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मंगलवार, 7 मई 2019

रक्शंदा रजा ने किया पहली बार मतदान



रांची। स्थानीय मारवाड़ी काॅलेज में प्रथम वर्ष (कला) की छात्रा रक्शंदा रजा ने पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया। राजधानी के काली स्थान रोड निवासी रक्शंदा रजा वरिष्ठ पत्रकार एस एम शमीम की पौत्री है। रक्शंदा ने बताया कि पहली बार मतदान करने को लेकर वह काफी उत्साहित थी। सुबह उठकर वह अपने मतदान केन्द्र, प्राइमरी स्कूल, काली स्थान रोड, बूथ संख्या 229 पर पहुंच गई और मताधिकार का प्रयोग किया। उसने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सबों को अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए। वह मतदान करने के बाद खुशी का इजहार कर रही थी।

सोमवार, 6 मई 2019

क्या इसी भाषा और संस्कार को लेकर विश्वगुरु बनेगा भारत!



देवेंद्र गौतम

पीएम नरेंद्र मोदी एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने चुनाव के समय बार-बार अपने पांव में खुद कुल्हाड़ी मारी। प्रज्ञा ठाकुर को चुनाव मैदान में उतारना, फौजी जवान तेज़ बहादुर का नामांकन रद्द करवाना, बनारस के साधु संतो के नामांकन को खारिज करवाना। चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाना, पूर्व में सेना की कार्रवाइयों को वीडियो गेम बताना और शहीद प्रधानमंत्री राजीव गांध पर अपमानजनक टिप्पणी करना यह सब ऐसी गलतियां हैं जिनका खमियाजा उन्हें और उनकी पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।
पीएम मोदी अभी जिस भाषा का प्रयोग कर रहे हैं वह सभ्य लोगों की भाषा तो कत्तई नहीं हो सकती। पढ़ा लिखा आदमी तो दूर कोई अनपढ़ चायवाला भी इतनी उदंड भाषा नहीं बोलता। उनकी भाषा शुरू से कटाक्ष करने वाली रही है। लेकिन इतने निचले स्तर पर उतरकर कटाक्ष करना इतने बड़े और जिम्मेदार पर बैठे व्यक्ति को शोभा नहीं देता। ऐसी भाषा की देशवासियों पर क्या प्रतिक्रिया होती है कभी न इसे जानने की कोशिश की न इसकी परवाह की। वे स्वयं को चायवाला बोलते हैं। चायवाला भी अपने ग्राहकों से साथ इस तरह की बात नहीं करता। उनके साथ अदब से पेश आता है। यह जाहिल-जपाट और सड़क छाप लफंगों की भाषा देश के लोग पसंद नहीं करते। आश्चर्य होता है कि वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संगठक कैसे रहे। संघ का एक साधारण कार्यकर्ता भी इतनी शालीन भाषा बोलता है कि सैद्धांतिक विरोध रखने वाले भी उनसे प्रभावित हो जाते हैं। संघ जैसी संस्था में रहकर भी कोई संस्कार नहीं सीखे तो आश्चर्य होता है।
हालांकि राजनीति में गंदी भाषा और मूल्यहीनता की शुरुआत लालू यादव से मानी जाती है जो भूरा बाल साफ करो जैसे नारे लगाते थे। लेकिन लालू की भाषा किसी को कचोटती नहीं थी। लोग उनकी बातों का मज़ा लेते थे। उनका उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं होता था बल्कि पिछड़ी जातियों को जागृत करना, उनके अंदर आत्मसम्मान की भावना भरना होता था। वे मसखरी कर लोगों को आकर्षित करने की कला जानते थे। आज भी वे देश के सबसे मुंहफट राजनेता माने जाते हैं। लेकिन उनकी भाषा कचोटती नहीं गुदगुदाती है। मायावती भी आक्रामक भाषण देती हैं लेकिन उन्होंने मनुवाद और ब्राह्मणवाद का विरोध किया किसी व्यक्ति अथवा जाति के लिए कभी अपमानजनक और चुभने वाली बातें नहीं की। अपने विरोधियों को देशद्रोही और पाकिस्तान परस्त घोषित करने और घटिया बातें करने की शुरुआत मोदी और शाह की जोड़ी ने की। वह भी सत्ता हासिल हो जाने के बाद। सत्ता पाते ही उनका अहंकार, बड़बोलापन सातवें आसमान पर पहुंच गया। भाजपा में और भी तो नेता हैं, उनकी भाषा और उनका आचरण तो मर्यादित है। वे विरोधियों को निशाना जरूर बनाते हैं लेकिन उनपर व्यक्तिगत हमला नहीं करते। राजनाथ सिंह हों, नितिन गडकरी हों या अन्य नेता। वे नपी तुली और तार्किक बातें करते हैं। सिर्फ मोदी और शाह के चहेते लोगों की ज़ुबान बेलगाम हो गई है। वे कब क्या बोल जाएंगे उन्हें खुद पता नहीं।
मोदी जी की भाषा ही नहीं काम करने का तरीका भी बेढंगा है। इसका ताज़ा उदाहरण संसदीय चुनाव में 75 पार के लोगों का टिकट काटने का तरीका है। वे वरिष्ठ नेता रहे हैं। भाजपा की नींव डालने वाले रहे हैं। अगर उनसे इस नीतिगत फैसले पर बात कर लेते और उन्हें इसपर सहमत कराकर उनका आशीर्वाद दिलाकर नए प्रत्याशी उतारते तो यह भारतीय परंपरा के मुताबिक होता। उनकी प्रतिष्ठा भी रह जाती और उनके समर्थकों में भी यह संदेश जाता कि उनके नेता को महत्व दिया गया। लेकिन इसकी जगह सीधे फरमान जारी कर दिया गया कि आपकी जगह फलां प्रत्याशी होंगे। कई नेताओं ने इस फरमान पर बगावत कर दी। कई बार रांची के सांसद रहे रामटहल चौधरी बागी उम्मीदवार के रूप में निर्दलीय मैदान में उतर गए और अब भाजपा के लिए इस जीती हुई सीट को गंवाने का खतरा है। गांधीनगर के मतदाता एलके आडवाणी जी के अपमान को लेकर नाराज हो गए और अब अमित शाह के लिए चुनाव जीतना संदिग्ध हो चला है। तकनीक का सहारा लेकर जीत भी गए तो नैतिक रूप से हार हो गई।


