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बुधवार, 18 जुलाई 2018

उपभोक्ता जागरण अभियान में लगा गुलाबी गैंग

कंज्यूमर फ्रेंडली बनें उत्पादक और दुकानदार : रानी कुमारी

रांची। सामाजिक संस्था नारी शक्ति सेना (गुलाबी गैंग) महिला हितों के साथ उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए लोगों को उपभोक्ता कानूनों के प्रति जागरूक कर रही है। संस्था द्वारा शहरी व ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ता जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस क्रम में बुधवार को शहर के बनहोरा, हेसल, बजरा, लक्ष्मी नगर और हेहल में गुलाबी गैंग के सदस्यों ने जागरूकता अभियान चलाया। संगठन की अध्यक्ष और रांची जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद की सदस्य रानी कुमारी ने कहा कि उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों की जानकारी लोगों को होना जरुरी है, इसके अभाव में उपभोक्ताओं को ठगे जाने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने कहा कि उत्पादकों, निर्माताओं और दुकानदारों को कंज्यूमर फ्रेंडली होना चाहिए। क्षणिक और थोड़े से लाभ के लिए उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति त्यागने की जरुरत है, तभी उपभोक्ता हित का संरक्षण संभव है। इसके अलावा इस दिशा में सरकारी प्रयासों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों को भी सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है। रानी कुमारी ने कहा कि अक्सर यह शिकायत मिलती है कि जनवितरण प्रणाली के दुकानदार लाभुकों को समय पर व निर्धारित मात्रा मे अनाज की आपूर्ति नहीं करते हैं। इससे लाभुकों को सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पाता है। कम अनाज देकर पीडीएस दुकानदार लाभुकों का हक मारते हैं। ऐसा करनेवाले दुकानदारों को चिन्हित कर उनपर विभागीय कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाएगा। उन्होंने उपभोक्ताओं से किसी भी चीज की खरीदारी या सेवा संबंधी कार्य के एवज में  बिल लेने की अपील की। पेट्रोल- डीजल, गैस सिलेंडर लेते समय सुरक्षा के अलावा वजन या मात्रा पर भी ध्यान देने की बात कही। जागरूकता अभियान के दौरान गुलाबी गैंग की सदस्यों ने झारखंड सरकार के खाद्य आपूर्ति विभाग की ई- पत्रिका " आहार " का भी वितरण उपभोक्ताओं के बीच किया। रानी ने कहा कि संस्था की ओर से प्रत्येक सप्ताह  एक- एक मुहल्ले में उपभोक्ता जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। इस अवसर पर सोनी देवी, अंजली देवी, रेशमी कुमारी, परमशीला देवी, चंदा कुमारी, सुनीता देवी, कंचन देवी, किरण कुमारी, कौशल्या देवी, द्रौपदी देवी, शीला देवी सहित अन्य महिलाएं मौजूद थीं।

विपक्षी दलों ने की स्वामी अग्निवेश पर हमले की निंदा


    सरकार प्रायोजित  हमला : बाबूलाल मरांडी
 सुनियोजित साजिश, माफी मांगें प्रधानमंत्री : सुबोधकांत सहाय ।

