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शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

दुर्घटनाओं को आमंत्रण देते विकास नगर की सड़क के गड्ढे

हाल रांची नगर निगम के वार्ड 51 का
विकास नगर रोड नंबर 2 में सड़क बदहाल
रांची / हटिया।  नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 51 अंतर्गत विकास नगर रोड नंबर 2 (लटमा रोड- हेसाग-कचनार टोली संपर्क पथ ) की कच्ची सड़क बदहाल है। सड़क पर बड़े- बड़े गढ्ढे दुर्घटना को आमंत्रण दे रहे हैं। बरसात के मौसम में इस मार्ग पर जलजमाव से वाहनों का आवागमन भी बाधित हो रहा है। पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी हो रही है। इस क्षेत्र के नागरिकों ने बताया कि सड़क के पक्कीकरण के लिए स्थानीय विधायक से अनुरोध किया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वार्ड पार्षद ने इस संबंध मे मिली शिकायत पर गभीरता दिखाई और अपने स्तर से मार्ग पर बने गढ्ढों को मोरम-छाई(डस्ट ) से भरवाया। इस क्षेत्र के निवासियों के मुताबिक यह मार्ग हेसाग, कचनार टोली, लटमा रोड, सिंह मोड़ सहित कईअन्य गांवों को भी जोड़ता है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों लोग गुजरते हैं। पक्की सड़क के अभाव में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में स्थानीय नागरिकों ने पार्षद को अवगत कराते हुए जल्द सड़क निर्माण का अनुरोध किया है। स्थानीय निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता व समाजसेवी आर.सी. सरकार ने बताया कि पक्की सड़क निर्माण के लिए कई बार सांसद और विधायक से अनुरोध किया गया, लेकिन इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई।
 * क्या कहते हैं पार्षद :
इस संबंध में वार्ड पार्षद सविता लिंडा ने कहा कि पक्की सड़क निर्माण जल्द होगा। नगर निगम से इसका टेंडर हो गया है। फंड भी आवंटित हो गया है। बरसात के बाद सड़क बनाने का काम शुरू होगा। उन्होंने कहा कि यह सही है कि उक्त मार्ग पर पक्की सड़क नहीं होने से लोगों को दिक्कत हो रही है। फिलहाल जलजमाव रोकने के लिए उक्त मार्ग पर डस्ट बिछाकर समतलीकरण किया गया है।

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी के खिलाफ जन प्रतिवाद मार्च


झारखंड के मशहूर शख़्शियतो द्वारा
देश-झारखंड के मशहूर मानवधिकार-सामाजिक-बौद्धिक एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी-सत्ता संरक्षित ज़ुल्म के ख़िलाफ़ झारखंड के राजनैतिक दलों-सामाजिक संगठनों-आंदोलनकारी-बुद्दिजीवियों-पत्रकारों द्वारा
रांची विश्वविद्यालय गेट से परमवीर अल्बर्ट एक्का चौक तक नागरिक मार्च कर मानव श्रंखला में तब्दील हो गया.
नागरिक प्रतिवाद में नारों-कविता भरी तख्तियों थी,जिसमें "भेड़िया गुर्राता है
तुम मशाल जलाओ
उसमें और तुममें
यही बुनियादी फ़र्क़ है"
-सर्वेश्वर दयाल सक्सेना,

"जब एक डरा हुआ बादल
न्याय की आवाज का गला घोंटता है
तब खून नहीं बहता
आंसू नहीं बहते
बल्कि रोशनी बिजली में बदल जाती है
और बारिश की बूंदें तूफान बन जाती हैं।
जब एक मां अपने आंसू पोछती है
तब जेल की सलाखों से दूर
एक कवि का उठता स्वर
सुनाई देता है"- वरवर राव

"तेरा निजाम है सिल दे जुबान शायर की,
ये एहतियात जरूरी है इस बहर के लिए"
-दुष्यंत कुमार

 "लोग कहते हैं कि ये बात नहीं कहने की.
तुमने कह दी है तो कहने की सजा लो यारों"
-दुष्यंत कुमार

"असहमति लोकतंत्र का सेफ़्टी वॉल्व है,यदि आप इन सेफ़्टी वॉल्व की इज़ाज़त नही देंगे,तो यह फट जाएगा"--सुप्रीमकोर्ट

