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रविवार, 13 अक्टूबर 2019

समाजसेवा के प्रति समर्पित रहे हैं जयदीप चड्ढा




झारखंड की राजधानी रांची के लालपुर चौक स्थित सर्कुलर रोड निवासी जयदीप चड्ढा युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं। समाज सेवा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए जा रहे कार्य प्रेरक और अनुकरणीय हैं। श्री चड्ढा का जन्म 4 दिसंबर 1988 को रांची में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रांची स्थित बिशप वेस्टकाॅट ब्वायज  स्कूल से हुई। इसके बाद रांची के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान संत जेवियर कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन किया। स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद व्यवसायिक शिक्षा की ओर उनकी अभिरुचि हुई। उन्होंने गाजियाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च से एमबीए की डिग्री प्राप्त की। तत्पश्चात उन्होंने ओबरॉय होटल, दिल्ली में बतौर प्रोक्योरमेंट मैनेजर नौकरी शुरू की। लेकिन जल्द ही इस नौकरी से उनका मोहभंग हो गया। उनके दादा स्व. सीएस चड्ढा शहर के जाने-माने दवा व्यवसायी और लोकप्रिय समाजसेवी थे। जयदीप अपने दादा जी द्वारा स्थापित दवा व्यवसाय में हाथ बंटाने लगे। उनके पिता दविंदर पाल सिंह चड्ढा और माता सोनिया चड्ढा उन्हें अपने कैरियर निर्माण के साथ-साथ समाज के लिए भी सकारात्मक सोच के साथ कुछ करते रहने की प्रेरणा देते रहे। इसी से प्रेरित होकर जयदीप अपने दादा व पिताजी के दवा व्यवसाय में सहभागिता निभाते हुए समाज सेवा के कार्यों में भी बढ़चढ़कर हिस्सा लेने लगे। अपने परम पूजनीय दादा स्व. चरणजीत सिंह चड्ढा और अपने पिता दविंदर पाल सिंह चड्डा के पद चिन्हों पर चलते हुए उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी अपनी सहभागिता निभाना शुरू किया। पारिवारिक और व्यावसायिक व्यस्तताओं के बीच समय निकालकर वह समाज सेवा के प्रति समर्पित रहने लगे। उन्होंने 10 अगस्त, 2014 को रोटरी क्लब ज्वाइन किया। रोटरी क्लब ऑफ रांची नॉर्थ के  लगातार तीन वर्षों तक सचिव बने रहे। फिर इसके अध्यक्ष पद पर रहे। क्लब के माध्यम से समाज सेवा के कार्यों में जुटे रहना उनकी दिनचर्या में शुमार हो गया। जयदीप रांची शहर स्थित गुरुनानक होम फॉर हैंडिकैप्ड चिल्ड्रन नामक संस्था के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी भी हैं। वह रोटरी क्लब के माध्यम से सामाजिक कार्यों को गति देने में जुटे हैं। इसके आधार पर उन्हें वर्ष 2016-17 का आउटस्टैंडिंग रोटरी क्लब सेक्रेटरी डिस्ट्रिक्ट अवार्ड प्राप्त हुआ। समाजसेवा के प्रति उनके समर्पण और उत्कृष्ट कार्यशैली  के लिए इस वर्ष उन्हें