यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, 31 जुलाई 2018

डीआरएम के समक्ष एक दिवसीय धरना



डंपिंग यार्ड अविलंब हटाने की मांग


रांची। पिस्का नगड़ी स्टेशन तथा हटिया रेलवे स्टेशन विधानसभा के पीछे कोयला डंपिंग यार्ड अविलंब हटाये जाने की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे के नेतृत्व में कांग्रेस जनों ने हटिया डीआरएम के समक्ष एक दिवसीय धरना और प्रदर्शन​ किया गया। पिछले 23 जुलाई को इन्हीं मांगों को लेकर कांग्रेस जनों ने डीआरएम से मिलकर ज्ञापन सौंपा था एवं एक सप्ताह में उचित निर्णय लेने की बात कही थी। लेकिन रेलवे प्रशासन द्वारा आम लोगों के सवालों को अनसुना कर दिए जाने के उपरांत आज से आन्दोलन का आगाज किया गया। पूर्वाहन दस बजे से एक बजे तक धरना दिया गया एवं धरना के उपरांत डीआरएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया एवं एक घंटे तक गेट बन्द कर दिया।
    हाथों में लिखी हुई तख्तियां एवं पिस्का नगड़ी स्टेशन कोयला डंपिंग यार्ड बन्द करो, डीआरएम शहर में प्रदूषण बन्द करो, रेलवे प्रशासन,कोयला डंपिंग यार्ड बन्द करो या फिर कुर्सी छोड़ दो,काला कारोबार बंद करो नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया एवं सभा आयोजित की।
                  सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री आलोक कुमार दूबे ने कहा कि स्थानीय हटिया विधायक एवं सांसद की मिली भगत से रेलवे प्रशासन ने आम लोगों को प्रदूषण में जीने को विवश कर दिया है। उन्होंने कहा कि कोई भी उन दोनों जगहों का निरीक्षण कर ले किसी भी कीमत पर कोयला डंपिंग यार्ड की इजाजत नहीं​ दें सकता है। सुधा प्रोसेसिंग मिल्क प्लांट और आस पास स्कूल में​ पढ़ने वाले बच्चों के बीच अगर कोई त्रासदी हुई तो इसके लिए सीधे तौर पर रेलवे प्रशासन और स्थानीय विधायक जिम्मेदार होंगे। श्री आलोक दूबे ने कहा हद तो ये है कि पिस्का नगड़ी स्टेशन के प्लेटफार्म एक पर लोग ट्रेन में चढ़ते उतरते हैं और प्लेटफार्म दो पर लाखों टन कोयला आता जाता है,शायद देश में दूसरा ऐसा कोई उदाहरण नहीं होगा।
   धरना स्थल पर आयोजित सभा के माध्यम से रेलवे प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है कि अगर कोयला डंपिंग यार्ड बन्द नहीं​ किया गया तो एक सप्ताह के बाद  सात अगस्त से डीआरएम कार्यालय पर अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारंभ कर दिया जाएगा।
       कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुनील सिंह, पूर्णिमा सिंह, अख्तर हुसैन,शिवानी दास, अंजली सिंह, फिरोज रिजवी मुन्ना,मो आजम जुगनू,बबली सिंह,कुमुद रंजन,संगीता टोप्पो, गौरी मल्लिक,रीना नायक,कविता हेमरोम,मनीष कुमार,मिलन थापा,उदय विश्वकर्मा, रामाकांत कुमार,कुमार उपस्थित थे।

