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शनिवार, 1 सितंबर 2018

रेलवे सफाई कर्मियों के समर्थन में उतरे सुबोधकांत

रांची। हटिया रेलवे सफाई कर्मचारी संध के द्वारा 4 दिन से लगातार धरने पे बैठे  सभी सफाई कर्मचारियों के समर्थन में आये पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ।
ज्ञात हो कि लगातार 4 दिन से अपनी बुनियादी मुद्दों को लेकर सफाई कर्मचारी धरने पे बैठे है। अपनी मांगों को लेकर धरना जारी है।
मौके पर पहुँचे माननीय पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय जी ने फ़ोन पे डीआरएम को लगाई फटकार। कहा गरीब मजदूरों को उनक़ा हक़ देना होगा वरना कांग्रेस पार्टी चरणबद्ध आंदोलन करेगी। सहाय जी ने फटकार लगाते हुए कहा कि 24 घंटे में इसका परिणाम निकाले। सहाय जी आने से सभी सफाई कर्मचारियों में खुशी का माहौल था। कांग्रेस छात्र नेता इंदरजीत सिंह ने कहा कि कल और परसो सरकारी छुट्टी है, अगर 2 दिन में इसका हल नही निकाला गया तो मंगलवार को डीआरएम आफिस के मुख्य गेट पे ताला बंदी करेंगे। मौके पर मौजूद संध के अध्यक्ष सलीम खान ने कहा कि अगर 24 घंटे में जवाब नही आता तो मंगलवार को आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।  सुबोधकांत सहाय जी ने वादा किया कि सभी कर्मचारियों को उनका हक दिला के रहेंगे, ये ठेकेदार और सरकारी अफसरों की दलाली बंद करवा के रहंगे। कांग्रेस नेता जगदीश साहू ने कहा जी जब तक मांगे पूरी नही की जाती धरना जारी रहेगा।मौके पर सलीम खान, जगदीस साहू, NSUI के इंदरजीत सिंह, आरुषि वंदना, आकाश कुमार, मोहमद आमिर, अब्दुल रबनावाज, अनिता देवी,रॉशन टोप्पो, स्टीफन लुइस, कलावती देवी, पप्पू डोंगरे, पुष्पा, आदि मौजूद थे।

81 की उम्र में 18 का जज्बा



अनुकरणीय है प्लीडर कमिश्नर रमेश चंद्र सरकार का व्यक्तित्व

कुछ करने का जज्बा हो, सोच हो तो उम्र मायने नहीं रखती। आमतौर पर 60 की आयु पार करने के बाद अधिकांश
 लोग स्वयं को बीमार और थका हुआ महसूस करने लगते हैं। लेकिन झारखंड सरकार के प्लीडर कमिश्नर रमेश चंद्र सरकार इसके अपवाद हैं। वे 81 वर्ष के हो चुके है। लेकिन अभी भी पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त और सक्रिय सामाजिक जीवन जी रहे हैं। अब नियमित रूप से कोर्ट नहीं जाते। खास मामलों में ही राज्य सरकार का पक्ष रखने के लिए काला कोट धारण करते हैं। ज्यादातर समय घर पर ही रहकर अपने जूनियर वकीलों का मार्गदर्शन करते हैं और स्वाध्याय अथवा सामाजिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं। धर्म और अध्यात्म की चर्चा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। समाजसेवियों का उनके पास आना-जाना लगा रहता है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी चुस्ती और ऊर्जा को देखकर युवाओं को ईर्ष्या हो सकती है। उन्होंने रांची के सिंहमोड़ के पास विकास नगर रोड नं-2 स्थित अपने घर पर फिटनेश के लिए जिम के सारे उपकरण रखे हैं और नियमित व्यायाम करते हैं।

रमेश सरकार ने एमबीए, डिप्लोमा इंजीनियरिंग (विद्युत), एलएलबी के अलावा राजनीति शास्त्र तथा लेबर एंड सोशल वेलफेयर विषय में एमए किया है। वे एचइसी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। 1991 में वीआरएस लेने के बाद हाई कोर्ट में वकालत शुरू की। वे सिविल के विशेषज्ञ बने। एक अधिवक्ता के रूप में भी उन्होंने समाज सेवा का धर्म अपनाया। गरीबों का केस वे मुफ्त लड़ते थे। बल्कि अक्सरहां अपनी जेब के पैसे भी उनपर खर्च कर डालते थे। वकालत उनके लिए कभी भी कमाई का माध्यम नहीं रहा।
पढ़ने-लिखने में इतनी दिलचस्पी है कि उनकी व्यक्तिगत लाइब्रेरी में हिन्दी, अंग्रेजी और बांग्ला भाषा की पुस्तकों का विशाल भंडार है। इनमें कानून की किताबें तो हैं ही साहित्य और धर्म तथा अध्यात्म की हजारों पुस्तकें शामिल हैं। उनके पास वेद, उपनिषद, ब्राह्मण, अरण्यक, स्मृति और पुराणों से लेकर गीता, महाभारत और रामायण के लगभग तमाम संस्करण तीनों भाषाओं में मौजूद हैं। शायद ही धर्मशास्त्र की कोई पुस्तक हो जो उनके पास नहीं हो। फुर्सत के समय वे इनके अध्ययन में लीन हो जाते हैं। अध्यात्म के प्रति अपने लगाव के कारण वे रामकृष्ण मिशन, योगदा सत्संग और चिन्मया मिशन से जुड़े रहे हैं। वे सामाजिक संस्था अपंजन बंगाली मिशन के अध्यक्ष हैं। सके कार्यक्रमों में नियमित भागीदारी करते हैं। वे अपने दो पुत्रों और एक पुत्री को पढ़ा-लिखाकर उच्च पदों पर आसीन करा चुके हैं। पत्नी के देहांत के बीस वर्ष गुजर चुके हैं। उन्होंने अपने परिवार, समाज, धर्म और पेशागत दायित्यों का कुशलता पूर्वक निर्वहन किया है। उनकी जीवन शैली किसी भी आयु के व्यक्ति के लिए, किसी भी समाज के लिए अनुकरणीय है।
उम्र के इस पड़ाव पर आकर अब वे अपने संचित ज्ञान और अनुभव का लाभ नई पीढ़ी को प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके जूनियर भी उनके मार्गदर्शन में उन्हीं की तरह कुशलता से अपना कार्य करते हुए बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।  

शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

केरल में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पहुंचाई राहत


पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा हाल के भारी बाढ़ के बाद केरल में सहायता करने के लिए राहत के कई उपाय आरंभ किए गए हैं-
  1. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने केरल में राहत कार्यों के लिए 25 करोड़ रुपये का सीएसआर योगदान दिया है।
  2. ओएमसी को वैसे एलपीजी ग्राहकों के लिए प्राथमिकता के आधार पर दस्तावेजों की आपूर्ति के लिए विशेष शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया गया है जो विनाशकारी बाढ़ के दौरान अपने दस्तावेज खो चुके हैं। इसके अतिरिक्त ओएमसी बाढ़ के दौरान खो गए सिलिंडरों की जगह दूसरे सिलिंडर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करेंगी। (1) गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों के लिए ओएमसी 200 रुपये प्रति सिलिंडर का मामूली शुल्क लेंगी जबकि एपीएल परिवारों के लिए ओएमसी 1200 रुपये प्रति सिलिंडर की विनिर्माण कीमत लेंगी।
  3. मंत्रालय ने 20.8.2018 को केरल राज्य को 12000 किलो लीटर गैर सब्सिडी प्राप्त किरोसीन (बाजार दर से कम) आवंटित किया है।
  4. मंत्रालय ने राज्य को वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2018) के लिए अग्रिम रुप से पीडीएस किरोसीन के एक महीने का कोटा आवंटित किया है।
  5. ओनजीसी ने केरल के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्रियों (दवाओं, खाद्य सामग्रियों, बिस्तरों एवं अन्य राहत सामग्रियों) को एयर लिफ्ट करने के लिए तीन हेलिकॉप्टर तैनात किए हैं। ओएनजीसी के चार चिकित्सकों को भी केरल में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए भेजा गया है। हेलिकॉप्टरों का उपयोग बचाव कार्यों के लिए अन्य आपदा समूहों के साथ भी तालमेल बनाने के लिए किया गया था।
  6. भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), कोच्चि रिफाइनरी ने जिला मजिस्ट्रेटों के जरिए केरल के बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच वितरण के लिए 30 हजार निःशुल्क एलपीजी हॉट प्लेट का वितरण किया है।
  7. एलपीजी सिलिंडरों को ट्रांसपोर्ट करने के लिए अस्थायी रूप से गैर-प्रमाणीकृत वाहनों को मंजूरी दी गई है और एलपीजी सिलिंडरों के संग्रहण के लिए अतिरिक्त बिंदुएं उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।
  8. ओएमसी ने अपने पास उपलब्ध सभी संसाधनों को वहां तैनात कर दिया है और बाढ़ द्वारा प्रभावित विक्रय केंद्रों, उड्डयन सुविधाओं, एलपीजी एवं किरोसीन वितरण नेटवर्क को बहाल करने तथा पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वे दिन रात कार्य कर रही हैं।

चौथे बिम्‍सटेक शिखर सम्‍मेलन का घोषणा पत्र

 काठमांडू, नेपाल (30-31 अगस्‍त, 2018)

शांतिपूर्ण, समृद्ध और स्थिर ‘बंगाल की खाड़ी क्षेत्र’ का लक्ष्‍य
     
हम सभी, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री, भूटान के मुख्‍य सलाहकार, भारत के प्रधानमंत्री, म्‍यांमार के राष्‍ट्रपति, नेपाल के प्रधानमंत्री, श्रीलंका के राष्‍ट्रपति और थाईलैंड के प्रधानमंत्री 30-31 अगस्‍त, 2018 को बिम्‍सटेक के चौथे शिखर सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने के लिए काठमांडू में मिले; और 1997 के बैंकांक घोषणा पत्र में शामिल किए गए बिम्‍सटेक  के उद्देश्‍यों और सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई; म्‍यांमा के ने पी तॉ में 4 मार्च, 2014 को आयोजित तीसरे बिम्‍सटेक  शिखर सम्‍मेलन तथा 16 अक्‍टूबर, 2016 को गोवा में बिम्‍सटेक  नेताओं द्वारा जारी दस्‍तावेज के अनुरूप अपने सामूहिक प्रयासों के जरिए एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और स्थिर बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के निर्माण के लिए भी अपनी वचनबद्धता फिर से व्‍यक्‍त की।

हम सभी इस बात से आश्‍वस्‍त हुए कि हमारे भौगोलिक संबंध,प्रचुर मात्रा में उपलब्‍ध प्राकृतिक और मानव संसाधन,समृद्ध ऐतिहासिक संबंध और सांस्‍कृतिक विरासत चिन्हित प्रमुख क्षेत्रों में परस्‍पर गहरे क्षेत्रीय  सहयोग के लिए बड़ी संभावनाएं उपलब्‍ध कराती हैं;
हमने विकास के रास्‍ते में गरीबी उन्‍मूलन को सबसे बड़ी क्षेत्रीय चुनौती स्‍वीकार करते हुए 2030 के सतत विकास एजेंडे की दिशा में मिलकर काम करने के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की। हमने यह भी माना कि बिम्‍सटेक  के सदस्‍य देशों की अर्थव्‍यवस्‍थाओं और समाजों में अंतर-संबंध और अंतर-निर्भरता क्षेत्रीय सहयोग के लिए अपार संभावनाएं उपलब्‍ध कराएंगी;
हमने अपने क्षेत्र में संपर्क फ्रेमवर्क में सामंजस्‍य को प्रोत्‍साहित करने में बहुआयामी संपर्क के महत्‍व को साझा, स्‍मृद्धि और आर्थिक एकीकरण के लिए एक प्रमुख उत्‍साही घटक के रूप में स्‍वीकार किया;  

क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए हमने व्‍यापार और निवेश को एक प्रमुख कारक के रूप में स्‍वीकार किया;  