अपराह्न 2 बजे तक झारखण्ड के 4 लोकसभा क्षेत्रों में लगभग 45.98% मतदान

झारखण्ड के चार लोकसभा क्षेत्रों में आज सुबह से ही मतदाताओं में मतदान के प्रति बहुत उत्साह दिख रहा है। अपराह्न 2 बजे तक 4 लोकसभा क्षेत्रों में लगभग 45.98% मतदान हो चुका है। जिसमें रांची में 44.69%, हज़ारीबाग़ में 44.56%, कोडरमा में 48.70 % तथा खूंटी में 45.88% मतदान हो चुका है।

दोपहर के समय बहुत गर्मी होने के बावजूद मतदाता अपने घरों से निकलकर मतदान करते नजर आ रहे हैं। लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व में उत्साह से मतदाता अपनी सहभागिता निभाते हुए नजर आ रहे हैं।
अपराह्न 2 बजे तक झारखण्ड में राँची लोकसभा क्षेत्र के इचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 51% मतदान की सूचना है।

सात राज्यों में चल रहे लोकसभा चुनाव में 11 बजे तक झारखण्ड का मतदान प्रतिशत दूसरे स्थान पर



झारखण्ड के चार लोकसभा क्षेत्रों में आज सुबह 11 बजे तक लगभग 29.49% मतदान हो चुका है। जिसमें रांची में 30.80%, हज़ारीबाग़ में 29.05%, कोडरमा में 30.80 % तथा खूंटी में 27.21% मतदान हो चुका है।

