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मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

रानी कुमारी ने दी हेमंत सोरेन को जीत पर बधाई


रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, झामुमो व राजद महागठबंधन की शानदार जीत पर शहर की लोकप्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और नारी शक्ति सेना (गुलाबी गैंग) की अध्यक्ष रानी कुमारी ने झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को बधाई दी है। मंगलवार को मोरहाबादी स्थित श्री सोरेन के आवास पर जाकर रानी कुमारी ने उन्हें  उपहारस्वरूप फूलों का गुलदस्ता देकर उन्हें सम्मानित किया। रानी ने कहा कि महागठबंधन की जीत से झारखंडवासियों में  नई ऊर्जा संचार हुआ है। अब हेमंत सोरेन के नेतृत्ववाली सरकार गरीबों, पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सफल हो सकेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता ने झामुमो, कांग्रेस और राजद गठबंधन के प्रति जो विश्वास जताया है, उस पर महागठबंधन की सरकार शत-प्रतिशत खरा उतरेगी।

मानव सेवा ही डा अनंत सिन्हा के जीवन का एकमात्र लक्ष्य



चिकित्सक को ईश्वर का दूसरा रूप कहा जाता है। चिकित्सा सेवा में आने के पूर्व डॉक्टर मानव सेवा की शपथ लेते हैं। कुछ चिकित्सक तो मानव सेवा को अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य ही बना लेते हैं। पीड़ित मानवता की सेवा करना और उन्हें हर संभव सहयोग करना उनकी दिनचर्या में शामिल रहता है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं राजधानी रांची के बजरा स्थित देवकमल अस्पताल के संचालक व प्रख्यात शल्य चिकित्सक डॉ. अनंत सिन्हा। दया और करुणा की प्रतिमूर्ति डॉ.सिन्हा पीड़ित मानवता के प्रति समर्पित हैं। उनका नाम झारखंड के नामचीन शल्य चिकित्सकों में शुमार है। मूल रूप से बिहार के सिवान जिले के निवासी डाॅ. सिन्हा की प्रारंभिक शिक्षा झारखंड में हुई। उनके पिता एकीकृत बिहार के समय वन विभाग में अधिकारी थे। सेवानिवृत्ति के पश्चात उनका परिवार पटना आ गया। डॉ.सिन्हा ने पटना के ख्यातिप्राप्त शिक्षण संस्थान संत माइकल स्कूल में दाखिला लिया। वहां से मैट्रिक व प्लस टू की परीक्षा पास की। उन्हें चिकित्सक बनकर जन सेवा करने का शौक शुरू से ही रहा। इंटरमीडिएट विज्ञान की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने मेडिकल कॉलेज की ओर रुख किया। आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज ( एएफएमसी), पुणे में नामांकन हेतु उन्होंने तैयारियां शुरू की और इसमें सफल रहे। वहां से मेडिकल की डिग्री लेने के बाद वह पुणे में ही प्रैक्टिस करने लगे।  लगभग 6 वर्षों के प्रैक्टिस के क्रम में उन्होंने अपने वरिष्ठ चिकित्सकों का मार्गदर्शन भी प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने मास्टर ऑफ सर्जरी और एमसीएच की डिग्री भी हासिल की। झारखंड से उनका लगाव शुरू से ही रहा। राज्य गठन होने के बाद डॉ. सिन्हा रांची आ गए और यहां देवकमल अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर की स्थापना की। अपनी कुशल कार्यशैली, अनुभव और व्यवहार कुशलता के बलबूते डॉ. सिन्हा कदम दर कदम चिकित्सा के क्षेत्र में नित नई उपलब्धियां हासिल करने लगे। सर्जरी के क्षेत्र में उन्होंने कई ऐसे उत्कृष्ट कार्य किए हैं, जो चिकित्सा क्षेत्र में अद्भुत उपलब्धियां कही जा सकती है। कटे होंठ और तालू की सर्जरी में डॉ. सिन्हा को महारत हासिल है। उनकी इस विशेषज्ञता के आधार पर  चिकित्सा सेवा में लगी राष्ट्रीय स्तर की संस्था स्माइल ट्रेन  उन्हें अपना सहयोग दे रही है। उनके अस्पताल में स्थापना काल के बाद से लेकर अब तक दस हजार से ऊपर मरीजों के कटे होंठ और तालू का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया जा चुका है। उनके अस्पताल में विभिन्न रोगों से संबंधित कुशल और अनुभवी चिकित्सकों सहित समर्पित पारा मेडिकल कर्मियों की टीम है। देवकमल अस्पताल में अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने की वजह से यहां झारखंड के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार, बंगाल, ओडिशा से भी मरीज आते हैं। मरीजों की मानें तो  डॉ. अनंत सिन्हा के व्यवहार से ही उनका आधा दुख दूर हो जाता है। मरीज उन्हें अपना मसीहा मानते हैं। डॉ. सिन्हा सभी धर्म व समुदाय के लोगों का समान रूप से आदर करते हैं। सर्वधर्म- समभाव के आदर्शो को अपने जीवन में आत्मसात कर चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में नित नए आयाम स्थापित कर डॉ. सिन्हा मानव सेवा के अपने लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर हैं। उनका मानना है कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। इससे सुखद अनुभूति होती है। गरीबों, असहायों की सहायता करने से उन्हें सुकून मिलता है। ऐसे युग में जब चिकित्सा सेवा का तेजी से व्यवसायीकरण हो रहा है, वैसे में डॉ. सिन्हा द्वारा  मानव सेवा के उद्देश्य से चिकित्सा सेवा करना उनकी महानता का परिचायक है।
वह कहते हैं कि मरीज चिकित्सक में भगवान का रूप देखकर उनके पास आते हैं। ऐसे में चिकित्सकों की भी अहम जिम्मेदारी बनती है कि वे मरीजों के साथ उनकी आशा और अपेक्षा के अनुरूप हर संभव सहयोग करें, तभी चिकित्सक होने की सार्थकता है।
प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

