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शुक्रवार, 14 जून 2019

महापुरुषों की मूर्तियों के साथ छेड़छाड़ करने वाले असली देशद्रोही




देवेंद्र गौतम
झारखंड के प्रतीक पुरुष और स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बिरसा मुंडा की समाधिस्थल पर लगी मूर्ति का टूटना आंधी अथवा प्राकृतिक घटना का परिणाम नहीं हो सकता। यह मानवीय शरारत है। जिन लोगों ने रात के अंधेरे में यह शरारत की वे देश और समाज के अपराधी हैं। वे लोगों की भावनाओं को आहत कर अशांति फैलाना चाहते हैं। उन्हें ढूंढकर कड़ी से कड़ी सज़ा देनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी हरकत करने से पहले अपराधियों को सौ बार सोचना पड़े। ऐसे लोग कभी आंबेडकर की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ करते हैं तो कभी कुंअर सिंह की मूर्ति को निशाना बनाते हैं। बिरसा मुंडा पूरे देश के लिए पूजनीय हैं। उनसे किसी को नाराजगी नहीं हो सकती। निश्चित रूप से राजनीतिक स्वार्थ की रोटी सेंकने के लिए किसी ने यह घटिया हरकत की है। कुछ ही महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से इसका संबंध हो सकता है। इस तरह की क्षुद्र राजनीति निंदनीय है।
बिरसा मुंडा का झारखंड में वही स्थान है जो देश में महात्मा गांधी का। जिस तरह विदेश से आने वाली महत्वपूर्ण हस्तियां दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी की समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करना अपना पहला कर्तव्य समझती हैं। उसी तरह रांची आने वाले वीवीआईपी लोग बिरसा चौक और उनकी समाधि पर श्रद्धा सुमन अवश्य अर्पित करते हैं। झारखंड सरकार पुरानी जेल परिसर में जहां बिरसा ने अंतिम सांस ली थी, उनकी 100 फुट ऊंची मूर्ति बनवा रही है। आजसू विधायक रामचंद्र सहिस मंत्रिपद की शपथ ग्रहण करने के बाद श्रद्धा अर्पित करने ही बिरसा समाधि स्थल पर गए थे। उन्हें प्रतिमा क्षतिग्रस्त मिली।
महापुरुषों की मूर्तियों के रखरखाव और उनकी सुरक्षा के प्रति उदासीनता शरारती तत्वों को घटिया हरकतों का मौका देती हैं। आमतौर पर खास अवसरों पर उनकी सफाई की जाती है शेष समय असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। चिड़िया बीट करती रहती है। किसी को सकी चिंता नहीं होती। इसलिए न सिर्फ रांची बल्कि पूरे देश में प्रतीक पुरुषों की मूर्तियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी लगाए जाने चाहिए और उनके रखरखाव के लिए एक अलग विभाग बनाया जाना चाहिए या किसी विभाग को इसकी विशेष जिमेमेवारी दी जानी चाहिए।

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