क्षेत्र के कम विकसित  और बिना समुद्री सीमाओं वाले विकासशील देशों की विशेष आवश्‍यकताओं और परिस्थितियों को पहचानने तथा उनकी विकास प्रक्रिया को सार्थक समर्थन प्रदान करने की जरूरतों को रेखांकित किया;
हमने आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराधों को बिम्सटेक देशों सहित अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानते हुए इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराधों का मुकाबला करने के लिए सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी तथा निरंतर प्रयास और सहयोग के साथ ही एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्‍यकता है; हमने सार्थक सहयोग और गहरे सामूहिक प्रयासों से एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और स्थिर बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के लिए बिम्‍सटेक  को एक प्रभावी और परिणामोन्‍मुखी क्षेत्रीय संगठन बनाने के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई;   एक निष्पक्ष, नियम-आधारित, न्यायसंगत और पारदर्शी अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया और संयुक्त राष्ट्र के साथ बहुपक्षवाद तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली पर फिर से विश्‍वास व्‍यक्‍त किया; बिम्‍सटेक  के तहत क्षेत्रीय सहयोग प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए एक मजबूत संस्थागत व्यवस्था की आवश्‍यकता के महत्व को रेखांकित किया;


शिखर सम्मेलन के निर्णयों के बारे भूटान के अंतरिम सरकार के मुख्‍य सलाहार की भागीदारी और सहमति देश की अगली निवार्चित सरकार द्वारा अनुमोदित किए जाएंगे;  

हम संकल्‍प लेते हैं कि:-
  1. 1977 के घोषणा पत्र के सिद्धांतों के अनुरूप बिम्‍सटेक  देशों के बीच सहयोग एक दूसरे की संप्रभुता, समानता, क्षेत्रीय, अखंण्‍डता और राजनीतिक स्‍वतंत्रता का सम्‍मान करने तथा आंतरिक मामलों में हस्‍तक्षेत्र नहीं करने, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्‍व और परस्‍पर लाभ की नीति पर आधारित होगा।
  2. बिम्‍सटेक  के उद्देश्‍य और लक्ष्‍येां के प्रति हमारे प्रयास 1997 बैंकॉक घोषणा पत्र के अनुरूप होंगे और हम एक स्थिर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के लिए बिम्‍सटेक को एक शक्तिशाली, अधिक प्रभावी और परिणामोन्‍मुखी क्षेत्रीय संगठन बनाने के लिए प्रतिबद्ध होंगे।
  3. क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया को जोड़ने वाले सेतु के रूप में बिम्‍सटेक की अनूठी स्थिति का लाभ उठाने तथा अपने संगठन को शांति, समृद्धि और स्थिरता को बढ़ावा देने के एक प्रभावी मंच के रूप में बदलने की दिशा में सदस्‍यों देशों के बीच सहयोग को मजबूत और गहरा बनाने के लिए प्रतिबद्ध होंगे।
  4. बिम्‍सटेक  सहित दुनिया के सभी हिस्‍सों में हुए आतंकवादी हमलों की भर्त्‍सना की जाए और आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा हो। इस बात पर जोर दिया गया कि किसी भी आतंकवादी कार्रवाई को न्‍यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। इस बात का संकल्‍प लिया गया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में केवल आतंकवादियों, आतंकी संगठनों और उनके नेटवर्क को ही नहीं बल्कि आतंकवाद को आर्थिक मदद, समर्थन और शह  और संरक्षण देने वाले देशों और गैर सरकारी तत्‍वों को पहचानकर उन्‍हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। आतंकवाद का मुकाबला करने के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराते हुए हम सभी देशों का आह्वान करते है कि वे इस बारे में एक ऐसा व्‍यापक नीति अपनाए जिससे आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को वित्‍तीय मदद के साथ ही आतंकी संगठनों में भर्तियों पर भी रोक लगाई जा सके तथा सीमापार आतंकी गतिविधियों, कट्टरपंथी विचारधारा और आतंकवादी गतिविधियों के लिए इंटरनेट के गलत इस्‍तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जा सके और आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों  को नष्‍ट किया जा सके।
  5. संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और उद्देश्यों के प्रति अपने विश्वास को दोहराते हुए समकालीन वैश्विक चुनौतियों से निपटने लिए अपने नियमों, संस्थानों और उपकरणों को प्रासंगिक बनाकर बहुपक्षीय प्रणाली को मजबूत करने का प्रयास करेंगे तथा एक निष्पक्ष, नियम-आधारित, न्यायसंगत और पारदर्शी विश्व व्यवस्था के वास्‍ते अपने सामूहिक हितों की रक्षा के लिए मिलकर आवाज उठाएंगे।
