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शुक्रवार, 30 नवंबर 2018

मुख्यमंत्री के उद्गार के मुख्य बिंदु



मुख्यमंत्री ने सफल आयोजन के लिए पूरी टीम को बधाई दी।

राज्य के किसान को भी बहुत-बहुत बधाई दी जिन की सहभागिता से एग्रीकल्चर ग्लोबल समिट सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

मुख्यमंत्री ने मीडिया की सभी प्रतिनिधियों को भी बधाई दी जो कि कार्यक्रम के कवरेज में निरंतर संलग्न हैं।

प्रधानमंत्री का 2022 में किसानों की आय को दोगुना करने का उद्देश्य है।उसको ध्यान में रखते हुए झारखंड के मेहनतकश किसान और सरकार मिलकर काम कर रहे हैं।

2013-14 में जहां कृषि विकास दर -4.5 थी वहीं 4 वर्ष में 14.29% हो गई है।

झारखंड के मेहनतकश किसानों की बदौलत यह विकास दर हम हासिल कर पाएं हैं। और दुनिया को यह बताने का काम किया है कि झारखंड के किसानों में इतनी क्षमता है कि वह इस लक्ष्य को प्राप्त कर पाए हैं। इस क्षमता को हमारी सरकार की नीतियों, शासन के सहयोग से संबल मिला है। इसके लिए कृषि विभाग को बहुत-बहुत धन्यवाद।

यह क्षमता जो हमारे राज्य के किसानों के पास है इस क्षमता का उपयोग हम 2022 में किसानों की आय को दोगुना करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को पूर्ण करने के लिए करेंगे।

किसानों के उत्साह से सरकार भी उत्साहित है। उसके लिए हमने तय किया है कि 2022 तक दोगुना नहीं बल्कि चौगुना करने वाला देश का पहला राज्य झारखंड बनेगा।

इस को ध्यान में रखकर ही ग्लोबल एग्रीकल्चर समिट का आयोजन किया गया ह। जहां देश दुनिया में क्या नवीनतम तकनीक अपनाई जा रही हैं, झारखंड के एग्रीकल्चर एवं फूड सेक्टर में उन्हें अंगीकृत किया जा सके यही इस कार्यक्रम का उद्देश्य था। यह कार्यक्रम एक जरिया था ताकि हमारे राज्य भर के किसान आ कर देखें और समझें और अनुभव प्राप्त करें। कृषि के क्षेत्र में अपने अनुभवों का उपयोग कर कम लागत में कृषि की उत्पादकता कैसे बढ़े यह ज्ञान अर्जित करें।

इस दृष्टिकोण से ग्लोबल समिट का आयोजन किया गया। इस अवसर पर किसानों की उत्पादकता को बढ़ाने, उसके बाजारीकरण की व्यवस्था, प्रसंस्करण की व्यवस्था को ध्यान में रखकर काम किया गया है।

कल 50 फूड प्रसंस्करण संयंत्रों का आॅनलाइन शिलान्यास किया गया। ऑनलाइन मार्केटिंग की व्यवस्था में विभिन्न देशों के लोगों के साथ भी हमारी बातचीत हुई है।

चीन के कृषि मंत्रालय से बात हुई और बहुत जल्द झारखंड सरकार और चीन में एमओयू होने जा रहा है। हमारे यहां भिंडी उत्पादन होता है, झारखंड की भिंडी चीन में जाएगी और एमओयू करने के बाद इस दिशा में हम लोग आगे बढ़ेंगे।

मोरक्को के राजदूत द्वारा यह बताया गया कि उनके देश की आबादी और झारखंड की आबादी बराबर है। दोनों जगह कृषि में कई सफल प्रयोग हैं। और आपसी सहमति बनाकर के एक दूसरे से अच्छे कृषि कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह तकनीक का आदान-प्रदान और देशों के साथ भी करेंगे और मोरक्को का ग्रीन प्लान जो कि बहुत सफल है उसका लाभ झारखंड के किसान ले सकते हैं।

कम पानी में कैसे बेहतर तकनीक का उपयोग हम कर सकते हैं यह मोरक्को के साथ टाईअप करेंगे

इसराइल के साथ सेंटर फॉर एक्सीलेंस को भी हम लोग एमओयू करके भारत सरकार को दो-तीन दिन के अंदर फाइनल करेंगे ताकि प्रशिक्षण यहीं पर हमारे झारखंड के किसानों को मिले यह इजरायल सरकार के प्रतिनिधि से बात हुई है।

पतंजलि के बाबा रामदेव ने भी झारखंड के प्रति प्रेम को प्रदर्शित किया है और उन्होंने आज सभी के समक्ष यह घोषणा की है कि जो भी ऑर्गेनिक उत्पादन होगा- धान, चावल आटा, सब्जी को पतंजलि द्वारा तय किया जाएगा।

