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बुधवार, 1 अगस्त 2018

नोटबंदी के बाद अब वोटबंदी



असम में एनआरसी के जरिए 40 लाख लोगों की नागरिकता पर संशय की तलवार लटका दी गई है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह दलील दे रहे हैं कि जिनके नाम छूट गए हैं वे दुबारा सके लिए आवेदन दे सकते हैं। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। सरकार सके जरिए बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर रही है और उनकी नागरिकता रद्द करने का प्रयास कर रही है। असम के लोगों की यह पुरानी मांग रही है। इसके लिए आंदोलन भी हो चुका है।
लेकिन इसकी प्रक्रिया ठीक आम चुनावों के पहले की गई इसके पीछे कारण पूरी तरह राजनीतिक है। मोदी सरकार अपने चुनावी वायदे पूरी नहीं कर पाई। बल्कि तरह-तरह के नियमों और प्रयोगों के जरिए लोगों को परेशानी में डालती रही। अर्थ व्यवस्था को इस कदर झकझोर दिया कि आमलोगों का जीना दूभर हो गया। कई परिवारों ने आर्थिक तंगी के कारण सामूहिक आत्महत्या कर ली। पूंजीपति वर्ग भले ही लाभान्वित हुआ लेकिन मध्यम वर्ग त्राहि-त्राहि कर उठा। इस वर्ग की नाराजगी दूर करने के लिए भावनात्मक झटके की जरूरत थी। उसी रणनीति के तहत सांप्रदायिकता की लहर पैदा करने की कोशिश की जा रही है। मोदी सरकार के नीतिकार जानते हैं कि अब मंदिर मुद्दा बहुत असर नहीं डाल सकेगा। इसलिए ध्रुवीकरण के लिए नए नए तकीके जमाए जा रहे हैं। अब मोदी सरकार के पास चुनाव के लिए इसके अलावा कोई मुद्दा नहीं बचा है। इसीलिए वह तरह-तरह के दांव खेल रही है। एनआरसी का काम अगर सरकार गठन के तत्काल बाद कराया जाता तो नागरिकता से खारिज किए गे लोगों को अपना नाम जुड़वाने और मतदान करने का मौका मिलता। अब नाम जुड़वाने का मौका तो दिया जा रहा है लेकिन इसकी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही चुनाव का समय आ जाएगा और यह जो 40 लाख वोट विपक्ष के खाते में जाने वाले थे बर्बाद हो जाएंगे। दूसरी बात यह कि इससे पूरे देश में हिन्दुत्व की भावना प्रखर होगी और ध्रुवीकरण को बल मिलेगा। सरकार के कमान में यही एक तीर बचा है। जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से समर्थन वापस लेने से लेकर असम में एनआरसी तक उसी लक्ष्य को भेजने के लिए चलाए गए तीर हैं। 2016 में नोटबंदी का भी मुख्य लक्ष्य विपक्षी दलों की आर्थिक रूप से कमर तोड़ना था और अब नोटबंदी के बाद वोटबंदी की प्रक्रिया शुरू की गई है। जो 40 लाख लोग नागरिकता की परिधि से फिलहाल बाहर किए गए हैं वे मुसलमान हैं और भाजपा के वोटर नहीं हैं। उनमें से कौन नए सीमांकन के बाद आए और कौन इससे पहले साबित करना कठिन है। 1971 से पूर्व आए बहुत से लोगों के पास कोई दस्तावेज़ नहीं है। हालांकि आसू ने 1971 को डेडलाइन रखने की मांग की है। सरकार इसके लिए राजी है लेकिन वह चाहती है कि बांग्लादेश से जो हिन्दू असम आए हैं उनका नाम रजिस्टर में शामिल किया जाए। आसू असम की ताकतवर राजनीतिक पार्टी है। वह सरकार की इस दलील को शायद ही स्वीकार करे लेकिन एक तो इस विवाद के कारण एनआरसी की प्रक्रिया लंबे समय तक विवाद में रहेगी। इस बीच चुनाव निकल जाएगा। हिन्दुओं के अंदर यह संदेश तो जाएगा ही कि मोदी सरकार बांग्लादेशी हिन्दुओं को नागरिकता देना चाहती  है लेकिन विरोध के कारण नहीं दे पा रही है।
यह सच है कि विपक्षी गठबंधन भी बांटो और राज करो की नीति पर ही चलेगा। भाजपा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का सहारा लेगी तो विपक्ष जातिवाद को बढ़ावा देकर ही चुनावी मैदान में उतरेगा। मुसलिम और दूसरे अल्पसंख्यक समूहों का समर्थन उसे बिन मांगे मिल जाएगा। बाकी जातीय समीकरण के आधार पर खाते में वोट जाएगा। विपक्ष के नेता असम प्रकरण को लेकर जितना शोर मचाएंगे भाजपा को उतना ही लाभ होगा क्योंकि हिन्दुओं में विपक्ष के मुसलिम प्रेम की प्रतिक्रिया होगी और जातीय भावना के ऊपर धार्मिक भावना हावी हो जाएगी। बहरहाल स्पष्ट है कि चुनाव में कल-बल-छल का पूरा इस्तेमाल होगा। इसकी शुरुआत हो चुकी है। नोटबंदी ने जितना तनाव उत्पन्न किया वोटबंदी ससे कहीं ज्यादा तनाव त्पन्न करेगी।

