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गुरुवार, 19 जुलाई 2018

देश के 91 प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में 8 प्रतिशत की वृद्धि


19 जुलाई, 2018 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 52.355 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल संग्रह हुआ। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 32 प्रतिशत है। 12 जुलाई, 2018 को समाप्‍त सप्ताह में जल संग्रह 24 प्रतिशत के स्तर पर था। 19 जुलाई, 2018 को समाप्त सप्ताह में यह संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 125 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 116 प्रतिशत है।
इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.993 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 63 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली लाभ देते हैं।
क्षेत्रवार संग्रहण स्थिति : -

उत्तरी क्षेत्र
उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 3.66 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 20 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 43 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 39 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
पूर्वी क्षेत्र
पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 4.23 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 22 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 24 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 23 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
पश्चिमी क्षेत्र
पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 31.26 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 7.89 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 25 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 26 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 24 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से बेहतर है।
मध्य क्षेत्र
मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 12.06 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 29 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 32 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 28 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से बेहतर है।
दक्षिणी क्षेत्र
दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 24.52 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 48 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 16 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 28  प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।
पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें पश्चिम बंगाल,  त्रिपुरा, महाराष्‍ट्र, छत्तीसगढ़, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण समान है उनमें उत्‍तराखंड शामिल है। वहीं, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण कम है उनमें राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, झारखंड, ओडिशा, गुजरात, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश शामिल हैं।

