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सोमवार, 23 जुलाई 2018

वृक्ष गंगा अभियान के तहत गायत्री परिवार ने किया वृक्षारोपण


 * जगुआर छावनी परिसर में पौधरोपण
* वृक्ष बचेगा, तो जीवन बचेगा : रामाज्ञा सिंह

रांची। गायत्री परिवार, शांतिकुंज के तत्वावधान में रातु एसटीएफ सैनिक छावनी परिसर स्थित विभिन्न क्षेत्रों में गायत्री परिवार के सदस्यों ने पौधरोपण किया। वृक्षरोपण कार्यक्रम में
 छावनी के अधिकारियों तथा कर्मचारियों के द्वारा भागीदारी की गई। कार्यक्रम की शुरुआत एक भोजपुरी प्रज्ञा गीत से शक्तिपीठ सहायक प्रभारी रघु नंदन साहु द्वारा हुई। गीत के बोल,
" जगुआर जगह में जाईब और  वृक्ष के मंत्र गीत गाईब ,
आप हम भाई बहन मिल कर
पौध लगाइब" ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर गायत्री परिवार के
प्रमोद जी और सुरेश सिन्हा ने अन्य प्रज्ञा गीतों से रिमझिम फुहारों के बीच माहौल को और गुंजायमान कर दिया।
 कुछ पौधों की विधिवत पूजा करके एवं अन्य को मंत्राभिषेक करके यज्ञाचार्य रामाज्ञा सिंह ने गायत्री परिवार शांतिकुंज संस्थान के संस्थापक गुरुदेव श्री के नव सृजन के सिद्धांतों , उनके विचारों तथा संदेश को संक्षिप्त में सुनाया । उन्होंने कहा कि धरती पर जीवन संतुलित बना रहे ,आबाद रहे ,इसकेे लिए प्रकृति ने जीव कोशिकाओं के प्रादुर्भाव के साथ ही पादप कोशिकाओं की भी रचना की। यह जीवन जितना सहज होगा , दुनिया में उतनी ही खूब खुशहाली ,खुबसूरती व हरियाली बनी रहेगी। वृक्ष बचेंगे तो ही जीवन बचेगा।
धरती के इस जलवायु-असंतुलन को संतुलित करने का कार्य एक मात्र पेड़ पौधे ही कर सकते हैं।
उन्होंने गायत्री परिवार शांतिकुंज के इस अभियान को वृक्ष गंगा अभियान बताया।
 कहा कि सर्वविदित है कि
एक वृक्ष 10 पुत्र समान है, तो हजारों वृक्षों का रोपण लाखों वंशजों के रुप में एक ऐसी विरासत छोड़ जाएगा, जिसे अनूठा और अनुपम कहते बनेगा।
 इस अवसर पर छावनी के अधिकारी एवं  कर्मचारी वृंद को पौधों को " एक मित्र या पुत्र " के रूप में इनके पालन पोषण एवं संरक्षण हेतु संकल्पित करा कर निर्धारित क्षेत्र में रोपण करने को कहा। इसमें हवलदार अमित कुमार ,
सुशील कुमार क्षेत्री,  श्यामबाग दास एवं दिलीप कुमार ने प्रतिनिधित्व किया।
 रामाज्ञा सिंह ने कहा कि यह युगधर्म की मांग है , गायत्री परिवार की पुकार और आह्वान
है कि समय का एक बड़ा अंश नवसृजन में लगे और जन जागरण के प्रचंण्ड पुरुषार्थ में लोग जुड़ें । प्रकृति के लिए समय दान दिया जाएगा, तो ही वे हमारे लिए जीवन दान का पुण्य प्रसाद प्रदान करेगी। इस मौके पर गायत्री परिवार के सदस्यों के अलावा एसटीएफ के कई अधिकारी और जवान मौजूद थे।

लातेहार में चल पड़ी विकास की आंधी


* ग्रामीणों से सीधा संवाद कर रहे उपायुक्त
जनसमस्याओं का त्वरित निदान प्राथमिकता : राजीव कुमार

