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गुरुवार, 19 जुलाई 2018

श्री राम वंदना के साथ श्री महावीर मंडल की बैठक


अखाड़ों के नवीनीकरण और सदस्यता पर हुई चर्चा 


रांची। शहर की सामाजिक और धार्मिक संस्था श्री महावीर मंडल रांची के पदाधिकारियों की  बैठक गुरुवार को मंडल अध्यक्ष  जय सिंह यादव की अध्यक्षता में हुई। बैठक का शुभारंभ सदस्यो ने श्री राम वंदना से किया। उपस्थित पदधारियों का अध्यक्ष जय सिंह यादव ने स्वागत किया
बैठक का संचालन सचिव ललित नारायण ओझा ने किया ।
बैठक में सदस्यों के नवीकरण अखाड़ा धारियों की व लाइसेंसधारियों की सदस्यता एवं नए सदस्यों की सदस्यता प्रदान करने के संबंध में  चर्चा की गई ।
इसके लिए तीन लोग सदस्यता प्रभारी बनाये गए । इस हेतु प्रमोद सारस्वत के नेतृत्व में दो अन्य सदस्य प्रमोद जायसवाल एवं सुभाष  कुमार साहू को मनोनीत किया गया । इनके नेतृत्व में सदस्यता नवीकरण संबंधित  सभी कार्यों का निष्पादन किया जाएगा। सदस्यता संबंधित पूर्व कमेटी द्वारा जो निर्णय लिया गया है ,वह निर्णय यथास्थिति बहाल रखा जाएगा । बैठक में
श्री महावीर मंडल का विस्तारीकरण करने का भी निर्णय लिया गया ।
मंडल के बैंक अकाउंट को यथाशीघ्र चालू करने की दिशा में नए पदाधिकारियों की सूचना संबंधित बैंक को देने का निर्णय लिया गया। यह कार्य  मंडल के मंत्री के सानिध्य में सम्पन होगा ।
 धार्मिक  स्थलो की सुरक्षा के संबंध में मुख्यमंत्री ,गृह सचिव एवं पुलिस महानिदेशक से मंडल का एक शिष्टमंडल अध्यक्ष जय सिंह यादव व मंत्री ललित नारायण ओझा के नेतृत्व में जल्द से जल्द मिलेगा।  यह निर्णय लिया गया ।
जल्द ही एक वृहद कार्यकारिणी की बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। 
 जिले के समस्त धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में श्री महावीर मंडल के पदाधिकारी सक्रिय रुप से भाग लेंगे व किसी भी तरह की शिकायत व सहयोग का समाधान  करने में सहयोग करेंगे इसके पूर्व  अध्यक्ष  एवं सचिव ने  गत दिनों संपन्न श्री राम नवमी महोत्सव के सफल आयोजन पर  चर्चा की तथा आधारभूत संरचना को  और मजबूत करने पर बल दिया ।
बैठक में मुख्य रुप से अध्यक्ष जय सिंह यादव, उपाध्यक्ष राजा सेनगुप्ता, मंत्री ललित नारायण ओझा, उपमंत्री सुभाष कुमार साहू , कोषाध्यक्ष प्रमोद सारस्वत, प्रचार मंत्री प्रमोद जयसवाल, अंकेक्षक प्रेम सिंह उपस्थित थे। बैठक में कोषाध्यक्ष प्रमोद सारस्वत ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।

एदारा-ए-शरिया की बैठक, सात एजेंडा पर चर्चा


 * मदरसों के संचालन के लिए दस्तूरसाज कमिटी गठित
* विवाह में यदि डीजे बजा,तो काजी नहीं कराएंगे निकाह

