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गुरुवार, 2 अगस्त 2018

होटवार जेल में राष्ट्रवाद और प्रकृति प्रेम का संचार



रांची। तिरंगा यात्रा के जरिए शुरू हुआ राष्ट्रवाद और देशप्रेम के संचार का अभियान अपने अगले चरण में प्रकृति के साथ सामंजस्य के दौर तक पहुंच गया है। तिरंगा के साथ वृक्षारोपण को जोड़कर देश के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति निष्ठा का संदेश दिया जा रहा है। यह संदेश दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से होता हुआ होटवार जेल के बंदियों तक भी पहुंच चुका है। सी क्रम में अभियान के मुख्य संयोजक सुधांशु सुमन अपनी टीम के साथ होटवार जेल में  सैकड़ो कैदियों से मिले और उनके हाथ में तिरंगा झंडा देकर वृक्षारोपण कराया। 
"एक हाथ मे तिरंगा दूजे हाथ मे पौधा " के इस कार्यक्रम में होटवार जेल के अधीक्षक अशोक चौधरी, जेलर सुमन जी , दिनेश झा ने पूरा सहयोग किया और कैदियों को इस कार्यक्रम में शामिल होने को प्रेरित किया। इससे होटवार जेल में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। तिरंगा सम्मान यात्रा के सूत्रधार समाजसेवी सुधांशु सुमन  व रांची एक्सप्रेस के टीम प्रमुख पवन कुमार सिन्हा ने इस कार्यक्रम को बेहद सफल बताया और जेल प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया। विभिन्न मामलों में बंद सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों ने कार्यक्रम के आयोजकों के प्रति हर्ष जाहिर करते हुए इस तरह के कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन की जरूरत बताई।

बुधवार, 1 अगस्त 2018

राजनीति के एक सशक्त स्तंभ थे भीष्म नारायण सिंह : सुबोधकांत सहाय


 रांची।  पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने भारतीय राजनीति में सक्रिय राजनेता व पूर्व राज्यपाल भीष्म नारायण सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया है। शोक संवेदना में श्री सहाय ने कहा कि स्व.सिंह भारतीय राजनीति के एक सशक्त स्तंभ थे। पलामू के धरती पुत्र और कर्मयोगी पुरुष भीष्म नारायण सिंह राजनीति के अलावा आजीवन कई सामाजिक सगठनों से भी जुड़े रहे।
राजनीति के इस पुरोधा के गुजर जाने से राष्ट्रीय राजनीतिक फलक पर शून्यता आ गई है। इसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है। राजनीति के साथ साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहना स्व.सिंह की खासियत थी। पलामू प्रमंडल के लाडले लाल के निधन से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है।

रांची एक्सप्रेस ग्राम सेवा फाउंडेशन का "एक हाथ में तिरंगा, दूजे हाथ में पौधा" अभियान


 राजद सांसद जेपीएन यादव को तिरंगा और पौधा देकर किया सम्मानित.
रांची। सामाजिक संस्था रांची एक्सप्रेस ग्राम सेवा फाउंडेशन राष्ट्र प्रेम का अलख जगाते हुए पर्यावरण संरक्षण की मुहिम भी चला रहा है। संस्था की ओर से "एक हाथ में तिरंगा और दूसरे हाथ में पौधा" अभियान के तहत निरंतर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जय जवान और जय किसान के नारे बुलंद करते हुए लोगों को देश प्रेम और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस क्रम में संस्था के संरक्षक व कार्यक्रम संयोजक प्रख्यात समाजसेवी सुधांशु सुमन ने लोकसभा सांसद (राजद) और झारखंड राजद के प्रभारी जयप्रकाश नारायण यादव को गत दिनों राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और एक पौधा देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर श्री सुमन ने कहा कि देशप्रेम सर्वोपरि है। इसके साथ ही मानव व अन्य जीवों के अस्तित्व के लिए पर्यावरण संरक्षण भी आवश्यक है। पेंड़-पौधों के संरक्षण से हमारा जीवन सुरक्षित रहेगा। सांसद श्री यादव ने फाउंडेशन के मिशन की सराहना करते हुए सुधांशु सुमन को बधाई दी। साथ ही समाजसेवा और देशसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित किया। मौके पर फाउंडेशन के अन्य सदस्यगण मौजूद थे।

