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बुधवार, 6 नवंबर 2019

सासंद गीता कोड़ा तय करेंगी जगरनाथपुर का कांग्रेस प्रत्याशी

गुमला से रामेश्चवर उरांव, हटिया से सुबोधकांत सहाय हो सकते हैं प्रत्याशी


चक्रधरपुर। कांग्रेस की चुनाव समिति ने लिया महत्वपूर्ण निर्णय जगरन्नाथपुर विधानसभा सीट पर प्रत्याशी तय करने की जिम्मेदारी सांसद श्रीमती गीता कोड़ा को मिली है।गौरतलब हो कि जगरनाथपुर विधानसभा सीट कि विधायक रही श्रीमती गीता कोड़ा के सांसद बनने के बाद से विधायक सीट खाली थी अब विधानसभा चुनाव के लिए जगरनाथपुर सीट के दावेदार कौन होंगे ये निर्णय सांसद श्रीमती गीता कोड़ा लेंगी। इस बात का खुलासा कोंग्रेस के चुनाव समिति की बैठक में तैयार की गई पैनल से हुआ है ।जबकि चाईबासा जिले के  झामुमो के चार विधायकों की सीटिंग सीट पर कांग्रेस की कोई दावेदारी नही है ,जिसमे मनोहरपुर, चाईबासा,मंझगांव व चक्रधरपुर हैं।संसदीय क्षेत्र की बात करे तो कांग्रेस सरायकेला सीट में भी दावेदारी नही की है खरसावां में भी दावेदारी नही ।यानी कि झामुमो के सीटिंग सीट पर कोई दावेदारी नही। कांग्रेस के  संभावित प्रत्याशियों की सूची
के मुताबिक गुमला से लड़ सकते है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव। हटिया से सुबोध कांत का नाम चर्चा में है। घाटशिला सीट यदि कांग्रेस को मिला तो प्रदीप बलमुचू हो सकते हैं प्रत्याशी। वहीं बाघमारा से जलेश्वर महतो की चर्चा  है। 

जनसमर्थन से अगली बार फिर बनेगी भाजपा की सरकार : नीतू झा

कार्यक्रमों में उमड़ रही भारी भीड़

संताल परगना से विनय मिश्र
दुमका। भारतीय जनता पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। यह भाजपा को व्यापक जनसमर्थन मिलने के संकेत दे रहा है। जनता के सहयोग से अगली बार फिर झारखंड में भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनेगी। उक्त बातें संताल परगना क्षेत्र के लोकप्रिय समाजसेवी और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री नीतू झा ने कही। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में शामिल मंत्री राज परिवार, डॉ. लुईस मरांडी सहित अन्य मंत्रीगण अपने कार्यकाल में जनहित की योजनाओं को सफलीभूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे, इसीका परिणाम है कि जनता भाजपा के प्रति समर्पित भाव से अपना समर्थन दे रही है। श्रीमती झा ने कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में अन्य मंत्रीगण लगनशीलता के साथ जनहित के मुद्दों के प्रति संजीदा रहे हैं। इसीका परिणाम है कि भाजपा के प्रति जनता का विश्वास बढ़ा है। पूरे सूबे में पार्टी का व्यापक जनाधार है। उन्होंने कहा कि इस बार संताल परगना क्षेत्र में विपक्षी महागठबंधन का खाता भी नहीं खुलेगा। जनता पहले से ही मन बना चुकी है कि भाजपा को समर्थन देगी। भाजपा ने अपने शासनकाल में जनहित की समस्याओं को तवज्जो देते हुए उसके समाधान के प्रति संवेदनशीलता से कार्य किया। वर्ष 2014 से 2019 तक मुख्यमंत्री रघुवर
 दास के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने जनहित में कई ऐसे उल्लेखनीय कार्य किए हैं, जो मील का पत्थर साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास का सफलतम कार्यकाल झारखंड के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से लिखा जाएगा। अबकी बार भाजपा 65 पार के लक्ष्य को पूरा करते हुए विधानसभा चुनाव में सफलता का परचम लहराएगी। संताल परगना क्षेत्र में पार्टी के कार्यकर्ता लगातार जनसंपर्क अभियान में जुटे हैं।

मंगलवार, 5 नवंबर 2019

जम्मू के कण-कण में समाया है हिन्दुस्तान


               