लोकसभा चुनाव 2019 के पांचवे चरण के मतदान में आज देश के 7 राज्यों बिहार, जम्मू कश्मीर, मध्यप्रदेश,राजस्तान, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं झारखण्ड में हो रहा मतदान।

अहले सुबह से ही मतदाता पोलिंग बूथों पर मतदान करने के लिये कतार में खड़े दिख रहे हैं। सुबह के 11 बजे तक झारखण्ड में 29.49 % मतदान हो चुका है जो कि अन्य सात राज्यों कि तुलना में दूसरे स्थान पर है। इस सूची में सबसे उपर पश्चिम बंगाल 32.67% के साथ बना हुआ है।
(श्रोतः आइपीआरडी.झारखंड)

शनिवार, 4 मई 2019

भाजपा का वार, कांग्रेस का पलटवार



रांची में लोकसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर त्रिकोणीय संघर्ष में शामिल भाजपा और कांग्रेस के बीच एक दूसरे के खिलाफ आरोप प्रत्यारोप का दौर चला। मतदाताओं पर इसका क्या असर पड़ता है यह तो मतगणना के बाद ही पता चलेगा लेकिन झारखंड के इस प्रतिष्ठित सीट का चुनाव दिलचस्प हो चला है।

कांग्रेस भ्रष्टाचार की जननीः भाजपा
कांग्रेस पार्टी  के लोकसभा उम्मीदवार का संबंध अस्त्र शस्त्र के विचौलिया चंद्रा स्वामी से रहे हैं ,यह बात भाजपा के प्रदेश महामंत्री सह मुख्यालय प्रभारी दीपक प्रकाश ने एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा।उन्होंने प्रेसवार्ता में आईबी के पूर्व पदाधिकारी मलय धर की पुस्तक ओपन सेक्रेट का इस संबंध में उल्लेख करते हुए पुस्तक भी दिखाई।श्री प्रकाश ने कहा कि कांग्रेस पार्टी भ्रष्टाचार की जननी भी है और पोषक भी।भ्रष्टाचार का दूसरा नाम कांग्रेस है।कांग्रेसपार्टी ने आजादी के बाद से ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया।नेहरू मंत्रिमंडल से ही घोटाला जगजाहिर है। जीप घोटाला,हेलीकॉप्टर घोटाला ,बोफोर्स घोटाला,यूरिया घोटाला,चीनी घोटाला,कोल ब्लॉक घोटाला, टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला सहित तिनोलोक में व्याप्त घोटालों में कांग्रेस सरकार और नेहरू गांधी परिवार शामिल रहा है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को चंद्रास्वामी के साथ उनके उम्मीदवार के संबंध को स्पष्ट करना चाहिए।
श्री प्रकाश ने कहा कि जनता कांग्रेस पार्टी के इस चरित्र चाल और चेहरा को पहचान चुकी है।इस चुनाव में जनता कांग्रेस पार्टी और महागठबंधन को शून्य पर आउट करेगी।
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शहदेव ने कहा जे वी एम प्रत्याशी श्री प्रदीप यादव को उनके कुकृत्य केलिए अविलंब पार्टी से निलंबित करते हुए चुनाव से वंचित करना चाहिए,परन्तु बाबूलाल मरांडी ऐसा नहीं करेंगे ।पार्टी केलिए महिला का इज्जत और सम्मान मायने नहीं रखता,उसके लिए चुनाव महत्वपूर्ण है ।प्रतुल ने कहा कि पार्टी के एक महिला कार्यकर्ता ने जैसा घृणित आरोप प्रदीप यादव पर लगाते हुए श्री मरांडी को साक्ष्य भेजे उसे उन्होंने चुनाव बाद देखने की बात कहकर   ठंडे बस्ते में डाल दिया ,यह उनके महिलाओं के दर्द के प्रति उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जेएमएम के लोग जिस प्रकार से प्रदीप यादव के समर्थन में खड़े हुए उससे महागठबंधन का चरित्र भी उजागर हुआ है।