लातेहार के उपायुक्त राजीव कुमार
रांची। झारखंड के नक्सल प्रभावित जिला लातेहार में विकास योजनाओं की गति तेज हुई है। चहुंओर विकास की बयार बहने लगी है। इस दिशा में उपायुक्त राजीव कुमार की पहल रंग ला रही है। जिले के अति उग्रवाद प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों संग बैठकें कर उनकी समस्याओं से रू-ब-रू होना और उसके निदान हेतु त्वरित कार्रवाई करना उनकी दिनचर्या में शुमार है। उनका मानना है कि गांव और पंचायत स्तर पर समस्याओं का समाधान किए जाने और सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित कराने से  ग्रामीण क्षेत्रों में कायाकल्प संभव है। ग्रामीणों के बीच आर्थिक विकास की योजनाओं को गतिशील बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस पहल की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि  ग्राम स्वराज योजना को मूर्त रूप देने में जरा भी कोताही बरदाश्त नहीं की जानी चाहिए।
 श्री कुमार जिले के मनिका, बरवाडीह, गारू सहित अन्य प्रखंड के गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से मिल रहे हैं और उनकी समस्याओं से अवगत हो रहे हैं। यह सिलसिला निरंतर जारी है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं के जिम्मे विकास की कमान भी सौप दिया है। सखी मंडल को सशक्त बना रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और ग्रामीणों के जीवन स्तर में परिवर्तन लाने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करने में जुटे हैं। विकास योजनाओं के कार्यान्वयन में कोताही  बरतने वाले सरकारी कर्मियों को उन्होंने चेतावनी दी है। कुछ लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए उनके वेतन पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास योजनाओं का सफल कार्यान्वयन ग्रामीण युवाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने में काफी सहायक होगा। इससे उग्रवादी गतिविधियों पर भी अंकुश लगेगा। गांवों के दौरे के क्रम में उन्होंने जनसमस्याओं के त्वरित निदान का निर्देश अपने मातहत अधिकारियों को दिया। यही नहीं, उन्होंने ग्राम स्वराज योजना के तहत संचालित सरकारी योजनाओं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, सौभाग्य योजना, मिशन इंद्र धनुष, कृषि कल्याण योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना सहित अन्य योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को देते हुए इन योजनाओं का लाभ लेने की अपील की। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं के बीच रोजगार सृजन के लिए भी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। श्री कुमार ने कहा कि जनसमस्याओं का शीघ्र निष्पादन उनकी प्राथमिकता है।

गंगा के पानी में सुधार के संकेत

नदी जल गुणवत्‍ता निगरानी का आंकलन
     
इलाहाबाद। केन्‍द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के गंगोत्री से लेकर बंगाल की खाड़ी तक गंगा नदी के पानी की गुणवत्‍ता की निगरानी के दौरान पाया गया कि 2016 की तुलना में 2017 में नदी के पानी की गुणवत्‍ता में सुधार हुआ है। इसमें ऑक्‍सीजन की मात्रा अधिसूचित जल गुणवत्‍ता मानक की सीमा में पाई गई है। यह इस बात का संकेत है कि सभी मौसम में नदी पारिस्थितिकी संतोषजक स्‍तर पर है। हालांकि हरिद्वार से कन्‍नौज के बीच तथा कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी और पश्चिम बंगाल में नदी के कुछ हिस्‍से में जैविक ऑक्‍सीजन आवश्‍यकता से कम पाया गया है।
   गंगा नदी में जल गुणवत्‍ता निगरानी का काम 2017 में शुरू किया गया था। इससे यह संकेत मिले हैं कि 2016 की तुलना में नदी के पानी की गुणवत्‍ता बेहतर हुई है। पानी में घुलनशील ऑक्‍सीजन का स्‍तर 33 स्‍थानों में बेहतर हुआ है। वहीं दूसरी ओर 26 स्‍थानों में जैविक ऑक्‍सीजन की कमी में सुधार हुआ है। 30 स्‍थानों में नदी के पानी में कोलीफॉर्म बैक्‍टीरिया की संख्‍या भी घटी है।गंगा की सफाई पर वित्‍त वर्ष 2014-15 से लेकर 30 जून, 2018 तक कुल 3867.48 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
    नदी की सफाई और संरक्षण एक सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा  मिशन (एनएमसीजी) के जरिए राज्‍य सरकारों को गंगा की सफाई के लिए वित्‍तीय मदद दी जा रही है। एनएमसीजी ने गंगा बेसिन वाले क्षेत्रों में सीवेज के निस्‍तारण के लिए आवश्‍यक आधारभूत संरचनाओं से जुड़ी 105 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। नदी सफाई और गंगा संरक्षण के लिए इस परियोजना के तहत 17484.97 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इन परियोजनाओं में से 26 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इनके जरिए रोजाना 421 मिलियन लीटर सीवेज का शोधन किया जाता है। इसके साथ ही करीब 2050 किलोमीटर नई सीवर लाइनें बिछाई गई है। परियोजना का बाकी काम विभिन्‍न चरणों में है।
    
