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रविवार, 15 दिसंबर 2019

जवानों के प्रेरणा स्रोत हैं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित रामबाबू प्रसाद




पुलिसकर्मियों की वीरता के अनगिनत किस्से हैं। पुलिस विभाग के कई वीर जवान  ड्यूटी के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपराधियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए हैं। वहीं, कई जवानों ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए जान की बाजी लगाकर अपराधियों को मौका-ए-वारदात पर धर दबोचने में सफलता हासिल की है। उनकी बहादुरी के किस्से अन्य पुलिसकर्मियों के लिए प्रेरणादायक हैं। ऐसे ही जांबाज जवानों की श्रेणी में शामिल एक शख्सियत हैं राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक पुरस्कार से नवाजे गए हवलदार रामबाबू प्रसाद। उन्होंने ड्यूटी के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना दुर्दांत और इनामी नक्सलियों को हथियारों के साथ धर दबोचा। उनकी इस बहादुरी के किस्से आज भी पुलिस विभाग में चर्चित है। रामबाबू मूल रूप से पटना जिले के बख्तियारपुर थानांतर्गत करनौती ग्राम के निवासी हैं। गांव उनकी वीरता पर गर्व करता है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा गांव में ही हुई। वर्ष 1982 में रामबाबू बिहार पुलिस में नियुक्त हुए। तत्पश्चात गया जिला पुलिस बल में उनकी प्रतिनियुक्ति की गई। पुलिस विभाग में बतौर कांस्टेबल वह अपनी ड्यूटी बखूबी निभाते रहे। इस दौरान उनका तबादला तत्कालीन नवसृजित जहानाबाद जिला पुलिस बल में हुआ। वहां वे जहानाबाद के तत्कालीन डीडीसी विजय प्रकाश के अंगरक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त किए गए। अपने कर्तव्यों के प्रति विशेष रूप से सजग रहने वाले राम बाबू ने वहां अपनी वीरता का जो परिचय दिया, उसे याद कर आज भी जहानाबाद शहर के निवासी सम्मानपूर्वक इनका नाम लेते हैं। घटना के बारे में रामबाबू बताते हैं कि 12 मई वर्ष 1988 में वे तत्कालीन डीडीसी के बंगले पर बतौर अंगरक्षक तैनात थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि स्थानीय बैरागीबाग मुहल्ले की ओर से छह व्यक्ति का गिरोह हाथ में हथियार लेकर भाग रहा है। उसके पीछे कुछ ग्रामीण भी उन अपराधियों को पकड़ने के लिए दौड़ रहे हैं। कोठी के बगल से अपराधियों को हथियार के साथ भागता देख उनसे रहा न गया। उन्होंने कोठी पर मौजूद अपने एक सहकर्मी (पुलिस विभाग के चालक) से कहा कि इन अपराधियों को पकड़ना चाहिए और दौड़ पड़े अपराधियों को दबोचने। इस क्रम में अपराधियों की ओर से उन पर निशाना साध कर फायरिंग की गई। अपराधियों की मंशा भांपते हुए रामबाबू ने सड़क पर बने एक पुलिया की ओट में छिप कर अपने सरकारी रिवाल्वर से जवाबी फायरिंग की। इसमें तीन अपराधियों को गोली लगी और घायल होकर  सभी गिर गए। वहीं, तीन अन्य अपराधी जान बचाकर भागने में सफल रहे। रामबाबू ने पलक झपकते घायल तीनों अपराधियों को धर दबोचा। इस बीच काफी संख्या में घटनास्थल पर ग्रामीण भी पहुंच गए थे। सबों ने रामबाबू की सराहना की और इस वीरतापूर्ण कार्रवाई के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। गिरफ्तार अपराधियों की पहचान दुर्दांत और इनामी नक्सली के रूप में हुई। उनसे पूछताछ के क्रम में पता चला कि  सभी अपराधी माओवादी संगठन से जुड़े थे और अपने एक शीर्ष नेता की हत्या कर भाग रहे थे। रामबाबू के
 इस बहादुरी भरे कार्य के लिए पुलिस विभाग की ओर से राष्ट्रपति पुलिस पदक वीरता पुरस्कार के लिए उनके नाम की अनुशंसा की गई। वर्ष 1990 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकटरमन की ओर से उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक वीरता पुरस्कार (पीपीएमजी) प्रदान किया गया। रामबाबू धनबाद में भी पदस्थापित रहे। वहां के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रणधीर वर्मा (अब मृत) और उनकी पत्नी रीता वर्मा के अंगरक्षक के रूप में भी अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन किया। वे चतरा और रांची में भी पदस्थापित रहे। तत्पश्चात इनका तबादला जमशेदपुर रेल थाना में किया गया। इसके बाद वे रांची रेलवे स्टेशन पर जीआरपी थाना में भी बतौर हवलदार पदस्थापित रहे। मार्च 2017 मे रामबाबू प्रसाद हवलदार पद ( सहायक अवर निरीक्षक रैंक ) से सेवानिवृत्त हुए। रामबाबू कहते हैं कि कर्म प्रधान होता है। ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से हम देश और समाज में एक विशेष पहचान बनाने में सफल होते हैं। इससे हमारा देश व समाज सशक्त होता है।
प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

मंगलवार, 19 नवंबर 2019

उत्कृष्ट चिकित्सा से लोगों का दिल जीत रहे हैं डा. संजीव तिरिया


विनय मिश्रा
चाईबासा / चक्रधरपुर : चिकित्सक को लोग भगवान का दूसरा रूप मानते हैं। पीड़ित मानवता की सेवा में चिकित्सकों का महत्वपूर्ण स्थान होता है। ऐसे ही एक लोकप्रिय नेत्र  चिकित्सक हैं डॉ. संजीव तिरिया। पश्चिम सिंहभूम क्षेत्र में विगत कई वर्षों से अपनी उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर लोगों का दिल जीतने में डॉ.तिरिया सफल रहे हैं। वह एक अनुभवी और कुशल नेत्ररोग विशेषज्ञ के रूप में प्रख्यात हैं। नेत्र रोगों की चिकित्सा में उन्हें महारत हासिल है। पीड़ितों और गरीबों के प्रति सहानुभूति और करुणा का भाव रखते हुए उन्हें बेहतर चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के प्रति उनकी निष्ठा का भाव अन्य चिकित्सकों के लिए अनुकरणीय है। वह मानव सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानते हैं। वह अब तक झारखंड व आसपास के राज्यों के लगभग एक लाख नेत्र रोगियों का सफल ऑपरेशन कर चिकित्सा सेवा में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। डॉ. तिरिया की ख्याति झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के अलावा अन्य राज्यों में भी है। नेत्र रोग के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल किए डॉ. तिरिया गरीब मरीजों के प्रति भी काफी दयावान रहते हैं। अपने स्तर से उन्हें हर प्रकार की सहायता करने में तत्पर रहते हैं। गरीब तबके के नेत्र रोग मरीज उन्हें अपना मसीहा मानते हैं। समय-समय पर नेत्र रोगियों के लिए जांच शिविर का आयोजन, मोतियाबिंद का ऑपरेशन शिविर आदि का आयोजन कर वे मरीजों को अपनी सेवाएं प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। उनका कहना है कि आंखें शरीर का महत्वपूर्ण और अनमोल अंग होती है। आंखों की सुरक्षा सर्वोपरि है। आंखें सही सलामत रखने के लिए आंखों की नियमित जांच कराते रहना चाहिए। आंख में किसी प्रकार की भी तकलीफ उत्पन्न होने पर अविलंब नेत्र चिकित्सकों की सलाह लेनी चाहिए।

शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

मानव सेवा ही डॉ. वाईपी सिंह के जीवन का लक्ष्य


पीड़ित मानवता की सेवा करने से जो सुकून मिलता है, वह अकूत संपदा के मालिक होने पर भी नहीं प्राप्त हो सकता है। मानव सेवा मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है। इससे सुखद अनुभूति होती है और मानव जीवन सफल हो जाता है। ऐसा मानना है झारखंड के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. यदुनंदन प्रसाद सिंह का। डॉ. सिंह झारखंड के जाने-माने फिजीशियन और चर्म रोग विशेषज्ञ हैं। फिलवक्त डॉ. सिंह चक्रधरपुर के वार्ड नंबर 8 में अटल क्लीनिक में लोगों को नि:शुल्क चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने झारखंड के विभिन्न जिलों में अपनी सेवाकाल के दौरान पदस्थापित रहते हुए चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की है। उनका कार्यकाल उत्कृष्ट उपलब्धियों भरा रहा है। डॉ. सिंह गुमला जिले के सुदूरवर्ती वनाच्छादित क्षेत्र घाघरा प्रखंड में लगभग 12 साल तक पदस्थापित रहे। क्षेत्र की जनता को उन्होंने बेहतर चिकित्सा सेवाएं दी। आज भी उस क्षेत्र की जनता उनकी चिकित्सा सेवाओं की सराहना करती है। वर्ष 2000 में झारखंड अलग राज्य बनने के बाद उनका स्थानांतरण चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में हुआ। यहां भी वे अपनी बेहतरीन चिकित्सा सेवा से लोगों का दिल जीतने में सफल रहे। वर्ष 2008 में चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल से उनका तबादला खूंटी हो गया। वहां भी लगभग दो वर्षों तक रहे और अपनी सेवाओं से लोगों को लाभान्वित करते रहे। खूंटी के बाद उनका स्थानांतरण जमशेदपुर हो गया। वहां भी वे तीन साल तक पदस्थापित रहे। वर्ष 2013 में उनका स्थानांतरण लातेहार जिले के चंदवा में हुआ। वर्ष 2016 में लातेहार से उन्हें चाईबासा स्थानांतरित कर दिया गया। चाईबासा में डॉ. सिंह ने चिकित्सा सेवा में कई ऐसे उल्लेखनीय कार्य किए, जिसके कारण जनता आज भी उन्हें ईश्वर का दूसरा रूप मानती है। चाईबासा से डॉक्टर सिंह 19 मार्च 19 को सेवानिवृत्त हुए और सेवानिवृत्ति के बाद चक्रधरपुर स्थित अटल क्लीनिक में नि:शुल्क सेवाएं दे रहे हैं। मरीज उन्हें एक चिकित्सक ही नहीं, बल्कि ईश्वर का दूसरा रूप मानते हैं। डॉक्टर सिंह चिकित्सा सेवा के अतिरिक्त सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। सभी धर्म व संप्रदाय के लोगों के साथ मिलना-जुलना और उनके सुख-दुख में शामिल होना उनकी खासियत है। चिकित्सा के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता भी अद्भुत है। वह एक फिजीशियन के साथ-साथ चर्म रोग विशेषज्ञ भी हैं। अपने ज्ञान और अनुभवों के आधार पर वह लोगों की सेवा कर रहे हैं। उनका मानना है कि अपने पेशे की व्यस्तता के अलावा मनुष्य को एक सामाजिक प्राणी होने की सार्थकता भी सिद्ध करने की दिशा में अग्रसर रहना चाहिए। सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी सहभागिता सुनिश्चित कराते हुए सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करना व्यक्ति की महानता का परिचायक होता है। इस दिशा में भी लोगों को प्रयासरत रहना चाहिए। हमारा देश व समाज सशक्त होगा।
प्रस्तुति : विनय मिश्रा

