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शुक्रवार, 16 नवंबर 2018

देश के 91 जलाशयों के जल स्तर में गिरावट

नई दिल्ली। 15 नवंबर, 2018 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 103.735  बीसीएम (अरब घन मीटर) जल संग्रह हुआ। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 64  प्रतिशत है। 08  नवंबर, 2018 को समाप्‍त सप्ताह में जल संग्रहण 67 प्रतिशत था। 15 नवंबर को समाप्‍त सप्‍ताह में यह संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 99 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 97  प्रतिशत था।
इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.993 बीसीएम हैजो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 63 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली लाभ देते हैं।
क्षेत्रवार संग्रहण स्थिति : -
उत्तरी क्षेत्र
उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेशपंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैंजो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 14.99 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 83 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 70  प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 72 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।
पूर्वी क्षेत्र
पूर्वी क्षेत्र में झारखंडओडिशापश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 12.97  बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 69 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 77 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 73 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
पश्चिमी क्षेत्र
पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 31.26 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 15.92बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 51 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 67 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 64 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
मध्य क्षेत्र
मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेशउत्तराखंडमध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 29.82 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 70 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 59 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 67 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।
दक्षिणी क्षेत्र
दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेशतेलंगाना एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं)कर्नाटककेरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 30.03 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 58 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 62 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 63 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें हिमाचल प्रदेशपंजाबराजस्‍थानउत्तर प्रदेशउत्‍तराखंडमध्य प्रदेशछत्तीसगढ़कर्नाटक,केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण कम है उनमें झारखंडओडिशा पश्चिम बंगालत्रिपुरागुजरात और महाराष्‍ट्र,एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं)आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं।

जीने के अधिकार की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताः अश्विनी चौबे


                           

