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रविवार, 24 जून 2018

मजीठिया को लेकर निर्णायक लड़ाई का आह्वान

सभी दोस्तों को नमस्कार
जय हिंद
 लोक सभा चुनाव 2019 को लेकर केंद्र और राज्यों सरकारोँ पर दवाव बनाने से पहले मजीठिया को लेकर लड़ रहे सभी पत्रकार पहले तो एकजुटता दिखाकर सिर्फ एकबार और आखिरी बार प्रधानमंत्री से मिलकर अपनी बात रखेँ फिर साथ ही कांग्रेस के राहुल गांधी से भी बात करें दोनों का क्या रिस्पॉन्स मिलता है उस को आधार बनाकर सोसल मीडिया पर पूरे भारत से दोनों पार्टियों के खिलाफ एक मुहिम चलाकर सब कुछ जनता के सामने लाया जाए ।हिमाचल से तो रविंद्र अगरवाल जी अकेले लड़ ही रहे हैं उनके साथ में भी थोड़ा सहयोग कर रहा हूं जो हम लोग निकाले गए हैं अब हमको अपनी अलग से यूनियन बनाकर लोकसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस पर तीखे हमले करने ही होंगे अगर इस बार मजीठिया लागू नहीं हुआ तो फिर कभी लागू नहीं हो सकेगा अतः 19 हजार प्रेस घराने 19 लाख पत्रकारों की अबाज नहीं दबा सकते इसी के साथ माननीय सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश माननीय रंजन गोगोई जी को भी अब खुले पत्र लिखने होंगे कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को अगर न्याय नहीं मिल रहा है तो देश के गरीब और आम आदमी को न्याय क्यों नहीं मिल पाता है हम सब न्यायालयों में देख रहे हैं लेबर एक्ट बहुत मजबूत है पर गत 65 बर्षों में इसे उचित तरीक़े से किसी भी सरकार ने लागू नहीं किया इसी कारण देश में बेरोजगारी फैली है अन्यथा सरकारी क्षेत्र से प्राइवेट क्षेत्र में ज्यादा स्कोप औऱ सुबिधायें हैँ अखबार मालिक हम कर्मचारियों की खून पसीने की कमाई की मेहनत से आज हजार से करोड़पति और अरबपति बन गए और हम पत्रकार बंधुवा मजदूर बनकर रैह गए हैं इस लिये न्यायालयों में मजीठिया के साथ साथ मनिसाना वेज बोर्ड की बात भी माननीय न्यायाधीशों के सामने रखी जये कि आज तक मनिसाना वेज बोर्ड के अनुसार भी वेतन नहीं दिया गया है।   सुझाब अच्छा लगा हो तो आगे भी लिखूँगा अन्यथा रविन्द्र जी व शशिकांत जी तो लगे ही हैं                                                                 
                                                                                   -देशराज मोहन, धर्मशाला कांगड़ा हिमाचल प्रदेश।

गायत्री शक्तिपीठ का व्यसन मुक्ति अभियान



रांची। अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुंज के तत्वावधान में गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर 2 शाखा से सामूहिक संकल्प लेकर नशा उन्मूलन रैली का शुभारंभ आज हुआ । वरिष्ठ सदस्य गणों के मार्गदर्शन में युवा मंडल प्रतिनिधि राजेश कुमार व संजीव कुमार समूह द्वारा यह रैली गायत्री शक्तिपीठ प्रांगण से डा• रमेश तिवारी के संबोधन बाद निकाली गयी और समाज में व्यसन मुक्त जीवन यापन करने का संदेश दिया गया ।
युग निर्माण कन्या विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी अपनी संवेदना व जागृति का परिचय देकर रैली में योगदान किया और बहुत ही थिंकेबुल थाट्स का स्लोगन दिया ।

गुटखा खाओ गाल गलाओ ।
अपनी अर्थी खुद उठवाओ।।

व्यसन से बचाओ ।
सृजन में लगाओ।।

जो शराबी शान में हैं
वे पतन के पैदान पर हैं ।

और नारा दिया कि

तम्बाकू गुटखे ने गटक ली
कई लोगों की जान।।
अब तू संभल जाओ ,
बचा लो अपनी प्राण।।

इस तरह के अनेक बैनर व
पोस्टर के पोस्ट से जनता को संदेश देते हुए शक्तिपीठ से  विधानसभा चौक और सेक्टर मार्केट एरिया होते हुए शक्ति पीठ वापस हुआ।
गायत्री परिवार प्रज्ञा परिवार व मंडल सदस्य गणों ने सहयोग दिया ।