** सुनील सौरभ

लम्बे अरसे बाद या यूँ कहें पहली यात्रा के लगभग सात साल बाद तीसरी बार जम्मू आया। मकसद तो वही होता है, जिसका अंदाजा कोई भी सहज ही लगा सकता है। सही सोचा आपने-माता वैष्णो देवी का दर्शन। कालांतर में दो बार भी इसी उद्देश्य से जम्मू आया था। लेकिन, ठहराव स्थल अलग था। घूमा तो उस बार भी था, तब जम्मू कश्मीर में धारा 370 था, अब नहीं है। हालांकि इससे जम्मू में मुझे कोई नया अनुभव नहीं हुआ। हाँ, जम्मू के कण-कण में हिंदुस्तान जरूर नजर आया। अपने आवासन स्थल जम्मू रेलवे स्टेशन के पास श्रीमाता वैष्णव देवी श्राइन बोर्ड के वैष्णवी धाम गेट से मैं, पत्नी और बेटी सुरभि निकलने लगे, तो गार्ड पर नजर पड़ी। मैंने उससे कहा-"हमलोगों को जम्मू घूमना है, किसी टैक्सी वाले को बुला दें।" तब गार्ड ने गेट पर से ही टैक्सी चालकों के एक नेता को बुला दिया। बातें हुई और हमलोग एक टैक्सी ड्राइवर के साथ जम्मू की लोकल यात्रा पर निकल पड़े।सबसे पहले रघुनाथ मंदिर से शुरुआत करने की बात ड्राइवर ने कही। हमलोग रघुनाथ मंदिर पर पहुँचे, तो गेट तक लाइन लगी थी। गर्मी भी अधिक। आधे घंटे के बाद गर्भ गृह पहुँचे। भगवान श्रीराम, माता सीता,भ्राता लक्ष्मण और श्री हनुमान जी का दर्शन किया।

रघुनाथ मंदिर से निकलने के बाद सीनियर सिटीजन की उम्र की ओर बढ़ते ड्राइवर ने देश की चर्चा  शुरू कर दी। मैं भी 'इंटरेस्ट' लेने लगा। 370 पर पूछा कि जम्मू वासी इसे किस रूप में लेते हैं, तो वो कहने लगा-"मोदी जी ने बहुत अच्छा निर्णय लिया है, यह जम्मू -कश्मीर के हित में है। अब तो पी ओ के भी भारत में आ जायेगा।" मैंने पूछा-यह आप कैसे कहते हो? उसने कहा-मोदी सरकार देश हित में हर फैसला लेकर रहेगा। मोदी है तो मुमकिन है। जम्मू वासी ड्राइवर दिलीप सहगल ने बताया कि कश्मीर के लोग मोटे दिमाग के होते हैं, नेता अपने बच्चों को विदेश में औऱ कश्मीर में रहने वालों को पत्थर बाज बना रहा है, यह बात वहाँ के लोगों को पता नही चलता है। तब तक हमलोग पार्क ( चिड़ियाघर) पहुँच गए। गाड़ी से निकलते ही भीषण गर्मी का एहसास हुआ। लेकिन, पार्क में जाने के बाद कुछ शांति मिली। हाथी को छोड़ बाघ से लेकर हिरण तक  छोटे-बड़े कई जानवरो को इस पार्क में देखने का मौका मिला। यहाँ से निकलने का मन नहीं कर रहा था। लेकिन, अन्य जगह जाना था और शाम को वापिस लौटने के लिए तैयारी भी करनी थी, इसलिए पार्क से निकल पड़े। बहुत गर्मी में पार्क में वन विभाग की महिला कर्मी भी  परेशान हो एक पेड़ के नीचे बेंच पर बैठ कर हाथ पंखा 'डोला' रहीं थीं।

हमलोगों को अन्य जगह भी घूमना था, इसलिए पार्क से निकल कर गाड़ी में आ गए। गाड़ी में बैठते ही मैंने ड्राइवर से कहा-आप भी सहगल हो, हमलोग तो फिल्मी दुनिया के के.एल. सहगल साहब को जानते हैं। उसने बताया कि उनका घर भी मेरे पास ही है। उनके परिवार के लोग रहते हैं।

पार्क से निकलने के बाद हमलोग बहु फोर्ट गये। इस फोर्ट के अंदर ही जम्मू का सबसे प्राचीन माँ काली का मंदिर है। कड़ी सुरक्षा में यह मंदिर है। भीषण गर्मी और कड़ी धूप में हम सभी मंदिर में प्रवेश कर गए। मंदिर में प्रवेश करते ही अहसास हुआ कि माँ काली का यह मंदिर जागृत है। माँ की पूजा अर्चना करने के बाद हमलोग मेन गेट से निकलने लगे, तो जम्मू कश्मीर पुलिस का दारोगा अपने साथ रहे हथियार बंद एक जवान से कहने लगा कि 'तुम्हारे देश 'बिहार' के बहुत लोग यहाँ आते हैं, तुम्हें बहुत लोगों से भेंट होगी। पता नहीं उस दारोगा ने हम सभी को देखकर कैसे  पहचान लिया कि हम बिहार से हैं!