आउटस्टैंडिंग क्लब प्रेसिडेंट अवॉर्ड से भी नवाजा गया है। क्लब के माध्यम से रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर का आयोजन, बच्चों और महिलाओं के लिए टीकाकरण और स्वास्थ्य के प्रति महिलाओं को जागरूक करने के लिए जागरूकता शिविर का आयोजन आदि कार्यक्रमों में वह बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। जयदीप पशु प्रेमी और पर्यावरण प्रेमी भी हैं। बीमार पशुओं की सेहत ठीक रखने के लिए वह रोटरी क्लब के माध्यम से कई बार एनिमल वैक्सीनेशन कैंप का भी आयोजन कर चुके हैं। इंसान तो इंसान जानवरों के प्रति भी करुणा और दया का भाव रखना जयदीप की महानता का परिचायक है। ग्रामीण क्षेत्रों में एनीमिया से पीड़ित महिलाओं और कुपोषण से पीड़ित बच्चों की सेहत सुधारने की दिशा में भी जयदीप सक्रिय रहते हैं। बच्चों के लिए टीकाकरण, महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर स्वास्थ्य शिविर लगाकर अपने सहयोगियों संग जयदीप सक्रिय रहते हैं। वहीं, शिक्षा के प्रति भी बच्चों को जागरूक करते रहते हैं। स्कूली बच्चों के बीच पठन सामग्री का वितरण, बच्चों की बौद्धिक क्षमता विकसित करने के लिए अंतर स्कूल प्रतियोगिताओं का आयोजन, स्वास्थ्य के क्षेत्र में पोलियो उन्मूलन के लिए शिविर का आयोजन, बच्चों के केयर के लिए स्कूलों में कैंप लगाना आदि कार्यक्रम समय समय पर उनके माध्यम से आयोजित किया जाता है। लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की दिशा में भी वह सतत प्रयत्नशील रहते हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जयदीप गंभीरता से जुड़े हैं। विगत दो वर्षों में उन्होंने विभिन्न जगहों पर अपने सहयोगियों को साथ लेकर  लगभग 25 हजार पौधरोपण किया है। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण मानव और वन्य जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। वह कहते हैं कि युवाओं को अपने पेशे और अपनी पारिवारिक व्यस्तता के बीच थोड़ा समय निकालकर सकारात्मक सोच के साथ सामाजिक नव निर्माण की दिशा में भी अग्रसर होना चाहिए। युवाओं के कंधे पर हमारे देश का भविष्य टिका हुआ होता है। इसलिए समाज की मुख्यधारा से जुड़े रहना और अपने परिवार, देश और समाज के प्रति उत्तरदायित्व को समझते हुए कर्तव्य पथ पर सदैव अग्रसर रहना चाहिए। जयदीप फिल्म बादल के इस गीत "अपने लिए, जिए तो क्या जिए,ऐ दिल, तू जी जमाने के लिए" को अपने जीवन में आत्मसात कर समाज सेवा के प्रति समर्पित हैं। वह कहते हैं कि युवा शक्ति का सदुपयोग सकारात्मक कार्यों में किया जाना चाहिए। इससे हमारा देश, समाज समृद्ध और मजबूत होगा। तभी हम विश्व के विकासशील देशों की श्रेणी में अग्रणी पंक्ति पर खड़ा हो सकेंगे।
 प्रस्तुति: नवल किशोर सिंह

बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं अवध नारायण प्रसाद




झारखंड सरकार के भू- राजस्व विभाग में संयुक्त सचिव और भू-राजस्व मंत्री अमर कुमार बाउरी के ओएसडी अवध नारायण प्रसाद जनप्रिय प्रशासनिक अधिकारी और बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। अपनी प्रशासनिक दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा की वजह से उन्होंने सरकारी महकमे और समाज के बीच विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा धनबाद से पास की। इसके बाद रांची कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। कतरास कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। तत्पश्चात रांची विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। राज्य प्रशासनिक सेवा की प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल हुए और सफल रहे। उनकी पहली पदस्थापना गढ़वा जिले के धुरकी में बतौर प्रखंड विकास पदाधिकारी हुई। वह गोइलकेरा और सोनुआ प्रखंड में भी बीडीओ के पद पर कार्यरत रहे। तोरपा, लातेहार, चाईबासा में कार्यपालक दंडाधिकारी के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी। श्री प्रसाद मधुपुर में अनुमंडल पदाधिकारी और गिरिडीह व हजारीबाग में जिला आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर भी रहे। उन्होंने गिरिडीह में एडीएम और डीआरडीए के निदेशक पद पर भी कार्य किया। भूमि राजस्व विभाग में उप सचिव के पद पर भी अपनी जिम्मेवारी निभाई।वर्तमान में भू राजस्व विभाग में संयुक्त सचिव हैं। अवध नारायण प्रसाद जहां भी प्रस्थापित रहे, अपनी कार्यकुशलता, कर्तव्यनिष्ठा और लगनशीलता के बलबूते उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने में सफल रहे। विभागीय कार्यों को त्वरित गति प्रदान करना और जनहित के कार्यों को तवज्जो देना उनकी विशेषता रही है। अपने प्रशासनिक कार्यों का बखूबी निष्पादन करते हुए वह सामाजिक कार्यों में भी रुचि लेते हैं। किसी भी धर्म व संप्रदाय का पर्व-त्यौहार हो,श्री प्रसाद उसमें अपनी सहभागिता निभाते हैं। वह सभी धर्मों का समान आदर करते हैं। विधायिका और कार्यपालिका के बीच समन्वय स्थापित कर सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों को दिलाने की दिशा में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वह अन्य अधिकारियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी कार्यशैली अन्य अधिकारियों के लिए अनुकरणीय है। अवध नारायण प्रसाद एक प्रशासनिक अधिकारी के अलावा सरल, सहज व मृदुभाषी इंसान हैं। सबके साथ मित्रवत व्यवहार करना उनकी आदत में शुमार है। उनका मानना है कि लोगों को अपने पेशे की व्यस्तताओं के बीच समय निकालकर सामाजिक समरसता के लिए भी प्रयासरत रहना चाहिए। इससे देश व समाज समृद्ध और मजबूत होता है।
 प्रस्तुति : विनय मिश्रा

सादगी और सहजता की मिसाल बनी जोहार जन आशीर्वाद यात्रा


मुख्यमंत्री रघुवर दास वादे के साथ साथ समय के भी काफी पाबंद हैं। चक्रधरपुर अनुमंडल में गोइलकेरा से प्रारंभ होकर चक्रधरपुर में समापन जोहार जन आशीर्वाद यात्रा के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा दोपहर ठीक ढाई बजे चक्रधरपुर मुख्य मार्ग में पदयात्रा करते हुए लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। मुख्यमंत्री की सादगी देखते बनी। लोगों के साथ जिस सहज भाव से सीधे संबंध स्थापित किया वह एक दृष्टांत बन गया। सड़क के किनारे खड़े विशाल जनसमूह ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस क्रम में उपायुक्त अरवा राजकमल, उपविकास आयुक्त आदित्य रंजन, सदर डी एस पी अमर पांडेय, चाईबासा अनुमंडल पदाधिकारी पारितोष ठाकुर, चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी प्रदीप प्रसाद, चक्रधरपुर अंचल अधिकारी अमर जॉन आईंद, चक्रधरपुर नगर परिषद के पदाधिकारी महेन्द्र राम भी उपस्थित रहे ।चक्रधरपुर ओवर ब्रिज निर्माण के पश्चात यह पहला अवसर है कि जब मुख्यमंत्री रघुवर दास व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ओवर ब्रिज पर चढ़े गौरतलब हो कि पैंतीस वर्षों के पश्चात यह ओवर ब्रिज निर्माण कार्य पूरा हुआ है ।

शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2019

* प्रशासनिक दक्षता की मिसाल पेश करते रहे हैं उपेंद्र नारायण उरांव

 


सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय का व्यापक दृष्टिकोण रखते हुए सामाजिक उत्थान और उत्कर्ष के लिए सतत प्रयत्नशील रहना व्यक्ति की महानता का परिचायक होता है। समाज को हमेशा सही दिशा दिखाने और रचनात्मक कार्यों में सहभागिता निभाते हुए अपने प्रशासनिक कार्यों को भी बखूबी निष्पादित करते रहना किसी भी अधिकारी की विशेषता कहलाता है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी और वर्तमान में झारखंड राज्य खाद्य आयोग के सदस्य उपेंद्र नारायण उरांव। श्री उरांव मूल रूप से रांची के मांडर क्षेत्र के निवासी हैं। लेकिन काफी दिनों से बिहार के पूर्णिया में बस गए हैं। वह पढ़ाई-लिखाई में वह हमेशा अव्वल रहे। ग्रेजुएशन करने के बाद श्री उरांव बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल हुए और सफल रहे। उनकी पहली पदस्थापना बतौर प्रखंड विकास पदाधिकारी तांत नगर में हुई। वह गुमला जिले के चैनपुर में भी बीडीओ के पद पर कार्यरत रहे। श्री उरांव एकीकृत बिहार और झारखंड के एकमात्र ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें अपने सेवाकाल के दौरान सात अनुमंडल का पदाधिकारी रहने का गौरव प्राप्त है। वह बिहार के भभुआ, खड़गपुर,(मुंगेर),लखीसराय, झंझारपुर और झारखंड के धनबाद और चक्रधरपुर में अनुमंडल पदाधिकारी के पद पर रह चुके हैं। वह जहां भी पदस्थापित रहे, अपनी प्रशासनिक दक्षता और क्षमता का परिचय देते हुए एक कर्तव्यनिष्ठ और उत्कृष्ट अधिकारी की पहचान बनाने में सफल रहे। श्री उरांव जब चक्रधरपुर में अनुमंडल पदाधिकारी थे, उसी समय रांची जिले के बुंडू को नया अनुमंडल बनाया गया था। श्री उरांव को बुंडू के प्रथम अनुमंडल पदाधिकारी बनने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रशासनिक पद पर रहते हुए अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने जनहित में कई ऐसे उल्लेखनीय कार्य किए, जो मील का पत्थर साबित हुआ है। वह झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ के भी पदधारी रहे हैं। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के हितों के संरक्षण के लिए सतत प्रयासरत रहे हैं। श्री उरांव दुमका में डीडीसी के पद पर भी कार्यरत रहे। झारखंड सरकार के खाद्य आपूर्ति विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी। इस दौरान खाद्य सुरक्षा कानून के अनुपालन के प्रति वह काफी गंभीर रहे हैं। उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली, अनुभव और प्रशासनिक दक्षता के आधार पर राज्य सरकार ने उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी सेवाएं राज्य खाद्य आयोग में बतौर सदस्य के रूप में ले रही है। श्री उरांव जात-पात, धर्म-संप्रदाय की संकीर्णताओं से परे हैं। वह सभी धर्मों का समान आदर करते हैं। समाज के लिए सकारात्मक कार्यों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं।  वह एक शालीन, सरल और सहज व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उनकी सहभागिता सामाजिक कार्यों में भी होती है। राज्य खाद्य आयोग में सदस्य के रूप में  जन शिकायतों के निवारण के लिए विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाकर जनसुनवाई के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए वह सतत प्रयासरत रहते हैं। श्री उरांव की विशेषता रही है कि वह अपने कार्यों के प्रति सदैव गंभीर रहे हैं। अपने उत्तरदायित्वों के निर्वहन के लिए वह सदैव प्रयासरत रहते हैं। प्रशासनिक पद पर रहते हुए सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की दिशा में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए,जिसका लाभ जनता को मिलता रहा है। जनहित के कार्यों को तवज्जो देना उनकी प्राथमिकताओं में शुमार है। मृदुभाषी उपेंद्र नारायण उरांव का व्यवहार सबों के साथ मित्रवत होता है। उनका मानना है कि शालीनता और संस्कार जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। इसके माध्यम से हम हर दिल अजीज बन सकते हैं। समाज के प्रति अपने संदेश में वह कहते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर समाज हित के प्रति भी हमें सजग रहने की आवश्यकता है। यह स्वस्थ और स्वच्छ समाज निर्माण में काफी सहायक होता है। वहीं, युवाओं के प्रति अपने संदेश में श्री उरांव कहते हैं कि युवाओं को अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल सकारात्मक कार्यों में करना चाहिए। इससे हमारा देश और समाज सशक्त होगा और विश्व पटल पर भारत विकासशील देशों की श्रेणी में अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो सकेगा।
 प्रस्तुति : विनय मिश्रा