एनआरआई विवाह विवाद में बच्चे की अभिरक्षा मामलों में ‘मध्यस्थता प्रकोष्ठ’ का होगा गठन



 मध्यस्थता प्रकोष्ठ तैयार करेगा अभिभावक योजना : मेनका गांधी
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार के महिला व बाल विकास मंत्रालय ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम (सीपीसीआर) 2005 में प्रद्त अधिकारों के आधार पर एनसीपीसीआर को एक मध्यस्थता प्रकोष्ठ गठन करने का निर्देश दिया है। विवाह विवाद में एक पक्ष दूसरे पक्ष को बिना बताए बच्चे को लेकर चले जाते हैं या भारत में विदेश से घरेलू हिंसा होती है या भारत से विदेश में घरेलू हिंसा की जाती है-ऐसे मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। यह प्रकोष्ठ बच्चे के सर्वोच्च हितों का ध्यान में रखते हुए फैसला लेगी और अभिभावक योजना तैयार करेगी।
एनसीपीसीआर में मध्यस्थता प्रकोष्ठ की संरचना निम्न होगी-
  1. एनसीपीसीआर के चेयरमैन - चेयरमैन
  2. एनसीपीसीआर सदस्य (बच्चों के अधिकार) – सदस्य
  3. एनसीपीसीआर सदस्य (बच्चों का मनोविज्ञान – समाजशास्त्र) – सदस्य
इन मामलों से संबंधित सभी विवादों पर महिला व बाल विकास मंत्रालय की एकीकृत नोडल एजेंसी (आईएनए) विचार करेगी, जिसका गठन 20 दिसंबर 2017 को किया गया था।
महिला व बाल विकास मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर कहा है कि अभिभावक या माता-पिता एकीकृत नोडल एजेंसी में आवेदन कर सकते हैं। बच्चे या बच्चे के संरक्षक को भी प्रस्तुत किया जा सकता है। आईएनए का गठन एनआरआई विवादों का समाधान करने के लिए किया गया है। इस प्रकार आईएनए की कार्यसीमा में विस्तार हुआ है।
प्रकिया के तहत आईएनए मामले की अनुशंसा एनसीपीसीआर को करेगी जो दोनों पक्षों के सभी मामलों पर मध्यस्थता करेगी। वीडियो काफ्रेंसिंग के जरिए भी प्रतिनिधित्व करने की स्वीकृति दी गयी है। मध्यस्थता प्रकोष्ठ बच्चे के हितों को ध्यान में रखते हुए अभिभावक योजना बनाएगा और अपनी रिपोर्ट आईएनए को सौंपेगा। आईएनए आदेश जारी करेगा। आईएनए के आदेश को न्यायालय की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं माना जाएगा।
केन्द्रीय महिला व बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य स्थिति का संपूर्ण आंकलन करना है और बच्चे के सर्वोच्च हितों को ध्यान में रखते  हुए अभिभावक योजना तैयार करना है। मंत्री महोदया ने कहा कि एनसीपीसीआर के द्वारा की जाने वाली मध्यस्थता से अधिकांश विवादों का समाधान हो जाएगा। यह बच्चे और दोनों पक्षों के लिए राहत की बात होगी।