गुरुवार, 7 नवंबर 2019

कर्तव्य निष्ठा की प्रतिमूर्ति हैं प्रवीण कुमार



* ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के बलबूते व्यक्ति शीघ्र ही लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच जाता है। अपने कर्तव्यों के प्रति सजग व गंभीर रहते हुए ईमानदारी पूर्वक जिम्मेदारियों को निभाना व्यक्ति की महानता का परिचायक होता है। ऐसे व्यक्ति समाज के हर वर्ग के चहेते होते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत हैं चक्रधरपुर में पदस्थापित पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी प्रवीण कुमार। शहर को अपराध मुक्त करना और बेहतर विधि व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। श्री कुमार अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर काफी  कम समय में ही समाज के बीच एक साफ-सुथरी छवि स्थापित करने में सफल रहे हैं। वह एक तेज-तर्रार और जांबाज पुलिस अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। विभागीय कार्यों का त्वरित निष्पादन करने और अपराध नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभाने में उन्हें निपुणता हासिल है। मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले के निवासी प्रवीण कुमार की प्रारंभिक शिक्षा गोपालगंज से ही हुई। वहीं से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। तत्पश्चात मुजफ्फरपुर स्थित लंगट सिंह कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए पटना आ गए और पटना कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद भी उनकी पढ़ाई की लगन जारी रही। उन्होंने दिल्ली स्थित करोड़ीमल कॉलेज से स्नातकोत्तर किया। शिक्षण कार्य के प्रति उनकी अभिरुचि बनी रही।  स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त करने के बाद वह एक कॉलेज में व्याख्याता के रूप में भी जुड़े। इसके बाद उन्होंने पुलिस विभाग से जुड़कर देश व समाज की सेवा करने का निर्णय लिया। वर्ष 2012 में श्री कुमार पुलिस विभाग में नियुक्त हुए। नियुक्ति के पश्चात विभिन्न स्थानों पर पदस्थापित रहे और अपनी बहुमुखी प्रतिभा प्रदर्शित कर विभाग के कार्यों को गति देने में सफल रहे। उन्होंने पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के निर्देशन में गुमला में प्रशिक्षण प्राप्त किया। झारखंड जगुआर में भी वह कुछ दिनों तक रहे और वहां भी विभागीय प्रशिक्षण प्राप्त कर बखूबी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहे। श्री कुमार की पहली पदस्थापना धनबाद स्थित बरहोरा थाने में हुई। धनबाद में उन्होंने कई ऐसे उल्लेखनीय कार्य किए, जिसकी सराहना की जाती है। उन्होंने अपने आला अधिकारियों के निर्देशानुसार जनहित के कार्यों को निपटाने में कुशलता पूर्वक कार्य किया। इससे कम समय में ही विभागीय अधिकारियों सहित जनता के चहेते अधिकारियों में उनका नाम शुमार हो गया। वह चाईबासा में अंचल पुलिस निरीक्षक के पद पर भी सेवारत रहे हैं। चाईबासा में अपराध नियंत्रण की दिशा में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए, जिसकी चर्चा आज भी वहां की जनता करती है। वर्तमान में प्रवीण कुमार चक्रधरपुर थाने में बतौर पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी पदस्थापित हैं। यहां विभागीय कार्यों को निपटा ते हुए विभिन्न धर्म व समुदायों के सामाजिक- सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी शिरकत कर सामाजिक समरसता की मिसाल कायम कर रहे हैं। चक्रधरपुर की अमन पसंद जनता अपराध नियंत्रण की दिशा में श्री कुमार के द्वारा की जा रही पहल की सराहना करते नहीं थकते। श्री कुमार का मानना है कि अपराध मुक्त समाज से ही स्वच्छ और स्वस्थ समाज निर्माण की दिशा में मार्ग प्रशस्त होता है। बेहतर विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए और अपराध मुक्त समाज के लिए पुलिस विभाग के साथ साथ जनता का भी सहयोग जरूरी है। वह बताते हैं कि बिना जन सहयोग से हम बेहतर विधि
-व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में सफल नहीं हो सकते हैं। प्रवीण कुमार एक तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी के अलावा मृदुभाषी, शालीन व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति भी हैं। आम जनता के लिए वह एक सरल, सहज इंसान हैं, वहीं, अपराधियों के लिए वह कहर बनकर बरपते हैं। उनका कहना है कि समाज व देश की तरक्की और समृद्धि के लिए हर वर्ग के नागरिकों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहते हुए सामाजिक नव निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाते रहना चाहिए। आज इससे हमारा देश और समाज मजबूत होगा।
प्रस्तुति : विनय मिश्रा

बुधवार, 30 अक्टूबर 2019

बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं प्रोफेसर नवल लुगुन



"इंसान का इंसान से हो भाईचारा,यही पैगाम हमारा" उक्त पंक्तियों को अपने जीवन में आत्मसात कर सर्व-धर्म, सम-भाव के आदर्शों पर चलकर कुछ लोग समाज हित के प्रति समर्पित रहते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत हैं राजधानी रांची के जीएल चर्च कैंपस निवासी प्रोफेसर नवल लुगुन। वे मूल रूप से झारखंड के सिमडेगा जिले के निवासी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रांची में हुई। गौस्सनर मिडिल स्कूल से उन्होंने प्राइमरी एवं गौस्सनर हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की।तत्पश्चात गौस्सनर कॉलेज, रांची से ही इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने रांची विश्वविद्यालय से भू विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। तत्पश्चात गौस्सनर कॉलेज में ही बतौर विज्ञान के व्याख्याता  नियुक्त हुए। विगत तकरीबन 31 वर्षों से प्रोफेसर लुगुन गोस्सनर कॉलेज में प्राध्यापक पद पर रहते हुए अपनी अध्यापन क्षमता से छात्रों को लाभान्वित कर रहे हैं। प्रोफेसर लुगुन छात्र जीवन में ही छात्र हित के लिए सदैव संघर्षरत रहा करते थे। वह कई छात्र संगठनों से भी जुड़े हैं। इसमें मुख्य रूप से आदिवासी छात्र संघ है। वह सेंगेल आंदोलन में भी अग्रणी भूमिका निभाते रहे। अध्यापन और शिक्षण कार्य के अलावा प्रोफेसर लुगुन की राजनीति में भी रुचि रही है। वर्ष 2009 में विधानसभा चुनाव में सिमडेगा जिले के कोलेबिरा विधानसभा क्षेत्र से बहुजन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में उन्होंने अपनी किस्मत आजमाई। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी उन्हें अच्छा ज्ञान है। उनके अनुभव और क्षमता को देखते हुए केंद्र सरकार के डी एस टेक्नोलॉजी में उन्हें सदस्य मनोनीत किया गया।  प्रोफेसर लुगुन ट्राईबल कोलफील्ड लिमिटेड गोड्डा के साइंटिफिक कंसलटेंट भी हैं। वर्तमान में प्रोफेसर लुगुन झारखंड महिला सियासत के झारखंड प्रदेश के चुनाव प्रभारी हैं। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहराते हुए प्रोफेसर लुगून समाज सेवा के प्रति भी गहरी रुचि रखते हैं। वह सभी धर्मों का समान आदर करते हैं। सर्वधर्म समभाव की भावना से ओतप्रोत प्रोफेसर लुगुन सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते रहते हैं। महिला हितों के संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों को देखते हुए झारखंड महिला सियासत की ओर से उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनका मानना है कि महिला सशक्तिकरण के बिना विकास की बातें बेमानी है। महिलाओं को उनका वाजिब हक और संविधान सम्मत अधिकार दिया जाना जरूरी है। सामाजिक विकास में महिलाओं की अहम सहभागिता रहती है। इसलिए महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहने की आवश्यकता है। यह वर्तमान समय की मांग भी है। प्रोफेसर लुगुन कहते हैं कि स्वस्थ और स्वच्छ समाज निर्माण के लिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किए जाने की आवश्यकता है। इससे हमारा देश और समाज सशक्त होगा।
प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

शनिवार, 19 अक्टूबर 2019

संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष का पर्याय हैं राजेंद्र प्रसाद


जनता को उसका संविधान सम्मत अधिकार प्राप्त दिलाने के लिए सतत प्रयासरत रहना राजधानी रांची निवासी राजेंद्र प्रसाद का एकमात्र शगल है। श्री प्रसाद झारखंड के मूलवासियों और सदानों (गैर आदिवासी समुदाय) के हितों के संरक्षण के लिए विगत कई वर्षों से संघर्षरत हैं। श्री प्रसाद का पैतृक आवास सिमडेगा में है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा- दीक्षा सिमडेगा में ही हुई। अपने माता-पिता व गुरुजनों के सानिध्य में पले- बढ़े और पढ़े। उनके माता-पिता ने उन्हें संस्कार युक्त शिक्षा दिलाने में कोई कोई कोर कसर बाकी नहीं रखा। श्री प्रसाद बचपन से ही अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते रहे हैं। सिमडेगा से मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद श्री प्रसाद रांची आ गए। यहां रांची कॉलेज से उन्होंने इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन किया। छात्र जीवन में भी छात्र हित के लिए सदैव संघर्षरत रहे। हक और अधिकार पाने के प्रति उनके जज्बे और जुनून की बानगी देखें कि वह जब कक्षा सात में अध्ययनरत थे, उस समय झारखंड अलग राज्य बनाने का आंदोलन चरम पर था। श्री प्रसाद ने अल्प आयु में भी आंदोलनकारियों का समर्थन करना शुरू किया। आंदोलनकारियों के बताए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार उन्होंने यथासंभव सहयोग करना भी शुरू कर दिया। स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद श्री  प्रसाद झारखंड में निवास कर रहे यहां के मूलवासी सदानों के हितों के संरक्षण के लिए प्रयास शुरू किया। इस दिशा में उन्हें समर्थन भी प्राप्त हुआ। उन्होंने मूलवासी सदान मोर्चा नामक एक गैर राजनीतिक संगठन की स्थापना की और इसके माध्यम से वह मूलवासी सदानों को उनका हक दिलाने की दिशा में प्रयासरत हैं। वह सर्व-धर्म, सम-भाव के आदर्शों को मानते हुए सभी धर्मों का समान आदर करते हैं। शहर में होने वाली सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना उनकी दिनचर्या में शुमार है। किसी भी धर्म व समुदाय का पर्व-त्यौहार हो, श्री प्रसाद उसमें बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता निभाते हैं। मृदुभाषी, सरल, सहज व व्यवहारकुशल श्री प्रसाद कहते हैं कि प्रसन्नता जीवन का अमूल्य उपहार है। सफलता और उपलब्धियां उसे ही हासिल होती है जो सदैव प्रसन्न चित्त रहकर अपने कर्तव्य पथ पर सदा अग्रसर रहते हैं। समाज के प्रति अपने संदेश में श्री प्रसाद कहते हैं  कि नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। वहीं, युवाओं को तनावमुक्त जीवन जीते हुए समाज की मुख्यधारा से जुड़े रहकर अपनी ऊर्जा सकारात्मक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। श्री प्रसाद कहते हैं कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी जरूरी है। इससे हमारा समाज सशक्त होता है। जब समाज मजबूत होगा तो देश भी शक्तिशाली और समृद्ध होगा।
प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2019