रांची। एदारा-ए- शरिया , झारखंड की एक अहम बैठक गुरुवार को हजरत कुतुबुद्दीन रिसालदार बाबा दरगाह कमेटी हॉल में हुई। बैठक की अध्यक्षता हजरत मौलाना सैयद शाह अलकामा शिबली कादरी ने की । बैठक का संचालन हजरत मौलाना क़ुतुबुद्दीन रिजवी ने किया। बैठक में सात एजेंडों पर चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जल्द ही बकरीद के मद्देनजर उलेमा ए कराम और सभी एदारो की संयुक्त बैठक होगी। निर्णय लिया गया कि इमाम, मोअज़ीन, मदरसा के टीचर की तनख्वाह में बढ़ोतरी के लिए एक कमिटी बनाई जायगी। इससे पूर्व इमाम, खतीब, मदरसा के टीचर के लिए नियुक्ति और बर्खास्त के लिए एक दस्तूर बनाया जायेगा। जिसके लिये  दस्तूरसाज कमिटी बनाई गई। जिसमे मौलाना फारूक, मौलाना दिलदार, मौलाना फैजुल्लाह, मौलाना जसीमुद्दीन खान, मुफ़्ती अब्दुल कुद्दुस, जिसका कन्वेनर मौलाना जसीम उद्दीन खान को  बनाया गया। ये दस्तूर अगस्त माह तक बनाना है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जश्न 100 साला उर्स आला हजरत एक एप बनाया जाय। जिसकी जिम्मेदारी मौलाना फारूक और मौलाना दिलदार को दी गई। मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी इसके कन्वेनर होंगे। मसाजिद के इमाम और खतीब लगातार 8 जुमा  तक जुमा की नमाज़ में मोहब्बत और भाई चारे का पैगाम देंगे। इसके अलावा बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सौ साला प्रोग्राम के लिए एक वर्किंग कमेटी बनाई जाए, जिसकी जिम्मेदारी हजरत मौलाना अल्लामा अलकमा शिबली  कादरी को दी गई। इसी सम्बंध में 1440 हिजरी के सफर महीने में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा और एक सोवनियर निकाला जायगा।  साथ ही यह तय हुआ कि शादी-ब्याह के मजलिस में अगर डीजे साउंड, नाच, गाना हो  तो वहां क़ाज़ी और इमाम निकाह न पढाये। सम्बन्धित कमिटी गलत रस्म को खत्म करने के लिये कड़ा कदम उठाए। आजमीन हज की बेहतर तबीयत और खिदमत के साथ उलेमा ए कराम रुखसत करेंगे। मौलाना अलकमा शिबली की दुआ से बैठक खत्म हुई। धन्यवाद ज्ञापन हाजी रऊफ गद्दी ने की। बैठक में मौलाना अलकमा शिबली क़ादरी, मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी , मौलाना जसीम उद्दीन खान अम्बर,  मौलाना दिलदार हुसैन, मौलाना आफताब ज़िया रिज़वी, मौलाना हामिद रज़ा, मौलाना अयूब राजा, मौलाना अब्दुल कुद्दुस, मौलाना अमानुर रब बरकाती, मौलाना साबिर हुसैन बरकाती, मौलाना मंज़ूर हसन बरकाती, मौलाना गुलाम फ़ारूक़, मौलाना अब्दुल हमीद फैज़ी, कारी अयूब रिज़वी, मौलाना हसन रज़ा, मौलानान मुबारक हुसैन, कारी शमशीर रिज़वी, हाफिज जावेद,  हाफिज अब्दुल क़य्यूम, मौलाना इरशाद, कारी इस्राइल तेगी, कारी मुजीबुर्रहमान, दरगाह कमिटी के अध्यक्ष हाजी अब्दुल रऊफ गद्दी, महासचिव मो फ़ारूक़ समेत कई लोग मौजूद थे।

सीआईएसएफ के बीएमपी, रांची यूनिट में पौधरोपण


महानिदेशक ने जवानों का किया उत्साहवर्धन।

रांची। राजधानी स्थित केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ( सीआईएसएफ) के बीएमपी यूनिट में गुरुवार को महानिदेशक राजेश रंजन (आइपीएस), महानिरीक्षक, (पूर्वी खंड) अनिल कुमार और उप समादेष्टा (रांची एयरपोर्ट)  आशीष रावत के संयुक्त नेतृत्व में पौधरोपण किया गया। इस मौके पर परिसर में सुबह- सुबह कई फलदार और औषधीय पौधे लगाए गए। सीआईएसएफ के डीजी राजेश रंजन ने जवानों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाना हमारा कर्तव्य है। इस अवसर पर डीजी राजेश रंजन ने जवानों के जोश, जज्बे और जुनून की सराहना करते हुए राष्ट्र सेवा में लगे रहने के लिए मार्गदर्शन किया। पौधरोपण कार्यक्रम में काफी संख्या में सीआईएसएफ के अधिकारी और जवान शामिल हुए।