विस्थापन के मुद्दे पर सरकार संवेदनहीन : सुबोधकांत सहाय



रांची। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि विस्थापन के सवाल पर केंद्र व झारखंड सरकार संवेदनहीन है। सरकारी परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए लोगों को उनका वाजिब हक नहीं दिया जा रहा है। श्री सहाय रविवार को राजधानी के पुरुलिया रोड स्थित एसडीसी सभागार में आयोजित विस्थापन पर संवाद कार्यक्रम में बतौर वक्ता बोल रहे थे। इसका आयोजन अखिल भारतीय किसान सभा की राष्ट्रीय परिषद द्वारा किया गया था। श्री सहाय ने अपने वक्तव्य में कहा कि विस्थापित अपने हक के लिए वर्षों से लड़ रहे हैं। विस्थापितों की जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा और संविधान सम्मत अधिकारों के तहत देय सुविधाएं नहीं मिली। वर्तमान केंद्र व राज्य सरकार इस दिशा में पूरी तरह संवेदनहीन है। विस्थापितों के हक के प्रति उदासीन है। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में विस्थापन जैसे महत्वपूर्ण विषय को कामन मिनिमम प्रोग्राम के तहत चुनावी घोषणा पत्र में लाएंगे। उन्होंने राज्य व केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार विस्थापन का मुद्दा सुलझाने का प्रयास नहीं कर रही है। कहा कि यदि विकास के लिए विस्थापन जरूरी है तो सरकार क्यों नहीं विस्थापितों के हित के लिए वर्ष 2013 में बनाए गए कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाती है। उन्होंने कहा कि विस्थापितों की समस्या का समाधान जल्द हो, इसके लिए सभी दलों को एकजुट होकर प्रयास करने की जरूरत है। इस अवसर पर अतुल कुमार अंजान सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने उद्गार व्यक्त किये। संवाद कार्यक्रम में काफी संख्या में विस्थापन आंदोलन से जुड़े लोग और विस्थापित मौजूद थे।

रांची में बाइकर्स गैंग हुआ बेलगाम


सिटीजन एक्शन ग्रुप की संयोजक किरण सिंह से चेन छीनने की कोशिश।

रांची। शहर में बाइकर्स गैंग का आतंक थम नहीं रहा है। प्रायः हर दिन राजधानी के किसी न किसी इलाके में अपराधी महिलाओं से आभूषण छीन कर रफूचक्कर हो जा रहे हैं। रविवार को शाम 6.45 बजे शहर के व्यस्ततम इलाके निवारणपुर में सामाजिक संस्था सिटीजन एक्शन ग्रुप की संयोजक और राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद के सदस्य राकेश कुमार सिंह की पत्नी किरण सिंह से बाइकर्स गैंग के अपराधियों ने झपट्टा मारकर चेन छीनने का प्रयास किया, लेकिन श्रीमती सिंह ने साहस कर अपराधियों की मंशा को नाकाम कर दिया। घटना के बारे में उन्होंने बताया कि शाम लगभग पौने सात बजे मुहल्ले मे टहल रही थीं। उसी समय अचानक काले रंग की एक बाइक पर सवार दो युवकों ने  बगल मे बाइक सटाकर गति धीमी कर दी। उनमें से बाइक पर पीछे बैठे युवक ने उनके गले से चेन छीनने की कोशिश की। उन्होंने अपराधियों की मंशा समझ तुरंत कसकर चेन को अपने हाथों से पकड़े रखा। इस क्रम में उनके गले पर हल्का खरोंच भी पड़ गया। इसी बीच अपराधी बाइक की स्पीड तेज कर भाग गए। इस घटना से किरण सिंह सहित मुहल्लेवासी दहशत में हैं।
उनके पति राकेश सिंह ने इस घटना की जानकारी संबंधित थाने में देते हुए यथोचित कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही इलाके में नियमित रूप से पुलिस पेट्रोलिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