संस्‍थागत सुधार
  1. 1997 के बैंकॉक घोषणा पत्र के आधार पर बिम्सटेक सचिवालय को संगठन के लिए चार्टर का प्रारंभिक मसौदा तैयार करने तथा सहयोग के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को परिभाषित करने और संस्थागत संरचना और निर्णय के विभिन्न स्तरों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से चिन्हित करने का फैसला लिया जाना, ताकि बिम्सटेक स्थायी कार्यकारी समिति (बीपीडब्ल्यूसी) और अन्य उच्च निकायों द्वारा प्रक्रियाएं तय करने में इनका इस्‍तेमाल किया जा सके और इस प्रक्रिया को बिम्‍सटेक   के पांचवें शिखर सम्मेलन द्वारा निमय बनाने के लिए अपनाया जा सके।
  2. सचिवालय और बिम्सटेक केंद्रों और संस्थाओं के प्रशासनिक और वित्तीय मामलों से निपटने के साथ-साथ बैठकों के कार्यक्रम तैयार करने, संगठन की गतिविधियों को प्राथमिकता देने और तर्कसंगत बनाने के लिए बिम्सटेक स्थायी कार्यकारिणी स्थापित करने का फैसला लिया जाना।
  3. अपनी सरकारों के संबंधित मंत्रालय/राष्ट्रीय संस्थाओं को सही समय पर सदस्य देशों के स्वैच्छिक योगदान के जरिये एक बिम्सटेक विकास कोष (बीडीएफ) की स्थापना की संभावना का पता लगाने के लिये निर्देश देना जिससे कि बिम्सटेक के लिये शोध और योजना बनाने और बिम्सटेक केंद्रों और अन्य संस्थाओं की परियोजनाओं, कार्यक्रमों एवं ऐसी अन्य गतिविधियों के लिये वित्तीय मदद मुहैया करायी जा सकें जिस पर कि सदस्य देश सहमत हों।
  4. बिम्सटेक सचिवालय की संस्थागत क्षमता बढ़ाने पर सहमति जिसमें वित्तीय एवं मानव संसाधन का उपयोग भी शामिल है ताकि यह बिम्सटेक गतिविधियों एवं कार्यक्रमों के बीच तालमेल, निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने के योग्य बन सके और ऐसे प्रस्तावों को आरंभ करना जिस पर सदस्य देश सहमत हों और साथ ही ऐसी अन्य जिम्मेदारियों को प्रभावी और कार्यकुशल तरीके से पूरा करना जो कि इसे सौंपी जायें और साथ ही क्रमबद्ध तरीके से निदेशकों की संख्या बढ़ाकर 7 करना ताकि प्रत्येक सदस्य देश से एक निदेशक हो।
  5. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बिम्सटेक के स्तर और मान्यता को बढ़ाने के महत्व को स्वीकारना जिसमें साझा हित के मुद्दों पर समुचित और एक जैसी राय तैयार करना और विभिन्न बहुदेशीय संगठनों, संस्थाओं और प्रक्रियाओं में इस समूह को मान्यता दिलवाना।
  6. सहयोग के मुख्य क्षेत्रों में प्रगति को तेज करने की आवश्यकता पर जोर देना और बिम्सटेक के मौजूदा सहयोग के क्षेत्रों की समीक्षा, पुनर्गठन और उन्हें सुधारना और बिम्सटेक के तहत आने वाले कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं में ठोस परिणाम लाने के लिये गतिविधियों एवं कार्यों को और सुचारु बनाना। बिम्सटेक के सहयोग के स्तंभों की प्राथमिकताओं को पुन: निर्धारित करने के लिये थाइलैंड के संकल्पना पत्र जिसमें पांच स्तंभों को सुचारु बनाने का प्रस्ताव शामिल है और जिस पर बिम्सटेक की स्थायी कार्यकारी समिति में आगे और विचार होगा, इस पर सहमत होना।
  7. उन वैधानिक दस्तावेजों और समझौतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने पर सहमत होना जो कि अंतिम स्वरूप दिये जाने और पुष्टि किये जाने के लिये आंतरिक मंजूरी प्रक्रियाओं के लंबित होने की वजह से रुके हुये हैं।
  8. जैसा कि इस घोषणा पत्र में दिया गया है, संबंधित क्षेत्रों में की गयी प्रगति के लिये नेतृत्वकर्ता देशों की सराहना करना तथा उन्हें और अधिक प्रगति करने के लिये अपने प्रयासों को तीव्र बनाने के लिये प्रोत्साहित करना।
  9. बिम्सटेक के पूर्व महासचिव श्री सुमित नकनडाला के कार्यकाल के दौरान संस्था के कार्य को आगे बढ़ाने के लिये उनके अतुलनीय योगदान के प्रति अपनी सराहना को व्यक्त करना और बांग्लादेश के महासचिव श्री एम. शहीदुल इस्लाम की बिम्सटेक के महासचिव के तौर पर नियुक्ति का स्वागत करना।
  10. मार्च 2014 से बिम्सटेक के कुशल नेतृत्व के लिये नेपाल के प्रति अपनी सराहना को व्यक्त करना और नये अध्यक्ष के रूप में श्री लंका का स्वागत करना।
  11. क्षेत्रीय सहयोग को और तीव्र करने के लिये बिम्सटेक के शिखर सम्मेलन एवं बिम्सटेक की अन्य बैठकों को तय समय पर आयोजित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराना।
  12. क्षेत्रवार समीक्षा के दौरान हमारे निर्देशों, प्रतिबद्धताओं और वक्तव्यों पर इस संलग्नक में व्यक्त हमारी नीति को इस घोषणापत्र का एक अंग मानना।
  13. इस शिखर सम्मेलन की बेहतरीन व्यवस्था और गर्मजोशी से भरे स्वागत के लिये नेपाल सरकार के प्रति हमारी सराहना को व्यक्त करना।