बंगलोर। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे  ने बंगलौर में भारतीय इमरजेंसी मेडिसन सोसायटी  द्वारा इमरजेंसी मेडिसन जैसे बढ़ते हुए लोक महत्व के विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया । उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि यह संस्था वर्ष 2000 से लगातार इस सम्मेलन का आयोजन करती आ रही है । संस्था देश में आपातकालीन स्वास्थ्य देखभाल के लिए वर्ष 1999 से लगातार काम कर रही है । श्री चौबे ने कहा कि भारत सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से तथा अपनी कई केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए प्रतिबद्ध है । उन्होंने कहा कि भारत में इमरजेंसी मेडिसन सर्विसेज की विधिवत शुरुआत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से 2005 में हुई । इस समय देश में 31 राज्यों और यूनियन टेरिटरीज में 108 तथा 102 नंबर डायल कर एंबुलेंस बुलाने की सुविधा है । इस समय राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 102 एवं 108 को मिलाकर 18,583 एंबुलेंस काम कर रही है । इसके अलावा निजी क्षेत्र तथा राज्य सरकारों की भी और एंबुलेंस सेवाएं काम कर रही हैं ।
श्री चौबे ने बल देकर कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार जीवन जीने का अधिकार सर्वोच्च है । हेल्थकेयर, विशेष रूप से इमरजेंसी हेल्थकेयर भारत जैसे विश्व के दूसरे विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए एक बहुत बडी चुनौती है, परन्तु सरकार अपने नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं, बेहतर जीवनशैली प्रदान करने के लिए कटिबद्ध होकर लगातार काम कर रही है । आयुष्मान भारत इसका उत्कृष्ठ उदाहरण है । उन्होंने कहा कि 1 वर्ष में भारत में करीब 1,50,785 मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण होती है । डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि भारत में यह चुनौती और भी बढ़ी है क्योंकि जो मौतें होती है वे ज्यादातर 15-49 आयु वर्ग के लोगों की होती है । इस चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक केंद्रीय योजना बनाई है जिसके तहत नेशनल हाईवे पर स्थापित सरकारी अस्पतालों में ट्रौमा सेंटर स्थापित करना शामिल है । अभी तक हमने विभिन्न स्तर के ट्रौमा सेंटर देश में स्थापित किए गए हैं और 30 ट्रौमा सेंटर वर्ष 2020 तक देशभर में और स्थापित करने का प्रस्ताव है । राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रत्येक मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल डिपार्टमेंट खोले जाएंगे । फलस्वरूप इन योजनाओं और हमारी एंबुलेंस सेवाओं के माध्यम से हम इमरजेंसी मेडिकल सर्विस के क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना प्रारंभ करेंगे ।
इमरजेंसी मेडिकल चिकित्सा दुर्घटना होने के बाद यदि ‘फर्स्ट ऑवर’ में जिसको ‘गोल्डन ऑवर’ भी कहते हैं, उसके अंदर मेडिकल सहायता मिल जाती है तो कई लोगों की जानें बच सकती हैं । इमरजेंसी चिकित्सा समय पर बिमार या दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को मिल सके इसके लिए यह आवश्यक है कि देश में इमरजेंसी चिकित्सा की पर्याप्त और उत्कृष्ठ सेवाएं उपलब्ध हो । उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर इमरजेंसी एयर एंबुलेंस सेवा को बड़े पैमाने पर चलाने के लिए काम करना चाहिए । इस समय देश में 37 एमडी सीटें है जो कि इमरजेंसी मेडिसन के क्षेत्र में उपलब्ध है । इसके अतिरिक्त, निजी क्षेत्र के 35 अस्पतालों एवं संस्थाओं में ‘डीएनवी’ की डिग्री इमरजेंसी मेडिसन के क्षेत्र में दी जाती हैं । उन्होंने यह भी कहा कि हमें मेडिकल इमरजेंसी व एमडी की सीटें बढ़ाने और टेक्नीशियन्स का प्रशिक्षित पूल देश में स्थापित करने की आवश्यकता है । इसके लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने एक केंद्रीय योजना इमरजेंसी मेडिकल सुविधाओं के क्षेत्र में शुरु की है ।  जिसके लिए 423 करोड़ रुपए वर्ष 2017-20 तक के लिए निर्धारित किया गया हैं । इस योजना के तहत देशभर में 140 सेंटर स्थापित होंगे जो नेशनल इमरजेंसी मेडिकल लाइफ सपोर्ट कोर्स के क्षेत्र में प्रशिक्षण देंगे ।
अभी तक देश के 39 मेडिकल कॉलेजों को इस स्कीम के तहत ग्रांट दिया गया है । श्री चौबे ने आशवस्त किया कि भारत सरकार इमरजेंसी मेडिकल और इमरजेंसी मेडिसन केयर के प्रति विशेष रूप से सजग है । मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और नेशनल एग्जामिशन बोर्ड इस विषय पर पहले ही गंभीरता दिखा चुके हैं । 30 मार्च, 2016 को भारत सरकार ने ‘गुड समैरिटन’ विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं । भारत सरकार ने एक वर्किंग कोर ग्रुप स्थापित किया है ताकि देश में इंटीग्रेटिड इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं के लिए रोड़मेप तैयार हो सके ।
    इस अवसर पर कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, श्री शिवानन्द एस पाटिल उपस्थित थे । सम्मेलन में देश विदेश से 1200 डेलीगेट्स ने भाग लिया ।