गैर-पारंपरिक हाइड्रोकार्बन की खोज और दोहन के लिए नीति-रूपरेखा को मंजूरी


नई दिल्ली। पीएम मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल ने शेल ऑयल/गैस, कोल बेड मीथेन इत्‍यादि जैसे गैर-पारंपरिक हाइड्रोकार्बन की खोज और दोहन के लिए नीति-रूपरेखा को मंजूरी दे दी है। मौजूदा रकबे में गैर-पारंपरिक हाइड्रोकार्बन की क्षमता का दोहन करने के संबंध में लाइसेंसधारी/पट्टाधारी मौजूदा ठेकेदारों को प्रोत्‍साहित करने के लिए वर्तमान उत्‍पादन साझेदारी संविदाओं, सीवीएम संविदाओं और नामित क्षेत्रों के तहत इसका अनुपालन किया जाएगा।
लाभ :
·         इस नीति से वर्तमान संविदा क्षेत्रों में संभावित हाइड्रोकार्बन भंडारों के उपयोग के लिए क्षमता बढ़ेगी, जो अब तक खोजे नहीं गये थे और जिनका दोहन नहीं हुआ था।
·         इस नीति के कार्यान्‍वयन से नयी हाइड्रोकार्बन खोजों के संबंध में अन्‍वेषण और उत्‍पादन गतिविधियों में नया निवेश तथा परिणामस्‍वरूप घरेलू उत्‍पादन में बढ़ोतरी की आशा की जाती है।
·         अतिरिक्‍त हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज और दोहन से नये निवेश में तेजी आने, आर्थिक गतिविधियों में इजाफा होने, अतिरिक्‍त रोजगार सृजन होने की आशा है, जिससे समाज के विभिन्‍न वर्गों को लाभ होगा।
·         इससे नई, अभिनव और उत्‍कृष्‍ट प्रौद्योगिकी की संभावना बढ़ेगी तथा गैर-पारंपारिक हाइड्रोकार्बन के दोहन के लिए नये प्रौद्योगिकी सहयोग का रास्‍ता खुलेगा।
पृष्‍ठभूमि :
पीएससी के मौजूदा संविदा नियमों के अनुसार वर्तमान ठेकेदारों को पहले से लाइसेंस और पट्टे पर आवंटित क्षेत्रों में सीबीएम या गैर-पारंपरिक हाइड्रोकार्बन की खोज और दोहन की अनुमति नहीं है। इसी तरह सीबीएम को छोड़कर संबंधित ठेकेदारों को अन्‍य हाइड्रोकार्बन की खोज और दोहन की अनुमति नहीं है। पीएससी और सीबीएम ब्‍लॉकों में विभिन्‍न ठेकेदारों के अधीन इस समय जो रकबा मौजूद है तथा नामित व्‍यवस्‍था में राष्‍ट्रीय तेल कंपनियों का  भारत के तलछट संबंधी बेसिन में एक बड़ा हिस्‍सा है।
आरंभिक अध्‍ययन में विभिन्‍न अंतर्राष्‍ट्रीय एजेंसियों ने आकलन किया है कि पांच भारतीय तलछट बेसिनों में 100-200 टीसीएफ के दायरे में संभावित शेल गैस संसाधन मौजूद हैं। कैमबे, कृष्‍णा-गोदावरी, कावेरी इत्‍यादि जैसे बेसिनों में शेल ऑयल/गैस होने की मजबूत संभावना है, जहां जैविक संपदा से पूर्ण शेल मौजूद है। पीएसई की पूर्व-नव अन्‍वेषण लाइसेंस नीति (एनईएलपी)/एनईएलपी व्‍यवस्‍था के तहत 72,027 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और सीबीएम संविदाओं के तहत 5269 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारंपरिक या गैर-पारंपरिक हाइड्रोकार्बन के दोहन और खोज के लिए खोल दिया गया है। इस नीति की मंजूरी के बाद ‘एकल हाइड्रोकार्बन संसाधन प्रकार’ के स्‍थान पर ‘समान लाइसेंसिंग नीति’ लागू हो जाएगी, जो हाइड्रोकार्बन अन्‍वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति (एचईएलपी) तथा अन्‍वे‍षित लघु क्षेत्र (डीएसएफ) नीति में इस समय लागू है।