नक्सलियों की नकेल कसने में माहिर हैं सीआरपीएफ कमांडेंट आनंद कुमार जेराई



चक्रधरपुर स्थित  सीआरपीएफ की 60वीं बटालियन के कमांडेंट आनंद कुमार जेराई नक्सलियों और आतंकियों के लिए खौफ का पर्याय रहे हैं। उनका मानना है कि देश की रक्षा सर्वोपरि है। देश भक्ति और अपने राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना हर नागरिक में होना जरूरी है। यह सशक्त और समृद्ध राष्ट्र निर्माण में काफी सहायक होता है। ऐसी सोच रखने वाले व्यक्ति ही सच्चे देशभक्त कहलाने के हकदार होते हैं। ऐसा मानना है चक्रधरपुर स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की  60वीं बटालियन के कमांडेंट आनंद कुमार जेराई का। श्री जेराई देश प्रेम के जज्बे और जुनून से ओतप्रोत व आत्मविश्वास से लबरेज पुलिस अधिकारी हैं। उनके लिए राष्ट्र सेवा सर्वोपरि है। वह मानव सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानते हैं। बचपन से ही उनमें देशप्रेम की भावना कूट-कूट कर भरी थी। यौवनावस्था में आने पर राष्ट्रप्रेम का जुनून उनके सिर चढ़कर बोलने लगा। देशप्रेम का जज्बा परवान चढ़ने लगा। इसी जज्बे से प्रेरित होकर वे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में शामिल हुए और देश सेवा का अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। श्री जेराई की प्रारंभिक शिक्षा चाईबासा में हुई। उनके पिता स्व. जयराम जेराई बिहार प्रशासनिक सेवा में अधिकारी थे। वहीं, उनकी माता स्व.गौरी जेराई एक कुशल गृहिणी थी। उनके माता-पिता ने आनंद को संस्कार युक्त शिक्षा दिलाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। देश सेवा के प्रति आनंद के बढ़ते शौक को देखकर उनके माता-पिता हमेशा उन्हें प्रेरित करते रहे। चाईबासा में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद आनंद ने रांची स्थित जिला स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की। मारवाड़ी कॉलेज, रांची से उन्होंने इंटरमीडिएट किया और इसके बाद रांची कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। वर्ष 96 बैच के पुलिस अधिकारी आनंद वर्ष 1997 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में नियुक्त हुए। उनकी बेसिक ट्रेनिंग आसाम में हुई। वह श्रीनगर में भी तीन साल पदस्थापित रहे। त्रिपुरा, राजस्थान,मेघालय व मिजोरम में भी पदस्थापना के दौरान उन्होंने अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। श्री जेराई एनएसजी में भी पांच वर्षों तक पदस्थापित रहे। इस दौरान वह तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सुरक्षा टीम में भी शामिल थे। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी, हैदराबाद में भी अपनी पदस्थापना काल में प्रतिभा का परचम लहराया। उन्हें नक्सलियों की नकेल कसने में महारत हासिल है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र छत्तीसगढ़ के सुकमा में भी स्थापित रहे। उनके कार्यकाल के दौरान नक्सलियों ने सर्वाधिक संख्या में आत्मसमर्पण किया। नक्सली उनके नाम से ही खौफ खाते हैं। श्री जेराई जहां कहीं भी पदस्थापित रहे, अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली, व्यवहार कुशलता और अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार पहल से अपने मिशन में सफल रहे हैं। उनके निर्देशन और नेतृत्व में सीआरपीएफ बटालियन अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है। उनकी नेतृत्व क्षमता अद्भुत है। पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के मार्गदर्शन और उनके निर्देशों का सम्मान करते हुए वह सेवारत रहते हैं, वहीं, अपने मातहत सहकर्मियों के संग मित्रवत व्यवहार करते हैं। उनका मानना है कि टीम भावना से काम करने पर हम जल्द ही अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल हो जाते हैं। संगठन में शक्ति उनका आदर्श वाक्य है। वह अपने बटालियन में एक जांबाज पुलिस अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। समाज के प्रति अपने संदेश में श्री जेराई कहते हैं कि हर नागरिक को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। युवाओं के प्रति अपने संदेश में वह कहते हैं कि समाज की मुख्यधारा से जुड़ कर अपने भविष्य निर्माण के प्रति गंभीर हों। युवा हमारे देश के भविष्य हैं। उनके कंधों पर हमारे देश का भविष्य टिका होता है। इसलिए युवाओं को अपनी ऊर्जा सकारात्मक कार्यों में लगाने की आवश्यकता है। तभी हमारा देश और समाज सशक्त और समृद्ध हो सकता है।
प्रस्तुति :  विनय मिश्रा

रविवार, 13 अक्टूबर 2019

समाजसेवा के प्रति समर्पित रहे हैं जयदीप चड्ढा




झारखंड की राजधानी रांची के लालपुर चौक स्थित सर्कुलर रोड निवासी जयदीप चड्ढा युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं। समाज सेवा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए जा रहे कार्य प्रेरक और अनुकरणीय हैं। श्री चड्ढा का जन्म 4 दिसंबर 1988 को रांची में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रांची स्थित बिशप वेस्टकाॅट ब्वायज  स्कूल से हुई। इसके बाद रांची के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान संत जेवियर कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन किया। स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद व्यवसायिक शिक्षा की ओर उनकी अभिरुचि हुई। उन्होंने गाजियाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च से एमबीए की डिग्री प्राप्त की। तत्पश्चात उन्होंने ओबरॉय होटल, दिल्ली में बतौर प्रोक्योरमेंट मैनेजर नौकरी शुरू की। लेकिन जल्द ही इस नौकरी से उनका मोहभंग हो गया। उनके दादा स्व. सीएस चड्ढा शहर के जाने-माने दवा व्यवसायी और लोकप्रिय समाजसेवी थे। जयदीप अपने दादा जी द्वारा स्थापित दवा व्यवसाय में हाथ बंटाने लगे। उनके पिता दविंदर पाल सिंह चड्ढा और माता सोनिया चड्ढा उन्हें अपने कैरियर निर्माण के साथ-साथ समाज के लिए भी सकारात्मक सोच के साथ कुछ करते रहने की प्रेरणा देते रहे। इसी से प्रेरित होकर जयदीप अपने दादा व पिताजी के दवा व्यवसाय में सहभागिता निभाते हुए समाज सेवा के कार्यों में भी बढ़चढ़कर हिस्सा लेने लगे। अपने परम पूजनीय दादा स्व. चरणजीत सिंह चड्ढा और अपने पिता दविंदर पाल सिंह चड्डा के पद चिन्हों पर चलते हुए उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी अपनी सहभागिता निभाना शुरू किया। पारिवारिक और व्यावसायिक व्यस्तताओं के बीच समय निकालकर वह समाज सेवा के प्रति समर्पित रहने लगे। उन्होंने 10 अगस्त, 2014 को रोटरी क्लब ज्वाइन किया। रोटरी क्लब ऑफ रांची नॉर्थ के  लगातार तीन वर्षों तक सचिव बने रहे। फिर इसके अध्यक्ष पद पर रहे। क्लब के माध्यम से समाज सेवा के कार्यों में जुटे रहना उनकी दिनचर्या में शुमार हो गया। जयदीप रांची शहर स्थित गुरुनानक होम फॉर हैंडिकैप्ड चिल्ड्रन नामक संस्था के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी भी हैं। वह रोटरी क्लब के माध्यम से सामाजिक कार्यों को गति देने में जुटे हैं। इसके आधार पर उन्हें वर्ष 2016-17 का आउटस्टैंडिंग रोटरी क्लब सेक्रेटरी डिस्ट्रिक्ट अवार्ड प्राप्त हुआ। समाजसेवा के प्रति उनके समर्पण और उत्कृष्ट कार्यशैली  के लिए इस वर्ष उन्हें आउटस्टैंडिंग क्लब प्रेसिडेंट अवॉर्ड से भी नवाजा गया है। क्लब के माध्यम से रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर का आयोजन, बच्चों और महिलाओं के लिए टीकाकरण और स्वास्थ्य के प्रति महिलाओं को जागरूक करने के लिए जागरूकता शिविर का आयोजन आदि कार्यक्रमों में वह बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। जयदीप पशु प्रेमी और पर्यावरण प्रेमी भी हैं। बीमार पशुओं की सेहत ठीक रखने के लिए वह रोटरी क्लब के माध्यम से कई बार एनिमल वैक्सीनेशन कैंप का भी आयोजन कर चुके हैं। इंसान तो इंसान जानवरों के प्रति भी करुणा और दया का भाव रखना जयदीप की महानता का परिचायक है। ग्रामीण क्षेत्रों में एनीमिया से पीड़ित महिलाओं और कुपोषण से पीड़ित बच्चों की सेहत सुधारने की दिशा में भी जयदीप सक्रिय रहते हैं। बच्चों के लिए टीकाकरण, महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर स्वास्थ्य शिविर लगाकर अपने सहयोगियों संग जयदीप सक्रिय रहते हैं। वहीं, शिक्षा के प्रति भी बच्चों को जागरूक करते रहते हैं। स्कूली बच्चों के बीच पठन सामग्री का वितरण, बच्चों की बौद्धिक क्षमता विकसित करने के लिए अंतर स्कूल प्रतियोगिताओं का आयोजन, स्वास्थ्य के क्षेत्र में पोलियो उन्मूलन के लिए शिविर का आयोजन, बच्चों के केयर के लिए स्कूलों में कैंप लगाना आदि कार्यक्रम समय समय पर उनके माध्यम से आयोजित किया जाता है। लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की दिशा में भी वह सतत प्रयत्नशील रहते हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जयदीप गंभीरता से जुड़े हैं। विगत दो वर्षों में उन्होंने विभिन्न जगहों पर अपने सहयोगियों को साथ लेकर  लगभग 25 हजार पौधरोपण किया है। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण मानव और वन्य जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। वह कहते हैं कि युवाओं को अपने पेशे और अपनी पारिवारिक व्यस्तता के बीच थोड़ा समय निकालकर सकारात्मक सोच के साथ सामाजिक नव निर्माण की दिशा में भी अग्रसर होना चाहिए। युवाओं के कंधे पर हमारे देश का भविष्य टिका हुआ होता है। इसलिए समाज की मुख्यधारा से जुड़े रहना और अपने परिवार, देश और समाज के प्रति उत्तरदायित्व को समझते हुए कर्तव्य पथ पर सदैव अग्रसर रहना चाहिए। जयदीप फिल्म बादल के इस गीत "अपने लिए, जिए तो क्या जिए,ऐ दिल, तू जी जमाने के लिए" को अपने जीवन में आत्मसात कर समाज सेवा के प्रति समर्पित हैं। वह कहते हैं कि युवा शक्ति का सदुपयोग सकारात्मक कार्यों में किया जाना चाहिए। इससे हमारा देश, समाज समृद्ध और मजबूत होगा। तभी हम विश्व के विकासशील देशों की श्रेणी में अग्रणी पंक्ति पर खड़ा हो सकेंगे।
 प्रस्तुति: नवल किशोर सिंह

बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं अवध नारायण प्रसाद




झारखंड सरकार के भू- राजस्व विभाग में संयुक्त सचिव और भू-राजस्व मंत्री अमर कुमार बाउरी के ओएसडी अवध नारायण प्रसाद जनप्रिय प्रशासनिक अधिकारी और बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। अपनी प्रशासनिक दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा की वजह से उन्होंने सरकारी महकमे और समाज के बीच विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा धनबाद से पास की। इसके बाद रांची कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। कतरास कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। तत्पश्चात रांची विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। राज्य प्रशासनिक सेवा की प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल हुए और सफल रहे। उनकी पहली पदस्थापना गढ़वा जिले के धुरकी में बतौर प्रखंड विकास पदाधिकारी हुई। वह गोइलकेरा और सोनुआ प्रखंड में भी बीडीओ के पद पर कार्यरत रहे। तोरपा, लातेहार, चाईबासा में कार्यपालक दंडाधिकारी के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी। श्री प्रसाद मधुपुर में अनुमंडल पदाधिकारी और गिरिडीह व हजारीबाग में जिला आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर भी रहे। उन्होंने गिरिडीह में एडीएम और डीआरडीए के निदेशक पद पर भी कार्य किया। भूमि राजस्व विभाग में उप सचिव के पद पर भी अपनी जिम्मेवारी निभाई।वर्तमान में भू राजस्व विभाग में संयुक्त सचिव हैं। अवध नारायण प्रसाद जहां भी प्रस्थापित रहे, अपनी कार्यकुशलता, कर्तव्यनिष्ठा और लगनशीलता के बलबूते उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने में सफल रहे। विभागीय कार्यों को त्वरित गति प्रदान करना और जनहित के कार्यों को तवज्जो देना उनकी विशेषता रही है। अपने प्रशासनिक कार्यों का बखूबी निष्पादन करते हुए वह सामाजिक कार्यों में भी रुचि लेते हैं। किसी भी धर्म व संप्रदाय का पर्व-त्यौहार हो,श्री प्रसाद उसमें अपनी सहभागिता निभाते हैं। वह सभी धर्मों का समान आदर करते हैं। विधायिका और कार्यपालिका के बीच समन्वय स्थापित कर सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों को दिलाने की दिशा में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वह अन्य अधिकारियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी कार्यशैली अन्य अधिकारियों के लिए अनुकरणीय है। अवध नारायण प्रसाद एक प्रशासनिक अधिकारी के अलावा सरल, सहज व मृदुभाषी इंसान हैं। सबके साथ मित्रवत व्यवहार करना उनकी आदत में शुमार है। उनका मानना है कि लोगों को अपने पेशे की व्यस्तताओं के बीच समय निकालकर सामाजिक समरसता के लिए भी प्रयासरत रहना चाहिए। इससे देश व समाज समृद्ध और मजबूत होता है।
 प्रस्तुति : विनय मिश्रा

शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2019

* प्रशासनिक दक्षता की मिसाल पेश करते रहे हैं उपेंद्र नारायण उरांव

 


सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय का व्यापक दृष्टिकोण रखते हुए सामाजिक उत्थान और उत्कर्ष के लिए सतत प्रयत्नशील रहना व्यक्ति की महानता का परिचायक होता है। समाज को हमेशा सही दिशा दिखाने और रचनात्मक कार्यों में सहभागिता निभाते हुए अपने प्रशासनिक कार्यों को भी बखूबी निष्पादित करते रहना किसी भी अधिकारी की विशेषता कहलाता है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी और वर्तमान में झारखंड राज्य खाद्य आयोग के सदस्य उपेंद्र नारायण उरांव। श्री उरांव मूल रूप से रांची के मांडर क्षेत्र के निवासी हैं। लेकिन काफी दिनों से बिहार के पूर्णिया में बस गए हैं। वह पढ़ाई-लिखाई में वह हमेशा अव्वल रहे। ग्रेजुएशन करने के बाद श्री उरांव बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल हुए और सफल रहे। उनकी पहली पदस्थापना बतौर प्रखंड विकास पदाधिकारी तांत नगर में हुई। वह गुमला जिले के चैनपुर में भी बीडीओ के पद पर कार्यरत रहे। श्री उरांव एकीकृत बिहार और झारखंड के एकमात्र ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें अपने सेवाकाल के दौरान सात अनुमंडल का पदाधिकारी रहने का गौरव प्राप्त है। वह बिहार के भभुआ, खड़गपुर,(मुंगेर),लखीसराय, झंझारपुर और झारखंड के धनबाद और चक्रधरपुर में अनुमंडल पदाधिकारी के पद पर रह चुके हैं। वह जहां भी पदस्थापित रहे, अपनी प्रशासनिक दक्षता और क्षमता का परिचय देते हुए एक कर्तव्यनिष्ठ और उत्कृष्ट अधिकारी की पहचान बनाने में सफल रहे। श्री उरांव जब चक्रधरपुर में अनुमंडल पदाधिकारी थे, उसी समय रांची जिले के बुंडू को नया अनुमंडल बनाया गया था। श्री उरांव को बुंडू के प्रथम अनुमंडल पदाधिकारी बनने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रशासनिक पद पर रहते हुए अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने जनहित में कई ऐसे उल्लेखनीय कार्य किए, जो मील का पत्थर साबित हुआ है। वह झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ के भी पदधारी रहे हैं। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के हितों के संरक्षण के लिए सतत प्रयासरत रहे हैं। श्री उरांव दुमका में डीडीसी के पद पर भी कार्यरत रहे। झारखंड सरकार के खाद्य आपूर्ति विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी। इस दौरान खाद्य सुरक्षा कानून के अनुपालन के प्रति वह काफी गंभीर रहे हैं। उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली, अनुभव और प्रशासनिक दक्षता के आधार पर राज्य सरकार ने उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी सेवाएं राज्य खाद्य आयोग में बतौर सदस्य के रूप में ले रही है। श्री उरांव जात-पात, धर्म-संप्रदाय की संकीर्णताओं से परे हैं। वह सभी धर्मों का समान आदर करते हैं। समाज के लिए सकारात्मक कार्यों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं।  वह एक शालीन, सरल और सहज व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उनकी सहभागिता सामाजिक कार्यों में भी होती है। राज्य खाद्य आयोग में सदस्य के रूप में  जन शिकायतों के निवारण के लिए विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाकर जनसुनवाई के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए वह सतत प्रयासरत रहते हैं। श्री उरांव की विशेषता रही है कि वह अपने कार्यों के प्रति सदैव गंभीर रहे हैं। अपने उत्तरदायित्वों के निर्वहन के लिए वह सदैव प्रयासरत रहते हैं। प्रशासनिक पद पर रहते हुए सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की दिशा में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए,जिसका लाभ जनता को मिलता रहा है। जनहित के कार्यों को तवज्जो देना उनकी प्राथमिकताओं में शुमार है। मृदुभाषी उपेंद्र नारायण उरांव का व्यवहार सबों के साथ मित्रवत होता है। उनका मानना है कि शालीनता और संस्कार जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। इसके माध्यम से हम हर दिल अजीज बन सकते हैं। समाज के प्रति अपने संदेश में वह कहते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर समाज हित के प्रति भी हमें सजग रहने की आवश्यकता है। यह स्वस्थ और स्वच्छ समाज निर्माण में काफी सहायक होता है। वहीं, युवाओं के प्रति अपने संदेश में श्री उरांव कहते हैं कि युवाओं को अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल सकारात्मक कार्यों में करना चाहिए। इससे हमारा देश और समाज सशक्त होगा और विश्व पटल पर भारत विकासशील देशों की श्रेणी में अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो सकेगा।
 प्रस्तुति : विनय मिश्रा

