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मंगलवार, 6 नवंबर 2018

निर्मला कांवेंट हाई स्कूल में रंगोली प्रतियोगिता



रांची। राजधानी के एदलहातु स्थित निर्मला कांवेंट हाई स्कूल में दीपावली के पूर्व रंगोली प्रतियोगिता का आयोजनकिया गया। स अवसर पर कक्षा प्री नर्सरी से कक्षा 2 तक के बच्चों ने शिक्षकों की देखरेख में फुलझड़ी, अनार, चकली आदि पटाखों का आनंद लिया। वहीं कक्षा 6 से 10 तक की छात्राओं ने रंग विरंगी रंगोली बनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतियोगिता में हंसराज हाउस विजयी घोषित किया गया। शिक्षिका मीनू सिंह ने दीपावली पर्व के महत्व के बारे में छात्रों को बताया प्राचार्य विजय कुमार शर्मा ने सभों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए पटाखों का सावधानी पूर्वक और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए कम प्रदूषण वाले पटाखों का पयोग करने का निर्देश दिया। इस अवसर पर विध्यालय प्रबंध समिति की सचिव सीमा शर्मा, प प्राचार्य शिल्पी रानी, रीना धान, पमिता कच्छप, स्वाति कुमारी सहित काफी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।

24 घंटे बिजली देना सरकार का लक्ष्यः रघुवर दास



पूर्ण विद्युतीकृत जिला बना रांची

रांची। शत-प्रतिशत विद्युतीकृत जिलों की सूची में शामिल हो गया। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अनगड़ा प्रखंड परिसर में आयोजित समारोह में इसकी विधिवत घोषणा की। पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और सौभाग्य योजना के तहत घर-घर बिजली पहुंचाने का अभियान पूरे झारखंड में चल रहा है। इससे पूर्व रामगढ़, बोकारो और धनबाद पूर्ण विद्युतीकृत जिले घोषित किए जा चुके हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि जिस रांची को बहुत पहले हर घर बिजली वाला जिला बन जाना चाहिए था वह राजनीति का शिकार होता रहा। वर्ष 2014 तक रांची जिले के मात्र 4 लाख घरों में बिजली थी। विगत चार वर्षों में उनकी सरकार ने दो लाख घरों तक बिजली पहुंचाई। इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग और विद्युतीकरण का काम करने वाली एजेंसियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूर्व में बिजली विभाग में भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा था। उन्होंने सत्ता संभालते ही विभाग को भ्रष्टाचार मुक्त करने में सफल हुए। उन्हें कहा कि बिजली के बिना विकास संभव नहीं है। सीएम ने कहा कि आजादी के 67 साल तक गावों को अंधेरे में रखना एक राजनीतिक चाल थी। उन्होंने कहा कि वे राजनीति से जनता को ठगने नहीं आए हैं। 2019 में 24 घंटे बिजली देना सरकार का लक्ष्य है। अगस्त 2019 से गांवों में भी 24 घंटे बिजली होगी। 2020 तक ऊर्जा के क्षेत्र में झारखंड आत्म निर्भर हो जाएगा। उन्होंने नागरिकों से एलइडी लाइट का प्रयोग अधिक करने और रांची को सौर्य सिटी बनाने की अपील की। इस अवसर पर रबा और सिल्ली में बिजली ग्रीड निर्माम की आधारशिला रख गई। मौके सांसद रामटहल चौधरी, राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार, नगर विकास मंत्री सीपी सिंह, विधायक रामकुमार पाहन नवीन जायसवाल, विकास सिंह मुंडा मेयर आशा लकड़ा सहित र्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी व स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