पीएम मोदी की ग्रामीण विद्युतीकरण के लाभार्थियों से बातचीत का मूल पाठ


 
आज मुझे देश के उन 18 हजार गांव के आप सब बंधु से मिलने का मौका मिला है, जिनके यहां पहली बार बिजली पहुंची है। सदियां बीत गईं अंधेरे में गुजारा किया और शायद सोचा भी नहीं होगा कि आपके गांव में कभी उजाला आयेगा कि, नहीं आएगा। आज मेरे लिये ये भी खुशी की बात है कि मुझे आपकी खुशियों में शामिल होने का मौका मिल रहा है। आपके चेहरे की मुस्कान बिजली आने के बाद जीवन में आए बदलाव की बातें ये अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है। जो लोग पैदा होते ही उजाला देखते आए हैं, जिन्होंने कभी अंधेरा देखा नहीं है, उनको ये पता नहीं होता कि अंधेरा हटने का मतलब क्या होता है। रात को बिजली होनी घर में या गांव में इसका मतलब क्या होता है। जिन्होंने कभी अंधेरे में जिन्दगी गुजारी नहीं, उनको पता नहीं चलता है। हमारे यहां उपनिषदों में कहा गया है, “तमसो मा ज्योतिर्गमय।।” यानी अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो।
आज मुझे देश भर के उन लोगों से मिलने का अवसर मिला है, जिन्होंने अपने जीवन में अंधकार से प्रकाश का सफर तय करने का सौभाग्य प्राप्त किया है। सालों के अंधेरे के बाद एक तरह उस गांव का जीवन अब रौशन हुआ है। हम सबके पास दिन के 24 घंटे होते हैं। मेरे पास भी 24 घंटे हैं, आपके पास भी 24 घंटे हैं। हर एक व्यक्ति चाहता है कि समय का ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग हो, जिससे हमारे स्वयं की, हमारे परिवार की, हमारे समाज और राष्ट्र की तरक्की का रास्ता तैयार हो। लेकिन आपके 24 घंटे में से 10 से 12 घंटे हमेशा-हमेशा के लिये निकल जाते हैं, तब आप क्या कर सकते हैं। क्या बचे हुए 12, 14 घंटों में आप उतना ही कार्य कर सकेंगे, जितने 24 घंटों में करते हैं। आपके मन में सवाल उठेगा कि मोदी जी क्या पूछ रहे हैं और ऐसा किस प्रकार संभव है कि किसी के पास एक दिन में 24 घंटे की जगह मात्र 12, 14 घंटे का समय हो। देशवासियों आपको भले ये सच न लगता हो, लेकिन हमारे देश के सुदूर पिछड़े इलाकों में हजारों गांव में रहने वाले लाखों परिवारों ने दशकों तक इसे जिया है। ऐसे गांव जहां आजादी के इतने वर्ष बाद भी बिजली नहीं पहुंची थी और वहां रहने वालों का जीवन सूर्योदय या सूर्यास्त के बीच सिमट कर रह गया था। सूरज की रौशनी ही उनके काम करने के घंटे तय करती थी। फिर चाहे बच्चे की पढ़ाई हो, खाना पकाना हो, खाना खिलाना हो या और घर के छोटे मोटे काम हों। देश को आजाद हुए कितने दशक बीत गए। लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि जब हम सरकार में आए तब देश के 18000 से अधिक गांव ऐसे थे जहां बिजली थी ही नहीं। बड़ी हैरानी होती है ये सोचकर के आखिर ऐसी कौनसी बाधा थी जिसे पार करके पिछली सरकारें अंधियारे में डूबे हजारों गांवों तक बिजली नहीं पहुंचा सकी। पिछली सरकारों ने बिजली पहुंचाने के वादे तो बहुत किये, लेकिन उन वादों को पूरा नहीं किया गया। उस दिशा में कोई काम नहीं हुआ। 2005 यानि करीब – करीब आज से 13 साल पहले उस वक्त तत्कालीन कांग्रेस की सरकार थी। मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री थे और उन्होंने 2009 तक देश के हर गांव में बिजली पहुंचा देंगे ये वादा किया था और इतना ही कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष ने तो इससे एक कदम और आगे बढ़ाते हुए 2009 तक हर घर में बिजली पहुंचाने की बात कही थी। अच्छा होता जो अपने आपको बड़े जागरूक और जनहितकारी मानने वाले लोग होते हैं। उन्होंने 2009 में गांव में जाकर के पूछताछ की होती, रिपोर्ट तैयार किये होते, सिविल सोसायटी की बात कही होती, तो हो सकता है कि 2009 नहीं 2010 में हो जाता 2011 में हो जाता, लेकिन उस समय वादे पूरे नहीं हुए। इसको कोई गंभीरता से लेता ही नहीं था। और आज हम जब वादों को गंभीरता से लेते हैं, तो आज ये खोजने का प्रयास होता है, अरे ढूंढ़ो यार इसमें कमी कहां है। मैं मानता हूं यही लोकतंत्र की ताकत है। हमलोग अच्छा करने का लगातार प्रयास करें और जहां कमी रह जाती है, उसको उजागर करके उसको ठीक करने का प्रयास करें। जब हम सब मिलकर के काम करते हैं, तो अच्छे परिणाम भी निकलते हैं।