रांची। राज्यसभा के पूर्व सदस्य और जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर मंगलवार को पाकुड़ में भाजयुमो कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए जानलेवा हमले  पर विपक्षी दलों ने रोष जताया है। बुधवार को राजधानी स्थित होटल चाणक्य बीएनआर में आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री व झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह अनैतिक कार्य नैतिकता की दुहाई देने वाली भाजपा ने किया है। यह हमला सरकार प्रायोजित है। सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमला कर भाजपा ने लोकतंत्र को शर्मसार किया है। इसकी जितनी भी निंदा की जाय, कम होगी।
 वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि जनहित में अपना सर्वस्व न्योछावर करनेवाले सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर हमला कर भाजपा ने यह बता दिया कि लोकतंत्र नाम की चीज नहीं रह गई है। गुंडा तत्वों का राज हो गया है। राज्य में कानून- व्यवस्था चौपट हो गई है। सरकार ही  खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आई है। उन्होंने कहा कि सरकार इस घटनाक्रम की न्यायिक जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे। इसके लिए प्रधानमंत्री माफी मांगें। अन्यथा तमाम विपक्षी दल सामाजिक संगठनों को साथ लेकर व्यापक आंदोलन करने को विवश होंगे। मौके पर स्वामी अग्निवेश ने बताया कि मारपीट करनेवाले हिन्दू संस्कृति के दुश्मन हैं। फासीवादी हैं। यदि किसी बात को लेकर नाराजगी थी,तो बातचीत कर भी हल निकाला जा सकता था। उन्होंने कहा कि हमलावर आक्रामक थे और भाजयुमो का पट्टा सिर पर लगाए थे।
 प्रेसवार्ता में राजद के गौतम सागर राणा, कांग्रेस के आलमगीर आलम, केएन त्रिपाठी, मनोज यादव, वाम दल के सुशांत मुखर्जी सहित काफी संख्या मे विपक्षी दलों के नेता व कार्यकर्ता मौजूद थे।