दही-हांडी प्रतियोगिता स्थगित, जन्माष्मी पर होगा राधाकृष्ण मंदिर का शिलान्यास


रांची।  शिव मंदिर धुर्वा में श्रीकृष्ण विकास परिषद की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता परिषद के मुख्य संरक्षक सह प्रदेश राजद के महासचिव कैलाश यादव ने किया।
मुख्य तौर पर बैठक में चर्चा के दरम्यान सभी सदस्यों ने कहा कि श्रीकृष्ण विकास परिषद यादव समाज की ओर से होने वाली प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष 2 सितम्बर18 को जन्मष्टमी त्योहार, दही-हांडी प्रतियोगिता एवं रंगा-रंग सांस्कृतिक कार्यक्रम को स्थगित कर दिया जाय। क्योंकि विगत 15 दिनों के अंदर यादव समाज के जुझारू एवं सम्मानित वरिष्ठ तीन सदस्यों के आसमयिक निधन हो जाने के कारण समाज गमगीन माहौल में है।
  परिषद के मुख्य संरक्षक कैलाश यादव ने बताया कि तीनो लोगों में मुख्यतः श्रीकृष्ण विकास परिषद के अध्यक सुरेश राय के पिताजी टिपन राय, तुलसी राय एवं लालकेश्वर राय जैसे लोगो की 15 दिनों के अंदर आसमयिक निधन समाज के लिये एक अपूर्णीय क्षति हुई है। ऐसे हालात परिषद की ओर से उत्साहित जन्मष्टमी त्योहार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम करना सामाजिक दृष्टिकोण से कतई उचित नहीं है।
     आज की बैठक में श्रीकृष्ण विकास परिषद के महत्वपूर्ण साथियों ने यह निर्णय लिया कि आगामी 2 सितम्बर18 को पूर्व घोषित धुर्वा में राधा-कृष्ण मंदिर का आधारशिला रखा जाएगा।
    इस अवसर पर शहर के अनेक कोने से कई गणमान्य लोगो सहित हजारों लोगों को परिषद की ओर से बुलाया जायेगा।
राधा-कृष्ण मंदिर की तैयारियों को लेकर अगली महत्वपूर्ण बैठक 19 अगस्त 18 को धुर्वा नर्सरी पार्क में रखी गई है,जिसमे तैयारी कमिटी की घोषणा की जायेगी।
आज की बैठक में मुख्य रूप से परिषद के अध्यक्ष सुरेश राय, सचिव रामकुमार यादव, राजकिशोर सिंह,ओमप्रकाश यादव,दिनेश यादव, रविन्द्र यादव, बीरेन्द्र यादव,मैनेजर राय, रामनिवास राय,मोहन चौधरी, रमेश यादव,बिनोद यादव,सुदेश कुमार,अखिलेश सिंह,काशी चौधरी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

अग्रवाल सभा, महिला समिति का सावन मेला शुरू

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी : डॉ. लुईस मरांडी

रांची। अग्रवाल सभा महिला समिति के तत्वावधान में सावन मेले का शुभारम्भ गणेश वंदना के साथ अपर बाजार स्थित अग्रेसन भवन में किया गया। इस मेले का मुख्य अतिथि सूबे के मंत्री डॉ लुईस मरांडी, विशिष्ट अतिथि संजय सेठ, धनबाद मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल थे।

सभा द्वारा यह 20वां मेला है। मेले का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अंदर छिपी प्रतिभा को निखारना और उनके हाथों से बनी कलात्मक वस्तुओं को एक मंच प्रदान करना है। ताकि वे अपनी प्रतिभा का खुलकर प्रदर्शन कर सकें।

मेले में उपस्थित मुख्य अतिथि सूबे के मंत्री डॉ लुईस मरांडी ने कहा की अग्रवाल सभा महिला समिति बहुत अच्छा काम कर रही है, जो की सराहनीय है। मेले में लगे स्टॉलों का भ्रमण कर आनंद लिया और कहा कि मेला काफी लुभावना है। मुझे यहां आकर काफी अच्छा लगा। महिलाएं आगे बढ़ रही हैं , यह राज्य के लिए अच्छी बात है, उन्होंने कहा कि मैंने महिला समिति से आग्रह भी किया है कि समिति नीचे स्तर के लोगों को भी सीखने-सिखाने का जिम्मा ले तो आने वाले समय में महिलाओं को छोटे-छोटे उद्योग लगाने में सरकार भी मदद करेगी।