जवाबी कार्रवाई को तैयार रघुवर सरकार




झारखंड की रघुवर दास सरकार ने भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर विपक्षी दलों की चुनौतियों का जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है। साथ ही अपनी पार्टी लाइन को भी कुशलता से आगे बढ़ाने को प्रयासरत हैं। सरकार आदिवासी राजनीति को एक नई दिशा प्रदान करने जा रही है जो सारे पुराने समीकरण को गड्ड-मड्ड कर सकता है। ज्ञातव्य है कि विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने विपक्षी गठबंधन के बैनर तले 5 जुलाई को भारत बंद का आह्वान किया है। राज्य सरकार एक तरफ इस विधेयक के प्रावधानों को जनता के बीच ले जा रही है और यह उनके लिए कैसे हितकर है, बता रही है, दूसरी तरफ सोरेन परिवार और झारखंड नामधारी अन्य दलों के नेताओं की बखिया उधेड़ने में लगे हैं। उनके आरोपों के जवाब में जो बातें कही जा रही हैं वह उनके आरोपों के मुकाबले हल्की पड़ रही हैं। इधर सरकार 30 जून से को हूल दिवस से 15 जुलाई तक आदिवासी जन उत्थान अभियान का आयोजन करने जा रही है। यह कार्यक्रम हर उस गांव में होगा जिसकी आबादी 1000 से ज्यादा है और जहां 50 फीसद आदिवासी निवास करते हों। इसका उद्देश्य आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस अभियान के जरिए आदिवासी समाज के साथ संवाद कायम होगा। विपक्षी दलों पर आरोपों के तीर चलाए जाएंगे।
इसी बीच रघुवर सरकार ने एक और अहम फैसला किया है। सरकार ने तय कर लिया है कि धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासियों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाएगा। उनका जाति प्रमाण पत्र भी निरस्त कर दिया जाएगा। अभी तक केवल खतियान के आधार पर प्रमाण पत्र जारी होते थे। अब सरकार के कार्मिक विभाग ने एक नया सर्कुलर जारी कर उनके रीति-रिवाज़, विवाह और उत्तराधिकार प्रथा की जांच के बाद ही जाति प्रमाण पत्र दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे धर्मांतरण पर रोक लगेगी और आदिवासियों को उनका पूरा हक मिल सकेगा। 2011 की जनगणना के मुताबिक झारखंड में कुल आदिवासी आबादी 26 प्रतिशत है। उसमें ईसाई आदिवासियों की जनसंख्या 14.4 प्रतिशत है जबकि सरना धर्म को मानने वाले आदिवासियों की 44.2 और हिन्दू आदिवासियों की 39.7 प्रतिशत है। झारखंड सरकार ने यह निर्णय महाधिवक्ता की सलाह के आधार पर लिया है। इसका राजनीतिक प्रभाव पड़ेगा। इससे आदिवासियों का ईसाई गुट नाराज होगा लेकिन हिंदू और सरना आदिवासी खुश हो जाएंगे। ईसाइयों की नाराजगी से भाजपा को खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वे पहले से ही उसके वोटर नहीं हैं। फिर उनका संख्याबल इतना नहीं कि चुनाव को प्रभावित कर सकें। विश्व हिन्दू परिषद लंबे समय से धर्मांतरण पर रोक के लिए प्रयासरत है। अतः इस कार्रवाई से संघ भी प्रसन्न होगा और भाजपा के केंद्रीय नेता भी खुश होंगे। सरना और हिन्दू आदिवासियों का भाजपा की ओर झुकाव बढ़ेगा। इसका भरपूर लाभ मिलेगा। ठीक उसी तरह जैसे वर्ष 2000 में झारखंड राज्य की स्थापना में अहम भूमिका का लाभ मिला था। तब झारखंड में कांग्रेस और झामुमो का जनाधार सिकुड़ गया था और अधिकांश समय तक सत्ता की बागडोर भाजपा के हाथ में रही थी। झारखंड मुक्ति मोर्चा अलग राज्य के आंदोलन में अहम भूमिका निभाने के बावजूद अलग झारखंड में कभी जनता का इतना विश्वास नहीं जीत पाया कि अपने दम पर सरकार बना सके। आंदोलन में अपने योगदान को लेकर वह स्वयं अपनी पीठ थपथपाता रहा जब कि विरोधी उसपर झारखंड आंदोलन को बार-बार बोचने का  आरोप लगाते रहे। झामुमो को सत्ता मिली भी तो अन्य दलों के सहयोग से।    जारखंड राज्य की स्थापना के बाद रघुवर दास पहले गैर आदिवासी मुख्यमंत्री बने थे। उनके शपथ ग्रहम के बाद से ही आदिवासी नेताओं ने उनपर निशाना साधना शुरू कर दिया था। लेकिन उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि आदिवासी नेता आदिवासियों को ठगते रहे हैं जबकि वे वास्तव में आदिवासियों के हित में काम कर रहे हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री जिस तरह राजनीति की सधी हुई गोटियां चल रहे हैं उसका जवाब दे पाना विपक्षी दलों के लिए आसान नहीं प्रतीत होता। झारखंड दिशोम पार्टी एक बार बंद का आह्वान कर अपनी फजीहत करा चुकी है। अब 5 जुलाई को विपक्ष की परीक्षा है। फिलहाल वे यही रट लगाए हुए हैं कि पूंजीपतियों को ज़मीन देने के लिए संशोधन विधेयक लाया गया है। लेकिन कैसे यह नहीं बता रहे हैं। इसके प्रावधानों की व्याख्या के जरिए अपने दावे की पुष्टि नहीं कर रहे हैं। अब सड़कों पर जोर-जबर्दस्ती किए बिना यदि विपक्षी गठबंधन के नेता 5 जुलाई के झारखंड बंद को सफल बना सके तभी जनता पर उनके प्रभाव का सही आकलन हो सकेगा अन्यथा अराजक कार्रवाइयों का सहारा लेना उनकी पराजय और जन समर्थन के अभाव का ही सूचक होगा।