निम्‍नलिखित स्‍थानों में गंगा नदी के पानी में सुधार :
  • ऋषिकेश यू/एस
  • हि‍रद्वार डी/एस
  • इलाहाबाद (संगम) डी/एस
  • कानुपर डी/एस
  • वाराणसी, अस्‍सी घाट यू/एस
  • बक्‍सर रामरेखा घाट
  • पुनपुन, पटना
  • डायमंड हार्बर
  • गार्डन रीच
  • बहरामपुर
  • हावड़ा शिवपुर
  यह जानकारी केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्‍य मंत्री डॉ. सत्‍यपाल सिंह ने आज राज्‍यसभा में एक लिखित उत्‍तर में दी।    

रविवार, 22 जुलाई 2018

सोसाइटी आफ जियो साइंटिस्टस् की कार्यकारिणी गठित


* डॉ.अनल सिन्हा फिर महासचिव बने।
रांची। भू-गर्भ वैज्ञानिकों की राज्य स्तरीय संस्था सोसाइटी आफ जिओ साइन्टिस्ट्स की वार्षिक आमसभा रविवार को राजधानी के अशोकनगर, रोड संख्या4 स्थित कार्यालय में हुई। आमसभा में वर्ष 2018-20 के लिए कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया। अध्यक्ष पद के लिए डॉ. एवी सहाय, महासचिव डॉ.अनल कुमार सिन्हा और कोषाध्यक्ष डॉ.एस भट्ट चुने गए। इस अवसर पर डॉ.अनल सिन्हा ने कहा कि झारखंड के विकास में संस्था महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। भू-गर्भ वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता का लाभ राज्य को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि आगामी सितंबर माह में भू-गर्भ वैज्ञानिकों के प्रस्तावित राष्ट्रीय सेमिनार के आयोजन को सफल बनाने को लेकर भी आमसभा में चर्चा की गई। इसके लिए एक समिति गठित की गई। इस अवसर काफी संख्या में संस्था के सदस्यगण सपरिवार मौजूद थे।

