रांची। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि विस्थापन के सवाल पर केंद्र व झारखंड सरकार संवेदनहीन है। सरकारी परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए लोगों को उनका वाजिब हक नहीं दिया जा रहा है। श्री सहाय रविवार को राजधानी के पुरुलिया रोड स्थित एसडीसी सभागार में आयोजित विस्थापन पर संवाद कार्यक्रम में बतौर वक्ता बोल रहे थे। इसका आयोजन अखिल भारतीय किसान सभा की राष्ट्रीय परिषद द्वारा किया गया था। श्री सहाय ने अपने वक्तव्य में कहा कि विस्थापित अपने हक के लिए वर्षों से लड़ रहे हैं। विस्थापितों की जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा और संविधान सम्मत अधिकारों के तहत देय सुविधाएं नहीं मिली। वर्तमान केंद्र व राज्य सरकार इस दिशा में पूरी तरह संवेदनहीन है। विस्थापितों के हक के प्रति उदासीन है। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में विस्थापन जैसे महत्वपूर्ण विषय को कामन मिनिमम प्रोग्राम के तहत चुनावी घोषणा पत्र में लाएंगे। उन्होंने राज्य व केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार विस्थापन का मुद्दा सुलझाने का प्रयास नहीं कर रही है। कहा कि यदि विकास के लिए विस्थापन जरूरी है तो सरकार क्यों नहीं विस्थापितों के हित के लिए वर्ष 2013 में बनाए गए कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाती है। उन्होंने कहा कि विस्थापितों की समस्या का समाधान जल्द हो, इसके लिए सभी दलों को एकजुट होकर प्रयास करने की जरूरत है। इस अवसर पर अतुल कुमार अंजान सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने उद्गार व्यक्त किये। संवाद कार्यक्रम में काफी संख्या में विस्थापन आंदोलन से जुड़े लोग और विस्थापित मौजूद थे।
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रविवार, 24 जून 2018
विस्थापन के मुद्दे पर सरकार संवेदनहीन : सुबोधकांत सहाय
रांची। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि विस्थापन के सवाल पर केंद्र व झारखंड सरकार संवेदनहीन है। सरकारी परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए लोगों को उनका वाजिब हक नहीं दिया जा रहा है। श्री सहाय रविवार को राजधानी के पुरुलिया रोड स्थित एसडीसी सभागार में आयोजित विस्थापन पर संवाद कार्यक्रम में बतौर वक्ता बोल रहे थे। इसका आयोजन अखिल भारतीय किसान सभा की राष्ट्रीय परिषद द्वारा किया गया था। श्री सहाय ने अपने वक्तव्य में कहा कि विस्थापित अपने हक के लिए वर्षों से लड़ रहे हैं। विस्थापितों की जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा और संविधान सम्मत अधिकारों के तहत देय सुविधाएं नहीं मिली। वर्तमान केंद्र व राज्य सरकार इस दिशा में पूरी तरह संवेदनहीन है। विस्थापितों के हक के प्रति उदासीन है। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में विस्थापन जैसे महत्वपूर्ण विषय को कामन मिनिमम प्रोग्राम के तहत चुनावी घोषणा पत्र में लाएंगे। उन्होंने राज्य व केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार विस्थापन का मुद्दा सुलझाने का प्रयास नहीं कर रही है। कहा कि यदि विकास के लिए विस्थापन जरूरी है तो सरकार क्यों नहीं विस्थापितों के हित के लिए वर्ष 2013 में बनाए गए कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाती है। उन्होंने कहा कि विस्थापितों की समस्या का समाधान जल्द हो, इसके लिए सभी दलों को एकजुट होकर प्रयास करने की जरूरत है। इस अवसर पर अतुल कुमार अंजान सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने उद्गार व्यक्त किये। संवाद कार्यक्रम में काफी संख्या में विस्थापन आंदोलन से जुड़े लोग और विस्थापित मौजूद थे।