15 अगस्त, 2015 को मैंने लालकिले के प्राचीर से कहा था। और हमने लक्ष्य तय किया कि हम एक हजार दिन के भीतर देश के हर गांव में बिजली पहुंचाएंगे। सरकार के बिना किसी देरी के इस दिशा में काम करना शुरू किया। इसमें किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं किया। उत्तर से लेकर के दक्षिण तक पूर्व से लेकर के पश्चिम तक देश के हर हिस्से में जो भी गांव बिजली की सुविधा से वंचित थे, पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत वहां बिजली पहुंचाने के कार्य में हम जुट गए। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल किया गया। इस योजना में गांवों, बस्तियों के इलेक्ट्रिफिकेशन के साथ-साथ डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम को मजबूत करने और किसानों को बिजली सप्लाई के लिये अलग फेडर की व्यवस्था को भी आरंभ कर लिया गया। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि देश के सभी गांव और उससे जुड़ी बस्तियां चाहे छोटी हो या बड़ी उन्हें इस योजना के तहत एक के बाद एक शामिल करते जाएं और उजाला का विस्तार होता चला गया।
कोई भी गांव या बस्ती चाहे उसकी जनसंख्या कितनी भी कम हो, बिजली सुविधा से वो वंचित न रहे इस लक्ष्य को लेकर के काम कर रहे हैं। जहां पर ग्रि‍ड से जुड़ना संभव न हो उन गांवों पर और उन बस्तियों में ऑफग्रिड माध्यम से बिजली की सप्लाई की व्यवस्था की जा रही है। 28 अप्रैल 2018 यह भारत की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक दिन के रूप में याद किया जाएगा।  मणिपुर का लाइसांग गांव पावर ग्रिड से जुड़ने वाला आखिरी गांव था। यह दिन हर देशवासी के लिये गर्व का क्षण था। और मुझे खुशी है कि आज आखिर में जहां बिजली पहुंची है। उस लाइसांग गांव के लोगों से मैं बातचीत शुरू करना चाहता हूं। सबसे पहले उन्हीं को सुनते हैं, उनका क्या कहना है, ये मणिपुर के सेनापति जिले में हैं .....
देखिये मेरे प्यारे देशवासियों अभी हमनें अलग-अलग अनुभव सुनें कैसे बिजली आने के बाद जीवन आसान हुआ है। जिन 18000 गांवों में बिजली नहीं पहुंची थी। उनमें से अधिकतर गांव बहुत ही दूरदराज इलाकों में है। जैसे कि पर्वतीय क्षेत्रों के बर्फीले पहाड़ों में है, घने जंगलों से घिरे हैं या फिर उग्रवादी एवं नक्सली गतिविधियों के कारण अशांत क्षेत्र में हैं। इन गांवों में बिजली पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। ये वो गांव है जहां आने जाने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है और वहां आसानी से पहुंचा नहीं जा सकता था। कई ऐसे गांव है जहां पहुंचने के लिये तीन चार दिन पैदल चलना पड़ता है। सामान को अलग-अलग माध्यमों से घोड़े पर, खच्चर पर, कंधों पर लेकर नावों से ले जाया गया। कई गांव जैसे जम्मू एवं कश्मीर के 35 गांव तथा अरुणाचल प्रदेश के 16 गांव हेलिकॉप्टर से सामान पहुंचाना था। मैं मानता हूं कि सरकार की उपलब्धि नहीं है। ये हर उस व्यक्ति की उपलब्धि है, उस गांव वालों की उपलब्धि है, जो इस काम से जोड़े गए या उन सरकार के छोटे मोटे मुलाजिम जो दिन रात मेहनत की कष्ट उठाया। खम्भे उठा-उठा कर गये। उन छोटे-छोटे सरकार के मुलाजिमों की ये इनका काम है। इलेक्ट्रिशियन हो, टैक्निशियन हो, मजदूर हो। इस कार्य में जुड़े लोगों के अथक प्रयास का ही परिणाम है कि आज हम हिन्दुस्तान के हर गांव तक रौशनी पहुंचा पाए हैं। मैं उन सभी लोगों को सारे देशवासियों की तरफ से उनका बहुत धन्यवाद करता हूं। उनको शुभकामनाएं देता हूं।
आप देखिए मुम्बई की जब भी बात आती है, तो हमें बड़े-बड़े बिल्डिंग रौशनी से जगमगाता शहर और सड़कें याद आती हैं। मुम्बई से थोड़ी दूरी पर एलीफेंटा द्वीपस्थित है। यह पर्यटन का एक बहुत बड़ा आकर्षित केन्द्र है।एलीफेंटा के गुफाएं यूनेस्को के वर्ल्ड हैरिटेज में है। वहां पर देश विदेश से विशाल संख्या में पर्यटक हरदिन आते हैं। मुझे ये बात जानकर के हैरानी हुई की मुम्बई के इतने पास होने और पर्यटन का इतना बड़ा केन्द्र होने के बावजूद आजादी के इतने वर्षों तक एलीफेंटा द्वीपके गांवों में बिजली नहीं पहुंची थी और न ये मैंने कभी अख़बार में पढ़ा, न टीवी पर बड़ा विशेष कार्यक्रम हुआ की वहां अंधेरा है। किसी को परवाह नहीं थी। हां अभी खुशी है, अब हम काम कर रहे हैं तो लोग पहुंच जाते हैं की बाईं ओर लाइट नहीं आई, दाईं ओर नहीं आई, पीछेआई, आगे नहीं आई, छोटी आई, बड़ी आई। सब हो रहा है। अगर ये चीजें पहले हुई होती। कोई सोच सकता है 70 साल तक हमारा टूरिस्ट डेस्टीनेशन एलीफेंटा द्वीप गांवों के लोग अंधेरे की जिन्दगी गुजार रहे थे। समुद्र में केबल बिछा कर वहां तक बिजली पहुंचाई गई। आज उन गांव का अंधेरा छट चुका है। जब इरादे नेक हों, नियत साफ हो और नीति स्पष्ट हो, तो मुश्किल से मुश्किल लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है।
