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मंगलवार, 17 जुलाई 2018

पर्यटन से सृजित हुआ 14.62 मिलियन रोजगार : अल्फोंस


नई दिल्ली। पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के. जे. अल्फोंस ने पिछले 4 वर्षों के दौरान अकेले पर्यटन क्षेत्र द्वारा देश कुल 14.62 मिलियन रोजगार के अवसर सृजित होने का दावा किया है। नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि पर्यटन क्षेत्र कुशल के साथ-साथ अकुशल क्षेत्र में नौकरी तलाशने वाले लोगों के लिए अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि इससे समाज के सभी वर्गों को रोजगार मिल रहा है।
मंत्री ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय अब भारत के पूर्वोत्तर के राज्यों के प्रति पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रचार गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जैसे मेघालय में एशिया का सबसे बड़ा गुफा वाला नेटवर्क है। ‘भारत में महिलाओं की सुरक्षा’ से संबंधित हालिया मीडिया रिपोर्ट को खारिज करते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि भारत पर्यटकों के लिए सुरक्षित है और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए पर्यटकों की सुरक्षा संबधी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि विदेश में देश को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने अमेरीका, यूरोप, चीन तथा नॉर्डिक देशों में कई ‘अतुल्य भारत रोड शो’ आयोजित किए हैं। मंत्री महोदय ने कहा कि अभी तक थीम पर आधारित 60 सेकेंड के अतुल्य भारत से संबंधित 3 वीडियो जारी किए जा चुके हैं और इन्हें सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में दर्शकों का समर्थन मिल रहा है।   

इस्पात सीपीएसई कर्मचारी पेंशन योजना घोषि‍त

नई दिल्ली। इस्‍पात मंत्रालय ने अपने नियंत्रण वाले विभिन्‍न सीपीएसई से पेंशन योजना लागू करने के प्रस्‍ताव पर सहमति जता दी है जो कार्यकारियों के मामले में 1 जनवरी, 2007 से तथा गैर-कार्यकारियों के मामले में 1 जनवरी, 2012 से या कंपनी के फैसले के आधार पर बाद की किसी तारीख से प्रभावी होगी। कर्मचारी यूनियनों तथा एसएआईएल, आरआईएनएल, एमएसटीसी, एफएसएनएल, एमईसीओएन एवं केआईओसीएल से संबंधित अधिकारी संगठनों से विस्‍तृत परामर्श के बाद इस समझौते पर सहमति हुई। केन्‍द्रीय इस्‍पात मंत्री चौधरी बीरेन्‍दर सिंह ने आज नई दिल्‍ली में इसकी घोषणा की।
मंत्री महोदय के साथ बैठक के दौरान कर्मचारी यूनियनों तथा अधिका‍री संगठनों के प्रतिनिधियों ने सेवानिवृत्ति लाभों, भविष्‍य निधि, ग्रेच्‍युटी एवं चिकित्‍सा लाभ के एक हिस्‍से के रूप में पेंशन योजना लागू करने सहित उनसे संबंधित विभिन्‍न मुद्दों पर चर्चा की। मंत्री महोदय ने सूचित किया कि इस्‍पात मंत्रालय के तहत सीपीएसई के कर्मचारियों को पहले ही चिकित्‍सा लाभ उपलब्‍ध कराए जा चुके हैं। एनएमडीसी एवं एमओआईएल ने भी द्वितीय वेतन संशोधन समिति की अनुशंसाओं के अनुसार अपने कर्मचारियों के लिए पेंशन योजना लागू की है। उन्‍होंने कहा कि अन्‍य सीपीएसई के कर्मचारियों द्वारा पेंशन योजना लागू किए जाने की लंबे समय से मांग की जाती रही है।
चौधरी बीरेन्‍दर सिंह ने कहा कि पेंशन योजना से इस्‍पात मंत्रालय के तहत सीपीएसई के 94,000 सेवारत तथा 56,000 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लाभ पहुंचेगा तथा 45 करोड़ रुपये प्रति महीने का अतिरिक्‍त वित्तीय बोझ बढ़ेगा। उन्‍होंने कहा कि पेंशन योजना सीपीएसई द्वारा सुलभता, भुगतान करने की क्षमता एवं निर्वहनीयता जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। इन योजनाओं को संचालित करने के लिए सरकारी बजटीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। योगदान की दर का निर्णय प्रत्‍येक वर्ष सीपीएसई के संबंधित बोर्डों द्वारा किया जाएगा जो अर्जित किए गए लाभ एवं सेवानिवृत्ति‍ लाभों के 30 प्रतिशत की अधिकतम ऊपरी सीमा (मूल वेतन +महंगाई भत्ता) के अनुसार कंपनी द्वारा कर्मचा‍री को दिए भुगतान पर निर्भर करेगा। पेंशन योजना के वा‍स्‍तविक विवरण एवं कार्यान्‍वयन की रूपरेखा का निर्माण प्रत्‍येक सीपीएसई के प्रबंधन द्वारा किया जाएगा।

