यह ब्लॉग खोजें

शनिवार, 14 जुलाई 2018

सामाजिक संस्था "पेटसी" ने किया हटिया डैम पर पौधरोपण


पर्यावरण जागरूकता जरूरी : अर्चित आनंद

रांची।  हटिया डैम पर हरियाली बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामाजिक संस्था "पेटसी" की ओर से पौधरोपण किया गया। संस्था के सचिव और जाने-माने समाजसेवी अर्चित आनंद के नेतृत्व में डैम के किनारे तीन सौ फलदार पौधे लगाए गए। इस अवसर पर श्री आनंद ने कहा कि वर्तमान आधुनिक जीवन शैली के बीच लोग पर्यावरण के महत्व की अनदेखी कर रहे हैं। यह मानव जीवन के अलावा वन्यजीव और पशु-पक्षियों के लिए खतरनाक है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल,गंभीरता और जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकारी और गैर सरकारी, दोनों स्तर पर प्रयास किए जाने की जरूरत है। संस्था की ओर से इस दिशा मे पहल की गई है। श्री आनंद ने स्वयंसेवी संस्थाओं से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। इस अवसर पर हटिया टीओपी प्रभारी श्री आजाद, समाजसेवी राजन, परिमल, रंजीत सहित काफी संख्या में पेटसी संस्था के सदस्य और स्थानीय लोग मौजूद थे।

शाह ने किया झारखंड के आदिवासियों का अपमानः अजय राय


रांची। झारखंड प्रदेश असंगठित कामगार कांग्रेस के महासचिव अजय राय ने कहा कि
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  अमित शाह के झारखंड दौरे के दौरान  झारखंड के  गरीब आदिवासियों का  अपमान किया है  बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा का  अपमान करके  अमित शाह ने यह जता दिया है कि  bjp केवल पूंजीपतियों  और सामंतों की पार्टी है  गरीब आदिवासियों के लिए उनके मन में कोई इज्जत  और  श्रद्धा नहीं है  लक्ष्मण गिलुवा भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं जबकि उनको  अपने कार्यक्रमों में तरजीह ना देकर अमित शाह ने झारखंड के आदिवासियों को अपमानित करने का काम किया है । अजय राय ने कहा कि बीजेपी के संगठन को चलाने का जिम्मा जब एक आदिवासी को मिला है तब  मुख्यमंत्री रघुवर दास के निर्देश पर बीजेपी का संगठन चलाकर आदिवासियों को अपमानित किया जा रहा है । आदिवासी होने का खामियाजा लक्ष्मण गिलुवा झारखंड में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भुगत रहे हैं  लक्ष्मण गिलुवा प्रदेश के अध्यक्ष हैं जबकि उनके महामंत्री  उनको ही जानकारी नहीं देते हैं  और  आदिवासी होने के कारण उनकी उपेक्षा करते हैं
 श्री राय ने कहा कि बीजेपी के कार्यक्रमों की जानकारी तक  लक्ष्मण गिलुवा को नहीं होती है जबकि  मुख्यमंत्री रघुवर दास के खेमे में रहने वाला अदना सा कार्यकर्ता भी अमित शाह के कार्यक्रम को बखूबी जानता है  इससे प्रतीत होता है कि झारखंड में बीजेपी आदिवासियों का अपमान कर रही है और केवल उसको वोट बैंक समझने का काम कर रही है ।
श्री राय ने कहा कि  सीएनटी एसपीटी एक्ट में संशोधन  और  भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन  आदिवासियों के हितों पर कुठाराघात है  आदिवासी विधायक लगातार  इन संशोधनों का दवे जबान से विरोध करते रहे लेकिन आदिवासियों की एक नहीं सुनी गई और अडानी अंबानी जैसे घरानों के लिए भूमि अधिग्रहण कानून को झारखंड में  संशोधित कर दिया गया  इससे प्रतीत होता है कि आने वाले दिनों में आदिवासियों को BJP हाशिए पर धकेल ने का षड्यंत्र झारखंड में कर रही है