रांची में बाइकर्स गैंग हुआ बेलगाम
सिटीजन एक्शन ग्रुप की संयोजक किरण सिंह से चेन छीनने की कोशिश।
रांची। शहर में बाइकर्स गैंग का आतंक थम नहीं रहा है। प्रायः हर दिन राजधानी के किसी न किसी इलाके में अपराधी महिलाओं से आभूषण छीन कर रफूचक्कर हो जा रहे हैं। रविवार को शाम 6.45 बजे शहर के व्यस्ततम इलाके निवारणपुर में सामाजिक संस्था सिटीजन एक्शन ग्रुप की संयोजक और राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद के सदस्य राकेश कुमार सिंह की पत्नी किरण सिंह से बाइकर्स गैंग के अपराधियों ने झपट्टा मारकर चेन छीनने का प्रयास किया, लेकिन श्रीमती सिंह ने साहस कर अपराधियों की मंशा को नाकाम कर दिया। घटना के बारे में उन्होंने बताया कि शाम लगभग पौने सात बजे मुहल्ले मे टहल रही थीं। उसी समय अचानक काले रंग की एक बाइक पर सवार दो युवकों ने बगल मे बाइक सटाकर गति धीमी कर दी। उनमें से बाइक पर पीछे बैठे युवक ने उनके गले से चेन छीनने की कोशिश की। उन्होंने अपराधियों की मंशा समझ तुरंत कसकर चेन को अपने हाथों से पकड़े रखा। इस क्रम में उनके गले पर हल्का खरोंच भी पड़ गया। इसी बीच अपराधी बाइक की स्पीड तेज कर भाग गए। इस घटना से किरण सिंह सहित मुहल्लेवासी दहशत में हैं।
उनके पति राकेश सिंह ने इस घटना की जानकारी संबंधित थाने में देते हुए यथोचित कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही इलाके में नियमित रूप से पुलिस पेट्रोलिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।
जवाबी कार्रवाई को तैयार रघुवर सरकार
झारखंड की रघुवर दास
सरकार ने भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर विपक्षी दलों की चुनौतियों का जवाब
देने की पूरी तैयारी कर ली है। साथ ही अपनी पार्टी लाइन को भी कुशलता से आगे
बढ़ाने को प्रयासरत हैं। सरकार आदिवासी राजनीति को एक नई दिशा प्रदान करने जा रही
है जो सारे पुराने समीकरण को गड्ड-मड्ड कर सकता है। ज्ञातव्य है कि विपक्ष के नेता
हेमंत सोरेन ने विपक्षी गठबंधन के बैनर तले 5 जुलाई को भारत बंद का आह्वान किया
है। राज्य सरकार एक तरफ इस विधेयक के प्रावधानों को जनता के बीच ले जा रही है और
यह उनके लिए कैसे हितकर है, बता रही है, दूसरी तरफ सोरेन परिवार और झारखंड नामधारी
अन्य दलों के नेताओं की बखिया उधेड़ने में लगे हैं। उनके आरोपों के जवाब में जो
बातें कही जा रही हैं वह उनके आरोपों के मुकाबले हल्की पड़ रही हैं। इधर सरकार 30
जून से को हूल दिवस से 15 जुलाई तक आदिवासी जन उत्थान अभियान का आयोजन करने जा रही
है। यह कार्यक्रम हर उस गांव में होगा जिसकी आबादी 1000 से ज्यादा है और जहां 50
फीसद आदिवासी निवास करते हों। इसका उद्देश्य आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा
से जोड़ना है। इस अभियान के जरिए आदिवासी समाज के साथ संवाद कायम होगा। विपक्षी
दलों पर आरोपों के तीर चलाए जाएंगे।
इसी बीच रघुवर सरकार