सबसे बड़ी बात जो कि प्रधानमंत्री ने मीठी क्रांति का जो आह्वान किया है उसको झारखंड जैसे प्रदेश में भली भांति लागू किया जा सकता है। इस दिशा में भी बाबा रामदेव ने घोषणा की है।

राज्य के जितने किसान मधु उत्पादन में संलग्न है, उसके लिए प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना यहां पर की जाएगी। सारी मधु का क्रय पतंजलि द्वारा किया जाएगा।

स्वाबलंबी तभी बनेगी बनेंगे जब हम अपने देश में उत्पादन को बढ़ावा देंगे।

देश में जो क्षमता है उस क्षमता को विकसित करने का काम कर रहे हैं।

बढ़ती जनसंख्या के लिए अतिरिक्त खाद्यान्न की जरूरतः डा. चाकिब जिनेन

रांची। वर्ल्ड बैंक सेशन में डाॅ॰ चाकिब जिनेन, लीड एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स वर्ल्ड बैंक ने कहा कि किसानों के द्वारा ही खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित होती है। किसानों के बिना भोजन की कल्पना नहीं की जा सकती। हम सभी को कृषकों की आवश्यकता है और हम सभी आपके सहयोग के लिए तत्पर हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कृषि के क्षेत्र में कई गंभीर मुद्दे हैं जैसे डेमोग्राफी, जलवायु परिवर्तन, कांपलेक्स मूल्यवर्धन श्रंखला, खाद्य सुरक्षा मानक इत्यादि।

डाॅ॰ चाकिब जिनेन ने कहा कि 2030 तक खाद्यान्नों की मांग में 20% बढ़ोत्तरी होगी और निरंतर बढ़ती जनसंख्या के भरण पोषण के लिए अतिरिक्त खाद्यान्न की आवश्यकता होगी। खाद्य सुरक्षा इंडेक्स कई संघटकों से मिलकर बना है, जैसे कि भोजन की उपलब्धता, भोजन तक पहुंच। भारत हाई रिस्क फैक्टर है हमें अधिक खाद्यान्न के उत्पादन की जरूरत है। जबकि निरंतर बढ़ती जनसंख्या के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी दर्ज की जा रही है। 70 के दशक के मुकाबले अभी प्रति व्यक्ति भूमि की उपलब्धता 0.25 हेक्टेयर है।

डाॅ॰ चाकिब जिनेन कहा कि जनसंख्या के बढ़ने के कारण प्रति व्यक्ति बोए गए क्षेत्र में भी कमी आई है। भूमि उपलब्धता कम है और जनसंख्या अधिकाधिक बढ़ रही है।

डाॅ॰ चाकिब जिनेन ने कहा कि जल की सीमित उपलब्धता, जलवायवीय उतार-चढ़ाव के कारण जब तक नई तकनीकों और नए उपागमों का समावेशन नहीं होता तब तक कृषि के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन की अपेक्षा नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि कृषि के साथ गरीबी, स्वास्थ्य पोषण जैसी चीजें भी जुड़ी हुई हैं।

डाॅ॰ चाकिब जिनेन ने कहा कि कृषि क्षेत्र में अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता है और सरकारी क्षेत्र से मिलने वाली सहायता इसके लिए पर्याप्त नहीं हैं। कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र को आकर्षित करने की जरूरत है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के द्वारा इस गैप को भरा जा सकता है।

डाॅ॰ चाकिब जिनेन ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर को कृषि के क्षेत्र में आकर्षित करने की जरूरत है। भारत फल एवं सब्जी के उत्पादन में विश्व में प्रथम, धान, मत्स्य और गेहूं के उत्पादन में पांचवा और अंडा उत्पादन में तीसरा स्थान है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र भूमि और जल के उपयोग का एक बड़ा क्षेत्र है। यदि कृषि से उत्पादकता अधिक नहीं होती है तो जल और भूमि का क्षरण इससे होता है। द्वितीय हरित क्रांति समय की मांग है। उन्होंने कहा कि मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी भारत में और झारखंड में बहुत कुछ किए जाने की संभावना है। मूल्य संवर्धन जहां मोरक्को में 35%, चीन में 30% और संयुक्त राज्य अमेरिका में 60% है, वहीं भारत में मात्र 10% मूल्य संवर्धन किया जाता है।

डाॅ॰ चाकिब जिनेन ने कहा कि  इसका मूल कारण बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज में कमी है। उन्होंने कहा कि झारखंड में कृषि के क्षेत्र में अत्यधिक संभाव्यता है। इस क्षेत्र में बहुत कुछ किया जाना है। कृषि के क्षेत्र में विकास के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय से वांछित परिणाम दिखाई देंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग को एक साथ आगे बढ़कर इस दिशा में काम करने की जरूरत है। सटीक नीति निर्णय, बाजार की उपलब्धता, कम लागत जैसे उपायों से कृषि के क्षेत्र में सुधार किया जा सकता है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार के अवसर तलाशना, उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ावा देना मूल घटक साबित हो सकते हैं।