बुधवार, 9 अक्टूबर 2019

औद्योगिक संबंधों को विकसित करने वाले कर्मयोगी हैं राणा शुभाशीष



प्रतिभा और कर्तव्यनिष्ठा की जीती जागती मूर्ति हैं बहुमुखी प्रतिभा के धनी राणा शुभाशीष चक्रवर्ती। वे वर्तमान में एचईसी के निदेशक (उत्पादन व विपणन) के पद पर कार्यरत हैं। उनकी शिक्षा-दीक्षा रांची में ही हुई। उनके पिता स्व. प्रो.जगन्नाथ चक्रवर्ती और माता स्व. तृप्ति चक्रवर्ती ने उन्हें संस्कारयुक्त शिक्षा दिलाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। अपने माता पिता को प्रेरणास्रोत मानते हुए श्री चक्रवर्ती अपने जीवन पथ पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बीआईटी, मेसरा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। तत्पश्चात इग्नू से डिप्लोमा इन मैनेजमेंट का कोर्स किया। इसके बाद एमबीए (मार्केटिंग मैनेजमेंट) में बीआईटी, मेसरा से प्रथम श्रेणी की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई के प्रति उनका जुनून, इतनी डिग्रियां हासिल करने के बाद भी कम नहीं हुआ। फिलवक्त श्री चक्रवर्ती पीएचडी कर रहे हैं। उनके शोध का विषय "सार्वजनिक क्षेत्र में कारपोरेट सामाजिक जिम्मेदारियों की चुनौतियां और अवसर" है। राणा एस. चक्रवर्ती को 52 वें इंजीनियर्स दिवस समारोह पर इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, झारखंड द्वारा प्रतिष्ठित "एमिनेंट इंजीनियर पुरस्कार" से सम्मानित किया गया।  उन्हें यह पुरस्कार एचईसी के विपणन में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए दिया गया। उन्हें "भारत की ऊर्जा सुरक्षा में विद्युत क्षेत्र की भूमिका" पर तकनीकी पेपर प्रस्तुत करने के लिए इंस्टीच्यूशंस ऑफ इंजीनियर्स की ओर से 'विश्वेश्वरैया गोल्ड मेडल'  भी मिला है। उन्होंने भारत और विदेशों में विभिन्न संस्थाओं द्वारा आयोजित सेमिनार में पर्यावरण इंजीनियरिंग, विपणन, प्रबंधन और उद्योग के क्षेत्र में तकनीकी कागजात भी प्रस्तुत किए हैं। जिसके लिए उन्हें पुरस्कृत किया जाता रहा है। श्री चक्रवर्ती सार्वजनिक उपक्रम, मेकॉन लिमिटेड में तकरीबन 32 वर्षों तक बतौर अधिकारी विभिन्न पदों पर सेवारत रहे।  मेकाॅन में कार्यकाल के दौरान अपनी बेहतरीन कार्यशैली से उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की हैं, जो मील का पत्थर साबित हुई हैं। अपने सहयोगियों से मित्रवत व्यवहार करना, जिम्मेदारियों को बखूबी निभाना और प्रत्येक कार्यों को समयबद्धता तथा प्रसन्नता से पूरा करना उनकी विशेषता है। प्राथमिकताएं तय कर निर्णय लेने की उनमें अद्भुत क्षमता है। सकारात्मक सोच के साथ अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन उनकी दिनचर्या में शुमार है। एचईसी में उत्पादन बढ़ाने और औद्योगिक वातावरण विकसित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।  विदित हो कि राणा चक्रवर्ती ने उस समय एचईसी के निदेशक का पद संभाला, जब एचईसी के समक्ष कई चुनौतियां थी। एचईसी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा था। श्री चक्रवर्ती ने उन चुनौतियों का सामना करते हुए उससे निबटने की ठोस रणनीति बनाकर टीम भावना से काम करना शुरू किया। एचईसी के ग्राहकों और कर्मचारियों के भरोसे को मजबूत किया। इसका सकारात्मक परिणाम सामने है। उन्होंने इसरो, विजाग स्टील, कोल इंडिया, रक्षा क्षेत्र आदि सेक्टर से कार्यादेश प्राप्त करने में सफलता पाई। इस  दौरान वह विदेशों से भी कार्यादेश प्राप्त करने में सफल रहे। इस क्रम में उन्होंने इंडोनेशिया, जापान सहित अन्य देशों का भी दौरा किया। देश-विदेश से एचईसी के लिए कार्यादेश प्राप्त करने की दिशा में श्री चक्रवर्ती सतत प्रयासरत हैं। एचईसी की दशा और दिशा सुधारने में अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं। श्री चक्रवर्ती को विपणन व प्रबंधन क्षेत्र के अतिरिक्त पर्यावरण, इंजीनियरिंग,ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्रों में भी काफी अनुभव प्राप्त है। उनके इस अनुभव का लाभ एचईसी को मिल रहा है। श्री चक्रवर्ती की पहचान एक मल्टीटैलेंट पर्सनैलिटी के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनकी इन्हीं विशेषताओं के कारण 28 मार्च 2019 को स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (स्कोप) के कार्यकारी बोर्ड का सदस्य चयनित किया गया। श्री चक्रवर्ती अपने उत्तरदायित्व के प्रति सदैव सजग रहते हैं। समाज के प्रति अपने संदेश में वह कहते हैं कि अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार पहल करते हुए सकारात्मक सोच के साथ कार्य करते रहें। इससे हमारा देश सशक्त व समृद्ध होगा और विश्व पटल पर भारत का दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
 प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