राज्य सभा सांसद मनोज झा से मिले समाजसेवी सुधांशु सुमन


* सामाजिक-आर्थिक विकास पर की चर्चा

रांची। झारखंड के जाने माने समाजसेवी सुधांशु सुमन ने सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता, प्रखर नेता और राज्य सभा सांसद मनोज झा से मुलाकात की। वैसे तो यह औपचारिक भेंट थी। इस दौरान श्री सुमन ने उनसे बिहार-झारखंड के वर्तमान आर्थिक-सामाजिक परिस्थितियों पर चर्चा की। उनसे राजनीति के गुर भी सीखे। गौरतलब है कि सुधांशु सुमन राष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा सम्मान यात्रा के प्रणेता हैं। इस अभियान को राष्ट्रव्यापी अभियान बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं। वहीं, झारखंड के चतरा संसदीय क्षेत्र में विशेष रूप से तिरंगा सम्मान यात्रा के माध्यम से समाजसेवा के क्षेत्र में काफी बढ़-चढ़कर काम कर रहे हैं। देश प्रेम के साथ-साथ समाज सेवा को उन्होंने एक मिशन के रूप मे अपना लिया है। इस क्रम में वे लोगों की जनसमस्याओं से भी रू-ब-रू हो रहे हैं। मुलाकात के दौरान राजद सांसद (राज्य सभा) श्री झा ने श्री सुमन से अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने श्री सुमन को राष्ट्र हित, राज्य हित व जनहित में  कार्य करने को प्रेरित किया। श्री सुमन ने राजद प्रवक्ता व सांसद के प्रति आभार व्यक्त किया ।

फिल्म अभिनेता रवि किशन ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात


रांची। हिंदी फिल्म हंच की शूटिंग के दौरान बॉलीवुड के रॉक
स्टार रवि किशन ने झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास जी से प्रोजेक्ट भवन
में मुलाकात की। मुलाकात के दौरान रवि किशन ने मुख्यमंत्री जी से झारखंड
के सभी महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों को विकसित करने का आग्रह किया तथा राज्य
के पर्यटन विभाग को अधिक से अधिक बढ़ावा मिले और मुंबई महानगरी से जितने
भी फिल्में आए झारखंड के हमारे प्रतिभावन कलाकारों को काम मिले। रांची के
पतरातू में जो फिल्म सिटी बनने वाली है, उसका निर्माण जल्द से जल्द हो
ताकि झारखंड में और भी बड़ी से बड़ी फिल्में आएं और राज्य के खूबसूरत
लोकेशनों में शूटिंग हो। अभिनेता रवि किशन ने पतरातू  घाटी की तुलना
स्विट्ज़रलैंड से की है। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री जी से यह भी कहा कि
मेरी जो भी शूट फिल्में होगी, चाहे मेरे होम प्रोडक्शन की हो या और कोई
भी  सभी की शूटिंग झारखंड में ही होगी। उक्त आशय की
जानकारी फिल्म पीआरओ संजय पुजारी ने दी है।

सोमवार, 30 जुलाई 2018

500 अरब डालर पहुंचेगा लाजिस्टिक्स उद्योग में निवेश

केन्‍द्रीय वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने आज कहा कि वर्ष 2025 तक लॉजिस्टिक्‍स के क्षेत्र में सालाना निवेश 500 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। श्री प्रभु ने कहा कि इससे देश में लाखों की संख्‍या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत की व्‍यापारिक गति‍विधियों में घरेलू और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर आने वाली बाधाएं दूर होंगी।
कई विदेशी कंपनियां आज के दौर में भारत को विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के एक प्रमुख केन्‍द्र के रूप में देख रही हैं।
इसके अलावा, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया जैसी पहलों ने भारतीय उपमहाद्वीप में उपलब्‍ध
प्रचुर संसाधनों, कम लागत वाले माहौल और कुशल श्रमिकों वाली व्‍यवस्‍था को और बढावा दिया है।
हाल के वर्षों में भारत सरकार ने प्रभावी लॉजिस्टिक्स सेवाओं के जरिए व्‍यापार को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें सीमा तथा सीमा पार क्षेत्र में व्‍यापारिक गति‍विधियों के प्रमाणिक दस्‍तावेज तैयार करना, समर्पित माल वाहन गलियारे बनाना, बंदरगाहों तथा अन्‍य आधारभूत संरचनाओं में निवेश और व्‍यापार की समस्‍त गतिविधियों को परस्‍पर जोड़ने के काम शामिल हैं। इन गतिविधियों से देश के लॉजिस्टिक्स सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन सुधरेगा। लॉजिस्टिक्‍स सेवाओं के सक्षम और प्रभावी प्रबंधन से विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र पर सकारात्‍मक असर दिखेगा।