महाराष्ट्र के श्री योगेश थोराट, एमडी, एम ए एच ए,- एफ पी सी, महाराष्ट्र ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों की इच्छा शक्ति एवं जमीनी स्तर पर पदाधिकारियों की इच्छा शक्ति से कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। कॉरपोरेट सेक्टर से भी सहयोग एवं संपर्क की जरूरत है, जिससे कि ऐसे प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जा सकें जो कि किसानों के उत्पादन का खेत एवं खलिहान से ही प्रोक्योरमेंट कर ले। प्रोक्योरमेंट पार्टनर के साथ जुड़ने से बहुआयामी बदलाव दिखाई देंगे।

उन्होंने बताया कि लागत को कम करने के लिए कृषि के क्षेत्र में आरएंडी की जरूरत है। उन्होंने एक कृषक के रूप में अपने अनुभवों को साझा किया और बताया कि किस तरह से गांव में जाकर जमीनी स्थल पर मिट्टी के परीक्षण के द्वारा यह पता लगाया कि किस फसल के लिए यह मिट्टी उपयोगी है और इसके प्रसंस्करण के द्वारा किस तरह के प्रसंस्करण से क्या परिणाम प्राप्त होंगे और फसल का भविष्य में क्या अनुप्रयोग संभव है। उन्होंने बताया कि गांव-गांव में हमें मूल्यवर्धन की सुविधा के उपाय करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि किसानों को एक होकर फार्मर एफपीओ बनाना होगा। कंपनी एक्ट के तहत यदि इस प्रकार का एफपीओ का मूल कंपनी एक्ट के तहत बने तो बेहतर होगा, जिससे कि दिन प्रतिदिन के व्यापार में सरकारी हस्तक्षेप कम से कम हो। इसके लिए वर्ल्ड बैंक ने भी काफी फंडिंग उपलब्ध कराई है। किसानों को आगे आकर सहकारिता और कंपनी बनाकर कृषि के क्षेत्र में विकास करने की जरूरत है। कमोडिटी स्पेसिफिक बीएम बनाएं। जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों को इसके लिए मॉडल बनना होगा और इससे सहकारिता बनानी होगी और कमोडिटी स्पेसिफिक होकर स्थल को चिन्हित करना होगा। इसके लिए झारखंड में सरकार से आवश्यक सहयोग प्राप्त हो रहा है। किसानों को गांव लेवल पर मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए आधारिक संरचना सरकार बना सकती है। गांव स्तर पर छोटे छोटे बाजारों को विकसित करके ई मार्केट पर लाएं तो अधिक मुनाफा होगा। फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी को सरकार द्वारा  प्रोक्योरमेंट करके सहायता प्रदान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मोरक्को, इजरायल और ट्यूनीशिया जैसे देशों ने कृषि के क्षेत्र से शुरुआत कर के देश में विकास को गति दी है। प्राथमिक क्षेत्र के विकास से द्वितीय और तृतीयक क्षेत्र के विकास को प्राप्त किया है।

श्री मोहम्मद मलिकी, एंबेस्डर, एंबेसी ऑफ मोरक्को ने ग्रीन मोरक्को प्लान के विषय में संक्षेप में जानकारी दी। ग्रीन मोरक्को प्लान वर्ष 2010 से 2020 तक के लिए मोरक्को में कृषि क्षेत्र में लागू किया गया। मोरक्को और झारखंड की जलवायवीय दशायें और जनसंख्या अनुपात समकक्ष होने के कारण इस प्लान को यहां पर प्रक्षेपित किए जाने की बात उन्होंने कही।

 जैमल बुजदारिया, डिप्टी चीफ ऑफ मिशन एंबेसी ऑफ ट्यूनीशिया ने बताया कि भूमध्यसागरीय जलवायु में अवस्थित ट्यूनीशिया अफ्रीकी महाद्वीप का भाग है और इसके चारों तरफ वृहद यूरोपीय बाजार उपलब्ध है, जिस वजह से ट्यूनीशिया की कृषि उत्पादों का आसानी से निर्यात हो जाता है। उन्होंने बताया कि विश्व बैंक के सहयोग की विषय वस्तु के बारे में बताया और विभिन्न क्षेत्रों में विश्व बैंक के सहयोग से चलाए जा रहे प्रोजेक्ट और फंडिंग के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि झारखंड में कृषि के क्षेत्र में अनेक चुनौतियां एवं संभावनाएं विद्यमान हैं। तकनीक के समावेशन से कृषि के क्षेत्र में विकास हो सकता है और विश्व बैंक के अनेक प्रोजेक्ट हैं जो कि किसानों के लिए फायदेमंद साबित होंगे इसके लिए सबसे पहले सोच को बढ़ाएं।

