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बुधवार, 22 अगस्त 2018

स्वास्थ्य व शरीर के सर्वांगीण विकास के लिए दिनचर्या में शामिल करें खेल: सुधांशु सुमन




jरांची/ईटखोरी: बारा - पथरिया विष्णापुर में बुधवार को प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 34वाँ आजाद कप फुटबॉल टूर्नामेंट का भव्य उद्घाटन किया गया । फुटबॉल टूर्नामेंट का उद्घाटन मुख्य अतिथि तिरंगा सम्मान यात्रा के सूत्रधार सुधांशु सुमन पूर्व विधायक योगेन्द्र नाथ बैठा भद्रकाली महाविद्यालय के संस्थापक सचिव कुमार यशवंत नरायण सिंह तिरंगा सम्मान यात्रा के लोकसभा प्रभारी अजय सिंह समाजसेवी प्रियंका वर्मा झाविमो नेता बालगोबिन्द राम बैठा झाविमो युवा मोर्चा प्रखण्ड अध्यक्ष उमेश महतो शहरजाम मुखिया मंजू देवी संयुक्त रूप से फीता काट कर किया । उद्घाटन के मौके पर मुख्य अतिथि सुधांशु सुमन ने कहा कि सबसे पहले आजाद कप फुटबॉल टूर्नामेंट के आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ जो लगातार 34 वर्षो से फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन करवा रहें हैं । उन्होंने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य व शरीर के सर्वांगीण विकास के लिए अपने दिनचर्या में खेलों को शामिल करना जरूरी है। स्वास्थ्य शरीर में स्वास्थ्य मस्तिष्क होता है। उन्होंने कहा कि दस से बीस वर्ष तक की उम्र शरीर के विकास के लिए होती है। इस उम्र में अधिक टीवी देखने के साथ व्यसनों से दूर रहकर खेलों की ओर रूझान रखने वाले बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास अच्छा होता है। आप तमाम खिलाड़ियों को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं है आप अच्छे खेल का प्रदर्शन कर अपने गांव राज्य के नामों को रौशन करें अगर मेरी जरूरत पड़े तो हर समय आपकी मदद को तैयार रहूँगा । भद्रकाली महाविद्यालय के संस्थापक सचिव कुमार यशवंत नरायण सिंह ने कहा कि स्थानीय खिलाड़ियों की अपार क्षमता है इनकी प्रतिभा को निखारने की आवश्यकता है । सरकार ऐसे खिलाड़ियों पर ध्यान दें । पूर्व विधायक योगेन्द्र नाथ बैठा ने कहा कि गांव के खिलाड़ी कम संसाधन में भी अच्छे प्रदर्शन कर रहें हैं इनकी जितनी भी सराहना किया जाय कम है । समाजसेवी प्रियंका वर्मा ने कहा कि इस तरह के खेल के आयोजन से खिलाड़ियों को निखरने का मौका मिलता है । झाविमो केन्द्रीय सदस्य बालगोबिन्द राम बैठा ने कहा कि खेल से शारीरिक तथा मानसिक विकास होता है । आजाद कप फुटबॉल टूर्नामेंट में प्रथम पुरस्कार के रूप में 7100/= द्वितीय पुस्कार के रूप में 3100/= तथा तृतीय पुस्कार के रूप में 1100/= रूपये का पुरस्कार वितरित किया जाएगा । खेल का इंट्री फिस 301 /= रूपया रखा गया है । खेल को सफल बनाने में आजाद कप फुटबॉल टूर्नामेंट के अध्यक्ष रसिक कुमार सिंह सचिव नीरज कुमार सिंह कोषाध्यक्ष गणेश दांगी कप्तान दिनेश विश्वकर्मा व्यवस्थापक सुभाष राणा सक्रिय सदस्य निशांत कुमार सिंह समेत अन्य का नाम शामिल है । उद्घाटन मैच कटकम साड़ी तथा आजाद क्लब पथरिया के बीच खेला गया । इस मौके पर करनी पंचायत समिति सदस्य संजय रजक श्यामु सिन्हा सुनिल कुमार दांगी समेत हजारो की संख्या में दर्शक उपस्थित थे ।

