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शुक्रवार, 15 जून 2018

सुबोधकांत ने किया कांग्रेस का जनाधार बढ़ने का दावा




रघुवर सरकार पर साधा निशाना

रांची। झारखंड में कांग्रेस का जनाधार बढ रहा है। संगठन मजबूत हो रहा है। जन समस्याओं के प्रति कांग्रेस पार्टी की सक्रियता से जनता का रूझान कांग्रेस की ओर हो रहा है। राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण भाजपा से जनता का मोह भंग होने लगा है। झारखंड में विपक्षी गठबंधन मजबूत हो रहा है। कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने के साथ साथ सम्पूर्ण विपक्ष को भी एकजुट करने में जुटी है। झारखंड के साथ साथ पूरे देश की जनता भाजपा की जनविरोधी नीतियों से त्रस्त है। कर्नाटक चुनाव और उसके बाद लोकसभा के चार सीटों और विधान सभा की दस सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणामों से यह स्पष्ट हो गया है कि अब देश में भाजपा का सफाया होनेवाला है।  आगामी चुनाव में जनता भाजपा को सबक सिखाएगी। यह बात पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकामत सहाय ने कही।
    उन्होंने कहा कि रघुवर दास अमित शाह और नरेन्द्र मोदी के लिलिपुट संस्करण है। धरातल पर झारखंड में कोई काम नहीं दिख रहा है। महज कागजी घोडे दौडाये जा रहे है। रघुवर सरकार झूठी उपलब्धियां गिनाने में मश्गूल है। राज्य की जनता बुनियादी समस्याओं को तरस रही है। बिजली और पानी का संकट गहरा रहा है। बिजली की आंख मिचौनी से लोग त्रस्त है। उपभोक्ताओं को खपत के अनुसार बिजली नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है और सरकार हर घर और गांव गांव बिजली पहुंचाने के दावे करती है। यही हाल पेयजलापूर्ति का है। खास कर गर्मी के मौसम में लोगों को पीने का पानी पर्याप्त नहीं मिल पाता है।
 सूबे में नक्सली गतिविधियां थम नहीं रही है। लेवी के लिए जगह जगह वाहन फूंके जा रहे है। ठेकेदारो को धमकियां दी जा रही है। फर्जी मुठभेड में निर्दोष ग्रामीण मारे जा रहे है। नक्सलियों की नकेल कसने में सरकार पूरी तरह विफल है। आये दिन पुलिस के साथ मुठभेड़ की वारदात हो रही है। राज्य में अपराध का ग्राफ बढ रहा है। अपहरणफिरौतीदुष्कर्म की घटनाएं सरेआम हो रही है। राज्य में चारो तरफ भय और आतंक का माहौल है।
    श्री सहाय ने कहा कि राज्य गठन के बाद अब तक सैंकडो एमओयू हुए। इनमें से अधिकतर कागजों तक ही सिमट कर रह गए। रघुवर सरकार ने मोमेंटम झारखंड में हाथी को उडा दिया। मोमेंटम झारखंड का आयोजन कर बहुत निवेशकों को बुलाया और उनके साथ एमओयू किये। लेकिन धरातल पर कुछ नहीं दिख रहा है। यह सब रघुवर सरकार की महज राजनीतिक स्टंटबाजी हैं। राज्य में पूंजीनिवेश और रोजगार के नाम पर जनता को सब्जबाग दिखाए गये। अब तक एक भी उद्योग धरातल पर नहीं उतर पाया है। अगले चुनाव में भाजपा को जनता करारा जवाब देगी।