नियमों का कड़ाई से पालन हो तो घटेंगी सड़क दुर्घटनाएं



सड़क सुरक्षा परिषद् की बैठक में बोले सीएम रघुवर दास

रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि मानव जीवन बहुत कीमती है। सड़क दुर्घटना को न्यूनतम करने का प्रयास करें। दुर्घटना में मृत्यु होने से परिवार टूट जाता है। दुर्घटना रोकने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन करायें। जिन स्थानों पर ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं, उन स्थानों पर एक किमी पहले से ही साइनेज आदि के माध्यम से लोगों को सचेत करें। तेज गति रोकने के लिए सीसीटीवी से मॉनिटरिंग करें और नियम तोड़ने वालों पर चालान करें। उक्त बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड मंत्रालय में आयोजित राज्य सड़क सुरक्षा परिषद् की बैठक में कहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी वाहनों की अधिकतम गति सीमा हाइवे पर 70 किमी प्रति घंटा तथा रिहाइशी क्षेत्रों में 40 किमी प्रति घंटे से ज्यादा न हो। इसी प्रकार दोपहिया वाहनों के लिए यह सीमा 60 किमी प्रति घंटा तथा 40 किमी प्रति घंटा से ज्यादा न हो। लोगों को इसके प्रति सचेत करने के लिए जगह-जगह स्पीड से संबंधित होर्डिंग लगायें। सबसे ज्यादा मौतें दोपहिया वाहन चालकों की होती है। इसे रोकने के लिए हेलमेट पहनना कड़ाई से लागू करें। लोगों को जागरूक भी करें। जिन स्कूलों के बच्चे दोपहिया वाहनों से स्कूल जाते हैं, उनपर विशेष ध्यान रखें। लोगों को ओवरटेक करने से भी रोकने के लिए जागरूक करें। ओवरटेक कर 2-4 मिनट बचाये जा सकते हैं, लेकिन कीमती जान को जोखिम में डालकर चलते हैं। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाइवे पर एंबुलेंस की संख्या बढ़ायें। उन एंबुलेंस को भी 108 से जोड़ दें, ताकि कम से कम समय में दुर्घटना स्थल तक पहुंचा जा सके। समय पर इलाज मिलने पर ज्यादातर लोगों की जान बचायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए रन फॉर सेफ्टी के नाम से अभियान चलायें। साप्ताहिक कार्यक्रम बनायें। सोशल मीडिया के माध्यम से भी जागरुकता अभियान चलायें। हाइवे पेट्रोलिंग वाहनों को सीट बेल्ट, वाहनों की स्पीड आदि की जांच के लिए लगायें। लेकिन वे चालान नहीं काटेंगे। वे किसी प्रकार की वसूली भी नहीं करेंगे। शिकायत मिली तो कड़ी कार्रवाई की जायेगी।

बैठक में बताया गया कि झारखंड में 143 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किये गये हैं। इन स्थानों पर विशेष काम किया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि इस वर्ष की तीसरी तिमाही में दुर्घटना तथा मृत्यु दर में कमी आयी है। ड्रंक एंड ड्राइव के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाता रहा है। हेलमेट और सीट बेल्ट की जांच में कड़ाई की जा रही है।

बैठक में मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार वर्णवाल, नगर विकास सचिव अजय कुमार सिंह, पथ सचिव के के सोन, परिवहन सचिव प्रवीण टोप्पो, सदस्य  ललित ओझा, राम बांगड़ समेत अन्य सदस्य उपस्थित थे।

युवाओं का भविष्य संवार रहे निरूप कुमार प्रधान



* परोपकार में समर्पित किया जीवन

अपने भविष्य की चिंता छोड़ गरीब व मेघावी छात्रों के जीवन को संवारने का बीड़ा उठाना महानता कहलाता है। प्रतिभाशाली छात्रों के सुनहरे भविष्य निर्माण में अपना सबकुछ न्योछावर कर देना आसान नहीं है। लेकिन इसे सच कर दिखाया है चक्रधरपुर निवासी युवाओं के मार्गदर्शक व प्रेरणास्रोत निरूप कुमार प्रधान ने। श्री प्रधान का लक्ष्य गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को नि:शुल्क शिक्षा देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा चक्रधरपुर स्थित कारमेल हाई स्कूल से हुई। वहीं के आरपीएस कॉलेज से इंटर पास किया। ग्रैजुएशन जेएलएन कॉलेज से किया। वह पढ़ने में काफी तेज रहे। मैट्रिक से लेकर ग्रैजुएशन तक कक्षा मे अव्वल रहे। मैट्रिक की परीक्षा में स्कूल टॉपर का खिताब हासिल किया। उन्होंने पढ़ाई के बाद निजी व सरकारी नौकरियों में ज्वाइन किया, लेकिन नौकरी उन्हें रास नहीं आई। बैंक, रेलवे सहित कई नौकरियों को तिलांजलि दे दी। बचपन से ही उनमें गरीबों के प्रति दया का भाव रहा। उनके पिता बंशीधर प्रधान रेलवे में काम करते हैं। गृहस्थ परिवार से आते हैं। उन्होंने गरीब व मेघावी छात्रों को पैसे के अभाव में आगे पढ़ाई नहीं कर पाने की समस्या से अवगत होते हुए चक्रधरपुर में शिक्षा कोचिंग सेंटर की स्थापना की है। यहां वह गरीब छात्रों को न सिर्फ कोचिंग देते हैं, बल्कि उन्हें नौकरी दिलाने में भी हरसंभव सहयोग करते हैं। वह कहते हैं कि बेरोजगारी का दंश झेलना अधिकतर युवाओं की पीड़ा है। गरीबी व अभावग्रस्त युवाओं को सही मार्गदर्शन देना व उन्हें रोजगार से जोड़ना श्री प्रधान का लक्ष्य है। वह बताते हैं कि गरीबी के कारण कई छात्र अपना भविष्य संवारने में सफल नहीं हो पाते हैं। उन्हें किसी सहारे की जरूरत होती है। ऐसे में परोपकार की भावना से ओतप्रोत होकर जरूरतमंद लोगों की मदद करना चाहिए। वह कहते हैं कि गरीब होना गुनाह नहीं, गरीबी में जीना गुनाह है। वर्ष 2014 में स्थापित उनके कोचिंग सेंटर से  प्रशिक्षित छात्रों में से अबतक भारतीय सेना में 170, सीआरपीएफ में 60, एस एस बी में 6 छात्र नौकरी कर रहे हैं। फिलवक्त तकरीबन 300 गरीब व मेधावी छात्र उनके कोचिंग सेंटर में विभिन्न पाठ्यक्रमों की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। युवाओं के सुनहरे सपने को साकार करने में निरूप प्रधान ने अपनी सारी ऊर्जा लगा दी है। गरीब और मेधावी युवा उन्हें अपना मसीहा मानते हैं। उनके कोचिंग सेंटर में झारखंड के अलावा पड़ोसी राज्यों के भी गरीब, प्रतिभाशाली छात्र प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। श्री प्रधान कहते हैं कि सक्षम की सहायता सब करते हैं, कोई असहाय व बेसहारों की सहायता कर उनके जीवन संवारने में समय दे, तो महानता है।
(रांची से प्रकाशित हिन्दी सांध्य दैनिक मेट्रो रेज से साभार)