पीएससी ब्‍लॉकों में नये हाइड्रोकार्बन अन्‍वेषण की लागत रिकवरी और पेट्रोलियम गतिविधियों के संचालन का दायरा तय करने के लिए नीतिगत वित्‍तीय तथा संविदा संबंधी शर्तों से सहायता होती है। सीबीएम संविदा मामले में पेट्रोलियम लाभ/उत्‍पादन स्‍तरीय भुगतान की अतिरिक्‍त 10 प्रतिशत दर तथा इसके विषय में मौजूदा दर से अधिक को सरकार के साथ नई खोजों के संबंध में साझा करना होगा। नामित ब्‍लॉकों के लिए अन्‍वेषण/पट्टा लाइसेंस की मौजूदा वित्‍तीय और संविदा शर्तों के तहत गैर-पारंपारिक हाइड्रोकार्बन की खोज एवं दोहन की अनुमति के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र दिया जाएगा।

उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति, राम नाथ कोविन्द का सम्बोधन

 
  1. पहले राज्यसभा सदस्य, और अब राष्ट्रपति होने के नाते, संसद के अभिन्न अंग के रूप में, संसदीय व्यवस्था से सीधे जुड़े रहने का मुझे सुअवसर मिला है। इसे मैं अपना सौभाग्य मानता हूँ।
  2. ‘स्पीकर्स रिसर्च इनिशिएटिव’ के तीन वर्ष सम्पन्न होने के अवसर पर, विगत 24 जुलाई को, मैं ‘पार्लियामेंट अनेक्सी’ में आया था। यह इनिशिएटिव सांसदों के योगदान को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। आज का यह ‘उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार’ वरिष्ठ और प्रभावी सांसदों के योगदान को सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। अतः आज के इस पुरस्कार समारोह में शामिल होकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है।
  3. मुझे ज्ञात हुआ कि सन 2008 से, इस पुरस्कार समारोह का आयोजन, अगस्त के महीने में किया जाता रहा है। भारत के इतिहास में अगस्त महीने का एक विशेष महत्व है। आज 1 अगस्त को, ‘स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का उद्घोष करने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि है, जिनका चित्र इस सेंट्रल हॉल को सुशोभित करता है। 8 अगस्त, 1942 को ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन का प्रस्ताव पारित हुआ था और 9 अगस्त को वह क्रान्ति शुरू हुई थी जिसे ‘अगस्त-क्रान्ति’ के नाम से जाना जाता है। 15 अगस्त, 1947 को हमारा स्वराज्य पाने का सपना पूरा हुआ। ‘स्वराज्य’ मिलने के बाद ‘सुराज’ के आदर्श को परिभाषित करना, और उसे प्राप्त करना, एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमे सांसदों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
  4. आज ‘उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार’ से सम्मानित होने पर, श्रीमती नजमा हेपतुल्ला, श्री हुकुमदेव नारायण यादव, श्री गुलाम नबी आज़ाद, श्री दिनेश त्रिवेदी और श्री भर्तृहरि महताब, इन सभी को, मैं बधाई देता हूँ। हम सबको उनके प्रशस्ति-पत्रों और उनके विचारों को सुनने का अवसर मिला। इन सभी ने, संसदीय गरिमा को अक्षुण्ण रखते हुए, अपने ज्ञान और विवेक के द्वारा, संसद की कार्यवाही को समृद्ध किया है। इन्होने अन्य सांसदों के लिए, अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत किये हैं। सदन में चर्चा-परिचर्चा तथा ‘विट और रिपार्टी’ के मर्यादित उदाहरणों को देखकर, देश के युवा प्रेरित होते हैं। उत्कृष्ट योगदान देने वाले ऐसे सांसदों को, सम्मानित करने की यह परंपरा, सराहनीय है। इसके लिए ‘इंडियन पार्लियामेंटरी ग्रुप’ तथा इस प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों को मैं बधाई देता हूँ।