श्री प्रभु ने कहा कि लॉजिस्टिक्‍स सेवाओं के समग्र विकास के लिए वाणिज्‍य विभाग में अलग से लॉजिस्टिक्‍स इकाई गठित की गई है। वेयर हाउसिंग, प्रशीतन गृहों तथा मल्‍टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों को आधारभूत संरचना की श्रेणी में रखा गया है। उन्‍होंने कहा कि  उनका मंत्रालय एक राष्‍ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति तैयार करने काम काम कर रहा है। इसके साथ ही मल्‍टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों के लिए भी जल्‍द ही एक नीति की घोषणा की जाएगी। श्री प्रभु ने कहा कि वर्तमान में लॉजिस्टिक्स की रफ्तार और लागत भारतीय उत्‍पादों की उस बाजार हिस्‍सेदारी में सेंध लगा रही है, जिसके वे हकदार हैं। उन्‍होंने कहा कि इस समस्‍या से निपटने के लिए वाणिज्‍य विभाग ने व्‍यापार और लॉजिस्टिक्स सुगमता केन्‍द्र (सीटीएफएल) को निम्‍नलिखित उद्देश्‍यों की पूर्ति के लिए एक योजना तैयार करने का अधिकार सौंपा है।
·         मौजूदा वैश्विक माहौल में आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन के क्षेत्र में कंपनियों के समक्ष मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर उद्योगों, शिक्षाविदों, सरकारों तथा संगठनों के प्रयासों को एकसाथ जोड़ना है। 
·         व्‍यापार सुगमता और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन क क्षेत्र में विशेषज्ञों और पेशेवरों का कैडर तैयार करने के लिए सही प्रशिक्षण के जरिए  मानव संसाधन का कौशल विकास करना।
·         लॉजिस्टिक्स और व्‍यापार सुगमता क्षेत्र में कार्यरत सरकारी अधिकारियों के लिए आवश्‍यक प्रशिक्षण की व्‍यवस्‍था करना।
मंत्रालय ने उपरोक्‍त कार्यों के लिए सीटीएफएल को शुरूआती स्‍तर पर आधारभूत संरचना विकास के लिए एक बार में 80 लाख रुपये की मदद देने का फैसला किया है। अगले चार वर्षों के दौरान इस केन्‍द्र को विभिन्‍न चरणों में कुल 339.90 लाख रुपये दिए जाएंगे। सीआईएफएल व्‍यापार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों की निगरानी करेगा और इस बारे में तैयार रिपोर्ट के आधार पर लॉजिस्टिक्स सेवाओंमें सुधार के सुझाव देगा।
श्री प्रभु ने इस अवसर पर लॉजिस्टिक्स विभाग के लिए अलग से एक प्रतीक चिन्‍ह भी जारी किया, जो हंसों के एक जोड़े का ग्राफिक चित्र है। हंस हवा, पानी और जमीन सभी जगह बड़ी सहजता के साथ लम्‍बी दूरी तक यात्रा कर लेते हैं। उन्‍हें टीम वर्क, ऊर्जा और विभिन्‍न साझेदारों के बीच समन्‍वय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जोकि लॉजिस्टिक्स सेवाओं के लिए जरूरी है।  