दारोगा की बात पर हम पीछे मुड़े और जवान से पूछा कि कहाँ घर है, उसने बताया कि बेगूसराय। मैं ने पूछा कि बेगूसराय में कहाँ, तो उसने कहा-बलिया। जब मैंने उसे बताया कि मेरा घर बख्तियारपुर है और मैं पत्रकार हूँ, तो वह काफी भावुक हो गया। (बख्तियारपुर और बलिया की दूरी करीब 70-75 किलोमीटर है ) उसने बताया कि मेरे जिले के एक बड़े पत्रकार हैं-अजित अंजुम। मैंने कहा वे मेरे अच्छे मित्र हैं, तब वो और भावुक हो गया और मुझे ऐसा लगा कि खुशी में उसकी आँखें भर आयी है! वह आई.टी.बी.पी.का जवान था और एक दिन पहले ही काली मंदिर में उसकी ड्यूटी लगी थी। मेरे पास समय कम था, इसलिए हम सभी उससे विदा लिए। उसने भावुक मन से अभिवादन किया।

काली मंदिर से बाहर आया, तो ड्राइवर ने कहा कि अभी बहुत समय है, बगल में एक अच्छा पार्क है घूम लें। 25 -25 का तीन टिकट लेकर अंदर गए, तो लगा कहाँ आ गए। लेकिन, अंडरग्राउंड में अद्भुत नजारा था। बड़े बड़े अक्यूरिएम में मछली का पूरा संसार बसा था। बच्चों और मछली पर शोध करने वालों के लिए यह म्यूजियम बहुत काम का है। बेटी सुरभि और पत्नी सुभद्रा को यहाँ बहुत आनन्द आया। बाहर निकले, तो बेहद गर्मी थी।सामने एक कुल्फी वाले पर नजर पड़ी। पत्नी बोली कि 'कुल्फी खाया जाए।' हमलोग ठेले वाले के पास खड़े हो गए। बोल-चाल से लगा कि वह बिहारी है। मैंने पूछा कहाँ घर है? उसने बताया भागलपुर के सुल्तानगंज में। पूछने पर उसने बताया कि हम सभी भाई-बहन यहीं पैदा हुए। गाँव जाते हैं, तो मन नहीं लगता है। मेरा तो कर्म और जन्मभूमि भी यहीं हो गया है। पैसे देने लगा, तो उसने कम पैसे ही लिये और कहा-आपने देश के लोगो के लिए इतना तो कर ही सकता हूँ, मेरा कोई मालिक नहीं है। छोटी सी राशि छोड़े जाने से ही हम उसके अहसान तले आ गये और उसकी भावना का क़द्र किया।

यहाँ से निकलने के बाद हमलोग राजा का महल (राजा गुलाब सिंह, राजा हरि सिंह और यहाँ के वर्तमान उत्तराधिकारी राजा कर्ण सिंह का महल) देखने आ गए।
प्रकृति की गोद में और तवी नदी के किनारे महाराजा गुलाब सिंह, महाराजा हरि सिंह और इस महल के वर्तमान उत्तराधिकारी कर्ण सिंह के महल को देखकर लगा जम्मू कश्मीर के अतीत से रू-ब-रू हो रहा हूँ। महल के बड़े परिसर के पीछे के हिस्से यानी 20 वीं सदी के बने महल को होटल बना दिया गया है। अगले हिस्से यानी पुराने तीन -चार मंजिला महल को  पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अपने कब्जे में लेकर रखा है। इसी महल के एक कमरे में महाराजा का सोने का सिंहासन रखा है, जिसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में रखा गया है। महल के पार्क में महाराजा गुलाब सिंह की आदमकद मूर्ति लोगों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करती है। इस महल में जम्मू कश्मीर रियासत की स्थापना से लेकर भारत में विलय तक की कहानी सचित्र लगी है। दुर्लभ पेंटिंग भी लगे हैं। जम्मू कश्मीर के ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण क्षणों को भी तस्वीरों के माध्यम से दर्शाया गया है। मैनें यहाँ कार्यरत लोगों से पूछा कि कर्ण सिंह आते हैं कि नहीं ? कर्मचारी ने जवाब दिया कि साल में एक-दो बार आ जाते हैं।