संसद के मॉनसून सत्र के पहले सर्वदलीय बैठक





नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने संसद के मानसून सत्र के सुचारु संचालन में सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की है। संसद के कल से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र 2018 के पहले आज राज्यसभा और लोकसभा के सदस्‍यों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने उनसे राष्‍ट्रहित में रचनात्‍मक सहयोग का अनुरोध करते हुए कहा कि सरकार उनके द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों को पूरा महत्‍व देती है ऐसे में उन्‍हें विश्‍वास है कि सभी राजनीतिक दल संसद सत्र के सुचारू संचालन में पूरा सहयोग करेंगे और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा करेंगे।
आज सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक दल के नेताओं ने सत्र के दौरान उठाए जाने वाले अहम मुद्दों की जानकारी दी। सभी दलों ने बिना किसी व्यवधान या गतिरोध के संसद सत्र को सुचारू रूप से चलाने और दोनों सदनों में रचनात्मक चर्चा पर सहमति भी जताई। 
संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने सर्वदलीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार ने देशहित में सभी राजनीतिक दलों खासकर विपक्ष से सदन का कामकाज सही तरीके से चलाने में सहयोग का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि भारत के लोग चाहते हैं कि संसद में काम हो। श्री अनंत कुमार ने बताया कि सभी दल मॉनसून सत्र की सफलता के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार नियमों के तहत सदन में किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए हमेशा तैयार है और सत्र के सुचारू संचालन के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
सर्वदलीय बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, संसदीय मामलों के राज्यमंत्री विजय गोयल तथा जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण तथा संसदीय मामलों के राज्यमंत्री  अर्जुन राम मेघवाल सहित कई केन्द्रीय मंत्री भी उपस्थित थे।
संसदीय कार्यमंत्री ने बताया कि संसद का मॉनसून सत्र 2018 बुधवार 18 जुलाई से आरंभ हो रहा है और शुक्रवार 10 अगस्त, 2018 को समाप्त होगा। इस दौरान संसद की कुल 18 बैठकें होंगी। 24 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में 48 महत्वपूर्ण विधेयक लिए जाएंगे और उन पर चर्चा होगी। इनमें से 6 विधेयक ऐसे होंगे, जो अध्यादेश का स्थान लेंगे। ये विधेयक जिन अध्यादेश का स्थान लेंगे, उनमें भगौड़ा आर्थिक अपराध अध्यादेश 2018, आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 2018, उच्च न्यायालयों की कमर्शियल अदालतेंकमर्शियल डिविजन्स और कमर्शियल अपीलीय डिविजन्स (संशोधन) अध्यादेश, 2018, होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) अध्यादेश2018, राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय अध्यादेश, 2018, इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2018 शामिल हैं।
इसके अलावा मॉनसून सत्र में दोनों सदनों में लंबित पड़े कुछ और महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा होगी और उन्हें पारित किया जाएगा। इनमें उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2018, नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय आर्बिट्रेशन केन्द्र विधेयक 2018, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों का संरक्षण विधेयक, 2016, संविधान का 123वां संशोधन विधेयक 2017, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक 2017, मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017, मोटरवाहन संशोधन विधेयक 2017 और भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन विधेयक 2013 शामिल हैं।
सत्र के दौरान कुछ नये विधेयक भी पेश किए जाएंगे। मॉनसून सत्र के दौरान लाए जाने वाले विधेयकों की सूची के लिए यहां क्लिक करें।

ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य प्रमाण पत्रों का होगा डिजिटल प्रारूप



केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में प्रस्तावित संशोधन



नई दिल्ली। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन का मसौदा अधिसूचित किया है। इसमें राष्ट्रीय परमिट प्राप्त करने वाले सभी वाणिज्यिक वाहनों के लिए फास्टैग और वाहन ट्रेकिंग सिस्टम उपकरण को अनिवार्य किया है। वाहनो की विंड स्क्रीन पर फास्टैग वाला स्टीकर लगाना अनिवार्य होगा। मसौदा संशोधन में राष्ट्रीय परमिट प्राप्त करने वाले वाहनों के आगे और पीछे बोल्ड अक्षरों में ‘राष्ट्रीय परमिट या एन/पी’ शब्द लिखा जाना शामिल है। वाहनों को खींच कर ले जाने वाली गाड़ियों पर ‘एन/पी’ शब्द वाहन के पीछे या बाई तरफ लिखा जाएगा। खतरनाक और ज्वलनशील पदार्थ ले जाने वाले टैंकर का रंग सफेद होगा और टैंकर के आगे तथा पीछे दोनों तरफ निर्धारित सूचक अंकित होगा। वाहन के सामने और पीछे प्रतिबिंबित टेप लगा होगा।
प्रस्तावित मसौदे में यह भी कहा गया है कि नए परिवहन वाहनों के लिए किसी तरह के फिटनेस प्रमाण-पत्र की जरूरत नहीं होगी। इस तरह के वाहनों के लिए पंजीकरण के 2 साल बाद फिटनेस प्रमाण-पत्र की जरूरत होगी। मसौदे में यह भी प्रस्तावित है कि 8 साल तक पुराने वाहनों के फिटनेस प्रमाण-पत्र की नवीनीकरण अवधि 2 साल तथा 8 साल से अधिक वाले वाहनों के लिए नवीनीकरण की अवधि 1 वर्ष होगी।
मसौदे में यह भी बताया गया है कि ड्राइविंग लाइसेंस और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र डिजिटल प्रारूप में दिया जा सकता है।
सभी माल वाहक वाहनों के लिए जरूरी होगा कि सामान को बंद गाड़ी या कंटेनर में ले जाएं। यदि सामान को खुले वाहन में ले जाना जरूरी हुआ तो उसे तिरपाल या अन्य सुविधाजनक सामग्री से ढककर ले जाया जाएगा। यदि सामान अभाज्य प्रकृति का है और बंद वाहन या ढककर नहीं ले जाया जा सकता है तो ऐसी स्थिति में उसे बिना ढके भी ले जाया जा सकता है।
इस संबंध में विस्तृत जानकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की वेबसाइट www. morth.nic.in पर उपलब्ध है। मंत्रालय ने प्रस्तावित मसौदे के लिए सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं जिसे 11 अगस्त, 2018 तक संयुक्त सचिव (परिवहन), सड़क परिवहन, राजमार्ग मंत्रालय, संसद मार्ग, नई दिल्ली – 110001 पर भेज सकते हैं या js-tpt@gov.in पर ईमेल कर सकते हैं।       