कतरास कोयलांचल में धधकती जनाक्रोश की आग



जन-दबाव में प्रशासन ने मुक्त किया आंदोलनकारी नीतेश ठक्कर को

उत्तम मुखर्जी

धनबाद। केंद्र व राज्य सरकार की जनविरोधी भूमिका के खिलाफ कोयले की राजधानी धनबाद का कतरास शहर सुलग उठा है। पूरा शहर ठप्प पड़ा हुआ है। एक साल पहले केंद्र ने इस रूट पर चलनेवाली 26 जोड़ी ट्रेनों का परिचालन बन्द कर दिया है। ज़मीन के नीचे कोयले पर लगी आग के कारण सम्भावित खतरे का मंत्रालय ने बहाना बनाया है।बिना वैकल्पिक व्यवस्था किये इतना बड़ा फैसला लेने पर जनता बेहद नाराज़ है। एक साल से यहां क्रमिक विकास मंच के नीतेश ठक्कर व पार्षद विनोद गोस्वामी के नेतृत्व में आंदोलन चल रहे हैं। इस रूट से होकर राज्य की राजधानी रांची,उड़ीसा व दक्षिण के राज्यों में ट्रेनों का आवागमन था।
इस क्षेत्र में बीसीसीएल के पांच महत्वपूर्ण क्षेत्र अवस्थित हैं। आंदोलन के कारण कोयले का परिवहन भी ठप्प पड़ा हुआ है।
इस बीच जागो संस्था के प्रमुख राकेश रंजन यादव ने बताया कि कॉर्पोरेट घरानों के इशारे पर कोयला निकालने के लिए सरकार जनविरोधी कदम उठा रही हैं।
 नीतेश ठक्कर को पुलिस द्वारा गुपचुप तरीके से उठाए जाने  पर भी जनता आक्रोशित है। अंततः मध्यपूर्व रेलवे के महाप्रबंधक ने प्रभावित क्षेत्र का मुआयना किया। पूर्व मंत्री ओपी लाल समेत अन्य ने उनसे बातचीत की। अंग्रेजों की रेल को आज की सरकार ने तहस नहस कर दिया।पूरे शहर में सन्नाटा छाया हुआ है। ठेला,खोमचावाले,आमलोग,गरीब-गुर्बे भूखमरी के शिकार हो गए।स्थिति इतनी भयावह है कि लोग अब शहर छोड़कर भागने लगे।