आइये चलते हैं कुछ और इलाके में, आईए सबसे पहले झारखंड चलते हैं....
देखिये भाइयों बहनों पिछली सरकारों ने देश के पूर्वी क्षेत्र के विकास पर कोई खास ध्यान नहीं दिया था। ये क्षेत्र विकास और विभिन्न सुविधाओं से वंचित रहा। ये इस बात से समझा जा सकता है कि देश के 18000 से अधिक गांव जहां बिजली नहीं पहुंची थी। उनमें से ये आंकड़ा जरा देश को चौंकाने वाला है। उनमेंसे 18000 में से 14,582 यानि करीब-करीब 15000 गांव ऐसे थे जो हमारे पूर्वी क्षेत्र में थे और उनमें भी यानि 14,582 गांव में से 5790 यानि करीब करीब 6000 गांव नॉर्थ ईस्ट में थे, पूर्वांचल के थे पूर्वोत्तर भारत क्षेत्र के थे। आप देखिये, ये आप टीवी पर देखते होंगे, मैंने उसका नक्शा रखा है। जो लाल-लाल टाइप के दिखते हैं आपको ये सारा इलाका अंधेरे में था। अब मुझे बताइए अगर सबका भला करने के लिये सोचते तो ये हाल होता क्या। लेकिन वहां लोग कम हैं पार्लियामेंट की सीटें भी कम हैं। तो उन सरकारों को ज्यादा फायदा नहीं दिखता था। देश की सेवा राजनीतिक फायदे से जुड़ी हुई नहीं होती। देश की सेवा देशवासियों के लिये होती है और मेरा हमेशा से ये मानना रहा है कि भारत की विकास की यात्रा में और गति आएगी जब हमारे पूर्वी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को यहां के समाज का संतुलित विकास भी तेज गति से होगा।
जब हमारी सरकार बनी हम इसी अपरोच के साथ आगे बढ़े और हमने पूर्वोत्तर को विकास की मुख्य धारा में जोड़ने की दिशा में प्रयास शुरू किया। इसके लिये सबसे पहले आवश्यक था कि वहां के गांवों में बिजली पहुंचे और मुझे खुशी है कि आज न सिर्फ पूर्वी भारत के बल्कि देश के हर गांव में बिजली पहुंच चुकी है। गांव का अंधेरा दूर हो चुका है। बिजली आती है तो क्या होता है। जीवन में क्या बदलाव आता है। आप लोगों से बेहतर इस बात को कौन जान सकता है। मुझे देशवासियों के कई सारे पत्र आते रहते हैं। लोग मुझसे अपने अनुभव शेयर करते हैं। मुझे उनके पत्रों को पढ़कर के काफी कुछ सीखने को मिलता है।
आप कल्पना कर सकते हैं कि बिजली आने से गांव में रह रहे सामान्य जनजीवन में कितना बदलाव आया है। अब गांव के लोगों को समय पर अंधियारे का नहीं इनका स्वयं का अधिकार होता है। अब सूर्यास्त में केवल सूर्य अस्त होता है लोगों का दिन अस्त नहीं होता है। बच्चे दिन डूबने के बाद भी बल्ब की रौशनी में आराम से पढ़ाई कर सकते हैं। गांव की महिलाओं को अब रात का खाना शाम को दोपहर से जो बनाना शुरू करना पड़ता था। खाना अभी बना है जल्दी-जल्दी शुरू कर दो का चक्कर चलता था। उस भय से मुक्ति आई है। हाट, बाजार देर तक रात को खुले मिलेंगे। मोबाइल चार्ज करने के लिये दूरदराज कोई दुकान नहीं तलाश करनी पड़ती। अब रात को दूसरे गांव में मोबाइल छोड़कर आओ और सुबह लेने जाऊं और उसी फोन से रात को कोई गड़बड़ कर दे, तो सारा गुनाह आपका बन जाता आप जेल चले जाते हैं। कैसी-कैसी मुसीबतें थीं। जम्मू-कश्मीर के लोग हमारे बीच में हैं आइये, क्योंकि वहां तो पहाड़ों में बड़ी कठिनाई से ये सारा सामान हेलिकॉप्टर से भेजना पड़ता था, तो मैं चाहूंगा कि जम्मू-कश्मीर के मेरे भाइयों बहनों से मैं सुनूं कुछ बातें।