बुधवार, 9 अक्टूबर 2019

औद्योगिक संबंधों को विकसित करने वाले कर्मयोगी हैं राणा शुभाशीष



प्रतिभा और कर्तव्यनिष्ठा की जीती जागती मूर्ति हैं बहुमुखी प्रतिभा के धनी राणा शुभाशीष चक्रवर्ती। वे वर्तमान में एचईसी के निदेशक (उत्पादन व विपणन) के पद पर कार्यरत हैं। उनकी शिक्षा-दीक्षा रांची में ही हुई। उनके पिता स्व. प्रो.जगन्नाथ चक्रवर्ती और माता स्व. तृप्ति चक्रवर्ती ने उन्हें संस्कारयुक्त शिक्षा दिलाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। अपने माता पिता को प्रेरणास्रोत मानते हुए श्री चक्रवर्ती अपने जीवन पथ पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बीआईटी, मेसरा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। तत्पश्चात इग्नू से डिप्लोमा इन मैनेजमेंट का कोर्स किया। इसके बाद एमबीए (मार्केटिंग मैनेजमेंट) में बीआईटी, मेसरा से प्रथम श्रेणी की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई के प्रति उनका जुनून, इतनी डिग्रियां हासिल करने के बाद भी कम नहीं हुआ। फिलवक्त श्री चक्रवर्ती पीएचडी कर रहे हैं। उनके शोध का विषय "सार्वजनिक क्षेत्र में कारपोरेट सामाजिक जिम्मेदारियों की चुनौतियां और अवसर" है। राणा एस. चक्रवर्ती को 52 वें इंजीनियर्स दिवस समारोह पर इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, झारखंड द्वारा प्रतिष्ठित "एमिनेंट इंजीनियर पुरस्कार" से सम्मानित किया गया।  उन्हें यह पुरस्कार एचईसी के विपणन में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए दिया गया। उन्हें "भारत की ऊर्जा सुरक्षा में विद्युत क्षेत्र की भूमिका" पर तकनीकी पेपर प्रस्तुत करने के लिए इंस्टीच्यूशंस ऑफ इंजीनियर्स की ओर से 'विश्वेश्वरैया गोल्ड मेडल'  भी मिला है। उन्होंने भारत और विदेशों में विभिन्न संस्थाओं द्वारा आयोजित सेमिनार में पर्यावरण इंजीनियरिंग, विपणन, प्रबंधन और उद्योग के क्षेत्र में तकनीकी कागजात भी प्रस्तुत किए हैं। जिसके लिए उन्हें पुरस्कृत किया जाता रहा है। श्री चक्रवर्ती सार्वजनिक उपक्रम, मेकॉन लिमिटेड में तकरीबन 32 वर्षों तक बतौर अधिकारी विभिन्न पदों पर सेवारत रहे।  मेकाॅन में कार्यकाल के दौरान अपनी बेहतरीन कार्यशैली से उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की हैं, जो मील का पत्थर साबित हुई हैं। अपने सहयोगियों से मित्रवत व्यवहार करना, जिम्मेदारियों को बखूबी निभाना और प्रत्येक कार्यों को समयबद्धता तथा प्रसन्नता से पूरा करना उनकी विशेषता है। प्राथमिकताएं तय कर निर्णय लेने की उनमें अद्भुत क्षमता है। सकारात्मक सोच के साथ अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन उनकी दिनचर्या में शुमार है। एचईसी में उत्पादन बढ़ाने और औद्योगिक वातावरण विकसित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।  विदित हो कि राणा चक्रवर्ती ने उस समय एचईसी के निदेशक का पद संभाला, जब एचईसी के समक्ष कई चुनौतियां थी। एचईसी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा था। श्री चक्रवर्ती ने उन चुनौतियों का सामना करते हुए उससे निबटने की ठोस रणनीति बनाकर टीम भावना से काम करना शुरू किया। एचईसी के ग्राहकों और कर्मचारियों के भरोसे को मजबूत किया। इसका सकारात्मक परिणाम सामने है। उन्होंने इसरो, विजाग स्टील, कोल इंडिया, रक्षा क्षेत्र आदि सेक्टर से कार्यादेश प्राप्त करने में सफलता पाई। इस  दौरान वह विदेशों से भी कार्यादेश प्राप्त करने में सफल रहे। इस क्रम में उन्होंने इंडोनेशिया, जापान सहित अन्य देशों का भी दौरा किया। देश-विदेश से एचईसी के लिए कार्यादेश प्राप्त करने की दिशा में श्री चक्रवर्ती सतत प्रयासरत हैं। एचईसी की दशा और दिशा सुधारने में अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं। श्री चक्रवर्ती को विपणन व प्रबंधन क्षेत्र के अतिरिक्त पर्यावरण, इंजीनियरिंग,ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्रों में भी काफी अनुभव प्राप्त है। उनके इस अनुभव का लाभ एचईसी को मिल रहा है। श्री चक्रवर्ती की पहचान एक मल्टीटैलेंट पर्सनैलिटी के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनकी इन्हीं विशेषताओं के कारण 28 मार्च 2019 को स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (स्कोप) के कार्यकारी बोर्ड का सदस्य चयनित किया गया। श्री चक्रवर्ती अपने उत्तरदायित्व के प्रति सदैव सजग रहते हैं। समाज के प्रति अपने संदेश में वह कहते हैं कि अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार पहल करते हुए सकारात्मक सोच के साथ कार्य करते रहें। इससे हमारा देश सशक्त व समृद्ध होगा और विश्व पटल पर भारत का दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
 प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

रविवार, 6 अक्टूबर 2019

कर्त्तव्यपरायणता की मिसाल पेश करते रहे हैं आईपीएस एसके झा


* अपराध मुक्त समाज निर्माण में हैं सतत प्रयासरत


विनय मिश्र
  रांची / गिरिडीह।  कर्तव्यनिष्ठ लगन शील और ईमानदार अधिकारियों की हर जगह कद्र होती है। अपनी कर्तव्यनिष्ठा के बलबूते ऐसे अधिकारी आम जनता के चहेतों में शामिल हो जाते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत हैं वर्ष 2010 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी सुरेंद्र कुमार झा। पुलिस विभाग में वे एक तेजतर्रार अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। उनकी प्रथम पदस्थापना चक्रधरपुर में बतौर एसडीपीओ हुई। वहां उन्होंने अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में कई ऐसे उल्लेखनीय कार्य किए, जिसे आज भी वहां की जनता याद कर उनके प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करती है। श्री झा रांची जिले के ग्रामीण एसपी के पद पर भी रहे। उसके बाद उन्हें चतरा का एस पी बनाया गया उन्होंने धनबाद में बतौर एसपी अपराध नियंत्रण और विधि व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए कई मिसाल पेश की। जब धनबाद में एस एस पी का पद सृजित किया गया तब उन्हें एस एस पी  के पद पर धनबाद में पदस्थापित किया गया।  श्री झा धनबाद के प्रथम एस एस पी बनाये गये। इसके बाद वे एस टी एफ के एस पी बनाये गये। इसके बाद वे कोडरमा में एस पी बनाये गये।  कोडरमा के बाद  27 नवंबर 2017 को  श्री झा को गिरीडीह का एस एस पी बनाया गया।  वर्तमान समय में  22 माह से गिरीडीह के एस पी हैं।  वह जहां भी पदस्थापित रहे, अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली, कर्तव्यपरायणता और ईमानदार पहल की वजह से अपराध नियंत्रण और उग्रवादी गतिविधियों पर काबू पाने में सफल रहे हैं। उनकी छवि पब्लिक- फ्रेंडली पुलिस अधिकारी के रूप में भी है। आम जनता के लिए सुरेंद्र कुमार झा एक अच्छे और नेकदिल इंसान हैं। वहीं, अपराधियों के लिए वह एक सख्त पुलिस पदाधिकारी हैं। अपराध नियंत्रण उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। बेहतर विधि-व्यवस्था बनाए रखने और शहर को अपराध मुक्त करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अपने कार्यकाल के दौरान श्री झा ने जनहित में कई ऐसे उल्लेखनीय कार्य किए हैं, जिसकी चर्चा करते आज भी लोग नहीं थकते। जनता उन्हें एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में सम्मान देती है। उनका मानना है कि समाज को सही दिशा दिखाने के लिए लोगों को सतत प्रयासरत रहने की आवश्यकता है। वह कहते हैं कि अपराध मुक्त समाज से ही हमारा देश व समाज स्वस्थ, स्वच्छ और समृद्ध हो सकता है।

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2019

समाज सेवा ही सदानंद होता के जीवन का एकमात्र लक्ष्य




* परिस्थितियां चाहे जैसी भी हो, हर हाल में खुश रहना और दूसरों को भी खुशी प्रदान करना इंसान की महानता कहलाता है। विपरीत परिस्थितियों में भी सीमित संसाधनों के बीच समाज सेवा और पीड़ित मानवता की सेवा का संकल्प लेकर आगे बढ़ते रहना व्यक्ति की विशेषता का परिचायक होता है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं, चक्रधरपुर शहर स्थित पुरानी बस्ती निवासी लोकप्रिय समाजसेवी और पीड़ित मानवता के प्रति समर्पित व्यक्ति सदानंद होता। उन्होंने समाज सेवा को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है। वह चक्रधरपुर में ही पले-बढ़े। उनकी शिक्षा-दीक्षा चक्रधरपुर शहर में ही हुई। उन्होंने महात्मा गांधी उच्च विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास की। तत्पश्चात जेएलएन कॉलेज से 12वीं तक की शिक्षा हासिल की। सदानंद होता के पिता स्व.अतुलचंद्र होता भी शहर के लोकप्रिय समाजसेवी रहे। उनकी माता इंदुमती होता उन्हें हर पल संस्कारित करती रहीं। बचपन से ही समाजसेवा का जज्बा लिए सदानंद समाज के पीड़ित व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं। समाज सेवा के उद्देश्य से उन्होंने अपनी बहन स्व.सुनीता होता की स्मृति में सुनीता होता मेमोरियल फाउंडेशन की स्थापना की है। इसके माध्यम से वह पीड़ित मानवता की सेवा में लगे हैं। चिकित्सा व शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक कार्यों को श्री होता सदैव बढ़ावा देते रहे हैं। सुनीता होता मेमोरियल फाउंडेशन के तहत रक्तदान शिविर का आयोजन करना,कैंसर,हर्ट व अन्य  असाध्य रोगों से पीड़ित लोगों के सहायतार्थ स्वास्थ्य शिविर लगाकर नि:शुल्क सेवाएं उपलब्ध कराना,दिव्यांगों को अपने स्तर से सभी सुविधाएं दिलाना आदि कार्यों को उन्होंने अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। शहर के कई दिव्यांगों को उन्होंने कोलकाता स्थित फियरलेस अस्पताल और रायपुर स्थित सत्य साईं अस्पताल में चिकित्सा सुविधाएं दिलाई हैं। सुनीता होता मेमोरियल फाउंडेशन के बैनर तले नियमित रूप से विभिन्न क्षेत्रों में नेत्र रोगियों के लिए वह नि:शुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन समय-समय पर करते रहते हैं। जिसके माध्यम से पीड़ितों का ऑपरेशन कराया जाता है, उन्हें चश्मा,दवाइयां आदि उपलब्ध कराई जाती है। जरूरतमंदों की सहायता करना वह सबसे बड़ा मानव धर्म मानते हैं। उनके नजर में कोई पीड़ित व्यक्ति दिख जाए, तो वह सब कुछ भुला कर पीड़ित की सहायता में जुड़ जाते हैं। सदानंद होता की पहचान शहर के एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में स्थापित हो चुकी है। दीन- दुखियों के प्रति उनका दयालु भाव सर्वविदित है। वह कहते हैं कि परोपकार और समाज सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। इससे जीवन जीने का मकसद पूरा हो जाता है। पीड़ित मानवता की सेवा करने से अद्भुत और सुखद अनुभूति होती है। इससे सुकून मिलता है। यही नहीं, पीड़ितों की सेवा करके हम ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करने में भी सफल होते हैं। युवाओं के प्रति अपने संदेश में श्री होता कहते हैं कि युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जुड़ कर अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहते हुए अपनी ऊर्जा को सामाजिक नव निर्माण के लिए सकारात्मक कार्यों में लगाने की आवश्यकता है। इससे राष्ट्रीय सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है और हमारा देश व समाज सशक्त होता है। इस दिशा में हम सबों को सतत प्रयासरत रहने की आवश्यकता है।
 प्रस्तुति : विनय मिश्रा