ने एक और अहम फैसला किया है। सरकार ने तय कर लिया है कि धर्म परिवर्तन कर चुके
आदिवासियों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाएगा। उनका जाति प्रमाण पत्र भी निरस्त कर
दिया जाएगा। अभी तक केवल खतियान के आधार पर प्रमाण पत्र जारी होते थे। अब सरकार के
कार्मिक विभाग ने एक नया सर्कुलर जारी कर उनके रीति-रिवाज़, विवाह और उत्तराधिकार
प्रथा की जांच के बाद ही जाति प्रमाण पत्र दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे
धर्मांतरण पर रोक लगेगी और आदिवासियों को उनका पूरा हक मिल सकेगा। 2011 की जनगणना
के मुताबिक झारखंड में कुल आदिवासी आबादी 26 प्रतिशत है। उसमें ईसाई आदिवासियों की
जनसंख्या 14.4 प्रतिशत है जबकि सरना धर्म को मानने वाले आदिवासियों की 44.2 और
हिन्दू आदिवासियों की 39.7 प्रतिशत है। झारखंड सरकार ने यह निर्णय महाधिवक्ता की
सलाह के आधार पर लिया है। इसका राजनीतिक प्रभाव पड़ेगा। इससे आदिवासियों का ईसाई
गुट नाराज होगा लेकिन हिंदू और सरना आदिवासी खुश हो जाएंगे। ईसाइयों की नाराजगी से
भाजपा को खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वे पहले से ही उसके वोटर नहीं हैं। फिर उनका
संख्याबल इतना नहीं कि चुनाव को प्रभावित कर सकें। विश्व हिन्दू परिषद लंबे समय से
धर्मांतरण पर रोक के लिए प्रयासरत है। अतः इस कार्रवाई से संघ भी प्रसन्न होगा और
भाजपा के केंद्रीय नेता भी खुश होंगे। सरना और हिन्दू आदिवासियों का भाजपा की ओर
झुकाव बढ़ेगा। इसका भरपूर लाभ मिलेगा। ठीक उसी तरह जैसे वर्ष 2000 में झारखंड
राज्य की स्थापना में अहम भूमिका का लाभ मिला था। तब झारखंड में कांग्रेस और
झामुमो का जनाधार सिकुड़ गया था और अधिकांश समय तक सत्ता की बागडोर भाजपा के हाथ
में रही थी। झारखंड मुक्ति मोर्चा अलग राज्य के आंदोलन में अहम भूमिका निभाने के
बावजूद अलग झारखंड में कभी जनता का इतना विश्वास नहीं जीत पाया कि अपने दम पर
सरकार बना सके। आंदोलन में अपने योगदान को लेकर वह स्वयं अपनी पीठ थपथपाता रहा जब
कि विरोधी उसपर झारखंड आंदोलन को बार-बार बोचने का आरोप लगाते रहे। झामुमो को सत्ता मिली भी तो
अन्य दलों के सहयोग से। जारखंड राज्य की
स्थापना के बाद रघुवर दास पहले गैर आदिवासी मुख्यमंत्री बने थे। उनके शपथ ग्रहम के
बाद से ही आदिवासी नेताओं ने उनपर निशाना साधना शुरू कर दिया था। लेकिन उन्होंने
यह साबित करने की कोशिश की कि आदिवासी नेता आदिवासियों को ठगते रहे हैं जबकि वे
वास्तव में आदिवासियों के हित में काम कर रहे हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री जिस तरह
राजनीति की सधी हुई गोटियां चल रहे हैं उसका जवाब दे पाना विपक्षी दलों के लिए
आसान नहीं प्रतीत होता। झारखंड दिशोम पार्टी एक बार बंद का आह्वान कर अपनी फजीहत
करा चुकी है। अब 5 जुलाई को विपक्ष की परीक्षा है। फिलहाल वे यही रट लगाए हुए हैं
कि पूंजीपतियों को ज़मीन देने के लिए संशोधन विधेयक लाया गया है। लेकिन कैसे यह
नहीं बता रहे हैं। इसके प्रावधानों की व्याख्या के जरिए अपने दावे की पुष्टि नहीं
कर रहे हैं। अब सड़कों पर जोर-जबर्दस्ती किए बिना यदि विपक्षी गठबंधन के नेता 5
जुलाई के झारखंड बंद को सफल बना सके तभी जनता पर उनके प्रभाव का सही आकलन हो सकेगा
अन्यथा अराजक कार्रवाइयों का सहारा लेना उनकी पराजय और जन समर्थन के अभाव का ही सूचक