  5. भारतीय लोकतन्त्र की आत्मा हमारी संसद में बसती है। संभवतः इसीलिये संसद को लोकतन्त्र का मंदिर भी कहा जाता है। सांसद, केवल किसी एक दल या संसदीय क्षेत्र के प्रतिनिधि नहीं होते हैं, वे हमारे संवैधानिक आदर्शों के संवाहक होते हैं। भारत के संविधान की उद्देशिका या preamble में जनता की संप्रभुता स्पष्ट की गई है, जिसमे कहा गया है कि, “हम, भारत के लोग ........ इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं”। ‘हम भारत के लोग’ ही सचमुच में ‘लोक’ हैं, जो हमारे लोकतन्त्र की शक्ति के स्रोत हैं।
  6. लोकतान्त्रिक व्यवस्था, भारत के लिए नई नहीं है। ऋग्वेद में ‘सभा’ और ‘समिति’ के उल्लेख मिलते हैं। बौद्ध सभाओं में संसदीय प्रणाली के नियमों को अपनाया गया था और ‘प्रस्ताव’, ‘सचेतक’ तथा ‘निंदा-प्रस्ताव’ जैसे पारिभाषिक शब्दों का उपयोग होता था। बुद्ध-कालीन राजनीतिक व्यवस्था के इतिहास में वज्जि, लिच्छवि, मल्ल, शाक्य और मौर्य तथा अन्य गणराज्यों के प्रमाण मौजूद हैं। लिच्छवि सभा का अधिवेशन जिस भवन में होता था, वह ‘संस्थागार’ कहलाता था। इतिहासकारों का अनुमान है कि, उस संस्था में, सभी निर्णय जनता के नाम पर लिए जाते थे। दक्षिण भारत में भी, लोकतान्त्रिक मूल्यों पर आधारित शासन व्यवस्था के, प्राचीन उदाहरण मिलते हैं। आरंभ से ही, जन-जातीय व्यवस्थाएँ भी लोकतान्त्रिक मूल्यों पर आधारित रही हैं। लोकतन्त्र की प्राचीनतम परंपरा वाले, विश्व के सबसे बड़े लोकतन्त्र में, सांसद होने के नाते, आप सबकी ज़िम्मेदारी, और भी बढ़ जाती है।
  7. यह सेंट्रल हॉल, हमारी संसद के गौरवशाली इतिहास के केंद्र में रहा है। यह हॉल हमारे संविधान के निर्माण का साक्षी है। यहाँ संविधान सभा की ग्यारह सत्रों की बैठकें हुईं, जो कुल मिलाकर एक सौ पैंसठ दिन चलीं। 14-15 अगस्त, 1947 की मध्य-रात्रि के समय, इसी सेंट्रल हॉल में, संविधान सभा को पूर्ण प्रभुसत्ता प्राप्त हो गई थी। और जैसा कि हम सभी जानते हैं, 26 नवंबर, 1949 को इसी सेंट्रल हॉल में ‘भारत का संविधान’ अंगीकृत किया गया था। इस सेंट्रल हॉल में त्याग और सदाचरण के उच्चतम आदर्श प्रस्तुत करने वाली अनेक विभूतियाँ उपस्थित रही हैं। और इसी हॉल में, उन्होने न्याय, समानता, गरिमा और बंधुता के सर्वोच्च आदर्शों को समाहित करने वाले हमारे संविधान की रचना की है। इस प्रकार, यहाँ सेंट्रल हॉल में उपस्थित सांसदों के समक्ष, एक महान परंपरा को आगे ले जाने की ज़िम्मेदारी है।
  8. संविधान सभा में, बाबासाहेब आंबेडकर ने, 25 नवंबर, 1949 को, जो भाषण दिया था, वह आज भी, संसदीय दायित्वों को निभाने में, हम सबको, स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होने कहा था कि अब हमारे पास विरोध व्यक्त करने के संवैधानिक तरीके उपलब्ध हैं, अतः संविधान विरोधी ‘Grammar of Anarchy’ से बचना जरूरी है। उन्होने कहा था कि मात्र राजनैतिक लोकतन्त्र से संतुष्ट होना अनुचित होगा। सामाजिक लोकतन्त्र की स्थापना भी करनी होगी। बाबासाहेब की इच्छा थी कि ‘जनता के लिए सरकार’ चलाने के रास्ते में जो भी अड़चनें पैदा हों, उनका खात्मा करने के अभियान में, जरा भी कमजोरी नहीं आनी चाहिए। स्वतन्त्रता, समता, और भाई-चारा को वे एक दूसरे पर निर्भर मानते थे। उनकी दृढ़ मान्यता थी, कि इन तीनों में किसी एक के अभाव में बाकी दोनों अर्थहीन हो जाते हैं।