हजारीबाग के हुरहुरु में 1008 कलश यात्रा के साथ महायज्ञ का शुभारम्भ



 सदर विधायक माननीय मनीष जायसवाल .ने भगवा पताका दिखाकर किया रवाना



मनीष कुमार
हजारीबाग। शहर के हुरहरु मोहल्ले में आयोजित पांच दिवसीय श्री श्री 108 शतचंडी महायज्ञ का गुरुवार को अहले सुबह विधिवत शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण और विशेष पूजा-अर्चना के बाद 1008 आकर्षक कलश यात्रा के साथ हुवा| मौके पर बतौर अतिथि सदर विधायक मनीष जायसवाल और जिला बंदोवस्त पदाधिकारी दीपक शाही सहित अन्य लोगों ने महिलाओं और बालाओं को कलश देकर और कलश यात्रा को भागवा पताका दिखाकर रवाना किया|
इस भव्य कलश यात्रा के दौरान जहाँ महिलाएं और बालाएं भगवा वस्त्र धारण कर ललाट पर “जय माता दी” लिखा बैंड के साथ पीले रंग का कलश माथे में लिए अनुशासित तरीके से ढोल- तासा, ढ़ाक- बांसुरी की धुन और डीजे पर बजते सुमधुर गीत संग खुद भक्ति गीत गाते हुए कतारबद्ध होकर चल रही थी वहीँ पुरुष वर्ग भी संयमित होकर भगवा वस्त्र के साथ कंधे में भगवा गमछा धारण करते हुए भगवत और भगवती के जयकारे लगाते हुए और विशाल भगवा पताका हाथों में हलराते हुए साथ- साथ चल रहे थे| उक्त अद्भुत दृश्य से जहाँ पूरा ईलाका भागवामय हो गया वहीँ भगवत जयकारे से वातावरण भी गुंजयमान हो उठा| उक्त पांच दिवसीय महायज्ञ के दौरान यहाँ हवन, आरती, प्रवचन, जागरण, महाप्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन किया जाएगा| यज्ञ स्थल पर भगवान गणेश जी, लक्ष्मी जी, शिव- पार्वती सहित सम्पूर्ण शिवपरिवार, दुर्गा देवी की प्रतिमा और सभी प्रमुख राहों पर आकर्षक प्रवेश द्वार का निर्माण कराया गया है|
यज्ञ स्थल पर आकर्षक यज्ञ मंडप के साथ ही एक अनोखे प्रकार का हवन कुण्ड का भी निर्माण कराया गया है, जहाँ प्रतिदिन लोगों के द्वारा परिक्रमा कर मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकेगा| कलश यात्रा को लेकर जिला प्रशासन द्वारा विशेष विधि- व्यवस्था का भी इंतेजाम किया गया है| यज्ञ को इचाक से पंहुचे परमेश्वर पाण्डेय और स्थानीय पंडित लक्ष्मी पाण्डेय, सच्चीदानंद पाण्डेय, महेंद्र पाण्डेय, देवेन्द्र शर्मा, संतोष पाण्डेय, कामेश्वर पाण्डेय, अजय पाण्डेय, निलेश पाण्डेय, अवधेश कुमार शर्मा, पंकज शर्मा, चंदन शर्मा, शिवनंदन शर्मा और प्रेम ओझा द्वारा यज्ञोपवित कार्य संपन्न कराया जाएगा |
मौके पर सदर विधायक श्री जायसवाल ने उपस्थित विशाल भक्त समूह को संबोधित करते हुए कहा की माँ दुर्गा को शक्ति की देवी कहा जाता है| उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए शतचंडी महायज्ञ का आयोजन यहाँ किया जा रहा है| शतचंडी यज्ञ को सनातन धर्म में बेहद शक्तिशाली वर्णित किया गया है| उन्होंने कहा की निश्चित रूप से विश्वकल्याण की भावना से हो रहे यज्ञ के आयोजन समाज में सद्भाव और एकता का संदेश बिखरेगा और क्षेत्र में सुख- शांति स्थापित होगी| उन्होंने कहा सभी लोगों से आग्रह करते हुए कहा की शुद्धता, सात्वीकता और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए सामाजिक बुराइयों और व्यसनों से दूर रहकर पवित्रता और अनुशासित तरीके से यज्ञ को सफल बनावे और बिगड़े हुए ग्रहों की स्थिति में सुधार लाते हुए सौभाग्य को अपने साथ बुलावें |
उक्त मौके पर विशेषरूप से रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव नीरज कुमार, स्थानीय वार्ड पार्षद सुबोध पासवान, पप्पू यादव, बंटी तिवारी, दिलीप यादव, अजय पासवान, शंकर यादव, तिलक यादव उर्फ़ टिंकू, मुकेश कुमार सोनी, शंकर यादव, युगल यादव, संजय पासवान, राजन सोनकर, रवि वर्मा, अंक्षा साव, ढेला भुइंया, बासुदेव साव, महाबीर साव, मिंटू वर्मा, महेंद्र साव, टिंकू साव, विधायक मिडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी सहित सैकड़ों अन्य स्थानीय लोग उपस्थित थे |