देखिये लाखों लोग जो आज हमारे साथ जुड़े हैं, वो जान पा रहे हैं कि जब विकास होता है तो जीवन पर कितना व्यापक प्रभाव पड़ता है। कितना बड़ा बदलाव आता है। आज देश के हर गांव में बिजली पहुंच गई है। लेकिन हम इतने से संतुष्ट हुए हैं इतना नहीं है, इसलिए अब गांव से आगे बढ़कर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के अंत्योदय के सपने को साकार करने के लिए हमारी सरकार ने इस देश के हर घर को रौशन करने का संकल्प किया है और इस दिशा में प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना जिसका छोटा सा शब्द बनता है सौभाग्य योजना इसकी शुरुआत की गई। इस योजना के तहत बचे हुए सभी घरों को चाहे वो गांव में हो या शहर में बिजली का कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। और इसके तहत चार करोड़ गरीब परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने का हमने लक्ष्य निर्धारित किया है। और हम इसके लिए एक मिशन मोड में काम कर रहे हैं। अभी तक इस योजना के तहत करीब 80 85 90 लाख से अधिक घरों में बिजली पहुंच चुकी है। गरीब परिवारों के लिए बिजली कनेक्शन बिल्कुल मुफ्त है। वहीं सक्षम परिवारों से सिर्फ 500 रुपये लिए जाएंगे, जिसे कनेक्शन लगने के बाद दस आसान किस्तों में आप अपने बिजली बिल के साथ चुका सकते हैं। घरों में बिजली पहुंचाने के लक्ष्य को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। कम से कम समय में लोगों के घर तक बिजली पहुंचे इसके लिये गांवों में कैम्प भी लगाए जा रहे हैं। जहां मौके पर ही सारी प्रक्रिया पूरी कर नये कनेक्शन स्वीकृत किये जा रहे हैं।
इसके अलावा दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए सौर ऊर्जा, सूर्य ऊर्जा आधारित प्रणालियों का प्रावधान भी किया गया है। मैं मानता हूं कि बिजली सिर्फ प्रकाश की ही पूर्ति नहीं करती, बिजली लोगों में आत्मविश्वास भी भर्ती है। एनर्जी ऊर्जा ये एक प्रकार से गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने का अच्छा साधन भी बन सकता है। गांव-गांव तक पहुंची रौशनी सिर्फ सूरज डूबने के बाद का अंधियारा नहीं मिटा रही, ये रौशनी गांव और गांव के लोगों के जीवन में तरक्की का उजियारा भर रही है। और इसका प्रमाण है आपकी ये बातें, जिन्हें इस बदलाव के बाद आपने अनुभव किया और हमारे साथ यहां साझा किया। सारे देश ने आपको सुना है। कई गांव और भी है समय की कमी है, संसद चल रही है मुझे पहुंचना है पर कुछ गांवों से नमस्ते जरूर करना चाहूंगा। बस्तर को नमस्ते, अलीराजपुर को नमस्ते, सीहोर को नमस्ते, नवपाड़ा को नमस्ते, सीतापुर को नमस्ते और कभी–कभी आप लोग टीवी में देखते होंगे, अखबार में पढ़ते होंगे हमारे विरोधियों के भाषण सुनते होंगे। विरोधियों के गाने बजाने वालों को सुनते होंगे। वो कहते हैं देखो इतने घरों में बिजली नहीं, इतने घरों में बिजली नहीं है। आप ये मत समझिए कि हमारी टीका है या हमारी सरकार की टीका है। ये पिछले 70 साल जो सरकार चला रहे थे उनकी टीका है। ये हमारी आलोचना नहीं है ये उनकी आलोचना है कि इतना काम बाकी रखा है। हम तो उसे पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।
और इसलिए अगर चार करोड़ परिवारों में बिजली नहीं है, तो इसका मतलब ये नहीं है कि आपके घर में पहले बिजली थी, आपके गांव में पहले बिजली थी और मोदी सरकार ने आकर के सब काट दिया, खंभे उखाड़कर के ले गया, तार सारे ले गये, ऐसा नहीं है। पहले कुछ था ही नहीं। हम लगाने की कोशिश कर रहे हैं। और इसलिए जो लोग बड़े उत्साह में आकर के हमारे विरोधी हमको गालियां देते रहते हैं, उस परिवार में बिजली नहीं पहुंची, उसके घर में बिजली नहीं पहुंची, उधर खम्भा नहीं लगा। पहले किसीने नहीं लगाया था। हम कोशिश कर रहे हैं और आपका साथ सहयोग रहा और छोटे-छोटे लोग जिन्होंने मेहनत की है हम उनको निराश करने का काम न करें। मोदी को जितनी गालियां देनी है देते रहिए। लेकिन जो छोटे-छोटे लोग मेहनत करते हैं गांव में उजियारा लाने के लिए कोशिश करते हैं। उनका हम मान सम्मान बढ़ाएं, उनका हम गौरव करें उनको काम करने का हौसला बुलंद हो, इसके लिए हम सब प्रयास करें तो फिर देश में जो समस्याएं हैं एक के बाद एक समस्याओं से हम हमारे गांव को, हमारे परिवारों को, हमारे देश को बाहर निकाल सकते हैं। क्योंकि आखिरकार हम सबका काम है समस्याएं गिनते जाना ये हमारा काम नहीं है। हमारा काम है समस्यों से मुक्ति दिलाने के रास्ते खोजना।
मुझे विश्वास है कि परमात्मा हम सबको शक्ति देगा। इरादे हमारे नेक हैं। आप सबके प्रति हमारे दिल में इतना प्यार है कि जितना हम आपके लिये करें कम है। हम करते रहेंगे। मैं आखिर में आपको एक वीडियो भी दिखाना चाहता हूं। आइए हम एक वीडियो देखें उसके बाद मैं अपनी बात को समाप्त करूंगा हूं।