सोमवार, 5 नवंबर 2018

रास्मा का दीपावली मिलन समारोह आयोजित


रांची। धनतेरस की पूर्व संध्या पर रविवार (4 नवंबर ) को रांची सेनेटरीवियर मर्चेंट्स एसोसिएशन (रास्मा ) की ओर से मोरहाबादी स्थित वृंदावन गार्डेन में दीपावली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर समारोह के मुख्य अतिथि रास्मा के संस्थापक अध्यक्ष व संरक्षक भगवती प्रसाद भुवालका को सम्मानित किया गया । उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रकाश पर्व दीपावली खुशहाली व भाईचारगी का त्योहार है। समाज के सभी वर्गों के लिए यह पर्व समरसता का संदेश देता है। उन्होंने दीपावली का त्योहार हर्षोल्लासपूर्वक मनाने की अपील की। इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम व संगीत संध्या का भी आयोजन किया गया। दीपावली स्पेशल तंबोला का भी रास्मा के सदस्यों ने लुत्फ उठाया। मौके पर रास्मा के अध्यक्ष ललित केडिया, सचिव आदित्य भुवालका, प्रवक्ता आदित्य शर्मा, ओमप्रकाश सर्राफ, राजीव खंडेलवाल, अंजय सरावगी, मनोज बंका, हर्ष खंडेलवाल, अनीष सर्राफ, अरविन्द जालान, ओमप्रकाश राजगढ़िया, अनूप अग्रवाल, जुगल केडिया, अरुण शर्मा, रजनीश ,निकेत राजगढ़िया, शीतलनाथ ओहदार, मनीष जैन, राजकुमार गुप्ता सहित काफी संख्या में रास्मा के सदस्यगण सपरिवार उपस्थित थे।

