट्रेन और जेट विमान की रफ्तार प्रदान कर देती है।

सोमवार, 11 जून 2018

शरीर फिट रहे तभी मजबूत बनेगा देशः राजेश कुमार









देवेंद्र गौतम

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में जन्मे राजेश कुमार फिटनेस फर्स्ट नामक जिम का संचालन करते हैं। उनका जिम अरगोड़ा कटहल मोड़ रोड में स्टेट बैंक शाखा के ऊपरी तल पर है। जिम उनके लिए मात्र व्यवसाय नहीं बल्कि समाज को स्वस्थ रखने के संकल्प को पूरा करने का सबसे सशक्त माध्यम है। वे न लाभ न हानि के आधार पर अपना जिम चलाते हैं। छात्रों को और गरीबों को रियायत देते हैं। फिटनेस के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए सामाजिक दायित्व के तहत कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं। वे चाहते हैं कि कारपोरेट कंपनियां अपने सामाजिक दायित्व के कार्यों की सूची में फिटनेस के प्रति जागरुकता को भी जोड़ें। जिम संचालकों को भी जागरुकता अभियान चलाना चाहिए। रांची के तकरीबन हर इलाके में जिम हैं। नागरिकों को चाहे वे जिस आयु वर्ग के हों, उनके महत्व और लाभ को समझना होगा। तभी वे दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे। रांची में जन्मे ट्रेनरों को भी इस दिशा में सक्रिय होना चाहिए। श्री कुमार के मुताबिक पहली बार जब बाजार में बुलवर्कर लांच हुआ था तो लोगों का ध्यान पहली बार फिटनेस की ओर गया था। इसके बाद तो एक-एक कर उपकरण आते चले गए। उनके जिम में कार्डियो, स्ट्रेंथ और वेट से संबंधित सारे उपकरण हैं। वे 2012-13 से फिटनेस के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब इसे अपना मिशन बना चुके हैं।
नवंबर 2017 में जिम की शुरुआत के बाद अभी तक 170 लोग उनके जिम की सदस्यता ले चुके हैं। राजेश चाहते हैं कि युवा वर्ग के लोग नशे की ओर बढ़ने की जगह अपने शरीर के फिटनेस पर ध्यान दें। मजबूत बनें। वे मजबूत बनेंगे तो देश मजबूत बनेगा। देश मजबूत बनेगा तभी अच्छे दिन आएंगे।
राजेश जी का कहना है कि आधुनिकता की आंधी में लोग शारीरिक श्रम के प्रति उदासीन होते जा रहे हैं। इसके कारण तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। यूरोप के लोग हमसे कहीं ज्यादा आधुनिक हैं। हमसे कहीं ज्यादा ज्यादा तेज रफ्तार जीवन जीते हैं। लेकिन वे अपने स्वास्थ्य और शरीर के फिटनेस के प्रति जागरुक हैं इसलिए अपेक्षाकृत स्वस्थ रहते हैं। हमारे देश में बीमारियों का प्रकोप अन्य देशों से ज्यादा है। हमें इससे छुटकारा पाना होगा और इसके लिए नियमित रूप से जिम में व्यायाम करना सबसे कारगर उपाय है। प्रतिदिन आधा घंटा भी अगर समय दिया जे तो बहुत सी समस्याओं का समाधान हो सकता है।