दिलवालों की दिल्ली में धूल की चादर

समरेंद्र कुमार


नई दिल्ली। दिल्ली में धूल भरी आंधी का कहर जारी है। राजस्थान की ओर से आती इस आंधी के कारण दिल्ली के रेगिस्तान में परिणत हो जाने की आशंका है। इस आंधी के थमने के आसार नहीं दिख रहे। इतना प्रदूषण है कि लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने मास्क लगाकर ही घर से निकलने की हिदायत दी है। मंगलवार को दिल्ली में कई जगहों पर सामान्य से 18 गुना तक अधिक प्रदूषण मिला। गाजियाबाद, नोएडा में भी प्रदूषण के कारण लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। बुधवार को भी पूरी दिल्ली धूल की चादर में लिपटी-सी नजर आई। सीपीसीबी के अनुसार दिल्ली का एयर इंडेक्स 445 रहा। सफर के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले 24 घंटे तक इस प्रदूषण से दिल्ली को राहत नहीं मिलेगी।
प्रदूषण बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पीएम 10 का स्तर है। दिल्ली की 20 जगहों पर पीएम 10 का स्तर 10 गुना से अधिक रहा। सबसे अधिक पीएम 10 का स्तर मुंडका में 1804 एमजीसीएम (माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर), नरेला में 1702, नरेला में 1646, रोहिणी में 1666, जहांगीरपुरी में 1552, अरबिंदो मार्ग पर 1530, पंजाबी बाग में 1488, आनंद विहार में 1405, जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में 1462, पटपड़गंज में 1312, अशोक विहार मे 1499 रहा। पीएम 2.5 का स्तर भी बवाना में सबसे अधिक 411, कर्णी सिंह स्टेडियम में 321, मेजर ध्यान चंद स्टेडियम में 333, पटपडगंज में 318, वजीरपुर में 301 एमजीसीएम रहा।
सीपीसीबी के अनुसार शाम 6 बजे पीएम 10 का स्तर 850 एमजीसीएम रहा। इसकी वजह से दिल्ली में विजिबिलिटी कम रही और धूल की चादर देखने को मिली। सीएसई पहले ही गर्मियों में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जता चुकी है। इसी माह जारी एक रिपोर्ट में सीएसई (सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वाइरनमेंट) ने दावा किया था कि एक अप्रैल से 27 मई 2018 के बीच 65 पर्सेंट दिनों में दिल्ली का एयर इंडेक्स खराब और बहुत खराब रहा है। इस दौरान सिर्फ एक पर्सेंट दिल्ली दिल्ली वालों को साफ हवा में सांस लेने का मौका मिला।
डीपीसीसी के अनुसार इस समय पीएम 10 का स्तर काफी अधिक है। पीएम 2.5 का स्तर काफी जगहों पर बहुत अधिक नहीं है। तेज हवाओं की वजह से धूल बढ़ी है और यही पीएम 10 बढ़ने की वजह है। एक्सपर्ट के अनुसार इस तरह के धूल भरे प्रदूषण में रहने पर लोगों को कफ, एलर्जी, लंग इंफेक्शन, दिल की बीमारी आदि का खतरा होता है। वहीं इस धुंधले माहौल के बीच मंगलवार की सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर इस धूल की वजह से विजिबिलिटी भी 3.5 किलोमीटर रही जो शाम तक कम होकर 1.5 किलोमीटर रह गई। ईपीसीए के चेयरमैन डॉ. भूरे लाल के अनुसार स्थिति पर हम नजर रखे हुए हैं। सिविक एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं। यदि 24 घंटे तक इसी तरह का प्रदूषण स्तर रहता है तो उचित कदम उठाए जाएंगे।
राजस्थान की धूल राजस्थान की बजाय दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषित कर रही है। सीपीसीबी व अन्य प्रदूषण कंट्रोल एजेंसियां इस समय दिल्ली में बढ़े प्रदूषण की वजह राजस्थान की धूल को मान रही हैं। राजस्थान की आंधी की वजह से हवाओं के साथ वहां की धूल दिल्ली में पहुंच रही हैं। लेकिन एयर इंडेक्स की बात करें तो धूल के बावजूद राजस्थाान में इस समय दिल्ली-एनसीआर से कम प्रदूषित है।
राजस्थान के कई शहर में तो एयर इंडेक्स 200 से भी नीचे हैं। दिल्ली एनसीआर की फिजा में सोमवार से ही धूल की मोटी परत दिखाई दे रही है। जिसकी वजह से लोगों का दम घुटने लगा है। लोगों को काफी अधिक परेशानियां हो रही हैं। GRAP के अनुसार 16 घंटों से पीएम 10 का स्तर इमर्जेंसी से अधिक चल रहा है। एक्सपर्ट के अनुसार निश्चित तौर पर राजस्थान की धूल के अलावा लोकल वजहों से भी प्रदूषण बढ़ा है। दिल्ली में इस समय जमीनी स्तह पर हवाएं तेज हैं। ऐसे में राजस्थान की धूल के साथ दिल्ली की धूल भी शामिल हो रही है और प्रदूषण बढ़ रहा है। इस समय दिल्ली में 7000 से 15000 फिट उंचाई तक धूल की चादर देखी जा रही है। इससे कब छुटकारा मिलेगा कहना कठिन है।