होगा।
शनिवार, 23 जून 2018
खूंटी गैंगरेप की साजिश का पर्दाफाश
रांची। पांच आदिवासी युवतियों के साथ गैंगरेप की घटना में कोचांग मिशन स्कूल के प्रिंसपल समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उनसे यह स्पष्ट हो रहा है कि पत्थलगड़ी आंदोलन में उग्रवादी संगठन पीएलएफआई और ईसाई मिशनरी का हाथ है। उनकी साझा साजिश के तहत नुक्कड़ नाटक की टीम को कोचांग बुलाया गया। लड़कियों को अगवा करने से पहले हथियारबंद अपराधियों ने प्रिंसिपल से बात की। प्रिंसपल के आग्रह पर दो नन को छोड़ दिया। घटना के बाद प्रिंसपल ने भी पीड़ित युवतियों को मुंह बंद रखने की सलाह दी क्योंकि मुंह कोलने पर उनके मां-बाप की हत्या हो जाएगी। जाहिर है कि पत्थलगड़ी आंदोलन का मकसद आदिवासी संस्कृति का संरक्षण या स्वशासन की मजबूती नहीं बल्कि इस आड़ में किए जाने वाले कुकर्मों की पर्दापोशी है। आम आदिवासी कभी भी युवतियों को सबक सिखाने के लिए उनका बलात्कार करने की नहीं सोच सकता। आदिवासी भोलेभाले होते हैं तभी तो आजतक ठगे जाते रहे हैं। वे आपराधिक षडयंत्र न रच सकते हैं न अंजाम दे सकते हैं। यह उनके स्वभाव में शामिल नहीं है। माओवादी अथवा मार्क्सवादी-लेनिनवादी भी इस तरह का घिनौना कुकृत्य नहीं कर सकते। वे मर सकते हैं, मार सकते हैं लेकिन महिलाओं की इज्जत के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। यह काम कोई सिद्धांत विहीन अपराधी संगठन ही कर सकता है। ड्रग तस्करी से जुड़े लोग इस तरह का कुकृत्य कर सकते हैं। माओ ने कहा था कि जब हथियारबंद दस्ते राजनीतिक नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं तो अपराधी गिरोहों में तब्दील हो जाते हैं। झारखंड में ऐसा ही कुछ हो रहा है। इस तरह की प्रवृत्तियों को नियंत्रित करने की जितनी जिम्मेदारी सरकारी तंत्र की है उससे कहीं ज्यादा मार्क्सवाद-लेनिनवाद-माओवाद के सिद्धांतों के प्रति समर्पित कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों की। इस तरह के तत्व उनके आंदोलन को बदनाम कर रहे हैं। सवाल है कि व्यवस्था परिवर्तन की जिस लड़ाई के लिए उन्होंने हथियार उठाया है यदि वह सफल हो गया तो क्या इसी तरह की व्यवस्था लाएंगे जिसमें न बच्चे सुरक्षित होंगे न महिलाएं। आम लोगों का जीना दूभर हो जाएगा। यदि .ही व्यवस्था लानी है तो भारत को ऐसी व्यवस्था की जरूरत नहीं है। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर इस तरह की अराजकता कभी भी स्वीकार्य नहीं हो सकती।
खांटू श्याम मंदिर में लगा श्रद्धालुओं का तांता
राँची-:हरमू रोड श्री श्याम मंदिर में ज्येष्ठ माह निर्जला एकादशी के
शुभ अवसर पर 23 जून,शनिवार को एकादशी संर्कीतन का आयोजन बडे ही धूम धाम से किया गया।श्रद्धालुगण प्रातः काल से ही बाबा श्री श्याम जी का दर्शन करने आते रहे।उदया तिथि वश एवं श्री खाटु धाम की परम्परा का अनूसरण करते हुए हरमू रोड श्री श्याम मंदिर में निर्जला एकादशी संर्कीतन का आयोजन शनिवार 23 जून को रात्रि 10 बजे से प्रातः 04 बजे तक किया गया।अपराह्ण की नियमित भोग आरती के बाद बाबा श्री श्याम जी,श्री बाला जी एवं श्री शिव परिवार का विशेष श्रृंगार किया गया।सर्वप्रथम श्याम प्रभु को इस अवसर के लिए विशेष रूप से निर्मित कराए गए वस्त्र(बागा)पहनाया गया।