भाजपा नेता धीरज राम की हत्या से शोक की लहर

 सुबोधकांत सहाय ने जताया शोक,अंत्येष्टि मे हुए शामिल।

रांची। डोरंडा महावीर मंडल के उपाध्यक्ष, भाजपा एससी मोर्चा, डोरंडा मंडल के अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता धीरज राम की हत्या 18 जुलाई को तड़के सुबह गोली मारकर कर दी गई थी। हत्यारों ने उन्हें चार गोलियां मारी थीं। गोली लगते ही वे अपनी स्कूटी से नीचे गिर पड़े थे। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अभी तक हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिला है।
 उनकी मौत पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने शोक जताया है। गुरुवार को श्री सहाय स्व.राम के परिजनों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की और उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। हत्याकांड पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राजधानी में अपराधी बेखौफ और बेलगाम हैं। खुलेआम आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर अपराधी रफूचक्कर हो जा रहे हैं और  पुलिस-प्रशासन मूक दर्शक बनी रहती है। उन्होंने कहा कि धीरज के हत्यारे को पुलिस जल्द गिरफ्तार करे,अन्यथा जनता सड़को पर उतरकर आंदोलन के लिए विवश होगी।मौके पर रांची महानगर कांग्रेस के अध्यक्ष संजय पांडेय, कांग्रेस नेता आलोक दुबे, शंभू गुप्ता सहित अन्य मौजूद थे।

बुधवार, 18 जुलाई 2018

वक्‍फ बोर्ड को पूरा कानूनी अधिकार


नई दिल्ली। वक्‍फ कानून 1995 के अनुच्‍छेद 32 के संशोधित प्रावधानों के अनुसार किसी भी राज्‍य में वक्‍फ की संपत्‍ति की देख रेख का पूरा अधिकार उस राज्‍य के वक्‍फ बोर्ड के पास होता है। उसे वक्‍फ की संपत्‍ति के प्रबंधन तथा ऐसी संपत्‍तियों पर अवैध कब्‍जे या अतिक्रमण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की पूरी शक्‍तियां प्राप्‍त होती हैं। इसके साथ ही वक्‍फ कानून के अनुच्‍छेद 54 और 55 के अनुसार राज्‍य वक्‍फ बोर्ड उसकी संपत्‍तियों पर से अवैध कब्‍जा छुड़ाने के लिए कब्‍जा करने वाले के खिलाफ उचित कार्रवाई कर सकता है। इस तरह पूरी ऐसे में इस तरह की गतिविधियों का कोई ब्‍यौरा केन्‍द्र सरकार नहीं रखती। 
अल्पसंख्‍यक मामलों के केन्‍द्रीय मंत्री श्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने लोकसभा में आज एक लिखित उत्‍तर में यह जानकारी दी।
उन्‍होंने कहा कि वक्‍फ कानून 1995 में किए गए संशोघन के जरिए इसमें जो बड़े प्रावधान जोड़े गए हैं उसके तहत राज्‍य और संघ शासित प्रदेशों के वक्‍फ बोर्डों को वक्‍फ संपत्‍तियों पर अवैध कब्‍जों के मामलों से निबटने के लिए व्‍यापक अधिकार दिए गए हैं। इसके साथ ही कब्‍जा करने वालों के लिए भी सख्‍त परिभाषा तय की गयी है। वक्‍फ परिसंपत्‍तियों का निर्धारित अवधि मे वक्‍फ की संपत्‍तियों का समूचा सर्वेक्षण कराने के लिए राज्‍य सरकारों को सर्वे आयुक्‍त नियुक्‍त करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा इसके जरिए राज्‍य वक्‍फ बोर्डो की अनुमति के बगैर किसी भी वक्‍फ संपत्‍ति को हटाने पर सख्‍त जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। इसे गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है। ऐसी संपत्‍तियों में रहने वाले किराएदारों को खाली कराने से जुड़े विवादों की सुनवाई के लिए अधिक अधिकार संपन्‍न तीन सदस्‍यीय न्‍यायाधिकरण की व्‍यवस्‍था भी की गयी है। राज्‍य और संघ शासित वक्‍फ बोर्डों द्वारा कानून की व्‍यवस्‍थाओं के अनुपालन पर केन्‍द्र सरकार समय समय पर नजर रखती है।
केन्‍द्रीय वक्‍फ परिषद् को राज्‍य के वक्‍फ बोर्डों द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार वक्‍फ कानून 1995 के अनुच्‍छेद 72 के तहत राज्‍य के वक्‍फ बोर्डों द्वारा कानूनी रूप से किए गए योगदान से प्राप्‍त सलाना आय वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान कुल 29,78,06,985  रुपये रही। इसमें हरियाणा स्‍टेट वक्‍फ बोर्ड द्वारा किया गया योगदान भी शामिल है। श्री नकवी ने बताया कि उनका मंत्रालय देश में वक्‍फ बोर्डों द्वारा चलाई जाने वाली विभिन्‍न योजनाओं का भी कोई लेखा जोखा नहीं रखता।     