"ज़ुल्मी जब-जब ज़ुल्म करेगा सत्ता के गलियारों से,चप्पा-चप्पा गूंज उठेगा इंक़लाब के नारों से"

देश-झारखंड के मशहूर सामाजिक-मानवाधिकार-बौद्धिक एक्टिविस्टों पर दमन लोकतंत्र के लिए घातक साबित होगा, असहमति लोकतंत्र का सुरक्षा कवच है, सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दमन कर अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला किया जा रहा है,केंद्र सरकार पूरी तरह से तानाशाही पर उतर आई है जो सत्ता का दुरुपयोग कर रही है,भीमा केरेगांव की घटना कोई षडयंत्रकारी घटना नही थी बल्कि केंद्र सरकार द्वारा लिए गये गलत फैसले के खिलाफ जनविरोध था,इसे प्रधानमंत्री के खिलाफ षडयंत्र के रुप मे देखना या जोड़ना गलत है.

प्रतिवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय अवर्डेड फिल्ममेकर मेघनाथ एव बीजू टोप्पो,देशव्यापी एक्टिविस्ट ज्यां द्रेज,अवर्डेड फिल्ममेकर श्रीप्रकाश,साहित्यकार महादेव टोप्पो,वरिष्ठ पत्रकार श्रीनिवास,वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार विनोद कुमार,प्रोफेसर यूनियन के अध्यक्ष डॉ बब्बन चौबे,आदिवासी बुद्दिजीवी के अध्यक्ष प्रेमचंद मुर्मू,विस्थापन विरोधी आंदोलनकारी दयामनी बारला, झारखंड आंदोलनकारी बशीर अहमद,पूर्व डिप्टी मेयर रांची कांग्रेस नेता अजयनाथ शाहदेव,आदिवासी मूलवासी के आज़म अहमद,AIPF के नदीम खान,मजदूर नेता शुवेन्दु सेन,जगरनाथ उरांव,यूएमएफ़ के अफ़ज़ल अनीश,साईंस फोरम के समीर दास,लोकतंत्र बचाओ मंच के वरुण कुमार,भारत भूषण,मानवधिकार कार्यकर्ता अलोका कुजूर,जेरोम जोराल्ड कुजूर,फादर महेंद्र,सुनील मिंज,अजय कुंडुला,सेराज दत्ता,अंकित अग्रवाल,आकाश रंजन,सुशीला टोप्पो,दीपा मिंज,नरेश मुर्मू,राकेश रौशन, स्टीफन लकड़ा,रूपेश साहू,भाकपा माले के भुनेश्वर केवट,अमरजीतसिंह, सुनील जायसवाल, एतवारी साव,इबरार अहमद,मो तस्लीम,सुनीता,एलिसा, सिलेस्टिना, पूरन दास,राजेन्द्र पासवान,अमित पांडेय,सीपीआई के अधिवक्ता सचिदानंद मिश्रा,एसयूसीआई के मंटू पासवानअमर महतो,श्यामल मांझी,तुलसी,बिनोद लोहरा,मासस के सुशांतो मुखर्जी,आम आदमी पार्टी के राजेश कुमार,यास्मीन लाल,दानिश शेख़,अनिर्बान सरकार,मनोज बेदिया,सहजाद आलम,जाबिर हुसैन जेवीएम के अकबर कुरैशी,साजिद उमर,मो इरफ़ान,अल्तमस,रेहान समेत अन्य में मो सहजाद,मो अफ़ज़ल,छोटू,राजन,बिटटू, तासिफ,सैफ,मो साद,मो इमाम,शाहिद,हीरा,जमील,कैलाश,मनोज,गुड्डू,आदि उपस्थित थे..