चौथे बिम्सटेक शिखर घोषणापत्र का संलग्नक
क्षेत्रवार समीक्षा
निर्धनता उन्मूलन
  1. 2030 तक बंगाल की खाड़ी क्षेत्र से निर्धनता के उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं जो कि स्थायी विकास के 2030 के एजेंडे के भी अनुरूप है और बिम्सटेक निर्धनता कार्ययोजना के प्रभावी अनुपालन का आह्वाहन करते हैं और साथ ही सभी क्षेत्रों में अपने प्रयासों को तेज करने के लिये भी ताकि वे निर्धनता उन्मूलन के वृहद लक्ष्य में योगदान दे सकें।
  2. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों एवं सेवा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने जैसे ठोस कदम उठाकर अपने कामगारों को रोजगार के श्रेष्ठ अवसर उपलब्ध कराकर उनके संवर्धन करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को व्यक्त करते हैं।

परिवहन एवं संचार (संपर्क)
  1. इस क्षेत्र में राजमार्गों, रेलमार्गों, जलमार्गों और वायु सेवाओं के विकास, विस्तार और आधुनिकीकरण के जरिये आसान, सुसंगत और सरल यातायात सुविधाओं का विकास कर सीमारहित बहुविध परिवहन के संपर्कों की स्थापना के लिये अपने संकल्प को दोहराते हैं और अपने संबंधित प्राधिकृत अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि वे सदस्य देशों की आवश्यकताओं एवं विशिष्ट परिस्थितियों को संज्ञान में लेते हुये बिम्सटेक तटीय जहाजरानी समझौते तथा बिम्सटेक मोटर गाड़ी समझौते को यथाशीघ्र अंतिम स्वरूप देने के अपने प्रयासों को तीव्र बनायें।
  2. परिवहन के साधनों के संबंध में बिम्सटेक मास्टर प्लान के प्रारूप को बनाने में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हैं और इसको शीघ्र ही लागू किये जाने का आह्वाह्न भी और मास्टर प्लान को तैयार करने में दिये सहयोग के लिये एशियाई विकास बैंक का धन्यवाद अदा करते हैं तथा बिम्सटेक परिवहन संपर्क कार्यबल (बीटीसीडब्ल्यूजी) को सदस्य देशों की विशिष्ट परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुये इसे लागू करने की प्रक्रिया तैयार करने का उत्तरदायित्व देते हैं। हम इस बात पर सहमत हैं कि मास्टर प्लान एक ऐसे रणनीतिक दस्तावेज की तरह काम करेगा जो कि कार्यों की दिशा तय करेगा और संपर्क बढ़ाने की विभिन्न प्रणालियों जैसे आसियान मास्टर प्लान ऑन कनेक्टिविटी 2025 (एमपीएसी 2025), दि अयेवाडी - चाओ फ्राया - मेकॉंग आर्थिक सहयोग रणनीति (एसीएमईसीएस) के साथ सुसंगत हो ताकि हमारे क्षेत्र में संपर्क के बेहतरीन साधन हों और स्थायी विकास को हासिल किया जा सके।
  3. सूचना तकनीक और संचार से संबंधित मामलों के लिये एक कार्यबल की स्थापना का निर्णय लेते हैं ताकि इस क्षेत्र के लोगों को ज्यादा सस्ता हाई-स्पीड इंटरनेट, मोबाइल संचार और व्यापक पहुंच मिल सके। इस संबंध में नयी दिल्ली में 25-27 अक्टूबर को 'न्यू डिजिटल होरॉइजन्स: कनेक्ट, क्रियेट, इन्नोवेट' विषय पर आयोजित हो रहे इंडिया मोबाइल कॉंग्रेस 2018 कार्यक्रम में बिम्सटेक की एक मंत्रि-स्तरीय बैठक आयोजित करने के भारत सरकार के प्रस्ताव का स्वागत करते हैं और सभी सदस्य देशों को इसमें भाग लेने के लिये प्रोत्साहित करते हैं।

व्यापार एवं निवेश
  1. बिम्सटेक मुक्त व्यापार क्षेत्र (एफटीए) की बातचीत को शीघ्र पूरा किये जाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं और बिम्सटेक व्यापार एवं आर्थिक मंत्रि-स्तरीय बैठक (टीईएमएम) और इसके अनुषांगिक संगठनों जिसमें व्यापार बातचीत समिति (टीएनसी) भी शामिल हैं को निर्देश देते हैं कि वे बिम्सटेक मुक्त व्यापार समझौते से संबंधित सभी समझौतों को जितना शीघ्र संभव हो सके अंतिम रूप देने का प्रयास करें; और वस्तुओं के व्यापार से संबंधित समझौते और कस्टम्स के क्षेत्र में सहयोग के समझौते की बातचीत में हुई प्रगति पर अपना संतोष व्यक्त करते हैं और अपने-अपने संबंधित मंत्रालय/संस्थाओं को व्यापार बातचीत समिति (टीएनसी) की बैठकों में नियमित तौर पर शामिल होने का निर्देश देते हैं।
  2. व्यापार एवं निवेश को प्रोत्साहन देने के लिये सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को और बढ़ाने के लिये बिम्सटेक बिजनेस फोरम और बिम्सटेक इकॉनॉमिक फोरम की गतिविधियों को सशक्त बनाने पर सहमत होते हैं और बिम्सटेक आव्रजन मामलों से संबंधित विशेषज्ञों के समूह को निर्देश देते हैं कि बिम्सटेक आव्रजन सुविधाओं से संबंधित औपचारिकताओं को अंतिम रूप देने के लिये बातचीत को जारी रखे।
  3. दिसंबर 2018 में बिम्सटेक स्टार्ट-अप सभा को आयोजित करने के भारत के प्रस्ताव का स्वागत करते हैं और सभी सदस्य देशों को इसमें भाग लेने के लिये प्रोत्साहित करते हैं।

आतंकवाद का मुकाबला एवं पार-देशी अपराध
  1. आतंकवाद हमारे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिये गंभीर खतरा बना हुआ है इस विषय पर अपनी राय को दोहराते हैं और किसी भी प्रकार और स्वरूप के आतंकवाद का सामना करने के प्रति अपने दृढ़ निश्चय को दोहराते हैं और इस संबंध में समुचित कदम उठाने पर सहमत होते हैं।
  2. आपराधिक मामलों में परस्पर विधिक सहायता के विषय पर बिम्सटेक समझौते पर हस्ताक्षर होने की अपेक्षा करते हैं; सदस्य देशों से इसकी शीघ्र पुष्टि का आह्वाहन करते हैं और इस बात पर संतोष व्यक्त करते हैं कि कई सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, संगठित पार-देशी अपराध और अवैध मादक पदार्थों की तस्करी का सामना करने में सहयोग के संबंध में बिम्सटेक समझौते की पुष्टि कर दी है और अन्य सदस्य देशों से आह्वाहन करते हैं कि वे भी इसकी पुष्टि करें।
  3. कानून का अनुपालन सुनिश्चित करने वाली संस्थाओं, गुप्तचर एवं सुरक्षा संस्थाओं के बीच सहयोग एवं समन्वय को सशक्त बनाने के अपने संकल्प को व्यक्त करते हैं और आतंकवाद और पार-देशीय अपराधों से मुकाबला करने के लिये सहयोग और तालमेल बढ़ाने के एक अंग के रूप में गृहमंत्री स्तर पर बिम्सटेक की बैठक आयोजित करने का निर्णय लेते हैं साथ ही बिम्सटेक देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठकों को जारी रखने का निर्णय लेते हैं।
  4. मार्च 2019 में बिम्सटेक के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की तीसरी बैठक आयोजित करने के थाइलैंड के प्रस्ताव का स्वागत करते हैं।

पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन

  1. सूचना के आदान-प्रदान के जरिये आपदा प्रबंधन में घनिष्ठ सहयोग को प्रोत्साहन देना जिसमें चेतावनी देने वाली प्रणालियां, बचाव के उपायों को अपनाना, पुनर्वास एवं क्षमता विकास भी शामिल हैं और क्षेत्र की मौजूदा क्षमताओं को और विकसित करने पर भी सहमत होते हैं साथ ही बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिये तैयारी और तालमेल बढ़ाने के लिये एक कार्ययोजना तैयार करने के लिये अंतर-सरकारी विशेषज्ञ समूह की स्थापना करने का निर्णय लेते हैं। 
     
