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शनिवार, 15 जून 2019

मनोहरपुर प्रखंड में मुख्यमंत्री दाल भात योजना को प्रारंभ किया गया




चक्रधरपुर। रघुवर सरकार की दाल-भात योजना गरीबों के लिए वरदान साबित हो रही है. योजना के तहत मात्र 5 रुपए में भरपेट भोजन कराया जा रहा है. सरकार की कोशिश है कि झारखंड में कोई भी ग़रीब भूखा ना रहे. मुख्यमंत्री दाल भात योजना के जरिए गरीबों को भरपेट भोजन महज 5 रुपए में मिल रहा है. इस योजना के तहत दाल भात के साथ आलू सोयाबीन या चने की सब्जी मिलती है. केंद्र को अंत्योदय योजना के तहत चावल उपलब्ध कराया जाता है. देशभर में झारखंड एकलौता राज्य है जहां 5 रुपए में भरपेट भोजन मिलता है.

मनोहरपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी जितेन्द्र कुमार पाण्डेय ने मनोहरपुर प्रखंड अंतर्गत CHC मे मुख्यमंत्री दाल भात योजना सह कैंटीन का उद्घाटन किया गया जिसके तहत लोग ₹5 में भरपेट भोजन प्राप्त कर सकते हैं और सरकार की योजना को सफल बना सकते हैं तथा कोई गरीब भूखा ना सोए इस उद्देश्य को पूरा किया जा सकता हैं ।

भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा क्षतिग्रस्त होना सरकार की लापरवाहीः आदित्य विक्रम जायसवाल

भाजपा आस्था के साथ कर रही है खिलवाड़



रांची। कांग्रेस के पूर्व सचिव एवं भगवान बिरसा मुंडा समाधि के लिए जमीन दान करता आदित्य विक्रम जायसवाल ने कहा कि कोकर स्थित बिरसा मुंडा समाधि स्थल में बने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा की कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर गिर जाना भाजपा सरकार एवं नगर विकास मंत्री सीपी सिंह की घोर लापरवाही तथा सरकार की विफलता है। भाजपा सरकार झारखंडी एवं आदिवासी समाज की आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है। विगत 09 जून को भाजपा सरकार ने पूरी ताम-झाम के साथ उनकी पुण्यतिथि मनाई लेकिन दौरान बिरसा समाधि स्थल की मजबूती एवं प्रतिमा रख-रखाव के प्रति कोई ध्यान नहीं दिया। जिनका खमियाजा आज भुगतनाा पड़ा, इस घटना से झारखंडियों को शर्मशार होना पड़ रहा है।

आदित्य विक्रम जायसवाल ने कहा कि नगर विकास मंत्री सीपी सिंह के लापरवाही के कारण स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गई है। भगवान बिरसा मुंडा के एक हाथ में मशाल और दूसरे में धनुष था, जिस हाथ में धनुष था वह हाथ क्षतिग्रस्त होकर नीचे गिर गया है जो राज्य के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है। उन्होने कहा कि समाजिक संगठन के साथ-साथ समाधि स्थल के केयर टेकर द्वारा भी लगातार सरकार से सीसीटीवी कैमरा लगावाने की मांग करते रहे लेकिन अभी तक नगर विकास मंत्री समाधि स्थल पर सीसीटीवी नहीं लगा पाये अगर आज सीसीटीवी लगा रहता तो प्रतिमा कैसे एवं कौन क्षतिग्रस्त किया यह पता चल जाता।

सुबोध कांत सहाय ने कहा कि  भाजपा सरकार सिर्फ शहीदों के नाम पर वोट मांगने तक का रिश्ता है, वीर शहीदों की रख-रखाव एवं सुरक्षा के प्रति उनका घोर उदासिनता रहती है। सरकार सिर्फ दिखावा के नाम पर उनकी शहीदों की जयंती एवं पुण्यतिथि मनाती है। ताकि जनता को लगे कि सरकार शहीदों को याद करती है, उनके विचार-धारा को मानती है। भाजपा सरकार शहीदों के नाम पर सिर्फ ढकोसला कर रही है।

आदित्य विक्रम जायवाल ने सरकार सरकार अविलंब मांग करती है कि भगवान बिरसा मुंडा समाधि स्थल, कोकर में सीसीटीवी कैमरा लगाया जाए, क्षतिग्रस्त प्रतिमा को अविलंब ठीक किया जाए, आस-पास साफ-सफाई रेगुलर किया जाए, भगवान बिरसा मुंडा के प्रति जो गहरी आस्था उसे कायम रखने का काम करें। इसके साथ राज्य के तमाम वीर शहीदों की प्रतिमा की सुरक्षा की जिम्मेवारी उठायें। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सरकार जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम करती है तो जनता सरकार को उखाड़ फेंकेगी।
इस मौके पर कांग्रेस के योगेंद्र सिंह बेनी, टिंकू वर्मा ,आसिफ जियाउल, अनिल सिंह, राहुल राय, चिंटू चौरसिया, अमरजीत सिंह ,प्रेम कुमार ,परीक्षित कुमार इत्यादि लोग शामिल थेl