निपु सिंह ने अपने जन्मदिन पर लगाया पौधा


रांची। जिले की प्रसिद्ध समाजसेवी एवं नशा मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त के आंदोलन कर्ता निपु सिंह ने तीस अगस्त को अपने जन्मदिन के अवसर पर पौधा रोपण किया इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पौधा लगाना बड़ी बात नहीं है बल्कि पौधा का देखभाल करके उस पौधा को बड़ा करना बड़ी बात है श्री सिंह ने कहा कि पौधा हर कोई लगाता है लेकिन देख रेख नहीं करने के कारण पौधा नष्ट हो जाता है उन्होंने कहा कि पौधा और जल अनमोल रत्न है आज उसके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है यही स्थिति रही तो आने वाले समय में लोग पानी के लिए लड़ेंगे और शुद्ध हवा के लिए तरसेंगे अभी से ही सभी लोगों को पौधा और जल बचाने के लिए आगे आना चाहिए श्री सिंह ने कहा कि जीवन और प्रकृति के बीच घनिष्ठ संबंध है गंगा भारतीय सभ्यता और संस्कृति की पहचान है अब वह गंदगी धोने वाली नाली के समान हो गई है ऐसे ही रहा तो एक दिन गंगा का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा उन्होंने कहा कि आने वाले पीढ़ी के लिए पौधा और पानी बचाना बहुत ही जरूरी है और इस दोनों को प्रतिदिन देख रेख करना भी जरूरी है नहीं तो आने वाले दिन में ऑक्सीजन और पानी के लिए तरसेंगे लोग श्री सिंह ने जोर देकर कहा कि विनाश का कारण दिखावटी सामान आज हमारे देश में हो गया है और प्रकृति के बिना हमारे जीवन की कल्पना करना ही बेमानी होगा महिला हो या पुरुष हर व्यक्ति को यह ठान लेना चाहिए कि अपने जीवन में मात्र दो पौधे लगाएंगे और उसका निर्वाहक पूर्वक देख रेख करेंगे तभी अपना और अपने आने वाले पीढ़ी के जिंदगी का खुशहाल करेंगे

गरीबों को उनका हक देना होगाः इंदरजीत सिंह

रांची। हटिया रेलवे डीआरएम आफिस का सामने रेलवे ठेका सफाई कर्मचारी संध एवम NSUI के उपाध्यक्ष इंदरजीत सिंह के नेतृत्व में एक दिवसीय धरना दिया गया। ज्ञात हो कि  रेलवे के 400 कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा रहा। विदित हो कि रेलवे सफाई का टेंडर कुछ दिन पहले हुवा जो कि एक बाहर की कंपनी MS सपोर्ट सर्विस प्राइवेट लिमिटेड और पैंथर लिमिटेड को रेलवे ने काम दिया उनलोगों ने यहां की कोई निजी कंपनी को पेटी म् कॉन्ट्रैक्ट दे दिया।इंदरजीत सिंह ने कहा कि उनलोगों ने पुराने जो 10 साल से काम कर रहे कर्मचारियों को काम से बिना कोई नोटिस के निकाल दिया। 3 महीने का बकाया पैसा भी नही दिया।  सरकार के तरफ से जो 13000 रुपया आवंटित है उसे भी काट कर किसी को 5000 तो 9000 दिया जा रहा।  अपनी मांगों को लेकर सभी लोग एक दिन पहले डीआरएम पास गए, लेकिन वहां drm ने कहा कि हमने कॉन्ट्रैक्ट दे दिया है अब ठेकेदार समझे जो करना है। और रात में जीआरपी के द्वारा बल पूर्वक लाठी भी चलाया और कुछ लोगो को जीआरपी थाना के बंद कर दिया।  निजी ठेकेदारों के द्वारा गरीब कर्मचारियों को जानवरों की तरह व्यवहार किया जाता। न पेमेंट देते न छुट्टी। सब पैसे का खेल हो रहा। गरीब को कुचला जा रहा। न किसी को मेडिकल, न पफ का भत्ता दिया जाता। सरकार और ठेकेदारों की मिली भगत से गरीब बेबस कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा।इन्द्रजित सिंह ने बताया कि अभी नए टेंडर म् ठेकेदारों ने बाहरी लोग एवं नाबालिक लड़को को काम पे रखा जो कि सारा सर अन्याय और गलत है।  रेल प्रशाशन  हाय हाय, गरीबो क् हक़ देना होगा, हमारी मांगे पूरी करो  के नारों के साथ आज एक दिवसीय धरने पे बैठे है। और ये धरना और कार्यक्रम प्रतिदिन चलता रहेगा जब तक मांगे पूरी नही होती। जब तक गरीबो को उनका हक नही मिलता आंदोलन जारी रहेगा। धरने में मुख्य रूप से सलीम खान, जगदीश साहू, NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष इंदरजीत सिंह, अनिका देवी, रोशन टोप्पो,स्टीफन लुइस, कलावती देवी, पप्पू डोंगरे, पुष्पा, निशा, रूबी, ललिता, बेरोनिका, रानी आदि सैंकड़ो की संख्या में मजदूर लोग मौजूद थे।