दूध और मछली उत्पादन में झारखंड अग्रणीः रणधीर सिंह




रांची।  ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड सम्मिट 2018 के आज फीड एंड फूडर सेशन में कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने कहा कि सरकार राज्य में डेयरी के क्षेत्र में लगातार तेजी से काम कर रही है झारखंड के किसान पशुपालक के रूप में जुड़े हुए हैं उन कि सानों को निश्चित रूप दूध उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानक में लाने के लिए तेजी से काम शुरू किया गया है ।उन्होंने कहा कि किसानों के द्वारा उत्पादित दुग्ध को मार्केट के लिए मिल्क फेडरेशन का गठन किया है।सरकार ने पिछले 2 साल में 32000 बीपीएल महिलाओं को दो दो गाय देने का काम किया है उनके द्वारा  दूध को प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है।दुग्ध उत्पादक कृषकों को एक नया बाजार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि गांवों में बल्क मिल्क कूलर लगाया जा रहा है ।
श्री सिंह ने कहा कि देसी नस्ल की गाय में सुधार करते हुए दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार की प्राथमिकता है झारखंड में ज्यादा से ज्यादा दूध का उत्पादन देसी नस्ल की गाये से हो । उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि किसान स्वयं मछली पालन कर इसके मालिक बने। सरकार झारखंड के किसानों को अपने पैरों पर खड़ा करना चाहती है
कांके विधायक डॉ जीतू चरण राम ने कहा कि संतुलित आहार मनुष्य के साथ साथ पशुओं की भी लिए भी काफी जरूरी है आज स्थिति यह है कि ना हम खुद संतुलित आहार खाते हैं और ना ही जानवर को खिलाते हैं अच्छे संतुलित आहार से ही अच्छे दुग्ध उत्पादन की उम्मीद की जा सकती है उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार मछली पालन के क्षेत्र में भी काम कर रही है उन्होंने कहा कि   कृषि उद्योग के रूप में लें और इसे विकसित करें
कार्यक्रम में पषु आहार के द्वोत्र में जानेमाने विषेषज्ञ एके वर्मा ने बताया की झारखंड में 56 प्रतिषत पशु आहार की समस्या है उन्होंने पशु आहार के बारे में विस्तार से चर्चा की उन्होंने कहा कि झारखंड में प्रति पशु चारा उत्पादन कम है
आईसीएआर के डॉक्टर गिरिधर ने पशु आहार के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पशुओं के आहार को और अधिक पौष्टिक कैसे बनाया जाए इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने पशु के लिए उन्नत किस्म के चारा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने हरा चारा को पशु के लिए बेहतर बताया
आईसीएआर के फॉर्मर डायरेक्टर डॉ पीके घोष ने चारा के महत्व के बारे में प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि पशु के द्वारा कम दूध का उत्पादन में 50 प्रतिषत चारा का दोष्ष है अगर हम अच्छा चारा नहीं खिलाएंगे तो हम ज्यादा दूध की भी उम्मीद नहीं कर सकते। हमारे देश में चारा की कमी है।  उन्होंने चारा उगाने की तकनीकों के बारे में जानकारी दी।
 डॉ पवन कुमार कंसलटेंट एनिमल फीड प्रोग्राम यू एसएस ईसी ने पषु से दूध निकालने की विधि के बारे में बताया।
 झारखंड के पाकुड़ जिले से आए अभिनव किशोर ने बताया कि मैं पेशे से इंजीनियर हूं लेकिन घर से दूर रहने के कारण मैंने डेयरी उद्योग को चुना। 2009 में मैंने इंजीनियरिंग छोड़ने के बाद दो गायों से इसकी शुरुआत की आज मेरे पास 50 गायें हैं, जिससे प्रतिदिन 450 लीटर दूध का उत्पादन होता है। उन्होंने पशुओं के चारे के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि पशु का शारीरिक विकास एवं उत्पादन क्षमता संतुलित आहार पर ही निर्भर करता है।  मक्के का उत्पादन झारखंड में अधिक होता है साल में हम तीन फसल तैयार कर अधिक से अधिक मात्रा में हरा चारा एकत्रित कर सकते हैं जो पशुओं के लिए काफी लाभकारी है उन्होंने बताया कि किसान अगर मिल जुल कर काम करें जो अपनी आय को दुगना कर सकते हैं
एसके महनता ने दूध उत्पादन के बारे में जानकारी दी उन्होंने बताया कि झारखंड का पूरे देश में मात्र 1.3 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन का हिस्सा है । उन्होंने कहा कि झारखंड में देसी गाय के दूध के उत्पादन को बढ़ावा देना होगा जब तक गायों के रिसोर्स पर खर्च नहीं करेंगे तब तक हम अच्छे आउटपुट की उम्मीद नहीं कर सकते हैं । उन्होंने कहा कि सभी बात चारा पर निर्भर करती है जानवर को स्वस्थ रखना है तो उसे हरा चारा देना ही होगा
डेयरी, मुर्गी पालन एवं मछली पालन (पोषण के विरूद्ध संघर्ष) सेषन में डॉ एके श्री वास्तव ने कहा की झारखंड में पोषण की कमी को पूरा कर सकता तो वह डेयरी है। झारखंड में किसानों की उन्नति हो आय दुगनी हो तो डयेरी को महत्व देना होगा। डेयरी सेक्टर की इस राज्य में जरूरत ह।ै उन्होंने कहा कि झारखंड में पूरे देश का 3.4 प्रतिषत कैटल और बफेलो है हम देश में दुग्ध उत्पादन में 17 वे नंबर पर हैं। उन्होंने झारखंड में मुर्रा जैसे भैंसे आदि नस्ल की आवश्यकता जताई । उन्होंने पषुओं में होने वाले थनैला बीमारी एवं इसके उपचार के बारे में भी जानकारी दी । उन्होंने बताया कि ए2 मिल्क जितना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है उतना ही ए1 मिल्क भी लाभदायक है।  उन्होंने झारखंड में किसानों को डेयरी के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया
मुंबई आईसीएआर के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ एल मूर्ति ने मछली पालन के क्षेत्र के बारे में जानकारी दी उन्होंने कहा कि झारखंड में मछली पालन की काफी संभावनाएं हैं और झारखंड के किसान क्षेत्र में काफी अच्छा कर रहे हैं और सरकार का लगातार इस क्षेत्र में किया जाने वाला प्रयास सराहनीय है उन्होंने मछली पालन और अधिक कैसे विकसित किया जाए इस बारे में विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला।