जलवायु परिवर्तन
  1. संवेदनशील हिमालय और पर्वतीय पारिस्थिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान के प्रतिकूल प्रभाव और पर्यावरण के क्षरण और इसके बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं साथ ही हमारे लोगों के जीवन और आजीविका पर जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव से निपटने के लिये पर्यावरण की सुरक्षा और इसके संरक्षण के लिये सहयोग को सशक्त बनाने का संकल्प लेते हैं; साथ ही इस क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये एक सामूहिक प्रयास के लिये कार्ययोजना तैयार करने के लिये अंतर-सरकारी विशेषज्ञ समूह की स्थापना की संभावना तलाश करने पर सहमत होते हैं; और अलग-अलग राष्ट्रीय परिस्थितियों, समानता और साझा परंतु अलग-अलग उत्तरदायित्वों और अपनी-अपनी क्षमता (सीबीडीआर एवं आरसी) के सिद्धान्त के आधार पर पेरिस समझौते को लागू करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं।

ऊर्जा
15. इस क्षेत्र में ऊर्जा के संसाधनों, विशेषकर के नवीकरणीय एवं स्वच्छ ऊर्जा के स्रोतों,  की उच्च संभावनाओं की पहचान करते हैं और इस क्षेत्र में एक दूसरे के साथ घनिष्ठता से काम कर ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिये एक व्यापक योजना तैयार करने के लिये अपने प्रयासों को तीव्र बनाने पर सहमत होते हैं और पन-बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा के अन्य स्रोतों सहित ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिये विशेषज्ञों के एक अंतर-सरकारी दल के गठन का निर्णय लेते हैं।


  1. अपने लोगों के आर्थिक विकास के लिये अबाधित और सस्ती ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये, जिसमें ऊर्जा के व्यापार के जरिये भी ऐसा करना शामिल है, प्रतिबद्ध बने हुये हैं; और बिम्सटेक ग्रिड इंटरकनेक्शन के लिये सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये जाने का स्वागत करते हैं और संबंधित संस्थाओं को तकनीकी, योजनागत और संचालन से संबंधी मानकों को सुसंगत बनाने की शुरुआत करने के लिये ठोस कदम उठाने का निर्देश देते हैं और साथ ही एक बिम्सटेक ग्रिड की शीघ्र स्थापना का भी। और इस क्षेत्र में ऊर्जा सहयोग को मजबूत बनाने के लिये बिम्सटेक ऊर्जा केंद्र को शीघ्र आरंभ किये जाने का आह्वान करते हैं।

प्रौद्योगिकी
  1. हमने विभिन्न क्षेत्रों (सेक्टर) में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों सहित विभिन्न उपक्रमों के लिए किफायती प्रौद्योगिकियों के विकास, पहुंच एवं साझा करने हेतु आपस में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है और इसके साथ ही हम श्रीलंका में बिम्सटेक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण इकाई की स्थापना से संबंधित संस्थापन प्रलेख पर हस्ताक्षर करने के लिए सदस्यों देशों द्वारा किए जा रहे प्रयासों का स्वागत करते हैं।
  2. हमने प्रौद्योगिकी के विघटनकारी असर को समाप्त करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में मानव संसाधन के विकास और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए शिक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग पर फोकस करने पर भी सहमति जताई है।
कृषि
  1. हमने फसलों, पशुधन एवं बागवानी, कृषि मशीनरी और फसल कटाई प्रबंधन सहित कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है ताकि कृषि उपज की उत्पादकता एवं लाभप्रदता निरंतर बढ़ सके, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित प्राधिकरणों को सहयोग बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी जा सके और पारंपरिक एवं आधुनिक खेती दोनों को आपस में समुचित ढंग से जोड़कर एवं लागत घटाकर, कृषि समुदायों की आय बढ़ाकर और उनके लिए जोखिमों में कमी करके पारंपरिक खेती से जुड़े ज्ञान का संरक्षण करने के साथ-साथ उसे बढ़ावा भी दिया जा सके। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच कृषि व्यापार को सुविधाजनक बनाना और सदस्य देशों में गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन तथा आम आदमी के जीवन स्तर को बेहतर करने में उल्लेखनीय योगदान करना है।
  2. हम वर्ष 2019 तक कृषि पर प्रथम बिम्सटेक मंत्रिस्तरीय बैठक की मेजबानी करने संबंधी म्यांमार की पेशकश और वर्ष 2019 में जलवायु स्मार्ट कृषि प्रणालियों पर बिम्सटेक संगोष्ठी आयोजित करने संबंधी भारत की पेशकश का भी स्वागत करते हैं।