कांग्रेस का पलटवार

जनता देगी भाजपाई हरकतों का मुंहतोड़ जवाब : सुबोधकांत
रांची : पूर्व केंद्रीय मंत्री और रांची संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि भाजपा के कुछ टुच्चे नेताओं ने उनके बेदाग दामन पर कीचड़ उछालने का कुत्सित प्रयास किया है लेकिन यह कीचड़ वापस भाजपाईयों के मुंह पर ही जा गिरा है। उन्होंने कहा कि राफेल की दलाली से लेकर नकली नोट के घोटाले तक में लिप्त रहे नरेंद्र मोदी और तड़ीपार तक की सजा भोग चुके अमित शाह और उनके टुच्चे कारिंदे चुनाव में अपनी पार्टी की हार निश्चित देख घिनौनी हरकत पर उतर आये हैं। श्री सहाय ने कहा कि उनका चालीस वर्षों का संसदीय जीवन खुली किताब है और रांची सहित पूरे देश की जानता उन्हें बखूबी जानती है। अंबानी को 30,000 करोड़ देनेवाले, वहीं अडानी को झारखंड की उपजाऊ जमीन कौड़ी के मोल सौंप देनेवाले, आदिवासियों की जमीन लूटने के लिए सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन करनेवाले, हरमू नदी को नाले में तब्दील कर एक अरब का घोटाला करनेवाले, सीवरेज-ड्रेनेज योजना में मैनहर्ट कंपनी को करोड़ों का नजायज भुगतान करानेवाले, गरीबों के कंबल तक का पैसा खानेवाले अपना काला मुंह जनता के सामने नहीं दिखा पा रहे हैं। जनता ने जब इन्हें खारिज कर दिया है तो ये हमेशा जनता के बीच रहनेवाले मुझे जैसे व्यक्ति पर बिलो द बेल्ट वार करने की साजिश की है, लेकिन उनकी मंशा कभी सफल नहीं होगी। छह मई को जनता इसका करारा जवाब देगी।

कांग्रेसियों ने डोर- टू डोर प्रचार कर मांगे वोट


रांची लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी सुबोधकांत सहाय के पक्ष में आज चुनाव प्रचार के अंतिम दिन कॉग्रेसजनों ने चुटिया में डोर-टू-डोर पदयात्रा कर कांग्रेस को मतदान करने की अपील की। पदयात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आप कांग्रेस पार्टी को वोट करें कांग्रेस आपकी हर समस्याओं का समाधान के लिए तत्पर रहेगी। आपका समर्थन ही देश को सही दिशा दे सकती है।

कांग्रेस देश की गौरव के लिए कभी किसी चीजों से समझौता नहीं की है, हमेशा देश की प्रतिष्ठा एवं आम जनता की चिन्ता है। जनता के समझ सत्ता के लिए कभी झूठ नहीं बोले हैं, जो भी वायदे किये कांग्रेस ने उसे पूरा करके दिखाया है। भाजपा हमेशा जनता को ठगने एवं दिभ्रमित करने का काम की है, पिछला चुनाव में 15 लाख देने एवं नौजवानों को हर साल 02 लाख रोजगार देने की वादा कर सत्ता हासिल की थी, इस बार देश की सुरक्षा के सहारे सत्ता हासिल करना चाहती है। 

पदयात्रा में कांग्रेस के पूर्व सचिव आदित्य विक्रम जासवाल, अमिताभ रंजन, राजेश गुप्ता, ज्योति मथारू, विजय तिर्की, अनुपूरण नायक, आभा श्रीवास्तव, अनिता अनुसुमन, सुमित साहु, मृणाल, अमरजीत, आसिफ जियाउल अनिल सिंह आदि सैकड़ो कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल थे।

रांची में परचम लहरा सकती है कांग्रेस, बशर्ते....



