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बुधवार, 22 अगस्त 2018

कार्यकर्ता ही संगठन की रीढ़ः सुबोधकांत

कांग्रेस कार्यकर्ताओं को किया संबोधित

रांची। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि कार्यकर्ता संगठन की रीढ़ हैं। संगठन को सशक्त बनाने और जनाधार बढ़ाने मे कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। श्री सहाय बुधवार को राहे प्रखंड के सताकी पंचायत में कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार हो जाने की जरुरत है। कांग्रेस की नीतियों को जन जन तक पहुंचाने पर बल दिया। इसके बाद श्री सहाय राहे पंचायत के डोकाद, गोंदा मोड़, रंगामाटी स्कूल, बसंतपुर व बसिया मे भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस अवसर पर अश्विन मेहता, दिनेश साहू, सुरेश बैठा, अजय साहु, तारकेश्वर, प्रदीप गोस्वामी, रसेस्वर सिंह, प्रफुल्ल महतो, कंचन सिंह मुंडा, फरेन्द महतो, शंकर स्वासी सहित अन्य शामिल थे।

केरल की तबाही से सबक ले मानव समाज



-देवेंद्र गौतम

केरल में बाढ़ को प्राकृतिक आपदा घोषित किया जा चुका है। इसकी विभीषिका फिलहाल नियंत्रण में है। बाढ़पीड़ितों की मदद के लिए देश के तमाम राज्य ही नहीं विश्व समुदाय ने भी अपने हाथ बढ़ाए हैं। लेकिन केरल के हालात कब फिर रौद्र रूप धारण कर लेगा कहना कठिन है। प्रकृति की विनाशलीला धीरे-धीरे रौद्र रूप धारण करती जा रही है। केरल में बाढ़ की तबाही ने खंड प्रलय का दृश्य उत्पन्न कर दिया है। यह प्राकृतिक आपदा और राष्ट्रीय शोक का समय है। साथ ही सबक सीखने का अवसर भी। अगर इसके कारणों की पड़ताल कर उनका निराकरण नहीं किया गया तो आनेवाले समय में इस आपदा का विस्तार हो सकता है और सका और भी विकराल रूप उत्पन्न हो सकता है। फिलहाल औसत से 37 फीसद अधिक बारिश के पानी के साथ केरल की 41 नदियों और 80 बांधों का पानी 13 जिलों को अपने आगोश में ले चुका है। 300 से अधिक लोग काल कवलित और 3 लाख से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं। 2000 से अधिक अस्थाई राहत शिविरों में लोगों को शरण लेनी पड़ी है। बिजली आपूर्ति, संचार व्यवस्था, सड़क परिवहन, रेल सेवा बाधित है। एयरोड्राम डूबे हुए हैं। हवाई सेवा भी अवरुद्ध है। हजारों घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। 40 हजार हेक्टेयर में लगी फसलें नष्ट हो चुकी हैं। 134 पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त हैं। 90 हजार किलोमीटर सड़कें बर्बाद हो चुकी हैं। अभी तक 21 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। न सिर्फ भारत के तमाम राज्य बल्कि पूरा विश्व चिंतित है। पिछले एक सौ साल का रिकार्ड टूट चुका है। आर्थिक मदद तथा राहत कार्य में योगदान के लिए कई राज्य सरकारें और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देश आगे आए हैं।
इस वर्ष का मानसून केरल ही नहीं देश के कई हिस्सों के लिए भारी पड़ा है। झारखंड, बिहार सहित अन्य राज्यों में ठनके की चपेट में आकर सैकड़ों लोग अपने प्राण गंवां चुके हैं। हजारों लोग जख्मी हो चुके हैं। गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मानसून में देश के विभिन्न हिस्सों में 930 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। मानसून में ऐसी घटनाएं पहले भी होती थीं लेकिन प्रकोप का आकार और नुकसान की मात्रा निरंतर बढ़ती ही जा रही है। हम विकास में तेजी लाने के चक्कर में विनाश को निमंत्रण देते जा रहे हैं।