गड़बड़ी फैलाने वाला पुलिस हिरासत में

हजारीबाग।  प्रातः 08.10 बजे जब मटवारी मस्ज़िद में हजारों लोगों द्वारा  बक़रीद की नमाज़ पढ़ी जा रही थी , फ़रहान खान उम्र 19 वर्ष पिता नौशाद खान साकिन मटवारी अचानक नंगी तलवार तथा लोडेड देशी पिस्तौल लेकर घुस गया और एक युवक का नाम लेकर चिल्लाने लगा जिससे अफरा तफ़री मच गई मौके पर मौजूद थाना प्रभारी कोर्रा, परिक्षयमान पु.अ. नि. कृष्ण कुमार , तथा सशस्त्र बल के सहयोग से उसे तत्काल क़ाबू में कर गिरफ्तार कर लिया गया तथा कोर्रा थाना कांड सँ. 82/18 दिनाँक 22.08.18 अंकित कर जेल भेज दिया गया , यह युवक पूर्व में ईद के अवसर पर हुये दंगे में भी गिरफ़्तार कर जेल भेजा जा चुका है ।

भाजयुमो ने किया राहुल गांधी का पुतला दहन

हजारीबाग़।  भारतीय जनता युवा मोर्चा हजारीबाग द्वारा स्थानीय आनंदा चौक पर कांग्रेस पार्टी का पुतला दहन  किया गया युवा मोर्चा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से उनके पार्टी के नेता पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्तान प्रेम पर चुप्पी को ध्यान में रखकर पुतला दहन किया गया।
     जिलाध्यक्ष सर्वेंद्र मिश्रा ने कहा सिद्धु द्वारा पाकिस्तानी सेना प्रमुख के साथ गले मिलना हमारे शहीद सैनिकों वाह उनके परिवार का अपमान है और राहुल गांधी इस पर चुप्पी साध कर बेनकाब हो गए।
       वही जिला महामंत्री अरविंद कुमार सिंह ने कहा की कांग्रेस हमेशा देश विरोधी राजनीति करती है! अगर नहीं तो कांग्रेस अध्यक्ष इस मुद्दे पर अपनी राय स्पष्ट करें।
         कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपाध्यक्ष रणधीर पांडे अनूप भाई वर्मा कुमुद गुप्ता, आशीष वर्मा, गौरव मिश्रा, अनुराग मिश्रा ,कटकमदाग मंडल अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार, नगर पश्चिमी मंडल अध्यक्ष सुनील कुमार वर्मा, मंडल अध्यक्ष गौरव मद्धेशिया, अंगज ठाकुर, सदर पूर्वी मंडल अध्यक्ष रणधीर सिंह, रितेश खंडेलवाल, सागर पांडे, संतोष गुप्ता, तारा गुप्ता, मुकेश सिंह, जितेंद्र राम, अभिषेक यादव, योगेंद्र यादव, प्रेम मेहता, उदयराज, राहुल कुमार, बिट्टू कुशवाहा, रोहित गुप्ता, सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल थे