मण्डल के श्री गोपाल मुरारका एवं अशोक लडिया ने मनमोहक एवं खुबसूरत फूलों से जो कि इस अवसर के लिए विशेष रूप से बैंगलोर से मँगाया गया था से श्रृंगार किया।जो कि कोलकाता एवं राँची के मालाकारों की टीम ने एक-एक फूलों को गूथ कर आकर्षक गजरा तैयार किया था।बाबा को प्रिय रूह गुलाब इत्र से मसाज किया गया।शयन आरती उपरान्त बाबा के ज्योत की तैयारी श्री अनिल नारनोली,रोहित अग्रवाल प्रवीण सिंघानिया विष्णु चोधरी ने कर रात्रि 10:00 बजे बाबा का अखण्ड ज्योत प्रज्वलित कराया। मंडल के सदस्य श्री जय प्रकाश सिंघानिया ने सपरिवार बाबा का ज्योत प्रजज्वलित किया एवं बाबा को दिलखुसार, चन्द्रकला, पेडा,आम,मेवा,रबडी,दूध,
चना,गुड,पान आदि का भोग लगाया।मण्डल के अध्यक्ष श्री हरि पेडीवाल, कृष्ण कुमार अग्रवाल,श्रवण ढांढनियां,राजेश चौधरी, गौरव अग्रवाल आदि अन्य ने श्री गणेश वन्दना,गुरू वन्दना,हनुमान वन्दना,शिव वन्दना एवं श्री राणी सती दादी का भजन गाकर दरबार में हाजरी लगाई।श्याम प्रेमियों में निर्जला एकादशी तिथि का विशेष महत्व है इस कारण श्रद्धालुगण भी विशेष रूप से सारी रात मंदिर परिसर में उपस्थित रहे।प्रातः 04 बजे बाबा की आरती सभी सदस्यों-श्रद्धालुओं ने मिल कर की एवं अपने अपने लिए मंगल कामना की।सभी भक्तों को प्रसाद वितरण मण्डल के महामंत्री आनंद शर्मा,राजेश ढांढनियां पंकज गाडोदिया,साकेत ढांढनियां,अंकित मोदी,शैकी केडिया,निकुंज पोद्दार, अमित शर्मा,अशोक शर्मा,निखिल,ॠतिक सहित अन्यों ने किया।
सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ
राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी ने सांसद आदर्श गांव बड़ाम में बंटवाईं 25 सिलाई मशीनें
रांची।: राज्यसभा सांंसद परिमल नथवाणी द्वारा गोद लिये गये सांसद आदर्श गांव बड़ाम में एक सिलाई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया। श्री परिमल नथवाणी ने अपने झारखण्ड दौरे के दौरान खादी बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ से मिलकर ग्रामजनों को रोजगारोन्मुखी ट्रेनिंग हेतु निवेदन किया था श्री सेठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए सांसद परिमल नथवाणी द्वारा चयनित पहले आदर्श ग्राम पंचायत बड़ाम स्थित सभा घर में आज एक सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारम्भ किया। खादी बोर्ड द्वारा 25 सिलाई के मशीन भी दिए गए। श्री संजय सेठ ने सभा घर की प्रशंसा करते हुए बताया कि नथवाणीजी का सीधे—सीधे आम जनता से और झारखण्ड के गांवों से जुड़े हैं यह खुशी की बात है कि वे पंचायत के संर्पूण विकास के लिए प्रयासरत हैं। इनके आदर्श गांव में आकर वाकई लगता है कि विकास के कार्य हुए हैं। उन्होने बताया कि सिलाई प्रशिक्षण हेतु योग्य महिलाओं का चयन का कार्य एक—दो दिनों के अन्दर पूरा कर लिया जाएगा तथा जुलाई की पहली तारीख से प्रशिक्षण प्रारम्भ कर दिया जाएगा। यह छ: महीने का कोर्स होगा। प्रशिक्षण पाने वाली महिलाओं को प्रतिदिन 150 रू. की राशि दी जाएगी जो सीधे उनके बैंक खाते में जाया करेगी अर्थात् महीने के 4500 रू तथा प्रशिक्षणोपरान्त महिलाओं को कपड़ा फैक्ट्री में भी भेजा जाएगा। साथ ही जो महिलाएं सिलाई के लिए योग्य नहीं पाई जाएंगी उन्हें अन्य प्रकार की ट्रेनिंग जैसे लाह की चुड़ियां बनाना, सूत कातना, पत्तल बनाने का कार्य, मधुमक्खी पालन आदि की ट्रेनिंग दी जाएगी।