दुकान भाड़ा में वृद्धि का विरोध


एचईसी परिसर के दुकानदारों ने सुबोधकांत सहाय को बताई पीड़ा
किराए में बढ़ोत्तरी अनुचित : सहाय

रांची । एचईसी प्रबंधन की ओर से आवासीय परिसर में स्थित आवंटित दुकानों का किराया बढ़ाने के निर्णय का दुकानदारों ने विरोध किया है। मंगलवार को प्रबंधन के इस निर्णय के विरोध स्वरूप परिसर स्थित सेक्टर एक,दो व तीन मार्केट, शर्मा मार्केट, जेपी मार्केट, धुर्वा के सभी दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। दुकानदारों का एक प्रतिनिधिमंडल जगन्नाथपुर व्यवसायी संघ के बैनर तले वीरेंद्र सिंह व श्याम नारायण मिश्र के नेतृत्व में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय से मिलकर इस मामले में हस्तक्षेप कर समाधान का आग्रह किया। दुकानदारों ने श्री सहाय को बताया कि परिसर में लगभग 1200 दुकानें आवंटित है। जबकि अवैध दुकानों की संख्या बीस हजार से ऊपर है। अवैध दुकानों से प्रबंधन किसी प्रकार का शुल्क नहीं लेता है। वहीं वैध और आवंटित दुकानदार प्रबंधन को नियमित रूप से किराया, लीज रेंट व शुल्क का भुगतान करते हैं। श्री सिंह ने बताया कि वर्ष 2006 में एच ई सी प्रबंधन के साथ हुई वार्ता में सहमति बनी थी कि भविष्य मे किराया वृद्धि का निर्णय दुकानदारों के साथ बातचीत करने के बाद ही लिया जाएगा। अब प्रबंधन अपने ही वायदे से मुकर रहा है।
 श्री सहाय ने दुकानदारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रबंधन के इस मनमाने तुगलकी फरमान का विरोध किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने एच ई सी के सीएमडी अविजित घोष से फोन पर बात करते हुए दुकानदारों की समस्याओं से अवगत कराया और कहा कि भाड़ा बढ़ाने का निर्णय तर्कसंगत नहीं है। यह वर्ष 2006 मे हुई वार्ता का भी उल्लंघन है। उन्होंने इस संबंध में त्रिपक्षीय वार्ता कर हल निकालने पर बल देते हुए प्रबंधन से तत्काल भाड़ा वृद्धि वापस लेने की बात कही। श्री सहाय ने सीएमडी से कहा कि अवैध दुकानों की बढ़ती संख्या से आवंटित दुकानों के संचालकों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। दुकानदारों की बिक्री घट गई है। ऐसे में किराया बढ़ाया जाना अनुचित है। उनके मुताबिक प्रबंधन ने वार्ता के लिए सहमति जताई है। प्रतिनिधिमंडल में नवीन अंबष्ठ, संजीत कुमार सिन्हा, हरेन्द्र प्रसाद सहित अन्य शामिल थे।

झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक ने लिए महत्वपूर्ण निर्णय

                                                                                                             

रांची। रामकृष्ण धर्मार्थ फाउंडेशन (आर.के.डी.एफ.) विश्वविद्यालय विधेयक 2018 के अनुमोदन की स्वीकृति दी गई।
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वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग (सहकारिता प्रभाग)  अंतर्गत प्रस्तावित राज्य के विभिन्न जिलों में 5000 एम.टी. शीत गृहों के निर्माण हेतु कुल प्राक्कलित राशि 3091.12 लाख (तीस करोड़ इक्यानवे लाख  बारह हजार) मात्र एवं झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड रांची का एजेंसी चार्ज 6 प्रतिशत की दर से 185.46 लाख अर्थात कुल रुपए 3276.58 लाख (32 करोड़ 76 लाख 58 हजार) मात्र की स्वीकृति दी गई।