केरल में इस स्थिति के उत्पन्न होने के कई तात्कालिक और पूर्ववर्ती कारण बताए जा रहे हैं। भूतकाल में प्रकृति के साथ निरंतर की गई छेड़छाड़ और वर्तमान की लापरवाही इस तबाही के मूल में बताई जा रही है। इस वर्ष केरल में औसत से 37 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है और मौसम विभाग ने अभी और बारिश होने की भविष्यवाणी की है। पर्यावरण वैज्ञानिकों का मानना है कि वनों की बेतहासा कटाई और पर्वत श्रृंखलाओं की बर्बादी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। एक तो बारिश ज्यादा हुई दूसरे तमिल नाडू सहित पड़ोसी राज्यों और स्वयं केरल के बांधों का पानी छोड़ दिया गया है। तबाही को कुछ कम किया जा सकता था यदि जलाशयों की क्षमता से अधिक होने पर पहले ही उनका पानी छोड़ दिया गया होता। वह समुद्र में मिल जाते। बांधों के कपाट भी ऐन उसी समय खोले गए जब सारी नदियां उफनती हुई आबादी बहुल इलाकों की ओर बढ़ने लगीं। पर्यावरण वैज्ञानिक बहुत पहले से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से हम बाज नहीं आ रहे हैं। लेकिन पर्यावरण संरक्षण को हम गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उसे एक फैशन के तहत लिया जा रहा है। सरकारी स्तर पर भी और नागरिक जीवन के स्तर पर भी। हम अपनी तबाही को स्वयं निमंत्रण दे रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि तबाही उन जिलों में आई है जिन्हें पश्चिमी घाट के इकोलाजिकल सेंसेटिव जोन के अंतर्गत चिन्हित किया जा चुका है।
निश्चित रूप से आपदा के उपस्थित होने के बाद हमारी नींद टूटी है। राहत कार्य में तेजी लाने के प्रति सरकार भी सजग हो चुकी है और स्वयंसेवी संस्थाएं भी। भारतीय सेना की तीनों शाखाओं के अलावा केंद्र और राज्य सरकार की तमाम एजेंसियां स्थिति से निपटने में लगाई जा चुकी हैं। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के निर्देश पर नौसेना औक तटरक्षक बलों की 400 नावें राहत कार्य में लगी हुई हैं। वायुसेना के दक्षिणी कमांड ने बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए 22 हेलीकाप्टर और 6 छोटे विमान लगाए हैं। भारतीय सेना के कई अभियंताओं के साथ 700 से अधिक जवान बचाव कार्य में तैनात हैं। नेशनल डिजास्टर रेस्पांस फोर्स दो दर्जन से अधिक टीमें तैनात हैं। स्वास्थ्य आपदा विंग बाढ़ खत्म होने के बाद संभावित रोगों के प्रकोप से निपटने की तैयारी में लगा है। झारखंड सरकार ने 5 करोड़ जबकि महाराष्ट्र ने 20 करोड़ और बिहार, गुजरात, दिल्ली पंजाब, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों ने 10-10 करोड़ की सहायता की घोषणा की है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने 500 करोड़ की वित्तीय सहायता के अलावा मृतकों के परिजनों को 3 लाख और गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार की तत्काल मदद की घोषणा की है। गृह मंत्रालय भी 100 करोड़ की मदद दे रहा है। संयुक्त अरब अमीरात के प राष्ट्रपति ने बाढ़पीड़ितों की मदद के लिए एक कमेटी का गठन किया है।
यह तत्परता, यह चौकसी, यह सेवा भाव सराहनीय है लेकिन अगर यही भाव तबाही आने के पहले दिखाया गया होता तो इसका स्वरूप इतना विकराल नहीं होता। हाल के वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं में तेजी आई है। मौसमों का चक्र असंतुलित होता जा रहा है। कभी आंधी-तूफान का प्रकोप होता है तो कहीं बाढ़ कहीं सूखे की त्रासदी। इन सबके मूल में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का अभाव है। समस्या सिर्फ भारत की नहीं वैश्विक है। वैश्विक स्तर पर सकी पड़ताल भी की जाती रही है। पहलकदमियां भी ली जाती रही हैं लेकिन कुल मामला बड़े-बड़े सेमिनारों का आयोजन कर विचार-विमर्श तक सीमित रह जाता है। ऐसे अवसरों पर बड़े-बड़े संकल्प लिए जाते हैं। फिर मामला जहां का तहां रह जाता है। विकसित देश विकासशील देशों पर पर्यावरण संरक्षण के लिए दबाव डालते हैं तो विकासशील देश विकसित देशों को कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण विनाश के लिए दोषी मानते हैं। पहले की तुलना में जागरुकता बढ़ी जरूर है लेकिन इसपर नियंत्रण पाने के लिए जितनी आवश्यकता है उतनी नहीं।
केरल की तबाही से यदि सबक नहीं लिया गया और से रोकने के लिए आवश्यक उपाय नहीं किए गए तो आनेवाले समय में हमें इससे भी बड़ी आपदाओं का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।