यात्री रेलों में डिस्प्ले बोर्ड और उदघोषणा-मशीनों की स्थापना


नई दिल्ली। ईएमयू और हमसफर, तेजस जैसी प्रतिष्ठित ट्रेनों में डिस्प्ले बोर्ड और जन उदघोषणा प्रणाली की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अनुभूति कोच में एलसीडी स्क्रीन पर जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली की व्यवस्था की गई है। कोच में एलसीडी स्क्रीन  छत से टंगे रहेंगे। एलसीडी स्क्रीन पर आने वाले स्टेशनों, गंतव्य स्टेशन, ट्रेन की अद्यतन स्थिति तथा सुरक्षा संबंधी जानकारियां उपलब्ध होंगी।
वर्तमान में राजधानी और शताब्दी ट्रेनों में अगले स्टेशन की सूचना दी जाती है। इस प्रणाली का उपयोग वाद्य यंत्र आधारित संगीत तथा ताजा समाचारों के लिए भी किया जा रहा है।
भारतीय रेल के नए कोचों में दृष्टि बाधित व्यक्तियों के लिए एकीकृत ब्रेल संकेत की व्यवस्था की गई है। हाल ही में आरडीएसओ (अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन), लखनऊ ने एसएचबी कोचों में जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली का परीक्षण किया है।
उक्त जानकारी केंद्रीय रेल राज्य मंत्री श्री राजेन गोहेन ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।   
*

महिला श्रमिकों की भागीदारी दर में इजाफा


नई दिल्ली। रोजगार और बेरोजगारी का अनुमान सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा हाल में किए गए श्रम बल सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार 2009-10 तथा 2011-12 के दौरान अनुमानित महिला कर्मी जनसंख्या अनुपात (%क्रमशः 26.6% और 23.7% था।
वर्ष 2012-13, 2013-14 और 2015-16 में श्रम ब्यूरो द्वारा किए गए वार्षिक रोजगार-बेरोजगारी के अंतिम तीन दौर के सर्वेक्षण के अऩुसार 15 वर्ष और उससे ऊपर के आयु की महिलाओं के लिए श्रमिक जनसंख्या अनुपात क्रमशः 25.0%, 29.6% और 25.8% रहा। केन्द्रशासित प्रदेशों का विस्तृत ब्यौरा नीचे दिया गया है-
सरकार ने महिला रोजगार बढ़ाने सहित रोजगार में वृद्धि करने के बारे में अनेक कदम उठाए हैं। इनमें निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करना, निवेश वाली विभिन्न परियोजनाओं में तेजी लाना, सूक्ष्म लघु और मझौले उद्यम मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे प्रधानमंत्री के रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसी योजनाओं, ग्रामीण विकास विभाग द्वारा चलाई जा रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) तथा पंडित दीनदयाल ग्रामीण कौशल्या योजना (डीडीयू-जीकेवाई) और आवास तथा शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय की राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (डीएवाई-एनयूएलएम) में सार्वजनिक व्यय में वृद्धि शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के अंतर्गत ऋण लेने वाली महिलाओं को 0.25% की विशेष छूट दी जाती है। मुद्रा योजना के तहत 75% ऋण (31 मार्च, 2018) तक 12.27 करोड़ स्वीकृत ऋण में से 9.02 करोड़ ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए हैं।
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने महिला श्रमिक भागीदारी दर बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाकर इस विषय को लक्षित किया है। इन कदमों में मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 शामिल है। इसमें भुगतान मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करने का प्रावधान है और 50 और उससे अधिक कर्मचारियों के प्रतिष्ठानों में अनिवार्य क्रेच सुविधा का प्रावधान है। पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ रात्रि पाली में महिला कर्मियों को काम की अनुमति देने के लिए फैक्ट्री अधिनियम, 1948 के अंतर्गत राज्यों को परामर्श देने का विषय है। समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 में समान कार्य के लिए और समान स्वभाव के कार्य के लिए भेदभाव किए बिना पुरूष और महिला श्रमिक दोनों के लिए समान पारिश्रमिक के भुगतान का प्रावधान है। न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अंतर्गत सरकार द्वारा तय किए गए वेतन पुरूष और महिला कर्मियों के लिए समान रूप से लागू हैं और इसमें किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता।
तीसरे, चौथे और पांचवें रोजगार-बेरोजगारी सर्वेक्षण के अंतर्गत सामान्य सिद्धांत और सहायक स्थिति के अनुसार 15 वर्ष और उससे ऊपर की महिलाओं के लिए राज्यवार श्रमिक जनसंख्या अनुपात-