मिसेज एशिया ने उज्जवला पंचायत में योजना को सराहा

इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी में एलपीजी पंचायत आयोजित

रांची। राजधानी स्थित इंडियन आयल , महारत्न कंपनी के अधिकृत वितरक इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी द्वारा शनिवार को उज्जवला दिवस एवं एलपीजी पंचायत का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के रुप में मिसेज एशिया एवं  झारखंड बार काउंसिल की प्रथम महिला सदस्य रिंकू भगत उपस्थित थी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मिसेज एशिया रिंकू भगत ने कहा कहा कि जब से प्रधानमंत्री ने देश में उज्ज्वला योजना लागू की है, भारतीय महिलाओं का भविष्य उज्जवल हो रहा है।  प्रधानमंत्री ने महिलाओं की समस्याओं को समझा और उसके निदान के लिए उज्ज्वला योजना को लॉन्च किया । इस योजना से महिलाओं को समाज में सम्मान मिला है। क्योंकि जो महिलाएं गरीबी के चलते एलपीजी कनेक्शन नहीं ले पाती थी और सूखे हुए पत्ते और लकड़ी पर खाना तैयार करती थी, उनका स्वास्थ्य खराब हो रहा था , उनकी रहन-सहन का स्तर गिर रहा था , दूसरी तरफ पर्यावरण की रक्षा नहीं हो पा रही थी। इन बातों की चिंता करते हुए प्रधानमंत्री  ने उज्ज्वला योजना लागू किया और इसका लाभ सभी लोग ले रहे हैं । इसके लिए प्रधानमंत्री के प्रति रिंकू भगत ने आभार व्यक्त किया । साथ ही साथ रिंकू भगत इंद्रप्रस्थ गैस परिवार एवं डॉ रवि भट्ट के प्रति भी आभार जताया और कहा कि  उज्जवला दिवस पर महिलाओं को सम्मान देने के लिए हमें बुलाया , यह हर्ष की बात है। कार्यक्रम में वार्ड संख्या 12 के पार्षद कुलभूषण ने लाभुकों को कहा कि इस योजना का अधिक से अधिक लोग लाभ उठाएं। अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉक्टर रवि भट्ट ने कहा कि देश आजाद हुए कितने वक्त बीत गए लेकिन  प्रधानमंत्री  ने महिलाओं को जो सम्मान दिया वास्तव किसी भी पूर्ववर्ती सरकार ने नहीं दिया । कार्यक्रम में मुख्य रूप से भाजपा जनजाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सत्येंद्र रजक , झारखंड एकेडमिक काउंसिल के उपसचिव  यूजीन मींस, रामविलास शर्मा , मनोहर मुंडू, नीरज ,एकता ,सनोज महतो, करमाली, सपना चौधरी, दीनदयाल पांडे और प्रमोद मिश्रा सहित कई सामाजिक  कार्यकर्ता उपस्थित थे।

सुबोधकांत ने खींचा धर्मरथ का रस्सा



रांची। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय आज धर्मरथ की रस्सा खींचकर मौसीबाडी तक ले गए। उन्होने सर्वप्रथम रथ पर बैठ कर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम की लक्षार्चना की। श्री सहाय धोती पहन कर नंगे बदन भगवान के तीनो विग्रहो की तुलसी एंव पुष्प से दोपहर 230 बजे से शाम 0500 बजे तक रथ में बैठकर लक्षाचर्ना की तत्पश्चात महाआरती में भाग लिया और खुद प्रभु की आरती की। उसके बाद श्री सहाय ने हजारो प्रभु के भक्तों के साथ प्रभु का जयकारा लगाते हुए भगवान जगन्नाथ बहन सुभद्रा और भाई बलराम जी के रथ का रस्सा पकड कर खींचा।

शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

बोल चिरईया

सुबह हुई नहीं
कि शुरू हो जाती हो तुम
ठक ठक ठक ठक
ठक ठक ठक ठक
इस शीशे ने क्या बिगाड़ा है?
या कि इस पार आना है ?
बोल तो सही?