मंगलवार, 21 अगस्त 2018

ग्रामीणों में राष्ट्रीयता की भावना जगाना तिरंगा यात्रा का मुख्य लक्ष्य : सुधांशु सुमन


* तिरंगा सम्मान यात्रा की टीम ने किया सुदूरवर्ती गांवों का दौरा

रांची। जिस गांव में वर्षों से विकास की किरणें नहीं पहुंची, जिस गांव की जनता बुनियादी सुविधाओं से वंचित है, उन गांवों का सर्वांगीण विकास मुख्य लक्ष्य है। ग्रामीणों के बीच राष्ट्रीयता की भावना जगाते हुए उनकी भावनाओं से अवगत होना और जनसमस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत रहना तिरंगा सम्मान यात्रा का उद्देश्य है। उक्त बातें  झारखंड के प्रख्यात समाजसेवी सुधांशु सुमन ने कही। श्री सुमन मंगलवार को चतरा प्रखण्ड के अंतर्गत गेंदरा और दुरगी गांव के दौरे के क्रम में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।उन्होंने कहा कि चतरा के अधिकतर गांवों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से लोग वंचित हैं। गांवों में जाने से महसूस हुआ कि प्राकृतिक गोद मे बसा गांव वर्षों से उपेक्षित है। सड़क के रूप में पगडंडी ही सहारा है। विकास  की किरणें गांवों तक पहुंचने में काले बादलों का धुंध नहीं छंटा है। गांवों के विकास पर ग्रहण का साया गहराया हुआ है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की ग्रामीण क्षेत्र के प्रति उदासीनता भी गांवों के विकास में बाधक रही है। टीम तिरंगा कमिटी का लक्ष्य है चतरा के हर गांव को तिरंगा मय करना और इसके माध्यम से गांवों में बुनियादी सुविधाओं को बहाल कराना। इसी क्रम में समाजसेवी सुधांशु सुमन के साथ टीम तिरंगा गेंदरा गांव के पहाड़ पर लोगो से मिले। वहां राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। जय जवान-जय किसान के नारों से गांवों की गलियां गुंजायमान रही। ग्रामीणों ने कुटिल के कालीकरण सड़क से गेंदरा होते दुरगी (लगभग 5 किमी) तक कालीकरण सड़क की मांग की। ग्रामीणों ने  बिजली ,पेयजल ,स्वास्थ और शिक्षा सुविधाएं मुहैया करने की मांग की। समाज सेवी सुधांशु सुमन ने ग्रामीणों से क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों के लिए  व विकास के लिये एक वर्ष के समय की मांग की और कहा कि राज्य व केंद्र सरकार को ग्रामीणों की दशा और सरकारी उपेक्षा की जानकारी देते हुए मांग पत्र सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि गांधीवादी तरीका अपनाकर संगठन ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत है। ।काम करवा सके।

समाजसेवा का अनूठा जुनून


* छह किलोमीटर पौधरोपण कर बनाया कीर्तिमान,
* ग्रामीणों की दशा व दिशा संवारने में जुटे हैं सुधांशु सुमन
* चतरा संसदीय क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के लिए जद्दोजहद।