Jharkhand to be the first state where farmers income to increase four fold by 2022: Raghubar Das

Lady's finger from Jharkhand to be sold in China
MoU with Israel to set up center of Excellence in Jharkhand
Patanjali to buy all organic produce from Jharkhand

Ranchi,: Buoyed by response of the foreign delegates and the participating nations coupled with the enthusiasm shown by the more than 10,000 farmers who attended the two day Global Agriculture and Food Summit at the Khelgaon here Chief Minister Raghubar Das said that Jharkhand will be first state in the country where the income of the farmers will increase four times by the year 2022.
Addressing a press conference at the end of the two day mega event he said it was due to the hardwork of the farmers of the state due to which the agriculture growth rate which was minus 4.5 per cent in the year 2013-14 has witnessed a jump of 19 per cent and presently stood around more than 14 per cent. He said that the result was also an indication of the policies and the programmes which have been launched by the state government for the welfare of the farmers and improving their economic conditions.
He said that the Global Agriculture Summit provided the right platform where farmers came to know about the modern practices and latest technologies in the agricultural field and gained experience as to how with less investment they can further maximize their yield. He said that the farmers should only worry about increasing their farm output as the task of the marketing and processing would be taken care by the state government. Mr Das said during the two day function foundation was also laid for 50 food processing units.
Pointing the key gains for Jharkhand he said that soon an agreement would be inked between China and Jharkhand so that the Lady’s finger from the state is sold in that country as talks in this regard have been held with the agriculture officials of that nation. Moreover China would also send a team to study the possibility to set up a food processing plant in the state.
Further the government will also ink technology exchange agreement with Morocco so that the farmers of Jharkhand can gain expertise from their green Morocco plan. Apart from that a centre for excellence would be set up in collaboration with Israel for training of the farmers and in few days a letter in this regard would be written to the Central government, Mr Das said.
The Chief Minister said that Patanjali of Baba Ramdev has already assured that whatever organic products will be produced in the state including food grains, fruits and vegetables and honey would be purchased by them. He said that soon an MoU will also be inked with Patanjali so that a honey processing plant can be set up in the state.
Those who were present on the occasion also included Yog Guru Baba Ramdev, Agriculture Minister Randhir Singh, Chief Secretary Sudhir Tripathi, Principal Secretary to Chief Minister Sunil Barnwal, Agriculture Secretary Pooja Singhal and others.

गुरुवार, 29 नवंबर 2018

वाराणसी के मकानों में कैद मिले पांच हजार साल पुराने मंदिर...


श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर

पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर काॅरिडोर के काम के तहत अधिग्रहित भवनों के तोड़े जाने के दौरान हैरान करने वाली तस्वीरे सामने आ रही हैं। जिसमें चंद्रगुप्त काल से लगायत मंदिरों सहित हजारों साल से दुनिया के लिये गुम हो चुके प्राचीन मंदिर निकलकर सामने आ रहें हैं।

दुनिया की अनप्लांड और सबसे प्राचीन जीवंत नगरी काशी के गर्भ में कई इतिहास दफ़्न हैं। ऐसे ही कई इतिहास विश्वनाथ कारीडोर योजना में निकलकर के अब सामने आ रहे हैं। बहुत से ऐसे ऐसे प्राचीन मंदिर इस कॉरिडोर के बनने के बाद सामने आये हैं, जिन्‍हें हजारों साल से भुलाया जा चुका है। श्रीकाशी विश्‍वनाथ मंदिर के मुख्यकार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह की माने तो कुछ मंदिर उतने ही पुराने मिल रहे हैं जितनी पुरानी काशी नगरी के होने का अनुमान इतिहासकार लगाते हैं।