रांची।: राज्यसभा सांंसद परिमल नथवाणी द्वारा गोद लिये गये सांसद आदर्श गांव बड़ाम में एक सिलाई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया। श्री परिमल नथवाणी ने अपने झारखण्ड दौरे के दौरान खादी बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ से मिलकर ग्रामजनों को रोजगारोन्मुखी ट्रेनिंग हेतु निवेदन किया था श्री सेठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए सांसद परिमल नथवाणी द्वारा चयनित पहले आदर्श ग्राम पंचायत बड़ाम स्थित सभा घर में आज एक सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारम्भ किया। खादी बोर्ड द्वारा 25 सिलाई के मशीन भी दिए गए। श्री संजय सेठ ने सभा घर की प्रशंसा करते हुए बताया कि नथवाणीजी का सीधे—सीधे आम जनता से और झारखण्ड के गांवों से जुड़े हैं यह खुशी की बात है कि वे पंचायत के संर्पूण विकास के लिए प्रयासरत हैं। इनके आदर्श गांव में आकर वाकई लगता है कि विकास के कार्य हुए हैं। उन्होने बताया कि सिलाई प्रशिक्षण हेतु योग्य महिलाओं का चयन का कार्य एक—दो दिनों के अन्दर पूरा कर लिया जाएगा तथा जुलाई की पहली तारीख से प्रशिक्षण प्रारम्भ कर दिया जाएगा। यह छ: महीने का कोर्स होगा। प्रशिक्षण पाने वाली महिलाओं को प्रतिदिन 150 रू. की राशि दी जाएगी जो सीधे उनके बैंक खाते में जाया करेगी अर्थात् महीने के 4500 रू तथा प्रशिक्षणोपरान्त महिलाओं को कपड़ा फैक्ट्री में भी भेजा जाएगा। साथ ही जो महिलाएं सिलाई के लिए योग्य नहीं पाई जाएंगी उन्हें अन्य प्रकार की ट्रेनिंग जैसे लाह की चुड़ियां बनाना, सूत कातना, पत्तल बनाने का कार्य, मधुमक्खी पालन आदि की ट्रेनिंग दी जाएगी।
लुगु पहाड़ के जंगलों में......
पहाड़ की तलहटी में पहुंचाने के बाद हमारा मार्गदर्शक ललपनिया की और निकल गया.
हम चढ़ाई की और जानेवाली पगडंडी पर चल
पड़े. थोड़ी दूर चलने के बाद पगडंडी से दो रास्ते फूट पड़े. बस यहीं मैं अटक गया. किस
पगडंडी से जाना है याद नहीं आ रहा था. इस जंगल में भटकने का अंजाम बहुत बुरा हो
सकता था. अभी हम सोच ही रहे थे कि पता नहीं किधर से एक काले रंग का देसी कुत्ता
आया और एक पगडंडी पर चलने लगा. मैंने अंसारी साहब और पत्रकार मित्रों से उसके पीछे-पीछे चलने का इशारा किया. ऐसी कहावत है कि इस पहाड़ पर
कोई रास्ता भटकता है तो कोई न कोई जानवर आकर रास्ता दिखा देता है. कभी बन्दर कभी
दूसरा जानवर. अपनी आंखों से यह करिश्मा पहली बार देख रहा था. उस
पहाड़ की आकृति ऐसी है कि शुरूआती डेढ़ हज़ार फुट की चढ़ाई
बहुत ही तीक्ष्ण है. करीब 75 डिग्री के कोण पर
चट्टानों के सहारे चढ़ना होता है. नीचे गहराई की और निगाह जाने पर कलेजा धड़क उठता
है. हमारा मार्गदर्शक कुत्ता सामान्य तौर पर हमारे पीछे-पीछे चल रहा था लेकिन हम जहां अटकते थे वह आगे आकर रास्ता बता देता था. रास्ते में एक जगह झरने की कल-कल ध्वनि सुनाई
पड़ी लेकिन कहीं झरना नज़र नहीं आया. इस रमणिक स्थल को गुप्तगंगा कहते हैं. दरअसल यहां
पहाड़ की ऊंचाई से उतरता नाले का पानी चट्टानों के अन्दर से होकर गुजरता है. तीखी
चढ़ाई का हिस्सा पार करने के बाद हमें चाय की तलब हुई. थोड़ी सूखी लकड़ी चुनी गयी.
कुछ बड़े पत्थर चुनकर चूल्हा बनाया गया और नाले के
पानी में चाय चीनी चढ़ा दी गयी. दूध की जरूरत भी नहीं थी और वह उपलब्ध भी नहीं था.