झारखंड वीमेंस T-20 शारदा क्रिकेट टूर्नामेंट 2018 ट्रॉफी का हुआ अनावरण



रांची। शुक्रवार को कांके क्रिकेट एकेडमी के तत्वावधान में  बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ग्राउंड कांके में आयोजित प्रथम झारखंड वीमेंस t20 शारदा क्रिकेट टूर्नामेंट 2018 ट्रॉफी का अनावरण jsca स्टेडियम स्थित मिड विकेट कैफ़े  में किया गया।जिसका अनावरण राजीव रंजन,आशुतोष द्विवेदी, शेर खान,मो हुसैन अंसारी ने संयुक्त रूप से किया। जेएससीए के सदस्य राजीव रंजन ने बताया कि महिला T20 प्रतियोगिता का आयोजन झारखंड में महिला क्रिकेट को और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए किया जा रहा है. बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ ,बेटी खेलाओ एवं बेटियों को रोजगार दिलाओ के उद्देश्य से दिनाँक 17 11 2018 से 19 11 2018 से तीन दिवसीय टूर्नामेंट का आयोजन किया गया है।इसमें झारखंड के विभिन्न जिलों से चुने हुए महिला क्रिकेटरो के बीच  खेला जाएगा।इसमें 4 मुख्य टीम झारखंड रेड,झारखंड ब्लू,झारखंड ग्रीन, झारखंड येल्लो के बीच खेला जाएगा।
जिसका उद्धाटन दिनांक 17/11/18 को11 बजे होगा।ये जानकारी शेर खान ने दी।

बूढ़ी गायों को दिया चारा और दाना

“मारवाड़ी युवा मंच समर्पण शाखा ने किया गौ सेवा का परचम बुलंद’

रांची। गौ सेवा कार्यक्रम के तहत आज गोपाष्टमी एवं आमला नौमी के शुभ अवसर परअध्यक्ष किरण खेतान ने शुकरहट्टू ग़ौशाला में रहने वाली बूढ़ी एवं लाचार गायों के लिए चारा एवं दाना का प्रबंध किया ।
गौशाला में गौसेवार्थ गुड़ चोकर खली एवम् गायों के लिए  अन्य खाद्य सामग्री संस्था द्वारा दी गई।

इसके पश्चात शाखा सदस्यों द्वारा आज आंवला नवमी के अवसर पर  आंवला के वृक्ष की पूजा अर्चना की।
अध्यक्ष किरण खेतान ने कहा कि
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज एवं राष्ट्र में गो सेवा एवं गो रक्षा का संदेश देना है।
मौके पर शाखा अध्यक्षा किरण खेतान, सचिव मीणा टाईवाला,
उपाध्यक्ष सुनीता अग्रवाल ,
नीलम मोदी,कविता सोमानी,
आशा सराफ,अनु पोद्दार, सुनीता सोनी,पूजा सरावगी सहित कई अन्य महिलाएं कार्यक्रम में शामिल थी।