तेरा साथी छिपा है क्या यहाँ
तुझसे नाराज हो गया था क्या भला
और अब छिप कर तेरी जान ले रहा?
क्यों चिरैया, यही बात है क्या?

ठक ठक ठक ठक

रुक जा, ठहर तो सही
हुआ क्या, यह तो बता
अच्छा !
तूने चिड़े को देख लिया है
तिनके बटोरते, धागे चुनते
तुमदोनो का सपना बुनते
और प्यार उमड़ आया तेरा
यही बात है न

नहीं?
तो क्या शीशे में देख लिया
अपना ही अक्स
और सौतिया डाह हो आया
कि कही तुम्हारा साथी
उसपर ही मोहित न हो जाए?
फिर सारी उम्र विरह में बीत जाए!

क्यों री, यही बात है क्या?
क्यों आना है तुम्हे, इस पार?
क्या देख लिया,
क्या सुन लिया,
क्या जान लिया

ठक ठक ठक ठक

कितने चोंच मारोगी
ये शीशा है
निस्पंद, निर्जीव
तुम्हारी मार का असर नहीं होगा
चोंच लहूलुहान हो जाएगी

ठक ठक ठक ठक

फिर ठक ठक??
अरे थम जा
क्यों कर रही तू
वह भी इतनी जोर, जोर
कैसा गुस्सा है री
या कि छटपटाहट
या कि डर
या कि सब ही
कि शीशा तोड़ ही देगी

ओ चिरैया
बता तो सही, बात क्या

क्या आया है एक शिकारी
जिसे चाहिए छोटी चिड़िया
दाने देकर, फिर फुसलाकर
ले जाएगा पंख नोचने?
कुचल मसल कर, मार काट कर
फेंक देगा उस जंगल में?

ठक ठक ठक ठक
ठक ठक ठक ठक

हां री चिड़िया,
समझ गयी मैं, बातें तेरी
ठोक ठोक के, शोर मचा के
बता रही संभलो सारे
एक नहीं कई कई शिकारी
बैठे हैं बस घात लगाए
नन्ही चिड़िया ज्यों ही निकले
दाने देकर, फिर फुसलाकर
ले जाएंगे पंख नोचने
ले जाएंगे पंख नोचने
----स्वयंबरा