मंगलवार, 17 जुलाई 2018

पानी के सौदागरों की पीठ पर सरकार का हाथ




देवेंद्र गौतम
भारत में पानी का संकट मुनाफे के धंधे में परिणत होता जा रहा है और इसे विकास का पर्याय माना जा रहा है। वर्ष 2002 में जब नेशनल वाटर पॉलिसी बनी थी तभी सरकार ने पानी के धंधे को निजी क्षेत्र के लिये खोल दिया गया। जल संसाधन से जुड़ी परियोजनाओं को बनाने, उनके विकास और प्रबंधन में निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता खुलते ही पानी का बाजार बढ़ने लगा और बहुराष्ट्रीय कंपनियां मुनाफा कमाने की होड़ में टूट पड़ीं। सरकार पीने का पानी उपलब्ध कराने के अपने कर्तव्य से ही पीछे हटती चली गई। नतीजा यह कि आज 15 करोड़ से ज्यादा लोगों को पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां करोड़ों के विज्ञापन के जरिए लोगों को बोतलबंद पानी का इस्तेमाल  सेहतमंद रहने का एकमात्र उपाय बता रही हैं। लेकिन सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट की रिसर्च के मुताबिक बोतलबंद पानी बेचने वाली कंपनियां कीटनाशको की मिलावट वाला पानी पिला रही हैं ।
बोतलबंद पानी बेचने वाली कंपनियों को सिर्फ मुनाफे से मतलब है। सुद्ध पानी के लिए तय मानकों से उनका कोई लेना देना नहीं है। लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर से उन्हें कोई मतलब नहीं है। 2015 में मुंबई में कीटनाशक युक्त पानी बेचने वाली 19 कंपनियों पर रोक लगाई थी। जानकारी के मुताबिक एक लीटर बोतलबंद पानी तैयार करने में पांच लीटर पानी खर्च होता है। सरकार के पास इस संबंध में न कोई नीति है न समझ। इसलिये सभी सरकारी बैठकों में मंचासीन लोगों के सामने बोलतबंद पानी रखा जाना प्रतिष्ठा का विषय माना जाता है। सरकारी प्रोत्साहन के कारण हीआज बोतलबंद पानी का धंधा खरबों में पहुंच चुका है।
विडंबना यह है कि भारत में जहां प्राकृतिक जल स्रोतों की बहुतायत रही है वहां पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। भारत में स्वच्छ जल की मात्रा 19 अरब घनमीटर है, जिसका 86 फीसदी नदियों, झीलों व तालाबों में उपलब्ध है। 1947 में आजादी के समय प्रत्येक व्यक्ति को हर वर्ष 5000 घनमीटर जल उपलब्ध था, किन्तु जनसंख्या बढ़ने के कारण वर्तमान में यह घटकर सिर्फ 2,000 घनमीटर ही रह गया है। एक अनुमान के मुताबिक सन् 2025 तक यह उपलब्धता घटकर 1500 घनमीटर रह जाएगी। भारत में 20 नदियों में से 6 की हालत दयनीय है, इसमें आज 1,000 घनमीटर से भी कम जल उपलब्ध है। आने वाले कुछ वर्षो में कई अन्य नदियों में जल एक दुर्लभ संसाधन बन जाएगा। अनुमान है कि सन् 2025 तक सिर्फ ब्रह्मपुत्र-बराक और ताप्ती से कन्याकुमारी तक पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में ही भरपूर पानी रह जाएगा। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत को पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता के मानकों के आधार पर 120 वां स्थान दिया है। हमारे देश के 30 फीसदी शहरों और 82 फीसदी गांवों में पानी को शुद्ध करने की व्यवस्था नहीं है। हालांकि यह संकट विश्वव्यापी है। जिस रफ्तार से दुनिया की आबादी बढ़ रही है, उसी रफ्तार से पानी की खपत भी बढ़ रही है। भूतल का जल प्रदूषित हो चुका है और भूमिगत जल का दोहन तेजी से हो रहा है। उसका स्तर नीचे खिसकता जा रहा है। भारत में जहां प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता रहा है वहां पानी का व्यापार दुर्भाग्यपूर्ण है। दुनिया के तमाम देश जल संरक्षण के मामने में जागरुक हैं भारत एक ऐसा देश है जहां अभी तक कोई मुकम्मल जल प्रबंधन नहीं बन पाया है। बना भी है तो कागजों पर। धरातल पर नहीं।
भारत में 90 फीसदी पानी को उपयोग के बाद रिसाइक्लिंग करने की जगह नदियों में बहा दिया जाता है जो जल प्रदूषण फैलाने का काम करता है। 65 फीसदी बरसात का पानी समुद्र में चला जाता है। जबकि पानी की जरूरत बढ़ती ही जा रही है। मनुष्य और पशुधन को पानी की दरकार है। खेती और बिजली उत्पादन के लिये पानी की जरूरत है। थर्मल प्लांट्स के लिए पानी चाहिये और सिंचाई के लिये बिजली चाहिये। इस पूरी प्रक्रिया में पानी तेजी से खत्म हो रहा है। जनसंख्या पर रोक नहीं है। सूखे से निपटने का उपाय नहीं हैं। प्रदूषण फैलाते रासायनिक खाद के उपयोग पर प्रतिबंध नहीं हैं। जलाशयों में गाद भरता जा रहा है। उनकी जल ग्रहण क्षमता घटती जा रही है। लेकिन इस नुकसान पर कोई ध्यान नहीं है। उपजाऊ जमीन पर धड़ल्ले से क्रंकीट खड़ा किया जा रहा है। जलजनित रोगों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। सरकार इलाज पर ध्यान देती है लेकिन रोगों के फैलने से रोकने के मामले में ढिलाई बरतती है। पानी के सौदागरों के खिलाफ अब जनता को ही सामने आकर मोर्चा लेना होगा।
एक तरफ पानी का संकट तो दूसरी तरफ संकट को ही धंधे में बदलने की कवायद। बोतलबंद पानी का धंधा अरबों में पहुंच चुका है। भारतीय संविधान में जीने का अधिकार मौलिक अधिकारों की सूची में शामिल है। उसी संविधान की शपथ लेने वाली सरकारें हर नागरिक को मुफ्त में शुद्ध पीने का पानी भी दे पाने में भी सक्षम नहीं हो पा रही हैं। जो पानी दिया जा रहा है उसमे भी 60 फीसदी पानी साफ नहीं है। इसी कारण देश में 72 फीसदी बीमारियां दूषित दल के कारण हो रही है। सरकार पानी का इंतजाम करने की जगह पानी के सौदागरों की पीठ थपथपा रही है। इन्हीं बीमारियों के इलाज के लिये देश में स्वास्थ्य सेवा भी मुनाफा वाला धंधा इस तरह बन चुका है कि आज की तारिख में निजी हेल्थ सेक्टर 10 लाख करोड़ रुपये पार कर चुका है। पानी के इस मुनाफे वाले धंधे से अगला जुड़ाव खेती की जमीन पर कंक्रीट खड़ा करने का है। कोई भी रियल इस्टेट खेती की जमीन इसलिये पंसद करता है क्योंकि वहा जमीन के नीचे पानी ज्यादा सुलभ होता है और खेती की जमीन को कैसे कंक्रीट के जंगल में बदला जाये इसका खेल अगर क्रोनी कैपटलिज्म का एक बडा सच है तो दूसरा सच यह भी है कि कि बीते 10 बरस में 47 फीसदी कंक्रीट के जंगल खेती के जमीन पर खडे हो गये और कंक्रीट के इस जंगल का मुनाफा बीते दस बरस में 20 लाख करोड से ज्यादा का है।