रांची / चतरा  झारखंड के लोकप्रिय समाजसेवी और तिरंगा सम्मान यात्रा के संयोजक सुधांशु सुमन के सिर चढ़कर बोल रहा है समाजसेवा का जुनून। आत्मविश्वास से लबरेज उनके जोश और जज्बे की सराहना सूबे के उग्रवाद प्रभावित जिले चतरा के सभी प्रखंडों की जनता कर रही है। श्री सुमन अति नक्सल प्रभावित गांवों में जाकर ग्रामीणों की समस्याओं से रू-ब-रू हो रहे हैं। उनके इस प्रयास से बुनियादी सुविधाओं से वंचित गांव वासियों के बीच आशा की किरण प्रस्फुटित हुई है। ग्रामीणों के बीच राष्ट्र प्रेम का अलख जगाते हुए उनकी दुखती रगों पर राहत के मरहम लगाने में जुटे हैं। उनका मानना है कि विगत कई वर्षों से चतरा संसदीय क्षेत्र की जनता मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रही है। जिले के सुदूरवर्ती गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, चिकित्सा सेवा, शिक्षा आदि का घोर अभाव है। जिले के कई प्रखंडों को गांवों से जोड़ने वाली सड़क का अभाव है। लोग एक गांव से दूसरे गांव जाने के क्रम में जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को विवश हैं। उन्होंने गांव भ्रमण करने के बाद बताया कि चतरा प्रखण्ड के मसियातरी गांव,जो सुदूरवर्ती पिछड़ा और  नक्सल प्रभावित गांव है, जहां वर्षा और मानसून आधारित कृषि छोड़ कर  दूसरा कोई धंधा नही है। यहां बिजली ,स्वास्थ्य ,सड़क  का घोर अभाव है। आवागमन में यहां नदी बाधक है। जहां पर सदियों से पुल नहीं होने के कारण लोग नदी के पानी मे घुसकर आगे दूसरे गांव जीविका की तलाश में जाते हैं। स्कूली बच्चे नदी पार स्कूल आते- जाते हैं। श्री सुमन ने कुन्दा और चतरा प्रखंड को जोड़ने वाली नीलांजन नदी पर पुल बनाने की मांग सरकार से की है। कहा है कि नदी पर पुल बन जाने से  गरीब ग्रामीणों को बहुत राहत मिलेगी।

 * सड़क बनाओ, बिजली लाओ अभियान यात्रा का शुभारंभ।
* गली-गली में गूंज रहा जय जवान- जय किसान का नारा।

समाजसेवी सुधांशु सुमन ने चतरा के ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाली दूर करने के उद्देश्य को लेकर ग्रामीण इलाकों में एक नए अभियान " सड़क बनाओ,बिजली लाओ" का शुभारंभ किया है। इसके तहत सड़क, पुल- पुलिया से वंचित गांव के लोगों, किसानों, मजदूरों को साथ लेकर गांव से पंचायत और प्रखंड तक पदयात्रा कर रहे हैं। इस क्रम में श्री सुमन ने सोमवार को सिमरिया  प्रखण्ड के अति सुदुरवर्ती गांव  रेंगेनिया में पौधरोपण यात्रा निकाली। कई गांव होते हुए लगभग छह किलोमीटर  पदयात्रा की। इस बीच गांवों में पौधरोपण किया।पदयात्रा के दौरान जय जवान- जय किसान के नारों से इलाका गुंजायमान होता रहा। कई फलदार और औषधीय पौधे लगाए गए। पदयात्रा में काफी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
उन्होंने जबड़ा कालीकरण रोड से बिरहोर टोला होते हुए रेंगेनिया मंडप से लेकर बगरा मोड़ तक  कालीकरण सड़क के निर्माण की मांग की है। समाज सेवी सुधांशु सुमन का संकल्प है चतरा लोकसभा क्षेत्र के 2276 गांव ,345 पंचायत और 26 प्रखण्ड को बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का। इसके लिए वह मेहनत-मशक्कत व जद्दोजहद कर रहे हैं।

सोमवार, 20 अगस्त 2018

आगामी चुनाव के लिए कमर कसने की जरूरतः नुरूल होदा


रांची। युवा जदयू के राष्ट्रीय महासचिव, एवं बिहार युवा जदयू के प्रभारी मो. नुरुल होदा का झारखंड आगमन हुआ। उनके झारखंड प्रवास के दौरान पार्टी के प्रदेश कार्यालय में उनका स्वागत युवा जदयू के प्रदेश प्रवक्ता सागर कुमार एवं रांची महानगर अध्यक्ष अखिलेश रॉय के द्वारा माला पहनाकर किया गया। इस अवसर पर जदयू के वरिष्ठ उपाध्यक्ष  कृष्णानंद मिश्रा जी, प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता श्रवण कुमार , प्रदेश सचिव  रमेश सिंह, प्रदेश सचिव अर्जुन गिरी गोसाई एवं रांची महानगर अध्यक्ष संजय सहाय आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।
मो. नुरुल होदा ने कहा कि युवा जदयू के कार्यकर्ताओं को आगामी चुनाव हेतु कमर कसने की जरूरत है। युवा जदयू के संगठन को पंचायत एवं बूथ स्तर तक ले जाने की आवयश्कता है। उन्होंने कहा की युवा जदयू के सभी जिला प्रभारी अपने अपने जिला में जाकर जिलावार युवा जदयू के कार्यकर्ताओं का सम्मेलन करें एवं जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार जी के कार्यों के विषय मे जन-जन को जागरूक करें।