रविवार, 22 दिसंबर 2019

किसानों की खुशहाली से ही देश होगा खुशहाल



राष्ट्रीय किसान दिवस पर विशेष


* अशोक कुमार सिंह

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के सर्वमान्य नेता चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उनकी स्मृति में प्रत्येक वर्ष 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है। उन्होंने किसानों के लिए जो हितकर कार्य किए, उसे सदियों तक याद किया जाता रहेगा। किसानों और गरीबों के उत्थान के लिए सतत प्रयासरत रहने वाले चौधरी चरण सिंह को किसानों का मसीहा भी कहा जाता है।  उनका मानना था कि किसानों को खुशहाल किए बिना देश का विकास संभव नहीं है। भारत देश की आत्मा किसानों में बसती है। किसान त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति हैं। जीवन पर्यंत मिट्टी से सोना उगाने के लिए किसान तपस्या करते हैं। मूसलाधार बारिश हो, कड़ाके की ठंड पड़ रही हो या तपती धूप हो, किसान इन सबकी परवाह किए बिना जी-तोड़ मेहनत कर फसल उगाते हैं। हमारे देश की 70 प्रतिशत आबादी आज भी गांवों में रहती है। जिनका मुख्य पेशा कृषि है। भारतीय किसान को अन्नदाता कहा जाता है। किसान हमारी सभ्यता और संस्कृति को भी सहेज कर रखे हुए हैं। हमारा मानना है कि किसानों की समृद्धि से ही  देश समृद्ध हो सकता है। किसान अन्नदाता हैं, लेकिन बदले में किसानों को उनकी फसल का उचित पारिश्रमिक तक नहीं मिल पाता है। सादा जीवन, उच्च विचार के आदर्श वाक्य को अपने जीवन में आत्मसात किए किसान मेहनत और लगन से खेती-किसानी में जुटे रहते हैं। अपनी आवश्यकताओं को सीमित रखते हुए सादगीपूर्ण जीवन जीते हैं। खेत ही किसानों की कर्मभूमि होती है। दिन भर कठोर परिश्रम कर शाम ढलते ही वह अपने कंधों पर हल लिए बैलों को हांकते हुए अपने घर लौटते हैं। समस्याओं से जूझना उनकी नियति है।  भारतीय किसान बदहाल हैं। कर्ज के बोझ तले दबे रहते हैं। कर्ज में ही किसान पलते- बढ़ते हैं और अपना जीवन समाप्त कर देते हैं। किसानों की आय में वृद्धि के लिए स्रोतों के विकास के क्षेत्र में  तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है। सरकारी स्तर पर राष्ट्रीय पशुधन मिशन, गोकुल मिशन, नीली क्रांति, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन, पशु पालन जैसी बहुत सी योजनाएं शुरू की गई। फलस्वरूप गत वर्षों में डेयरी, पोल्ट्री, मधुमक्खी, मत्स्य पालन के क्षेत्र में वृद्धि हुई है। कृषि के क्षेत्र में पिछले कुछ सालों से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अन्य संस्थाओं के माध्यम से कई रिसर्च भी हुए हैं। लेकिन जितनी आवश्यकता है, वह नाकाफी है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में किसानों की हालत में सुधार के लिए ठोस प्रयास किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। लाभकारी कृषि तकनीकों की किसानों को विभिन्न माध्यमों से जानकारी दिए जाने की भी आवश्यकता है। इन प्रयासों से किसानों के जीवन स्तर में सुधार संभव है। किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार की गुंजाइश है, बशर्ते ईमानदारी से पहल हो। राहें कठिन अवश्य है, पर कुछ भी असंभव नहीं। हमारा मानना है कि आज का किसान लाभकारी एवं अभिनव कृषि तकनीकों के बेहतर प्रबंधन को अपनाकर आजीविका एवं अपनी सुरक्षा के साथ-साथ खुशहाली की ओर कदम बढ़ा सकता है।