अपने अधिकारों के प्रति जागरुक हों उपभोक्ताः किरण सिंह

रांची। राजधानी की सामाजिक संस्था सिटीजन एक्शन ग्रुप की संयोजक व लोकप्रिय समाज सेविका किरण सिंह ने कहा है कि उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना जरूरी है। इसके अभाव में उपभोक्ताओं को ठगे जाने की संभावना अधिक रहती है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए कई कानून बनाए गए हैं।इन कानूनों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ साथ गैर सरकारी स्तर पर भी प्रयास किए जाने की जरूरत है। इस दिशा में माप तौल विभाग की भी भूमिका महत्वपूर्ण है। पेट्रोलियम पदार्थों ,घरेलू गैस, किरासन आदि की खरीदारी के समय विशेष रूप से सतर्क रहें। श्रीमती सिंह ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित किसी भी सामग्री की खरीदारी करते समय संबंधित दुकान से बिल अवश्य लें।
 उन्होंने कहा कि जनवितरण प्रणाली के दुकानों से खाद्यान्न लेते समय लाभुकों को सही मात्रा में अनाज देना सुनिश्चित करना पीडीएस दुकानदारों की जिम्मेदारी है। लाभुकों को निर्धारित मात्रा से कम अनाज देना उपभोक्ता कानून का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि सिटीजन एक्शन ग्रुप जल्द ही राजधानी के विभिन्न इलाकों में नियमित रूप से उपभोक्ता हितों के संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान शुरू करेगी। इस अभियान में शहर के महिला स्वयं सहायता समूहों का भी सहयोग लिया जाएगा।