गुरुवार, 12 जुलाई 2018

नक्सलमुक्त झारखंड एक गंभीर चुनौती



व्यावहारिकता की कसौटी पर डीजीपी के संकल्प की पड़ताल

रांची । झारखंड के पुलिस कप्तान डीके पांडेय ने एलान किया है कि झारखंड से नक्सलियों का खात्मा करके रहेंगे। उनके मुताबिक राज्य पुलिस नक्सलमुक्त झारखंड अभियान के लिए कमर कस चुकी है। गत दिनों श्री पांडेय ने लातेहार के सीआरपीएफ कैंप में आयोजित पलामू प्रमंडलीय बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि नक्सली सरेंडर करें, नहीं तो पुलिस की गोली से मरने को तैयार रहें। उन्होंने फिर दोहराया कि झारखंड से नक्सलवाद का सफाया जल्द होगा। इस दिशा में पुलिस प्रयत्नशील है। नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। नक्सल आंदोलन की कमर तोड़ने के लिए उन्होंने नक्सलियों के घर व ससुराल की संपत्ति जब्त करने की दिशा में भी कदम उठाया है।
किसी भी समस्या का समाधान समस्या के आसपास ही होता है। झारखंड में यह समस्या क्यों उत्पन्न हुई, कैसे विकराल हुई, इसपर विचार करने की जरूरत है। यह सही है कि राज्य के अधिकांश नक्सली गुट सिर्फ लेवी वसूलने वाले गिरोहों की शक्ल ले चुके हैं। उन्हें मार्क्स, लेनिन या माओं की विचारधारा से कुछ भी लेना-देना नहीं है। जनता के मुद्दों से उन्हें कोई सरोकार नहीं रह गया है। वे जनसमर्थन भी बंदूक के जोर पर ले रहे हैं। फिर भी उनका भंडाफोड़ नहीं हो पा रहा है या उनकी नकेल पूरी तरह नहीं कसी जा पा रही है तो इसका कारण है जनता का विश्यास और जंगल पहाड़ के रास्तों के बारे में सुरक्षा बलों को जानकारी का अभाव। अभियान की सफलता के लिए सूचना तंत्र की मजबूती जरूरी है। साथ ही यह जन समर्थन से ही संभव है। लंबे समय तक पुलिस का आचरण जनता पर वर्दी का रूआब गांठने और उससे कटकर रहने का था। सका जन संपर्क होता भी था तो इलाके के दबंग लोगों से। अब राज्य पुलिस के मुखिया डीके पांडेय इस बात को समझते हुए सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में पब्लिक से बेहतर संबंध बनाने और विशेष तौर ग्रामीण क्षेत्रों में थाना व पुलिस पिकेट में तैनात जवानों का उत्साहवर्धन करने की दिशा में पहल कर रहे हैं। यदि पुलिस जनता का विश्वास जीत सके तो नक्सलवाद ही नहीं संगठित अपराध का पनप पाना असंभव हो जाएगा। श्री पांडेय पुलिस जवानों की समस्याओं के समाधान के प्रति भी गंभीरता से लगे हैं। नि:संदेह श्री पांडेय का यह प्रयास सराहनीय कहा जा सकता है। सूबे में लाल आतंक के खिलाफ शुरू किए गए सुनियोजित महाभियान को सफल बनाने में जुटे हैं। इस दिशा में उनके जज्बे और जुनून की प्रशंसा की जानी चाहिए। वहीं नक्सलियों को समूल नेस्तनाबूद करने की कार्रवाई कितने कारगर तरीके से की जा रही है, इसकी मानिटरिंग भी नियमित रूप से हर स्तर पर किये जाने की जरुरत है। नक्सलियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की सरकारी योजनाओं का कार्यान्वयन ठोस तरीके से हो, इस दिशा में मजबूत इरादों के साथ लगने की आवश्यकता है। साथ ही ग्रामीण विकास योजनाओं का समुचित कार्यान्वयन भी सुनिश्चित हो, ताकि गांवों के भटके युवा समाज की मुख्य धारा से जुड़े रहें। सरकार का मानना है कि झारखंड में नक्सली गतिविधियों के बढ़ने में विकास विरोधी ताकतों का भी समर्थन है। ऐसे में विकास बाधित होता है। सरकार ने 2018 के अंत तक झारखंड से नक्सलवाद खत्म करने का डेडलाइन भी तय किया है। राज्य में अशांति और अराजकता को नियंत्रित करने के लिए अब जरूरी हो गया है कि नक्सलियों की नकेल कसने को सरकार कठोर कार्रवाई करे। इस महाभियान में सीमावर्ती राज्यों, (बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ व बिहार) की सरकारों के साथ वार्ता कर संयुक्त अभियान में सहयोग लेने की आवश्यकता है। क्योंकि हर बड़ी वारदात के बाद नक्सली राज्य की सीमा पार कर पड़ोसी राज्य में शरण ले लेते हैं। स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल होना भी जरूरी है। इसके अभाव में अभियान की सफलता प्रभावित होती है। यह सर्वविदित है कि विकास की गति तेज होने और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से नक्सलियों की धार कुंद होगी। सरकार को नक्सलियों के आर्थिक मददगारों पर भी पैनी नजर रखते हुए ठोस कार्रवाई करना समय की मांग व राज्य की जरुरत है।
 बहरहाल  राज्य को 2018 के अंत तक नक्सलमुक्त बनाने की सरकार व  पुलिस कप्तान की पहल क्या रंग लाती है, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इस दिशा में डीजीपी के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद तो की ही जा सकती है।