गांधी जयंती पर कुछ कैदियों को मिलेगी समय पूर्व रिहाई की सौगात

नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती पर लंबे समय से सज़ा काट रहे कुछ  कैदियों को विशेष माफी देने और उन्‍हें तीन चरणों में रिहा करने का निर्णय लिया है। निर्णय के मुताबिक पहले चरण में कैदियों को 02 अक्‍टूबर, 2018 यानी महात्‍मा गांधी की जयंती पर रिहा किया जाएगा। दूसरे चरण में कैदियों को 10 अप्रैल, 2019, चम्‍पारण सत्‍याग्रह की वर्षगांठ पर रिहा किया जाएगा। तीसरे चरण में कैदियों को 02 अक्‍टूबर, 2019, महात्‍मा गांधी की जयंती पर रिहा किया जाएगा।
 इस निर्णय के तहत सजा़ माफी के हक़दारों में वह महिला कैदी जिनकी आयु 55 वर्ष या इससे अधिक हो और जिनने अपनी 50 फीसदी वास्‍तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे किन्‍नर कैदी जिनकी आयु 55 वर्ष या इससे अधिक हो और जिनने अपनी 50 फीसदी वास्‍तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे पुरुष कैदी जिसकी आयु 60 वर्ष या इससे अधिक हो और जिसने अपनी 50 फीसदी वास्‍तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे दिव्‍यांग/शारीरिक रूप से 70 प्रतिशत या इससे अधिक अक्षमता वाले कैदी जिसने अपनी 50 फीसदी वास्‍तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे दोष सिद्ध कैदी जिसने अपनी दो तिहाई (66%) वास्‍तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो जैसे कैदी शामिल किए जाएंगे 

ऐसे कैदियों को विशेष माफी नहीं दी जाएगी जो मृत्‍युदंड की सजा काट रहे हैं अथवा जिनकी मृत्‍युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया है। इसके अलावा दहेज मृत्‍यु, बलात्‍कार, मानव तस्‍करी और पोटा, यूएपीए, टाडा, एफआईसीएन, पोस्‍को एक्‍ट, धन शोधन, फेमा, एनडीपीएस, भ्रष्‍टाचार रोकथाम अधिनियम आदि के दोषियों को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है।

गृह मंत्रालय ने सभी पात्र कैदियों के मामलों की पहचान के लिए सभी राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों को परामर्श जारी करेगा। राज्‍य सरकार और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन को इन मामलों की जांच के लिए एक समिति गठित करने की सलाह दी जाएगी। राज्‍य सरकार इस समिति की सिफारिशों को राज्‍यपाल के पास विचार और संविधान की धारा 161 के तहत मंजूरी के लिए भेजेगी। मंजूरी मिलने के बाद कैदियों को 02 अक्‍टूबर 2018, 10 अप्रैल 2019 और 02 अक्‍टूबर 2019 को रिहा किया जाएगा।