करीब घंटे भर महल परिसर में रहने के जामवंत गुफा आ गए। बाहर से तो मंदिर जैसा रूप है, लेकिन गुफा में पूरी तरह झुक कर अंदर जाना पड़ा। इस गुफे में जामवंत के अलावा भगवान शिव के  साथ-साथ अन्य देवी देवताओं की भी मूर्तियां स्थापित हैं। अद्भुत शक्ति का अनुभव हुआ इस गुफा में। जामवंत के संबंध में यह कहा जाता है कि उनका जन्म सतयुग में हुआ था और वे त्रेतायुग तथा द्वापर में भी देखे गए। जामवंत अग्नि पुत्र थे।परशुराम जी और हनुमान जी की तरह जामवंत भी तीनों युगों में देखे गए हैं और कलयुग में भी वे हैं। रावण से युद्ध के समय जामवंत श्री राम की सेना के सेनापति थे। जम्मू के जामवंत गुफा रामायण और महाभारत के अद्भुत शक्ति वाले  पात्र जामवंत की युद्ध कौशल, वीरता, विद्वता का आज भी अहसास कराता है।

यहाँ से निकलने के बाद तवी नदी के किनारे स्थित हरकिपौडी पहुँचे। यहाँ हरिद्वार के हरकिपौडी की तरह ही सभी देवी-देवताओं के मंदिर बने हैं। जम्मू के लोग यहाँ बड़ी आस्था के साथ आते हैं। तवी नदी के इसी घाट पर मूर्तियों का विसर्जन होता है। जम्मू दर्शन का यहाँ हमलोगों का अंतिम पड़ाव था।

यहाँ से आवासन स्थल वैष्णवी धाम के लिये निकला, तो बेटा सिद्धार्थ का दोस्त जम्मुवासी  शिवांग का फोन आया कि अंकल कहाँ हैं और क्या कार्यक्रम है? मैंने कहा-अभी हमलोग वैष्णवी धाम जा रहे हैं और खाना खा कर स्टेशन जाएंगे, शाम को ट्रेन है।शिवांग बोला हम वहीं आ जाते हैं अंकल। वह अपनी छोटी बहन के साथ स्कूटी से आ गया। दोनों भाई-बहन से मिलने पर लगा कि वर्षो से परिचित हैं। थोड़ी देर में ही दोनों बच्चे हमलोगों से ऐसे घुल मिल गए कि लगा जैसे वर्षों बाद परिवार के सदस्यों से मिला हूँ। दोनों घर चलने की जिद करने लगे। ट्रेन का समय हो जाने के कारण हम शिवांग के घर नहीं जा सके, लेकिन वादा किया कि अगली बार आऊंगा, तो जरूर तुम्हारे घर चलूँगा। दोनों भाई-बहन ने यह भी कहा कि जम्मू से कोई सामान नहीं खरीदें, क्योंकि काफी महंगे और ठगाने की ज्यादा संभावना रहती है। लेकिन, हमलोग प्रसाद खरीदने के दौरान ही अन्य कुछ सामानों की खरीदारी कर ली थी। दोनों को विदा करने के बाद हमलोग जम्मू स्टेशन आ गए अर्चना एक्सप्रेस पकड़ने के लिए।

कुल मिलाकर, तीन दिनों की माता वैष्णोदेवी औऱ जम्मू की यात्रा अच्छी रही। इस दौरान जम्मू से लेकर कटरा तक जो भी मिले, उनमे धारा 370 के हटने की खुशी और पूरे देश से जुड़कर हिंदुस्तानी कहलाने का गर्व था।

सोमवार, 4 नवंबर 2019

एआईएमआईएम ने किया कोर कमेटी का गठन



रांची।  हिंदपीढ़ी स्थित  केजीएन टावर में मोहम्मद अर्श की अध्यक्षता में एआईएमआईएम  की कोर कमेटी का गठन किया गया। कमिटी के सदस्यों को विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जिम्मेदारी सौंपी गई। पार्टी के  एक्टिव मेंबर  को अपने कार्यों को जिम्मेदारीपूर्वक  करने का निर्देश दिया गया। इस मौके पर मोहम्मद अर्श, मोहम्मद अनवर ,  डॉक्टर इंतजार अली, आरिफ   खान जावेद अख्तर मोहम्मद आरिफ परवेज पारस,  आलम भाई समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे।