उन्होंने कहा कि झारखंड के कार्यकर्ताओं में काफ़ी उत्साह है एवं पार्टी के लिए समर्पित रूप से कार्य करते रहने से निश्चित रूप से सफलता प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि दिसंबर माह में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में होने वाले युवा जदयू के राष्ट्रीय कार्यकर्ता सम्मेलन में झारखंड से अधिक से अधिक संख्या में सभी कायकर्ता हिस्सा लें।

स्वागत करने वालों में अरविंद जायसवाल, पूनम देवी, आदि थे।

सद्भावना दिवस के रूप में मनी राजीव जयंती

रांची। पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर आज झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव व एम्पावर झारखंड का अध्यक्ष आदित्य विक्रम जायसवाल के नेतृत्व में बड़ा तालाब स्थित आंचल शिशु आश्रम,रांची में बच्चों के साथ सद्भावना दिवस मनाया गया। मौके पर कांग्रेस नेता आदित्य विक्रम जायसवाल के द्वारा आश्रम में और आपको खाद्य सामग्री दान किया साथ ही आश्रम के बच्चों के बीच हॉर्लिक्स, बिस्किट, टॉफी ,आटा,दाल,चीनी,पेय पदार्थ एवं अन्य खाद सामग्री वितरण किया गया। बच्चों ने खाद्य सामग्री पाकर बहुत ही खुश हुए तथा आभार व्यक्त की।
इस मौके पर आदित्य विक्रम जयसवाल ने स्वर्गीय राजीव गांधी की व्यक्तित्व एवं कृतित्व के बारे में वहां उपस्थित बच्चों व आश्रम के लोगों को बताया तथा कहा कि स्व. राजीव गांधी आधुनिक भारत के निर्माता के साथ -साथ संचार क्रांति के एक महानजनक थे। संचार के माध्यम से भारत को 21वीं सदी में ले जाने का सपना पूरा किया। नई शिक्षा नीति लाकर छात्रों को सीधे लोकतंत्र में भागीदारी सुनिश्चित कर भारतीय राजनीति को नये दिशा देने का काम किया। मनरेगा, जवाहर लाल नेहरू, रोजगार योजना उन्हीं की बनाई गई नीतियां थी। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की स्थापना कर नवोदय विद्यालय और प्रखण्ड प्रोजेक्ट विद्यालय का विकास किया।
आश्रम के लोगों द्वारा एक बाउंड्री गेट लगवाने हेतु एक इच्छा प्रस्तुत की जिसे श्री जायसवाल व उनकी टीम ने जल्द ही लगवाने की बात कही।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से कामगार कांग्रेस के नगर अध्यक्ष दीपक ओझा, पंचम सिंह विधानसभा अध्यक्ष यूथ कांग्रेस रांची जिला महासचिव सोनू सिंह, आसिफ जयाऊल, प्रदेश महासचिव चिंटू चैरसिया, अमरजीत सिंह नीतीश कुमार, करण कुमार, विकास कुमार कुमार, प्रणव मोनू, ओझा अन्य उपस्थित थे।

ईचागढ़ विधानसभा का कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन

चांडिल। चांडिल के डाकबंगला में ईचागढ़ विधानसभा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सम्मलेन का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय  राजीव गांधी के जन्म दिन पर उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर की गई। इस अवसर पर श्री सहाय ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने के लिए जी-जान से भिड़ जाने का समय आ चुका है। भाजपा ने देश में जिस तरह सांप्रदायिक उन्माद का माहौल बना रखा है उससे देश को मुक्ति दिलाना जरूरी है। यह सरकार सभी मोर्चों पर विफल हो चुकी है। सांप्रदायिकता का जहर घोलकर यह सत्ता में वापसी का स्वप्न देख रही है। धर्म निरपेक्षता और सर्व धर्म समभाव भारतीय मानस का मुख्य स्वर है। भारत के लोग कुछ देर के लिए उन्माद की लहर में बह जा सकता हैं लेकिन लंबे समय तक नहीं। विपक्षी एकता ने कर्नाटक सहित कई चुनावों में मोदी-शाह की जोड़ी के अपराजयता की गलतफहमी को चकनाचूर कर दिया है। 2019 के चुनाव में यही एकजुटता धर्म निरपेक्ष शक्तियों को विजय दिलाएगी। 

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...