इसके बाद करीब 1000 फुट की चढ़ाई अपेक्षाकृत आरामदेह है लेकिन अंतिम 1000 फुट की
चढ़ाई सबसे कठिन है. इस हिस्से में गेरू की फिसलन भरी
चट्टानों पर तीखी चढ़ाई चढ़नी होती हैं. अपना संतुलन बनाये रखना मुश्किल हो जाता है. गुफा से थोड़ी दूर पहले ललपनिया की और आती पगडंडी इस पगडंडी से मिलती है.
ललपनिया में ही तेनुघाट विद्युत् निगम का सुपर थर्मल प्लांट है.
उस दिन हम पगडंडियों के जंक्शन पर पहुंचने वाले थे
कि ऊपर चढ़ाई पर 10-15 हथियारबंद युवकों
का एक झुण्ड दिखाई पड़ा. उनमें 6-7
लोगों के पास देसी रायफलें
थीं. शेष लोगों के पास तीर-धनुष,
कुल्हाड़े आदि परंपरागत
हथियार. उनकी नज़र हमीं लोगों पर टिकी थी. मैं समझ गया कि
माओवादियों का दस्ता है. मैंने साथियों से कहा कि आपलोग
चेहरे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आने दीजिये और सामान्य रूप से चलते रहिये. हमारे
आगमन की सूचना उनतक पहुंची थी या नहीं कुछ पता नहीं था. बहरहाल हम ऊपर की और बढ़ते गए तो रायफल वाले दो टुकड़ों में
बांटकर अलग-अलग ढलान से तिरछे
उतर गए. वे हमें पीछे से घेर सकते थे. दो-तीन
तीर-धनुष वाले हमारी और आये इससे पहले कि वे कुछ पूछते मैंने पूछा-'लुगु बाबा की गुफा अभी कितनी दूर है?' उसने जवाब दिया-'बहुत दूर है.' ' अच्छा! ललपनिया की पगडंडी से यह जहां मिलती है वह
जगह कितनी दूर है.' उसके चेहरे पर नाराजगी के भाव उभरे. पूछा-जब जानता है तो पूछता क्यों है?' 'बहुत दिनों पर आये हैं इसलिए थोडा गड़बड़ा
रहा था.' उनहोंने कोई जवाब नहीं दिया और नीचे की और चल दिए.
हमारी सांस में सांस आई. इन घटनाओं से हमारे मार्गदर्शक कुत्ते को कोई मतलब नहीं
था. वह हमारे साथ बना हुआ था.
थोड़ी देर बाद हम गुफा में पहुंचे तो वहां चबूतरे पर आदिवासी भगत और भगतिन मिले वे हमें देखते ही खुश
हो गए. वे कई दिनों से आये हुए थे. उनका इरादा पूर्णिमा तक ठहरने का था लेकिन उनका
राशन ख़तम हो गया था. दो दिनों से भूखे थे. हमने उन्हें मिक्सचर खाने को दिया.
हवनकुंड में चाय चढ़ाई. उन्हें आश्वश्त किया कि हम काफी राशन लाये हैं. चिंता की बात नहीं.हमने बताया कि यह कुत्ता नहीं होता तो हम भटक जाते. आदिवासी दम्पति ने आश्चर्य से कहा कि यह तो यहीं गुफा में
रहता है. नीचे कैसे चला गया. सब लुगु बाबा की कृपा है. रात को हवनकुंड के अलाव में लिट्टी बनायीं. भगत ने उसमें प्याज लहसुन
डालने से मना किया.
बोला कि दिन में प्याज-लहसुन डालकर खिचड़ी बनानी होगी तो गुफा के बाहर बना लेना.
हमलोग अन्दर सादा भोजन बना लेंगे. लिट्टी काफी स्वादिष्ट लगी. हमने कुत्ते को भी दिया
उसने प्रेम से खाया.