गुरुवार, 14 जून 2018

गोड्डा में भीड़ हिंसा को लेकर राजनीति



गोड्डा। झारखंड में मवेशी चोरी के आरोप में दो लोगों की पीट-पीटकर हत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। भाजपा तो अल्पसंख्यकों को निशाने पर ले रही है लेकिन लेकिन विपक्षी दल किसी समुदाय को नाराज करने से बच रहे हैं। गोड्डा के भाजपा विधायक अमित कुमार मंडल एक संप्रदाय विशेष के लोगों के मवेशी चोरी और तस्करी में लिप्त होने का आरोप लगा रहे हैं तो जामताड़ा के कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी जवाबी हमले में आदिवासियों की जगह इस घटना के लिए आरएसएस को दोषी बता रहे हैं। उनके कथनानुसार संघ के लोगों ने आदिवासियों के कंधे पर बंदूक रखकर दागा है।
गोड्डा संताल परगना प्रमंडल का एक जिला है। डुल्लू और वनकट्टा गांव यानी घटनास्थल राज्य की राजधानी रांची से करीब 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। भीड़ हिंसा के शिकार 45 वर्षीय सर्फुद्दीन अंसारी उर्फ चरकू और 40 वर्षीय मुर्तजा अंसारी पड़ोस के केरकेटिया और बांजी पंचायत के रहने वाले थे। चरकू मवेशी चोरी के आरोप में पहले भी दो बार जेल की हवा खा चुका था। कुछ माह पूर्व महगामा थाना क्षेत्र में चोरी के आठ मवेशियों के साथ आठ लोग गिरफ्तार किए गए थे। उनमें चरकू शामिल था। यह इलाका पश्चिम बंगाल की सीमा से लगा हुआ है और बांग्लादेश में मवेशी तस्करी के रास्ते में शामिल है। पुलिस का मानना है कि इस अवैध धंधे में जुड़े अधिकांश तस्कर गिरोह अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की बहुलता वाले हैं। भीड़ हिंसा की इस घटना के बाद मृतकों की पंचायतों सहित जिले के अन्य अल्पसंख्यक बहुल गावों और पंचायतों में भय और आतंक का माहौल है। लोग तरह-तरह की आशंकाओं से ग्रसित, डरे और सहमे हुए हैं। घटना को लेकर राजनीति के कारण माहौल और भी तनावपूर्ण होता जा रहा है।
राज्य के मुखिया रघुवर दास इस घटना को लेकर मौन हैं। चुनाव सर पर हैं। ऐसे में समझदार नेता कोई भी बयान बहुत सोच समझकर देते हैं। घटना में भाजपा या संघ को सीधे तौर पर घेरा नहीं जा सकता। कांग्रेस अल्पसंख्यकों के पक्ष में खड़ी होकर उनके बीच अपनी पैठ बढ़ाने और राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। लेकिन आदिवासियों को नाराज भी नहीं कर सकती। इसीलिए वह संघ और भाजपा पर निशाना साध रही है और आदिवासियों को मासूम बताने का प्रयास कर रही है। मुसलिम वोटरों पर झामुमो और कांग्रेस की पकड़ है। घटना दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन समस्या यह है कि इसमें एक तरफ आदिवासी हैं दूसरी तरफ अल्पसंख्यक। राज्य में दोनों की जनसंख्या निर्णायक है। भाजपा के अलावा कोई भी राजनीतिक दल इनमें से किसी समुदाय के वोटरों को नाराज करना नहीं चाहेगा। ध्रुवीकरण की कोशिश की गई तो यह विरोधी दल के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। पहले यह वोट झामुमो और भाजपा के बीच विभाजित हो जाते थे लेकिन विपक्षी गठबंधन बनने के बाद उनका साझा उम्मीदवार मैदान में उतरेगा। झारखंड मुक्ति मोर्चा इस घटना को लेकर कोई बयान देने से बच रहा है। दोनो ही समुदायों में उसका आधार है। वह किसी को नाराज नहीं कर सकता। घटना को राजनीतिक रंग देने की कोशिश दिलचस्प परिदृश्य उत्पन्न कर रही है।