रविवार, 4 नवंबर 2018

बीच मंझधार में न डूब जाए भाजपा की लुटिया




-देवेंद्र गौतम

हिंदू संगठनों और संत-महात्माओं ने न्यायपालिका के निर्णय का इंतजार करने की जगह दिसंबर में राम मंदिर का निर्माण शुरू कर देने की घोषणा कर दी है। जाहिर है इससे तनाव बढ़ेगा। उसका दायरा चाहे जो हो। लेकिन ध्रुवीकरण की प्रक्रिया जरूर शुरू हो जाएगी। भाजपा यही चाहती भी है। 2019 के गदर के लिए यही एक ब्रह्मास्त्र शेष बचा भी है। इस तरह विधायिका परोक्ष रूप से न्यायपालिका से टकराने से बच जाएगी।
विधायिका और न्यायपालिका के बीच विभिन्न मौकों पर तनाव उत्पन्न होता ही रहता है लेकिन हाल के दिनों में यह तनाव कुछ ज्यादा ही तीखा हो चला है। सीबीआई के दो शीर्ष अधिकारियों की नूराकुश्ती, सबरीमाला मामले में महिलाओं के पक्ष में निर्णय और राफेल सौदे में हस्तक्षेप। लोकतंत्र के दो पायों के बीच टकराव बढ़ने का कारण बने। खासतौर पर अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टलने पर चुनावी रणनीति ही बिगड़ गई। इधर हिन्दूवादी संगठनों के सब्र की बांध भी टूट चली है। पहले उन्होंने मोदी सरकार पर अध्यादेश लाकर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने का दबाव डाला। संत-महात्मा और तमाम हिंदूवादी संगठनों से लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत तक यही सुझाव देने लगे। यह न्यायपालिका की भूमिका को नकार कर अलग राह चलने का सुझाव था। लेकिन इसके लिए स्थिति अनुकूल नहीं थी। केंद्र की मोदी सरकार को अगर यही करना होता तो इतने समय तक अदालत के रुख का इंतजार क्यों करती?
      पहली बात यह कि सरकार को पता है कि वह ऐसा कोई अध्यादेश लाती भी है तो उसे पारित नहीं करा सकेगी। इस मुद्दे पर विपक्ष तो क्या सहयोगी दलों का समर्थन मिलना भी कठिन है। इस भूमि विवाद के तीन दावेदार हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जब इसे तीनों के बीच बराबर-बराबर बांट देने का निर्णय दिया था तो किसी पक्ष को मंजूर नहीं हुआ। सभी पौने तीन एकड़ के पूरे भूखंड पर अपने हक में फैसला चाहते थे। सो सुप्रीम कोर्ट में अपील कर बैठे। अब यदि भाजपा सत्ता में होने के नाते एक पक्ष के दावे पर मुहर लगाएगी तो अन्य दो पक्षों की प्रतिक्रिया क्या होगी? इसपर भी तो विचार करना होगा। जब एक अदालत का फैसला किसी पक्ष को स्वीकार नहीं हुआ तो सरकार का फैसला मंजूर हो जाएगा, यह कैसे संभव है। अगर सरकार रामलला विराजमान या निर्मोही अखाड़ा के पक्ष में खड़ी होती है तो क्या मस्जिद समर्थक शांत होकर बैठ जाएंगे? जब सभी पक्ष जिद पर अड़े हों और साक्ष्यों को भी मानने को तैयार न हों तो फैसला देना किसी के लिए भी जटिल कार्य हो जाता है। न्यायपालिका के लिए भी यह आसान नहीं है। अब अगर सरकार अध्यादेश लाने पर विचार करती तो इसके पीछे आस्था का दबाव नहीं चुनावी लाभ उठाने की लालसा होती। अपने चुनावी वायदे को पूरा न कर पाने की खीज होती। न्यायपालिका को चुनावी लाभ-हानि के गणित से कोई मतलब नहीं है। वह भावनाओं के आधार पर नहीं बल्कि साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाती है। यदि उसपर भरोसा जताया तो उसके कार्य में बाधा पहुंचाना उचित नहीं था। चुनाव की पूर्व बेला में अपनी वाणी और पहलकदमी पर नियंत्रण रखना होता है। लेकिन सत्ता के मद और उसके हाथ से फिसल जाने का डर इस कदर हावी है कि मर्यादाओं के उलंघन की नौबत भी आई। सुनवाई की तिथि से पूर्व सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के महिलाओं के पक्ष में निर्णय और केरल के रूढ़िवादी लोगों  के इसके विरोध में उठ खड़े हे के दौरान भाजपा के अंदर का लैंगिक समानता का भाव तिरोहित हो गया। उसे इस हंगामे के बीच एक वोट बैंक की संभावना दिखाई पड़ने लगी। फैसले पर टिप्पणी करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कोर्ट को हिदायत दे डाली कि वह ऐसे फैसले न दे जिसे लागू नहीं किया जा सके। अर्थात ऐसे ही फैसले दे जो सरकार के मनोनुकूल हो। विधायिका जब न्यायपालिका को हिदायत देने लगे तो कहीं न कहीं चार पायों पर खड़ी लोकतंत्र की इमारत पर खतरे की अनुभूति होने लगती है। शाह ने सुप्रीम कोर्ट के विवेक पर सवाल उठाकर यह संकेत दिया कि कोर्ट की मर्यादा तभी बची रहेगी जब वह सरकार के मनोनुकूल फैसले दे। अन्यथा उसके आदेश धरे के धरे रह जाएंगे। इस हिदायत के पीछे कहीं न कहीं उनका इशारा अयोध्या मामले की ओर था जिसकी सुनवाई 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होनी थी। लेकिन कोर्ट ने उनकी हिदायत पर अमल करने की जगह सुनवाई को जनवरी तक के लिए टाल दिया। इससे बौखलाहट उत्पन्न हो गई। सरकार चाहती थी कि चुनाव से पहले सुनवाई पूरी हो जाए और फैसला आ जाए।
जब यह संभव नहीं हुआ और अध्यादेश लाना भी लाभप्रद नहीं दिखा तो अब कट्टर हिंदूवादी संगठनों ने जबरदस्ती पर तरने का फैसला किया है। भाजपा का काम आसान हो जाएगा। उसे चुनावी वैतरणी पार करने का एक रास्ता मिल जाएगा। मोदी सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद कट्टर हिंदू संगठन अति उत्साहित थे। उन्होंने सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न करने की कई कोशिशें कीं लेकिन इसमें आंशिक सफलता ही मिली।
सत्ता में आने के पहले भाजपा ने कई चुनावी वायदे किए थे। उनमें कितने पूरे हुए सर्वविदित है। हिंदूवादी संगठनों से राम मंदिर बनाने का वादा उसमें एक था। लेकिन भाजपा सिर्फ उन्हीं के समर्थन से सत्ता में नहीं आई थी। भाजपा नेतृत्व को यह बात याद रखनी चाहिए कि हिंदूवादी संगठनों ने नहीं बल्कि भारत की आम जनता ने उसे सत्ता की चाबी सौंपी थी। वह भी किसी सांप्रदायिक आग्रह पर नहीं बल्कि तत्कालीन यूपीए सरकार की मनमानी से ऊबकर। लोगों ने भाजपा से लोकतांत्रिक मूल्यों और मर्यादाओं की रक्षा करते हुए जनहित के कार्यों की अपेक्षा की थी। जनता के इस भरोसे को कायम रखकर ही सत्तारूढ़ भाजपा चुनाव की वैतरणी पार कर सकती है सांप्रदायिक उन्माद की नौका बीच मंझधार में उसकी लुटिया डुबो भी सकती है। 