अगले दिन हमलोग गुफा के बगल में बने मंदिर के बरामदे पर बैठ कर ब्रश कर रहे थे कि तभी
माओवादियों का दस्ता आया. हमसे कुछ बोले बगैर वे करीब से गुजरे आगे जाकर दो-तीन
फायर किये और जंगल में घुसते चले गए. मैंने अंसारी साहब से कहा कि प्राचीन सभ्यता
के अवशेष गुफा के 100 गज के दायरे में ही खोजिएगा नहीं तो ये लोग हमें
भी प्राचीन बना देंगे. पता नहीं उनको हमारे आने की खबर है कि नहीं. हमसे उन्होंने
कोई बात तो की नहीं. इसके बाद खिचड़ी बनाने का मोर्चा ओमप्रकाश और मुन्ना ने संभल
लिया. मैं अंसारी साहब के साथ थोड़ी दूर पर एक चट्टान पर बैठ गया. मानव सभ्यता के इस स्थान से संबंधों की संभावनाओं पर
चर्चा होने लगी. इस बीच हम जिधर-जिधर भी गए वह कुत्ता साये की तरह हमारे साथ रहा.
खिचड़ी पक जाने पर हम उसे लेकर नाले के पार चट्टानों के बीच चले गए. सखुआ के
पत्तों पर उसे परोसा गया. एक पत्ते पर थोड़ी खिचड़ी कुत्ते के पास भी रख दी गयी.
लेकिन आश्चर्य! उसने खिचड़ी को सूंघा और दूर
जाकर बैठ गया. मुंह तक नहीं लगाया. हड्डी और मांस खाने वाले जानवर को प्याज लहसुन से परहेज़ ? बात कुछ समझ में नहीं आई.
शाम के वक़्त रामगढ कैम्प के दो फौजी जवान पहुंचे. हमारी उनसे मित्रता हो गयी. हम उनके
साथ घुमने-फिरने लगे. उनके आने के बाद वह कुत्ता पता नहीं कहां चला गया.
जाने कैसे वह समझ गया कि फौजियों के पहुचने के बाद
हमारे भटकने का खतरा नहं है. अगले दिन मौसम बहुत ख़राब हो गया था. कुहासे की शक्ल
में बादल मंडरा रहे थे. छिटपुट बारिश भी हो रही थी. शिकार खेलने, महुआ चुनने, लकड़ी काटने वाले भी जंगल में नहीं आये थे. फौजी
जवानों ने कहा कि मौसम ख़राब है आपलोग भी हमारे साथ उतर चलिए. हमें उनका सुझाव सही
लगा. हमने साथ लाया राशन भगत-भगतिन के हवाले किया और अपना सामान समेटकर उनके साथ चल दिए. वापसी के दौरान भी वह कुत्ता कहीं दिखाई
नहीं पड़ा. हम समझ नहीं सके कि उसे कैसे पता चला कि अब वापसी में हमें कोई दिक्कत
नहीं होगी.
आज की तारीख में उस पहाड़ पर चढ़ना मुश्किल है। नतो उम्र इसकी
इजाजत देगी न शरीर. प्रसन्नता की बात यह है कि झारखंड सरकार ने उसे पर्यटन केंद्र
के रूप में विकसित करने का फैसला किया है. वह आदिवासी आस्था का केंद्र तो है ही.
प्राकृतिक पर्यटन का केंद्र भी बन सकता है। उसके हिल स्टेशन के रूप में विकसिन
होने की पूरी संभावना है. लेकिन यह तभी संभव है जब माओवादी उस इलाके को खाली कर
दें या उसका विकास होने दें.
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स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी
झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी काशीनाथ केवट 15 नवम्बर 2000 -वी...
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गरीबों के मसीहा संत शिरोमणि श्री श्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज के द्वारा संचालित रांची की सुप्रसिद्ध समाज...
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मनोहरपुर। पुलिस और पब्लिक के बीच बेहतर समन्वय कायम करना समय की मांग है। लेकिन कम ही अधिकारी यह समायोजन कर पाते हैं। लेकिन सजग और कर्तव्य...
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय किसान महासंघ की कोर कमेटी की मीटिंग आज पलवल में हुई। इस बैठक में 1 से 10 जून के गाँव बन्द आंदोलन की समीक्षा की गई ...
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रांची। उपायुक्त,रांची श्री राय महिमापत रे की अध्यक्षता में समाहरणालय,ब्लाॅक-ए के कमरा संख्या-207 में समेकित जनजाति विकास ...
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डायरी के पन्ने दिनांक : 12.10.1998 .................................................. वह लावारिश लाश पड़ी थी उधर मुह खोले, टांग पसारे,...