महापुरुषों के समाधि स्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की मांग


रांची। सामाजिक संस्था लोक सेवा समिति ने धरती आबा बिरसा मुंडा की प्रतिमा विखंडित होने पर दुख व्यक्त किया है। समिति के अध्यक्ष नौशाद खान ने सभी महापुरुषों की समाधि स्थल और जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था सीसीटी कैमरा लगाए जाने की मांग की है। भविष्य में इस तरह का हरकत या घटना ना घटे, इससे पहले शरारती तत्वों की शिनाख्त हो सके। उन्होंने कहा कि पिछले महीने परमवीर शहीद अब्दुल हमीद के समाधि स्थल पर भी इसी तरह की घटना घटी , जिसका लोगों ने विरोध किया, लेकिन उसके बाद भी हम सचेत नहीं हुए। दोबारा महापुरुषों शहीदों के साथ यह घटना घटी, जिसकी जितनी भी निंदा की जाए, कम है। सरकार दोषियों की शिनाख्त कर उसे पकड़ कर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करे। समिति के
संगीता सिंह, नौशाद खान, गिरधारी राम गौंझु, मकसूद आलम, रेबा चक्रवर्ती, लतीफ खान ने इस घटना की निंदा की है।

पूरे देश में चिकित्सा सेवा ठप्प होने की नौबत, त्राहिमाम की स्थिति



दीदी की जिद का खमियाजा मुगतेंगे मरीज


प. बंगाल में डाक्टरों की हड़ताल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसकी आंच दिल्ली तक पहुंच चुकी है। आंदोलनरत डॉक्टरों के प्रति एकजुटता जताते हुये इंडियन मेडिकल ऐसोसिएशन ने तीन दिन के राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन के साथ सोमवार 17 जून को हड़ताल का ऐलान किया है। भारत में डॉक्टरों के इस शीर्ष संस्था ने इंटर्न्स और डॉक्टर के खिलाफ हिंसा पर नियंत्रण के लिए एक केंद्रीय कानून बनाने के साथ कानून का उल्लंघन करने वालों को सात साल की सजा के प्रावधान की मांग की है।

एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने पश्चिम बंगाल सरकार को हड़ताली डॉक्टरों की मांगों को पूरा करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम जारी किया है। इस समय सीमा में मांग पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है। एम्स और सफ़दरजंग अस्पताल के डॉक्टर्स अभी हड़ताल में शामिल नहीं हुए हैं। रेसीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि इन दो अस्पतालों को छोड़कर शेष अस्पतालों में हड़ताल रहेगी। इमरजेंसी वॉर्ड को छोड़कर सभी वॉर्ड में काम नहीं होगा।

कोलकाता के एनआरएस अस्पताल में हुई घटना के बाद से अब तक राज्य के करीब 700 डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया है।इसमें आरजी कर मेडिकल कॉलेज के 107, एसएसकेएम के 175, नेशनल मेडिकल कॉलेज के 100, चितरंजन मेडिकल कॉलेज के 16, सागर दत्ता अस्पताल के 18 और स्कूल ऑफ ट्रापिकल मेडिसिन के 33 डॉक्टर शामिल हैं.

आईएमए ने यह भी कहा कि शुक्रवार से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन शनिवार और रविवार को भी जारी रहेगा। इसमें डॉक्टर काले रंग के बिल्ले लगायेंगे, धरना देंगे और शांति मार्च निकालेंगे। आईएमए के महासचिव आरवी असोकन ने कहा कि आईएमए एनआरएस मेडिकल कॉलेज में हिंसक भीड़ का शिकार बने डॉ. परिबाहा मुखर्जी के प्रति हुई हिंसा की निंदा करता है।
आइएमए ने सोमवार को सभी चिकित्सा सेवा संस्थानों में गैर आवश्यक सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर ठप्प करने का आह्वान किया। सुबह छह बजे से ओपीडी सेवाएं बंद कर दी जायेंगी और इस दौरान आपातकालीन सेवाएं काम करती रहेंगी।