महिला सुरक्षा के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा का विकासः मेनका गांधी

महिला और बाल विकास मंत्रियों की उच्च स्तरीय राष्ट्रीय बैठक

नई दिल्ली। देश के विभिन्न राज्यों के महिला और बाल विकास मंत्रियों की एक उच्च स्तरीय राष्ट्रीय बैठक आज नई दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने की। बैठक में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. विरेन्द्र कुमार भी मौजूद थे। बैठक में बिहार, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, असम, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर के मंत्रियों ने भाग लिया। शेष राज्यों की तरफ से महिला और बाल विकास विभाग के सचिव तथा अन्य उच्च स्तरीय अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। राष्ट्रीय स्तर की बैठक का आयोजन महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे के साथ-साथ पोषण अभियान से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के उद्देश्य से किया गया था। बैठक में इन मुद्दों के प्रभावी कार्यान्वयन और आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों के समर्थन के बारे में भी चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए मेनका गांधी ने कहा कि पिछले 4 वर्षों के दौरान केंद्र सरकार महिला और बाल सुरक्षा, गोद लेने, पोषण तथा महिलाओं की सुरक्षा सहित अन्य मुद्दों को लेकर पूरी मेहनत से कार्य कर रही है। बैठक का एजेंडा निर्धारित करते हुए मेनका गांधी ने मंत्रालय द्वारा अर्जित की गई विभिन्न उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे को बेहतर करने के लिए चंडीगढ़ तथा अन्य स्थानों पर फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की क्षमता 1500 नमूनों से बढ़ाकर 50,000 तक की जा रही है। उन्‍होंने महिला सुरक्षा के मामलों से संबंधित जांच में तेजी लाने के लिए प्रत्‍येक राज्‍य से अपने खुद के फोरेंसिक प्रयोगशालाओं को स्‍थापित करने का आग्रह किया।
मंत्री महोदया ने बाल उत्‍पीड़न से संबंधित मुद्दों की ओर राज्‍यों का ध्‍यान आकृष्‍ट किया और बाल उत्‍पीड़न पर बच्‍चों से आने वाली शिकायतों के लिए ई-बॉक्‍स; एवं कार्य स्‍थल पर महिलाओं के यौन उत्‍पीड़न के लिए शी-बॉक्‍स ऑनलाइन शिकायत पोर्टल के बारे में सूचना का व्‍यापक प्रसार करने की अपील की। उन्‍होंने राज्‍यों से पुलिस बल में म‍हिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी कार्यान्वित करने की भी अपील की जिससे कि अपराधों द्वारा प्रभावित महिलाओं के लिए एक निर्भीक वातावरण बनाया जा सके। उन्‍होंने राज्‍यों से महिला सरपंचों को प्रशिक्षित करने का भी आग्रह किया जिससे कि उन्‍हें प्रभावी तरीके से गांवों को अभिशासित करने में समर्थ बनाया जा सके।
बाल सुरक्षा एवं गोद लेने के बारे में चर्चा करते हुए, मंत्री महोदया ने प्रतिभागियों का ध्‍यान राज्‍य में सभी शिशु देखभाल संस्‍थानों में अनिवार्य रूप से पंजीकृत कराने तथा समुचित निगरानी के लिए उन्‍हें कारा के साथ जोड़ने की ओर आकृष्‍ट कराया। उन्‍होंने यह भी कहा कि राज्‍यों को पालना केन्‍द्रों में निवेश करने की आवश्‍यकता है जिससे कि गोद लेने के लिए और अधिक परित्‍यक्‍त बच्‍चों के लिए उपलब्ध बनाया जा सके। जिन अन्‍य मुद्दों पर चर्चा की गई, उनमें स्‍कूलों में अच्‍छे एवं बुरे स्‍पर्श पर एक लघु फिल्‍म कोमल का निर्माण, महिलाओं के लिए राज्‍य राष्‍ट्रीय आयोग का सुदृढ़ीकरण, महिला ई-हाट, राष्‍ट्रीय महिला कोष, तेजाब के हमलों से पीडि़त महिलाओं के लिए पीडि़त क्षतिपूर्ति योजना तथा कामकाजी महिला छात्रावासों के लिए प्रस्‍ताव आदि शामिल हैं। मंत्री महोदया ने राज्‍यों के प्रतिनिधियों से किसी भी सर्वेश्रेष्‍ठ पद्धति एवं नवोन्‍मेषी विचारों को साझा करने को कहा जिससे कि देश में महिला एवं बाल सुरक्षा तथा कल्‍याण के उद्देश्‍यों को पूरा किया जा सके।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. विरेन्द्र कुमार ने अपने उद्घाटन संबोधन में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा महिलाओं की सुरक्षा एवं हिफाजत के लिए उठाए गए विभिन्‍न उल्‍लेखनीय कदमों को रेखांकित किया। उन्‍होंने कहा कि मातृ वंदना योजना, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, वन स्‍टाप सेंटर, महिला ई-हाट, चाइल्‍ड लाइन, पोक्‍सो ई-बॉक्‍स तथा बच्‍चों के बलात्‍कारियों के लिए मौत की सजा जैसे सख्‍त कदम के प्रकार के कई कार्यक्रमों ने महिला सुरक्षा एवं अधिकारिता के लिए एक वातावरण तैयार कर दिया है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में सचिव श्री राकेश श्रीवास्‍तव ने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय संमिलन पर फोकस रखते हुए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण के साथ महिलाओं के लिए हिंसा और उत्‍पीड़न मुक्‍त एक सक्षमकारी वातावरण का निर्माण करने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्‍होंने राज्‍यों से महिलाओं एवं बच्‍चों के लिए अनूठी योजनाओं एवं पहलों को सफल बनाने के लिए पूरा समर्थन देने की अपील की।
राज्‍यों के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मंत्रियों ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आरंभ की गई योजनाओं तथा उनके संबंधित राज्‍यों में उनके द्वारा कार्यान्वित अन्‍य नवोन्‍मेषी विचारों को आगे बढ़ाने के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों को रेखांकित किया। उन्‍होंने वर्तमान योजना एवं नीतियों में सुधार लाने के लिए बहुमूल्‍य सुझाव भी दिए। राज्‍यों ने सभी शिशु देखभाल संस्‍थानों को पंजीकृत करने तथा उन्‍हें कारा से जोड़ने की नीति का स्‍वागत किया।
यह सम्‍मेलन महिला एवं बाल विकास मंत्री के इस कथन के साथ सम्‍पन्‍न हुआ कि महिलाओं के मुद्दों पर समग्र दृष्टिकोण की आवश्‍यकता है और राज्‍यों को इसमें सक्षम बनाने कि, वे सभी महिला एवं बाल केन्द्रित योजनाओं का पूरी तरह कार्यान्‍वयन करें, के लिए निश्चित रूप से अपना सर्वश्रेष्‍ठ योगदान देना चाहिए।