अटल जी की स्मृति में महिला मैत्री फुटबाल मैच

रांची। सामाजिक संस्था शारदा फॉउन्डेशन की ओर से खेल दिवस के शुभ अवसर पर एकदिवसीय  स्व अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल महिला मैत्री फुटबॉल मैच का आयोजन टुंगरी टोली जतरा मैदान हरमू में आयोजित किया गया। मैच बिरसा विकास क्लब टुंगरी टोली एवं सोनू फुटबॉल क्लब के बीच हुआ। इस  एक दिवसीय मैत्री मैच में पहले  50 मिनट तक किसी टीम की ओर से कोई गोल नहीं हुआ । इस के बाद ताइ ब्रेकर में बिरसा विकास क्लब ने सोनू फुटबॉल क्लब को 05-03गोल से हराया।आज के मैच में बेस्ट प्लयेर का खिताब अलिसा टोप्पो को दिया गया।इस अवसर पर बिरसा विकास क्लब विजेता रही।सभी खिलाड़ियों को मुख्य अतिथि समाजसेवी राजीव रंजन ,आशुतोष द्विवेदी,वार्ड पार्षद अरुण झा ने ट्रॉफी ओर मेडल देकर संम्मानित किया। इस अवसर पर खेल प्रशिक्षक गोविंद झा ,संतोषी,गुड़िया,अनिशा, सोनी समेत अन्य खिलाड़ी गन ओर खेलप्रेमी उपस्थित थे।ये जानकारी गोविन्द झा ने दी।