बोतल से निकलेगा असम समस्या का जिन्न



देवेंद्र गौतम

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने असम में एनआरसी को 15 अगस्त, 1985 को हस्ताक्षरित असम समझौते के अनुरूप अपडेट किए जाने की घोषणा तो कर दी है लेकिन समस्या इतनी जटिल है कि समाधान के लिए यह काफी नहीं होगा। अभी और माथापच्ची करनी पड़ेगी। नई जटिलताएं उभरेंगी। राजनाथ सिंह ने पूरी प्रक्रिया माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार किए जाने और इसपर सतत निगरानी रखे जाने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि एन.आर.सी. को लेकर जारी कवायद पूरी तरह निष्पक्षपारदर्शी एवं सतर्कतापूर्ण तरीके से जारी रहेगा। प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में सुनवाई किए जाने का पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक व्यक्ति को न्याय मिले और उसके साथ मानवीय तरीके से बर्ताव किया जाए यह सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही कानून के तहत सभी को समुचित समाधान उपलब्ध कराया जाएगा।
गृहमंत्री श्री सिंह ने स्पष्ट किया है कि 30 जुलाई को प्रकाशित किया जाने वाला एन.आर.सी केवल एक प्रारूप होगा। इस प्रारूप के प्रकाशन के बाद दावों एवं आपत्तियों के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध होंगे। सभी दावों एवं आपत्तियों की पूरी तरह जांच की जाएगी। दावों एवं आपत्तियों के निपटान से पूर्व सभी को सुनवाई का पूरा अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। तब कहीं जाकर अंतिम एन.आर.सी प्रकाशित की जाएगी।
श्री सिंह ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह सुनिश्चित करे कि कानून और व्यवस्था बनी रहे। केंद्र सरकार असम सरकार को इस मामले में हर तरह की सहायता उपलब्ध कराएगी।
दरअसल असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण जनसांख्यिक ढांचा असंतुलित होता जा रहा है। इसीलिए लंबे समय से एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजंस का काम पूरा करने की मांग की जा रही थी। पूर्व की सरकारों ने इस मामले में उदासीनता का रुख अपना रखा था। मोदी सरकार बनने के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई। इस मामले को लेकर लंबे समय से असंतोष था। अखिल असम छात्र संघ (आसू) ने तो एनआरसी का काम होने तक राज्य में आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया पर रोक की मांग की थी। उसका कहना था कि आधार कार्ड के जरिए गैरकानूनी घुसपैठिए भी असम का नागरिक होने का दावा कर सकते है। केंद्र सरकार ने विभिन्न सामाजिक योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड को भले ही अनिवार्य बना दिया है। लेकिन विरोध के कारण असम में अब तक महज छह फीसदी लोगों का ही कार्ड बन सका है। आसू असम का ताकतवर संगठन है। आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया रोकने की उसकी मांग को नज़र-अंदाज नहीं किया जा सकता। आसू इस बात पर अडिग है कि नागरिकता के लिए कट ऑफ वर्ष 1971 ही रखा जाए। उससे पहले आने वाले लोगों को ही एनआरसी में शामिल किया जाना चाहिए। असम समझौते में भी 1971 को ही कट ऑफ वर्ष रखा गया है। लेकिन मोदी सरकार का अपना एजेंडा है। सरकार चाहती है कि बांग्लादेश, अफगानिस्तान व अन्य देशों से आने वाले हिंदुओं को असम में शरण और नागरिकता दी जाए। आसू समेत कई संगठन इसके पक्ष में नहीं हैं। वे 1971 के बाद आए हिन्दुओं को भी नागरिकता दिए जाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे सामाजिक खाई बढ़ेगी।
 ज़मीनी सच्चाई यह है कि एनआरसी की वजह से राज्य में वैध तरीके से रहने वाले लाखों मुसलमानों के भी राज्य से बाहर निकाले जाने का खतरा पैदा हो गया है। इससे वे लोग दहशत में जी रहे हैं।
      असम में बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या बहुत पुरानी और जटिल है। यहां घुसपैठ के मुद्दे पर लंबा आंदोलन चल चुका है। आसू की अगुवाई में अस्सी के दशक में जबर्दस्त आंदोलन हुआ था। उसी की कोख से असम गण परिषद (अगप) का जन्म हुआ था। उस आंदोलन के बाद हुए चुनावों में इसी मुद्दे पर अगप को भारी बहुमत मिला था और प्रफुल्ल कुमार महंत राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे। उसके बाद से ही थोड़े-थोड़े अंतराल पर यह मुद्दा उठता रहा है।
      दरअसल, घुसपैठ की इस समस्या की जड़ें देश की आजादी के पहले तक फैली हैं। असम के प्रमुख इतिहासकार अमलेंदु दत्त के मुताबिक वर्ष 1911 में ब्रिटिश जनगणना आयुक्तों ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन पूर्वी बंगाल से राज्य में बड़े पैमाने पर घुसपैठ का जिक्र किया था। उसके एक साल बाद सिलहट डिवीजन को बंगाल से काट कर असम का हिस्सा बना दिया गया। इसके बाद मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ने लगी। उसी समय से हिंदू और मुस्लिम तबके के बीच झड़पों की शुरूआत हो गई।
वर्ष 1937 में कांग्रेस नेता जवाहर लाल नेहरु ने असम के विकास व समृद्धि के लिए पूर्वी बंगाल से लोगों के आने को सही ठहराया था। लेकिन देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने यह कहते हुए इस दलील का विरोध किया कि ब्रह्मपुत्र घाटी में बिहार के हिंदुओं को बसाना मुस्लिमों को बसाने से बेहतर है। आजादी के बाद कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर घुसपैठियों को खदेड़ा था। बाद में गोपीनाथ बोरदोलोई सरकार ने इस नीति को धीमा रखने का फैसला किया था।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि एनआरसी अपडेट होने के बाद भी विवाद थमने वाला नहीं हैं। वैध दस्तावेजों के अभाव में यह साबित करना मुश्किल है कि कौन वर्ष 1971 से पहले असम में आया था और कौन उसके बाद आया। वर्ष 1971 से पहले राज्य में पहुंचे हजारों मुस्लिम परिवारों के पास अपनी पहचान के कोई कागजात नहीं है। ऐसे में उनके सिर पर बांग्लादेश भेजे जाने की तलवार लटक रही है। भारत सरकार ने वर्ष 1951 की जनगणना में शामिल तमाम लोगों और उनके वंशजों को एनआरसी में शामिल करने का फैसला किया है। लेकिन 1951 से 1971 के बीच आए अधिकांश लोगों के पास कोई कागजात नहीं हैं। उनको मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
राज्य की मतदाता सूची में हजारों लोगों का नाम संदिग्ध नागरिकों की सूची में रखा गया है। मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद ऐसे तमाम लोगों को खदेड़ने और बांग्लादेश के साथ लगी सीमा सील करने का वादा किया था। कई अल्पसंख्यक संगठनों ने सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन भी शुरू किया था। अब एनआरसी को अपडेट करने की घोषणा के साथ ही उनके सिर पर मंडराता खतरा लगातार गंभीर होता जा रहा है। इसकी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही असम के सामाजिक, राजनीतिक क्षितिज पर तरह-तरह के बवंडर उठते दिखाई देंगे। मोदी सरकार के लिए उनसे निपटना आसान नहीं होगा।