ऑनलाइन प्रशिक्षण सामग्री की जाएगी तैयार

 

मानव संसाधन मंत्रालय ने किया राष्ट्रीय संसाधन केंद्रों के गठन का प्रस्ताव

ऩई दिल्ली।सरकार ने संशोधित पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए विषयों में होने वाले विकास, नए एवं उभरते हुए रुझान, शिक्षण पद्धति में सुधार के मद्देनजर ऑनलाइन प्रशिक्षण सामग्री तैयार करने के लिए राष्ट्रीय संसाधन केंद्रों के गठन का प्रस्ताव किया है। पहले चरण में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्थित मंत्रालय के राष्ट्रीय पंडित मदन मोहन मालवीय शिक्षक एवं शिक्षण मिशन, आईआईएस, आईयूसीएए, आईआईटी, आईआईएसईआर, राज्य विश्वविद्यालयों, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानव संसाधन विकास केंद्रों, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों, आईआईआईटी, खुले विश्वविद्यालयों में 75 विशेष विषयों के संबंध में राष्ट्रीय संसाधन केंद्रों को चिन्हित किया है। इन केंद्रों में सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, डिजाइन एवं निर्माण, मानविकी, भाषा शिक्षण, वाणिज्य, प्रबंधन, शिक्षा योजना एवं प्रशासन, लोक नीति, नेतृत्व एवं शासन, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान, खगोल शास्त्र एवं खगोल भौतिकी, विश्लेषण एवं मूल्यांकन, शिक्षण एवं अनुसंधान पद्धति, नेनो विज्ञान, इंटरनेट इत्यादि विषय शामिल किए गए हैं।
इस पहल के तहत सभी सेवारत शिक्षकों को अपने-अपने विषयों में होने वाले आधुनिक विकास के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। यह जानकारी 'स्वयम्' प्लेटफार्म के जरिये उपलब्ध होगी।
यह सूचना आज राज्य सभा में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रदान की।

परमाणु ऊर्जा की ओर देश के बढ़ते कदम


दस परमाणु रियेक्टरों से होगा सात हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन
2031 तक कुल परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़कर 22480 मेगावॉट हो जाएगी

नई दिल्ली। परमाणु ऊर्जा की ओर भारत के कदम तेजी से बढ़ रहे हैं।   सरकार ने देश में दस स्‍वदेशी परमाणु ऊर्जा रिएक्‍टर लगाने के लिए शासकीय और वित्‍तीय मंजूरी जून, 2017 में दी। इन रिएक्‍टरों में से प्रत्‍येक की क्षमता 700 मेगावॉट है। स्‍वदेशी तकनीकी से निर्मित ये रिएक्‍टर भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) की ओर से लगाए जाएंगे। एनपीसीआईएल भारत सरकार के पूर्ण स्‍वामित्‍व वाला सार्वजनिक उपक्रम है, जो परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत काम करता है।   
    इन रिएक्‍टरों का निम्‍नलिखित स्‍थानों पर बनाया जाना प्रस्‍तावित है :
            स्‍थान और राज्‍य
परियोजना
क्षमता (मेगावॉट)
चुटका (मध्‍य प्रदेश)
चुटका एक और दो  
2 X 700
कैगा (कर्नाटक)
कैगा – पांच और छह
2 X 700
माही बांसवाड़ा (राजस्‍थान)
माही बांसवाड़ा – एक और दो
2 X 700
गोरखपुर (हरियाणा)
जीएचएवीपी- तीन और चार
2 X 700
माही बांसवाड़ा (राजस्‍थान)
माही बांसवाड़ा – तीन और चार 
2 X 700