मत्स्य पालन
  1. हम इस क्षेत्र में समुद्री संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और सतत उपयोग में निरंतर सहयोग करने पर विशेष जोर दे रहे हैं, हमने इस क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं लोगों की आजीविका में बेहतरी लाने और सतत समुद्री मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए सार्थक सहयोग की संभावनाएं ढूंढने का जिम्मा प्रासंगिक राष्ट्रीय एजेंसियों को सौंपने तथा बिना समुद्री सीमाओं वाले सदस्यों देशों के अंतर्देशीय मत्स्य पालन से लाभान्वित होने के तरीके तलाशने हेतु संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश देने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य
  1. हमने गैर-संचारी रोगों को फैलने से रोकने के साथ-साथ उन अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य के मसलों को सुलझाने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है जो बिम्सटेक क्षेत्र के लोगों की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति में बाधक हैं। इनमें एचआईवी एवं एड्स, मलेरिया, तपेदिक, एवियन एवं स्वाइन इंफ्लूएंजा सहित वायरल इंफ्लूएंजा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए उभरते अन्य खतरे भी शामिल हैं। हमने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में आपसी सहयोग की दिशा में हुई प्रगति को ध्यान में रखा है, हम इस क्षेत्र में सहयोगात्मक गतिविधियों को जारी रखने, सूचनाओं के आदान-प्रदान, अनुभवों को साझा करने, संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षित करने एवं इन बीमारियों की रोकथाम तथा इन पर अंकुश रखने से जुड़े अन्य ठोस कार्यक्रमों के जरिए संबंधित एजेंसियों के बीच सक्रिय सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिसमें पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग करना भी शामिल है। हम पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग हेतु किए गए अथक प्रयासों के लिए थाईलैंड की सराहना करते हैं।
सदस्यों देशों के लोगों के बीच संपर्क
  1. हम सदस्यों देशों के बीच आपसी समझ एवं विश्वास को और ज्यादा बढ़ाने तथा सदस्य देशों के लोगों के बीच विभिन्न स्तरों पर संपर्क को बढ़ावा देने का संकल्प लेते हैं। हमने बिम्सटेक के बारे में आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए नीतिगत प्रबुद्ध मंडलों के बिम्सटेक नेटवर्क (बीएनपीटीटी) की गतिविधियों को पूरी संतुष्टि के साथ ध्यान में रखा है और हम संबंधित एजेंसियों को बीएनपीटीटी के विचारार्थ विषयों को अंतिम रूप देने का निर्देश देते हैं।
  2. हमने सदस्य देशों के लोगों के बीच संपर्कों का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से सांसदों, विश्वविद्यालयों, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों और मीडिया समुदाय के लिए उपयुक्त बिम्सटेक फोरम की स्थापना करने की संभावनाएं तलाशने पर सहमति जताई है।
सांस्कृतिक सहयोग
  1. हम सदस्य देशों के लोगों के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंधों को और ज्यादा मजबूत करने तथा सांस्कृतिक विविधता हेतु पारस्परिक सम्मान एवं सहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिए सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की जरूरत पर विशेष बल देते हैं, हम इस क्षेत्र में एक संपर्क सूत्र के रूप में बौद्ध धर्म के महत्व को रेखांकित करते हैं और एक बौद्ध सर्किट की स्थापना कर इसे स्पष्ट अभिव्यक्ति देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।
  2. हमने नियमित अंतराल पर बिम्सटेक के संस्कृति मंत्रियों की बैठकें और बिम्सटेक सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित करने पर सहमति जताई है। हम संस्कृति पर द्वितीय बिम्सटेक मंत्रिस्तरीय बैठक और प्रथम बिम्सटेक सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित करने संबंधी बांग्लादेश की पेशकश का स्वागत करते हैं। हम सदस्य देशों के संस्कृति मंत्रियों को इन दो महत्वपूर्ण आयोजनों में भाग लेने के लिए पूरी दृढ़ता के साथ प्रोत्साहित करते हैं।
पर्यटन
  1. हमने बिम्सटेक क्षेत्र के अंदर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने, उभरते अवसरों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त रणनीतियां विकसित करने का जिम्मा संबंधित प्राधिकरणों को सौंपने तथा विगत में की गई पहलों से लाभ उठाने पर सहमति जताई है, जिनमें वर्ष 2005 में कोलकाता में अनुमोदित और वर्ष 2006 में बिम्सटेक के पर्यटन मंत्रियों की द्वितीय गोलमेज बैठक और काठमांडू में आयोजित कार्यशाला में पुष्टि की गई ‘बिम्सटेक क्षेत्र हेतु पर्यटन विकास एवं संवर्धन के लिए कार्य योजना’ भी शामिल है। हमने पर्यटकों की सुरक्षा एवं हिफाजत के साथ-साथ सुगम परिवहन कनेक्टविटी सुनिश्चित कर पर्यटन को सुविधाजनक बनाने के लिए ठोस उपाय करने पर सहमति जताई है। हम बौद्ध पर्यटन सर्किट, मंदिर पर्यटन सर्किट, प्राचीन शहरों के चिन्हों, पारिस्थितिकी पर्यटन और चिकित्सा पर्यटन को विकसित एवं प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि करते हैं। हम वर्ष 2020 में नेपाल में बिम्सटेक पर्यटन सम्मेलन की मेजबानी करने संबंधी नेपाल की पेशकश का स्वागत करते हैं जिसका आयोजन ‘विजिट नेपाल ईयर 2020’ के दौरान ही होगा।
पर्वतीय अर्थव्यवस्था
  1. हम सतत विकास में सहयोग देने के लिए पर्वतों की जैव-विविधता सहित पर्वतीय पारस्थितिकी का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए ठोस उपाय करने की जरूरत को रेखांकित करते हैं। हम बिम्सटेक देशों में पर्वतीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने पर प्रस्तुत किए गए अवधारणा पत्र का स्वागत करते हैं जिसे नेपाल ने तैयार किया है और जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है। हमने एक कार्ययोजना तैयार करने के लिए एक अंतर-सरकारी विशेषज्ञ समूह का गठन करने का निर्णय लिया है।
नीली अर्थव्यवस्था
  1. हम नीली अर्थव्यवस्था (ब्लू इकोनॉमी) की अहमियत पर विशेष जोर देते हैं और हमने इस क्षेत्र में सतत विकास के लिए इस क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमति जताई है। हमने बिना समुद्री सीमाओं वाले सदस्य देशों की विशिष्ट जरूरतों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नीली अर्थव्यवस्था पर एक कार्य योजना तैयार करने के लिए एक अंतर-सरकारी विशेषज्ञ समूह का गठन करने का निर्णय लिया है।
  2. हमने बिम्सटेक के सदस्य देशों के सरकारी प्रतिनिधियों की साझेदारी के साथ वर्ष 2017 में बांग्लादेश में अंतर्राष्ट्रीय नीली अर्थव्यवस्था सम्मेलन की मेज़बानी किए जाने को पूरी संतुष्टि के साथ ध्यान में रखा है।


पीएम मोदी ने काठमांडू में किया पशुपतिनाथ धर्मशाला का उदघाटन


उदघाटन के बाद लोगों को संबोधित करते मोदी
काठमांडू। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. ओली के साथ काठमांडू में संयुक्त रूप से पशुपतिनाथ धर्मशाला का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह जब भी यहां आते हैं, काठमांडू के लोगों के प्रेम एवं स्नेह को महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के प्रति अपनापन की यह भावना नेपाल में स्पष्ट है। उन्होंने पशुपतिनाथ एवं नेपाल में अन्य मंदिरों की अपनी पूर्व की यात्राओं का स्मरण किया।
उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के बीच आध्यात्मिक संबंध समय और दूरी से आगे निकल चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में वह इस धर्मशाला का उद्घाटन कर के प्रसन्न हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली के साथ पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि पशुपतिनाथ, मुक्तिनाथ एवं जानकी धाम के मंदिर भारत के साथ संबंधों को सुदृढ़ करने के अतिरिक्त विविधता में एकता को प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म की समृद्ध परंपराओं की चर्चा की। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि किस प्रकार बौद्ध धर्म भारत और नेपाल के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपनी गौरवशाली विरासत के प्रति गर्व है।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से समाज के निर्बल एवं सीमांत वर्गों के लोगों के लिए विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक विकास में नई ऊँचाईयां छू रहा है और ‘सबका साथ सबका विकास’ के विजन में नेपाल के लोग भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल में राजनीतिक स्थिरता को देख कर प्रसन्न है उन्होंने कहा कि नेपाल को हमेशा भारत की सद्भावन और सहयोग का लाभ मिलेगा।    