असम में मछली एवं दुग्‍ध उत्‍पादन बढ़ा : राधामोहन सिंह



नई दिल्ली। केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री राधामोहन सिंह ने गुवाहाटी के प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय में असम में कृषि-बागवानी क्षेत्र के विकास पर समीक्षा करने के लिए एक बैठक आयोजित की। मंत्री महोदय ने राज्‍य में कृषि से संबंधित विभिन्‍न क्षेत्रों के क्रियाकलापों की समीक्षा की।
राज्‍य में सहकारी सहकारिता विकास की समीक्षा करने के बाद, मंत्री ने कहा कि केन्‍द्रीय सरकार राष्‍ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के माध्‍यम से असम में सहकारी विकास में तेजी लाने के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्‍होंने कहा कि पिछले चार वर्षों (2014-2018) में निगम ने राज्‍य के लिए कुल 55.46 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं जिसमें से 11.06 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं। उन्‍होंने कहा कि 2010-2011 से 2013-14 के पिछले चार वर्षों के दौरान केवल 0.90 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी तथा राज्‍यों को 0.20 करोड़ रुपये ही संवितरित किए गए थे।
मंत्री महोदय ने बैठक में सूचना दी कि राज्‍य में मछली और मछली के बीजों के उत्‍पादन में पिछले दो वर्षों में क्रमश: 10.06 प्रतिशत एवं 43.79 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्‍होंने कहा कि 2014-2016 के दौरान मछली के 576 हजार टन उत्‍पादन के मुकाबले 2016-18 में 634 हजार टन मछली का उत्‍पादन हुआ।  मंत्री
ने कहा कि मछली के बीज के उत्‍पादन के मामले में राज्‍य ने 2016-2018 में 14,738 मिलियन एफआरवाई का उत्‍पादन किया जो पिछले दो वर्षों की तुलना में 43.79 प्रतिशत अधिक है। मंत्री महोदय को यह भी बताया गया कि दूध के उत्‍पादन में पिछले दो वर्षों के मुकाबले 2016-18 में 3.6 प्रति‍शत की वृद्धि हुई।
मंत्री महोदय ने कृषि-बागवानी के सभी क्षेत्रों की समीक्षा करते हुए कहा कि सारी जारी निधियों का समुचित रूप से एवं सही समय पर उपयोग किया जाना चाहिए। उन्‍होंने योजनाओं के प्रचार तथा इसे किसानों तक पहुंचाने की आवश्‍यकता पर भी जोर दिया। राज्‍य में मछली उत्‍पादन की समीक्षा करते हुए श्री सिंह ने जोर देते हुए कहा कि सरकारी बाजार को भी बढ़ाए जाने की आवश्‍यकता है।
मंत्री महोदय ने कहा कि केन्‍द्र सरकार का किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्‍य अर्जित किया जाएगा और राज्‍य में समग्र समृद्धि प्राप्‍त की जाएगी। उन्‍होंने कहा कि केन्‍द्र सरकार के प्रयासों का अनुपूरण करते हुए राज्‍य सरकार ने सम्‍पूर्ण राज्‍य के लिए एक समेकित सहकारी विकास परियोजना लागू की है। श्री सिंह ने कहा कि इस परियोजना की लागत लगभग 6,000 करोड़ रुपये है जिसके तहत कृषि, जैविक खेती, बागवानी, पशु पालन, मछली पालन, भंडारण एवं शीत भंडारण, कृषि उत्‍पादों का प्रसंस्‍करण आदि जैसे सभी संभावित क्षेत्र शामिल किए जाने हैं।
असम सरकार के कृषि, बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्‍करण मंत्री श्री अतुल बोरा, अपर मुख्‍य सचिव श्री वी. एस. भास्‍कर; कृषि मंत्रालय के संयुक्‍त सचिव श्री पवन कुमार बार्ताकुर एवं केन्‍द्र तथा राज्‍य सरकार के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी भी आज की बैठक में उपस्थित थे।  