विशिष्ठ अतिथि धनबाद मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने कहा की आज के दौर में महिलायें कमजोर नही है और न किसी से कम हैं। महिलायें गाड़ी के दो पहिये के सामान हैं वे लोगों से कंधे   से कन्धा मिलाकर चले तो वो किसी के कम नहीं होगी। अब की महिलायें किसी के ऊपर निर्भर नही होती है।

वहीं संजय सेठ ने कहा की आज की महिलायें हर क्षेत्र में आगे है समाज के बिच महिलाएं अपनी खुद की पहचान बनाई है उन्होंने कहा की महिलायें शहर के अलावे गांव में भी काम कर रही है। और कई महिलाओं को साथ में आगे बढ़ा रही है। महिलायें के द्वारा बनाई गई वस्तुओं को सिर्फ बाजार देने की जरुरत है।

मेले की संजोजिका नीरा बथवाल ने कहा की जब हमलोगों ने 20 साल पहले जब ये मेले की शुरुवात की थी उस समय बहुत परेशानियां आई थी और हमारे टीम में मात्र 20 महिलाएं थी लेकिन अब हमारे पास 120 महिलाएं साथ है। ये महिला सशक्तिकरण का एक उदाहरण है।

मौके पर मेले की सदस्य रूपा अग्रवाल, अलका सरावगी, अंशु नेवटिया, बिना बूबना, गीता डालमिया, मधु रोहतगी, रीना सुरेखा, बबीता, मंजू लोहिया, मंजू केडिया, नैना मोर, पूर्व अध्यक्ष पवन पोद्दार, महामन्त्री कौशल राजगढ़िया, विनोद जैन, मीडिया प्रभारी अन्नू पोद्दार, रेखा अग्रवाल, सरिता अग्रवाल, लिपिका गारोड़िया, प्रीति पोद्दार के अलावे दर्जनों सदस्य मौजूद थे।

रांची में "बारबीक्यु नेशन" के प्रथम आउटलेट का शुभारंभ


 खाने की मेज पर मनपसंद लजीज व्यंजनों का लुत्फ 

रांची । भोजन रेस्टोरेंट श्रृंखला में देश के अव्वल ब्रांड " बारबीक्यु नेशन" ने राजधानी रांची में अपने प्रथम आउटलेट का शुभारंभ किया।  बुधवार को इसका उद्घघाटन  पद्मश्री मुकुंद नायक, नागपुरी अभिनेत्री वर्षा ऋतु और भारतीय महिला हाकी टीम की पूर्व कप्तान असुंता लकड़ा ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर बारबीक्यु नेशन हास्पिटलिटी लिमिटेड के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक सुमन मुखर्जी ने पत्रकारों को बताया कि यह आउटलेट भारत का 109 वां और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 113 वां आउटलेट है। बारबीक्यु नेशन ऑन द टेबल ग्रिल भोजन ब्रांड है। यहां शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजन उपलब्ध होंगे। भोजन करने का एक खास अंदाज इस रेस्टोरेंट में पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि झारखंड के अन्य प्रमुख शहरों मे भी बारबीक्यु नेशन की शाखाएं खोलने की योजना है। इस अवसर पर आशुतोष द्विवेदी,राजीव रंजन,अभिषेक चौहान,विजय प्रभाकर,राजू रंजन,सावन कुमार सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