हर हर महादेव के भजनों पे झूमे भक्त



हज़ारीबाग। सावन के पावन माह के सुभ अवसर पर बडम बाजार ग्वाल टोली मथुरा नगर स्थित राधा कृष्ण हनुमान व शिव परिवार मंदिर के प्रांगण में हरेक साल के भाति इस साल भी भजन कीर्तन का आयोजन बहुत धूमधाम से किया गया। अजय बाबा के द्वारा महाआरती के बाद  मथुरा नगर महिला कीर्तन मंडली के द्वारा दोपहर 1 बजे से संध्या 5 बजे तक कीर्तन किया गया । उसके बाद शाम की महाआरती के बाद हर हर महादेव आध्यात्मिक मंच के द्वारा संध्या 7 बजे से ले कर 11 बजे तक कीर्तन किया गया। गणेश वंदना के साथ कीर्तन का शुभ आरम्भ हुवा। वहीं मनोज सोनी के द्वारा महादेव के मनमोहक भजन गा कर मंदिर प्रांगण में भक्तों को झूमने को मजबूर कर दिया गया । अनिल कुमार वर्मा के द्वारा हनुमान जी का भजन गाया गया उनके साथ झुन्नू बाबू के द्वारा ढोलक और काली चरण यादव हारमोनियम पर उनका साथ निभाया मंडली के द्वारा पहली सोमवारी को शिवपुरी स्थित शिव मंदिर में कीर्तन किया गया व दूसरी सोमवारी को पंचमुखी हनुमान मंदिर न्यू एरिया में कीर्तन का आयोजन किया गया। कीर्तन के बाद प्रशाद का वितरण किया गया।
         महिला मंडली में भजन कर्ता संध्या सोनी, उर्मिला देवी, कमला देवी, सरोज देवी, भूषण देवी, शिला देवी, विमला देवी, रोमा यादव, मोनिका कुमारी, नेहा कुमारी, इशिका कुमारी, शनाया कुमारी, ज्योति गुप्ता, पुष्पा चटर्जी,माही कुमारी, तुलसी जैन, के अलावा अन्य महिला मंडली सामिल थी। कीर्तन मंडली में महेश सोनी, अस्वनी कुमार सिंह, राधे प्रशाद सोनी, फुचुन प्रशाद, भग्गी लाल, सरोज यादव, कैलाश यादव, मुन्ना सिंह यदुवंशी, अविनाश वर्मा, कुणाल यादव, गोलू जैन, राजेश यादव, अरुण वर्मा, पप्पू वर्मा, सुमन वर्मा, कामख्या सिंह यादव व अन्य भक्त गन   मौजूद थे।

रक्तदान जीवनदान हैःआदर्श मल्लिक


रांची। शहर के सेवा सदन अस्पताल में रांची विश्वविद्यालय अध्यक्ष आदर्श मल्लिक के नेतृत्व में  विभिन्न कॉलेज के  छात्रों ने रक्तदान किया
श्री मल्लिक  ने कहा कि सेवा सदन अस्पताल में रक्त की काफी कमी हो गई है जिसके कारण काफी मरीज को रक्त नहीं मिल रही है इसके कारण काफी मरीजों की जान भी चली जा रही है जब यह समस्या हमारे पास आई तो इसे हमने तुरंत निराकरण करने का फैसला लिया और आज करीब 25 यूनिट ब्लड हमने रक्तदान करवाया रांची के विभिन्न कॉलेज के छात्रों के साथ मिलकर
 विश्वविद्यालय अध्यक्ष आदर्श मलिक ने कहा कि रांची के किसी भी अस्पताल किसी भी अस्पताल में ब्लड की कमी नहीं होनी चाहिए यह बात हमारी समाज को आगे आकर ब्लड देकर रक्तदान कर ब्लड बैंक को हमेशा भरा रखना होगा ताकि किसी को भी कभी कोई परेशानी हो तो उसे तुरंत ब्लड मुहैया करवाई जा सके अस्पताल के द्वारा और उसकी जान बचाई जा सके

कार्यकर्ता ही संगठन की रीढ़ः सुबोधकांत

कांग्रेस कार्यकर्ताओं को किया संबोधित

रांची। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि कार्यकर्ता संगठन की रीढ़ हैं। संगठन को सशक्त बनाने और जनाधार बढ़ाने मे कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। श्री सहाय बुधवार को राहे प्रखंड के सताकी पंचायत में कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार हो जाने की जरुरत है। कांग्रेस की नीतियों को जन जन तक पहुंचाने पर बल दिया। इसके बाद श्री सहाय राहे पंचायत के डोकाद, गोंदा मोड़, रंगामाटी स्कूल, बसंतपुर व बसिया मे भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस अवसर पर अश्विन मेहता, दिनेश साहू, सुरेश बैठा, अजय साहु, तारकेश्वर, प्रदीप गोस्वामी, रसेस्वर सिंह, प्रफुल्ल महतो, कंचन सिंह मुंडा, फरेन्द महतो, शंकर स्वासी सहित अन्य शामिल थे।