   परियोजना की पूर्व तैयारियों के तहत उपरोक्‍त स्‍थानों पर भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पर्यावरणीय मंजूरी आदि गतिविधियां विभिन्‍न चरणों में हैं। कैगा और गोरखपुर में रिएक्‍टर के लिए जमीन उपलब्‍ध है, जबकि चुटका और माही बांसवाड़ा में भूमि अधिग्रहण का काम लगभग पूरा होने को है। चुटा एक और दो तथा जीएचएवीपी तीन और चार परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी प्राप्‍त हो चुकी है। अन्‍य स्‍थानों के लिए पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया विभिन्‍न चरणों में है। इसके अतिरिक्‍त निर्माण में प्रयुक्‍त होने वाले उपकरणों तथा मानव संसाधन नियोजन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।    
भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम द्वारा निर्माणाधीन 500 मेगावॉट क्षमता वाले प्रोटोटइम रिएक्‍टर के जल्‍द पूरा होने तथा दस नये रिएक्‍टरों के तैयार हो जाने पर साल 2031 तक देश की कुल परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़कर 22480 मेगावॉट हो जाएगी।
यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय, पूर्वोत्‍तर क्षेत्र, कार्मिक, लोक शिकातय और पेंशन तथा परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री जितेन्‍द्र सिंह ने आज राज्‍यसभा में एक लिखित उत्‍तर में दी।

खाटु नरेश श्री श्याम प्रभु का किया गया तिलक श्रृंगार



रांची। हरमू रोड श्री श्याम मंदिर में  19 जुलाई गुरूवार को खाटु नरेश श्री श्याम प्यारे का तिलक श्रृंगार किया गया।भक्तों ने अमावस्या से सप्तमी तिथि गुरूवार तक बाबा श्री श्याम  के सांवले रूप का दर्शन प्रातः काल में एवं सांय काल में तिलक श्रृंगारित प्रभु श्री श्याम के दर्शन कर प्रफुल्लित होते रहे।
नियमित भोग आरती के बाद बाबा का केसर चंदन से तिलक श्रृंगार किया गया।श्री श्याम प्रभु को गरमी के मौसम अनुसार बागा(वस्त्र) पहनाया गया।हलके आसमानी रंग के बागा में बाबा बहुत ही अनुपम छटा बिखेर रहे थे।मण्डल के श्री गोपाल मुरारका एवं अशोक लडिया ने तिलक श्रृंगार के बाद बाबा को मंदिर में ही मालाकारों द्वारा गूथें फूलों के गजरों(मालाओं) से बाबा का अद्धभूत एवं अलौंकिक श्रृंगार किया।
बाबा को मेवा का भोग लगाया गया।तिलक श्रृंगार के दौरान भक्तजन बडे श्रद्धा-भाव से बाबा के पट खुलने का इन्तजार करते रहे।उपस्थित सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने श्याम जयकारा लगाकर बाबा के दरबार में शीश नवाया और अपने एवं अपने प्रियजनों के लिए बाबा श्री श्याम प्रभु से मंगल कामना की।सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया।

श्री श्याम मित्र मण्डल,राँची के महामंत्री आनंद शर्मा ने बताया कि सोमवार 23 जून को रात्रि 10 बजे से प्रातः 4 बजे तक हरमू रोड श्री श्याम मंदिर में  एकादशी संकीर्तन का आयोजन बडे ही धूम-धाम से किया जाएगा।सनातन धर्म में श्री हरि को सर्वाधिक प्रिय एकादशी व्रत है।
श्री शर्मा ने नगर के सभी धर्म प्रेमी,श्याम प्रेमी से एकादशी जागरण में सोमवार 23 जुलाई को सम्मलित होने का आग्रह किया है।