हैदराबाद में सलमान खान से मिले सुबोधकांत सहाय

होटल हयात में रेखा सहाय भी रहीं साथ


प्रख्यात सिने अभिनेता सलमान खान और देश के जाने- माने राजनेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय हैदराबाद स्थित होटल हयात में एक दूसरे से मिले। इस औपचारिक मुलाकात के दौरान श्री सहाय की पत्नी व ख्यातिप्राप्त टीवी कलाकार रेखा सहाय भी मौजूद थीं। श्री सहाय सपरिवार एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए हैदराबाद गये थे। वहां वह अपने परिजनों संग होटल हयात में ठहरे थे। वहीं, एक फिल्म की शूटिंग के क्रम में अभिनेता सलमान खान भी पहुंचे थे।  इस दौरान श्री सहाय और सलमान खान एक दूसरे से रू-ब-रू हुए। फुरसत के क्षणों में राजनेता और अभिनेता ने अपने-अपने अनुभवों को साझा किया और कुछ खट्टी-मीठी यादें भी ताजा की।

बढ़ने लगा कोल्हान का सियासी तापमान



विनय मिश्रा
चाईबासा। झारखंड विधानसभा चुनाव में कोल्हान में द्वितीय चरण के अंतर्गत 7 दिसम्बर को मतदान होगा। इसे लेकर कोल्हान का राजनीतिक तापमान बढ़ने लगा है। इसकी प्रमुख वजह यह भी है कि कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिले पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और अर्जुन मुंडा का क्षेत्र है।
अर्जुन मुंडा  खूंटी के सांसद बनने के पश्चात केंद्रीय मंत्री हैं। वहीं, दूसरी ओर मधु कोड़ा का जगरनाथपुर विधानसभा सीट पर विगत दो दशक से कब्जा है। उन्होंने दो बार विधायक, मंत्री के पश्चात मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया है। इसके पश्चात 2009 में निर्दलीय सांसद चुन कर इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनकी पत्नी गीता कोड़ा भी दो बार विधायक चुनी गई।  श्रीमती कोड़ा वर्तमान समय में सिंहभूम संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस की एकमात्र सांसद है। इस बार विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के साथ ही महागठबंधन की बात सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि पश्चिम सिंहभूम के कुल पांच सीटों में से चार पर झामुमो का कब्जा है। जगरनाथपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की दावेदारी रहेगी। इसके अलावा सराईकेला- खरसावांवा जिला के तीन में से दो पर झामुमो का कब्जा है। एक पर भाजपा के विधायक हैं। हाल के दिनों में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सन्नी सिंकू  ने यह बयान देकर राजनीतिक तापमान बढा दिया है कि कांग्रेस सिंहभूम के सभी सीटों पर आगे रही थी, इसलिए कांग्रेस की सभी सीटों पर मजबूत दावेदारी है। वहीं, भाजपा और आजसू के बीच भी सीटों को लेकर खींच तान जारी है। बहरहाल, सीटों के बंटवारे को लेकर यूपीए और एनडीए में मंथन शुरू हो गया है। ऊंट किस करवट बैठता है, ये तो सीटों के तालमेल के पश्चात घोषणा के बाद ही पता चल पाएगा।

जनसमर्थन से संताल में परचम लहराएगी भाजपा : नीतू झा

संताल में भाजपा का गढ़ मजबूत


संताल परगना से विनय मिश्रा
दुमका। झारखंड में अगली बार फिर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आएगी। भाजपा के पक्ष में व्यापक जनसमर्थन है। पार्टी का जनाधार पूरे सूबे में है। उक्त बातें भाजपा की वरिष्ठ नेत्री नीतू झा ने कही। उन्होंने कहा कि संथाल परगना की सभी सीटों पर भाजपा का परचम लहराएगा। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूरी तरह से कमर कस लिया है। उन्हें जनता का व्यापक समर्थन प्राप्त हो रहा है। जनता यह जानती है कि भाजपा के अलावा कोई भी दल  सरकार चलाने में सक्षम नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि विपक्ष का कुनबा बिखरा हुआ है। अवसरवादी राजनीति की शिकार होकर विपक्षी पार्टियां जनता को बरगलाने में जुटी है। देश व राज्य का कायाकल्प सिर्फ और सिर्फ भाजपा से ही संभव है। श्रीमती झा ने कहा कि संथाल परगना क्षेत्र सहित पूरे झारखंड में भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता चुनावी तैयारियों में जुटे हैं। विशेष रुप से संताल परगना प्रमंडल के सभी जिलों में भाजपा कार्यकर्ता मतदाताओं से संपर्क कर जनहित में बनाई गई भाजपा की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने में लगे हैं। इसका लाभ चुनाव में भाजपा को निश्चित तौर पर मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता पूरी तन्मयता से चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। राज्य की जनता भी समझने लगी है कि उनकी समस्याओं का समाधान भाजपा से ही संभव है। उन्होंने कहा कि झारखंड में अबकी बार 65 पार के लक्ष्य को भाजपा प्राप्त कर लेगी और फिर सत्ता संभालेगी।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...