जंगली हाथियों पर अंकुश लगाने की तैयारी

झारखंड जंगली हाथियों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए जीपीएस युक्त रेडियो कालर लगाने का काम शुरू हो चुका है। इसके लिए कोलकाता से विशेषज्ञों की टीमें बांकुड़ा और मिदनापुर के लिए रवाना की जा चुकी हैं। बेंगलुरु स्थित एशियन नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन के वैज्ञानिक इस अभियान में बंगाल वन विभाग के साथ शमिल हैं। उनके दो वैज्ञानिकों के साथ बेहोशी की दवा देने के विशेषज्ञ भी मोर्चे पर आ जुटे हैं।
झारखंड के दलमा पहाड़ पर हाथी परियोजना से हाथियों के दो झुंड अभी बांकुड़ा और मिदनापुर के जंगलों में हैं। उन्होंने आसपास के गांवों में आतंक मचा रखा है। दलमा के हाथी हर वर्ष गर्मियों में पश्चिम बंगाल के जंगलों का रुख करते हैं और बरसात के मौसम में वापस लौट आते हैं। हाथियों की टोली का नेतृत्व हमेशा मादा हथिनी करती है। वन्य जीवन के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि झुंड की मुखिया को जीपीएस युक्त रेडियो कालर लगा दिया जाए तो उसकी टोली की गतिविधियों पर नज़र रखा जा सकता है। इसके कारण मानव बस्तियों में उनके उपद्रव को भी काफी हद तक रोका जा सकेगा। हर वर्ष होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
जैसे ही हाथियों के किसी झुंड के मानव बस्ती के करीब होने की जानकारी मिलेगी पालतू हाथी और ग्रामीणों की हल्ला पार्टी को जुटाकर उन्हें जंगल में वापस खदेड़ दिया जाएगा। जीपीएस युक्त रेडियो कालर लगाने के लिए दिलचस्प तकनीक अपनाई जाती है। सबसे पहले झुंड के लोकेशन का पता किया जाता है इसके बाद झुंड के नेता की पहचान की जाती है और सकी गतिविधियों की निगरानी की जाती है। उनकी पहचान कोई मुश्किल काम नहीं। आम तौर पर झुंड की मुखिया सबसे ऊंचे कद की और तगड़े शरीर की होती है। उसकी पहचान और सके स्वभाव के अध्ययन के बाद हल्ला पार्टी को जुटाकर झुंड में भगदड़ मचा दी जाती है। जब झुंड की मुखिया थोड़ा अकेले हो जाती है तो से जाइलाजिन नामक नशीली दवा से युक्त गोली से प्रहार किया जाता है। इसके कारण हथनी आधे घंटे के लिए बेहोश जाती है। गोली लगने के बाद वह शुरुआती दस मिनट वह नशे में रहती है फिर 20 मिनट तक अचेत हो जाती है। उसी बीस मिनट के अंदर उसे जीपीएस रेडियो कालर से युक्त कर दिया जाता है। होश आने पर वह अपनी टोली को एकत्र कर लेती है। जानकारी के मुताबिक अभी दलमा पहाड़ी के 30 हाथी दो टोलियों में बंटकर मिदनापुर और बांकुड़ा में मौजूद हैं। वन विभाग के अधिकारियों को उनके लोकेशन की जानकारी है। वे उनके जंगल के छोर पर किसी मानव बस्ती तक पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।