भाजपा के मतों के विभाजन और प्रत्याशी की लोकप्रियता का मिल सकता है लाभ
सुबोधकांत सहाय

संजय सेठ

रामटहल चौधरी
देवेंद्र गौतम
रांची लोकसक्षा क्षेत्र में चुनाव की तैयारी पूरी हो चुकी है। चुनाव आयोग भी चौकस है और प्रशासन भी। सुरक्षाकर्मी पर्याप्त संख्या में मौजूद है। मतदान 6 मई को है। चुनाव प्रचार का दौर थम चुका है। स्टार प्रचारकों के हेलिकॉप्टरों की उड़ान रुक चुकी है। फिलहाल प्रत्याशियों और उनके समर्थकों का डोर टू डोर संपर्क जारी है। भाजपा के कार्यकर्ता प्रत्याशी संजय सेठ पीएम मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। भाजपा कार्यकर्ता खासतौर पर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के लाभुकों से संपर्क कर रहे हैं। संजय सेठ खादी ग्रामोद्योग के अध्यक्ष रहे हैं। संसदीय राजनीति में नए हैं। सार्वजनिक जीवन में कोई खास भूमिका नहीं रही है। उन्हें मोदी के नाम, सरकार के काम और अमित शाह के चुनावी इंतजाम पर भरोसा है। राज्य में भाजपा की सरकार है। इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। लेकिन भाजपा के निवर्तमान भाजपा सांसद रामटहल चौधरी के बागी उम्मीदवार के रूप में खड़े होने के कारण भाजपा के पारंपरिक मतों में भारी विभाजन हो रहा है। उनकी बगावत भाजपा को महंगी पड़ सकती है। इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है जिसमें कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय को भाजपा के मतों के विभाजन का लाभ मिलता दिख रहा है।
रांची झारखंड की राजधानी होने के कारण महत्वपूर्ण है। इस अनारक्षित सीट पर कांग्रेस और भाजपा ने अब तक सबसे अधिक बार चुनाव जीतने का रिकार्ड बनाया है। आजादी के बाद 1951 में हुए लोकसभा के पहले चुनाव में कांग्रेस के अब्दुल इब्राहिम सांसद निर्वाचित हुए थे। इसके बाद पीके घोष, शिव प्रसाद साहु और सुबोधकांत सहाय ने यहां से कांग्रेस का परचम लहराया। 1957 में यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मीनू मसानी चुनाव जीते थे। 1977 में भारतीय लोकदल से रवींद्र वर्मा चुनाव जीते। लेकिन वे फिर दुबारा लौटकर नहीं आए। सुबोधकांत सहाय रांची से पहली बार 1989 में चुनाव जीते थे। उस समय वे जनता दल के प्रत्याशी थे। मीनू मसानी और रवींद्र वर्मा रांची के निवासी नहीं थे। वे बाहर से आकर चुनाव जीते थे। 
1962 में कांग्रेस से पीके घोष पहली बार जीते। उन्होंने जीत की हैट्रिक बनाई। 1962 के बाद 1967 और 1971 का चुनाव भी जीते। 1977 में जब आपातकाल को लेकर पूरे देश में इंदिरा विरोधी लहर चल रही थी ऐसे में लोकदल ने रांची के लिए एकदम नए बाहरी उम्मीदवार रवींद्र वर्मा को मैदान में उतारा और इंदिरा विरोधी लहर में उन्हें जीत हासिल हो गई। 
इसके बाद 1980 और 1984 के चुनाव में लोहरदगा के मूल निवासी शिव प्रसाद साहू कांग्रेस के टिकट पर  लगातार दो बार सांसद निर्वाचित हुए। 1989 में वे जनता दल के उम्मीदवार सुबोधकांत सहाय से हार गए। 1991 के बाद रांची में भारतीय जनता पार्टी का दबदबा कायम हो गया। रामटहल चौधरी 1991 से लगातार चुनाव जीतते आए। 1991, 1996, 1998 और 1999 का चुनाव रामटहल चौधरी जीते। लेकिन 2004 और 2009 के चुनाव में वे सुबोधकांत सहाय के हाथों हार गए। 
