मध्यस्थता प्रकोष्ठ तैयार करेगा अभिभावक योजना : मेनका गांधी |
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नई दिल्ली। केन्द्र सरकार के महिला व बाल विकास मंत्रालय ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम (सीपीसीआर) 2005 में प्रद्त अधिकारों के आधार पर एनसीपीसीआर को एक मध्यस्थता प्रकोष्ठ गठन करने का निर्देश दिया है। विवाह विवाद में एक पक्ष दूसरे पक्ष को बिना बताए बच्चे को लेकर चले जाते हैं या भारत में विदेश से घरेलू हिंसा होती है या भारत से विदेश में घरेलू हिंसा की जाती है-ऐसे मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। यह प्रकोष्ठ बच्चे के सर्वोच्च हितों का ध्यान में रखते हुए फैसला लेगी और अभिभावक योजना तैयार करेगी। एनसीपीसीआर में मध्यस्थता प्रकोष्ठ की संरचना निम्न होगी-
महिला व बाल विकास मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर कहा है कि अभिभावक या माता-पिता एकीकृत नोडल एजेंसी में आवेदन कर सकते हैं। बच्चे या बच्चे के संरक्षक को भी प्रस्तुत किया जा सकता है। आईएनए का गठन एनआरआई विवादों का समाधान करने के लिए किया गया है। इस प्रकार आईएनए की कार्यसीमा में विस्तार हुआ है। प्रकिया के तहत आईएनए मामले की अनुशंसा एनसीपीसीआर को करेगी जो दोनों पक्षों के सभी मामलों पर मध्यस्थता करेगी। वीडियो काफ्रेंसिंग के जरिए भी प्रतिनिधित्व करने की स्वीकृति दी गयी है। मध्यस्थता प्रकोष्ठ बच्चे के हितों को ध्यान में रखते हुए अभिभावक योजना बनाएगा और अपनी रिपोर्ट आईएनए को सौंपेगा। आईएनए आदेश जारी करेगा। आईएनए के आदेश को न्यायालय की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं माना जाएगा। केन्द्रीय महिला व बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य स्थिति का संपूर्ण आंकलन करना है और बच्चे के सर्वोच्च हितों को ध्यान में रखते हुए अभिभावक योजना तैयार करना है। मंत्री महोदया ने कहा कि एनसीपीसीआर के द्वारा की जाने वाली मध्यस्थता से अधिकांश विवादों का समाधान हो जाएगा। यह बच्चे और दोनों पक्षों के लिए राहत की बात होगी। |
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बुधवार, 1 अगस्त 2018
एनआरआई विवाह विवाद में बच्चे की अभिरक्षा मामलों में ‘मध्यस्थता प्रकोष्ठ’ का होगा गठन
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