केरल की तबाही से सबक ले मानव समाज



-देवेंद्र गौतम

केरल में बाढ़ को प्राकृतिक आपदा घोषित किया जा चुका है। इसकी विभीषिका फिलहाल नियंत्रण में है। बाढ़पीड़ितों की मदद के लिए देश के तमाम राज्य ही नहीं विश्व समुदाय ने भी अपने हाथ बढ़ाए हैं। लेकिन केरल के हालात कब फिर रौद्र रूप धारण कर लेगा कहना कठिन है। प्रकृति की विनाशलीला धीरे-धीरे रौद्र रूप धारण करती जा रही है। केरल में बाढ़ की तबाही ने खंड प्रलय का दृश्य उत्पन्न कर दिया है। यह प्राकृतिक आपदा और राष्ट्रीय शोक का समय है। साथ ही सबक सीखने का अवसर भी। अगर इसके कारणों की पड़ताल कर उनका निराकरण नहीं किया गया तो आनेवाले समय में इस आपदा का विस्तार हो सकता है और सका और भी विकराल रूप उत्पन्न हो सकता है। फिलहाल औसत से 37 फीसद अधिक बारिश के पानी के साथ केरल की 41 नदियों और 80 बांधों का पानी 13 जिलों को अपने आगोश में ले चुका है। 300 से अधिक लोग काल कवलित और 3 लाख से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं। 2000 से अधिक अस्थाई राहत शिविरों में लोगों को शरण लेनी पड़ी है। बिजली आपूर्ति, संचार व्यवस्था, सड़क परिवहन, रेल सेवा बाधित है। एयरोड्राम डूबे हुए हैं। हवाई सेवा भी अवरुद्ध है। हजारों घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। 40 हजार हेक्टेयर में लगी फसलें नष्ट हो चुकी हैं। 134 पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त हैं। 90 हजार किलोमीटर सड़कें बर्बाद हो चुकी हैं। अभी तक 21 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। न सिर्फ भारत के तमाम राज्य बल्कि पूरा विश्व चिंतित है। पिछले एक सौ साल का रिकार्ड टूट चुका है। आर्थिक मदद तथा राहत कार्य में योगदान के लिए कई राज्य सरकारें और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देश आगे आए हैं।
इस वर्ष का मानसून केरल ही नहीं देश के कई हिस्सों के लिए भारी पड़ा है। झारखंड, बिहार सहित अन्य राज्यों में ठनके की चपेट में आकर सैकड़ों लोग अपने प्राण गंवां चुके हैं। हजारों लोग जख्मी हो चुके हैं। गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मानसून में देश के विभिन्न हिस्सों में 930 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। मानसून में ऐसी घटनाएं पहले भी होती थीं लेकिन प्रकोप का आकार और नुकसान की मात्रा निरंतर बढ़ती ही जा रही है। हम विकास में तेजी लाने के चक्कर में विनाश को निमंत्रण देते जा रहे हैं।
केरल में इस स्थिति के उत्पन्न होने के कई तात्कालिक और पूर्ववर्ती कारण बताए जा रहे हैं। भूतकाल में प्रकृति के साथ निरंतर की गई छेड़छाड़ और वर्तमान की लापरवाही इस तबाही के मूल में बताई जा रही है। इस वर्ष केरल में औसत से 37 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है और मौसम विभाग ने अभी और बारिश होने की भविष्यवाणी की है। पर्यावरण वैज्ञानिकों का मानना है कि वनों की बेतहासा कटाई और पर्वत श्रृंखलाओं की बर्बादी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। एक तो बारिश ज्यादा हुई दूसरे तमिल नाडू सहित पड़ोसी राज्यों और स्वयं केरल के बांधों का पानी छोड़ दिया गया है। तबाही को कुछ कम किया जा सकता था यदि जलाशयों की क्षमता से अधिक होने पर पहले ही उनका पानी छोड़ दिया गया होता। वह समुद्र में मिल जाते। बांधों के कपाट भी ऐन उसी समय खोले गए जब सारी नदियां उफनती हुई आबादी बहुल इलाकों की ओर बढ़ने लगीं। पर्यावरण वैज्ञानिक बहुत पहले