आज चौधरी चरण सिंह की जयंती है। जिनकी स्मृति में राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है। एक ऐसे दौर में जब देश में किसान और कृषि क्षेत्र तमाम समस्याओं से जूझ रहा है,तब जमीन से जुड़े ऐसे नेता का स्मरण और व्यवस्था में उनके योगदान को याद करना प्रासंगिक है। वर्तमान समय की ग्रामीण बदहाली, उपेक्षा, किसानों की आत्महत्याओं की घटनाएं, गांव से शहर की ओर बढ़ता पलायन, गांव- शहर के बीच बढ़ती आर्थिक सामाजिक विषमताएं आदि कई विषय उनके विचारों की प्रासंगिकता को जीवंत बनाए हुए हैं। उनके प्रयासों से ही कृषि क्षेत्र में आढ़तियों और बिचौलियों का दबदबा कम हो सका और किसानों के लिए नाबार्ड जैसी वित्तीय संस्थाएं गठित की जा सकी। आज हम चौधरी चरण सिंह जी की 118 में जयंती पर उनका स्मरण कर रहे हैं। उन्होंने जिन सवालों को जन्म दिया,उसके स्वर आज भी गुंजायमान हैं। देश में किसान आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी हुई है, खेती वर्तमान समय में मुनाफे का सौदा नहीं रह गया है। गांव महानगरों के उपनिवेश बन चुके हैं। कृषि पर बढ़ते बोझ को अन्य गैर कृषि कार्य में लगाने का सिलसिला भी लगभग मृतप्राय हो चुका है।  किसानों के मसीहा कहे जाने वाले प्रखर राजनेता चौधरी चरण सिंह की दूरदर्शिता और उनकी कार्यशैली से किसानों के लिए कई कल्याणकारी कार्यक्रमों को अमलीजामा पहनाया जा सका और किसानों की खुशहाली का मार्ग प्रशस्त हो सका। लेकिन कालांतर में सरकारी नीतियों का शिकार होकर किसान बदहाली का दंश झेलने को विवश हो गए। आज जरूरत है किसानों की दशा और दिशा सुधारने की। किसानों को खुशहाल किए बिना विकास की बातें बेमानी है।
(लेखक बिहार के पटना जिलांतर्गत करनौती ग्राम निवासी एक प्रगतिशील किसान हैं)

भगेरिया फाउंडेशन का रक्तदान शिविर 29 को


 * संस्था ने की अपील,
 रक्तदान कर पुण्य के भागी बनें

चक्रधरपुर :   शहर की ख्याति प्राप्त सामाजिक संस्था भगेरिया फाउंडेशन के तत्वावधान में स्व. बजरंग लाल भगेरिया की स्मृति में 29 दिसंबर को रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। संस्था की ओर से दसवीं बार रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शहर स्थित गुरुद्वारा परिसर में आयोजित होने वाले इस रक्तदान शिविर में रेड क्रॉस सोसाइटी, चक्रधरपुर की भी महत्वपूर्ण सहभागिता होगी। संस्था के पदधारियों और  सदस्यों ने आमजन से  इस रक्तदान शिविर को सफल बनाने की अपील की है। भागेरिया फाउंडेशन के पदधारियों ने कहा है कि रक्तदान महादान और  जीवनदान है। पीड़ित मानवता की सेवा में रक्तदान पुण्य का काम है। इसके लिए आगे आएं और मानवता की सेवा में अपनी सहभागिता निभाएं।