सोमवार, 7 अक्टूबर 2019

नवरात्र में झारखंड को मिला तारामंडल का तोहफा


मुख्यमंत्री रघुवर दास ने चिरौंदी स्थित साइंस सेंटर में नवनिर्मित वराहमिहिर तारामंडल का उद्घाटन किया
 साथ में झारखंड प्रौद्योगिकी (टेक्निकल) विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भवन का भी ऑनलाइन उद्घाटन
 साइंस सेंटर परिसर में ही 1 करोड़ 80 लाख की लागत से बनने वाले इनोवेशन हब भवन का भी शिलान्यास
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★ रांची बनेगा खगोलीय शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र

★ इनोवेशन हब से विज्ञान के विकास को बढ़ावा

★ समग्र विकास में विज्ञान का महत्वपूर्ण स्थान
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रांची। मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि रांची खगोलीय शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा। हमारी सरकार का विज्ञान और तकनीकी के प्रगति पर पूरा जोर है। समय के साथ आगे बढ़ना जरूरी है। नई-नई तकनीकों को अगर हम बदलते समय के साथ नहीं अपनाएंगे तो चीजें समय के साथ आगे नहीं बढ़ पायेंगी। विज्ञान के विकास के बिना राज्य या देश तरक्की नहीं कर सकता। शिक्षा, कारोबार, उद्योग या फिर सरकारी मशीनरी इन सभी क्षेत्रों के विकास में विज्ञान और नई तकनीकों का महत्वपूर्ण स्थान है। उक्त बातें मुख्यमंत्री ने आज चिरौंदी स्थित साइंस सेंटर में नवनिर्मित वराहमिहिर तारामंडल एवं झारखंड प्रौद्योगिकी (टेक्निकल) विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भवन के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं।

तारामंडल खगोलीय विद्या के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि तारामंडल खगोलीय विद्या के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि वराहमिहिर तारामंडल झारखंड के छात्र-छात्राओं और शोधकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार करेगा। इन्हें खगोलीय विद्या के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।

प्रोत्साहन राशि दे रही है सरकार

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि विज्ञान के प्रचार प्रसार एवं शिक्षाविद छात्र-छात्राओं में विज्ञान के प्रति रुचि जागृत करने के लिए अभियंत्रण एवं डिप्लोमा टॉपर को प्रोत्साहित राशि सरकार दे रही है। शोधकर्ता एवं कार्यशाला सेमिनार व्याख्यान आयोजन के लिए अनुग्रह राशि भी सरकार मुहैया करा रही है।