यह जानकारी मीडिया  प्रभारी राधा ड्रोलिया ने दी।

बच्चे सप्ताह में एक दिन जंक फूड खाये - डॉ अजय



रांची। लायंस इंटरनेशनल के आह्नवान पर विश्व डायबिटिक जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत जिलपाल माधव लखोटिया के नेतृत्व में सन्त ज़ेवियर स्कूल ,डोरंडा में जागरुकता सेमिनार रखा गया।

विश्व मे यह जानलेवा रोग अपनी जड़ फैलाता जा रहा है और ऐसा माना जा रहा है कि लोग जागरूक नही होंगे तो भारत मधुमेह की राजधानी में परिणित हो जाएगा और यह युवाओं में भी तेजी से फैल रहा है।
डॉ छाबरा के अनुसार टाइप वन डायबिटीज बच्चो में बहुत तेज़ी से फैल रही है।पूरे दिन में से सिर्फ एक घंटा स्पोर्ट्स या कसरत जरूर करना चाहिए बच्चो को इस बीमारी से बचाव के लिए।
डॉ अजय छाबरा एक्सपर्ट डियाबेटिशन ने विद्यालय के 500 बच्चो और 100 से अधिक लायन सदस्यो को मधुमेह के प्रति जागरूक किया स्लाइड शो एवं प्रेजेंटेशन कर के type one एवं टाइप two डायबिटीज के बारे में काफी तथ्यों को रखाऔर इसके लक्षण , रोकथाम  एवं बचाव के तरीके बताए।और स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने की बात कही।कहा कि हर स्कूल में लंच में पांच दिन रोटी और हरी सब्जी लाना अनिवार्य करना चाइये और एक दिन कुछ भी लाने के लिए बच्चों को फ्री करना चाहिए। महीने में एक बार आप जंक फ़ूड ले सकते है बाकी बचे दिन हेल्थी फ़ूड ले तो इस बीमारी से बचा जा सकता है।
बच्चो ने सवाल जवाब कर अपनी शंकाये भी मिटाई।

संत ज़ेवियर स्कूल के प्रचार्य फादर अजीत एवं फादर सुपीरियर इग्निस लकरा ने इस कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज के यूथ को इन बातो की जानकारी आवश्यक है जिनसे एक स्वस्थ भारत का निर्माण हो सके।

कार्यक्रम का संचालन रौनक सिंह एवं ला.बिनोद सिंह ने किया ।स्कूल के काफी शिक्षक एवं शिक्षिकाएं वह मौजूद थे, गंभीर सर एवं संजय टोप्पो ने मंच का
 संयोजन किया।

इस कार्यक्रम में जिलपाल माधव लखोटिया ने स्वागत भाषण दिया,द्वितीय उपजिलापल राजेशगुप्ता, पूर्व जिलपाल वी के महेन्द्रू , सतीश भार्गव ,प्रकाश अरोडा, शुभ्रा मजूमदार,दीपक कुमार,शलभ टिबरेवाल,बिनोद सिंह ,सतीश गुप्ता,नम्रता ,सुनिता, बिंटू,राजकुमारी जी, पूनम,गीता,शोभना, विनीता शरण,अनिल बुद्धिराजा,संजय,अविनाश दूबे,संजीव,मुकेश,विकास दीवान,नंदलाल विस्वाश, सिद्धार्थ घोष,जमुना प्रसाद ,आशीष खेमकाआदि सदस्य मौजूद थे।धन्यवाद ज्ञापन रंजीत सिर ने किया ।

*लायंस क्लब ऑफ रांची ईस्ट ने कराई 60 मधुमेह के मरीज़ों की
जांच

लायंस क्लब ऑफ हिनू ने  60 स्कूल स्टाफ़ एवं मरीज़ों की मधुमेह जांच सत ज़ेवियर स्कूल में किया।
कुल 120 चेक अप डायबिटीज सप्ताह के अंतर्गत हुआ है।

18th नवंबर सुबह 7.15 am सैनिक मार्केट से मेगा डायबिटीज रैली निकाली जायगी ,जिसके चीफ गेस्ट DC होंगे ।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...