  9. संसद परिसर में, अनेक स्थानों पर, हमारी विरासत को व्यक्त करने वाले आदर्श अंकित हैं। इस सेंट्रल हॉल के प्रवेश द्वार के पास ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का महान संदेश लिखा हुआ है। लोकसभा की भीतरी लॉबी के प्रवेश द्वार पर जो श्लोक लिखा हुआ है उसका अर्थ है, “जो भी इस सभा के सभासद हैं, उन्हे ऊर्जा और स्फूर्ति प्राप्त हो, और वे संयम से परिपूर्ण हों”।
  10. संसद में निर्वाचन के पश्चात, आप सब जो पहला कार्य करते हैं, वह होता है, शपथ लेना। वह शपथ पूरे कार्यकाल के लिए प्रभावी होती है। अपनी शपथ या प्रतिज्ञा को हर हाल में निभाना, हमारी भारतीय परंपरा है। संविधान ही हम सबके लिए ‘गीता’ है, ‘कुरान’ है, ‘बाइबल’ है, ‘गुरुग्रन्थ साहब’ है। हम सभी भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा, तथा अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करने के लिए प्रतिज्ञाबद्ध हैं।
  11. आप सभी सांसदगण, करोड़ों देशवासियों की आशाओं और आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी हैं। यह एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। देश की जनता, विशेषकर गरीब जनता, अपने प्रतिनिधियों की ओर बहुत उम्मीद से देखती है। गरीब और वंचित लोग यह आस लगाए रखते हैं कि उनके सांसद, उनके तथा उनके बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने का हर संभव प्रयास करेंगे। इसलिए, सामान्य जनता यह देखना चाहती है कि, उसके प्रतिनिधि, सदैव उसके कल्याण में कार्यरत रहें। जनता यह भी अपेक्षा करती है कि संसद में उनकी कठिनाइयों के समाधान तथा देश के विकास पर चर्चा हो। उनकी आशाओं पर खरा उतरना ही हमारी संसदीय व्यवस्था की सफलता की कसौटी है। जन-मानस की अपेक्षाओं के अनुरूप आचरण करने में ही, संसदीय लोकतन्त्र की मर्यादा है।
  12. संसद की कार्यवाही के दौरान, कई सांसदों द्वारा विषयों की तैयारी, प्रस्तुति और गंभीरता ने मुझे प्रभावित किया है। इसे और व्यापक बनाना चाहिए। मुझे खुशी है कि पिछले कुछ वर्षों में सांसदों को उनके उत्तरदायित्वों के सफलतापूर्वक निर्वहन में सहायता प्रदान करने के लिए, कई कदम उठाए गए हैं। अब शोध कार्य के लिए ‘स्पीकर्स रिसर्च इनिशिएटिव’ के जरिए उन्हे बेहतर सहायता उपलब्ध है। इसके लिए, मैं लोक सभा अध्यक्ष को बधाई देता हूँ।
  13. मुझे जानकारी मिली है, कि कुछ राज्यों में विधायकों के लिए ऐसे पुरस्कार स्थापित किए गए हैं। मेरा सुझाव है, कि सभी राज्यों में भी ‘स्टेट असेम्बलीज़’ द्वारा सर्वोत्तम विधायकों के लिए पुरस्कार स्थापित किए जाएँ। आशा है कि लोक सभा अध्यक्ष इस बारे में पहल करेंगी।
  14. मैं उम्मीद करता हूँ कि, आज के ‘उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार’, हमारे अन्य सांसदों को, उच्च-कोटि का योगदान देने की दिशा में प्रेरित करेंगे। मुझे विश्वास है कि सभी सांसद, जनता की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने, तथा भारत को विश्व के सर्वश्रेष्ठ लोकतन्त्र के रूप में प्रतिष्ठित करने की दिशा में, सफलतापूर्वक, अनवरत प्रयास करते रहेंगे।
                             