सोमवार, 30 सितंबर 2019

जांबाज और कर्तव्यनिष्ठ आइपीएस अधिकारी हैं अनीश गुप्ता




अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार पहल , अपनी प्रतिभा और विशिष्ट कार्यशैली से जनता के बीच अपनी विशिष्ट पहचान भाने में कामयाब शख्सियत हैं राजधानी रांची में पदस्थापित वरीय पुलिस अधीक्षक अनीश गुप्ता। श्री गुप्ता वर्ष 2008 बैच के तेजतर्रार आईपीएस हैं। मृदुभाषी, शालीन व अनुशासन प्रिय अनीश गुप्ता मूल रूप से पंजाब के निवासी हैं। वर्ष 2008 में आईपीएस बनने के बाद उनकी पहली पदस्थापना झारखंड के घाटशिला में बतौर एसडीपीओ हुई। अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर में ही उन्होंने अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर उत्कृष्ट पुलिस पदाधिकारी होने का परिचय दिया। समाज को अपराध मुक्त करने और बेहतर विधि व्यवस्था संधारण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अपराध नियंत्रण उनकी प्राथमिकता है। नक्सल विरोधी गतिविधियों के खिलाफ वह सघन अभियान को संचालित करते रहे हैं। घाटशिला के बाद श्री गुप्ता का पदस्थापन रामगढ़ में एसपी के पद पर हुआ। तत्पश्चात रांची जिले के ग्रामीण एसपी के रूप में उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। ग्रामीण क्षेत्रों के उग्रवाद प्रभावित इलाकों में नक्सली गतिविधियों पर काबू पाने में सफल रहे। रांची के ग्रामीण एसपी के पद पर रहते हुए उन्होंने कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की, जो मील का पत्थर साबित हुई हैं। इसके बाद श्री गुप्ता का पदस्थापन खूंटी जिले में हुआ। खूंटी में दो बार एसपी रहे। इसके बाद इनका स्थानांतरण पश्चिम सिंहभूम में हुआ। वहां वे  अपनी प्रतिभा और बेहतरीन कार्यशैली से जनता का दिल जीतने में सफल रहे। पश्चिम सिंहभूम के बाद श्री गुप्ता का स्थानांतरण हजारीबाग में हुआ। वहां भी काफी कम समय में ही उन्होंने खासी लोकप्रियता हासिल की। अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली से अपराध नियंत्रण और नक्सल विरोधी गतिविधियों पर काबू पाने में सफल रहे। फिलवक्त श्री गुप्ता रांची में एसएसपी के पद पर कार्यरत हैं। रांची जिले में जनता को बेहतर विधि-व्यवस्था देने और अपराध पर काबू पाने में वे सतत प्रयासरत हैं। अपने शीर्ष अधिकारियों के दिशा-निर्देश और अपने मातहत पुलिसकर्मियों के सहयोग से श्री गुप्ता शहर को अपराध मुक्त करने की दिशा में अपने कर्तव्यों का निर्वहन बखूबी कर रहे हैं। शहर में विभिन्न पर्व- त्योहारों के आयोजन के अवसर पर बेहतर विधि- व्यवस्था के लिए शांति समितियों की बैठक करना और शहर में अमन चैन बनाए रखने की दिशा में उनकी अहम भूमिका होती है। अपने कुशल नेतृत्व क्षमता के बलबूते श्री गुप्ता शहर में आपराधिक गतिविधियों पर काबू पाने में सफल हो रहे हैं। वह कहते हैं कि जनता को भी हमेशा पुलिस का सहयोग करते रहने की आवश्यकता है। इससे अपराध नियंत्रण में पुलिस को सहायता मिलती है। उनकी पहचान एक पब्लिक फ्रेंडली पुलिस पदाधिकारी के रूप में भी है। आम जनता के लिए श्री गुप्ता एक सरल, सहज इंसान हैं, वहीं, अपराधियों के लिए वह कहर बनकर बरपते हैं। उनका मानना है कि अपराध मुक्त वातावरण स्वस्थ और स्वच्छ समाज निर्माण में सहायक है। इससे हमारा देश व समाज सशक्त होता है। इस दिशा में सबों को प्रयासरत रहने की आवश्यकता है।
 प्रस्तुति : निधि पाठक

शनिवार, 28 सितंबर 2019

कर्तव्यों के प्रति हिमालय की तरह दृढ़ हैं सिद्धार्थ चौधरी



समाज के प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण रखते हुए अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर रहना व्यक्ति की विशेषता कहलाता है। समाज में व्याप्त विसंगतियों में संगति की स्थापना कर स्वस्थ और स्वच्छ समाज को अंकुरित, पल्लवित और पुष्पित करने में सदैव प्रयासरत रहना इंसान की महानता का परिचायक होता है। जीवन का उद्देश्य सिर्फ धनोपार्जन ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति कर्तव्य बोध भी होना जरूरी है। ऐसी ही  सकारात्मक सोच से ओतप्रोत शख्सियत हैं राजधानी रांची निवासी सिद्धार्थ चौधरी। ममत्व में यमुना से गहराई और संस्कारों में हिमालय समान दृढ़ता लिए समाज की बगिया को सींचने-संवारने में जुटे रहना उनकी दिनचर्या में शामिल है। वह मानव सेवा को अपना परम धर्म मानते हैं। शहर में किसी भी धर्म व संप्रदाय का पर्व-त्यौहार हो, सिद्धार्थ चौधरी उसमें सेवा शिविरों के आयोजन के माध्यम से अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज कराते हैं। सिद्धार्थ शहर के युवा उद्यमियों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। उनका कुशल व्यवहार दूसरों को प्रेरित करने वाला है। सिद्धार्थ रांची में ही पले- बढ़े और पढ़े। संत जेवियर स्कूल, डोरंडा से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। तत्पश्चात डीएवी, श्यामली से प्लस टू किया। इसके बाद राजधानी के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान संत जेवियर कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई-लिखाई में सदैव अव्वल रहने वाले सिद्धार्थ चौधरी का रुझान व्यवसाय की ओर होने लगा। वह अपने दादा जी द्वारा स्थापित लगभग छह दशक पुरानी व्यवसायिक प्रतिष्ठान कोलकाता स्टोर सप्लाई काॅरपोरेशन में अपने पिताजी का हाथ बंटाने लगे। उनके पिता सज्जन चौधरी और माता मधु चौधरी भी अपने पारिवारिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बखूबी निभाते हुए सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। सिद्धार्थ उक्त प्रतिष्ठान में अपने पिता के साथ उनके व्यवसायिक कार्यों में सहयोग करते हैं। पारिवारिक और व्यावसायिक व्यस्तताओं के बीच समय निकालकर समाज सेवा के प्रति उनका परिवार समर्पित रहता है। शहर में होने वाले सभी सामाजिक, धार्मिक-आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होकर वह समाज सेवा के प्रति समर्पण का भाव प्रदर्शित करते रहते हैं। अपने कर्तव्य पथ पर सफल पथिक के रूप में सिद्धार्थ चौधरी अग्रसर हैं। वह विभिन्न संस्थाओं से जुड़कर सामाजिक कार्यों को गति प्रदान कर रहे हैं। वह अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक संस्था जूनियर चेंबर इंटरनेशनल, राउंड टेबल इंडिया, अग्रवाल सभा, डोरंडा ओल्ड जेवियरन (डॉक्स), फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल सोसाइटी, रेड क्रॉस सोसाइटी, रांची क्लब, जिमखाना क्लब, फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से भी जुड़े हैं। इनमें से कई संस्थाओं के वह आजीवन सदस्य भी हैं। उनका पूरा परिवार समाज सेवा के प्रति समर्पित रहता है। सिद्धार्थ रक्तदान को  महादान मानते हैं। रक्तदान शिविरों का आयोजन कर वह मानवता की मिसाल पेश करते रहे हैं। वह कहते हैं कि स्वास्थ्य ही धन है, युवाओं के प्रति अपने संदेश में सिद्धार्थ कहते हैं कि अपने अनुभवों से काम को सफलतापूर्वक करने के लिए सतत प्रयासरत रहें। जीवन का उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना ही नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के प्रति भी जिम्मेदारी समझने की जरूरत है। सिद्धार्थ सर्वधर्म-समभाव की भावना को आत्मसात कर सभी धर्मों का समान आदर करते हैं।  वह सभी धर्मावलंबियों के प्रति आदर सम्मान का भाव रखते हैं। वह कहते हैं कि देश की अखंडता के लिए सामाजिक एकता और समरसता जरूरी है। देश के सर्वांगीण विकास के लिए समाज के प्रति प्रत्येक व्यक्ति का शिक्षित होना भी आवश्यक है। लोग शिक्षित होंगे, तभी देश व समाज का विकास रफ्तार पकड़ेगा। लोगों के सुख- दुख में शामिल होना उनकी दिनचर्या में शुमार है। गरीब और पीड़ितों की सेवा करने से उन्हें सुखद अनुभूति होती है, इससे उन्हें आंतरिक सुख मिलता है। बचपन से ही दयावान और मददगार रहे सिद्धार्थ चौधरी गरीबों और बेसहारों को देखकर द्रवित हो जाते हैं। उन्हें हर संभव सहयोग करने में आगे रहते हैं। वह कहते हैं कि समाज के निचले तबके के लोगों की मदद कर उन्हें ऊपर उठाना आगे बढ़ाना भी व्यक्ति का धर्म है। युवाओं के प्रति अपने संदेश में सिद्धार्थ कहते हैं कि युवा अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल सकारात्मक कार्यों में करें और अपने कार्यों में नैतिकता का ख्याल रखें,क्योंकि नैतिकता के बल पर ही आगे की मुश्किल राहें भी आसान हो जाती है। इसलिए नैतिक मूल्यों का क्षरण न हो, इस दिशा में प्रयासरत रहें।
प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