शिकार करने में खुद शिकार बन गई महाराष्ट्र पुलिस



-देवेंद्र गौतम

महाराष्ट्र पुलिस ने पांच राज्यों में छापेमारी कर पांच जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को हिरासत में तो लिया लेकिन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के समक्ष उनपर लगे आरोपों के साक्ष्य नहीं प्रस्तुत कर सकी। कोर्ट ने उन्हें जेल या पुलिस रिमांड पर देने की जगह अपने घरों में नज़रबंद करने का आदेश दिया। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पांच सितंबर तक पूरे तथ्यों के साथ रिपोर्ट तलब की है। मानवाधिकार आयोग ने भी मानक प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र के डीजीपी से एक माह के अंदर रिपोर्ट तलब की है। इस तरह महाराष्ट्र सरकार राजनीतिक विरोधियों को कटघरे में खड़ा करने के प्रयास में स्वयं कटघरे में खड़ी हो गई है। आखिर आधे-अधूरे अनुसंधान के आधार पर इतनी बड़ी कार्रवाई किस सोच के तहत किसके इशारे पर की गई ? इस जल्दबाजी की तुलना 2016 में की गई नोटबंदी की घोषणा से की जा सकती है। ठीक उसी तर्ज पर बिना किसी होमवर्क के, बिना किसी तैयारी के। माओवादियों की नकेल कसने के चक्कर में प्रशासनिक कार्रवाई को स्वयं सरकारी तंत्र ने ही राजनीतिक कार्रवाई में तब्दील कर दिया।
भीमा कोरेगांव मामले का अनुसंधान आखिर किस तरीके से चल रहा है कि 31 दिसंबर की घटना के आठ महीने बाद भी जांच एजेंसियों के हाथ खाली हैं। संभव है हिरासत में लिए गए लोग माओवाद के समर्थक हों लेकिन सिर्फ समर्थक होने के आधार पर उन्हें कटघरे में नहीं खड़ा किया जा सकता। कानून इसकी इजाजत नहीं देता। लोकतंत्र में सरकार की नीतियों की आलोचना करने का अधिकार मिलता है। इसे राजद्रोह या देशद्रोह के रूप परिभाषित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्वीकार करने करने से इनकार करने के समान है। यह मध्ययुगीन प्रवृति है। न्यायपालिका संदेह और अनुमान को नहीं मानती। वह साक्ष्यों के आधार पर फैसले सुनाती है। भारतीय दंड संहिता के प्रावधान के मुताबिक आरोपी को अपने निर्दोष होने का सबूत पेश करने के पहले आरोप लगाने वाले को दोषी होने का सबूत पेश करना होता है। कोरेगांव मामले में इन पांच लोगों की संलिप्तता थी अथवा नहीं गिरफ्तारी के अभियान में निकलने से पूर्व इसका पुख्ता साक्ष्य पुलिस के पास होना चाहिए था। जाहिर है कि इस अफरातफरी के पीछे कहीं न कहीं ऊपर का आदेश काम कर रहा था। 2019 का चुनाव करीब है और सत्तापक्ष के पास उपलब्धियों के नाम पर हवाई दावों के अलावा कुछ भी नहीं है। कमान में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का ही एकमात्र तीर बचा है जिसका ब्रह्मास्त्र के रूप में उपयोग किया जाना है। यह तभी कारगर हो सकता है जब राजनीतिक विरोध को बेरहमी से कुचल दिया जाए। सत्तापक्ष चाहे जितनी भी खुशफहमी अथवा गलतफहमी में रहे उसके शासनकाल की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और बौखलाहट में की गई कार्रवाइयों के जरिए वह इसकी गति को और तेज़ कर रहा है। उसने अपने राजनीतिक विरोधियों को उंगली उठाने का एक और मौका दे दिया है।
भारत की जनता ने जिन उम्मीदों के साथ मोदी सरकार को सत्ता की चाबी सौंपी थी उसमें वह खरी नहीं उतरी। जनता जो चाहती थी वह काम नहीं किए। अर्थशास्त्र के आधे-अधूरे ज्ञान के जरिए ऐसे-ऐसे प्रयोग किए कि अर्थ व्यवस्था चरमरा उठी। लोग त्राहिमाम कर उठे। बैंकिंग व्यवस्था झटके पर झटका खाने लगी। अब वायदे पूरे करने का समय निकल चुका है तो उटपटांग हरकतों के जरिए हवा बनाने की कोशिश की जा रही है। ग़नीमत है कि अभी न्यायपालिका उसके चाबुक की परिधि से दूर है और उसके मौजूद रहते लोकतंत्र पर तानाशाही लादने की कोशिशें सफल होनी मुश्किल है।

बुधवार, 29 अगस्त 2018

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई लोकतंत्र के लिए घातक : सुबोधकांत सहाय


रांची। पूर्व केन्द्रीय मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि देश के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई पूर्वाग्रह से ग्रसित है। भाजपा सरकार की नीतियों से असहमति जताने वालों को चिन्हित कर उन्हें बिना कोई ठोस सबूत के गिरफ्तार किया जाना मोदी सरकार की मंशा उजागर करता है। पेशे से वकील, लेखक, पत्रकार, कवि और मानवाधिकार कार्यकर्ता लंबे समय से समाज के वंचितों और शोषितों पर होने वाले अत्याचार के विरुद्ध मुखर होकर आवाज उठाते रहे हैं। मानवाधिकारों के हनन और जनविरोधी शासनतंत्र के खिलाफ आंदोलनरत रहे हैं। इनलोगों का देश के जागरूक व लोकतंत्र को पसंद करने वाले नागरिकों के बीच सम्मानजनक स्थान रहा है। ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई किया जाना लोकतंत्र का गला घोंटने के समान है।
 श्री सहाय ने कहा कि भाजपा को इन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के पूर्व अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक सोची समझी साजिश और राजनीतिक षड़यंत्र के तहत फादर स्टेन स्वामी का नाम भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में घसीटा गया है। बिना जांच किए ही आरोप लगाया जा रहा है।फादर स्टेन स्वामी को प्रताड़ित किया जा रहा है। लोकतंत्र के हिमायती रहे लोगों को भाजपा झूठे आरोप लगाकर फंसाने की प्रवृत्ति छोड़े, अन्यथा व्यापक जनांदोलन का सामना करना पड़ेगा।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...