बुधवार, 11 जुलाई 2018

निराशा का कारण कुछ और है अमित शाह जी

रांची। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भाजपा के सोशल मीडिया के योद्धाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया का एक ग्रूप मोदी सरकार के खिलाफ अभियान चला रहा है जिसके कारण कार्यकर्ताओं में निराशा है। योद्धा होने का अर्थ ही है कि किसी न किसी के साथ उसका युद्ध  चल रहा है।
शाह कहते हैं सारे चोर इकट्ठे हो गए हैं। अपने राजनीतिक विरोधियों को चोर कहना और स्वयं को खुदाई फौजदार समझना लोकतांत्रिक विचार तो नहीं हो सकता। आरोप तो भाजपा नेताओं पर भी लग रहे हैं। बहुत से सवाल हैं जिनका कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। कटघरे में स्वयं शाह के पुत्र भी खड़े हैं। सत्ता में होने का यह मतलब कत्तई नहीं कि उनके सात खून माफ हैं और उनके खिलाफ कोई जांच नहीं होनी चाहिए।
सोशल मीडिया का जितना बेहतर इस्तेमाल मोदी सरकार कर रही है उतना अबतक किसी ने नहीं किया था। शाह ने सोशल मीडिया के योद्धाओं की एक बड़ी फौज पूरे देश में खड़ी कर रखी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर शाह को चाणक्य और मोदी को अवतार के रूप में पेश कर रहे थे। लेकिन अतिशयोक्ति अलंकार में किए जा रहे दावे आम लोगों के गले के नीचे उतर जाएं यह जरूरी तो नहीं है। वे जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे वह विश्वसनीय नहीं बल्कि आक्रोश बढ़ाने वाला था।  शाह के योद्धाओ के अंदर निराशा है तो इसके दो ही कारण हो सकते हैं-एक तो प्रचार युद्ध में पराजय और दूसरा पार्टी की तरफ से उपेक्षात्मक रवैया।
दूसरा कारण ही निराशा का कारण हो सकता है। शाह और मोदी कार्यकर्ताओं से मिलने और उनकी बात सुनने से परहेज़ करते रहे हैं। वर्ना योद्धाओं ने तो इतनी तलवार भांजी कि उसके कई टुकड़े कर दिए।
विपक्षी दलों के पास सोशल मीडिया की न कोई समझ है न  महत्व का अहसास । सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के खिलाफ कोई संगठित ग्रूप नहीं काम कर रहा है। यह आम जनमानस की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। विरोध के स्वर को सिरे से खारिज करना लोकतांत्रिक रवैया नहीं है। इसे तानाशाही कहते हैं।  भारत जैसे विशाल देश में जब इंदिरा की तानाशाही नहीं चली तो बाकी लोग किस खेत की मूली हैं।
 मोदी सरकार और पार्टी अध्यक्ष को अपने हर कृत्य को सही करार देने की जगह कभी-कभी आत्मनिरीक्षण और आत्मसमीक्षा भी करनी चाहिए। उनसे इस देश की जनता ने जो उम्मीदें लगा रखी थीं उसमें कितना खरे उतरे हैं, इसपर विचार करना चाहिए। अगर चूक हुई है तो उसे स्वीकार करना चाहिए। यह स्वस्थ परंपरा है। भारत की जनता सबकुछ बर्दास्त करती है लेकिन आत्मप्रवंचना नहीं। बड़बोलेपन को वह सुनती रहती है और समय आने पर बता देती है कि उसे यह पसंद नहीं है। यह सही है कि विपक्ष में जातिवादी और क्षेत्रवादी दलों की जमात है लेकिन भाजपा भी तो धार्मिक ध्रुवीकरण में विश्वास करती है। भारत के लोगों को आजादी के बाद अभी तक कोई आदर्श दल नहीं मिला। अपनी दुकान के पकवान को सबसे स्वादिस्ट और सबसे सस्ता तो कोई भी बता सकता है। उपभोक्ता उसे मान ही लें जरूरी नहीं है।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...