से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से हम बाज नहीं आ रहे हैं। लेकिन पर्यावरण संरक्षण को हम गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उसे एक फैशन के तहत लिया जा रहा है। सरकारी स्तर पर भी और नागरिक जीवन के स्तर पर भी। हम अपनी तबाही को स्वयं निमंत्रण दे रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि तबाही उन जिलों में आई है जिन्हें पश्चिमी घाट के इकोलाजिकल सेंसेटिव जोन के अंतर्गत चिन्हित किया जा चुका है।
निश्चित रूप से आपदा के उपस्थित होने के बाद हमारी नींद टूटी है। राहत कार्य में तेजी लाने के प्रति सरकार भी सजग हो चुकी है और स्वयंसेवी संस्थाएं भी। भारतीय सेना की तीनों शाखाओं के अलावा केंद्र और राज्य सरकार की तमाम एजेंसियां स्थिति से निपटने में लगाई जा चुकी हैं। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के निर्देश पर नौसेना औक तटरक्षक बलों की 400 नावें राहत कार्य में लगी हुई हैं। वायुसेना के दक्षिणी कमांड ने बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए 22 हेलीकाप्टर और 6 छोटे विमान लगाए हैं। भारतीय सेना के कई अभियंताओं के साथ 700 से अधिक जवान बचाव कार्य में तैनात हैं। नेशनल डिजास्टर रेस्पांस फोर्स दो दर्जन से अधिक टीमें तैनात हैं। स्वास्थ्य आपदा विंग बाढ़ खत्म होने के बाद संभावित रोगों के प्रकोप से निपटने की तैयारी में लगा है। झारखंड सरकार ने 5 करोड़ जबकि महाराष्ट्र ने 20 करोड़ और बिहार, गुजरात, दिल्ली पंजाब, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों ने 10-10 करोड़ की सहायता की घोषणा की है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने 500 करोड़ की वित्तीय सहायता के अलावा मृतकों के परिजनों को 3 लाख और गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार की तत्काल मदद की घोषणा की है। गृह मंत्रालय भी 100 करोड़ की मदद दे रहा है। संयुक्त अरब अमीरात के प राष्ट्रपति ने बाढ़पीड़ितों की मदद के लिए एक कमेटी का गठन किया है।
यह तत्परता, यह चौकसी, यह सेवा भाव सराहनीय है लेकिन अगर यही भाव तबाही आने के पहले दिखाया गया होता तो इसका स्वरूप इतना विकराल नहीं होता। हाल के वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं में तेजी आई है। मौसमों का चक्र असंतुलित होता जा रहा है। कभी आंधी-तूफान का प्रकोप होता है तो कहीं बाढ़ कहीं सूखे की त्रासदी। इन सबके मूल में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का अभाव है। समस्या सिर्फ भारत की नहीं वैश्विक है। वैश्विक स्तर पर सकी पड़ताल भी की जाती रही है। पहलकदमियां भी ली जाती रही हैं लेकिन कुल मामला बड़े-बड़े सेमिनारों का आयोजन कर विचार-विमर्श तक सीमित रह जाता है। ऐसे अवसरों पर बड़े-बड़े संकल्प लिए जाते हैं। फिर मामला जहां का तहां रह जाता है। विकसित देश विकासशील देशों पर पर्यावरण संरक्षण के लिए दबाव डालते हैं तो विकासशील देश विकसित देशों को कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण विनाश के लिए दोषी मानते हैं। पहले की तुलना में जागरुकता बढ़ी जरूर है लेकिन इसपर नियंत्रण पाने के लिए जितनी आवश्यकता है उतनी नहीं।
केरल की तबाही से यदि सबक नहीं लिया गया और से रोकने के लिए आवश्यक उपाय नहीं किए गए तो आनेवाले समय में हमें इससे भी बड़ी आपदाओं का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।


स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...