शनिवार, 23 जून 2018

खूंटी गैंगरेप की साजिश का पर्दाफाश

रांची। पांच आदिवासी युवतियों के साथ गैंगरेप की घटना में कोचांग मिशन स्कूल के प्रिंसपल समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उनसे यह स्पष्ट हो रहा है कि पत्थलगड़ी आंदोलन में उग्रवादी संगठन पीएलएफआई और ईसाई मिशनरी का हाथ है। उनकी साझा साजिश के तहत नुक्कड़ नाटक की टीम को कोचांग बुलाया गया। लड़कियों को अगवा करने से पहले हथियारबंद अपराधियों ने प्रिंसिपल से बात की। प्रिंसपल के आग्रह पर दो नन को छोड़ दिया। घटना के बाद प्रिंसपल ने भी पीड़ित युवतियों को मुंह बंद रखने की सलाह दी क्योंकि मुंह कोलने पर उनके मां-बाप की हत्या हो जाएगी। जाहिर है कि पत्थलगड़ी आंदोलन का  मकसद आदिवासी संस्कृति का संरक्षण या स्वशासन की मजबूती नहीं बल्कि इस आड़ में किए जाने वाले कुकर्मों की पर्दापोशी है। आम आदिवासी कभी भी युवतियों को सबक सिखाने के लिए उनका बलात्कार करने की नहीं सोच सकता। आदिवासी भोलेभाले होते हैं तभी तो आजतक ठगे जाते रहे हैं। वे आपराधिक षडयंत्र न रच सकते हैं न अंजाम दे सकते हैं। यह उनके स्वभाव में शामिल नहीं है। माओवादी अथवा मार्क्सवादी-लेनिनवादी भी इस तरह का घिनौना कुकृत्य नहीं कर सकते। वे मर सकते हैं, मार सकते हैं लेकिन महिलाओं की इज्जत के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। यह काम कोई सिद्धांत विहीन अपराधी संगठन ही कर सकता है। ड्रग तस्करी से जुड़े लोग इस तरह का कुकृत्य कर सकते हैं। माओ ने कहा था कि जब हथियारबंद दस्ते राजनीतिक नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं तो अपराधी गिरोहों में तब्दील हो जाते हैं। झारखंड में ऐसा ही कुछ हो रहा है। इस तरह की प्रवृत्तियों को नियंत्रित करने की जितनी जिम्मेदारी सरकारी तंत्र की है उससे कहीं ज्यादा मार्क्सवाद-लेनिनवाद-माओवाद के सिद्धांतों के प्रति समर्पित कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों  की। इस तरह के तत्व उनके आंदोलन को बदनाम कर रहे हैं। सवाल है कि व्यवस्था परिवर्तन की जिस लड़ाई के लिए उन्होंने हथियार उठाया है यदि वह सफल हो गया तो क्या इसी तरह की व्यवस्था लाएंगे जिसमें न बच्चे सुरक्षित होंगे न महिलाएं। आम लोगों का जीना दूभर हो जाएगा। यदि .ही व्यवस्था लानी है तो भारत को ऐसी व्यवस्था की जरूरत नहीं है। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर इस तरह की अराजकता कभी भी स्वीकार्य नहीं हो सकती।