रेलवे रनिंग स्टाफ फेमिली सेमिनार आयोजित


 "लोको पायलट जीवन-संघर्ष एक कथा" लघु चलचित्र प्रदर्शित
 

चक्रधरपुर : रेलवे मंडल स्थित महात्मा गांधी कल्याण मण्डप में रेलवे रनिंग स्टाफ फैमिली सेमिनार का आयोजन किया गया इस अवसर पर लोको पायलट जीवन संघर्ष एक कथा नामक लघु चित्र भी प्रदर्शित की गई लगभग 15 मिनट के इस लघु चलचित्र में लोको पायलट की संघर्षपूर्ण जीवन शैली को दर्शाया गया है। इस समारोह के मुख्य अतिथि एडीआरएम बीके सिन्हा और सीनियर डी ई ई एसडी शर्मा थे। इस शाॅर्ट मूवी को कैमरा में कैद करने की जिम्मेदारी एचएमपी प्रोडक्शन की थी। जिसमे पवन, हेम सागर, जय, अनिकेत, रजनी , एवं उनके टीम का मुख्य योगदान रहा। रेलवे रनिंग स्टाफ ने लोको पायलट की दिनचर्या और उनकी कार्यशैली से संबंधित कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी इस लघु चलचित्र के माध्यम से प्राप्त किया। इस अवसर पर काफी संख्या में रेलकर्मी मौजूद थे।

विलक्षण व्यक्तित्व के मालिक हैं हेमंत गुप्ता



* प्रबंधकीय और प्रशासनिक कार्यों में दक्ष व्यक्ति सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर बखूबी अपनी सहभागिता निभाए, ऐसा उदाहरण कम ही देखने को मिलता है। ऐसे व्यक्ति विलक्षण प्रतिभा के धनी होते हैं। ऐसी ही शख्सियतों की श्रेणी में शुमार हैं हेमंत गुप्ता। श्री गुप्ता फिलवक्त एचईसी में महाप्रबंधक (कार्मिक व प्रशासनिक) सह मुख्य नगर प्रशासक के पद पर सेवारत हैं। अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव सजग रहने वाले हेमंत गुप्ता बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति हैं। एचईसी में उनकी पहचान एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में तो है ही, साथ ही साथ सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी लोगों के बीच उनकी एक विशिष्ट पहचान है। वह रांची में ही पले-बढ़े। उनकी प्रारंभिक शिक्षा राजधानी रांची स्थित मारवाड़ी हाई स्कूल से हुई। वहीं से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। तत्पश्चात रांची कॉलेज से इंटरमीडिएट व स्नातक तक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने एक्सआईएसएस से  मैनेजमेंट की डिग्री हासिल की। रांचीवासी श्री गुप्ता के पिता स्व.शिव रतनलाल गुप्ता और माता स्व. सुंदर देवी गुप्ता भी सुप्रसिद्ध समाजसेवी के रूप में जाने जाते थे। हेमंत गुप्ता को समाजसेवा की प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली। मैनेजमेंट की डिग्री प्राप्त करने के बाद श्री गुप्ता  21 सितंबर 1982 को एचईसी में बतौर कार्यपालक अधिकारी (प्रशिक्षु)  नियुक्त हुए। अपनी व्यवहारकुशलता, उत्कृष्ट कार्यशैली, कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी के बलबूते वह एचईसी में कदम-दर-कदम आगे बढ़ते गए। कार्यपालक अधिकारी से जूनियर मैनेजर, फिर असिस्टेंट मैनेजर,डिप्टी मैनेजर,मैनेजर, सीनियर मैनेजर,सीनियर डीजीएम और फिर जीएम के पद तक प्रोन्नत हुए। अपने कार्यकाल के दौरान एचईसी में उन्होंने कई उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने में सफलता पाई। वह अपने सहकर्मियों और मातहत कर्मियों के साथ समन्वय स्थापित कर एचईसी के विकास में महत्वपूर्ण सहभागिता निभाते आ रहे हैं। राज्य सरकार और अन्य संस्थाओं/संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर निगम की बेहतरी के लिए उन्होंने कई ऐसे उल्लेखनीय कार्य किए हैं, जो मील का पत्थर साबित हुए हैं। श्री गुप्ता एक कुशल प्रशासनिक और प्रबंधकीय अधिकारी होने के अलावा आरटीआई एक्टिविस्ट भी हैं।  प्रबंधकीय और प्रशासनिक कार्यों में दक्षता प्राप्त श्री गुप्ता विजिटिंग फैकल्टी के रूप में विभिन्न संस्थानों में भी अपने अनुभवों का लाभ पहुंचाने के लिए व्याख्यान देने जाते हैं। समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रणी संस्था रोटरी क्लब और वाईएमसीए से भी वे जुड़े हैं। सूचनाधिकार कार्यकर्ता के रूप में भी उनकी एक विशिष्ट पहचान है। इससे संबंधित उनके विभिन्न आलेख कई समाचार पत्रों में भी प्रकाशित होते रहे हैं। संगीत प्रेमी श्री गुप्ता को देश-विदेश के नामचीन हस्तियों के ऑटोग्राफ कलेक्शन करने का भी शौक है। वह बताते हैं कि उनके पास देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी, विश्वविख्यात समाजसेवी और नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा सहित अन्य कई हस्तियों का ऑटोग्राफ्स हैं। उनकी पत्नी सुजाता गुप्ता भी समाजसेवा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों में अपनी सहभागिता निभाती रहती हैं।श्रीमती  गुप्ता रांची के हटिया स्थित निफ्ट में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। हेमंत गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने 37 वर्ष से अधिक अवधि एचईसी में बतौर अधिकारी बिताए हैं। इस दौरान उन्होंने एचईसी की बेहतरी के लिए कई ऐसे कार्य किए हैं, जो आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय ही नहीं प्रेरणा स्रोत भी है। श्री गुप्ता इसी वर्ष 31 दिसंबर को एचईसी से सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उन्होंने 37 वर्षों की सेवा काल के दौरान एचईसी में कई उतार-चढ़ाव देखे। कंपनी को शिखर तक पहुंचाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह कहते हैं कि ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के बलबूते इंसान हर मुकाम हासिल करने में सफल हो सकता है। अपने कर्तव्यों को बखूबी निभाते हुए समाज सेवा के प्रति भी हर नागरिक को सजग रहने की आवश्यकता है। इससे हमारा देश व समाज सशक्त होगा।
प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