मिले हैं कई मंदिर:
दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी मानी गई काशी यूं ही पुरानी नहीं है, इसकी प्रमाणिकता एक बार तब फिर साबित हुई है, जब एक से बढ़कर एक खूबसूरत नक्काशी वाले, शिल्प कला की जिंदा मिसाल वाले दर्जनों मंदिर इतिहास के पन्नों से निकलकर सामने आ गए हैं। मिसाल के तौर पर काशी के मणिकर्णिका घाट के किनारे दक्षिण भारतीय स्टाइल मे रथ पर बना एक अद्भुत भगवान शिव का मंदिर जिसमें समुंद्र मंथन से लेकर कई पौराणिक गाथाएं उकेरी गई है, समाने आया है। वहीं इसके अलावा इसी मंदिर के सामने की दिवार से ढका भगवान शिव का भी एक बड़ा ही प्राचीन मंदिर मिला है।

हूबहू विश्‍वनाथ मंदिर जैसा मंदिर भी मिला है:
इतना ही नहीं हूबहू श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की प्रतिमूर्ति वाला भी एक अन्‍य मंदिर मिला है। इसमें कुछ मंदिर तो चंद्रगुप्त काल और उससे भी पुराने माने जा रहें हैं। मंदिरों के मिलने से लोगों में हर्ष है और खुशी भी कि जो प्राचीन मंदिर इतिहास के पन्नों में अबतक दबे हुए थे, वे अब सामने आ रहें हैं और अब इसका रख रखाव बेहतर ढंग से प्रशासन करेगा। साथ ही काशी आने वाले श्रद्धालुओं को भी इन मंदिरों के बारे में विस्‍तार से जानने को मिलेगा।

41 मंदिर आये सामने:
ऐसा नहीं है कि काशी में श्री काशी विश्वनाथ के इर्द-गिर्द रातों रात मंदिरों का संकुल निकलकर सामने आ गया है, बल्कि इसके लिए स्थानीय प्रशासन को महिनों की मशक्कत करनी पड़ी है। ये काम अभी भी श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर काॅरिडोर के तहत जारी है। इस सम्बन्ध में बात करते हुए मंदिर के कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण के तहत अब तक निर्धारित कुल 296 भवनों में से 175 को खरीद लिया गया है और विस्तारीकरण के तहत हो रहे ध्वस्तीकरण में फिलहाल 41 छोटे बड़े अति प्राचीन मंदिर निकलकर सामने आए हैं।

3 हज़ार साल से भी पुराने मंदिर आये सामने:
मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी के अनुसार चंद्रगुप्त काल से लेकर काशी के लिखित साढे 3 हजार साल पुराने मंदिर भी हमें मिल रहें हैं। दरअसल इन मंदिरों को भवन स्वामियों द्वारा चाहरदिवारी के अंदर निजी वजहों से छिपाकर रखा गया था। जिस वजह से ये मंदिर अबतक देश-दुनिया की नजरों से दूर थे। लेकिन, जैसे जैसे अति प्राचीन मंदिर मिलते जा रहें हैं वैसे वैसे प्रशासन फिलहाल वहां ध्वस्तीकरण का काम रोककर उनकी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराकर उसकों संरक्षित करने के काम में लग जा रहा है। जिसके तहत बकायदा विशेषज्ञों की टीम भी लगाई जा रही है।

होगी कार्बन डेटिंग:
मंदिरों की प्राचीनता को मापने के लिए शासन अब कार्बन डेटिंग भी कराने जा रहा है। इस समबन्ध में बात करते हुए कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण के दौरान लिये गये मकानों को तोड़ने पर निकले मंदिरों की कार्बन डेटिंग कराई जाएगी, ताकि उनकी स्‍थापना का वास्‍तविक काल पता चल सके। उन्होंने कहा कि जब ये सारे मंदिर सामने आ जायेगे तो खुद ब खुद एक प्राचीन मंदिरों का संकुल निकलकर सामने आयेगा। जो अपने आप में अद्भुत होगा।

लगी है विशेषज्ञों की टीम:
फिलहाल मंदिरों की प्राचीनता को जानने के लिए कंस्लटेंट कंपनी के एक दर्जन विशेषज्ञों की टीम भी लग चुकी है। जो ड्रोन कैमरे और गूगल इमेज के जरिये शुरुआती काम में जुट गई है। अभी फिलहाल अति प्राचीन मंदिरों का डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। इस सम्बन्ध में प्रोजेक्ट असिस्टेंट बिंदू नायर ने ने बताया कि हमारी टीम मंदिर प्रशासन की टीम के साथ मिलकर कार्य कर रही है। हम अभी डेटा बेस इकट्ठा कर रहे हैं बिल्डिंग का, इस कार्य के बाद हम दूसरे चरण का कार्य शुरू करेंगे।