नोटबंदी के बाद अब वोटबंदी



असम में एनआरसी के जरिए 40 लाख लोगों की नागरिकता पर संशय की तलवार लटका दी गई है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह दलील दे रहे हैं कि जिनके नाम छूट गए हैं वे दुबारा सके लिए आवेदन दे सकते हैं। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। सरकार सके जरिए बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर रही है और उनकी नागरिकता रद्द करने का प्रयास कर रही है। असम के लोगों की यह पुरानी मांग रही है। इसके लिए आंदोलन भी हो चुका है।
लेकिन इसकी प्रक्रिया ठीक आम चुनावों के पहले की गई इसके पीछे कारण पूरी तरह राजनीतिक है। मोदी सरकार अपने चुनावी वायदे पूरी नहीं कर पाई। बल्कि तरह-तरह के नियमों और प्रयोगों के जरिए लोगों को परेशानी में डालती रही। अर्थ व्यवस्था को इस कदर झकझोर दिया कि आमलोगों का जीना दूभर हो गया। कई परिवारों ने आर्थिक तंगी के कारण सामूहिक आत्महत्या कर ली। पूंजीपति वर्ग भले ही लाभान्वित हुआ लेकिन मध्यम वर्ग त्राहि-त्राहि कर उठा। इस वर्ग की नाराजगी दूर करने के लिए भावनात्मक झटके की जरूरत थी। उसी रणनीति के तहत सांप्रदायिकता की लहर पैदा करने की कोशिश की जा रही है। मोदी सरकार के नीतिकार जानते हैं कि अब मंदिर मुद्दा बहुत असर नहीं डाल सकेगा। इसलिए ध्रुवीकरण के लिए नए नए तकीके जमाए जा रहे हैं। अब मोदी सरकार के पास चुनाव के लिए इसके अलावा कोई मुद्दा नहीं बचा है। इसीलिए वह तरह-तरह के दांव खेल रही है। एनआरसी का काम अगर सरकार गठन के तत्काल बाद कराया जाता तो नागरिकता से खारिज किए गे लोगों को अपना नाम जुड़वाने और मतदान करने का मौका मिलता। अब नाम जुड़वाने का मौका तो दिया जा रहा है लेकिन इसकी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही चुनाव का समय आ जाएगा और यह जो 40 लाख वोट विपक्ष के खाते में जाने वाले थे बर्बाद हो जाएंगे। दूसरी बात यह कि इससे पूरे देश में हिन्दुत्व की भावना प्रखर होगी और ध्रुवीकरण को बल मिलेगा। सरकार के कमान में यही एक तीर बचा है। जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से समर्थन वापस लेने से लेकर असम में एनआरसी तक उसी लक्ष्य को भेजने के लिए चलाए गए तीर हैं। 2016 में नोटबंदी का भी मुख्य लक्ष्य विपक्षी दलों की आर्थिक रूप से कमर तोड़ना था और अब नोटबंदी के बाद वोटबंदी की प्रक्रिया शुरू की गई है। जो 40 लाख लोग नागरिकता की परिधि से फिलहाल बाहर किए गए हैं वे मुसलमान हैं और भाजपा के वोटर नहीं हैं। उनमें से कौन नए सीमांकन के बाद आए और कौन इससे पहले साबित करना कठिन है। 1971 से पूर्व आए बहुत से लोगों के पास कोई दस्तावेज़ नहीं है। हालांकि आसू ने 1971 को डेडलाइन रखने की मांग की है। सरकार इसके लिए राजी है लेकिन वह चाहती है कि बांग्लादेश से जो हिन्दू असम आए हैं उनका नाम रजिस्टर में शामिल किया जाए। आसू असम की ताकतवर राजनीतिक पार्टी है। वह सरकार की इस दलील को शायद ही स्वीकार करे लेकिन एक तो इस विवाद के कारण एनआरसी की प्रक्रिया लंबे समय तक विवाद में रहेगी। इस बीच चुनाव निकल जाएगा। हिन्दुओं के अंदर यह संदेश तो जाएगा ही कि मोदी सरकार बांग्लादेशी हिन्दुओं को नागरिकता देना चाहती  है लेकिन विरोध के कारण नहीं दे पा रही है।
यह सच है कि विपक्षी गठबंधन भी बांटो और राज करो की नीति पर ही चलेगा। भाजपा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का सहारा लेगी तो विपक्ष जातिवाद को बढ़ावा देकर ही चुनावी मैदान में उतरेगा। मुसलिम और दूसरे अल्पसंख्यक समूहों का समर्थन उसे बिन मांगे मिल जाएगा। बाकी जातीय समीकरण के आधार पर खाते में वोट जाएगा। विपक्ष के नेता असम प्रकरण को लेकर जितना शोर मचाएंगे भाजपा को उतना ही लाभ होगा क्योंकि हिन्दुओं में विपक्ष के मुसलिम प्रेम की प्रतिक्रिया होगी और जातीय भावना के ऊपर धार्मिक भावना हावी हो जाएगी। बहरहाल स्पष्ट है कि चुनाव में कल-बल-छल का पूरा इस्तेमाल होगा। इसकी शुरुआत हो चुकी है। नोटबंदी ने जितना तनाव उत्पन्न किया वोटबंदी ससे कहीं ज्यादा तनाव त्पन्न करेगी।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...