-देवेंद्र गौतम

नक्सली इलाकों में अंधविश्वास का मतलब



झारखंड के माओवादी सिर्फ दहशत फैलाकर लेवी वसूल रहे हैं। जनता की पिछड़ी चेतना को उन्नत करने के लिए जन-शिक्षण का कोई कार्यक्रम नहीं चला रहे हैं। इसीलिए उनके सघन प्रभाव वाले इलाकों में भी भूत-प्रेत, डायन बिसाही जैसी आदिम आस्थाएं अभी तक बरकरार हैं। नक्सलवाद अथवा माओवाद एक वैज्ञानिक विचारधारा है। उसके अलमदार यदि सिर्फ पैसे उगाहने के लिए हथियार का उपयोग करते हैं तो उनसे किसी सामाजिक क्रांति या व्यवस्था परिवर्तन की उम्मीद नहीं की जा सकती। वामपंथ पिछड़ी चेतना को उन्नत करने की सीख देता है। पिछड़ी चेतना से ग्रसित जन किसी जन क्रांति का हिस्सा नहीं बन सकते। वामपंथ के सिद्धांतकार यह बात स्पष्ट कर चुके हैं।
पिछले बुधवार की घटना है। झारखं की राझधानी रांची से करीब 235 किलोमीटर की दूरी पर नक्सल प्रभावित पलामू जिले में 45 वर्षीय दलित महिला कलावती और उसके 25 वर्षीय भतीजे संजय राम को डायन होने के आरोप में ग्रामीणों ने पेड़ पर बांध दिया और उनकी पिटाई करने लगे। घटना छत्तरपुर प्रखंड के मदनपुर गांव के रविदास टोले की है। ग्रामीणों का मानना था गांव में कई मौतें कलावती के काले जादू के कारण हुई हैं। उसपर उसके किसी पितर का साया है और संजय राम इस काम में उसका मददगार है। अंधविश्वास में डूबे ग्रामीण उनकी पीट-पीटकर हत्या करने की तैयारी में थे कि तभी इतेफाक से किसी जागरुक ग्रामीण ने मोबाइल पर पुलिस को घटना की सूचना दे दी। ग्रामीणों के बीच यह बात फैला दी गई कि पुलिस चल पड़ी है और पहुंचने ही वाली है। इसका असर हुआ और पिटाई बंद कर उन्हें बंधनमुक्त कर दिया गया। पुलिस आई और भुक्तभोगियों को अपने साथ ले जाने लगी तो ग्रामीणों ने इसका जमकर विरोध किया। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि काला जादू कुछ नहीं होता है। यह अंधविश्वास है लेकिन पीढ़ियों से मन की गहराई तक जमा अंधविश्वास अपनी जगह बरकरार रहा। भारी प्रतिरोध के बीच पुलिस किसी तरह उन्हें छत्तरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक ले जा सकी। चोट तो दोनों को लगी थी लेकिन कलावती संजय से कहीं ज्यादा जख्मी और डरी हुई थी। ग्रामीणों का आरोप था कि डायनों को पुलिस जबरन छुड़ाकर ले गई और विरोध करने पर एक महिला की पिटाई कर उसकी टांग तोड़ दी। उन्हें इस बात पर भी आपत्ति थी कि पुलिस ने कलावती को सुरक्षा की दृष्टि से खजूरी ग्राम स्थित उसके मैके पहुंचा दिया था। रविदास टोला में किसी की भी कलावती से सहानुभूति नहीं थी। सभी उसे डायन मान रहे थे और सकी पिटाई को उचित करार दे रहे थे। पुलिस ने दोनों ओर से प्राथमिकी दर्ज करने की अपनी औपचारिकता पूरी की। टोले में अभी भी पुलिस के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।
दलितों को नक्सलियों का मुख्य सामाजिक आधार वर्ग में शुमार किया जाता है। दलितों के उस टोले के लोग अंधविश्वास में डूबे हुए हैं तो इसका सीधा मतलब है कि नक्सलियों ने उन्हें अपनी वैज्ञानिक विचारधारा से दीक्षित नहीं किया। सवाल है कि क्या लेवी का धन इकट्ठा करने से और गोला-बारूद जमा करने से, पुलिस बल पर हमला करने से भारतीय क्रांति संपन्न हो जाएगी...। झारखंड में किसी समय ईसाई मिश्नरियां भी आई थीं। उन्होंने कम से कम शिक्षा का प्रचार किया। आदिवासियों को जागरुक किया। आज भी उनके कामकाज के इलाकों के आदिवासी अपेक्षाकृत ज्यादा जागरुक और विकसित हैं। आखिर नक्सली उनके बीच कौन सा अभियान चला रहे हैं। अंध-आस्थाओं पर उन्होंने कभी प्रहार किया हो। जन अदालत लगाई हो इसका कोई दृष्टांत नहीं है। आखिर आदिवासी समाज में उनकी मौजूदगी से अंतर क्या आया है,,,। चरम वामपंथ की धारा की उपलब्धि, प्रासंगिकता और औचित्य क्या है....।  

-देवेंद्र गौतम

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...