शुक्रवार, 27 सितंबर 2019

सादा जीवन उच्च विचार की प्रतिमूर्ति हैं अमित खोवाल



उच्च आदर्शों को आत्मसात करने वाले व्यक्ति के अंदर कोई बनावट, कोी दिखावा नहीं होता। यानी सरलता, सादगी और सामाजिक दायित्यों का गहरा बोध। ऐसी ही एक शख्सियत हैं, राजधानी रांची के लालपुर स्थित पीस रोड निवासी अमित खोवाल। वह सरलता और सादगी की प्रतिमूर्ति हैं। अनुशासनप्रिय, समय के पाबंद, हर परिस्थितियों में धीर-गंभीर और शांत चित्त रहने वाले अमित का जीवन मानवीय करुणा एवं संवेदनाओं से ओतप्रोत है। सुख की घड़ियां हो या उदासी के गहन पल, कभी विचलित न होना उनकी खासियत है। अमित अपने माता-पिता,गुरुजनों व महापुरुषों से प्रेरणा लेते हुए उनके बताए मार्गों पर चलते रहने के लिए संकल्पित हैं। अमित का जन्म रांची में एक जनवरी 1981 को हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा राजधानी स्थित गुरु नानक स्कूल से हुई। वहां से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। तत्पश्चात डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल से इंटरमीडिएट (12वीं) किया। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए अमित कोलकाता चले गए। वहां भवानीपुर कॉलेज से वाणिज्य में स्नातक की डिग्री हासिल की। चार्टर्ड अकाउंटेंट पाठ्यक्रम में इंटरमीडिएट स्टेज क्लियर किया। लगभग पांच वर्षों तक कोलकाता में शिक्षा प्राप्त करने के बाद वर्ष 2004 में अमित रांची वापस लौट आए और अपने पिता द्वारा स्थापित व्यवसाय में हाथ बंटाने लगे। वर्ष 2005 से उन्होंने अपनी व्यावसायिक गतिविधियों में सक्रियता से भाग लेना शुरू किया। वह वर्तमान में मेडिकल- पैथोलॉजिकल उपकरण व सामग्री से संबंधित व्यावसायिक प्रतिष्ठान किरण ट्रेडिंग व श्री बालाजी बायोमेडिकल्स तथा कॉस्मेटिक और एफएमसीजी सामग्री से संबंधित सुहानी एजेंसी नामक फर्म का संचालन कर रहे हैं। अपने पिता राजेंद्र खोवाल और माता किरण देवी खोवाल की प्रेरणा से अमित ने व्यवसाय के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना शुरू किया। अमित तीन फरवरी 2008 को वैवाहिक बंधन में बंधे। उनकी पत्नी वंदना खोवाल भी उनके स्वभाव के अनुरूप उन्हें हर कदम पर सहयोग करती हैं। वह अपने पुत्र सोहम और पुत्री सुहानी को बेहतर और संस्कारयुक्त शिक्षा दिला रहे हैं। अपनी पारिवारिक और व्यावसायिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए अमित सामाजिक जीवन में भी अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। उनका व्यक्तित्व इंसानियत के सारे गुणों का समायोजन है। जातिगत और धार्मिक भावनाओं से ऊपर उठकर समाज हित के लिए सोचना उनकी खासियत है। उनका आचार-विचार और व्यवहार  "सादा जीवन उच्च विचार" वाली कहावत को चरितार्थ करता है। समाज सेवा के कार्यों में शुरू से ही उनकी रूचि रही। समाज के प्रति त्याग, तपस्या, सेवा भाव रखना और रचनात्मक कार्यों में विश्वास उनके स्वभाव में समाहित है। ऊर्जावान व्यक्तित्व के धनी अमित खोवाल का मानना है कि ऐसा समाज निर्माण आवश्यक है,जो सहृदयता, समानता और शांति के सुमन खिला दे और प्रेम के पराग से मानवता सुगंधित हो जाए। वह कहते हैं कि सभी धर्म, संप्रदाय, जाति, लिंग, वर्ण एवं वर्ग के लोगों के कल्याण में जुटे रहना मानव का कर्तव्य है। समाज के हर वर्ग के लोगों के सुख-दुख में शामिल होना परम धर्म है। वह कहते हैं कि लोग सांसारिक सुखों की परिधि में मानव कल्याणकारी योजनाओं की परिकल्पना और जगत की अपनी अल्पकालिक यात्रा भूल जाते हैं। इससे सामाजिक विकृतियां सिर उठाने लगती है। ऐसे में सामाजिक समरसता पर खतरा मंडराने लगता है। इसलिए हमें आपसी भाईचारगी बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहना जरूरी है। यह स्वस्थ और स्वच्छ समाज निर्माण में  सहायक होता है। समाजसेवी की भूमिका में रचनात्मकता के वाहक अमित खोवाल जरूरतमंदों की मदद करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। इससे उन्हें सुखद अनुभूति होती है। अपने से बड़ों का आदर करना, छोटों को सम्मान देना उनकी आदत में शुमार है। वह कई सामाजिक व धार्मिक संगठनों से भी जुड़े हैं।  लायंस क्लब ऑफ रांची यूथ के सक्रिय सदस्य हैं। वहीं, जूनियर चेंबर इंटरनेशनल(जेसीआई), फेडरेशन ऑफ झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सदस्य हैं। वह जेसीआई में बतौर जनसंपर्क अधिकारी, निदेशक (खेल), कोषाध्यक्ष व उपाध्यक्ष (व्यवसाय) सहित अन्य महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभाने में सफल रहे। अमित रक्तदान को महादान मानते हैं। जरूरतमंदों को रक्तदान करना वह सबसे बड़ा मानव धर्म समझते हैं। शहर में होने वाले सामाजिक, धार्मिक- आध्यात्मिक व सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होकर अपनी सक्रिय सहभागिता निभाते हैं। महापुरुषों को वह अपने जीवन का आदर्श मानते हैं। वहीं अपने माता-पिता और गुरुजनों के प्रति आदर का भाव रखते हुए वह कहते हैं कि "हम तो पत्थर हैं,हमारे माता-पिता व गुरुजन शिल्पकार हैं, हमारी हर तारीफ के वही असली हकदार हैं"।
प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह
(सांध्य दैनिक मेट्रो रेज से साभार)

गुरुवार, 26 सितंबर 2019

शालीनता की प्रतिमूर्ति हैं निशांत मोदी


समाज के प्रति सकारात्मक सोच ही निशांत मोदी का आभूषण है। निशांत युवा सशक्तिकरण के सशक्त हस्ताक्षर हैं। वह स्वच्छ और स्वस्थ समाज निर्माण के कर्मठ योद्धा हैं। समाज के नवनिर्माण में जुटे रहना उनकी दिनचर्या में शुमार है। पेशे से व्यवसायी निशांत राजधानी के रातू रोड क्षेत्र के निवासी हैं। उनके पिता गौतम मोदी और मां स्नेहा मोदी भी शहर के जाने-माने समाजसेवी हैं। लालजी हीरजी रोड में उनका व्यावसायिक प्रतिष्ठान है। निशांत का जन्म रांची में एक फरवरी 1990 को हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा शहर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान सुरेंद्रनाथ सैंटनरी स्कूल से हुई। उन्होंने 12वीं बोर्ड की परीक्षा डीएवी हेहल से पास की। तत्पश्चात संत जेवियर कॉलेज से उन्होंने वाणिज्य में स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद निशांत ने अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाना शुरु किया। अपनी पारिवारिक और व्यावसायिक गतिविधियों से समय निकालकर अपने पिता के पद चिन्हों पर चलते हुए उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना शुरू किया। युवावस्था में ही व्यावसायिक जिम्मेदारियों को संभालने लगे। वहीं दूसरी तरफ नि:स्वार्थ भाव से समाज के प्रति भी समर्पण की भावना रखने लगे। सादगी और शालीनता की प्रतिमूर्ति निशांत में अहंकार लेशमात्र भी नहीं है। उनमें आत्मीयता व स्नेह का गुण कूट-कूट कर भरा है। उनके साथी-संगी भी उनकी काबिलियत के कायल हैं। निशांत इसी वर्ष 28 मई को दांपत्य सूत्र में बंधे। उनकी पत्नी रुचि सरायवाला की भी पारिवारिक पृष्ठभूमि गरिमामय रही है। विवाह के बाद निशांत को अपने पारिवारिक व व्यावसायिक जिम्मेदारियों को संभालने मे उनकी पत्नी रुचि भी उन्हें सहयोग करती रहती है। निशांत का मृदुभाषी व्यक्तित्व और सम्मोहक मुस्कान गैरों को भी अपना बना लेता है। स्वामी विवेकानंद की विचारधारा को आत्मसात कर सामाजिक परिवर्तन एवं नव निर्माण के कार्यों में जुटे रहना उनकी खासियत है। युवाओं को सशक्त समाज निर्माण के लिए सही दिशा दिखाने में भी वह प्रयासरत हैं। वह गरीब और असहाय बेटे-बेटियों की शादियां और शिक्षा के प्रति भी संवेदनशील रहा करते हैं। समाज की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझ कर जीवन पथ पर सफल पथिक के रूप में अग्रसर है। निशांत कहते हैं कि मानवीय जीवन की सार्थकता इसीमें है कि अपने कल्याण की तरह दूसरों का भी कल्याण करें। यही सेवा भावना का मूल मंत्र भी है। वह कहते हैं कि बुद्ध, गांधी, लिंकन, मार्क्स, लेनिन, मार्टिन लूथर किंग जैसे अनगिनत नाम हैं, जो इस बात के सबूत हैं कि समय की नब्ज सदा युवा पीढ़ी के साथ रही है। युवाओं के ऊपर देश का भविष्य टिका होता है। युवा को सही मार्गदर्शन मिले,तभी सामाजिक विकास संभव होगा। निशांत कहते हैं कि माता-पिता व गुरुजनों के कहे गए एक-एक शब्द प्रेरणा स्रोत होते हैं। उनके बताए मार्ग पर चलते हुए शांति मिलती है। निशांत अंतरराष्ट्रीय संस्था जूनियर चेंबर इंटरनेशनल के निदेशक मंडल में शामिल हैं। इसके माध्यम से रक्तदान शिविर सहित अन्य कार्यक्रमों का संचालन कर सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं। उन्हें गरीबों को भोजन कराने में आनंद की अनुभूति होती है। युवावस्था में ही परोपकार की भावना से ओतप्रोत निशांत नि:स्वार्थ भाव से समाज के प्रति समर्पित हैं। युवाओं के प्रति अपने संदेश में वह कहते हैं कि बुजुर्गों के अनुभव से हमें सीखने की आवश्यकता है। इससे अच्छे बुरे में फर्क का पता चलता है। किसी भी काम को सफलतापूर्वक करने के लिए लक्ष्य निर्धारित कर उसकी ओर अग्रसर रहें, अपने कर्तव्यों और दायित्वों के प्रति सजग रहें। वह कहते हैं कि युवाओं का हंसमुख, मृदुभाषी और शालीन होना जरूरी है। अपने कैरियर का निर्धारण कर लक्ष्य की ओर अग्रसर रहें। पर थोड़ा समय समाज के लिए भी जरूर निकालें। स्वस्थ और स्वच्छ समाज राष्ट्र के सशक्तिकरण के लिए जरूरी है। अपनी धुन के पक्के और कर्तव्य पथ पर सतत बढ़ते रहने के उनके जज्बे और जुनून को देखकर राष्ट्रकवि दिनकर की यह पंक्तियां याद आती है, " नींद कहां उनकी पलकों में जो धुन के मतवाले हैं, गति की तृशा और बढ़ती, पड़ती जब पग में छाले हैं " उक्त पंक्तियां निशांत पर पूर्णता चरितार्थ होती है।
प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