धन्यवाद
जय हिन्द !

ज़मीन से जुड़े नेता थे पूर्व राज्यपाल भीष्म नारायण सिंह

 निधन पर शोक
रांची। झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा. अजय कुमार ने पूर्व राज्यपाल भीष्म नारायण सिंह के निधन पर गहरी शोक संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि उनके निधन से कांग्रेस परिवार मर्माहत है। उन्होंने कहा कि भीष्म नारायण सिंह जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति थे तथा संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर रहकर कार्य किए। उनके निधन से देश एवं झारखण्ड की अपूरणीय क्षति हुई है।
स्व. भीष्म नारायण सिंह
भीष्म नारायण सिंह का जन्म 13 जुलाई 1933 को गुलाबझरी गांव, हुसैनबाद, पलामू में हुआ था। वे बचपन से हीं लिखने-पढ़ने के शौकीन थे। गांव में मिडिल स्कूल तक की शिक्षा प्राप्त हुसैनाबाद एवं सासाराम से मैट्रिक की शिक्षा प्राप्त की तथा उच्च शिक्षा बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय से प्राप्त की। उन्होंने अरबनाईजेशन आॅफ इंडिया नामक पुस्तक भी लिखी थी। भीष्म नारायण सिंह अपने राजनैतिक जीवन में 1980 में इन्दिरा गाॅंधी के प्रधानमंत्रीत्वकाल में केन्द्रीय मंत्री रहे। 1983 में केन्द्रीय मंत्री रहकर देश की सेवा की। 1984 में असम एवं मेघालय के राज्यपाल का पदभार संभाला तथा 1991 में तमिलनाडु के राज्यपाल का कार्यभार संभाला।
शोक संवेदना प्रकट करने वालों में कांग्रेस विधायक दल के नेता सर्वश्री आलमगीर आलम, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, सुखदेव भगत, मनोज यादव, डा. इरफान अंसारी, बादल पत्रलेख, देवेन्द्र सिंह बिट्टू जोनल कोआर्डिनेटर केशव महतो कमलेश, अशोक चैधरी, रमा खलखो, भीम कुमार, सुल्तान अहमद, अनादि ब्रह्म, प्रदीप तुलस्यान, डा0 जयप्रकाश गुप्ता, मीडिया प्रभारी राजेश ठाकुर, प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद, लाल किशोरनाथ शाहदेव, शमशेर आलम, संजय लाल पासवान, कुमार राजा, डा. राजेश गुप्ता, रवीन्द्र सिंह, आभा सिन्हा, अभिलाष साहू,एम. तौसिफ, डा. विनोद सिंह, संजय पाण्डेंय, सुरेश बैठा, तपेश्वर नाथ मिश्रा, जगदीश साहू, निरंजन पासवान, सलीम खान, प्रभात कुमार, अरूण श्रीवास्तव, अजय सिंह आदि शामिल हैं।