विरोध जताने के और भी थे तरीके


कानून के रक्षक ही बने भक्षक, दुष्परिणाम की नहीं थी कोई चिंता

देवेंद्र गौतम

झारखंड की सरज़मीन पर स्वामी अग्निवेश पर हमला किसी तरह भी जायज नहीं ठहराया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि हमलावर सत्ताधारी भाजपा की एक इकाई के लोग हैं। उन्हें कानून हाथ में लेने के पहले सोचना चाहिए था कि उनके कृत्य का सीधा असर मोदी सरकार पर पड़ेगा और चुनावी वर्ष में यह नकारात्मक प्रभाव डालेगा। स्वामी अग्निवेश पत्थलगड़ी आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत करने पाकुड़ आए थे। वे पहाड़िया जनजाति के लिए दामिने-कोह को अलग सोहरिया देश घोषित करने की मांग का समर्थन करने आए थे। यह मांग जोरदार तरीके से उठाया भी गया। स्वामी अग्निवेश पर हमले से अखिल भारतीय आदिम जनजाति विकास समिति अथवा हिल एसेंबली पहाड़िया महासभा के एजेंडे पर कास फर्क नहीं पड़ा। संवैधानिक रूप से न तो पत्थलगड़ी आंदोलन गलत है और न ही स्वायत्तता की मांग। लेकिन सवाल नीयत का है। आदिवासियों की परंपरा की आड़ में नक्सलियों के समानांतर शासन लागू करने की साजिश का है। सरकार ने यदि पेसा कानून लागू करने के साथ ही पंचायती राज की जगह स्वशासन को लागू कर दिया होता तो नक्सलियों को इसकी आड़ लेने का मौका नहीं मिलता। स्वामी अग्निवेश ने बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन वे एक विवादास्पद संत रहे हैं। नक्सलियों के साथ उनके मधुर संबंधों का कई बार संकेत मिल चुका है। निश्चित रूप से वे आदिवासियों के नहीं बल्कि नक्सलियों का मेहमान बनकर आए थे। भाजयुमो का इसी बात को लेकर विरोध हो सकता है।
लेकिन विरोध जताने का एकमात्र रास्ता हिंसक हमला नहीं है। विरोध के कई लोकतांत्रिक तरीके हैं। लेकिन लोकतंत्र भाजपा के डीएनए में नहीं है। इसका प्रमाण अमित शाह और स्वयं नरेंद्र मोदी अपने बयानों और कार्यों के जरिए कई बार दे चुके हैं। लोकतांत्रिक व्यक्ति अपने विरोधियों के भी सकारात्मक गुणों की सराहना करता है। भाजपा के लोग अपने विरोधियों को हिंदू विरोधी, पाकिस्तान समर्थक, सूअर और चोर तक कह बैठते हैं। यह कहीं से भी सभ्य और मर्यादित आचरण नहीं है। इसीलिए उनके कार्यकर्त्ता भी सीधे अराजक कार्रवाई पर उतर जाते हैं। चूंकि सत्ता में बैठे लोगों को भारतीय संविधान और इंडियन पैनल कोड पर अमल करना पड़ता है इसलिए अग्निवेश पर हमला करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करना पड़ा कार्रवाई करनी पड़ी। अगर विपक्ष न हो तो ये लोग सीधे फासीज्म पर तर सकते हैं। भाजपा और संघ से जुड़े लोग अराजकता को बहादुरी मानते हैं और लोकतांत्रिक तौर तरीकों को कायरता। लेकिन अभी तक वे यह नहीं समझ सके हैं कि भारत के लोग धार्मिक तो हैं लेकिन शांति के साथ जीना और शालीनता का व्यवहार करना पसंद करते हैं। हर समय बैल की तरह सिग लड़ाने को तैयार रहना भारत का स्वभाव नहीं है। अराजकता के जरिए माहौल को दूषित, तनावग्रस्त किया जा सकता है लेकिन चुनावी बेड़ा पार नहीं लगाया जा सकता है। राममंदिर मुद्दे को लेकर शुरुआत में हिंदुत्व का उन्माद जागृत हुआ था लेकिन धीरे-धीरे वह शांत होने लगा। उस समय जरा सी हवा देने पर देश के कई शहरों में दंगा भड़क उठता था। अब लगातार नफरत की फसल उगाने की कोशिश कुछ घंटे के उन्माद के बाद निरर्थक हो जा रही है। अगर वामपंथी लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते तो दक्षिणपंथी भी उसे निरर्थक ही मानते हैं। दोनों इस देश की शांति व्यवस्था के लिए खतरा बन चुके हैं। लोकतांत्रिक और समाजवादी शक्तियां जातीयता और क्षेत्रीयता के आधार पर अपनी गोटी लाल करने में बेतरह बिखराव के कगार पर हैं। अभी जो एकता दिखाई दे रही है वह सिर्फ मोदीराज के खात्मे के लिए कायम हुई है। मोदीराज खत्म होने के बाद यह कितनी देर कायम रह सकेगा कहना कठिन है। देशवासियों को चरमपंथी ताकतों के बीच ही अपना भविष्य तलाशने की विवशता है।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...