शुक्रवार, 14 जून 2019

राष्ट्रनायक का अपमान, राष्ट्र का अपमान




देवेंद्र गौतम
रांची। बिरसा की मूर्ति को क्षति पहुंचाने वालों ने सिर्फ झारखंड की 3 करोड़ की आबादी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाई है, पूरे राष्ट्र की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। वे किसी समुदाय विशेष के नहीं आजादी की हवा में  सांस लेने वाले हर भारतवासी के महानायक हैं। इसके पीछे सिर्फ वोटों की राजनीति है। जिस भी राजनीतिक दल अथवा संगठन का इसमें हाथ है उसका पर्दाफाश करना सिर्फ सरकार की नहीं हर नागरिक की जिम्मेवारी है और जिस किसी व्यक्ति ने इसमें भूमिका निभाई है, उसे सरेआम सज़ा देनी चाहिए। जिस संगठन ने यह साजिश रची है उसका पूरी तरह सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाना चाहिए। यदि वह कोई राजनीतिक दल है तो उसके कार्यक्रमों में कोई हिस्सेदारी न हो। चुनाव में उतरे तो उसके प्रत्याशियों को एक भी वोट नहीं दिया जाना चाहिए। तभी उन्हें अपनी करतूत का वास्तविक फल मिलेगा। इस तरह की साज़िशों का अंत होगा। भावुकता में बहकर यदि हम आपा खो बैठेंगे तो शरारती तत्वों की मंशा को पूरी कर रहे होंगे। यही तो उनका मकसद है। यह समय संयम के साथ उनकी पहचान करने और सही तरीके से दंडित करने का है।
राजनीति का स्तर इतना नीचे गिर चुका है कि सत्ता के लिए लोग कुछ भी करने में शर्म महसूस नहीं करते। कभी मंदिर में गोमांस तो कभी मस्जिद में सूअर का मांस फेंका जाता है। यह काम आम जनता कभी नहीं करती। किसी न किसी संगठन का हाथ होता है। सिर्फ ध्रुर्वीकरण करना और इसका राजनीतिक लाभ उठाना इसका मकसद होता है। वे जानते हैं कि भारत के लोग दिमाग से कम दिल से ज्यादा काम लेते हैं। इसे समझने की जरूरत है। भावनाओं के साथ खिलवाड़ का जवाब भावनाओं में बहकर नहीं दिया जा सकता। इसका जवाब सिर्फ संयम के साथ दिया जा सकता है। धीरे-धीरे आम जनता संयमित हो रही है। 90 के दशक में जहां जरा-जरा सी बात पर पूरे देश में दंगा भड़क उठता था, अब नहीं भड़कता। थोड़ा तनाव उत्पन्न होता है लेकिन नियंत्रित हो जाता है। अब संयम के साथ साजिशों को भंडाफोड़ की जरूरत है।

महापुरुषों की मूर्तियों के साथ छेड़छाड़ करने वाले असली देशद्रोही




देवेंद्र गौतम
झारखंड के प्रतीक पुरुष और स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बिरसा मुंडा की समाधिस्थल पर लगी मूर्ति का टूटना आंधी अथवा प्राकृतिक घटना का परिणाम नहीं हो सकता। यह मानवीय शरारत है। जिन लोगों ने रात के अंधेरे में यह शरारत की वे देश और समाज के अपराधी हैं। वे लोगों की भावनाओं को आहत कर अशांति फैलाना चाहते हैं। उन्हें ढूंढकर कड़ी से कड़ी सज़ा देनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी हरकत करने से पहले अपराधियों को सौ बार सोचना पड़े। ऐसे लोग कभी आंबेडकर की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ करते हैं तो कभी कुंअर सिंह की मूर्ति को निशाना बनाते हैं। बिरसा मुंडा पूरे देश के लिए पूजनीय हैं। उनसे किसी को नाराजगी नहीं हो सकती। निश्चित रूप से राजनीतिक स्वार्थ की रोटी सेंकने के लिए किसी ने यह घटिया हरकत की है। कुछ ही महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से इसका संबंध हो सकता है। इस तरह की क्षुद्र राजनीति निंदनीय है।
बिरसा मुंडा का झारखंड में वही स्थान है जो देश में महात्मा गांधी का। जिस तरह विदेश से आने वाली महत्वपूर्ण हस्तियां दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी की समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करना अपना पहला कर्तव्य समझती हैं। उसी तरह रांची आने वाले वीवीआईपी लोग बिरसा चौक और उनकी समाधि पर श्रद्धा सुमन अवश्य अर्पित करते हैं। झारखंड सरकार पुरानी जेल परिसर में जहां बिरसा ने अंतिम सांस ली थी, उनकी 100 फुट ऊंची मूर्ति बनवा रही है। आजसू विधायक रामचंद्र सहिस मंत्रिपद की शपथ ग्रहण करने के बाद श्रद्धा अर्पित करने ही बिरसा समाधि स्थल पर गए थे। उन्हें प्रतिमा क्षतिग्रस्त मिली।
महापुरुषों की मूर्तियों के रखरखाव और उनकी सुरक्षा के प्रति उदासीनता शरारती तत्वों को घटिया हरकतों का मौका देती हैं। आमतौर पर खास अवसरों पर उनकी सफाई की जाती है शेष समय असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। चिड़िया बीट करती रहती है। किसी को सकी चिंता नहीं होती। इसलिए न सिर्फ रांची बल्कि पूरे देश में प्रतीक पुरुषों की मूर्तियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी लगाए जाने चाहिए और उनके रखरखाव के लिए एक अलग विभाग बनाया जाना चाहिए या किसी विभाग को इसकी विशेष जिमेमेवारी दी जानी चाहिए।