एचइसी प्रबंधन से वेतन पुनरीक्षण पर वार्ता का आग्रह


रांची। एचइसी प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच वेतन पुनरीक्षण और मजदूर समस्याओं को लेकर श्रम विभाग में त्रिस्तरीय वार्ता संपन्न हुई। सभी पक्षो की बात सुनने के बाद क्षेत्रीय श्रम आयुक्त जी एस दुराई बुरु ने प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों को द्वीपक्षीय वार्ता कर निदान निकालने का परामर्श दिया। वार्ता में हटिया मजदूर यूनियन के अध्यक्ष भवन सिंह, कार्यकारणी अध्यक्ष हरेन्द्र प्रसाद यादव, महामंत्री राजेन्द्र कांत महतो, संगठन मंत्री रमा शंकर प्रसाद, संगठन सचिव जॉन तिग्गा, प्रबंधन की ओर से प्रबन्धक प्रशांत पाठक, उप प्रबंधक संतोष मिश्रा और श्रम विभाग की तरफ से क्षेत्रीय श्रमायुक्त शामिल थे।    
उल्लेख्य है कि प्रबंधन ने 10 अक्टूबर को ही वार्ता के लिए श्रमिक संगठनों से 3 प्रतिनिधियों का नाम मांगा था। लेकिन श्रमिक संगठनों की तरफ से कृष्णमोहन सिंह का अंतिम नाम 30 अक्टूबर को आया। इसके कारण वार्ता में अनावश्यक विलंब हुआ। प्रबन्धन ने 12 अक्टूबर तक सभी यूनियनों से 3 प्रतिनिधियों का नाम मांगा था। हटिया मजदूर यूनियन ने विलंब के कारण संबंधी प्रबंधन की शिकायत पर सहमति जताते हुए प्रबंधन से यथाशीघ्र द्विपक्षीय वार्ता बुलाने का आग्रह किया है।


कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती : आदर्श मल्लिक



* छात्र हित के लिए समर्पित ऊर्जावान युवा
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कहते हैं बिना कुछ किए जय- जयकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। बिना संघर्ष किए सफलता हासिल नहीं होती। जो कभी संघर्ष का मैदान नहीं छोड़ेगा,  हमेशा मेहनत करता रहेगा, उसे सफलता जरूर एक दिन हासिल होगी। इसकी मिसाल है रांची निवासी आदर्श मल्लिक।
आदर्श मल्लिक की प्रारंभिक शिक्षा बहरागोड़ा में हुई। वर्ष 2005 में वह रांची आए और डीएवी स्कूल, धुर्वा से आगे की पढ़ाई की। उन्होंने बीआईटीटी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल किया। स्कूल के दिनों से ही उनकी सामाजिक कार्यों में भागीदारी रही। अपने स्कूल का नेतृत्व जेबीएबी जोनल मीट्स में किया और हमेशा पहला रैंक दिलवाया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्र हित के लिए बहुत सारा कार्य किया।  आदर्श मल्लिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए संघर्षरत रहते हैं।
बीआईटीटी पॉलिटेक्निक का उन्होंने नेतृत्व ऑल इंडिया इंजिनियर्स मीट में कोलकाता में 2016 में किया।
इस बीच छात्र नेतृत्व कर्ता में आदर्श मल्लिक का नाम सबसे आगे आने लगा और आदिवासी मूल वासी छात्र मोर्चा के 2017 में वे रांची विश्वविद्यालय के अध्यक्ष बने। आदर्श मल्लिक के अच्छे कार्य को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार मीडिया संगठन ने 2017 में प्रदेश सचिव का पदभार दिया। राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन में रहकर उन्होंने पूरा झारखंड का दौरा किया। वह मजदूरों को उनका हक दिलाने लगे। 2018 में उन्हें मजदूर मोर्चा का रांची जिला महासचिव का पदभार दिया गया। धनबाद में आयोजित युवा सुरक्षा मंच की बैठक में उन्हें युवा सुरक्षा मंच का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। आदर्श मलिक ने रांची के विभिन्न कॉलेज में महिला की सुरक्षा को किस तरह से बेहतर बनाया जाए इसे लेकर वरीय पुलिस अधीक्षक के साथ बैठक किया और विभिन्न कॉलेजों में महिलाओं के लिए शक्ति ऐप को लॉन्च करवाया।
गर्मी के समय में रांची के हर एक चौक चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की मेहनत को देखते हुए उन्होंने हर चौक चौराहों में जाकर ट्रैफिक कर्मियों को ग्लूकोज पानी डा पानी छाता का वितरण किया हर एक रविवार को उन्होंने मंदिर मस्जिद दरगाह इत्यादि जाकर वस्त्र चावल दाल खाने की सामग्री का वितरण किया
बहुत से संगठनों में आदर्श मलिक ने रक्तदान शिविर लगाया।  इनका मानना है कि जब गरीबी रेखा खत्म हो जाए जब सभी को अपना अधिकार मिलने लगे जब गरीब बच्चे आगे जाकर झारखंड और अपने देश का नाम रोशन करें तभी हमारा देश आगे बढ़ेगा आदर्श मलिक के जीवन में काफी कठिनाइयां आई, पर वे कभी रुके नहीं, कभी हार नहीं मानी। उनका यह मानना है कि बिना संघर्ष किए सफलता हासिल नहीं होती। युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाएं। इससे देश व समाज खुशहाल होगा।

ईएनटी चिकित्सा परामर्श कार्यशाला का आयोजन

रांची। छात्र क्लब चिकित्सक मंच द्वारा आज राज घराना बैंक्वेट हॉल, रातू रोड, रांची नाक, कान, गला (ENT) के विषय पर चिकित्सा परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव आदित्य विक्रम जयसवाल ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में नाक कान गला के विशेषज्ञ डॉक्टर अभिषेक श्रीवास्तव, मंच के  शिव किशोर शर्मा, सुमित साहू ,नीरज शुभम चौधरी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
मुख्य अतिथि आदित्य विक्रम जयसवाल ने अपने संबोधन में कहा की आज के भागदौड़ जीवन में हर किसी को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। लोगों की स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है इसको बेहद ख्याल  रखना चाहिए।अक्सर लोग कानदर्द की स्थिति में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डाल लेते हैं। इससे संक्रमण और अधिक बढ़ सकता है इसलिए इसके प्रयोग से बचने की सलाह दी।
परामर्श कार्यशाला में डॉक्टर की टीम ने बताया कि बदलते मौसम के दौरान हर किसी को विशेष रूप से सजग रहने की जरूरत है। जिन लोगों को नाक कान, गला व अस्थमा की तकलीफ हो वे घर में एयर कंडीशनर (एसी) का प्रयोग कम से कम करें। एसी की हवा से नाक और गला दोनों खराब होने की आशंका रहती है। वैसे तो सावधानी ही उपचार है लेकिन यदि एलर्जी अधिक बढ़ जाए तो विशेषज्ञ की सलाह से मरीज नाक में डालने के लिए स्नॉजल स्प्रे का उपयोग कर सकते हैं।
कान के लिए नमी सही नहीं होता है, कान के लिए शुष्कता या नमी ठीक नहीं है। इसके अलावा बारिश में भीगने से कान में पानी जाने पर संक्रमण और फंगस होने का खतरा बना रहता है। जब हम ईयरबड से वैक्स निकालने का प्रयास करते हैं तो वह बाहर निकलने की बजाय और अंदर चला जाता है। इससे कान में फंगस व पर्दे पर चोट लग सकती है और सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...