क्रम संख्या
राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश/अखिल भारतीय
2012-13
2013-14
2015-16
1
आंध्र प्रदेश
44.9
49.6
47.0
2
अरूणाचल प्रदेश
45.7
56.1
51.6
3
असम
27.0
33.9
24.5
4
बिहार
10.4
16.7
17.8
5
छत्तीसगढ़
44.8
51.0
54.2
6
दिल्ली
11.5
10.0
11.7
7
गोवा
20.3
26.0
21.2
8
गुजरात
16.4
24.5
19.9
9
हरियाणा
15.4
16.5
18.7
10
हिमाचल प्रदेश
56.6
59.4
15.1
11
जम्मू और कश्मीर
12.3
16.4
7.9
12
झारखंड
28.4
45.7
48.2
13
कर्नाटक
32.2
34.5
33.3
14
केरल
20.3
27.8
23.7
15
मध्य प्रदेश
32.1
34.0
17.2
16
महाराष्ट्र
32.8
34.6
32.8
17
मणिपुर
36.9
50.8
46.4
18
मेघालय
47.6
58.9
49.9
19
मिजोरम
51.7
61.3
59.0
20
नगालैंड
33.8
34.7
55.9
21
ओडिशा
25.3
28.5
23.7
22
पंजाब
11.8
9.4
9.4
23
राजस्थान
27.4
33.9
31.9
24
सिक्किम
39.5
50.7
48.2
25
तमिलनाडु
35.0
39.6
39.3
26
तेलंगाना
0.0
52.1
42.7
27
त्रिपुरा
32.1
31.4
45.3
28
उत्तराखंड
20.6
26.4
20.5
29
उत्तर प्रदेश
11.4
14.0
12.0
30
पश्चिम बंगाल
20.6
17.2
20.5
31
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
18.5
32.5
25.1
32
चंडीगढ़
12.2
12.3
8.1
33
दादरा और नगर हवेली
16.5
10.3
16.1
34
दमन और दीव
8.3
1.9
15.2
35
लक्षद्वीप
8.9
19.2
15.5
36
पुद्दुचेरी
20.9
25.7
28.1

अखिल भारतीय
25.0
29.6
25.8

यह जानकारी लोकसभा में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

रांची मेरी पसंदीदा जगह, किसी मायने में मारीशस से कम नहीं : रविकिशन



* ये वादियां, ये फजा़यें लुभा रही है हमें..........

रांची शुरू से ही मेरी पसंदीदा जगह है। यहां का मौसम काफी सुहाना और लुभावना है। रांची किसी मायने में मारीशस से कम नहीं है। यहां प्राकृतिक सौंन्दर्य  है।  यह बातें भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार और झारखंड फिल्म नीति के सदस्य बालीवुड स्टार रविकिशन ने कही। वे ग्रीब्स प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बन रही हिन्दी फिल्म हंच की शूटिंग के लिए रांची पहुंचे हैं। रविकिशन ने कहा कि झारखंड में फिल्म निर्माण की काफी संभावनाएं हैं। यहां की आवोहवा काफी मनमोहक है। फिल्म निर्माण के लिए कई रमणिक और उपयुक्त स्थल हैं। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि झारखंड में सरकार जमीन उपलब्ध कराए तो एक सुसज्जित स्टूडियो बनाएंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड फिल्म नीति के सदस्य होने के नाते उनकी कोशिश होगी कि यहां अधिक से अधिक फिल्में लेकर आएं। उनका प्रयास होगा कि यहां हिन्दी, मगही, भोजपुरी के अलावा तेलगु, मलयालम भाषाओं की फिल्मों की शूटिंग भी झारखंड में हो। इस अवसर पर हंच फिल्म की पूरी टीम भी थी।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...