किसी को काशी का प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं
इस सम्बन्ध में बात करते हुए मणिकर्णिका घाट स्थित सतुआ बाबा आश्रम के महंत संतोष दास ने कहा कि विश्व की सबसे प्राचीन नगरी है काशी, अगर आध्यात्म को, सनातन को और मान्यताओं और वैदिक ऋचाओं के साथ किसी शहर की प्रमाणिकता मिलती है तो वो है काशी, जिसका किसी को प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है।

आने वाली पीढ़ी के लिए होगा फायदेमंद:
महंत संतोष दास ने बताया कि इस समय प्रधानमंत्री की पहल पर जो विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना की शुरुआत हुई है। इसके लिए मकानों को तोड़ने के बाद ऐसे ऐसे प्राचीन मंदिर निकल रहे हैं कि कुछ कहा नहीं जा सकता। हमने तो चन्द्रगुप्त काल को ही पढ़ा है, लेकिन काशी की स्थापना गंगा से पहले की है और पृथ्वी के अनादिकाल से काशी बसी है जो पृथ्वी से अलग है। उन्होंने बताया कि यहाँ 4 हज़ार से 5 हज़ार वर्ष पुराने मंदिर घरों के अंदर से छुपे हुए मिल रहे हैं।

आज वो मंदिर हमें देखने को मिल रहे हैं, ये हमारे लिए बहुत शुभ संकेत हैं। ऐसे मंदिरों की पूजा आम जनमानस कर पायेगा और उसके महत्त्व को जान पायेगा साथ ही आने वाली पीढ़ी भी काशी की प्राचीनता को देख पायेगी।

जाहिर तौर पर जब कभी श्रीविश्वनाथ मंदिर काॅरिडोर मूर्त रूप ले लेगा उसमें मिले अति प्राचीन मंदिरों का विशाल संकुल अपनी अलग ही छटा बिखेरेगा। वे मंदिर जो कभी इतिहास के पन्नों में दफन हो गए थे और अभी भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहें हैं, वे जब अपनी प्राचीनता और पौराणिकता के साथ सामने आयेगे तब निश्चित रूप से इसे किसी बड़ी खोज से कम नही आका जाय...

-कमल किशोर गोयंका

(मंतव्य पत्रिका के व्हाट्स एप ग्रूप से साभार)

खेलगांव में दो दिवसीय ग्लोबल एग्रीकल्चर फूड समिट का शुभारंभ



50 फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट की आधारशिला रखी

समिट के साझेदार देश चीन, ट्यूनीशिया, मंगोलिया, इजरायल और फिलीपींस के प्रतिनिधि, 16 राज्यों के 10 हजार किसान, 50 से अधिक वक्ता का झारखंड की धरा पर हुआ आगमन

271 करोड़ का निवेश, 6000 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार

28 लाख किसानों को सरकार देगी निःशुल्क मोबाइल फ़ोन

2019 मई तक किसानों के लिए बिजली का अलग फीडर होगा


रांची। झारखण्ड के 28 लाख किसानों को नमन व बधाई। आपकी मेहनत, आपकी उद्यमशीलता और संकल्पशक्ति का प्रतिफल है कि झारखण्ड जिसकी कृषि विकास दर जो 4 वर्ष पूर्व -4.5 वह आज बढ़ कर + 14 % हो गई है। आपके सहयोग से हम लंबी छलांग लगाने में सफल हुए। हमें यहीं नहीं रूकना है। कृषि विकास दर में और वृद्धि दर्ज करने, आपको उन्नतशील किसान के रूप में तब्दील करने, आपकी उत्पादकता की सही मुख्य प्रदान करने साथ से अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप वस्तुओं का उत्पादन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फ़ूड समिट का आयोजन हो रहा है। उपरोक्त बातें मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कही। श्री दास गुरुवार को खेलगांव में आयोजित वैश्विक कृषि शिखर सम्मेलन में बोल रहें थे।

श्री रघुवर दास ने कहा कि इस सम्मेलन के जरिए राज्य के किसान अन्य राज्यों और देशों में अपनाई गई सफल तकनीक की जानकारी प्राप्त करेंगे, बाजार की मांग के अनुसार अपने उत्पाद तैयार करने के हुनर से परिचय कराने और अन्य किसानों के भी उन्नति का वाहक बनाना, यही इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है। साथ ही खेती हमारी संस्कृति और परंपरा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के इस ठोस आधार को हमें इस सम्मेलन के माध्यम से और सशक्त करना है।
निवेशक सरकार का निमंत्रण स्वीकार करें।

श्री रघुवर दास ने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से राज्य में 50 खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का शिलान्यास हुआ। इस कार्य हेतु सभी निवेशकों को धन्यवाद। आपके निवेश के किसानों को उनके उत्पाद का सही दाम और नौजवानों को काम मिलेगा। अन्य निवेशकों का भी झारखण्ड में अभिनन्दन है। आप आएं और निवेश करें। यहां की नीति अच्छी है और कार्यों में पारदर्शिता भी है जो आपको हर कार्य मे सहयोग प्रदान करेगा।