खगोलविद् वराहमिहिर के नाम पर है तारामंडल

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि वराहमिहिर तारामंडल झारखंड का पहला अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित तारामंडल है। इस तारामंडल का नाम बड़े चिंतन के साथ वराहमिहिर रखा गया है। वराहमिहिर महान दार्शनिक खगोलशास्त्री और गणितज्ञ थे। वराहमिहिर गुप्त काल के छठवीं सदी में उज्जैन में जन्म लिए थे।

इनोवेशन हब भवन का शिलान्यास

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि चिरौंदी स्थित इस साइंस सेंटर में ही एक करोड़ 80 लाख रुपए की लागत से नई इनोवेशन भवन का भी शिलान्यास आज हो रहा है। इस भवन का भी निर्माण कार्य समय सीमा के अंतर्गत पूरा करना राज्य सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि हम ज्ञान विज्ञान एवं तकनीकी के युग में जी रहे हैं। वर्तमान समय की मांग है कि इस क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाय । इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार ने इनोवेशन हब भवन निर्माण करने का संकल्प लिया है। सरकार का लक्ष्य है कि यह कार्य समय सीमा के अंतर्गत पूरा हो।

तकनीकी क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राओं को काफी लाभ पहुंचेगा

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि नामकुम स्थित झारखंड प्रौद्योगिकी (टेक्निकल) विश्वविद्यालय का भी उद्घाटन आज हो रहा है। इस विश्वविद्यालय के शुभारंभ होने से राज्य के तकनीकी क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राओं को काफी लाभ पहुंचेगा। इस क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को अब बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी उन्हें यहीं से डिग्रियां प्राप्त होंगी। तकनीकी के इस युग में बच्चे और ज्यादा मजबूत होंगे। मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि वैज्ञानिकों ने हमेशा देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में हो रहे विकास देश को नए आयाम देंगे। मुख्यमंत्री ने विज्ञान के क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्र छात्राओं से अपील किया कि वे पूरी निष्ठा के साथ अपनी पढ़ाई करें और जीवन के पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहें। आने वाले समय में झारखंड से भी वैज्ञानिक उभरकर देश और दुनिया में राज्य का नाम रोशन करें। उन्होंने राज्यवासियों को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने तारामंडल पर बनाई गई लघु फिल्म भी देखी।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव, सांसद रांची श्री संजय सेठ, कांके विधायक श्री जीतू चरण राम, मेयर रांची श्रीमती आशा लकड़ा, उच्च शिक्षा सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह, तकनीकी निदेशक डॉ अरूण कुमार, सेंटर के कार्यपालक निदेशक श्री जीएसपी गुप्ता सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, स्कूली छात्र-छात्राएं एवं अन्य उपस्थित थे।

आप सभी गुरु नानक देव के सत्य वचनों से प्रेरणा लेंः रघुवर दास

★गरीबों दीन-दुखियों की मदद करें
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जमशेदपुर। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड वासियों को गुरु नानक देव जी के सत्य वचन से प्रेरणा लेने को कहा उन्होंने कहा हमारे डबल इंजन की सरकार श्री गुरु नानक देव जी के पद चिन्हों पर चलते हुए झारखंड के गरीबों के हित के लिए  दिनरात लगी है। मुख्यमंत्री जमशेदपुर स्थित गुरुद्वारा में अरदास के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा हम सभी को मिलकर गरीब दीन दुखियों की मदद करनी चाहिए। सिखों की एक ऐसी संस्था है पूरे देश में जो ना सिर्फ सिखों की ही सेवा करती है बल्कि समाज के सभी वर्गों चाहे वह किसी भी धर्म जाति से क्यों ना जुड़ा हो उन सब की मदद के लिए हर वक्त आगे रहती है। उसी की तर्ज पर पर सबका विकास सबका साथ के साथ हमारे डबल इंजन की सरकार कार्यरत है।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...