वित्तमंत्री ने किया बजट से पूर्व अर्थशास्त्रियों के साथ विचार विमर्श




नई दिल्ली। मोदी सरकार की दूसरी पारी में आर्थिक मामलों में सावधानी बरती जा रही है। यही कारण है कि केंद्रीय वित्‍त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगामी आम बजट 2019-20 के संबंध में जाने माने अर्थशास्त्रियों के साथ विचार विमर्श किया। इसके लिए अपनी छठी पूर्व-बजट परामर्श बैठक का आयोजन किया।
उक्‍त बैठक के दौरान चर्चा के मुख्‍य क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, रोजगार-जनित विकास, वृहद- आर्थिक स्थिरता बढ़ाना, सार्वजनिक क्षेत्र की ऋण जरूरतों का आदर्श आकार और निवेश सहित राजकोषीय प्रबंधन शामिल हैं। वित्‍त मंत्री के साथ इस बैठक में नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष राजीव कुमार, वित्‍त सचिव सुभाष सी. गर्ग, राजस्‍व सचिव अजय भूषण पांडे, डीएफएस सचिव राजीव कुमार, व्‍यय सचिव गिरीश चंद्र मुर्मू, डीआईपीएएम सचिव अतनु चक्रवर्ती, सीबीडीटी के अध्‍यक्ष प्रमोद चंद्र मोदी, सीबीआईसी के अध्‍यक्ष डॉ. के.वी. सुब्रह्मनियन और वित्‍त मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भाग लिया।     
अर्थशास्त्रियों ने अपना यह विचार रखा कि इस बजट को अगले 5 वर्षों के लिए गति निर्धारित करनी चाहिए। यह मेक इन इंडिया के माध्‍यम से विनिर्माण को बढ़ावा देने का विशिष्‍ट अवसर है। अर्थशास्त्रियों ने टेरिफ सुधारों, आपूर्ति श्रृंखला में अड़चनों को दूर करना, कृषि के लिए आयात-निर्यात नीति, टैक्‍सटाइल पर विशेष शुल्‍कों को हटाना, राजकोषीय मजबूती बनाए रखना, समग्र घरेलू विकास के लिए अंतर-राज्‍य परिषदों का पुन: उद्धार करना, कौशल विकास पर ध्‍यान केंद्रित करके रोजगार को बढ़ाना, सेवा और विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्‍साहित करना, दीर्घाकालीन विकास के लिए वृहद आर्थिक स्थिरता और संगठनात्‍मक सुधार, कर दरों की स्थिरता, शुल्‍कों में कमी, जीएसटी को और अधिक सरल बनाना, प्रत्‍यक्ष कर संहिता लागू करना, श्रम गहन क्षेत्रों को बढ़ावा देना, स्‍वतंत्र राजकोषीय नीति समिति का गठन, डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देना, नौकरी उन्‍मुख विकास पर ध्‍यान केंद्रित करना, रोजगार  बढ़ोतरी के लिए बैंकों में पूंजी डालने और ई-कॉमर्स की संभावनाओं का उपयोग करके एनएफबीसी क्षेत्र के लिए इनसॉल्‍वेंसी एंड बैंककरप्‍सी (आईबीसी) कोड की तरह के ढ़ांचे के बारे में सुझाव दिए गए।
उक्त बैठक में भाग लेने वाले प्रमुख प्रतिभागियों में एनआईपीएफपी के सीईओ और निदेशक रथिन रॉय, अर्थशास्‍त्री  अरविंद विरमानी, इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान के कुलपति एस. महेंद्र देव, राष्‍ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक शेखर शाह, अर्थशास्त्री राकेश मोहन, बिजनेस स्टैंडर्ड प्रा. लिमिटेड के अध्‍यक्ष टी. एन. निनन, अर्थशास्त्री नितिन देसाई, एसबीआई के मुख्‍य अर्थशास्त्री सौम्‍या कांति घोष, आदित्य बिड़ला समूह के मुख्य अर्थशास्त्री अजीत रानाडे, अर्थशास्त्र और योजना इकाई के प्रो. ई. सोमनाथन, आईडीएफसी संस्थान के निदेशक निरंजन राज्याक्ष, एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी, भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन अतुल गुप्ता और फाइनेंशियल एक्‍सप्रेस के प्रबंध संपादक सुनील जैन तथा अनेक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री शामिल रहे।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...