सोमवार, 23 सितंबर 2019

व्यस्तताओं के बीच समाज सेवा के प्रतीक हैं प्रतीक जैन



रांची। पारिवारिक जिम्मेदारियों और व्यावसायिक व्यस्तताओं के बीच समाज सेवा के लिए समय निकालना व्यक्ति की महानता का परिचायक है। संस्था के प्रति समर्पण भाव से लगे रहना इंसान के विशेषता कहलाता है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं राजधानी के रातू रोड निवासी व्यवसायी व सामाजिक कार्यकर्ता प्रतीक जैन। शहर की सामाजिक, धार्मिक व आध्यात्मिक गतिविधियों में शामिल होकर उसमें अपने सहभागिता निभाना उनकी खासियत है। प्रतीक जैन विश्वस्तरीय संस्था जूनियर चेंबर इंटरनेशनल से जुड़े हैं। इसके माध्यम से वह विभिन्न प्रकार के सामाजिक कार्य को धरातल पर उतारने में जुटे रहते हैं। प्रतीक की प्रारंभिक शिक्षा राजधानी स्थित डीएवी हेहल से हुई। वहीं से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। तत्पश्चात राजधानी की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान संत जेवियर कॉलेज से उन्होंने इंटरमीडिएट व ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। पेशे से व्यवसायी प्रतीक अपने पिता दिलीप कुमार जैन को अपना आदर्श मानते हैं। उनकी माता मधु जैन एक कुशल गृहणी हैं। समाज सेवा की प्रेरणा उन्हें अपने माता-पिता व अन्य परिजनों से मिली। वह दिगंबर जैन समाज से भी जुड़े हैं। जैन जागृति समाज का सामाजिक कार्यों का दायरा बढ़ाने की दिशा में भी वह सतत प्रयासरत रहते हैं। उनका मानना है कि संस्था के प्रति समर्पण जरूरी है। किसी भी संस्था से जुड़ें और उसके लिए समय ना निकालें,  तो संस्था से जुड़ना का उद्देश्य पूरा नहीं होता है। प्रतीक कहते हैं कि जैन समाज सभी धर्मों का समान आदर करती है। सर्वधर्म समभाव की भावना को आत्मसात कर सभी धर्मों के प्रति आदर सम्मान रखना चाहिए। इससे सामाजिक समरसता बरकरार रहती है। प्रतीक के कार्यों में उनकी पत्नी भी सहयोग करती हैं। प्रतीक को एक पुत्र व एक पुत्री हैं। दोनों को बेहतर शिक्षा दिला रहे हैं। बचपन से ही उनका शौक रहा है सामाजिक कार्यों के प्रति सक्रिय रहने का, कुछ नया करते रहने का। इस दिशा में वह सतत प्रयासरत रहते हैं। जूनियर इंटरनेशनल चैंबर से जुड़कर वह स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हुए कहते हैं कि इस संस्था से जुड़ने के बाद सामाजिक कार्य करने का जज्बा और बढ़ने लगा। जेसीआई से जुड़ने के बाद उनमें टीम भावना विकसित हुई है और समाज के नवनिर्माण के लिए सकारात्मक ऊर्जा के साथ लगे रहने की उनकी क्षमता विकसित हुई है। वह अपने पारिवारिक और व्यावसायिक जिम्मेदारियों को बखूबी संभालते हुए सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए भी समय निकाल लेते हैं। वह कहते हैं कि पीड़ित मानवता की सेवा करने में उन्हें सुखद अनुभूति होती है। मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। युवाओं के प्रति अपने संदेश में वह कहते हैं कि युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाएं और राष्ट्र व समाज के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। इससे हमारा देश समृद्धशाली और सशक्त होगा।
 प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

अपराध नियंत्रण है डीएसपी अमर कुमार पांडेय की प्राथमिकता

उपलब्धियों भरा रहा एक वर्ष का कार्यकाल

 विनय मिश्रा
 चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिला मुख्यालय में पदस्थापित सदर डीएसपी अमर कुमार पांडेय का एक वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया। इस दौरान उन्होंने अपनी बेहतरीन कार्यशैली का परिचय देते हुए कई उपलब्धियां हासिल की। नक्सलियों की नकेल कसने में भी वह कामयाब रहे हैं। अपराध नियंत्रण उनकी प्राथमिकता रही है। श्री पांडेय अपराध मुक्त समाज निर्माण की दिशा में प्रयासरत हैं। शहर में बेहतर विधि-व्यवस्था निर्धारण के लिए सतत प्रयत्नशील रहना उनकी खासियत है। अपनी बेहतरीन कार्यशैली से वह काफी कम समय में ही लोगों के बीच लोकप्रिय हो गए हैं। वहीं, पुलिस विभाग में श्री पांडेय एक तेज-तर्रार, कर्त्तव्यनिष्ठ और ईमानदार अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। उनकी कर्त्तव्यनिष्ठा की चर्चा चहुंओर की जाती है। अपराध नियंत्रण में उनकी तत्परता और शीर्ष अधिकारियों के निर्देशों के अनुपालन के प्रति उनकी निष्ठा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चाईबासा के जांबाज और कर्मठ पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत माहथा ने उन्हें शहर में अवैध रूप से लाॅटरी संचालन करने वाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया। श्री पांडेय अवैध लाॅटरी संचालकों पर कानून सम्मत कार्रवाई करते हुए लाॅटरी संचालन के अवैध धंधे को बंद करवाने में सफल रहे। नागरिकों को कानून के दायरे में रहने की नसीहत देते हुए वह स्वच्छ और स्वस्थ समाज निर्माण के लिए भी लोगों को प्रेरित करते हैं। पदस्थापना के मात्र एक वर्ष में ही चाईबासा शहर को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई कुख्यात अपराधियों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की है। गौरतलब है कि श्री पांडेय इसके पूर्व जब एसीबी में पदस्थापित थे, तब कई रिश्वतखोरों को रंगे हाथों पकड़ा और उसे सलाखों के पीछे भेजने में सफलता हासिल की। अपराधियों के लिए वह कहर बनकर बरपते हैं, वहीं, आम जनता के लिए वे एक अच्छे व सच्चे इंसान हैं। उनकी छवि पब्लिक फ्रेंडली पुलिस अधिकारी की है। श्री पांडेय अन्य पुलिसकर्मियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी कार्यशैली अनुकरणीय है। शहर के अमन पसंद लोग उनकी सराहना करते नहीं थकते।

शनिवार, 21 सितंबर 2019

स्वच्छता अभियान को गति दे रही हैं अंजलि तिग्गा


अमूमन सरकारी अधिकारियों के प्रति आम जनता की धारणा होती है कि सरकारी अधिकारी जनहित के कार्यों के प्रति बेपरवाह होते हैं। जनता के लिए सरकार द्वारा बनाई गई योजनाओं के कार्यान्वयन में सुस्ती बरतते हैं। जिससे सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ जनता को नहीं मिल पाता है। लेकिन इस धारणा को गलत साबित कर दिखाने वाले भी कई अधिकारी होते हैं, जो जनहित के कार्यों को प्रमुखता देते हुए सरकारी योजनाओं को अमली जामा पहनाने में जुटे रहते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत हैं स्वच्छ भारत मिशन की कोल्हान प्रमंडल की नोडल पदाधिकारी अंजलि तिग्गा। श्रीमती तिग्गा फिलवक्त नगर विकास एवं आवास विभाग में बतौर अधिकारी कार्यरत हैं। स्टेट अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (सूडा) के अंतर्गत विकास योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए भी सतत प्रयासरत हैं। श्रीमती तिग्गा की शिक्षा-दीक्षा बिहार के बेगूसराय जिला अंतर्गत बरौनी में हुई। उनके पिता एकीकृत बिहार के समय बरौनी में कार्यरत थे। अंजलि ने बरौनी से ही मैट्रिक की परीक्षा पास की। तत्पश्चात इंटरमीडिएट व ग्रेजुएशन किया। वर्ष 2002 में अंजलि सरकारी सेवा में चयनित हुई। उनका पहला पदस्थापन हजारीबाग में हुआ। उन्होंने बिस्कोमान में भी अपनी सेवाएं दी। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी उन्हें खासा अनुभव है‌। सरकारी सेवा में रहते हुए अंजलि ने हजारीबाग सहित अन्य जिलों में आधार कार्ड बनवाने में भी कीर्तिमान स्थापित किया। स्वच्छ भारत मिशन की नोडल पदाधिकारी के रूप में अंजलि तिग्गा सरकार द्वारा जनहित में बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं को गति देने में जुटी है। प्रधानमंत्री आवास योजना, शौचालय निर्माण सहित अन्य जनोपयोगी योजनाओं को अमली जामा पहनाने, कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में वह सतत प्रयासरत रहती हैं। स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत पूरे कोल्हान प्रमंडल को प्लास्टिक और पॉलिथीन मुक्त शहर बनाने की दिशा में जन जागरूकता फैलाने में भी वह जुटी हैं। इससे संबंधित कार्यशाला व सेमिनार का आयोजन कर जनता को जागरूक कर रही हैं। सरकारी महकमों के अलावा निजी क्षेत्रों में भी स्वयंसेवी संगठनों और निजी संस्थाओं को भी स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने का आह्वान करती रहती हैं। वह कोल्हान प्रमंडल के तीन जिलों की नोडल पदाधिकारी हैं। रांची जिले के बुंडू का भी प्रभार उनके जिम्मे है। इन क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान को गति देने, स्वच्छ भारत मिशन अभियान को सफल बनाने के लिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। उनका मानना है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर को स्वच्छ बनाए रखने से ही स्वच्छ भारत और स्वस्थ भारत का सपना साकार हो सकेगा।  इससे हमारे देश व समाज के सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। अंजलि सर्व धर्म समभाव के सिद्धांत पर चलते हुए सभी धर्मों का समान आदर करती है। पर्व- त्योहारों के अवसर पर वह सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करती हैं। एक सरकारी अधिकारी होने के अलावा अंजलि एक समाजसेवी भी हैं। किसी भी धर्म व संप्रदाय के पर्व त्योहारों के अवसर पर वह शामिल होकर अपनी सहभागिता निभाती हैं। जनहित के कार्यों को तवज्जो देना उनकी दिनचर्या में शुमार है। सरकार द्वारा बनाई गई योजनाओं को सरजमीं पर उतारना वह अपनी अहम जिम्मेदारी मानती हैं। अंजलि कहती हैं कि विधायिका,कार्यपालिका और जनता के बीच बेहतर समन्वय से ही स्वस्थ सामाजिक नवनिर्माण का सपना साकार हो सकेगा। इस दिशा में वह सतत प्रयासरत हैं। अंजलि मानती हैं कि सामाजिक सशक्तिकरण से ही देश मजबूत होता है।
प्रस्तुति : विनय मिश्रा

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...