भारत में रिकार्ड रफ्तार से घट रही है गरीबीः मोदी



नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश आज बदलाव के दौर से गुजर रहा है। यह बताते हुए कि भारत आज दुनिया में सबसे अधिक रफ्तार से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था हैप्रधानमंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार भारत में गरीबी रिकॉर्ड रफ्तार से घट रही है। उन्होंने नई दिल्ली में वाई4डी न्यू इंडिया कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए यह बात कही।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल इनेबलर की भूमिका निभा सकती है जबकि युवा न केवल उपलब्ध संभावनाओं का फायदा उठा रहे हैंबल्कि वे खुद के लिए नई संभावनाएं भी सृजित कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं और ताकत की ही तरह भारत बड़ी-बड़ी परिवर्तनकारी पहल कर रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने कुछ उदाहरण दिए जैसे: 3 करोड़ बच्चों का टीकाकरणपिछले 4 साल के दौरान 1.75 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़क का निर्माणप्रत्येक गांव तक बिजली की पहुंचअक्टूबर 2017 से अब तक 85 लाख घरों का विद्युतीकरण, 4.65 करोड़ गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन और पिछले 4 साल के दौरान गरीबों के लिए 1 करोड़ से अधिक मकानों का निर्माण। उन्होंने कहा कि ये बड़े आंकड़े इसलिए संभव हो सके हैं क्योंकि भारत में 800 मिलियन लोग 35 वर्ष से कम आयु के हैं।
प्रधानमंत्री ने देश के उन तमाम नेताओं का उदाहरण दिया जो महज साधारण पृष्ठभूमि से आते हुए आज शीर्ष पदों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि न्यू इंडिया के युवा क्या चाहते हैं।
      प्रधानमंत्री ने कहा कि माहौल में बदलाव का दायरा केवल राजनीतिक तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि शीर्ष प्रशासनिक सेवाओं में अब तमाम युवा ग्रामीण एवं छोटे शहरों की पृष्ठभूमि से आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमा दास और उनकी तरह खेल पदक जीतने वाले अन्य युवा न्यू इंडिया का प्रतिनिधित्व करते हैं।
      प्रधानमंत्री ने कहा कि यंग इंडिया को लगता है ‘कुछ भी संभव है! सब कुल हासिल किया जा सकता है’।
      प्रधानमंत्री ने कहा कि साइलोज को अब समाधान पर जोर के साथ बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब देश की जरूरतों को समझने और लोगों के जीवन को आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारतमाला, सागरमाला, मुद्रा, स्टैंड-अप इंडिया और आयुष्मान भारत जैसी सरकार की योजनाएं और कार्यक्रम किस प्रकार देश की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार नवाचार और अनुसंधान को काफी महत्व दे रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा डिजिटल भुगतान को रफ्तार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में युवाओं की ताकत और उत्साह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि न्यू इंडिया के लिए आज की पीढ़ी के युवाओं को भी वही भूमिका निभानी होगी।     

पर्यटन से सृजित हुआ 14.62 मिलियन रोजगार : अल्फोंस


नई दिल्ली। पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के. जे. अल्फोंस ने पिछले 4 वर्षों के दौरान अकेले पर्यटन क्षेत्र द्वारा देश कुल 14.62 मिलियन रोजगार के अवसर सृजित होने का दावा किया है। नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि पर्यटन क्षेत्र कुशल के साथ-साथ अकुशल क्षेत्र में नौकरी तलाशने वाले लोगों के लिए अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि इससे समाज के सभी वर्गों को रोजगार मिल रहा है।
मंत्री ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय अब भारत के पूर्वोत्तर के राज्यों के प्रति पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रचार गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जैसे मेघालय में एशिया का सबसे बड़ा गुफा वाला नेटवर्क है। ‘भारत में महिलाओं की सुरक्षा’ से संबंधित हालिया मीडिया रिपोर्ट को खारिज करते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि भारत पर्यटकों के लिए सुरक्षित है और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए पर्यटकों की सुरक्षा संबधी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि विदेश में देश को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने अमेरीका, यूरोप, चीन तथा नॉर्डिक देशों में कई ‘अतुल्य भारत रोड शो’ आयोजित किए हैं। मंत्री महोदय ने कहा कि अभी तक थीम पर आधारित 60 सेकेंड के अतुल्य भारत से संबंधित 3 वीडियो जारी किए जा चुके हैं और इन्हें सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में दर्शकों का समर्थन मिल रहा है।   

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...