28 लाख किसानों को मुफ्त मोबाइल, 2019 तक फीडर से बिजली
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के किसानों को बिचौलियों से मुक्ति प्रदान करने, बाजार के पल पल चीजों के भाव से अवगत कराने और समय के अनुरूप अपने फसल की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य के 28 लाख किसानों को सरकार निःशुल्क मोबाइल फोन प्रदान करेगी। ताकि हमारे किसान भी बाजार के बदलते परिवेश के अनुसार को को ढाल सकें। साथ ही कृषि कार्य हेतु 2019 मई तक किसानों के लिए अलग फीडर की व्यवस्था सरकार करेगी। जहां से 6 घटें निर्बाध बिजली की आपूर्ति कृषि कार्य हेतु होगा। सरकार की मंशा किसानों के लिए अलग फीडर, उद्योग के लिए अलग फीडर और आम जनता के लिए अलग फीडर लगाने की है जिसपर कार्य हो रहा है। 2018 दिसंबर तक सुदूरवर्ती गांव तक बिजली पहुंचा दी जाएगी।

राज्य के किसान खुद की और राज्य सरकार की तिजोरी भरने का कार्य करें
श्री रघुवर दास ने कहा कि किसान सिर्फ सब्जी उत्पादन में ही केंद्रित न रहें। कृषि कार्य के साथ बागवानी, पशुपालन और सोलर फार्मिंग में भी ध्यान दें। सरकार इन कार्यों में आपको सहयोग प्रदान करेगी। सोलर फार्मिंग करने वाले किसानों की बिजली को 3 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीद लिया जाएगा। अगर किसान खेती के साथ अन्य को भी साथ लेकर कार्य करते हैं तो 2022 तक किसानों की आय दोगुना नहीं चार गुना हो सकता है। नौजवान किसान डेयरी उद्योग की ओर ध्यान दें। आपको 50 % अनुदान पर गाय उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार ने 25 हजार BPL महिलाओं को 90% अनुदान पर 2 गाय उपलब्ध कराया है। इसके अलावा अगर कोई किसान कृषि लोन का भुगतान अगर 1 वर्ष के अंदर कर देता है तो उस किसान को ब्याज देने की जरूरत नहीं, उस ब्याज का भुगतान राज्य सरकार करेगी।

Contribution of farmers and workers must in development of nation-- Raghubar Das


crop insurance premium for 2019 to be paid by government

Ranchi  : Jharkhand Chief Minister Raghubar Das today said that in the development of the nation the contribution of the villages poor farmers and workers is a must for the development of state and nation.

Addressing the Global Agriculture and Food Summit at the Khelgaon here he agriculture was the soul of the nation and base of the culture and traditions. He said that infact all our festivals are also directly and indirectly related to the agriculture. Mr Das said that in Jharkhand 60-70 per cent population was agriculture. He said that the state government has sanctioned sufficient funds for the develoment of agriculture and allied activities and framed a separate food processing policy which is focused on bottling and packaging as food processing was an important link between the farmers and urban customers.

  Raghubar Das said that during the function online foundation has been laid for 50 food processing companies which will creatr employment for the youth and even the farmers would get right cost of their products.

Mr Das said that in the year 2013-14 the agriculture growth rate was minus 4.5 per cent which has turned into a positive growth of 14 percent which was mainly due to the hardwork of the farmers of the state.

 Mr Das said that the picture of the villages did not change in the last 67 years and it was only when Prime Minister Narendra Modi that steps were taken to improve the condition of the farmers and a target was set to double their incomes. He said that Jharkhand was getting the benefit of double engine. He suggested that farmers should try to earn one third of income should come from agriculture another one third from animal husbandry and another one third from horticulture floriculture and solar farming. He said that farmers should do solar farming on barren land and the same would be procured by the state government through grid at Re 3 per unit.
  He said that it is priority for the state government to ensure that the farmers are not looted by the middlemen. He said that 28 lakh farmers in the state would be given mobile phones from 2019-21 while in 2019 the premium of crop insurance would be paid by state governnment similar to what was done in the year 2018. To the farmers he said that those who would be paying their loans within one year from them zero percent interest would be taken.

The Chief Minister said power would reach in all homes by 2018 and by May 2019 separate feeders would be set for agriculture so that farmers can get power for six hours for agriculture works while separate feeders would be provided for house hold and industrial usages. Mr Dad said by August 2019 power would be available in the rural areas 24 x 7. He said that since the people were living in the era of globalisation therefore the farmers should use modern technology and asked the farmers to focus on dairy production to bring White revolution by 2022 in the state and said that every year 100 farmers would be sent abroad. He also asked the farmers to focus on organic farming as all these steps would lead to doubling the income of the farmers by 2022.

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...