माननीय उच्चतम न्यायालय/उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में नवांगीभूत महाविद्यालयों के शिक्षक/शिक्षकेत्तर कर्मियों के सेवा का अन्तर्लीनीकरण एवं उनके वेतन निर्धारण के अनुमोदन की स्वीकृति दी गई।

मगही, भोजपुरी, मैथिली तथा अंगिका को झारखण्ड राज्य की द्वितीय राजभाषा घोषित करने के लिए बिहार राजभाषा (झारखण्ड संशोधन) विधेयक, 2018 के प्रारूप पर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति दी गई।

भारतीय मुद्रांक अधिनियम, 1899 की अनुसूची 1। में  संशोधन की स्वीकृति दी गई।

वित्तीय वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 में ज्ञानोदय योजनान्तर्गत ई-विद्यावाहिनी योजना एवं नीति आयोग के साथ हुए त्रिपक्षीय एकरारनामा के क्रम में गुणवत्त शिक्षा हेतु नियमित माॅनेटरिंग हेतु रूपये 71.62 करोड़ (एकहत्तर करोड़ बारसठ लाख) की स्वीकृति दी गई।

झारखण्ड अधिवक्ता लिपिक कल्याण निधि विधेयक, 2018 को अधिनियमित करने की स्वीकृति दी गई।

राधा गोविन्द विश्वविद्यालय, रामगढ़, रामचंद्र चन्द्रवंशी विश्वविद्यालय, पलामू एवं नेताजी सुभाष  विश्वविद्यालय, जमशेदपुर विधेयक 2018 के अनुमोदन की स्वीकृति दी गई।                                                                                            *

डोरंडा बालिका उच्च विद्यालय में सम्मानित की गई होनहार छात्राएं

प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित

रांची । राजधानी के श्री डोरंडा बालिका उच्च विद्यालय प्रांगण में सोमवार को प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर आदर्श संस्कार निर्माण हेतु छात्राओं का प्रतिज्ञान कराया गया। विद्यालय की ओर से जानकारी दी गई कि वर्ष 2018 के दसवीं बोर्ड का रिजल्ट अभूतपूर्व रहा। कुल 91 छात्राओं में 82 प्रथम श्रेणी से सफल रहे।इसम से  48 छात्राओं को डिस्टिंक्शन प्राप्त हुआ। इस अवसर पर विद्यालय एवं शिखर संस्कार संस्था द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये छात्राओं को सम्मानित किया गया। विद्यालय की टॉपर ऋतु कुमारी को शिखर सम्मान की ट्रस्टी नैना अजमेरा एवं चंद्रकला द्वारा नगद प्राइज दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश  रमेश मेरठिया थे। कार्यक्रम में दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉ राम सिंह,  डी.ए. वी हेहल के प्राचार्य  एम के सिन्हा,  शिखर संस्कार के अध्यक्ष एम .पी.अजमेरा,  विद्यालय सचिव  सुभाष चन्द्र बोथरा , विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य लब्धि जैन, घेवर चंद नाहटा , गौरी शंकर, जीतन राम, कलाकृति के निदेशक धनंजय कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। स्वागत भाषण  सुभाष चंद्र बोथरा ने दिया, वहीं अन्य सदस्यों ने भी अपने मंतव्य रखे।  इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। विद्यालय में कलाकृति स्कूल ऑफ आर्ट्स द्वारा निशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रही छात्राओं की चित्रकला प्रदर्शनी ने आगंतुकों का ध्यान बरबस अपनी ओर खींच लिया। श्री अजमेरा द्वारा छात्राओं का प्रतिज्ञान कराया गया। मंच संचालन मीनाक्षी शर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय की प्राचार्या काजल मुखर्जी ने किया। इस अवसर पर श्री डोरंडा मध्य विद्यालय एवं उच्च विद्यालय की शिक्षक-  शिक्षिकाएं सहित काफी संख्या में अविभावक एवं छात्राएं उपस्थित थीं ।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...