युवा जदयू प्रदेश कार्यसमिति की बैठक सह कार्यकर्ता सम्मेलन 21 को


* सत्ता में युवाओं की भागीदारी पर होगी विशेष चर्चा।

रांची। युवा जदयू के राष्ट्रीय महासचिव सह झारखंड के प्रभारी  कुणाल अग्रवाल ने बताया कि युवा जनता दल यूनाइटेड झारखंड प्रदेश कार्यसमिति की बैठक सह रांची महानगर युवा जदयू कार्यकर्ता सम्मेलन 21 जुलाई (शनिवार ) को कांके रोड, रॉक गार्डेन में होगी। इसमें विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। युवा नीति, झारखंड में शिक्षित बेरोजगार युवाओं का पलायन,  आदि महत्पूर्ण विषय पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सम्मेलन में युवाओं की  सत्ता में भागीदारी, बेरोजगारी के सवाल, दहेज प्रथा, शराबबंदी एवं सदस्यता अभियान पे चर्चा की जाएगी।
उन्होंने बताया कि 22 जुलाई को युवा आदिवासी साथी अभिवादन बैंक्वेट हाल ,मोरहाबादी में युवा जदयू का दामन थामेंगे। आने वाले चुनावी वर्ष 2019 में पार्टी 81 विधानसभा एवं 14 लोकसभा चुनाव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कराएगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने हेतु युवा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष  संजय कुमार शुक्रवार को रांची पहुंचेंगे। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से युवा जदयू के राष्ट्रीय   अध्यक्ष  संजय कुमार , राष्ट्रीय महासचिव श्री कुणाल अग्रवाल,  महासचिव  कुणाल अग्रवाल , झारखंड जदयू के प्रदेश अध्यक्ष  जलेश्वर महतो, झारखंड जदयू प्रभारी  रामसेवक सिंह , राज्यसभा सांसद हरिवंश , सह प्रभारी  अरुण सिंह, युवा जदयू के अध्यक्ष डॉ. पवन पाण्डेय एवं पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारीगण अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे।
प्रेस वार्ता में प्रदेश जदयू के वरीय उपाध्यक्ष कृष्णानंद मिश्रा, प्रधान महासचिव  भगवान सिंह, प्रवक्ता श्रवण कुमार , जफर कमाल , महानगर अध्यक्ष  संजय सहाय, पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष उपेंद्र नारायण सिंह, युवा जदयू के महानगर अध्यक्ष अखिलेश राय, रूपेश झा, धीरेंद्र कुमार, मुकेश राणा, सूरज उरांव, सुशील राय, बबलू पाठक, बिकी कच्छप, अशोक पाण्डेय, राहुल सिंह, गौतम सहित अन्य उपस्थित थे।

बैंकों के राष्ट्रीयकरण के गोल्डन जुबली वर्ष पर बैठक



रांची। बैंकों के 50 वें राष्ट्रीयकरण दिवस (गोल्डन जुबली वर्ष) के अवसर पर गुरुवार को आल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन(AIBOC) झारखंड इकाई के बैनर तले बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स  एसोसिएशन(BOIOA) के परिसर में एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें AIBOC झारखंड इकाई के अध्यक्ष सुनील लकड़ा एवं सचिव  प्रशांत शांडिल्य सहित सगुन उरांव, प्रकाश उरांव, बरुन कुमार,  सुलेखा कच्छप,.विजय वाधवा, मनीष नारायण, भरत ठाकुर, अशोक कुमार, अजीत कुमार, पेत्रुस टोप्पो के अलावे अन्य सदस्य उपस्थित थे ।
बैठक में बैंक के राष्ट्रीयकरण के महत्व पर चर्चा की गई । वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीयकरण होने की वजह से देश के किसान, मज़दूर, छात्र, स्वयं सहायता ग्रुप्स, वरिष्ठ नागरिकों, विभिन्न फोरम, सामाजिक कार्यकर्ता, अवकाश प्राप्त नागरिकों एवं ट्रेड यूनियन सीधे तौर पर जुड़ सके है और अर्थिक लाभ ले पाए हैं । सचिव ने बताया कि वर्तमान समय में बैंकों पर एवं अन्य PSUs पर सरकार के द्वारा निजीकरण करने का खतरा मंडरा रहा है एवं सभी से इस प्रयास को सफल नही होने देने की अपील की ।
अगर भारतवर्ष को बचाना है तो हमे पब्लिक सेक्टर के बैंक को बचाना है।
बैठक की समाप्ति के अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन देते हुए  प्रकाश उरांव ने देश के नागरिकों से भी बैंको को पूर्ण समर्थन देने अपेक्षा की ।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...