रमणिका फाउंडेशन की मासिक गोष्ठी में अनिल अनल के काव्य संग्रह का लोकार्पण




नई दिल्ली। रमणिका फाउण्डेशन व AITLF के तत्वाधान में प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार होने वाली साहित्यिक गोष्ठी में इस बार वरिष्ठ कवि अनिल गंगल के नये कविता संग्रह ‘कोई क्षमा नहीं’ का लोकार्पण हुआ। दलित लेखक संघ के अध्यक्ष हीरालाल राजस्थानी अपनी कहानी ‘व्यतिरेक’ का पाठ किया। युवा कवयित्री रानी कुमारी ने भी अपनी कविताओं का पाठ किया।
समकालीन हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण कवि अनिल गंगल का यह चौथा कविता संग्रह है। उन्होंने अपनी कविताओं का पाठ किया।
हीरालाल राजस्थानी ने कहानी ‘व्यतिरेक’ का पाठ किया। इस कहानी में अंतरजातीय विवाह तथा संवैधानिक तरीके से कोर्ट मैरिज पर कथानक बुना गया है।
युवा कवयित्री रानी कुमारी ने भारतीय समाज में स्त्रियों की पर कविताओं का पाठ किया। ‘बीस साल की बूढ़ी लड़की’, ‘गैसबर्नर-सी औरतें’ तथा ‘छोटा भाई’ कविताओं का पाठ किया।
अनिल गंगल की कविताओं पर परिचर्चा करते हुए कवि एवं आलोचक संजीव कौशल ने कहा कि छन्द को तोड़कर जो कविता कही गयी वह कितना कुछ ख़ास कह पाती हैं, यह महत्वपूर्ण है। गद्य कविता की परम्परा से जोड़ते हुए कहा कि अनिल गंगल की कविता युद्ध की तरह हमारे भीतर उतर जाती है।
आइडियोलॉजी कविताओं को निखारती हैं। ‘घर’ कविता में ‘गर्माहट’ के बिना घर नहीं बन सकता। गंगल जी पॉलिटिकली अवेयर कवि हैं, इतना कि विचार कविता को ग्रिप में ले लेता है। यह माँ-बेटे की सम्वेदना तथा पति-पत्नी का वैचारिक सम्बन्ध है।
धागा’ में बारीक़ बुनाई है। इसमें बारीक़ धागा सम्भ्रान्त वर्ग का प्रतीक तथा मोटा धागा मज़दूर धागा का प्रतीक है। ‘तुमने मुझे कॉमरेड कहा’ में स्पष्ट होता है कि इन शब्दों से आज भी कोई जुड़ा हुआ है। गंगल जी चाहते हैं कि कवि मज़दूरों के बीच जाए।
पिता का कोट’ में कोट के छेद तो दिख जाते हैं, परेशानियों के नहीं दिखते।
परिचर्चा में कवि एवं आलोचक जगदीश जैन्ड 'पंकज' जैंड ने कहा कि अनिल गंगल की कविता समय व समाज पर तीख़ी प्रतिक्रिया हैं। वैचारिकी में प्रतिबद्ध होकर भी समय के सवालों से टकराती है अनिल की कविता। ‘गुलामी’ इसका सबसे सशक्त उदाहरण है।
हीरालाल राजस्थानी की कहानी पर टिप्पणी करते हुए बजरंग बिहारी तिवारी ने कहा कि हीरालाल राजस्थानी अपनी कहानी में संभावना तलाशते हैं। वे आकांक्षा के रचनाकार हैं जो संघर्ष से गुजरकर इस मुक़ाम पर पहुँची पीढ़ी का मुख्य स्वर है। आंबेडकर के ‘जाति का ख़ात्मा’ की संभाव्यता की कहानी है ‘व्यतिरेक’.
रानी कुमारी की कविताओं पर बात करते हुए उन्होंने तीन पीढ़ियों की चर्चा की। विमर्शपरक, विचारपरक और जीवनपरक काव्य-दृष्टियों के परिदृश्य में रानी कुमारी जीवनपरक रचनाकार हैं। दलित स्त्रीवादी कविता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बजरंग बिहारी तिवारी ने रानी कुमारी की कविताओं को संक्षोभ से जोड़ा।
इस अवसर पर दिल्ली विवि के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. हरिमोहन शर्मा भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें अनिल गंगल की कविता पर चर्चा की गयी जिसमें वंचित-दलित लोगों की भी कोई मानवीय गरिमा होती है-- इसके जहाँ-तहाँ संकेत इनकी कविताओं में मिलते हैं। हीरालाल राजस्थानी की कहानी समाज के शिक्षित लोगों से दृष्टि-परिवर्तन का आह्वान है। वे अन्धविश्वास-रूढ़ियों को धता बताकर आगे बढ़ने की चर्चा की गयी है। युवा कवयित्री रानी कुमारी की कविता अपने आसपास की ज़िन्दगी से बुनी गयी हैं जिसमें विचार है, विरोध है, आगे बढ़ने की सम्भावना है। इन पर की गयी टिप्पणियाँ सार्थक विचार-विमर्श को जन्म देती हैं ।
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए रमणिका फाउंडेशन की अध्यक्ष रमणिका गुप्ता ने कहा कि यह कार्यक्रम महीने के हर दूसरे शनिवार को होता है -- हमारा उद्देश्य है एक ऐसा मंच बनाना जिस पर कवि-कहानीकार, नाटककार या विचारक-- नए-पुराने दोनों ही साहित्य के माध्यम से समय के साथ मुँह-दुह होते हुए-- साहित्य को एक दिशा देते हुए विभेदपूर्ण दृष्टिकोण बदलने और नया दृष्टिकोण बनाने की भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा साहित्य स्वान्तःसुखाय नहीं-- साहित्य एक लक्ष्य लेकर चलता है। इसे भी हम प्रस्थापित करना चाहते हैं। आज का समय बहुत ख़तरनाक है-- इसलिए ऐसी गोष्ठियां एक भूमिका अदा कर सकती हैं-- प्रेरणाजनक सृजन के माध्यम से। वंचित समाज, वर्जित समाज व नये सृजकों को हम विशेष ध्यान देते हैं, उनके साथ प्रतिष्ठित लेखकों को भी बुलाते हैं ताकि वे दिशा दे सकें--और नये लेखक मंच पा सके।
मंच सञ्चालन टेकचन्द ने किया।




स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...