पहले सप्ताह में खुले रहेंगे बैंक, जारी रहेगी सेवा


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि सितंबर के पहले सप्ताह में 6 दिनों तक बैंकों की बंदी महज सोशल मीडिया में फैलाई गई अफवाह है। इससे आम लोग बेवजह परेशान हो रहे हैं।
सरकार ने स्‍पष्‍ट किया है कि सितंबर के पहले सप्‍ताह में बैंक खुले रहेंगे और बैंकिंग गतिविधियां बिना किसी व्‍यवधान के जारी रहेंगी। बैंक केवल 2 सितंबर को रविवार के दिन और 8 सितंबर को दूसरे शनिवार के दिन बंद रहेंगे, तीन सितंबर को देश में सभी जगह छुट्टी नहीं है। इस दिन नेगोशिएबल इन्स्ट्रमेन्ट्स एक्‍ट, 1881 के तहत केवल कुछ ही राज्‍यों में बैंक बंद रहेंगे।

बैंक जिन दिनों बंद रहेंगे उन दिनों सभी राज्‍यों में एटीएम पूरी तरह काम करते रहेंगे। ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। बैंकों से कहा गया है कि वे एटीएम मशीनों में निकासी के लिए पर्याप्‍त मात्रा में नकदी की उपलब्‍धता सुनिश्चित करें।   

रिफ्रेक्टरी स्टेटस एपिलैपटिक्स के मरीज को मिला जीवन दान

राँची के आर्किड अस्पताल में डाॅक्टरों को मिली बड़ी सफलता


रांची। आॅर्किड अस्पताल के चिकित्सकों एवम् मेडिकल टीम ने कोमा में गई मरीज बिमला देवी बजोरिया को गहन चिकित्सा एवम् सेवा के तत्पश्चात जीवन दान दिया।
ज्ञात हो की रिफ्रेक्टरी स्टेटस एपिलेपटिक्स एक घातक बीमारी है जिसमें मरीज को लगातार मिरगी के दौरे पड़ते है। आमतौर पर मिरगी का दौरा पड़ने के बाद व्यक्ति सामान्य अवस्था में लौट जाता है परन्तु इस बीमारी में सामान्य अवस्था में आने से पूर्व ही दोबारा और कई बार दौरे पड़ जाते है। और विलम्ब करने पर प्राण घातक सिद्ध होते है।
उक्त मरीज तेज बुखार, गर्दन दर्द, आरटेरियल सेन्सोरियम, अफासिया की शिकायत पर अपोलो हाॅस्पिटल, कोलकाता में भर्ती हुई। इस बीमारी की पुष्टि होने के बाद एवम् वेंटिलेटर सपोर्ट में चले जाने के पश्चात् वहाँ के चिकित्सकों ने लगभग इनके परिजनों केा जवाब ही दे दिया था, तत्पश्चात् राँची के निवासी होने के कारण इन्हें आॅर्किड अस्पताल में न्यूरोलोजिस्ट डाॅ उज्जवल राॅय के परामर्श में भर्ती किया गया।
उक्त मरीज को फिजिसियन एवम् कार्डियोलोजिस्ट डाॅ एस.सी.जैन, न्यूरोलाॅजिस्ट डाँ उज्जवल राॅय, डायबिटोलाॅजिस्ट डाॅ बिनय ढनढनीया, इंटेसीव केयर के हेड डाॅ राश कुजुर, डाॅ सुयश सिन्हा, इंटेसिमिष्ट डाॅ अमित गुप्ता एवम् डाॅ कृष्णा प्रसाद की टीम के देख-रेख में इलाज शुरू हुआ।
मरीज की लगातार म्म्ळ माॅनिटिरिंग की गई और धीरे-धीरे वेन्टीलेटर से हटाया गया, मरीज की स्थिति में धीरे-धीर सुधार हुआ एवम् काफी संयम और धैर्य रखते हुए वो सामान्य स्थिति में लौट आई, और वर्तमान में अस्पताल से डिस्चार्ज की जा रही है।
लगभग 1) महीने के इस चिकित्सीय प्रक्रिया एवम् जटिल बीमारी से ईजाद दिलाने में आॅर्किड अस्पताल की नर्सींग टीम का योगदान अतयंत सराहनीय रहा क्योकिं इस बीमारी में नर्सींग केयर की अहम भूमिका होती है, चिकित्सा के इस आधुनिक युग में क्रिटिकल केयर यूनिट एवं अस्पताल की क्रिटकल केयर टीम किसी भी गंभीर एवं असाध्य बीमारी के प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। इस तरह एक सशक्त क्रिटिकल केयर टीम के द्वारा गंभीर मरीजों के इलाज में योगदान से जटिल बिमारियों से ग्रषित एवं मल्टीप्ल आॅर्गन फेलियर से जूझते मरीजों के स्वस्थ होने की आशा एवं मात्रा में वृद्धि हुई है एवं गंभीर बिमारियों से ग्रसित मरीज लाभान्वित भी हुए है। आॅर्किड अस्पताल अपनी स्थापना के समय से ही उच्च  गुणवत्ता युक्त क्रिटिकल केयर चिकित्सा झारखंडवासियों को मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस प्रेस वार्ता की सम्बोधित अस्पताल के ब्व्व् डाॅ ए॰के॰ पाण्डे, न्यूरोलोजिस्ट, डाॅ उज्जवल राॅय, क्रिटिकल केयर टीम के हेड डाॅ राश कुजुर, इन्टेसिभिष्ट डाॅ अमित गुप्ता एवम्, सिनियर रेजिस्ट्रार डाॅ कृष्णा प्रसाद ने किया, इस मौके पर आर्किड अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डाॅ रमन भी मौजुद थें।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...