2014 लोकसभा चुनाव में फिर रामटहल चौधरी ने सुबोधकांत सहाय को पराजित कर दिया। समय लोग कांग्रेस से नाराज थे और नरेंद्र मोदी एक नई उम्मीद जगाने में सफल रहे थे। लेकिन रामटहल चौधरी सिर्फ मोदी के नाम पर नहीं अपने व्यक्तिगत प्रभाव से जीते थे। उन्हें 448729 वोट मिले थे जबकि सुबोधकांत सहाय विपरीत स्थितियों में भी 249420 वोट हासिल करने में सफल रहे थे। आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने भी पहली बार 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन वे 142560 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर खड़े बंधु तिर्की को मात्र 46 हजार वोट मिले थे।
2019 के चुनाव में हालांकि विभिन्न दलों और निर्दलीय को मिलाकर 20 उम्मीदवार मैदान में हैं। लेकन मुख्य संघर्ष निर्दलीय मैदान में उतरे निवर्तमान सांसद रामटहल चौधरी, कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय और भाजपा के संजय सेठ के बीच ही है। शेष 17 प्रत्याशी चुनाव प्रचार के दौरान भी कहीं दिखाई नहीं पड़े। सिर्फ प्रत्याशियों की सूची में उनका नाम देखा गया।
रामटहल चौधरी का टिकट जिस तरह बिना उनसे कोई परामर्श किए काट दिया गया इससे वे बेहद नाराज हैं। उनके समर्थक भी अपने नेता के अपमान पर भाजपा से नाराज हैं। उनकी नाराजगी भाजपा के लिए नुकसानदेह है। हालांकि आजसू के एनडीए में होने का उसे लाभ भी मिल सकता है। दूसरी तरफ दो जिलों में फैले रांची लोकसभा क्षेत्र के छह विधानसभा क्षेत्रों में से सिल्ली पर एनडीए के सहयोगी दल आजसू का और शेष पांच विधानसभा क्षेत्र रांची, कांके, सिल्ली, खिजरी व हटिया पर भाजपा का कब्जा है। भाजपा ने बूथ स्तर पर जबर्दस्त तैयारी की है। कोई हवा या लहर भाजपा के पक्ष में नहीं है। मोदी का करिश्मा भी फीका हो चला है। उसे योजनाओं के लाभुकों का भरोसा है।
ज़मीनी सच्चाई यह है कि कांग्रेसी प्रत्याशी सुबोधकांत सहाय 2014 का चुनाव हारने के बाद भी रांची संसदीय क्षेत्र के लोगों के बीच लगातार सक्रिय रहे। लोगों को सुख-दुःख के हर अवसर पर उनके साथ खड़े रहे। सांप्रदायिक समरसता बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जनता के बुनियादी सवालों और समस्याओं को लेकर लगातार संघर्षरत रहे। उन्हें इसका सीधा लाभ मिलता दिख रहा है। भाजपा के मतों के विभाजन का भी लाभ उन्हें मिल रहा है। रांची के त्रिकोणीय मुकाबले में वे फिलहाल सबसे आगे दिख रहे हैं। उनका मुकाबला रामटहल चौधरी से है या संजय सेठ से यह भी अभी स्पष्ट नहीं है। यदि उनके कार्यकर्ता समर्थकों का मतदान कराने, सरकारी तंत्र की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और स्ट्रांग रूम में ईवीएम की निगरानी के प्रति सतर्क रहे तो सुबोधकांत सहाय इस सीट पर जीत का परचम लहरा सकते हैं।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...