शनिवार, 21 दिसंबर 2019

चक्रधरपुर में लाटरी और जुए पर कड़ी कार्रवाई


* थाना प्रभारी प्रवीण कुमार की कार्यशैली को पुलिस अधीक्षक ने सराहा

विनय मिश्र
चक्रधरपुर :  पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी प्रवीण कुमार  द्वारा शहर में हब्बा- डब्बा (जुआ) खेल तथा लॉटरी टिकट विक्रेताओं के विरुद्ध  सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप चक्रधरपुर शहर में जुआरियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। पूरे चक्रधरपुर शहर में जुआ और लाॅटरी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रवीण कुमार का मानना है कि जुआ के संचालन से आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। इससे लोगों का पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होता है। पश्चिम सिंहभूम के पुलिस कप्तान इंद्रजीत माहथा ने भी थाना प्रभारी की इस पहल को सराहा है। जनहित में जिला पुलिस के कार्यों को गंभीरता के साथ पूरा किये जाने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की है। श्री कुमार के मुताबिक  अपराध नियंत्रण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हब्बा-डब्बा खेल व लॉटरी टिकट की बिक्री रोकने के लिए वे कटिबद्ध हैं। यही नहीं, थाना रोड पर दिनभर भारी-भरकम वाहन खड़ा कर सामग्री उतारने पर दुर्घटना की आशंका को देखते हुए उन्होंने यह निर्देश दिया है कि  सुबह 8 बजे से पूर्व या फिर रात्रि बेला में सामग्री उतारा जाए। ताकि यातायात व्यवस्था बाधित न हो।  गौरतलब है कि सोनुवा मार्ग अति व्यस्त है तथा दिनभर मार्ग व्यस्त रहने पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए आमजन को सुगम, सुव्यस्थित और सुरक्षित यातायात के लिए पुलिस निरीक्षक ने यह कदम उठाया है। उनकी इस पहल की  चहुंओर सराहना की जा रही है।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...