राजभाषा का अधिक से अधिक प्रयोग का आह्वान




नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति(बैंक) की 20 वीं बैठक 

रांची। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) ,रांची की छमाही बैठक   होटल चाणक्य बीएनआर में हुई। इसका संयोजन इलाहाबाद बैंक ने किया। बैठक का शुभारंभ नराकास के अध्यक्ष एसबी जेना, सहायक निदेशक निर्मल कुमार दुबे, आरबीआई के महाप्रबंधक संजीव दयाल, नाबार्ड के जीएम जेसी महंत, बैंक ऑफ इंडिया के जीएम चंद्रशेखर सहाय और यूनियन बैंक के जीएम अतुल कुमार ने संयुक्त रूप से किया। बैठक मे श्री जेना ने कहा कि नराकास के सभी सदस्य राजभाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करें। इस दिशा मे सदस्य बैंकों की भूमिका सराहनीय है।
अखिल भारतीय स्तर पर नराकास, रांची की स्थिति बेहतर है। उन्होंने सदस्य बैंकों से भविष्य मे भी सहयोग की अपेक्षा की। इस अवसर पर समिति की पत्रिका स्पंदन के सातवें अंक का विमोचन किया गया। समिति की वेबसाइट लान्च की गई। विभिन्न बैंकों से प्राप्त छमाही रिपोर्ट की भी समीक्षा की गई। राजभाषा हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए राज्य स्तरीय निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित करने का निर्णय लिया गया। बैठक मे इलाहाबाद बैंक के उप महाप्रबंधक मुकेश चंद्र गौड़ ने स्वागत भाषण दिया। आरबीआई के महाप्रबंधक संजीव दयाल ने हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाने पर बल दिया। वहीं नाबार्ड के जीएम जेसी महंत ने हिंदी के विस्तृत प्रयोग के लिए संयुक्त प्रयास करने की बात कही। बैठक मे कई बैंकों के प्रतिनिधि व राजभाषा अधिकारी उपस्थित थे।  धन्यवाद ज्ञापन भारतीय स्टेट बैंक के सहायक महाप्रबंधक सुरेश कुमार ने किया।बैठक का संचालन इलाहाबाद बैंक के राजभाषा अधिकारी रवि कुमार केसरी ने किया।

नोएडा में रांची के छात्रों का एनुमिनाई मीट आयोजित

रांची के बिशप वेस्टकोट बॉयज और बिशप वेस्टकोट गर्ल्स स्कूल के पूर्व स्टूडेंट के दूसरा एलुमिनाई का आयोजन नोएडा में हुआ I 'EWA 2018 ' का आयोजन रविवार को किया गया , जिसमे स्कूल से पढाई कर चुके आईटी प्रोफेशनल्स , डॉक्टर्स , इंजीनियर्स ,अकेडमिशियंस , जर्नलिस्ट और बैंकिंग प्रोफेशनल्स ने स्कूल से जुड़े अनुभवों को साझा किया।
EWA प्रेजिडेंट गौतम कुमार ने आयोजन की जानकारी देते हुए कहा , ' दोनों स्कूल से पढ़ चुके करीब 100 लोग के इस आयोजन में शामिल हुए I सभी लोग एक साथ मिले और शानदार शाम गुजारी , यह शाम काफी  शानदार रही इस दौरान दोनों स्कूल के पूर्व विद्यार्थियों से एक ही जगह मुलाकात हुई , हमें अपने वेस्टकोट स्कूल पर और उसका विद्यार्थी होने पर गर्व हैं I अल्लुमिनी मीट में समन्वय बहुत अच्छा रहा I  ' वही जॉइंट प्रेजिडेंट विनीता धनानी ने कहा , 'हम सभी ने स्कूल टाइम में गुजारे अपने दिनों को याद किया , यह स्कूल परिसर में बिताये गए हमारे समय को फिर से जीने का मौका था I '
रांची के डॉक्टर सतीश मिधा की अगुवाई में EWA एलुमिनाई की शुरुआत 2006 में हुई थी I  संघ रांची और आसपास के छेत्र में सामाजिक कल्याण का कार्य करता हैं I  दिल्ली आयोजन समिति के चीफ मनोज सिंह ने कहा , ' इस मीटिंग का एक सफल आयोजन हो गया I यह यादगार शाम थी , जिसमे सभी सीनियर्स , जूनियर्स से मुलाकात हुई और स्कूली दिनों की शरारत को याद किया I ' EWA के सदस्यों  ने देश के बड़े शहरो में मीटिंग आयोजित कराने का फैसला किया है I  जॉइंट सेक्रेटरी कमलेश सिंह ने कहा कि अब अगले साल के आयोजन बेंगलरू और मुंबई में होंगे I 

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...