रथ मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम




            रांची।  ऐतिहासिक जगन्नाथपुर रथ मेला में जिला सूचना एवं जनसंपर्क इकाई द्वारा 10 दिवसीय विभागीय सांस्कृतिक मंच पर पंजीकृत दल नागपुरी सांस्कृतिक दल एवं न्यू झारखंड कला संगीत सृजन केंद्र  के स्थानीय कलाकारों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। विभागीय मंच पर इन कलाकारों द्वारा लोक संगीत एवं नृत्य प्रस्तुत किया।
साथ ही पंजीकृत कला दलों के कलाकारों के द्वारा नुक्कड़-नाटक के माध्यम से लोगों को सरकार की योजनाओं के संबंध में जानकारी दी एवं योजनाओं के प्रति जागरूक किया। 10 दिवसीय विभागीय सांस्कृतिक स्टाॅल पर लगातार कार्यालय के कर्मचारी एवं जन संवाद केन्द्र के प्रतिनिधि द्वारा सरकार की योजनाओं के संबंध में जानकारी लोगो को दी जा रही है एवं योजनाओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही एलईडी प्रचार वाहन के माध्यम से जगन्नाथपुर रथ मेला में सरकार की योजनाओं से संबंधित विडियो क्लिप दिखाकर लोगो को जागरूक किया जा रहा है।  इसमें मुख्यतः 1 रुपए में रजिस्ट्री, ग्राम स्वराज अभियान , मीजल्स रुबेला , फसल बीमा योजना, ट्रैफिक के नियमो का पालन , वज्रपात से बचाव , सोभग्य योजना, उज्ज्वला योजना, उजाला योजना, जैसी अनेक विषयों पर लगातार आम जनों को एलईडी वाहन, नुक्कड़ नाटक, एवम् गीत संगीत के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है ।साथ योजनाओं से संबंधित पम्पलेट, पोस्टर एवं विभागीय पुस्तक का भी वितरण किया जा रहा है।

जन संवाद के कर्मी द्वारा लगातार 181 के बारे में  स्टॉल  पर आए लोगों को लगातार जानकारी दी जा रही है ।

विदित हो यह जन संपर्क इकाई, रांची का वृहद कार्यक्रम है जिसमें  अब तक स्टॉल में आए करीब  बीस हजार से ऊपर व्यक्तियों को सरकार की अनेक योजनाओ  बारे में जानकारी दी जा चुकी है।

कल स्टॉल का समापन  है । जिसमें मुख्य रूप से प्रज्वलित बिहार ,पांच परगना छाऊ नृत्य पार्टी एवम् न्यू झारखंड कला संगीत सृजन केंद्र के द्वारा नागपुरी , छाऊ,  उरांव, एवम् अन्य कला के द्वारा लोगो को गीत संगीत के माध्यम से जानकारी डी जाएगी।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...