खांटू श्याम मंदिर में लगा श्रद्धालुओं का तांता



राँची-:हरमू रोड श्री श्याम मंदिर में ज्येष्ठ माह निर्जला एकादशी के
शुभ अवसर पर 23 जून,शनिवार को एकादशी संर्कीतन का आयोजन बडे ही धूम धाम से किया गया।श्रद्धालुगण प्रातः काल से ही बाबा श्री श्याम जी का दर्शन करने आते रहे।उदया तिथि वश एवं श्री खाटु धाम की परम्परा का अनूसरण करते हुए हरमू रोड श्री श्याम मंदिर में निर्जला एकादशी संर्कीतन का आयोजन शनिवार 23 जून को रात्रि 10 बजे से प्रातः 04 बजे तक किया गया।अपराह्ण की नियमित भोग आरती के बाद बाबा श्री श्याम जी,श्री बाला जी एवं श्री शिव परिवार का विशेष श्रृंगार किया गया।सर्वप्रथम श्याम प्रभु को इस अवसर के लिए विशेष रूप से निर्मित कराए गए वस्त्र(बागा)पहनाया गया।मण्डल के श्री गोपाल मुरारका एवं अशोक लडिया ने मनमोहक एवं खुबसूरत फूलों से जो कि इस अवसर के लिए विशेष रूप से बैंगलोर से मँगाया गया था से श्रृंगार किया।जो कि कोलकाता एवं राँची के मालाकारों की टीम ने एक-एक फूलों को गूथ कर आकर्षक गजरा तैयार किया था।बाबा को प्रिय रूह गुलाब इत्र से मसाज किया गया।शयन आरती उपरान्त बाबा के ज्योत की तैयारी श्री अनिल नारनोली,रोहित अग्रवाल प्रवीण सिंघानिया विष्णु चोधरी ने कर रात्रि 10:00 बजे बाबा का अखण्ड ज्योत प्रज्वलित कराया। मंडल के सदस्य श्री जय प्रकाश सिंघानिया ने सपरिवार बाबा का ज्योत प्रजज्वलित किया एवं बाबा  को दिलखुसार, चन्द्रकला, पेडा,आम,मेवा,रबडी,दूध,
चना,गुड,पान आदि का भोग लगाया।मण्डल के अध्यक्ष श्री हरि पेडीवाल, कृष्ण कुमार अग्रवाल,श्रवण ढांढनियां,राजेश चौधरी, गौरव अग्रवाल आदि अन्य ने श्री गणेश वन्दना,गुरू वन्दना,हनुमान वन्दना,शिव वन्दना एवं श्री राणी सती दादी का भजन गाकर दरबार में हाजरी लगाई।श्याम प्रेमियों में निर्जला एकादशी तिथि का विशेष महत्व है इस कारण श्रद्धालुगण भी विशेष रूप से सारी रात मंदिर परिसर में उपस्थित रहे।प्रातः 04 बजे बाबा की आरती सभी सदस्यों-श्रद्धालुओं ने मिल कर की एवं अपने अपने लिए मंगल कामना की।सभी भक्तों को प्रसाद वितरण मण्डल के महामंत्री आनंद शर्मा,राजेश ढांढनियां पंकज गाडोदिया,साकेत ढांढनियां,अंकित मोदी,शैकी केडिया,निकुंज पोद्दार, अमित शर्मा,अशोक शर्मा,निखिल,ॠतिक सहित अन्यों ने किया।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...